केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के सामने इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी क्षेत्र में रफ्तार कायम रखने की चुनौती
नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को नई सरकार में भी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री बनाया गया है। पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सेमीकंडक्टर विनिर्माण की दिशा में प्रयास करने के अलावा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून बनाने में अहम भूमिका निभाई। वैष्णव के पास रेल मंत्रालय का जिम्मा भी है। इसके अलावा उन्हें इस बार सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी मिला है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के पूर्व छात्र और भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के पूर्व अधिकारी वैष्णव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूसरे कार्यकाल में भी कई अहम मंत्रालयों का दायित्व संभाला था। मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में भी वैष्णव को अपनी पुरानी रफ्तार कायम रखना होगी। यह भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में 'आत्मनिर्भर' बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। वैष्णव के कार्यकाल में देश ने 4.1 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन का उत्पादन किया जो 2014-15 की तुलना में 21 गुना अधिक है। हालांकि, वैष्णव को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम को लागू करने के लिए सक्षम नियमों पर काम करना होगा। उन्हें प्रस्तावित डिजिटल इंडिया अधिनियम को भी आकार देना होगा जो दो दशक पुराने आईटी अधिनियम का स्थान लेगा। वैष्णव ने वैश्विक सेमीकंडक्टर फर्म माइक्रोन का चिप असेंबली संयंत्र लगवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बाद स्वदेशी समूह टाटा से गुजरात में चिप निर्माण संयंत्र और असम में एक असेंबली इकाई स्थापित करने के लिए दो निवेश प्राप्त हुए हैं।

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