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सरकार ने दो फसल बीमा योजनाओं को 2025-26 तक बढ़ाया

प्रौद्योगिकी पर 824.77 करोड़ रुपये का कोष बनाया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति की बैठक
नयी दिल्ली.
केंद्र ने बुधवार को दो फसल बीमा योजनाओं - पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस - को वर्ष 2025-26 तक एक और साल के लिए बढ़ा दिया है। इसके साथ ही प्रमुख योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के लिए 824.77 करोड़ रुपये का एक अलग कोष भी बनाया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (आरडब्ल्यूबीसीआईएस) को 15वें वित्त आयोग की अवधि के अनुरूप विस्तारित करने के लिए बढ़ा दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) की बैठक में इस संबंध में निर्णय लिया गया। सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘योजनाओं को किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और इसलिए पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस के लिए आवंटन बढ़ाया गया है।'' पंजाब में चल रहे किसान आंदोलन और सरकार उन्हें क्यों नहीं समझा पा रही है, इस बारे में पूछे जाने पर वैष्णव ने कहा, ‘‘अगर आप हरियाणा चुनाव के दौरान घूमे होते, तो किसानों ने ‘आंदोलन' बनाम वास्तविक कल्याण बनाम 'किसानों के लिए अच्छा' पर बहुत बढ़िया प्रतिक्रिया दी थी, आप खुद देख सकते थे।'' पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआई के लिए कुल परिव्यय वित्त वर्ष 2021-22 से 2025-26 के लिए 69,515.71 करोड़ रुपये तक बढ़ा दिया गया है, जो 2020-21 से 2024-25 के लिए 66,550 करोड़ रुपये से अधिक है। फसल बीमा योजनाओं के कार्यान्वयन में प्रौद्योगिकी के लक्षित समावेश पर मंत्री ने कहा कि मंत्रिमंडल ने नवोन्मेषण और प्रौद्योगिकी (एफआईएटी) के लिए 824.77 करोड़ रुपये का एक अलग कोष बनाने को भी मंजूरी दी है। वैष्णव ने कहा कि यह फसल क्षति के तेजी से आकलन, दावा निपटान और कम विवादों के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग में मदद करेगा। यह आसान नामांकन और अधिक कवरेज के लिए डिजिटल तकनीकों का उपयोग करने में भी मदद करेगा। कृषि मंत्रालय ने बयान में कहा कि इस कोष का उपयोग योजना के तहत तकनीकी पहल जैसे कि यस-टेक, विंड्स आदि के साथ-साथ अनुसंधान और विकास अध्ययनों के वित्तपोषण के लिए किया जाएगा। तकनीक का उपयोग कर उपज अनुमान प्रणाली (यस-टेक) उपज अनुमान के लिए रिमोट सेंसिंग तकनीक का उपयोग करती है, जिसमें तकनीक-आधारित उपज अनुमानों को न्यूनतम 30 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। आंध्र प्रदेश, असम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सहित नौ प्रमुख राज्य वर्तमान में इसे लागू कर रहे हैं। अन्य राज्यों को भी तेजी से इसमें शामिल किया जा रहा है। यस-टेक के व्यापक कार्यान्वयन के साथ, फसल कटाई प्रयोग और संबंधित मुद्दे धीरे-धीरे समाप्त हो जाएंगे। यस-टेक के तहत, वित्त वर्ष 2023-24 के लिए दावा गणना और निपटान किया गया है। मध्य प्रदेश ने 100 प्रतिशत तकनीक-आधारित उपज अनुमान को अपनाया है। मौसम सूचना और नेटवर्क डेटा सिस्टम (विंड्स) में ब्लॉक स्तर पर स्वचालित मौसम स्टेशन (एडब्ल्यूएस) और पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा गेज (एआरजी) स्थापित करने की परिकल्पना की गई है। विंड्स के तहत, हाइपर-लोकल मौसम डेटा विकसित करने के लिए वर्तमान नेटवर्क घनत्व में पांच गुना वृद्धि की परिकल्पना की गई है। इस पहल के तहत, केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा केवल डेटा किराया लागत का भुगतान किया जाता है। नौ प्रमुख राज्य विंड्स को लागू करने की प्रक्रिया में हैं, जिनमें केरल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और पुडुचेरी शामिल हैं। अन्य राज्यों ने भी इसे लागू करने की इच्छा व्यक्त की है। निविदा से पहले आवश्यक विभिन्न पृष्ठभूमि तैयारी और नियोजन कार्यों के कारण 2023-24 के दौरान राज्यों द्वारा विंड्स को लागू नहीं किया जा सका। इसके बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 90:10 के अनुपात में उच्च केंद्रीय निधि साझा करने वाली राज्य सरकारों को लाभ देने के लिए 2023-24 की तुलना में 2024-25 को विंड्स के कार्यान्वयन के पहले वर्ष के रूप में अनुमोदित किया है। मंत्रालय के अनुसार, पूर्वोत्तर राज्यों के सभी किसानों को प्राथमिकता के आधार संतुष्ट करने के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं और आगे भी किए जाते रहेंगे। इस सीमा तक, केंद्र पूर्वोत्तर राज्यों के साथ प्रीमियम सब्सिडी का 90 प्रतिशत साझा करता है। जारी की गई पॉलिसियों के संदर्भ में, पीएमएफबीवाई, देश की सबसे बड़ी बीमा योजना है और कुल प्रीमियम के मामले में तीसरी सबसे बड़ी है। लगभग 23 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश इसे लागू कर रहे हैं। पीएमएफबीवाई और आरडब्ल्यूबीसीआईएस विभिन्न अप्रत्याशित घटनाओं के कारण फसल के नुकसान या क्षति से प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता प्रदान करते हैं। पीएमएफबीवाई, उपज जोखिम के आधार पर फसल के नुकसान को कवर करता है, जबकि आरडब्ल्यूबीसीआईएस मौसम संबंधी जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करता है।

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