लोकसभा ने फार्मेसी संशोधन विधेयक, 2023 को मंजूरी दी
नयी दिल्ली. लोकसभा ने सोमवार को ‘फार्मेसी संशोधन विधेयक, 2023' को मंजूरी दे दी जिसमें जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में फार्मेसी अधिनियम, 1948 में संशोधन का प्रस्ताव है। लोकसभा में विधेयक को चर्चा एवं पारित करने के लिए रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाये जाने के बाद जम्मू कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 को लागू किया गया और इसके परिणामस्वरूप पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य में लागू अनेक कानून निरस्त हो गये। इनमें जम्मू कश्मीर फार्मेसी कानून, संवत 2011 (1955) भी शामिल है जो राज्य में फार्मेसी व्यवसाय का विनियमन कर रहा था। उन्होंने कहा कि इसके बाद जम्मू कश्मीर फार्मेसी परिषद का पुनर्गठन किया गया और केंद्रशासित प्रदेश में फार्मेसी अधिनियम, 1948 अपनाया गया। मंत्री ने कहा कि इसी क्रम में जम्मू कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश के संबंध में 1948 के फार्मेसी कानून में संशोधन की आवश्यकता हुई। विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए मांडविया ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार जम्मू कश्मीर में किसानों, मजदूरों और युवाओं को रोजगार देने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विकास की गति बढ़ी है।
मांडविया ने कहा, पहले जम्मू कश्मीर के युवा हाथ में पत्थर लेते थे, अब उनके हाथ में रोजगार है, टैबलेट हैं, कंप्यूटर हैं। वहां युवाओं को पर्यटन के क्षेत्र में रोजगार मिल रहे हैं।'' उन्होंने इस दौरान कुछ विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि निजी राजनीति के लिए ‘‘कई परिवारों ने जम्मू कश्मीर को विकास की गति से जुड़ने नहीं दिया। लेकिन अनुच्छेद 370 हटते ही जम्मू कश्मीर का औद्योगिक विकास होने लगा है। आज विदेशी कंपनियां वहां निवेश को आ रही हैं।'' मांडविया ने कहा कि जम्मू कश्मीर के पुलवामा में आयुष्मान योजना के तहत पहली बार हृदय की सर्जरी की गयी। मंत्री के जवाब के बाद निचले सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी दे दी। विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के ढाल सिंह बिसेन ने कहा कि यह विधेयक जम्मू कश्मीर के फार्मेसी समुदाय के हित में है। वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के संजीव कुमार ने भी चर्चा में भाग लिया।



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