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- रायपुर।धान के कटोरे कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब एक नई फसल अपनी पहचान बना रही है - सुपर फूड मखाना, जिसे काला हीरा भी कहा जाता है। स्वास्थ्यवर्धक गुणों से भरपूर मखाने की खेती अब राज्य में आधुनिक तकनीक और नवाचार के साथ हो रही है।मखाना उत्पादन पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं भ्रमण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर एवं अध्यक्ष जनपद सदस्य आरंग, श्री रिंकू चंद्राकर ने की. मध्य प्रदेश के किसानो सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री चंद्रहास चंद्राकर ने कहा की केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों के आर्थिक उन्नति के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जी के प्रयासों से छत्तीसगढ़ मखाना बोर्ड सेन्ट्रल सेक्टर स्कीम में शामिल हुआ है इसके लिए हम उनका आभार व्यक्त करते हैं.हमारे मुख्य मंत्री श्री विष्णु देव साय कृषि मंत्री श्री राम विचार नेताम जी के द्वारा मखाना उत्पादन को बढ़ावा देने विशेष प्रयास किया जा रहा है श्री चंद्राकर ने कहा की छत्तीसगढ़ में सर्वप्रथम व्यवसायिक उत्पादन आरंग ब्लॉक के ग्राम लिंगाडीह के किसान स्व. श्री कृष्ण कुमार चंद्राकर द्वारा प्रारंभ किया गया था। राज्य का प्रथम मखाना प्रसंस्करण केंद्र का उद्घाटन 5 दिसंबर 2021 को ग्राम लिंगाडीह में तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा किया गया । अब मखाना उत्पादन में प्रदेश में आरंग का नाम अपनी अलग पहचान बना चुका है. कार्यक्रम के अध्यक्ष जनपद सदस्य श्री रिंकू चंद्राकर ने कहा किया हमारे क्षेत्र के लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ प्रदेश का प्रथम मखाना उत्पादन एवं संस्करण केंद्र हमारे क्षेत्र ग्राम लिंगाडीह में स्थापित हुआ है.छटेरा, निसदा एवं अन्य गांव में भी इसके विस्तार हेतु प्रयास किया जा रहे हैं हमारे इस केंद्र में न केवल हमारे प्रदेश के बल्कि अन्य प्रदेश के लोग भी यहां मखाना की खेती सीखने आ रहे हैं जो हमारे प्रदेश के लिए गर्व की बात है.मध्य प्रदेश के उमरिया जिला से 50 किसानों का एक भ्रमण दल कृषि विभाग के द्वारा मखाना की खेती के भ्रमण हेतु रायपुर जिला के आरंग ब्लॉक स्थित ओजस फॉर्म का भ्रमण किया। इस दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए।राष्ट्रीय मखाना महोत्सव 2024 एवं 2025 में सम्मानित मखाना उत्पादक किसान एवं ओजस फार्म दाऊजी मखाना के प्रबंधक श्री संजय नामदेव ने मखाना की खेती के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रति एकड़ में 20 किलो बीज की आवश्यकता होती है और उत्पादन लगभग 10 क्विंटल के आसपास प्राप्त होता है। उन्होंने बताया कि 6 माह की अवधि वाले फसल में किसी भी प्रकार का कीट व्याधि का प्रकोप नहीं होता है और न ही किसी प्रकार की चरी और चोरी की समस्या रहती है। इंदिरा गाँधी कृषि विश्व विद्यालय के सब्जी विज्ञान के पी एच डी छात्र डॉ योगेंद्र चंदेल ने किसानों को मखाना की खेती के लिए आवश्यक तकनीक और संसाधनों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती तालाब एवं खेत दोनों विधि से की जाती है अधिकतम उत्पादन के लिए धान की तरह खेत की मताई 1 मीटर की दुरी पर 55 दिन के नर्सरी की 4000 पौधो की रोपाई एक मीटर पौधा से पौधा एवं कतार से कतार की दुरी पर रोपाई समय समय पर नींदाई खाद प्रबंधन वैज्ञानिक तरीके से करने पर अधिकतम उत्पादन मिलता है मखाना की खेती प्रसंसकरण एवं विपणन के लिए हमारे द्वारा किसानों को प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है।ICAR-CIPHET (केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान), लुधियाना, पंजाब से प्रशिक्षण प्राप्त शिव नारायण साहू ने मखाना के प्रोसेसिंग की जानकारी देते हुए बताया कि 1 किलो मखाना के बीज से लगभग 200 से 250 ग्राम पॉप प्राप्त होता है, जिसकी बाजार में कीमत ₹700 से लेकर ₹1000 तक होती है। उन्होंने बताया कि यदि किसान मखाना का उत्पादन कर स्वयं प्रसंस्करण कर पैकेजिंग करके भेजते हैं तो प्रति एकड़ अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है।इस भ्रमण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती के बारे में श्री शिव साहू से विस्तृत जानकारी प्राप्त की और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि मखाना की खेती से उन्हें अच्छा मुनाफा हो सकता है और यह उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार कर सकता है।कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मखाना बोर्ड से इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को मखाना की खेती के लिए प्रशिक्षण और सहायता प्रदान की जाती है, और उन्हें इसके लिए सब्सिडी भी दी जाती है।इस भ्रमण में मध्य प्रदेश के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग से भ्रमण दल प्रभारी श्री दहायत एवं भ्रमण दल में शामिल किसानों ने बताया कि वे मखाना की खेती के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए उत्साहित हैं और इसे अपने खेतों में अपनाने के लिए तैयार हैं।
- -राज्यपाल ने संत शदाराम साहिब भाषा भवन का शिलान्यास कियारायपुर / राज्यपाल श्री रमेन डेका ने आज संत शदाराम साहिब भाषा भवन का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय अंतर्गत इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर के तहत आयोजित आइडियाथॉन का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि अपनी भावनाओं, दुख और खुशी को व्यक्त करने का सबसे सरल और सशक्त माध्यम हमारी मातृभाषा होती है। उन्होंने मातृभाषा की समृद्धि और विकास पर बल देते हुए कहा कि मातृभाषा से हम सब का आत्मीय जुड़ाव होता है। किसी अनजान जगह पर जब हम किसी मातृभाषी से मिलते है तो उनसे तुरंत एक स्नेह के बंधन मे बंध जाते हैं।हमारा देश अपनी समृद्ध संस्कृति और विविध भाषाओं के लिए जाना जाता है। हमारा देश बहुभाषी होते हुए भी आपस में एकता के सूत्र में बंधा हुआ है। इसमें संस्कृत भाषा का महत्वपूर्ण योगदान है। हमारी प्राचीनतम भाषा संस्कृत है। अगर बारीेकी से अध्ययन किया जाए तो आप देखेंगे कि संस्कृत भाषा शब्द सभी भारतीय भाषाओं-हिन्दी, तमिल, तेलूगु, बंगाली, असमिया आदि में सम्मिलित है। हमारी सांस्कृतिक विविधता ही हमारी सबसे बड़ी विशेषता है।