रक्षा आयात पर निर्भरता सामरिक स्वायत्तता में बाधा बन सकती है: राजनाथ सिंह
पुणे (महाराष्ट्र)। रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने सोमवार को कहा कि देश के सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता जरूरी है। सिंह ने पुणे में उन्नत प्रौद्योगिकी रक्षा संस्थान (डीआईएटी) के 12वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता भारत की सामरिक स्वायत्तता में बाधा बन सकती है। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इस क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा, ‘‘आत्मनिर्भरता के बिना, हम अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप वैश्विक मुद्दों पर स्वतंत्र निर्णय नहीं ले सकते। हम जितना अधिक उपकरण आयात करेंगे, उसका हमारे व्यापार संतुलन पर उतना अधिक प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। हम शुद्ध आयातक के बजाय शुद्ध निर्यातक बनने का लक्ष्य रखते हैं। इससे न केवल हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।'' सिंह ने कहा कि आत्मनिर्भरता का मतलब दुनिया से अलगाव नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘आज, दुनिया एक वैश्विक गांव बन गई है और अलग रहना संभव नहीं है। आत्मनिर्भरता का उद्देश्य अपने मित्र देशों की सुरक्षा आवश्यकताओं को पूरा करते हुए अपनी क्षमता से आवश्यक उपकरण/प्लेटफॉर्म बनाकर सशस्त्र बलों की जरूरतों को पूरा करना है।'' उन्होंने आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए रक्षा मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों की बात की, जिसमें सशस्त्र बलों के लिए चार सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियों की घोषणा शामिल है। इसमें 411 प्रणालियां/उपकरण शामिल हैं। सिंह ने कहा कि सरकार द्वारा नवाचार के क्षेत्र में विशेष जोर दिया जा रहा है, भारत स्टार्ट-अप के लिए दूसरा सबसे बड़ा केंद्र बन गया है। उन्होंने कहा कि रक्षा मंत्रालय को लगातार नवोन्मेषी विचार मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘डिफेंस इंडिया स्टार्ट-अप चैलेंज के पिछले सात संस्करणों में 6,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जो इंगित करता है कि भारतीय स्टार्ट-अप रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की तलाश में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। अधिक पेटेंट दायर किए जा रहे हैं, जो अभिनव कौशल का संकेत है।''

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