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- -श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगा रथरायपुर। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने आज अपने नवा रायपुर स्थित निवास कार्यालय से "जोहार श्री जगन्नाथ रथ" को झंडा दिखाकर रवाना किया। विधायक श्री दीपेश साहू भी इस दौरान मौजूद थे। माय एफएम 94.3 और एटी ज्वेलर्स द्वारा तैयार यह रथ प्रदेश के श्रद्धालुओं की मनोकामनाओं और प्रार्थनाओं को जगन्नाथ धाम तक पहुंचाएगी। श्रद्धालु अपनी मनोकामना व प्रार्थना लिखकर इस रथ के कलश में समर्पित कर सकेंगे, जिसे 94.3 माय एफएम की टीम श्री जगन्नाथ धाम तक लेकर जाएगी। यह अभिनव पहल भगवान श्री जगन्नाथ के प्रति श्रद्धालुओं की आस्था और मनोकामनाओं को उनके पावन धाम तक पहुँचाने का सुंदर माध्यम बनेगी।
- रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा शैक्षणिक सत्र 2026-27 हेतु B.Tech- (कृषि अभियांत्रिकी) एवं B.Tech- (खाद्य प्रौद्योगिकी) पाठ्यक्रमों में प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए ऑनलाइन काउंसिलिंग प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है। प्रवेश प्रक्रिया पी.ई.टी.-2026, JEE & Mains - 2026 तथा 12वीं (गणित समूह) की प्रावीण्य सूची के आधार पर विश्वविद्यालय के प्रवेश नियम-2026 के अनुसार संपन्न की जाएगी। ऑनलाइन काउंसिलिंग में भाग लेने के इच्छुक अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन पंजीयन दिनांक 10 जुलाई 2026 से 20 जुलाई 2026 (रात्रि 11ः00 बजे तक) उपलब्ध रहेगा। अभ्यर्थियों को निर्धारित अवधि में ऑनलाइन पंजीयन कर आवश्यक दस्तावेज अपलोड करना अनिवार्य होगा। ऑनलाइन पंजीकृत अभ्यर्थियों की प्रावीण्य सूची 23 जुलाई 2026 को विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर प्रकाशित की जाएगी। इसके उपरांत निर्धारित कार्यक्रमानुसार 24 जुलाई 2026 से 30 जुलाई 2026 तक विभिन्न चरणों में PET & 2026] JEE & Mains 2026 तथा 12वीं (गणित समूह) के आधार पर सीट आवंटन, दस्तावेज सत्यापन एवं प्रवेश की कार्यवाही संपन्न की जाएगी। प्रवेश विज्ञापन, ऑनलाइन काउंसिलिंग समय-सारणी, ऑनलाइन पंजीयन दिशा-निर्देश, ऑनलाइन काउंसिलिंग दिशा-निर्देश, सीटों का विवरण एवं अन्य आवश्यक जानकारी विश्वविद्यालय की वेबसाइटhttps://igkv.ac.inपर उपलब्ध है। अभ्यर्थियों से अनुरोध है कि आवेदन करने से पूर्व सभी दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक अध्ययन करें तथा नवीनतम जानकारी के लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट का नियमित अवलोकन करते रहें।
- -निर्माण कार्यों की गहन मॉनिटरिंग और निरीक्षण के दिए निर्देश, ठेकेदारों से बेहतर समन्वय कर कार्यों में तेजी लाने कहा-सितम्बर-अक्टूबर तक नए कार्यों के कार्यादेश जारी करने के निर्देश, अनुबंध अनुसार प्रगति सुनिश्चित कर समय-सीमा में काम पूरा कराने कहारायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विभागीय मुख्यालय ‘निर्माण भवन’ में प्रदेशभर में निर्माणाधीन और प्रस्तावित कार्यों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को प्रत्येक कार्यों की प्रगति पर बारीक नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने फील्ड पर जाकर निर्माण कार्यों का गहन निरीक्षण और मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों से बेहतर समन्वय और संवाद रख कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल और प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने बैठक में अधिकारियों से कहा कि विभाग के अभियंताओं की दक्षता और क्षमता फील्ड पर दिखनी चाहिए। उन्होंने प्रभावी एवं परिणाममूलक कार्यों के लिए समयानुकूल नई कार्यप्रणाली और कार्य संस्कृति अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं तत्परता से पूर्ण कर आगामी सितम्बर-अक्टूबर तक नए कार्यों के कार्यादेश जारी करने के निर्देश दिए, जिससे कि बरसात के तत्काल बाद पूरी गति से काम शुरू हो सके। उन्होंने कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद सभी प्रक्रियाओं को तेजी से पूर्ण कर समय पर काम प्रारंभ कराने को कहा।श्री साव ने बैठक में कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य का 'ग्रोथ इंजन' है। राज्य में सड़क, पुल-पुलिया और भवन निर्माण के साथ ही सभी तरह की अधोसंरचना विकसित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी विभाग पर है। विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए विभाग को भी अहम भूमिका निभाना है। उन्होंने इसके लिए पूरी सक्रियता और गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को काम का पुराना ढर्रा बदलने को कहा। उन्होंने ठेकेदारों द्वारा किए गए कार्यों के समय पर बिल तैयार करने और उनका हर महीने भुगतान करने के निर्देश दिए।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कहा कि फील्ड पर विभाग के काम और उनके परिणाम दिखने चाहिए। उन्होंने सड़कों और पुल-पुलियों सहित स्कूलों, कॉलेजों, ऑडिटोरियम, कार्यालयों, आवासगृहों एवं अन्य भवनों के निर्माण निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों के साथ अनुबंध में निर्धारित माइलस्टोन्स के अनुसार प्रगति सुनिश्चित कर समय-सीमा में काम पूरा कराने को कहा। उन्होंने सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं को भू-अर्जन के कार्यों में तेजी लाने इससे संबंधित कानूनों व नियमों की व्यापक एवं समग्र जानकारी के लिए राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कार्यपालन अभियंताओं, अनुविभागीय अधिकारियों तथा उप अभियंताओं की कार्यशाला आयोजित करने के निर्देश दिए।श्री साव ने पहुंचविहीन गांवों तक साल भर कनेक्टीविटी बनाए रखने के लिए सड़कों और पुलों के प्रस्ताव व प्राक्कलन प्राथमिकता से तैयार कर शासन को भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को पुराने लंबित कार्यों से जुड़ी समस्याओं का तत्परता से निराकरण कर काम आगे बढ़ाने को कहा। उन्होंने अनुबंध के अनुसार कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों को ब्लैक-लिस्ट करने और उनके अनुबंध टर्मिनेट करने की कार्यवाही के निर्देश दिए।लोक निर्माण विभाग के सचिव श्री मुकेश कुमार बंसल ने बैठक में अधिकारियों को मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री और मंत्रियों द्वारा अनुशंसित कार्यों के साथ ही द्रुतगामी सड़कों व पुलों, पहुंचविहीन गांवों के लिए पक्की सड़कों, जिले की जरूरतों और विधायकों द्वारा अनुशंसित कार्यों की प्राथमिकता तय कर आगामी 31 अगस्त तक नए कार्यों के प्राक्कलन भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने विभिन्न शहरों में निर्माणाधीन ऑडिटोरियम के काम पूरा होने के बाद तत्काल इन्हें संबंधित विभागों या नगरीय निकायों को हैंडओवर करने को कहा। लोक निर्माण विभाग के अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंता, सभी मंडलों के अधीक्षण अभियंता और सभी संभागों के कार्यपालन अभियंता भी बैठक में मौजूद थे।
- -ई-रिक्शा सहायता का अनुदान बढ़ाकर एक लाख कियारायपुर /छत्तीसगढ़ के असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के सामाजिक सुरक्षा दायरे का विस्तार करने और उनके कल्याण के लिए राज्य सरकार ने कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। आज मंत्रालय महानदी भवन में श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल की प्रथम बैठक संपन्न हुई, जिसमें श्रमिकों को आत्मनिर्भर और सुरक्षित बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वरोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लिया गया। इसके तहत ई-रिक्शा सहायता योजना के अंतर्गत वर्तमान में दी जा रही 50 हजार रुपये की अनुदान राशि को बढ़ाकर सीधे एक लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। इससे श्रमिक आसानी से अपना खुद का रोजगार शुरू कर सकेंगे।डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों (गिग वर्कर्स), चरवाहों और मेधावी बच्चों के लिए बनेंगी नई योजनाएं असंगठित क्षेत्र के अलग-अलग वर्गों को सुरक्षा देने के लिए मंडल ने अपने दायरे का विस्तार किया है। डिलीवरी कार्य करने वाले कर्मकारों को अब मंडल के दायरे में शामिल करते हुए उनके लिए विशेष कल्याणकारी योजना तैयार की जाएगी। चरवाहों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक पृथक (अलग) योजना बनाई जाएगी। असंगठित कर्मकारों के प्रतिभावान व मेधावी बच्चों को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहित करने के लिए नई प्रोत्साहन योजना लाई जाएगी। श्रमिकों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा कवर देने के लिए एक व्यापक बीमा योजना तैयार करने पर भी विस्तृत चर्चा की गई। श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि असंगठित बोर्ड में पंजीकृत सभी श्रमिकों का अनिवार्य रूप से ई-केवाईसी और आधार आधारित पंजीयन किया जाए, ताकि योजनाओं का सीधा और वास्तविक लाभ केवल पात्र श्रमिकों को ही मिल सके। उन्होंने पाम्पलेट और चित्रमय बुकलेट के माध्यम से योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार करने तथा हितग्राहियों के आवेदनों का त्वरित निराकरण करने के भी निर्देश दिए।