प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की मांग है: राष्ट्रपति मुर्मू
भुवनेश्वर,। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि प्रकृति के साथ सामंजस्य स्थापित करना समय की मांग है। भुवनेश्वर के निकट हरिदमदा गांव में ब्रह्मकुमारी के दिव्य ध्यान केंद्र का उद्घाटन करते हुए मुर्मू ने कहा कि जंगल, पहाड़, नदियां, झीलें, समुद्र, बारिश, हवा - ये सभी जीवों के जीवित रहने के लिए अनिवार्य हैं लेकिन मनुष्य अपने भोग-विलास के लिए प्रकृति का दोहन कर रहा है और ऐसा करके प्रकृति के प्रकोप का शिकार हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘मनुष्य को यह याद रखना चाहिए कि प्रकृति में प्रचुरता उसकी जरूरतों के लिए है, उसके लालच के लिए नहीं।'' भारतीय जीवनशैली के हमेशा प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व पर जोर दिये जाने का उल्लेख करते हुए मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारे दर्शन में धरती को माता और आकाश को पिता कहा गया है। नदी को भी माता की उपाधि दी गई है। जल को जीवन कहा गया है और हम वर्षा को भगवान इंद्र और समुद्र को भगवान वरुण के रूप में पूजते हैं।'' उन्होंने कहा कि इसका मतलब यह है कि प्रकृति जड़ नहीं है, उसके भीतर भी चेतना की शक्ति है।

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