भारत-ब्रिटेन की शिक्षा, संस्कृति क्षेत्रों में साझा महत्वाकांक्षाएं:ब्रिटिश काउंसिल की भारत प्रमुख
नयी दिल्ली,। भारत और ब्रिटेन की शिक्षा, संस्कृति और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में ''साझा महत्वाकांक्षाएं और लक्ष्य'' हैं, और दोनों देश समावेशी विकास और युवाओं के लिए अवसरों की दिशा में एक साथ आगे बढ़ सकते हैं। यह राय नयी दिल्ली स्थित ब्रिटिश काउंसिल की प्रमुख एलिसन बैरेट ने व्यक्त की है। ब्रिटिश काउंसिल की भारत में प्रमुख बैरेट ने यहां आयोजित किये जा रहे 'एआई इम्पैक्ट समिट-2026' से पहले एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि पिछले तीन वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी में वास्तव में 'बहुत मजबूती' आई है। उन्होंने विस्तार से बताए बिना कहा, ''हम ब्रिटेन के सांस्कृतिक संबंध संगठन हैं, और आगामी एआई शिखर सम्मेलन में एक पैवेलियन स्थापित करने की योजना बनाई गई है। हम इसके शैक्षिक और सांस्कृतिक घटकों का संचालन करेंगे।'' प्रौद्योगिकी, एआई और रचनात्मक अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में काम करने वाले विभिन्न संगठनों के प्रमुख और कई वैश्विक नेता 16 से 20 फरवरी तक होने वाले 'इंडिया एआई इम्पैक्ट-2026' में हिस्सा लेंगे। बैरेट ने हाल में कहा था कि इस वर्ष ब्रिटेन के आठ विश्वविद्यालय भारत में अपने परिसर खोलेंगे।
उन्होंने कहा, ''साउथम्पटन विश्वविद्यालय ने गुरुग्राम में पहले ही अपना परिसर खोल दिया है (जुलाई 2025 में), और यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के दिशानिर्देशों के तहत परिसर खोलने की मंजूरी प्राप्त करने वाला पहला विश्वविद्यालय है। ब्रिटेन के अन्य आठ विश्वविद्यालयों को भी मंजूरी पत्र प्राप्त हो चुका है।'' बैरेट ने बताया, ''गुजरात के 'गिफ्ट सिटी' में ब्रिटेन के तीन विश्वविद्यालय खुल रहे हैं, कर्नाटक के बेंगलुरु में लिवरपूल विश्वविद्यालय और लैंकेस्टर विश्वविद्यालय के परिसर खुल रहे हैं जबकि मुंबई में यॉर्क विश्वविद्यालय, एबरडीन विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय अपने परिसर खोलने जा रहे हैं।'' ब्रिटिश काउंसिल के मुताबिक, एबरडीन विश्वविद्यालय और ब्रिस्टल विश्वविद्यालय 2026 की गर्मियों तक आधिकारिक तौर पर अपने परिसरों को खोल सकते हैं। ब्रिटिश काउंसिल भारत में 1948 से मौजूद है और दिल्ली की मौजूदा इमारत में यह 1992 से है। इस इमारत को प्रसिद्ध भारतीय वास्तुकार चार्ल्स कोरिया ने डिजाइन किया था। इसके अग्रभाग पर प्रतिष्ठित 'बरगद के पेड़' की कलाकृति ब्रिटिश कलाकार हॉवर्ड होडकिन द्वारा बनाई गई थी। बैरेट ने शिक्षा और संस्कृति को दो बेहद 'महत्वपूर्ण क्षेत्र' और द्विपक्षीय संबंधों के महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि इन दोनों क्षेत्रों को ''पिछले तीन वर्षों में कई अलग-अलग तरीकों से वास्तविक बढ़ावा मिला है,'' लेकिन वास्तव में यह बढ़ावा इस तथ्य से और गहरा हुआ है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने अधिक ब्रिटिश संस्थानों को भारत के साथ सहयोग और साझेदारी करने की अनुमति दी है। उन्होंने कहा कि भारत-ब्रिटेन दृष्टिपत्र-2035 ने शिक्षा को 'कहीं अधिक महत्व' देने में सक्षम बनाया है, क्योंकि यह दृष्टिकोण के पांच प्रमुख स्तंभों में से एक है, इसलिए यह विभिन्न प्राथमिकताओं की एक शृंखला निर्धारित करता है ''जो हमें शिक्षा साझेदारी को कहीं अधिक महत्वाकांक्षी बनाने और संबंधों में कहीं अधिक अग्रणी साझेदारी के साथ बढ़ाने'' में सक्षम बनाता है। भारत और ब्रिटेन के प्रधानमंत्रियों ने जुलाई 2025 में लंदन में हुई अपनी बैठक के दौरान 'भारत-ब्रिटेन दृष्टिपत्र 2035' का समर्थन किया था, जिसमें साझेदारी की पूरी क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए साझा प्रतिबद्धता दोहराई गई थी।

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