इस महत्वपूर्ण प्रथम बैठक में मंडल के सदस्य एवं विधायक श्री चैतराम अटामी, विधायक श्री सुशांत शुक्ला, श्रम विभाग के सचिव श्री हिमशिखर गुप्ता, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव श्री रजत कुमार, अपर श्रमायुक्त एवं नोडल अधिकारी श्री एस.एल. जांगड़े, श्रम विभाग के उप सचिव श्री विपुल गुप्ता सहित वित्त विभाग एवं भारतीय जीवन बीमा निगम के महाप्रबंधक तथा उप श्रमायुक्त व प्रभारी अधिकारी श्री एस.एस. पैकरा समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- - नक्सल पीडि़त परिवारों के आवास एवं जमीन के लिए 60 लाख रूपए स्वीकृत- आत्मसमर्पित नक्सलियों को 65 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशिराजनांदगांव । जिले में नक्सल पीडि़त परिवारों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए जिला स्तरीय पुनर्वास समिति द्वारा 15 नक्सल पीडि़त परिवारों तथा 13 आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास का लाभ प्रदान किया गया है। छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पीडि़त राहत पुनर्वास नीति-2025 के तहत नक्सल पीडि़त परिवारों के आवास एवं जमीन के लिए 60 लाख रूपए तथा आत्मसमर्पित नक्सलियों के लिए 65 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है। जिले में पुलिस द्वारा लगातार प्रभावी एंटी नक्सल अभियान संचालित किया गया। जिसके परिणामस्वरूप नक्सल मोर्चे पर उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है। वहीं नक्सलियों द्वारा क्षेत्र में दहशत फैलाने, जनाधार मजबूत करने तथा मुखबिर होने के संदेह में ग्रामीणों की हत्या जैसी घटनाओं से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए जिला प्रशासन निरंतर कार्य कर रहा है।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय पुनर्वास समिति तथा पुलिस अधीक्षक सुश्री अंकिता शर्मा, अतिरिक्त कलेक्टर श्री सीएल माकण्डेय एवं विभिन्न विभागों के अधिकारियों की सदस्यता वाली समिति नक्सल पीडि़तों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को शासन की पुनर्वास योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के लिए सक्रिय रूप से कार्य कर रही है। छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण एवं पीडि़त राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुसार जिले के 15 नक्सल पीडि़त परिवारों को आवास एवं जमीन के बदले ग्रामीण क्षेत्र में प्रति परिवार 4-4 लाख रूपए की दर से कुल 60 लाख रूपए की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। इसके साथ ही 13 आत्मसमर्पित नक्सलियों को प्रति व्यक्ति 5-5 हजार रूपए की दर से कुल 65 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई है।जिला प्रशासन द्वारा बताया गया कि इसके पूर्व भी नक्सल पीडि़तों एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को आर्थिक सहायता, केंद्रीय आर्थिक सहायता, शासकीय सेवा में नियुक्ति, मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना के तहत राशन कार्ड, राज्य में संचालित यात्री बसों के किराए में 50 प्रतिशत की छूट का प्रमाण-पत्र सहित विभिन्न शासकीय सुविधाएं उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। नक्सल पुनर्वास नीति के अंतर्गत सहायता राशि स्वीकृत होने पर नक्सल पीडि़तों के प्रतिनिधि धीरेन्द्र साहू ने जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति से नक्सल प्रभावित परिवारों को नई उम्मीद मिली है तथा स्वीकृत 60 लाख रूपए की सहायता राशि उनके जीवन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
- -100 से अधिक विद्यार्थियों को मिला रोजगार, सर्वाधिक वार्षिक वेतन पैकेज 5 लाख रुपये-कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने दी बधाई, गुणवत्ता, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्र में बताया जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धिधमतरी। तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता, नवाचार और संस्थागत उत्कृष्टता के क्षेत्र में धमतरी जिले के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया- क्यूसीआई) द्वारा छत्तीसगढ़ के शासकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों के व्यापक गुणवत्ता मूल्यांकन में भोपाल राव पवार शासकीय पॉलिटेक्निक, धमतरी ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रदेश में तृतीय स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि संस्थान की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, प्रभावी प्रबंधन, आधुनिक अधोसंरचना, कौशल विकास तथा विद्यार्थी-केंद्रित शैक्षणिक वातावरण का प्रमाण है।भारतीय गुणवत्ता परिषद द्वारा किए गए मूल्यांकन में संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, अधोसंरचना, रोजगार एवं नियोजन, उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग, संस्थागत प्रबंधन तथा समग्र गुणवत्ता मानकों सहित विभिन्न पहलुओं का विस्तृत परीक्षण किया गया। इन सभी मानकों पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए संस्थान ने प्रदेश के अग्रणी तकनीकी शिक्षण संस्थानों में अपना स्थान सुनिश्चित किया।कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने इस उपलब्धि पर संस्थान के प्राचार्य, प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि, “भोपाल राव पवार शासकीय पॉलिटेक्निक द्वारा भारतीय गुणवत्ता परिषद के मूल्यांकन में प्रदेश में तृतीय स्थान प्राप्त करना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है। यह सफलता गुणवत्ता आधारित शिक्षा, अनुशासित शैक्षणिक वातावरण, नवाचार तथा सामूहिक प्रयासों का उत्कृष्ट उदाहरण है। जिला प्रशासन तकनीकी शिक्षा को उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप अधिक सक्षम, रोजगारोन्मुख एवं नवाचार आधारित बनाने के लिए निरंतर सहयोग प्रदान करता रहेगा। हमें विश्वास है कि संस्थान भविष्य में प्रदेश ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।”संस्थान के प्राचार्य श्री अमित मिश्रा ने बताया कि वर्ष 2026 के 120 उत्तीर्ण विद्यार्थियों में से सभी 100 से अधिक विद्यार्थियों का विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक एवं व्यावसायिक संस्थानों में रोजगार सुनिश्चित हुआ है, जो संस्थान की गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा और उद्योगों से बेहतर समन्वय का प्रमाण है। चयनित विद्यार्थियों को न्यूनतम 1.80 लाख रुपये, औसतन 3.03 लाख रुपये तथा अधिकतम 5 लाख रुपये वार्षिक वेतन पैकेज प्राप्त हुआ है। शेष विद्यार्थियों का भी चयन हो रहा है ।उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों का चयन मारुति सुजुकी, नुवोको विस्टा, वेलस्पन (गुजरात), श्री बालाजी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स (भिलाई), टाटा ईवी मोटर्स, अपोलो बिल्डिंग प्रोडक्ट्स (रायपुर), फिक्सिंग डॉट (रायपुर), केसर अर्थ सॉल्यूशंस (रायपुर), डाइकिन एसी, आइकॉन सोलर (रायपुर), महेन्द्र कंस्ट्रक्शन (रायपुर) तथा रिको ऑटो इंडस्ट्री (बावल, हरियाणा) सहित अनेक प्रतिष्ठित कंपनियों में हुआ है।संस्थान प्रबंधन ने इस उपलब्धि का श्रेय विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, अधिकारियों, कर्मचारियों, पूर्व विद्यार्थियों तथा सभी हितधारकों के सामूहिक सहयोग, समर्पण और सतत प्रयासों को दिया है। संस्थान द्वारा गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, अनुसंधान एवं नवाचार, उद्योग-संस्थान समन्वय तथा बेहतर रोजगार अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है।उल्लेखनीय है कि भोपाल राव पवार शासकीय पॉलिटेक्निक, धमतरी ने पिछले वर्षों में आधुनिक प्रयोगशालाओं के विकास, डिजिटल शिक्षण संसाधनों के विस्तार, कौशल आधारित प्रशिक्षण, उद्योगों के साथ समन्वय तथा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व एवं रोजगार क्षमता के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। इसी का परिणाम है कि संस्थान गुणवत्ता के विभिन्न मानकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करते हुए नई उपलब्धियां अर्जित कर रहा है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए, बल्कि धमतरी जिले की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के लिए भी एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। इससे जिले के विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाली तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने की प्रेरणा मिलेगी तथा भविष्य में संस्थान उत्कृष्टता के नए आयाम स्थापित करने की दिशा में और अधिक सशक्त रूप से आगे बढ़ेगा।
