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विदेश में पढ़ाई, इलाज के लिए पैसे भेजना सस्ता; टीसीएस घटाकर दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव

 नयी दिल्ली.  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए विदेश से भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) के साथ-साथ विदेशी यात्रा पैकेज की बिक्री पर 'स्रोत पर कर संग्रह' (टीसीएस) की दर को घटाकर दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा। लोकसभा में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए मंत्री ने यह भी प्रस्तावित किया कि विशिष्ट वस्तुओं - शराब, कबाड़ (स्क्रैप) और खनिजों के विक्रेताओं के लिए टीसीएस दर को युक्तिसंगत बनाकर दो प्रतिशत किया जाएगा और तेंदू पत्तों पर इसे पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत किया जाएगा। सीतारमण ने कहा, ''मैं उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) के तहत शिक्षा और चिकित्सा उद्देश्यों के लिए टीसीएस दर को पांच प्रतिशत से घटाकर दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव करती हूं।'' प्रस्ताव के अनुसार, शिक्षा या चिकित्सा उपचार के लिए 10 लाख रुपये से अधिक की राशि भेजने पर अब मौजूदा पांच प्रतिशत के बजाय दो प्रतिशत टीसीएस लगेगा। एलआरएस के तहत, नाबालिगों सहित सभी निवासी व्यक्तियों को प्रति वित्त वर्ष 2,50,000 अमेरिकी डॉलर तक विदेश भेजने की अनुमति है। हालांकि, शिक्षा या चिकित्सा के अलावा अन्य उद्देश्यों के लिए टीसीएस की दर 20 प्रतिशत बनी रहेगी। वित्त मंत्री ने विदेशी यात्रा पैकेज की बिक्री पर भी टीसीएस दर को मौजूदा पांच और 20 प्रतिशत से घटाकर बिना किसी सीमा के सीधे दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया। वर्तमान में 10 लाख रुपये तक के विदेशी यात्रा पैकेज पर पांच प्रतिशत और उससे अधिक पर 20 प्रतिशत टीसीएस लगता है। इसके अलावा, खनिज (कोयला, लिग्नाइट या लौह अयस्क), शराब और कबाड़ की बिक्री पर वर्तमान में टीसीएस की दर एक प्रतिशत है, जिसे अब दो प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।

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