महाभारत, अर्थशास्त्र, राजतरंगिणी पांडुलिपियों को यूनेस्को स्मृति रजिस्टर में जोड़ा गया
नयी दिल्ली. महाकाव्य महाभारत की पांडुलिपियों, कल्हण द्वारा 12वीं सदी में रचित ऐतिहासिक ग्रंथ 'राजतरंगिणी', और शासन तथा राज्य-संचालन पर आधारित कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' को यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में शामिल किया गया है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। पीआईबी (पत्र सूचना कार्यालय) संस्कृति ने 'एक्स' पर यह घोषणा की और यूनेस्को प्रमाणपत्रों की तस्वीरें साझा कीं। उसने कहा, "भारत के लिए अत्यंत गर्व का क्षण! राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को यूनेस्को के 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' में शामिल किया गया है। यह भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है!" इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) ने बताया कि यह फैसला इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित 'मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर' के 11वें सत्र में लिया गया। एक अधिकारी के अनुसार, तीनों कार्यों के लिए नामांकन दस्तावेज तैयार करने में आईजीएनसीए ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिकारी ने कहा कि इन तीनों ग्रंथों का यूनेस्को के क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल होना भारत की ऐतिहासिक स्मृति, धर्म की शाश्वत अवधारणा और राज्य संचालन की समृद्ध परंपरा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली मान्यता है। इस नवीन उपलब्धि के साथ इस क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल प्रविष्टियों की संख्या छह हो गई है।

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