- -ट्रांसफार्मर बदले जाने से विद्युत आपूर्ति हुई सुचारू, पेयजल संकट से भी मिली राहत-मोहल्लेवासियों ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में संचालित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की त्वरित पहल से जशपुर जिले के पत्थलगांव स्थित प्रेमनगर मोहल्ले में लंबे समय से बनी लो-वोल्टेज की समस्या का समाधान कर दिया गया है। विद्युत विभाग द्वारा कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर को बदलकर नया ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने के बाद क्षेत्र में बिजली आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। जानकारी के अनुसार, प्रेमनगर के रहवासियों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आवेदन प्रस्तुत कर बताया था कि पूरे मोहल्ले में केवल एक ट्रांसफार्मर होने के कारण पिछले कई दिनों से लगातार लो-वोल्टेज की समस्या बनी हुई थी। इसके चलते घरों में लगे विद्युत उपकरण सुचारू रूप से संचालित नहीं हो पा रहे थे। वहीं, कुओं और बोरवेल की मोटरें भी नहीं चलने से पेयजल संकट गहरा गया था और लोगों को दैनिक उपयोग के लिए पानी की व्यवस्था करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देश मिलते ही विद्युत विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर को बदलते हुए नया ट्रांसफार्मर स्थापित किया। इसके बाद क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति सुचारू हो गई और लो-वोल्टेज की समस्या पूरी तरह समाप्त हो गई।समस्या के त्वरित समाधान पर प्रेमनगर के नागरिकों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय तथा मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समय पर हुई कार्रवाई से न केवल बिजली व्यवस्था सामान्य हुई, बल्कि पेयजल संकट से भी राहत मिली है। स्थानीय लोगों ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित समाधान की सराहना करते हुए इसे जनसमस्याओं के प्रभावी निराकरण का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के माध्यम से आमजन की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जा रहा है। बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई से लोगों को समय पर राहत मिल रही है और शासन के प्रति उनका विश्वास निरंतर मजबूत हो रहा है।
- -10 हजार रुपये की वार्षिक की सहायता से बढ़ी आर्थिक सुरक्षारायपुर । राज्य शासन की जनकल्याणकारी भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजनाआर्थिक रूप से कमजोर और भूमिहीन परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक बड़ा माध्यम साबित हो रही है। यह योजना जरूरतमंद परिवारों को सीधी आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत संबल दे रही है। इसी कड़ी में विकासखंड सक्ती के ग्राम जेठा की निवासी श्रीमती रुकमणी पटेल इस योजना का लाभ उठाकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बनाने में सफल रही हैं। श्रीमती रुकमणी पटेल के परिवार के पास कृषि योग्य भूमि नहीं है, जिसके कारण उनकी आजीविका मुख्य रूप से मजदूरी पर ही निर्भर है। सीमित आय होने की वजह से परिवार की दैनिक आवश्यकताओं और घरेलू खर्चों का प्रबंधन करना बेहद कठिन होता था। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में राज्य शासन की यह योजना उनके परिवार के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर सामने आई। योजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है।श्रीमती रुकमणी ने बताया कि इस राशि का उपयोग वे अपने घरेलू खर्चों की पूर्ति और अन्य ज़रूरी कार्यों के लिए कर रही हैं। इससे न केवल उनके परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली है, बल्कि उनका जीवनयापन भी पहले की तुलना में काफी सहज और सुगम हो गया है। नियमित रूप से मिलने वाली इस मदद से भविष्य को लेकर उनका आत्मविश्वास बढ़ा है और दैनिक खर्चों को लेकर होने वाली आर्थिक चिंताएं काफी हद तक दूर हुई हैं।योजना की उपयोगिता के संबंध में श्रीमती रुकमणी पटेल ने कहा कि भूमिहीन और जरूरतमंद परिवारों के लिए यह योजना अत्यंत लाभकारी है, जो संकट के समय सीधे मदद पहुँचाती है। उन्होंने इस कल्याणकारी पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस योजना ने उनके परिवार को एक नई उम्मीद, आत्मविश्वास और आर्थिक सुरक्षा का ठोस आधार प्रदान किया है।
- रायपुर। बढ़ती खेती लागत और घटती मिट्टी की उर्वरता के बीच हरी खाद किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई है। कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र, रायगढ़ के वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि किसान रासायनिक उर्वरकों पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय हरी खाद और हरी पत्तियों की खाद को अपनाएं तो न केवल मिट्टी की सेहत सुधरेगी, बल्कि खेती भी अधिक लाभकारी बनेगी।वैज्ञानिकों के अनुसार ढैंचा, सनई, मूंग, उड़द, लोबिया और ग्वार जैसी दलहनी फसलें 35 से 45 दिन बाद खेत में मिलाने से प्राकृतिक जैविक खाद में बदल जाती हैं। इससे प्रति हेक्टेयर 50 से 60 किलोग्राम तक नाइट्रोजन की पूर्ति होती है। वहीं नीम, करंज, ग्लिरिसिडिया और सहजन की हरी पत्तियां भी मिट्टी में जैविक तत्व और लाभकारी सूक्ष्मजीवों की सक्रियता बढ़ाती हैं। इस प्राकृतिक तकनीक का सबसे बड़ा लाभ यह है कि रासायनिक उर्वरकों की जरूरत घटने से खेती की लागत कम होती है, जबकि फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है। धान की गुणवत्ता में भी सुधार और पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ने के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। वैज्ञानिकों ने किसानों से हरी खाद और ब्राउन मैन्योरिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर मिट्टी की सेहत बचाने, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने और टिकाऊ कृषि की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की है।
- -20 साल बाद गच्छनपल्ली में बना पक्का स्कूल, बच्चों को मिला सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्यरायपुर। छत्तीसगढ के सुकमा जिले का गच्छनपल्ली गांव कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। लंबे समय तक यहां विकास कार्य प्रभावित रहे। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सशक्त नेतृत्व और जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में अब शासन की 'नियद नेल्ला नार' (आपका अच्छा गांव) योजना और जिला प्रशासन के सतत प्रयासों से गांव में बदलाव की नई कहानी लिखी जा रही है।करीब 20 वर्ष पहले नक्सली हिंसा में गांव का स्कूल भवन नष्ट हो गया था। इसके बाद बच्चों की पढ़ाई अस्थायी झोपड़ियों और आंगनबाड़ी भवन में चलती रही। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चे शिक्षा से जुड़े रहे, लेकिन उन्हें सुरक्षित और बेहतर वातावरण नहीं मिल पा रहा था। जिला प्रशासन ने नियद नेल्ला नार योजना के तहत गच्छनपल्ली में नया पक्का स्कूल भवन बनाया। अब गांव के बच्चों को सुरक्षित, स्वच्छ और सम्मानजनक वातावरण में पढ़ने का अवसर मिल रहा है। यह स्कूल भवन केवल एक इमारत नहीं, बल्कि गांव के उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।नए स्कूल भवन का शुभारंभ स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा-अर्चना के साथ किया गया। इस अवसर पर सरपंच, उपसरपंच, पंच, पारंपरिक पुजारी, शिक्षक और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। वर्षों बाद अपने गांव में पक्का स्कूल देखकर ग्रामीणों की खुशी देखते ही बन रही थी।कलेक्टर सुकमा श्री अमित कुमार ने कहा कि शासन का उद्देश्य नक्सल प्रभावित और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं का विस्तार करना है। गच्छनपल्ली में नया स्कूल भवन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे बच्चों की नियमित उपस्थिति बढ़ेगी और शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बनेगा।उम्मीद और विश्वास की नई शुरुआत गच्छनपल्ली की यह कहानी बताती है कि विकास और शिक्षा हर चुनौती पर विजय प्राप्त कर सकती हैं। जहां कभी भय और सन्नाटा था, वहां आज बच्चों की पढ़ाई और मुस्कान की गूंज सुनाई दे रही है। नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से गांव में विकास का नया अध्याय शुरू हुआ है, जो आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य की मजबूत नींव बनेगा।गच्छनपल्ली का नया स्कूल इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की योजनाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं, तो बदलाव केवल दिखाई नहीं देता, बल्कि लोगों के जीवन में महसूस भी होता है। यह स्कूल बच्चों के सपनों, ग्रामीणों के विश्वास और विकास की नई सोच का सशक्त प्रतीक बन गया है।