श्री डेका ने कहा कि संत शदाराम साहिब भाषा भवन का शिलान्यास करते समय उन्हें प्रसन्नता हो रही है, सिंधी भाषा संवर्धन की दिशा में यह उल्लेखनीय कदम है। पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविधालय में सिंधी भाषा में एक वर्ष का डिप्लोमा एवं स्नातकोत्तर (एम.ए.) पाठ्यक्रम संचालित हो रहे हैं, जो भाषा को जीवित रखने की दिशा में सराहनीय प्रयास है। उन्होेंने कहा कि भारत में अनेक भाषाएं एवं बोलियां बोली जाती है। इनमें से एक सिंधी भाषा है, जिसमें साहित्य और संस्कृति निरंतर प्रवाहमान है। उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद सिंधी समाज के लोग भारत देश का हिस्सा बनकर रह रहे है, सिंधी समाज के लोगों ने अपनी मेहनत के दम पर आज संपन्नता हासिल की और समाज ने देश के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि देश का ऐसा कोई राज्य नहीं होगा जहां सिंधी भाषी न रहते हांे। छत्तीसगढ़ में भी बड़ी संख्या में सिंधी समाज के लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपनी भाषा और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रयास करना अच्छी बात है लेकिन जिस प्रदेश में हम रहते है। वहां की भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए। तभी समाज में समरसता आती है।उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का इतिहास अत्यंत प्राचीन एवं समृद्ध रहा है। भारतीय भाषाएं हमारी सांस्कृतिक अस्मिता हैं। राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी भाषाएं मिलकर सांस्कृतिक सम्पन्नता को अभिव्यक्त करती हैं। इनका संरक्षण एवं संवर्धन करना हमारा कर्तव्य है। हमें मातृभाषाओं तथा भारतीय भाषाओं का सम्मान करना चाहिए। इनका प्रचार-प्रसार करना चाहिए। आधुनिक तकनीकी से जोड़ने का प्रयास भी आवश्यक है, जिससे आने वाली पीढ़ियों तक इन भाषाओं में समाहित ज्ञान-विज्ञान, इतिहास-विरासत, साहित्य एवं कला-संस्कृति आदि को सहज रूप में हस्तांतरित किया जा सके ।उन्होंने कार्यक्रम मंें गत वर्ष के आइडियाथॉन विजेताओं को पुरस्कार वितरण किया गया।इस अवसर पर शदाणी दरबार के पीठाधीश संत श्री युधीष्ठीर लाल जी महाराज, राष्ट्रीय सिंधी भाषा विकास परिषद नई दिल्ली से प्रोफेसर सुनील बाबूराव कुलकर्णी, रायपुर शहर के विधायक श्री पुरंदर मिश्रा, पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविधालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला और कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल सहित विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण एवं छात्र-छात्राएं और सिंधी समाज के पदाधिकारी उपस्थित थे।
- -सायरा बानो ई-रिक्शा चलाकर बनीं आत्मनिर्भरता की मिसालरायपुर /धमतरी जिले की सायरा बानो ने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो कोई भी कठिन परिस्थिति सफलता की राह नहीं रोक सकती। शारीरिक दिव्यांगता और अत्यंत कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद सायरा बानो आजआत्मनिर्भरता की प्रेरक मिसाल बनकर सामने आई हैं।कुछ समय पहले तक सायरा बानो का जीवन आर्थिक तंगी में गुजर रहा था। रोजगार के अभाव में उनके लिए रोज़मर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी बड़ी चुनौती बन गया था। लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और रोजगार के लिए जिला प्रशासन से सहायता की मांग की।सायरा बानो की परिस्थितियों और उनके मजबूत इरादों को देखते हुए प्रशासन ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया। उनके मार्गदर्शन में सायरा बानो को बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाया गया। प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने पूरी लगन और मेहनत के साथ ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीखी। साथ ही उन्हें स्व-रोजगार से जुड़ी जरूरी जानकारी भी दी गई तथा पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद समाज कल्याण विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के अंतर्गत सायरा बानो को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। आज सायरा बानो धमतरी शहर में आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर सम्मानजनक आजीविका कमा रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय हो रही है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं। सरकार का उद्देश्य शासन की विभिन्न योजनाओं से जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। यदि लाभार्थी दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।सायरा बानो की यह सफलता की कहानी न केवल दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए एक संदेश है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने का साहस और संकल्प हो।
- -जगदलपुर में 3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादियों ने किया आत्मसमर्पण, 44 महिला कैडर भी शामिलरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा के खिलाफ चल रही मुहिम को एक बड़ी सफलता बताते हुए कहा है कि अब बस्तर में बंदूक नहीं, बल्कि विश्वास की जीत हो रही है। उन्होंने कहा कि जगदलपुर में ₹3.29 करोड़ के इनामी 108 सशस्त्र माओवादी कैडरों द्वारा हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय इस बात का स्पष्ट संकेत है कि बस्तर में शांति, सुशासन और विकास की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन हो रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आत्मसमर्पण करने वाले इन माओवादी कैडरों में 44 महिला माओवादी भी शामिल हैं। यह दर्शाता है कि बस्तर के लोगों में अब विकास और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ने का विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति, सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों तथा बस्तर क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास कार्यों के कारण बड़ी संख्या में माओवादी हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो रहे हैं। इससे बस्तर में शांति का वातावरण मजबूत हो रहा है और आम लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई दे रहा है।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस सफलता के लिए सुरक्षा बलों के साहस, प्रशासन के प्रयासों तथा स्थानीय लोगों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि बस्तर के लोग अब भय और हिंसा से मुक्त होकर विकास और समृद्धि की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व और केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी के मार्गदर्शन में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की जा रही है। छत्तीसगढ़ सरकार केंद्र सरकार के साथ समन्वय करते हुए नक्सलवाद के पूर्ण खात्मे की दिशा में दृढ़ता से आगे बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य बस्तर सहित पूरे छत्तीसगढ़ को भयमुक्त, शांतिपूर्ण और विकसित बनाना है। इसके लिए सुरक्षा, विकास और विश्वास—इन तीनों मोर्चों पर लगातार कार्य किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भयमुक्त और विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण सरकार का अटल संकल्प है।
