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सरकारी हेल्पलाइन पर बुजुर्गों के शीर्ष प्रश्नों में पेंशन संबंधी चिंताएं, स्वास्थ्य देखभाल शामिल

नयी दिल्ली. इस साल सरकारी हेल्पलाइन ‘एल्डरलाइन' पर वरिष्ठ नागरिकों द्वारा उठाए गए शीर्ष प्रश्नों में पेंशन से संबंधित चिंताएं, सामाजिक कल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी और देखभाल केंद्र तथा चिकित्सकों को खोजने में सहायता शामिल थी। आधिकारिक आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। आंकड़ों के मुताबिक, हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 14567 पर 87,218 कॉल आईं। ‘एल्डरलाइन' गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) भागीदारों के सहयोग से देश भर में परेशानियों का सामना कर रहे वरिष्ठ नागरिकों की सहायता के लिए सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक पहल है। आंकड़ों के अनुसार, हेल्पलाइन वर्तमान में 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संचालित की जा रही है। हेल्पलाइन पर पेंशन संबंधी समस्याओं से जुड़ी सूचना और सामाजिक कल्याण योजनाओं, देखभाल केंद्रों, अस्पतालों और चिकित्सकों के बारे में जानकारी समेत कई मुद्दों के बारे में जानकारी ली। ‘हेल्पएज इंडिया', उन गैर-सरकारी संगठनों में से एक है, जिसने मंत्रालय को आठ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों दिल्ली, मध्य प्रदेश, पुडुचेरी, पंजाब, आंध्र प्रदेश, गुजरात जम्मू कश्मीर और लद्दाख में जनवरी 2023 से सितंबर 2023 तक हेल्पलाइन संचालित करने में मदद की। उसे हेल्पलाइन पर कुल 13,086 कॉल प्राप्त हुईं, जो राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर प्राप्त कुल कॉल का लगभग 25 प्रतिशत है। आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 21 प्रतिशत कॉल में वरिष्ठ नागरिकों ने वृद्धाश्रम, देखभाल केंद्रों, अस्पतालों, चिकित्सकों और देखभाल सुविधा देने वालों के बारे में जानकारी मांगी। वहीं, 33 प्रतिशत कॉल में कानूनी मुद्दों, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और भरण-पोषण अधिनियम के संबंध में मार्गदर्शन मांगा गया। ‘हेल्पएज इंडिया' के मिशन प्रमुख-एजकेयर डॉ. इम्तियाज अहमद ने कहा कि अन्य के तहत वर्गीकृत 41 प्रतिशत से अधिक कॉल में सहायक उपकरणों, दवा और छोटे घरेलू कामों के लिए सहायता मांगी गई और पड़ोसियों के साथ विवादों के समाधान के लिए कहा गया। उन्होंने कहा कि लगभग चार प्रतिशत कॉल बुजुर्गों के साथ दुर्व्यवहार से जुड़े मुद्दों से संबंधित थीं। उन्होंने कहा कि 73 प्रतिशत कॉल करने वाले पुरुष थे, जबकि 27 प्रतिशत महिलाएं थीं। अहमद ने कहा, ‘‘यदि हम उन सेवाओं को और विभाजित करें जिनके लिए इस वर्ष की शुरुआत से कॉल प्राप्त हुई हैं, तो 23 प्रतिशत पेंशन के बारे में थीं, 14 प्रतिशत ने वृद्धाश्रम और चिकित्सकों के बारे में पूछताछ की, तथा 41 प्रतिशत में स्वैच्छिक सेवाओं के बारे में जानकारी मांगी गई, जैसे- क्या कोई उन्हें घर के छोटे-मोटे काम, बाजार से दवाइयां और अन्य सामान खरीदने में मदद कर सकता है।'' अहमद ने कहा कि इससे पता चलता है कि अधिकांश वरिष्ठ नागरिक, या एक बड़ा हिस्सा, एकाकी जीवन जी रहे हैं और उनके पास अपने बच्चों या रिश्तेदारों का कोई सहयोग नहीं है, जो उन्हें छोटे मोटे कार्यों में मदद कर सकें। अहमद ने कहा कि बुजुर्गों के लिए घर-आसपड़ोस से मिलने वाला सामाजिक सहयोग खत्म हो गया है और उन्हें हेल्पलाइन से मदद लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने कहा, ‘‘हैरानी की बात है कि जनवरी 2022 से दिसंबर 2022 तक, हमें पेंशन मुद्दों से संबंधित 42.5 प्रतिशत कॉल प्राप्त हुईं।'' एनजीओ ने कहा, ‘‘अधिकांश कॉल दिल्ली से थीं, जिनमें वरिष्ठ नागरिकों ने भुगतान न होने, पेंशन प्रदान करने वाले अधिकारियों तक पहुंचने में असमर्थता या प्रक्रियात्मक देरी के कारण कई महीने की पेंशन लंबित होने के बारे में शिकायत की थी। इस साल पेंशन से जुड़ी कॉल में भारी कमी आई है और यह 23 प्रतिशत रह गई है।'' बुजुर्गों के लिए 1999 से संचालित एनजीओ ‘एजवेल' की हेल्पलाइन ने भी स्वास्थ्य देखभाल को बुजुर्गों की शीर्ष चिंताओं में से एक के रूप में प्रस्तुत किया। एजवेल फाउंडेशन के संस्थापक एवं अध्यक्ष हिमांशु रथ ने कहा कि एजवेल हेल्पलाइन नंबर अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग है तथा करीब 71 प्रतिशत वरिष्ठ नागरिक गठिया, कमजोर दृष्टि, मधुमेह और हड्डी फ्रैक्चर जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से पीड़ित होने के मुद्दे उठाते हैं। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में बुजुर्गों की आबादी अभूतपूर्व दर से बढ़ रही है और सदी के मध्य तक यह बच्चों की आबादी को पार कर सकती है। यूएनएफपीए की ‘इंडिया एजिंग रिपोर्ट 2023' के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर बुजुर्गों (60 साल से ज्यादा उम्र) की आबादी का हिस्सा 2021 में 10.1 प्रतिशत से बढ़कर 2036 में 15 प्रतिशत और 2050 में 20.8 प्रतिशत होने का अनुमान है।

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