- -राष्ट्रीय कार्यशाला में मिली बड़ी सराहनारायपुर। जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा जनजातीय अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान (CG TRTI) को उसके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रशंसा प्रमाण-पत्र (Certificate of EÛcellence) से सम्मानित किया गया है।यह सम्मान ओडिशा के भुवनेश्वर में 07 और 08 जुलाई 2026 को देश के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRTs) के सुदृढ़ीकरण के लिए आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन सत्र में प्रदान किया गया। कार्यशाला में देश के 29 राज्यों के जनजातीय अनुसंधान संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था।’केंद्रीय मंत्रियों और विशेषज्ञों की गरिमामयी उपस्थिति’इस दो दिवसीय कार्यशाला में भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय के केंद्रीय मंत्री श्री जुएल उराव, राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके, नीति आयोग के सदस्य श्री बाला सुब्रमणियम, ओडिशा सरकार के आदिमजाति विकास विभाग के मंत्री श्री नित्यानंद गोंड तथा भारत सरकार की जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। सभी अतिथियों ने प्रतिभागी संस्थानों को संबोधित करते हुए कार्यशाला के मुख्य उद्देश्यों पर प्रकाश डाला।भविष्य की रणनीति और आधुनिक तकनीकों पर हुई चर्चाकार्यशाला के दौरान विशेषज्ञों के साथ जनजातीय अनुसंधान संस्थानों की कार्यप्रणाली, जनजातीय विकास के लिए अनुसंधान, आधुनिकीकरण, जी.आई.एस. (GIS), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र (Innovation Ecosystem) जैसे विषयों पर गहन मंथन किया गया। इसके साथ ही नीति एवं योजना उन्मुख अनुसंधान की आवश्यकता, चुनौतियों और आगामी समय की रणनीतियों पर विस्तृत परिचर्चा की गई तथा विभिन्न राज्यों के TRTs द्वारा किए गए कार्यों की समीक्षा भी हुई। छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के मार्गदर्शन और निर्देशन में छत्तीसगढ़ के दल ने इस राष्ट्रीय कार्यशाला में सक्रिय भूमिका निभाई। छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व संस्थान की संचालक हिना अनिमेष नेताम, संयुक्त संचालक श्रीमती गायत्री नेताम, सहायक अनुसंधान अधिकारी डॉ. अनिल विरूलकर एवं श्री योगेन्द्र निषाद ने किया। कार्यशाला के समापन अवसर पर मंच से भारत सरकार की जनजातीय कार्य मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा ने छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान को जनजातीय संस्कृति और विरासत के संरक्षण तथा जनजातीय अनुसंधान एवं विकास के लिए उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली संस्था के रूप में यह प्रशंसा प्रमाण-पत्र सौंपा।गौरतलब है कि प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा के नेतृत्व और निर्देशन में छत्तीसगढ़ आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा राज्य की जनजातियों पर आधारित सामाजिक, सांस्कृतिक, कला कौशल तथा आर्थिक विकास से संबंधित अनुसंधान व प्रशिक्षण कार्यक्रमों के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्द्धन के कार्य निरंतर और प्रभावी रूप से किए जा रहे हैं।
- -राज्य में 20.14 लाख हेक्टेयर में धान, कोदो, कुटकी, रागी,-तिल, मूंगफली सहित विभिन्न फसलों की बोनीकिसानों को 7.78 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरित-अब तक 248.9 मि.मी. औसत वर्षा दर्जरायपुर / प्रदेश में खेती-किसानी का काम तेजी के साथ जारी है। राज्य में अब तक 20.14 लाख से अधिक हेक्टेयर क्षेत्र में धान, मक्का, कोदो, कुटकी, अरहर, मूंग, मूंगफली, रामतिल सहित विभिन्न फसलों की बोनी हो चुकी है, जो लक्ष्य का 41 प्रतिशत है। इस खरीफ सीजन में राज्य सरकार ने 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य रखा है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने किसानों को खेती-किसानी में सहुलियतें प्रदान करने के लिए सभी आवश्यक सहयोग करने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किए हैं। उन्होंने किसानों को उनकी मांग के अनुसार सुगमता के साथ प्रमाणित खाद-बीज का वितरण करने को भी कहा हैं। कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा इन पर निरंतर निगरानी रखी जा रही है। प्रदेश के किसानों को अब तक 7.78 लाख मीट्रिक टन खाद और 3.62 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज का वितरण किया जा चुका है। 09 जुलाई 2026 की स्थिति में प्रदेश में अब तक 248.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज की गई है, जबकि प्रदेश की औसत वार्षिक वर्षा 1246.3 मिमी है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष खरीफ 2026 के लिए प्रदेश में 4.95 लाख क्विंटल प्रमाणित बीज वितरण का लक्ष्य रखा गया है, जिसके विरूद्ध 4.56 लाख क्विंटल बीज का भंडारण कर अब तक 3.62 लाख क्विंटल बीज का वितरण किसानों को किया गया है, जो मांग का 71 प्रतिशत है। इसी प्रकार प्रदेश में इस खरीफ सीजन में 15.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उक्त लक्ष्य के विरूद्ध 13.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में भंडारण किया गया है। उक्त भंडारण के विरूद्ध 7.78 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किसानों को किया जा चुका है, जो लक्ष्य का 57 प्रतिशत है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि खाद-बीज वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पर कड़ी कार्यवाही करने के भी निर्देश दिए गए हैं। साथ ही सोसायटियों में पर्याप्त खाद-बीज का भण्डारण कर सतत निगरानी करने को कहा गया है।
- -पूरे प्रदेश के हृदय रोगियों के लिए वरदान बनेगा जगदलपुर का कैथलैब- स्वास्थ्य मंत्री श्री जायसवालरायपुर । बस्तर की स्वास्थ्य सेवाओं में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया, जब प्रदेश के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल ने डिमरापाल में स्थापित कॉन्टिनेंटल सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में बस्तर संभाग की पहली और छत्तीसगढ़ की दूसरी अत्याधुनिक कैथलैब का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि इस सुविधा के शुरू होने से अब बस्तर सहित पूरे प्रदेश के हृदय रोगियों को समय पर आधुनिक उपचार उपलब्ध होगा और गंभीर मरीजों को इलाज के लिए बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा।बस्तर को मिली अत्याधुनिक कैथलैब की सौगात- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया लोकार्पणबस्तर को मिली अत्याधुनिक कैथलैब की सौगात- स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने किया लोकार्पणलोकार्पण के बाद स्वास्थ्य मंत्री ने कैथलैब सहित अस्पताल के विभिन्न विभागों का निरीक्षण कर उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन द्वारा मरीजों को दी जा रही स्वास्थ्य सेवाओं की सराहना करते हुए कहा कि कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा दे रहा है। उन्होंने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे के सौ दिन के साथ-साथ जगदलपुर सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के भी सौ दिन पूरा होने की बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर की जनता को दिल की गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए श्कैथ लैबश् के रूप में एक बहुत बड़ी सौगात मिली है, जो मेकाहारा के बाद छत्तीसगढ़ का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी कैथ लैब संस्थान है। इसके साथ ही बस्तर की नैसर्गिक सुंदरता के बीच योग और प्राकृतिक चिकित्सा को बढ़ावा देने के लिए पीपीपी मोड पर एक समर्पित योग और नेचरोपैथी हॉस्पिटल भी लाया जा रहा है। चिकित्सा व्यवस्था में आए इस बड़े सुधार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महारानी अस्पताल में पिछले दो वर्षों के भीतर मरीजों के इलाज के आंकड़ों में डेढ़ गुना का रिकॉर्ड इजाफा हुआ है।बस्तर में स्वास्थ्य के क्षेत्र में हुए इस अभूतपूर्व बदलाव का लोहा अब वैश्विक संस्थाएं भी मान रही हैं, यही वजह है कि जल्द ही विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ की विशेष टीमें इस जमीनी बदलाव को देखने बस्तर आ रही हैं। श्मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियानश् की कामयाबी के चलते आज बस्तर क्षेत्र के लगभग 99 प्रतिशत लोगों का डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड और चेकअप तैयार किया जा चुका है, जो स्वास्थ्य विभाग की एक बेहतरीन मिसाल है। इसके अलावा, कॉन्टिनेंटल ग्रुप हॉस्पिटल के साथ मिलकर स्थानीय युवाओं को रोजगार से जोड़ने का काम भी किया गया है, जिसके तहत अस्पताल के प्रबंधन और विभिन्न श्रेणियों में 70 प्रतिशत स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता दी गई है। मंत्री श्री जायसवाल ने बताया कि केंद्र सरकार ने आयुर्वेद आधारित उपचार प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए देश में तीन केंद्र स्थापित करने की योजना बनाई है। इनमें से एक केंद्र बस्तर में स्थापित करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है।इस अवसर पर कॉन्टिनेंटल हॉस्पिटल्स के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. गुरु एन. रेड्डी ने बताया कि कैथलैब (कार्डियक कैथेटराइजेशन लैब) एक अत्याधुनिक चिकित्सा इकाई है, जहां बिना बड़े ऑपरेशन के हृदय एवं रक्त वाहिकाओं से जुड़े रोगों की जांच और उपचार किया जाता है। यहां कोरोनरी एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी (स्टेंट प्रत्यारोपण), पेसमेकर प्रत्यारोपण सहित विभिन्न इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी प्रक्रियाएं आधुनिक तकनीक से की जा सकेंगी।उन्होंने बताया कि इस सुविधा के प्रारंभ होने से अब बस्तर संभाग के साथ-साथ पड़ोसी राज्य के मरीजों को भी स्थानीय स्तर पर सुपर स्पेशलिटी हृदय उपचार उपलब्ध होगा। इससे मरीजों का समय और खर्च दोनों बचेंगे तथा आपातकालीन स्थितियों में जीवनरक्षक उपचार शीघ्र मिल सकेगा। अस्पताल में आयुष्मान भारत योजना के तहत भी मरीजों को उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।इस अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, सांसद श्री महेश कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव, विधायक श्री विनायक गोयल, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती वेदवती कश्यप, महापौर श्री संजय पाण्डेय, कलेक्टर श्री आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा, कॉन्टिनेंटल छत्तीसगढ़ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के सभी चिकित्सक सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी एवं अस्पताल के कर्मचारी उपस्थित रहे।