- जगदलपुर । जगदलपुर में बुधवार को पूना मारगेम पुनर्वास से पुनर्जीवन पहल के तहत दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के 108 नक्सली कैडरों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। समर्पित नक्सलियों में 44 महिला और 64 पुरुष नक्सली शामिल हैं। इन सभी पर 3.29 करोड़ का इनाम घोषित हैँ.।आत्मसमर्पण कार्यक्रम राज्य के डीजीपी अरुण देव गौतम, एडीजी विवेकानंद सिन्हा, बस्तर आईजी सुंदरराज पी सहित सीआरपीएफ, बीएसएफ और जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में आयोजित किया गया। इस दौरान नक्सलियों द्वारा जमा किए गए हथियारों और अन्य सामग्री की भी प्रदर्शनी लगाई गई। अधिकारियों ने बताया कि 101 घातक हथियार जिनमें, एके47, इंसास, एलएमजी, बीजीएल बरामद किये गये हैं। देश के नक्सल इतिहास में पहली बार 3.61 करोड़ रुपये नकद, 1.64 करोड़ मूल्य के एक किलो सोना बरामद किया गया है। अन्य सामग्री बरामद की गई है। इसे अब तक के नक्सल विरोधी अभियानों में सबसे बड़ी डंप बरामदगी माना जा रहा है।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह सभी डंप और सामग्री बस्तर रेंज के अलग-अलग जिलों बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और बस्तर में चलाए गए अभियानों के दौरान बरामद की गई थी। इन सभी को जगदलपुर स्थित रेंज मुख्यालय में आयोजित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया।अधिकारियों का कहना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों के चलते बड़ी संख्या में नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बस्तर में शांति और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- -निजी क्षेत्र के 396 पदों पर भर्तीकोण्डागांव ।कोण्डागांव एवं अन्य जिलों के शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए रोजगार का अवसर उपलब्ध कराने कार्यालय जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केन्द्र, कोण्डागांव द्वारा 13 मार्च 2026 दिन शुक्रवार को एक दिवसीय प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। यह प्लेसमेंट कैम्प कलेक्टर परिसर, जिला पंचायत के सामने स्थित आशा सिलाई सेंटर के बाजू, कोण्डागांव में पूर्वाह्न 11 बजे से अपराह्न 3 बजे तक आयोजित होगा।इस प्लेसमेंट कैम्प के माध्यम से निजी क्षेत्र की विभिन्न कंपनियों द्वारा कुल 396 रिक्त पदों पर भर्ती की जाएगी। इसमें स्काई ऑटोमोबाइल कोण्डागांव द्वारा रिलेशनशीप मैनेजर 6 पद एवं रिसेप्शनिष्ट के 2 पद, सेल्फ इंटिलिजेण्ट सिक्यूरिटी सर्विसेस भिलाई में सिक्यूरिटी गार्ड के 100 पद, सिक्यूरिटी सुपर वाइजर के 50 पद, फील्ड ऑफिसर, ट्रेनिंग ऑफिसर, मार्केटिंग मैनेजर और अकॉउंटेट के 02-02 पद, लेबर के 200 पद, स्वतंत्र माइक्रोफिन प्रा. लि. के फील्ड ऑफिसर के 30 पद शामिल है।प्लेसमेंट कैम्प में भाग लेने के इच्छुक युवक-युवतियों को अपने समस्त शैक्षणिक प्रमाण पत्र, रोजगार पंजीयन, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पासपोर्ट साइज फोटो सहित सभी मूल दस्तावेज एवं छायाप्रति के साथ निर्धारित तिथि एवं समय पर उपस्थित होने का आग्रह किया गया है। जिला रोजगार कार्यालय द्वारा युवाओं से अपील की गई है कि वे इस अवसर का अधिक से अधिक लाभ उठाकर निजी क्षेत्र में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं।
- -चेकर्ड प्लेट्स के फिर से उत्पादन शुरू करने के साथ, उत्पाद पोर्टफोलियो का किया विस्तारदुर्ग। देश के सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक महारत्न कंपनी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी (11 महीने) की अवधि के दौरान अब तक की अपनी सर्वश्रेष्ठ बिक्री दर्ज की है। कंपनी ने 18.24 मिलियन टन (MT) की रिकॉर्ड कुल बिक्री हासिल की, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14% की वृद्धि दर्शाती है।इसी अवधि के दौरान, सेल ने 1.11 लाख करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक नकद संग्रह (Cash Collection) भी हासिल किया, जिसमें वार्षिक आधार पर 10% की वृद्धि देखी गई। इस दौरान रिटेल बिक्री, स्टॉकयार्ड बिक्री और डोर डिलीवरी (door deliveries) में महत्वपूर्ण सुधार हुआ, जो कंपनी के मजबूत ग्राहक-केंद्रित दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।फरवरी 2026 की उपलब्धियां:कंपनी ने 1.58 मिलियन टन की कुल बिक्री दर्ज की।जनवरी 2026 की तुलना में इन्वेंट्री में 1.05 लाख टन की कमी आई।कंपनी ने अपने कर्ज (borrowings) को 1000 करोड़ रुपये कम किया।बाजार की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करते हुए, सेल ने संबंधित क्षेत्रों की मांग को देखते हुए चेकर्ड प्लेट्स (chequered plates) का उत्पादन फिर से शुरू कर दिया है। पहली बार, झारखंड स्थित सेल के बोकारो स्टील प्लांट से चेकर्ड प्लेट्स का उत्पादन किया जा रहा है।इस प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए, निदेशक (वित्त) एवं निदेशक (वाणिज्यिक ) का कार्यभार भी संभाल रहे डॉ. ए.के. पांडा ने कहा: "हम बाजार के अनुरूप ढलने और आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं। इन्वेंट्री और वर्किंग कैपिटल का कुशलतापूर्वक प्रबंधन करके, हम उस वित्तीय अनुशासन का प्रदर्शन कर रहे हैं जो कंपनी की नींव को मजबूत करता है। साथ ही, हमारी रिकॉर्ड बिक्री और नकद संग्रह हमारे ग्राहकों द्वारा हम पर जताए गए भरोसे का प्रमाण है।"
