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मैसुरु में भव्य शाही दशहरा उत्सव की शुरुआत हुई

मैसूरु.  प्रसिद्ध संगीतकार हम्सलेखा ने रविवार को ऐतिहासिक मैसूरु दशहरा उत्सव का उद्धघाटन किया। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया, उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार व मंत्रिमंडल के अन्य सहयोगियों के अलावा, सांसद प्रताप सिम्हा और अन्य विधायक उद्धघाटन समारोह के दौरान मौजूद रहे। इस मौके पर सिद्धरमैया ने कहा कि कर्नाटक सरकार इस साल राज्य में सूखे की वजह से सरल तरीके से लेकिन परंपरा को ध्यान में रखते हुए दशहरा उत्सव का आयोजन कर रही है। उन्होंने कहा,‘‘हमने देवी चामुंडेश्वरी से प्रार्थना की है कि कम से कम मानसून के दौरान यहां अच्छी बारिश हो।'' मैसुरु दशहरा के महत्व का उल्लेख करते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि दुनिया भर के लोग यहां इस उत्सव को देखने आते हैं। मैसुरु दशहरा को 'नाडा हब्बा' (राज्य उत्सव) के रूप में मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि इस उत्सव के माध्यम से कर्नाटक अपने लोगों को परंपरा, संस्कृति, भाषा और राज्य द्वारा हासिल किए गए विकास से अवगत कराता है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा राज्य कला, संस्कृति और संगीत में समृद्ध है। कर्नाटक के लोग सभ्य हैं। कर्नाटक में रहने वाले हर एक व्यक्ति के लिए यह जरूरी है फिर चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का ही क्यों न हो, प्रेम और सम्मान के साथ रहे। हमें स्वीकार करना होगा कि यह देश और राज्य दोनों के लिए बहुत जरूरी है।'' संविधान की प्रस्तावना का संकेत देते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि कानून की नजर में हर कोई बराबर है और सभी को समान अवसर मिलने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘प्रस्तावना के उद्देश्यों को हासिल करना हर सरकार की जिम्मेदारी है। संसाधनों और अधिकारों को लोगों के बीच समान रूप से वितरण किया जाना चाहिए। इसे ही हम सामाजिक न्याय कहते हैं।'' दस दिवसीय उत्सव के भव्य उद्धघाटन से पहले अन्य मंत्रियों के साथ सिद्धरमैया ने यहां देवी चामुंडेश्वरी की विशेष पूजा की। दशहरा उत्सव देवी चामुंडेश्वरी को समर्पित है, जिन्हें मैसूरु शहर और मैसूरु वाडियार शाही परिवार की प्रमुख देवी माना जाता है। इस उत्सव को देवी चामुंडेश्वरी की असुर महिषासुर पर जीत के जश्न के रूप में मनाया जाता है।
मान्यता है कि महिषासुर को पराजित करने के बाद देवी ने एक पहाड़ी को अपना निवास बनाया, जिसे चामुंडी पहाड़ी के नाम से जाना जाता है। उत्सव के दौरान अगले 10 दिनों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे ।
शहर के लोगों को कुश्ती प्रतियोगिता भी देखने को मिलेगी, जिसमें देश भर से पहलवान हिस्सा लेंगे। लोग यहां विजयदशमी वाले दिन मैसूरु दशहरे के भव्य समापन का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जब ‘जंबो सवारी' निकाली जाती है। ‘जंबो सवारी' सुसज्जित हाथियों की एक शोभा यात्रा है जिसमें देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा आगे चल रहे हाथी पर स्थापित की जाती है।

-file photo

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