- रायपुर। बस्तर जिले के विकासखंड लोहण्डीगुड़ा के ग्राम साडरा निवासी 47 वर्षीय किसान श्री खगपति आज क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं। कभी सिर्फ धान पर निर्भर और वर्षा आधारित खेती करने वाले खगपति ने कृषि विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का सहारा लेकर अपनी ढाई हेक्टेयर जमीन की तस्वीर ही बदल दी।खगपति के पास पहले सिंचाई का कोई साधन नहीं था। वे केवल देशी तरीके से धान की खेती करता था स कम उत्पादन और ज्यादा लागत के कारण सालभर की आमदनी मुश्किल से 80 हजार 250 रुपये तक ही पहुंच पाती थी। खगपति के जीवन में बदलाव की शुरुआत कृषि विभाग की मदद से हुई। उनके खेत में नलकूप खन और सोलर पंप लगाया गया, जिससे सिंचाई की समस्या दूर हुई। इसके साथ ही वे एक्सटेन्सन रिफॉर्म्स आत्मा योजना के तहत होने वाले प्रशिक्षण, भ्रमण और संगोष्ठियों से जुड़े। यहां उन्होंने फसल विविधीकरण, बेहतर प्रबंधन और आधुनिक कृषि के गुर सीखे।पिछले 3 साल से उन्नत तरीके से खेती कर रहे खगपति की मेहनत रंग लाई। अब उनकी सालाना आय 1.5 लाख रुपये से ज्यादा हो गई है। यानी उनकी कमाई लगभग दोगुनी हो गई।खगपति अब सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए मिसाल हैं। वे अन्य किसानों को भी धान के साथ दूसरी फसलें लेने और नई तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।कृषि विभाग के उप संचालक ने भी किसानों से अपील की है कि वे कृषक उन्नति योजना का लाभ लें। इस योजना के तहत यदि कोई किसान पिछले साल के धान वाले खसरे में इस बार वैकल्पिक फसल लगाता है तो उसे 15 हजार रुपये प्रति एकड़ अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। इच्छुक किसान अपने क्षेत्र के मैदानी कृषि अधिकारी या स्थानीय सहकारी समिति लेम्पस में जाकर पंजीयन करवा सकते हैं।खगपति कहते हैं कि सही समय पर सही तकनीक और सरकारी योजना का लाभ लें तो खेती को भी मुनाफे का व्यवसाय बनाया जा सकता है।
- -दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना, पक्का आवास और रसोई गैस की सुविधा से मिला सम्मानजनक जीवनअम्बिकापुर। शासन की हितग्राही मूलक योजनाएं जरूरतमंद और वंचित परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं। भूमिहीन एवं आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक संबल प्रदान करने के उद्देश्य से संचालित शासन की विभिन्न योजनाओं के लाभ से भूमिहीन परिवारों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महतारी वंदन योजना एवं प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना जैसी योजनाओं ने हजारों परिवारों के जीवन को नई दिशा दी है। इन योजनाओं से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर भी मिला है।जिले के में विकासखंड अम्बिकापुर के ग्राम करजी निवासी जनेऊराम नायक का परिवार शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित होकर आज आत्मविश्वास के साथ जीवनयापन कर रहा है। जनेऊराम नायक ने बताया कि वे भूमिहीन परिवार से हैं और लंबे समय से कृषि मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते रहे हैं। स्वयं की कृषि भूमि नहीं होने के कारण परिवार की आय का एकमात्र साधन मजदूरी ही था। सीमित आय में परिवार की जरूरतों को पूरा करना काफी कठिन था, लेकिन शासन की योजनाओं का लाभ मिलने से अब उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आया है और भविष्य के प्रति विश्वास भी बढ़ा है।उन्होंने बताया कि उन्हें दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हो रही है। यह राशि उनके जैसे भूमिहीन परिवारों के लिए बड़ी राहत है। इस सहायता से घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति करने, बच्चों की जरूरतों को पूरा करने तथा दैनिक जीवन के खर्चों में काफी सहयोग मिलता है। उन्होंने कहा कि पहले छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी परेशानी होती थी, लेकिन अब शासन की सहायता से आर्थिक बोझ काफी कम हुआ है।जनेऊराम नायक ने बताया कि उनके परिवार के लिए सबसे बड़ी खुशी प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत पक्का आवास स्वीकृत होना रहा। पहले उनका परिवार कच्चे मकान में रहता था और बरसात के दिनों में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब उन्हें शासन की सहायता से पक्का घर मिला है, जिससे पूरा परिवार सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण में रह रहा है। उन्होंने बताया कि आवास निर्माण के लिए आवश्यक भूमि की व्यवस्था भी हो गई है, जिससे वर्षों पुराना अपने घर का सपना साकार हुआ।उन्होंने यह भी बताया कि परिवार को प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत रसोई गैस कनेक्शन मिला है। पहले लकड़ी और अन्य पारंपरिक ईंधनों पर भोजन बनाना पड़ता था, जिससे धुएं के कारण महिलाओं को काफी परेशानी होती थी। अब गैस कनेक्शन मिलने से रसोई का कार्य आसान हो गया है और परिवार को स्वच्छ ईंधन का लाभ मिल रहा है।जनेऊराम नायक ने बताया कि उनके परिवार को महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। इस योजना के अंतर्गत प्रतिमाह मिलने वाली एक हजार रुपये की सहायता से परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का समन्वित लाभ मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति पहले की अपेक्षा कहीं बेहतर हुई है।उन्होंने बताया कि उनके परिवार में वर्तमान में पांच सदस्य हैं। समय के साथ परिवार का विस्तार होने से आवास और आर्थिक सुरक्षा की आवश्यकता लगातार बढ़ रही थी। ऐसे समय में शासन की योजनाओं ने उनके परिवार को नई उम्मीद और आत्मविश्वास दिया है। अब वे निश्चिंत होकर अपने परिवार के बेहतर भविष्य की योजना बना पा रहे हैं।जनेऊराम नायक ने कहा कि शासन की योजनाएं वास्तव में गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही हैं। दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना से नियमित आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री आवास योजना से पक्का घर, महतारी वंदन योजना से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग तथा उज्ज्वला योजना से स्वच्छ ईंधन जैसी सुविधाओं ने उनके जीवन को बदल दिया है।उन्होंने शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गरीब परिवारों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का लाभ उन्हें समय पर मिला, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उन्होंने प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि शासन की जनहितैषी योजनाएं ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब और भूमिहीन परिवारों के जीवन में खुशहाली ला रही हैं तथा उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अवसर प्रदान कर रही हैं।
- -पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा बैठक में विकास कार्यों और योजनाओं की प्रगति का लिया विस्तृत जायजा-हर परियोजना की नियमित मॉनिटरिंग, समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन के दिए निर्देश-बेहतर पर्यटक सुविधाओं और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से छत्तीसगढ़ को आकर्षक पर्यटन केंद्र बनाने पर जोररायपुर । छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने तथा प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई गति देने के उद्देश्य से आज मंत्रालय में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल की अध्यक्षता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित हुई। बैठक में दोनों विभागों द्वारा संचालित योजनाओं, विकास परियोजनाओं, अधोसंरचना निर्माण, प्रमुख पर्यटन स्थलों एवं सांस्कृतिक गतिविधियों की प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत समीक्षा की गई।बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल एवं पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन को पर्यटन विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं, पर्यटन अधोसंरचना विकास, प्रमुख परियोजनाओं की प्रगति, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार, विभाग की उपलब्धियों तथा आगामी कार्ययोजना की विस्तृत जानकारी दी। इसके साथ ही संस्कृति विभाग द्वारा संचालित सांस्कृतिक संरक्षण, लोककला एवं लोक कलाकारों के संवर्धन, सांस्कृतिक आयोजनों, पुरातात्विक एवं धरोहर संरक्षण तथा आगामी कार्यक्रमों की जानकारी संस्कृति विभाग के संचालक डॉक्टर संजय कन्नौजे द्वारा दी गई। संस्कृति विभाग की भी विस्तार से समीक्षा की गई।