- -राजधानी क्षेत्र के योजनाबद्ध विकास से छत्तीसगढ़ को मिलेगा नया ग्रोथ इंजन: मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय-महानगरों की तर्ज पर विकसित होगा स्टेट कैपिटल रीजन, आधुनिक अधोसंरचना और कनेक्टिविटी को मिलेगी गति-एससीआर में व्यवस्थित आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार-वाणिज्य, कनेक्टिविटी और आधुनिक अधोसंरचना का होगा तेजी से विकास-निर्धारित योजना और समयसीमा के अनुरूप पूरे किए जाएं एससीआर के काम, मुख्यमंत्री ने प्रगति की नियमित रूप से उच्चस्तरीय समीक्षा के दिए निर्देशरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज विधानसभा परिसर स्थित उनके कार्यालय में छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण (स्टेट कैपिटल रीजन – SCR) की पहली बैठक आयोजित की गई। बैठक में प्राधिकरण के उद्देश्य, कार्यप्रणाली, गतिविधियों तथा राजधानी क्षेत्र के समग्र और योजनाबद्ध विकास की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।मुख्यमंत्री श्री साय ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण की परिकल्पना शहर की बढ़ती आबादी को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार-वाणिज्य और रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण की पहली बैठक अत्यंत सार्थक रही है और विभिन्न विषयों पर हुई विस्तृत चर्चा के सकारात्मक परिणाम आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राजधानी रायपुर और आसपास के शहर तेजी से विकसित होते हुए एक बड़े शहरी क्षेत्र का रूप ले रहे हैं, इसलिए महानगरों की तर्ज पर इनके संतुलित और योजनाबद्ध विकास की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि स्टेट कैपिटल रीजन की घोषणा से जनता की अपेक्षाएँ भी बढ़ी हैं और इन अपेक्षाओं को पूरा करना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित योजना और समयसीमा के अनुरूप पूरे किए जाएं तथा प्रगति की नियमित रूप से उच्चस्तरीय समीक्षा सुनिश्चित की जाए।बैठक में बताया गया कि राजधानी रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों को स्टेट कैपिटल रीजन (SCR) के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें रायपुर, दुर्ग-भिलाई, नवा रायपुर अटल नगर और आसपास के क्षेत्र शामिल होंगे। यह क्षेत्र बड़े महानगरों की तर्ज पर विकसित किया जाएगा और भविष्य में छत्तीसगढ़ के विकास का एक प्रमुख ग्रोथ इंजन बनेगा।बैठक में राजधानी क्षेत्र में क्षेत्रीय मोबिलिटी और लॉजिस्टिक्स के विकास, मेट्रो संचालन के लिए टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी स्टडी, सर्वेक्षण कार्यों के संचालन तथा इसके लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की नियुक्ति पर विचार किया गया। साथ ही प्राधिकरण के प्रशासकीय और वित्तीय अधिकारों के प्रत्यायोजन, ऑडिट सेवाओं के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट की नियुक्ति और प्लानिंग प्रभाग के लिए विशेषज्ञ सलाहकारों की सेवाएं लेने के प्रस्तावों पर भी चर्चा की गई।बैठक में राजधानी क्षेत्र विकास एवं निवेश योजना तैयार करने की कार्ययोजना पर भी विचार किया गया। इसके अंतर्गत निवेश क्षेत्रों का विधिवत चिन्हांकन, आवश्यक सर्वेक्षण, अनुसंधान एवं अध्ययन तथा चरणबद्ध रूप से परियोजनाओं के क्रियान्वयन की रणनीति तैयार की जाएगी। साथ ही राजधानी क्षेत्र में भूमि विकास और आबंटन की प्रक्रिया को सरल बनाने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश जारी करने पर सहमति बनी। बैठक में प्राधिकरण की प्रारंभिक गतिविधियों के लिए 27 करोड़ रुपये के प्रावधान की जानकारी भी दी गई।बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव, वित्त मंत्री श्री ओपी चौधरी, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, छत्तीसगढ़ राजधानी क्षेत्र विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अंकित आनंद, नगरीय प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., एनआरडीए के सीईओ श्री चंदन कुमार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।उल्लेखनीय है कि भौगोलिक दृष्टि से देश के मध्य में स्थित छत्तीसगढ़ व्यापार, वाणिज्य और उद्योग के एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। स्टेट कैपिटल रीजन के विकास से राजधानी और आसपास के शहरों में योजनाबद्ध शहरी विस्तार, बेहतर परिवहन कनेक्टिविटी, आधुनिक अधोसंरचना और निवेश के नए अवसर उपलब्ध होंगे।
- राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव की अध्यक्षता में आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में दिए गए निर्देशों के पालन में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र छुरिया एवं घुमका में 108 एम्बुलेंस सेवा का पुन: संचालन शुरू कर दिया गया है। पूर्व में दोनों स्थानों की एम्बुलेंस ब्रेकडाउन की स्थिति में थी, जिसे सुधारकर पुन:चालू किया गया है। अब यह एम्बुलेंस क्षेत्र के नागरिकों को आपातकालीन स्थिति में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराएगी। 108 एम्बुलेंस सेवा के पुन: संचालन से छुरिया एवं घुमका क्षेत्र के मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में सुविधा होगी तथा आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और अधिक सुलभ हो सकेंगी।
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- प्रत्येक गुरूवार को पोट्ठ लईका पहल अभियान के तहत अभिभावकों, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को दी जा रही पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने जिले में कुपोषण की समस्या को दूर करने तथा आंगनबाड़ी केन्द्रों के बेहतर संचालन में सक्रियतापूर्वक कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। कलेक्टर श्री यादव ने आंगनबाड़ी केन्द्र खपरीकला की कार्यकर्ता श्रीमती फुलेश्वरी साहू, आंगनबाड़ी केन्द्र गठुला की कार्यकर्ता श्रीमती पुष्पा साहू एवं आंगनबाड़ी केन्द्र डुमहाटोला की कार्यकर्ता श्रीमती उमेश्वरी साहू को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने कहा कि कुपोषण मुक्त समाज के निर्माण में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों, माताओं एवं गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य एवं पोषण के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केन्द्रों में नियमित गतिविधियों के संचालन तथा पोषण संबंधी जागरूकता के माध्यम से कुपोषण को कम करने में महत्वपूर्ण योगदान मिल रहा है।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से चर्चा कर उनके कार्यों की जानकारी भी ली। कार्यकर्ता द्वारा बताया गया कि आंगनबाड़ी केन्द्र में प्रत्येक गुरूवार को पोट्ठ लईका पहल अभियान के अंतर्गत पालक चौपाल का आयोजन किया जाता है। इस दौरान अभिभावकों, गर्भवती महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य एवं पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है। इस अभियान से लोगों में जागरूकता बढ़ी है तथा कुपोषण दूर करने में सकारात्मक परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। कलेक्टर ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया तथा आगे भी इसी प्रकार समर्पण के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री प्रेमप्रकाश शर्मा सहित संबंधित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे। -
