एम्स में लागू किया जाएगा इंटीग्रेशन ऑफ नर्सिंग एजुकेशन एंड सर्विस मॉडल
नयी दिल्ली. दिल्ली में स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में 'इंटीग्रेशन ऑफ नर्सिंग एजुकेशन एंड सर्विस' मॉडल लागू किए जाएगा। देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थान के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। भारतीय नर्सिंग परिषद ने चार अप्रैल 2019 की तिथि वाले अपने पत्र के माध्यम से 'इंटीग्रेशन ऑफ नर्सिंग एजुकेशन एंड सर्विस' को लागू किए जाने को मंजूरी प्रदान की थी। इस मॉडल का मकसद मरीजों को मुहैया कराई जाने वाली नर्सिंग की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के साथ-साथ नर्सिंग के विद्यार्थियों के नैदानिक कौशल को भी बेहतर बनाना है। अधिकारी ने बताया कि इस पहल के माध्यम से नर्सिंग के विद्यार्थियों का अकादमिक व नैदानिक दोनों रूपों में बेहतर तरीके से उपयोग होने की संभावना है। कॉलेज ऑफ नर्सिंग, सीएमसी वेल्लोर और बेंगलुरु के सेंट जॉन्स कॉलेज ऑफ नर्सिंग सहित कई संस्थान इस तरह के मॉडल को सफलतापूर्वक लागू कर चुके हैं। इस मॉडल में सिद्धांत और व्यवहार के बीच अंतर को पाटने, नर्सिंग के मानकों को ऊपर उठाने और नर्सिंग कर्मियों को स्वास्थ्य क्षेत्र के भीतर विभिन्न भूमिकाओं में प्रभावी रूप से उपयोग में लाने की क्षमता है। संस्थान के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, ''कई कॉलेजों में सफलतापूर्वक लागू किए जाने के मद्देनजर एम्स-दिल्ली ने भी 'इंटीग्रेशन ऑफ नर्सिंग एजुकेशन एंड सर्विस' को लागू करने की संभावना को सक्रिय रूप से तलाशने का निर्णय लिया है। इसे लागू करने की व्यवहार्यता और तौर-तरीकों का आकलन करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने प्रमुख हितधारकों वाली एक समर्पित समिति का गठन किया है।










Leave A Comment