प्रस्तुतीकरण के उपरांत पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दोनों विभागों के कार्यों की गहन समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी योजनाओं एवं विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों में गति, गुणवत्ता, पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, जिससे प्रदेश के पर्यटन और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा मिल सके।श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक धरोहरों, धार्मिक आस्था केंद्रों और जनजातीय परंपराओं से समृद्ध राज्य है। इन सभी विशेषताओं का प्रभावी प्रचार-प्रसार राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया जाना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राकृतिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक पर्यटन स्थलों के साथ-साथ प्रदेश की लोककलाओं, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक धरोहरों को भी व्यापक पहचान दिलाने के लिए योजनाबद्ध प्रयास किए जाएं।उन्होंने पर्यटकों को बेहतर और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने, पर्यटन अधोसंरचना को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा नए पर्यटन स्थलों के योजनाबद्ध विकास पर विशेष जोर दिया। साथ ही संस्कृति विभाग को निर्देशित किया कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, पारंपरिक कला रूपों के संवर्धन, संग्रहालयों, सांस्कृतिक संस्थानों तथा सांस्कृतिक आयोजनों को और अधिक प्रभावी एवं जनभागीदारी आधारित बनाया जाए, जिससे नई पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ सके।पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने अधिकारियों से कहा कि सभी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा एवं सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक विलंब न हो। उन्होंने कहा कि समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और परिणामोन्मुखी कार्यों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन एवं संस्कृति के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में स्थापित किया जा सकता है।बैठक में पर्यटन विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक श्री विवेक आचार्य, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे, पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की अवर सचिव श्रीमती रुचि शर्मा, पर्यटन मंडल की उपमहाप्रबंधक श्रीमती पूनम शर्मा सहित पर्यटन एवं संस्कृति विभाग तथा छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
- -40 परिवारों को मिल रही निर्बाध बिजली आपूर्तिबलरामपुर। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं प्रभावी समाधान का सशक्त माध्यम बनकर उभरी है। इसी क्रम में विकासखंड बलरामपुर के ग्राम भवानीपुर में ट्रांसफार्मर के पास केबल खराब होने के कारण विद्युत आपूर्ति बाधित होने संबंधी शिकायत श्री अभिषेक यादव द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज कराई गई। केबल खराब होने से गांव के लगभग 40 परिवार बिजली समस्या से प्रभावित थे।शिकायत प्राप्त होते ही विद्युत विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी दल को तत्काल मौके पर भेजा। विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा आवश्यक परीक्षण एवं मरम्मत कार्य कर विद्युत आपूर्ति सुचारु रूप से सुचारू कर दी गई। इसके बाद भवानीपुर के लगभग 40 प्रभावित परिवारों को पुनः निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलने लगी, जिससे उन्हें राहत मिली। समस्या के त्वरित समाधान पर ग्राम भवानीपुर के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया।गौरतलब है कि कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के द्वारा मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा की जा रही है। उन्होंने सभी विभागों को शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध एवं संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे आमजन को उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान मिल रहा है।
- -एक फैसला, छोटी शुरुआत और बदल गई तकदीर-स्व-सहायता समूह से जुड़कर दिलमति बनीं सफल उद्यमी-लखपति दीदी बन कई परिवारों के लिए बनी प्रेरणा-सुअर पालन, कृषि अन्य आजिविका गतिविधियों से लाखों रूपय कर रहीं अर्जितबलरामपुर। जनपद पंचायत शंकरगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत लडुवा की रहने वाली दिलमति ने साबित कर दिया है कि यदि महिलाओं को सही अवसर, मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग मिले, तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि लोगो के लिए विकास की दिशा भी तय कर सकती हैं। कभी सीमित आय के कारण दिलमति का जीवनयापन मुश्किल था, लेकिन आज सुअर पालन, कृषि और कृषि आधारित गतिविधियों के माध्यम से उनका परिवार प्रतिवर्ष 7 से 10 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहा है और दिलमति आज लखपति दीदी के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। इस परिवर्तन की शुरुआत मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के एक फैसले से हुई।कुछ वर्ष पहले तक दिलमति का परिवार आर्थिक अभाव से जूझ रहा था। खेती से होने वाली सीमित आमदनी से घर का खर्च चलाना भी कठिन था। ऐसे समय में उन्होंने मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यता ली। नियमित बचत के साथ समूह की बैठकों में भाग लेने लगीं। इन बैठकों में पीआरपी दीदियों एवं विभागीय अधिकारियों ने महिलाओं को स्वरोजगार और आजीविका के विभिन्न विकल्पों की जानकारी दी। इसी दौरान दिलमति ने सुअर पालन का विचार किया।समूह के माध्यम से उन्हें एक लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इस राशि में से लगभग 40 हजार रुपये खर्च कर उन्होंने झारखंड से 10 सुअर खरीदे और व्यवसाय की शुरुआत की। शुरुआती दौर चुनौतियों से भरा था, लेकिन उन्होंने धैर्य और मेहनत का साथ नहीं छोड़ा। लगभग एक वर्ष बाद सुअरों से कमाई का सिलसिला शुरू हो गया। दिलमति बताती है कि एक मादा सुअर एक बार में 9 से 10 बच्चों को जन्म देती है तथा प्रत्येक बच्चे की बिक्री लगभग 5 हजार रुपये तक हो जाती है। इससे हर छह माह में लगभग 40 से 50 हजार रुपये की आय होने लगी। वर्तमान में उनके पास 9 मादा सुअर हैं, जिनसे प्रतिवर्ष लाखों रुपये की आमदनी हो रही है।दिलमति ने इस आय का उपयोग केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने सुअर पालन के लिए व्यवस्थित शेड का निर्माण कराया, धान एवं मक्का कुटाई की मशीन खरीदी तथा ड्रिप इरीगेशन प्रणाली अपनाकर जैविक सब्जी उत्पादन शुरू किया। इससे उनकी आजीविका के कई स्थायी स्रोत विकसित हुए और आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत होती गई। आज उनका परिवार आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। सुअर पालन के साथ कृषि और सब्जी उत्पादन ने उनकी आय को स्थायित्व दिया है।दिलमति की उपलब्धि से प्रेरित होकर ग्राम पंचायत लडुवा के लगभग 10 से 15 परिवारों ने भी सुअर पालन को अपनी आजीविका का माध्यम बनाया। आज ये परिवार भी इस व्यवसाय से अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। एक महिला के साहस और संकल्प ने पूरे गांव में स्वरोजगार की नई सोच को जन्म दिया है।दिलमति कहती हैं कि मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह की बैठकों से मिली सीख ही उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी बनी। वे अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करती हैं कि वे स्व-सहायता समूहों से जुड़कर छोटी-छोटी बचत को अपनी ताकत बनाएं और ऋण का उपयोग आय बढ़ाने वाले कार्यों में करें। उनका मानना है कि यदि महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त होंगी तो परिवार और समाज दोनों मजबूत होंगे।पहले हम सिर्फ घर चलाने की चिंता करते थे, आज व्यवसाय बढ़ाने की योजना बनाते हैं। मां दुर्गा महिला स्व-सहायता समूह ने मुझे सिर्फ ऋण नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का आत्मविश्वास और अवसर भी दिया। वे कहती है कि सही दिशा में निरंतर प्रयास और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से ग्रामीण क्षेत्र में आजीविका के नये अवसर सृजित किए जा सकते है। दिलमति कहती है कि मेरी सबसे बड़ी खुशी यह है कि मेरे गांव के कई परिवार भी आज इस व्यवसाय से अपनी आजीविका मजबूत बना रहे हैं।
