केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति को मंजूरी दी
नयी दिल्ली. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति को मंजूरी दे दी, जिसका मकसद देश में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को प्रोत्साहित करना एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने यह जानकारी दी। मांडविया ने संवाददाताओं को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस नीति को मंजूरी दी गई। उन्होंने बताया कि इस नीति में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र को लेकर छह सूत्री रणनीति तैयार की गई है तथा इसे लागू करने के लिए कार्य योजना भी तैयार की गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत में चिकित्सा उपकरण क्षेत्र एक उभरता हुआ क्षेत्र है जो तेज गति से आगे बढ़ रहा है और वैश्विक चिकित्सा उपकरण बाजार में इसकी हिस्सेदारी 1.5 प्रतिशत होने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपकरण का क्षेत्र अगले पांच वर्षों में मौजूदा 11 अरब डॉलर (करीब 90 हजार करोड़ रूपये) से बढ़कर 50 अरब डॉलर होने की उम्मीद है, ऐसे में यह उम्मीद है कि यह नीति पहुंच, वहनीयता, गुणवत्ता एवं नवोन्मेष के लोक स्वास्थ्य उद्देश्यों को पूरा करेगा। उन्होंने कहा कि देश में 75 प्रतिशत चिकित्सा उपकरणों का आयात किया जाता है। ऐसे में, देश में ही चिकित्सा उपकरण बना कर इस जरूरत को पूरा किया जा सकता है और निर्यात भी किया जा सकता है तथा इसके लिए समग्र प्रयास किये जाने की जरूरत महसूस की गई। मांडविया ने कहा कि इससे देश में चिकित्सा उपकरणों का नियमन समग्र दृष्टिकोण के आधार पर करने में मदद मिलेगी। पिछले वर्ष सरकार ने मसौदा राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण नीति 2022 को विचार विमर्श के लिए जारी किया था। सरकारी बयान के अनुसार, सरकार ने हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश राज्यों में 4 चिकित्सा उपकरण पार्क की स्थापना के लिए चिकित्सा उपकरणों और सहायता के लिए उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के कार्यान्वयन की शुरुआत पहले ही कर दी है। बयान में कहा गया है कि उपकरणों के लिए पीएलआई योजना के तहत, अब तक कुल 26 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिसमें 1206 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है और इसमें से अब तक 714 करोड़ रुपये का निवेश हासिल किया जा चुका है।








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