-कलेक्टर ने की युवाओं से आवेदन करने की अपील
बिलासपुर /भारतीय थल सेना (अग्निवीर) में भर्ती के लिए इच्छुक एवं पात्र युवाओं से 1 अप्रैल 2026 तक ऑनलाईन आवेदन मंगाये गये है। पुरूष अभ्यर्थी जनरल, तकनीकी, लिपिक, स्टोरकीपर, टेªडमैन एवं महिला अभ्यर्थी सेना पुलिस तथा स्थायी कैडर नर्सिंग असिस्टेंट, नर्सिंग असिस्टेंट वेट और सिपाही फार्मा के लिए आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा 17.5 से 22 वर्ष एवं आवेदन शुल्क 250 रूपए निर्धारित किया गया है। आवेदन वेबसाईट www.joinindianarmy.nic.in पर जाकर किये जा सकते है। ऑनलाइन कॉमन एंट्रेस एग्जाम (सीईई) 1 जून से 10 जून 2026 तक होने की संभावना है। विस्तृत जानकारी के लिए सेना भर्ती कार्यालय नवा रायपुर के टेलीफोन नंबर 0771-2965212, 2965214 एवं जिला रोजगार कार्यालय से भी संपर्क किया जा सकता है। कलेक्टर ने जिले के युवाओं से अग्निवीर भर्ती में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है। - -हिट एंड रन के 4 मामलों में 2-2 लाख की सहायता की अनुशंसाबिलासपुर /कलेक्टर संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें टक्कर मारकर भागने (हिट एंड रन) से हुई सड़क दुर्घटनाओं में मृत व्यक्तियों के प्रकरणों की समीक्षा की गई। बैठक में चार मामलों में पीड़ित परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि स्वीकृत करने की अनुशंसा की गई।बैठक में प्रस्तुत प्रकरणों के अनुसार सीपत तहसील के ग्राम सोठी की सतरूपा बाई, बोदरी तहसील के ग्राम सरगांव निवासी संतोष कुमार वर्मा, कोटा तहसील के ग्राम देवरी कला निवासी कुसुम बाई मेहरा तथा बिल्हा तहसील के ग्राम मोहदा की श्रीमती राजेश्वरी पटेल के निकट संबंधियों की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होने के मामले समिति के समक्ष रखे गए। सभी मामलों की जांच एवं परीक्षण के बाद समिति ने प्रत्येक पीड़ित परिवार को 2 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने की अनुशंसा की। बैठक में जिला स्तरीय समिति के सदस्य के रूप में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह, एडीएम शिव कुमार बनर्जी, क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, जीव धरणी फाउंडेशन के अध्यक्ष विकास चंद्र वर्मा और न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।समिति ने प्रकरणों का परीक्षण कर पात्रता के आधार पर सहायता राशि की अनुशंसा की। उल्लेखनीय है कि हिट एंड रन मोटर दुर्घटनाओं के पीड़ित लोगों को मृत्यु की स्थिति में 2 लाख एवं गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में ₹50 हजार क्षतिपूर्ति राशि दिए जाने का प्रावधान किया गया है। यह प्रावधान 1 अप्रैल 2022 से लागू है। कलेक्टर ने समिति के सदस्यों और जनप्रतिनिधियों को योजना का अधिक से अधिक प्रचार कर पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित करने में मदद करने का आग्रह किया है।
- -पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और सुविधाएं विकसित करने के दिए निर्देशबिलासपुर, /संभागायुक्त श्री सुनील जैन ने आज चकरभाठा स्थित पीएम श्री स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने प्राचार्य से स्कूल में संचालित कक्षाओं की जानकारी ली तथा शिक्षण व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने पढ़ाई की गुणवत्ता बढ़ाने और सुविधाएं विकसित करने कहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल भवन के पीछे स्थित परिसर में गार्डन और ओपन जिम विकसित करने के निर्देश दिए।कमिश्नर श्री जैन ने स्कूल में शिक्षकों के रिक्त पदों की भी जानकारी ली और शैक्षणिक गतिविधियों को बेहतर बनाने पर जोर दिया। उन्होंने स्कूल की लैब और लाइब्रेरी का निरीक्षण करते हुए लाइब्रेरी को सुव्यवस्थित रखने के निर्देश दिए। साथ ही लाइब्रेरी को हाईटेक बनाते हुए सभी व्यवस्थाओं को ऑनलाइन करने कहा। निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल परिसर में मिनी स्टेडियम बनाने के निर्देश भी दिए। परिसर में निर्मित 16 कमरों की भवन की स्थिति का अवलोकन करते हुए उन्होंने उसकी मरम्मत कराने तथा सीपेज की समस्या को दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगले सत्र तक सभी आवश्यक कार्य पूर्ण करा लिए जाएं।इस दौरान डिप्टी कमिश्नर श्रीमती स्मृति तिवारी, समग्र शिक्षा के जिला समन्वयक श्री ओम पांडे सहित संबंधित अधिकारी एवं स्कूल के प्राचार्य उपस्थित थे।
- रायपुर ।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण गरीबी उन्मूलन परियोजना है। यह योजना स्व-रोजगार को बढ़ावा देने और ग्रामीण गरीबों को संगठित करने पर केंद्रित है। इस कार्यक्रम का मूल उद्देश्य गरीबों को स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) में संगठित करना और उन्हें स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाना है। ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत धमतरी जिले की सारंगपुरी पंचायत निवासी श्रीमती मधु कंवर आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बनकर क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं।कभी आर्थिक तंगी के कारण दूसरों के खेतों में मजदूरी करने वाली मधु कंवर ने अपने संघर्ष, मेहनत और शासन की योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा बदल दी। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया।आज मधु कंवर अपने गांव में कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) का संचालन कर रही हैं। इस केंद्र के माध्यम से ग्रामीणों को आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र, विवाह पंजीयन, आधार कार्ड अपडेट, श्रम कार्ड पंजीयन, आयुष्मान कार्ड, बिजली बिल भुगतान सहित कई ई-गवर्नेंस सेवाएं रियायती दरों पर उपलब्ध हो रही हैं।