- -3-3 किलोवाट के रूफटॉप सोलर प्लांट से बिजली बिल में भारी बचतरायपुर । प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना देश के नागरिकों को स्वच्छ, सस्ती और आत्मनिर्भर ऊर्जा उपलब्ध कराने के साथ-साथ बिजली के खर्चों को कम करने का एक बेहद प्रभावी माध्यम बनती जा रही है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से एक बेहद प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहाँ दो ग्राम पंचायत सचिवों ने खुद अपने घरों में सोलर प्लांट लगवाकर ग्रामीणों के सामने एक मिसाल पेश की है।जनपद पंचायत छुरिया के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत रामपुर के सचिव श्री रामलखन मण्डावी और ग्राम पंचायत जोंधरा के सचिव श्री अर्जुन सिंह ठाकुर ने अपने-अपने निजी आवासों पर 3-3 किलोवाट क्षमता के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित करवाए हैं। दोनों सचिवों की यह अनूठी पहल न केवल उनके घरों में आर्थिक बचत का जरिया बनी है, बल्कि आसपास के लोगों को भी स्वच्छ ऊर्जा अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।योजना के लाभ और अपने अनुभवों को साझा करते हुए रामपुर के सचिव श्री रामलखन मण्डावी ने बताया कि उन्होंने 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के आधिकारिक पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया था। विद्युत विभाग से आवश्यक तकनीकी स्वीकृति मिलने के बाद, विभाग द्वारा अधिकृत विक्रेता (वेंडर) के माध्यम से उनके घर की छत पर 3 किलोवाट का रूफटॉप सोलर प्लांट और नेट मीटर सफलतापूर्व स्थापित कर दिया गया। इस योजना की सबसे खास बात इसकी वहन करने योग्य लागत है। दोनों ही सचिवों को केंद्र और राज्य सरकार की ओर से मिलाकर कुल 1 लाख 8 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हुई है, जिससे प्लांट लगाने की शुरुआती लागत (इन्स्टॉलेशन कॉस्ट) काफी कम हो गई।श्री मण्डावी ने बताया कि अब उनके घर की बिजली से जुड़ी अधिकांश ज़रूरतें सौर ऊर्जा से ही पूरी हो रही हैं, जिससे हर महीने आने वाले बिजली बिल में भारी गिरावट आई है। इसके साथ ही, ज़रूरत से ज़्यादा उत्पादित होने वाली अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में भेजने पर उन्हें 'नेट मीटरिंग' का दोहरा लाभ भी मिल रहा है। इसी तरह जोंधरा पंचायत के सचिव श्री अर्जुन सिंह ठाकुर ने भी पूरी प्रक्रिया की सराहना करते हुए इसे बेहद सरल, सहज और पारदर्शी बताया। उन्होंने इस जनहितैषी योजना के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।दोनों पंचायत ( ग्राम पंचायत जोंधरा, ग्राम पंचायत रामपुर) सचिवों ने आम नागरिकों और ग्रामीणों से अपील की है कि वे अधिक से अधिक संख्या में आगे आएं और 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' का लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल बिजली के खर्चों से मुक्ति पाई जा सकती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी एक ज़िम्मेदार नागरिक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।
- -हर चार माह में मिलने वाली 2 हजार रुपये की किस्त से किसानों को मिल रही सहायता, ग्राम भल्लौर के किसान ने बताया योजना को उपयोगीएमसीबी / किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और कृषि कार्यों में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा संचालित प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो रही है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्रत्येक वर्ष 6 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। यह राशि किसानों को हर चार माह में 2 हजार रुपये की तीन किस्तों के रूप में सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती है।इस योजना का लाभ लेकर जिले के किसान खेती से जुड़ी अपनी आवश्यकताओं को पूरा कर रहे हैं। इसी क्रम में मनेंद्रगढ़ विकासखंड के ग्राम भल्लौर निवासी किसान संतोष कुमार कुशवाहा ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ मिल रहा है।किसान संतोष कुमार कुशवाहा ने बताया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाली सालना 6 हजार रुपये की राशि खेती के कार्यों में उपयोगी साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि खेती के दौरान खाद, बीज, कृषि सामग्री और अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने में इस राशि से काफी सहायता मिलती है। पहले कई बार खेती के समय आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब योजना से मिलने वाली आर्थिक सहायता से कृषि कार्यों को बेहतर तरीके से पूरा करने में मदद मिल रही है।उन्होंने कहा कि किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक सहयोग है। खेती के समय मिलने वाली यह राशि किसानों की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होती है और कृषि कार्यों को सुचारू रूप से आगे बढ़ाने में मदद करती है।संतोष कुमार कुशवाहा ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों के हित में संचालित इस योजना से देशभर के किसानों को लाभ मिल रहा है। उन्होंने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का भी धन्यवाद देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा किसानों के हित में अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे किसानों को आर्थिक मजबूती मिल रही है।उन्होंने प्रदेश सरकार की कृषि उन्नति योजना की भी सराहना करते हुए कहा कि धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से किए जाने से किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल रहा है। इससे किसानों को अपनी मेहनत का सही मूल्य प्राप्त हो रहा है और खेती के प्रति उनका विश्वास और बढ़ा है।किसान संतोष कुमार कुशवाहा ने कहा, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से मिलने वाली राशि खेती के समय बहुत काम आती है। इससे खेती से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में सहायता मिलती है। सरकार द्वारा किसानों के हित में चलाई जा रही योजनाओं से हमें काफी लाभ मिल रहा है और अब हमें महसूस हो रहा है कि हमारी मेहनत को सही सम्मान मिल रहा है।
- रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सरकार की सुशासन नीति जमीनी स्तर पर रंग ला रही है। इसका सबसे ताजा और बेहतरीन उदाहरण 'सुशासन तिहार 2026' में देखने को मिला, जहां जिला सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले के 859 हितग्राहियों की राशनकार्ड से जुड़ी समस्याओं का महकमे ने तत्काल निराकरण कर दिया। सालों-महीनों का काम दिनों में होने से अब इन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के घरों में न केवल समय पर राशन पहुंच रहा है, बल्कि उनके चेहरों पर संबल और मुस्कान भी लौट आई है।खाद्य विभाग द्वारा संवेदनशीलता दिखाते हुए जिले के तीनों विकासखंडों सारंगढ़, बरमकेला और बिलाईगढ़ में शिविर लगाकर और आवेदनों पर त्वरित कार्रवाई करते हुए नए राशनकार्ड बनाने, नाम जोड़ने और नाम हटाने (विलोपित करने) के काम को युद्धस्तर पर पूरा किया गया। सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में खाद्य विभाग द्वारा किए गए कार्यों के आंकड़े इसकी जमीनी सफलता को साफ बयां करते हैं। जिले के तीनों विकासखंडों में राशनकार्ड से जुड़े कार्यों को पूरी तत्परता से निपटाया गया।बिलाईगढ़ विकासखंड इस मुहिम में सबसे आगे रहा, जहां रिकॉर्ड 200 नए राशनकार्ड बनाए गए, 105 लोगों के नाम मौजूदा कार्डों में जोड़े गए और 123 सदस्यों के नाम विलोपित (हटाए) किए गए। इसी तरह बरमकेला विकासखंड में भी प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए 88 नए राशनकार्ड जारी किए, 39 नाम जोड़े और 71 नामों को विलोपित किया। वहीं सारंगढ़ विकासखंड की बात करें, तो यहाँ 55 नए परिवारों को राशनकार्ड का लाभ मिला, जबकि 86 नए नाम जोड़ने और 92 नाम हटाने की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।इस तरह पूरे जिले में सामूहिक रूप से 343 नए राशनकार्डों का निर्माण हुआ, 230 हितग्राहियों के नाम जोड़े गए और 286 सदस्यों के नाम विलोपित किए गए, जिससे कुल 859 नागरिकों की समस्याओं का सीधा समाधान हुआ। राशनकार्ड सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति के कुशल भरण-पोषण का सबसे मजबूत आधार है। सुशासन तिहार के माध्यम से प्रशासन ने फाइलों के चक्कर काटने की मजबूरी को खत्म कर 'त्वरित न्याय' की अवधारणा को सच कर दिखाया है। बिलाईगढ़ विकासखंड में जहां सबसे ज्यादा 200 नए राशनकार्ड जारी किए गए, वहीं सारंगढ़ और बरमकेला में भी त्रुटि सुधार और नाम जोड़ने की प्रक्रियाओं को बेहद आसान बनाकर लोगों को राहत दी गई। साय सरकार का यह 'सुशासन तिहार' वास्तव में प्रदेश के गरीब परिवारों के लिए खुशियों का त्योहार साबित हो रहा है।
- -बिहान योजना ने बढ़ाया आत्मविश्वास, कस्टम हायरिंग सेंटर से बदली खेती की तस्वीररायपुर। छत्तीसगढ के सुकमा जिले में संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। यह योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीकों से भी जोड़ रही है। विकासखंड कोंटा के ढोढरा गांव की सोढ़ी तिरपो इसकी प्रेरणादायक मिसाल हैं।पहले सोढ़ी तिरपो खेती के लिए हल-बैल और पारंपरिक तरीकों पर निर्भर थीं। खेतों की जुताई और अन्य कृषि कार्यों के लिए उन्हें काफी मेहनत करनी पड़ती थी। आधुनिक कृषि यंत्रों का संचालन उनके लिए एक नई बात थी।जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में तुलसी महिला ग्राम संगठन द्वारा संचालित कस्टम हायरिंग सेंटर से उन्हें पावर टिलर चलाने का प्रशिक्षण मिला। क्लस्टर पीआरपी श्रीमती पूजा कोड़ी के निरंतर मार्गदर्शन और अपने प्रयासों से उन्होंने मशीन चलाना सीखा। आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ पावर टिलर का संचालन कर रही हैं।सोढ़ी तिरपो अपने 30 डिसमिल खेत में मक्का और मिर्च की आधुनिक तकनीक से खेती कर रही हैं। पावर टिलर के उपयोग से खेती का काम पहले की तुलना में तेज, आसान और कम खर्चीला हो गया है। इससे फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी सुधार हुआ है।कस्टम हायरिंग सेंटर का लाभ केवल सोढ़ी तिरपो तक सीमित नहीं है। आसपास के छोटे और सीमांत किसान भी यहां से उचित किराए पर कृषि यंत्र लेकर समय पर खेती कर रहे हैं। इससे उनकी लागत कम हुई है और कृषि कार्य अधिक सुविधाजनक बन गया है। सोढ़ी तिरपो अब कृषि यंत्रों का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि उनके रख-रखाव और किसानों को समय पर सेवा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी भी निभा रही हैं। उनकी सफलता से गांव की अन्य महिलाओं में भी आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रही हैं।सोढ़ी तिरपो की कहानी इस बात का प्रमाण है कि सही प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने पर ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बन सकती हैं। बिहान योजना और कस्टम हायरिंग सेंटर की पहल ने न केवल उनकी आजीविका मजबूत की है, बल्कि सुकमा जिले में महिला सशक्तिकरण और आधुनिक कृषि की नई मिसाल भी स्थापित की है।
