कमजोर जनजातीय समूहों पर लक्षित प्रयासों का लाभ मिल रहा है : निर्वाचन आयोग
नयी दिल्ली. भारत निर्वाचन आयोग ने बुधवार को कहा कि चुनावी प्रक्रिया में अति कमजोर जनजातीय समूहों (पीवीटीजी) को शामिल करने के पिछले दो वर्षों के उसके प्रयासों के परिणाम दिखने शुरू हो गए हैं। आयोग ने कहा कि इन समुदायों के सदस्यों ने मौजूदा लोकसभा चुनाव के पहले दो चरणों में मतदान में उत्साहपूर्वक भाग लिया। उसने बताया कि ग्रेट निकोबार की शोम्पेन जनजाति ने पहली बार संसदीय चुनाव में मतदान किया। भारत में 8.6 प्रतिशत जनजातीय आबादी है, जिसमें वो 75 समूह शामिल हैं जो पीवीटीजी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। पिछले 11 राज्य विधानसभा चुनावों में, 14 पीवीटीजी से लगभग नौ लाख पात्र मतदाता थे। निर्वाचन आयोग ने कहा, “आयोग के विशेष प्रयासों ने उन राज्यों में पीवीटीजी का 100 प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित किया।” निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) का पद संभालने के बाद से पिछले दो वर्षों में राजीव कुमार चुनावी प्रक्रिया में पीवीटीजी की अधिक भागीदारी पर जोर दे रहे हैं। अधिकारी ने बताया कि कुमार ने व्यक्तिगत रूप से राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों और संबंधित जिला निर्वाचन अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि पीवीटीजी को मतदाता सूची में शामिल करने के शुरुआती कदम के रूप में उन्हें पंजीकृत करने के लिए विशेष अभियान और पंजीकरण अभियान शुरू किए जाएं। मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए एक विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण के दौरान पीवीटीजी आबादी वाले विशिष्ट राज्यों में विशेष संपर्क शिविर आयोजित किए गए थे।








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