इस पहल से ग्रामीणों को अब छोटी-छोटी शासकीय सेवाओं के लिए शहर नहीं जाना पड़ता। इस कार्य से मधु को प्रतिमाह लगभग 10 से 12 हजार रुपये की नियमित आय हो रही है, जिससे उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है। मधु कंवर बताती हैं कि एक समय परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर थी कि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया था। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत “जय माँ कर्मा महिला स्व-सहायता समूह” से जुड़कर नई शुरुआत की।समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धान खरीदी-बिक्री, मशरूम उत्पादन और छोटे स्वरोजगार के कार्य शुरू किए। समूह से ऋण सुविधा मिलने पर उन्होंने अपने घर में ही कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किया, जो धीरे-धीरे उनकी आय का मजबूत साधन बन गया।मधु कंवर के समूह की महिलाएं आज कई आय संवर्धन गतिविधियों से जुड़ी हैं। इनमें मोमबत्ती निर्माण, केक बनाना, मशरूम उत्पादन, मछली पालन और बैंक सखी के रूप में कार्य शामिल हैं। इन कार्यों से महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन और जनकल्याणकारी योजनाओं का सकारात्मक प्रभाव अब ग्रामीण क्षेत्रों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। आज मधु कंवर न केवल अपने परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। उनके प्रयासों से गांव की अन्य महिलाएं भी स्व-सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की योजनाओं और सुशासन की पहल से मधु कंवर जैसी ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने गांव के विकास में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनकी सफलता यह संदेश देती है कि अवसर, मार्गदर्शन और संकल्प के साथ ग्रामीण महिलाएं भी सफलता की नई कहानी लिख सकती हैं।
- महासमुंद / जिले के आकांक्षी विकासखंड पिथौरा अंतर्गत ग्राम भुरकोनी में संपूर्णता अभियान 2.0 के तहत जनसमस्या निवारण शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें विभिन्न विभागों द्वारा ग्रामीणों को शासन की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा उनकी समस्याओं का समाधान किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने पहुंचकर योजनाओं की जानकारी प्राप्त की और उनका लाभ लिया। शिविर में मुख्य अतिथि के रूप में जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल उपस्थित रहे तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद प्रतिनिधि मनमीत सिंह छाबड़ा ने की। इस अवसर पर जनपद सभापति दिनेश कुमार अग्रवाल, सरपंच सरिता राज सिंह दीवान सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद उपाध्यक्ष ब्रह्मानंद पटेल ने कहा कि शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लें और योजनाओं की जानकारी अन्य लोगों तक भी पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि संपूर्णता अभियान 2.0 के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन तथा महिला एवं बाल विकास विभाग के समन्वय से कार्य किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में विकास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके और इन योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सांसद प्रतिनिधि मनमीत सिंह छाबड़ा ने कहा कि केंद्र सरकार और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाएं ग्रामीणों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के उद्देश्य से संचालित की जा रही हैं। ऐसे शिविरों के माध्यम से उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पा रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से आग्रह किया कि वे शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।सीईओ जनपद पंचायत पिथौरा श्रीमती योगेश्वरी बर्मन के नेतृत्व में आयोजित इस शिविर में स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान कार्ड निर्माण, कृषि विभाग द्वारा प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से संबंधित जानकारी व समस्याओं का निराकरण किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की जांच, गर्भवती महिलाओं की गोदभराई और बच्चों का अन्नप्राशन कराया गया। वहीं शिक्षा विभाग द्वारा नई शिक्षा नीति के बारे में ग्रामीणों को जानकारी दी गई।
- महासमुंद / बसना विकासखंड के ग्राम सोनामुंडी की निवासी श्रीमती मालती निषाद के लिए छत्तीसगढ़ शासन की नोनी सुरक्षा योजना उम्मीद की नई किरण बनकर आई है। इस योजना का लाभ मिलने से अब उन्हें अपनी दोनों बेटियों के उज्ज्वल भविष्य को लेकर एक नया आत्मविश्वास मिला है।मालती निषाद बताती हैं कि उन्हें इस योजना की जानकारी उनके गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से मिली। जानकारी मिलने के बाद उन्होंने अपनी दोनों बेटियों का पंजीकरण कराया। योजना से जुड़ने के बाद उन्हें यह भरोसा हुआ कि उनकी बेटियों का भविष्य अब पहले से अधिक सुरक्षित है।मालती कहती हैं, पहले बेटियों की पढ़ाई और भविष्य को लेकर चिंता रहती थी, लेकिन अब सरकार की इस योजना से मुझे हिम्मत मिली है। मैं अपनी दोनों बेटियों को अच्छी से अच्छी शिक्षा दिलाना चाहती हूं, ताकि वे आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बन सकें। मालती निषाद जैसी कई माताओं के लिए नोनी सुरक्षा योजना किसी वरदान से कम नहीं है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से लगातार जागरूकता फैलने से ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ रहे हैं और बेटियों के भविष्य को सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। मालती निषाद एवं अन्य लाभार्थियों ने बेटियों की भविष्य की सुरक्षा के लिए राज्य शासन का धन्यवाद ज्ञापित किया है।उल्लेखनीय है कि नोनी सुरक्षा योजना महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2014 से संचालित की जा रही है। इस योजना का उद्देश्य गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों की बेटियों को सुरक्षित भविष्य प्रदान करना, बालिका भ्रूण हत्या और बाल विवाह को रोकना तथा बालिकाओं की शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना है।