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-15 हजार रुपए की सब्सिडी के साथ मिला आधुनिक पावर वीडर
-राजस्व विभाग ने तुरंत सौंपी ऋण पुस्तिकारायपुर । खेती-किसानी को आधुनिक और आसान बनाने की मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा अब धरातल पर सच साबित हो रही है। सुशासन तिहार शिविरों के जरिए किसानों की समस्याओं का स्थल पर और समयबद्ध निराकरण कर उनके जीवन को सुगम बनाया जा रहा है। सारंगढ़ - बिलाईगढ़ जिले के विकासखंड बिलाईगढ़ के ग्राम मड़कड़ी निवासी किसान राशीराम आदित्य के लिए वर्ष 2026 का श्सुशासन तिहारश् खुशियों की नई सौगात लेकर आया। विगत 5 जून को आयोजित शिविर में राशीराम ने अपनी दो प्रमुख समस्याओं के समाधान के लिए आवेदन किया था। जिला प्रशासन की तत्परता और संवेदनशीलता का नतीजा है कि मात्र एक महीने के भीतर उनकी दोनों मांगें पूरी हो गईं। राशीराम अपनी खेती को आधुनिक उपकरणों से जोड़ना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कृषि विभाग को पावर वीडर मशीन के लिए आवेदन दिया था। कलेक्टर के निर्देशन में कृषि विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रक्रिया को गति दी। पावर वीडर मशीन की कुल लागत 52 हजार रुपए में से शासन द्वारा 15 रुपए अनुदान किसान को मिला। पावर वीडर से खेतों की निंदाई-गुड़ाई अब बेहद कम समय और कम लागत में हो सकेगी।मजदूरों की किल्लत और भारी श्रम से बड़ी राहत मिलेगी। आधुनिक तकनीक से कृषि कार्य की दक्षता और उत्पादकता दोनों में वृद्धि होगी।शिविर में राशीराम ने अपनी दूसरी बड़ी जरूरतकृऋण पुस्तिका के लिए भी आवेदन लगाया था। राजस्व विभाग ने तत्परता दिखाते हुए उनके आवेदन का त्वरित निराकरण किया और उन्हें ऋण पुस्तिका सौंप दी। अब राशीराम को भविष्य में बैंक ऋण लेने, शासकीय योजनाओं का लाभ उठाने और अन्य कृषि संबंधी सुविधाओं के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।एक ही मंच पर अपनी दोनों बड़ी समस्याओं का समाधान पाकर किसान राशीराम आदित्य के चेहरे पर मुस्कान तैर गई। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की यह पहल हम जैसे छोटे किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। अधिकारियों ने जिस संवेदनशीलता के साथ महज एक महीने में मुझे कृषि मशीन और ऋण पुस्तिका उपलब्ध कराई है, जिससे काम बहुत आसान हो गया है। सुशासन तिहार वाकई ग्रामीणों का जीवन बदल रहा है।उप संचालक कृषि के मार्गदर्शन में मैदानी अधिकारियों द्वारा पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ निरंतर पहुँचाया जा रहा है। राशीराम की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ में अब आम नागरिकों की समस्याओं का निराकरण तेज, सरल और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। -
- शासन द्वारा दी जा रही 15000 रूपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन सहायता राशि
- कृषि विभाग द्वारा किसानों को दी गई समसामयिक सलाह
राजनांदगांव । जिले में वर्तमान खरीफ मौसम के दौरान अब तक लगभग 1700 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जो गत वर्ष की इसी अवधि में हुई लगभग 1500 मिमी वर्षा की तुलना में 200 मिमी अधिक है। कृषि विभाग द्वारा केवल वर्षा की मात्रा को देखकर असिंचित एवं ऊँचाई वाली भूमि में धान की खेती का निर्णय न लेने, बल्कि अपनी भूमि की प्रकृति एवं वैज्ञानिक अनुशंसाओं के अनुरूप फसल का चयन करने की अपील की है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि राजनांदगांव जिले की कृषि जलवायु तथा मृदा संरचना काली दोमट, मटासी एवं भर्री भूमि से युक्त है। जिले में बड़ी मात्रा में ऐसी भर्री एवं ऊँचाई वाली भूमि उपलब्ध है, जहां वर्षा का पानी अधिक समय तक नहीं ठहरता। ऐसी भूमि अरहर, उड़द, मूंग, सोयाबीन, कपास एवं मक्का जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। कृषि विभाग द्वारा विगत वर्षों में किए गए फसल कटाई प्रयोगों एवं उत्पादकता विश्लेषण से यह पाया गया है कि असिंचित एवं ऊँचाई वाली भूमि में धान की औसत उत्पादकता केवल 8 से 10 क्विंटल प्रति एकड़ ही प्राप्त होती है, जिससे किसानों को लगभग 19528 रूपए से 24410 रूपए प्रति एकड़ सकल आय प्राप्त होती है। इसके विपरीत वैकल्पिक फसलों में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है। औसतन अरहर से 4-5 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन एवं लगभग 32 हजार रूपए से 40 हजार रूपए प्रति एकड़ सकल आय, मूंग से 3-4 क्विंटल उत्पादन एवं 26304 रूपए से 35072 रूपए तक आय, उड़द से 3-4 क्विंटल उत्पादन एवं 23400 रूपए से 31200 रूपए तक आय तथा सोयाबीन से 5-7 क्विंटल उत्पादन एवं 26640 रूपए से 37296 रूपए तक संभावित सकल आय प्राप्त हो सकती है।
उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि वर्ष 2026-27 के लिए केंद्र सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के अनुसार अरहर 8000 रूपए प्रति क्विंटल, मूंग 8768 रूपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रूपए प्रति क्विंटल तथा सोयाबीन 5328 रूपए प्रति क्विंटल निर्धारित है। इन फसलों का समर्थन मूल्य पर उपार्जन प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) अंतर्गत किया जाता है। जिससे किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित होता है। उन्होंने बताया कि कम पानी में भी दलहन एवं तिलहन फसले बेहतर उत्पादन देती है, धान की तुलना में अधिक लाभकारी होती हैं, मृदा स्वास्थ्य में सुधार करती हैं तथा खेती का जोखिम कम करती हैं। वहीं असिंचित क्षेत्रों में धान की खेती करने पर पानी की कमी होने की स्थिति में उत्पादन में भारी गिरावट आने और किसानों की आय प्रभावित होने की संभावना रहती है। शासन द्वारा किसानों को फसल विविधीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से पीएम-आशा कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत असिंचित क्षेत्रों में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, कपास एवं मक्का जैसी वैकल्पिक फसले लेने पर 15000 रूपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन सहायता प्रदान की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा किसानों से पीएम आशा योजना का लाभ लेकर अपनी आय में वृद्धि करेने तथा जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की अपील की गई है। साथ ही खरीफ मौसम में किसान अपनी भूमि की प्रकृति के अनुसार फसल चयन करने तथा आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन के लिए क्षेत्र के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी अथवा निकटतम कृषि कार्यालय से संपर्क कर सकते है। -
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सेवा सेतु परियोजना के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्य करने वाले सेवा सेतु केन्द्र संचालकों को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में प्रशस्ति प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कलेक्टर ने सेवा सेतु केन्द्र तहसील कार्यालय छुरिया के प्रबंधक श्री महेश्वर पटेल को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया। श्री पटेल द्वारा सेवा सेतु केन्द्र में प्राप्त कुल आवेदनों में से 97.73 प्रतिशत आवेदनों का सफल अनुमोदन कराया गया है।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत तुमड़ीबोड़ के सेवा सेतु केन्द्र संचालक श्री देवेन्द्र पटेल को भी उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया। उनके द्वारा प्राप्त कुल आवेदनों में से 97.55 प्रतिशत आवेदनों का अनुमोदन सुनिश्चित किया गया है। कलेक्टर ने दोनों संचालकों से सेवा सेतु परियोजना के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने नागरिकों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराने की सराहना करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार समर्पित भाव से कार्य करते रहने के लिए शुभकामनाएं दी। कलेक्टर ने कहा कि सेवा सेतु परियोजना के माध्यम से आम नागरिकों को शासकीय सेवाएं सरल, सुगम एवं पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना शासन की प्राथमिकता है, जिसके प्रभावी क्रियान्वयन में सेवा सेतु केन्द्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है।



























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