- बिलासपुर /ईरान युद्ध से उत्पन्न अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच जिले में घरेलू एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखने के लिए कलेक्टर संजय अग्रवाल ने खाद्य विभाग के अधिकारियों और गैस वितरकों की बैठक लेकर व्यवस्था की समीक्षा की। कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि जिले में घरेलू गैस की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए आम उपभोक्ताओं को घबराने या पैनिक में आकर गैस का अनावश्यक भंडारण करने की जरूरत नहीं है।बैठक में कलेक्टर श्री अग्रवाल ने कहा कि घरेलू उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए होटल और उद्योगों में व्यवसायिक उपयोग के लिए दी जाने वाली गैस सिलेंडरों की आपूर्ति फिलहाल बंद कर दी गई है। हालांकि अस्पतालों और स्कूलों को उनकी वास्तविक जरूरत के अनुसार गैस उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा गैस वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कलेक्टर ने गैस एजेंसी संचालकों को सख्त निर्देश दिए कि घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का किसी भी प्रकार से व्यवसायिक या अन्य उपयोग न होने दें। वितरण व्यवस्था की निगरानी स्वयं एजेंसी संचालक करें और इसे केवल अपने कर्मचारियों के भरोसे न छोड़ें। साथ ही किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को सिलेंडर देने या ब्लैक मार्केटिंग जैसी गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने को कहा गया।बैठक में जानकारी दी गई कि जिले में घरेलू गैस के लगभग 4.80 लाख कनेक्शन हैं। तीन ऑयल कंपनियों के 38 गैस वितरकों के माध्यम से इन उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर की आपूर्ति की जाती है, जिनमें से 22 वितरक केवल बिलासपुर शहर में संचालित हैं। वर्तमान में जिले में प्रतिदिन लगभग 5 हजार गैस सिलेंडरों की डिलीवरी की जा रही है और पिछले 10 दिनों से इसी दर से आपूर्ति जारी है। बैठक में यह भी बताया गया कि गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि 21 दिन से बढ़ाकर 25 दिन कर दी गई है। गैस वितरकों ने शहर में लागू नो-एंट्री प्रतिबंध से राहत देने की मांग भी रखी, जिस पर कलेक्टर ने सकारात्मक विचार करने का भरोसा दिलाया। कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक में आकर गैस सिलेंडरों का अनावश्यक भंडारण न करें। जिले में गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। बैठक में खाद्य नियंत्रक अमृत कुजूर, एएफओ राजीव लोचन तिवारी, कंपनी के नोडल अधिकारी हेम प्रकाश साहू, गैस वितरक संघ के जिला अध्यक्ष सुभाष जायसवाल सहित जिले के सभी गैस वितरक उपस्थित थे।
- बिलासपुर /जिले के ग्राम साल्हेखापा निवासी श्रीमती गीता यादव ने मेहनत, लगन और सरकारी योजनाओं के सहयोग से आर्थिक आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश की है। कभी मुश्किल और परेशानियों भरे जीवन में सीमित आय में परिवार का गुजारा करने वाली गीता यादव आज ‘लखपति दीदी’ बनकर ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। गीता ने इसके लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का आभार जताया है।गीता यादव के परिवार की मुख्य आजीविका पहले कृषि कार्य पर निर्भर थी। पर्याप्त भूमि होने के बावजूद संसाधनों की कमी के कारण परिवार की कुल वार्षिक आय केवल 88,100 रुपये थी, जिससे परिवार की जरूरतें पूरी करना कठिन था।साल 2021 में उन्होंने बिहान योजना के माध्यम से स्व-सहायता समूह से जुड़कर बैंक ऋण, सीआईएफ और आरएफ की सहायता प्राप्त की। इस सहयोग से उन्होंने कृषि कार्य के साथ-साथ मुर्गी पालन, मछली पालन और भैंस पालन जैसे नए व्यवसाय शुरू किए। इन प्रयासों से उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। वर्तमान में उन्हें कृषि से 88,100 रुपये, मुर्गी पालन से 87,000 रुपये, मछली पालन से 70,000 रुपये और भैंस पालन से 60,000 रुपये की आय प्राप्त हो रही है। इस प्रकार उनके परिवार की कुल वार्षिक आय बढ़कर लगभग 3,05,100 रुपये हो गई है। गीता कहती है सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से उन जैसी हजारों महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। गीता की सफलता ये संदेश देती है कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और योजनाओं का उचित लाभ मिले तो वे आत्मनिर्भर बन आर्थिक सशक्तिकरण की ओर बढ़ सकती हैं। आज गीता यादव अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए प्रेरित कर रही
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- महिलाओं की आत्मनिर्भरता और आर्थिक संबल बन रही महतारी वंदन योजना
मोहला । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य में विभिन्न प्रकार की जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें महतारी वंदन योजना महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ वे आत्मनिर्भर भी बन रही हैं।ऐसी ही कहानी है मानपुर विकासखंड के ग्राम सरोली निवासी श्रीमती संगीता की, जिनके जीवन में महतारी वंदन योजना ने बड़ी राहत प्रदान की है। संगीता एक साधारण गृहिणी हैं, जो पहले अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में कई चुनौतियों का सामना करती थीं। लेकिन अब इस योजना के अंतर्गत मिलने वाली 1000 रुपए की मासिक सहायता राशि ने उनके जीवन को काफी हद तक आसान बना दिया है।हर महीने मिलने वाली इस राशि से संगीता अब घर के छोटे-मोटे खर्च आसानी से पूरा कर पा रही हैं। वे इस सहायता राशि का उपयोग घर के लिए राशन सामग्री खरीदने और साप्ताहिक बाजार से आवश्यक सामान तथा सब्जियां लेने में करती हैं। पहले उन्हें इन जरूरतों को पूरा करने में कठिनाई होती थी और कई बार पति की आय पर ही पूरी तरह निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब महतारी वंदन योजना की सहायता राशि उनके लिए बड़ा सहारा बन गई है। श्रीमती संगीता बताती हैं कि इस योजना ने न केवल उनके परिवार की आर्थिक तंगी को कम किया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का भी अवसर दिया है। अब वे अपनी दैनिक जरूरतें स्वयं पूरी कर पा रही हैं, जिससे उनके परिवार को एक स्थिर और बेहतर जीवन मिल रहा है।हितग्राही संगीता ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना से उन्हें और उनके परिवार को काफी मदद मिली है। अब वे अपने बच्चों और घर की आवश्यकताओं को बिना किसी परेशानी के पूरा कर पा रही हैं। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री साय को धन्यवाद दिया। -
राजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने मंगलवार को साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक में जिला स्तरीय अधिकारियों को प्रथमोपचार किट का वितरण किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य कार्यस्थल पर आपातकालीन स्वास्थ्य स्थितियों और छोटी-मोटी चोटों के समय तत्काल चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना तथा अधिकारियों के भ्रमण और कार्यालयीन कार्यों के दौरान किसी भी आकस्मिक दुर्घटना या स्वास्थ्य समस्या होने पर प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराना है। वितरित किट में बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा सामग्री जैसे एंटीसेप्टिक घोल, चिपकने वाला टेप, कीटाणुनाशक वाइप्स, एंटीबायोटिक मरहम, दर्द निवारक दवाएं, बैंड-एड और पट्टी शामिल हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एनआर नवरत्न ने बताया कि यह कदम सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने और सरकारी तंत्र में स्वास्थ्य सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि प्राथमिक उपचार की उपलब्धता अक्सर गंभीर परिस्थितियों में जीवन रक्षक साबित हो सकती है। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम डोंगरगढ़ श्री एम भार्गव, एसडीएम डोंगरगांव श्री श्रीकांत कोराम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे। - - जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के दिए निर्देशराजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने मंगलवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में जिले के विभिन्न स्थानों से आए जनसामान्य की शिकायत एवं समस्याओं को गंभीरता से सुना। कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को प्राप्त सभी आवेदनों को प्राथमिकता के साथ त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नागरिकों की समस्याओं का नियमानुसार निराकरण करते हुए उन्हें शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित करने कहा। आवेदनों का अवलोकन कर नियमानुसार पात्र हितग्राहियों को शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करने के लिए निर्देश दिए। कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि जनमानस उम्मीद लेकर जनदर्शन में आते है। उनकी समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए समाधान शीघ्र करें। जनदर्शन में प्रधानमंत्री आवास योजना से लाभान्वित करने, भू-अर्जन, अवैध अतिक्रमण हटाने, सीमांकन, नजूल से संबंधित, पेंशन, राजस्व रिकार्ड दुरूस्त कराने सहित विभिन्न शासकीय योजनाओं से लाभ दिलाने जैसे आवेदन प्राप्त हुए। कलेक्टर ने जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का प्राथमिकता के साथ निराकरण के लिए निर्देश दिए। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेमप्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- - धान के उठाव के कार्य में तेजी लाने के दिए निर्देश- स्वीकृत एवं निर्माणाधीन कार्यों को प्राथमिकता से शीघ्र पूर्ण करने के दिए निर्देश-बच्चों का आधार अपडेशन शिविर आयोजित करने के लिए कहा- कलेक्टर ने साप्ताहिक समय-सीमा की बैठक लीराजनांदगांव । कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने मंगलवार को कलेक्टोरेट सभाकक्ष में साप्ताहिक समय सीमा की बैठक ली। कलेक्टर ने इस वर्ष बजट में शामिल विकास कार्यों की गहन समीक्षा की। उन्होंने बजट में शामिल विकास कार्य को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र प्राक्कलन बनाकर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिससे जनसामान्य को इसका लाभ मिल सके। उन्होंने पिछले वर्ष में बजट में स्वीकृत कार्यों के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने स्वीकृत एवं निर्माणाधीन कार्यों को प्राथमिकता के साथ शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी अनुविभागीय अधिकारी एवं तहसलदारों को सर्वेयर द्वारा किए गिरदावरी कार्य की पुन: जांच कर रिपोर्ट शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। जिले में शासकीय भूमि पर अतिक्रमण को संज्ञान लेते हुए हटाने के निर्देश दिए। जिससे शासकीय भूमि का शासकीय विकास कार्यों में उपयोग किया जा सके। उन्होंने सभी विभाग प्रमुखों को अपने विभाग से संबंधित उच्च न्यायालय में चल रहे प्रकरणों की जांच कर समय-सीमा में जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने सभी आंगनबाड़ी एवं स्कूली बच्चों के आधार अपडेशन अनिवार्य रूप से करने के निर्देश दिए। इसके लिए तिथि निर्धारित करते हुए प्रत्येक स्कूलों में छूटे हुए बच्चों का आधार अपडेशन शिविर आयोजित करने कहा, जिससे शत प्रतिशत बच्चों का आधार कार्ड बन सके। कलेक्टर ने जिले में संस्थागत प्रसव बढ़ाने के निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने बाल एवं मातृत्व मृत्यु दर में कमी लाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने छात्रावासों में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर ध्यान देते हुए लगातार निरीक्षण करने के लिए कहा। छात्रावासों में नजदीकी हॉस्पिटलों की सूची चस्पा करने के निर्देश दिए। बच्चों को समय पर छात्रवृत्ति दिलाने के लिए कहा। कलेक्टर ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए धान के उठाव के कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। उन्होंने राईस मिलर्स के लिए लक्ष्य निर्धारित करने कहा। परिवहन विभाग को अवैध परिवहन करने वाले वाहनों की नाका लगाकर जांच कर करने के निर्देश दिए। उन्होंने जिले में प्रतिबंधित शराब को तत्काल प्रभाव से विक्रय एवं भण्डारण पर प्रतिबंधित करने के निर्देश दिए। बैठक में सीईओ जिला पंचायत सुश्री सुरूचि सिंह, अपर कलेक्टर श्री सीएल मारकण्डेय, अपर कलेक्टर श्री प्रेम प्रकाश शर्मा, नगर निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा, एसडीएम डोंगरगढ़ श्री एम भार्गव, एसडीएम डोंगरगांव श्री श्रीकांत कोराम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
- कांकेर। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कांकेर द्वारा विकासखण्ड नरहरपुर अंतर्गत ग्राम पंडरीपानी में शासकीय उचित मूल्य की दुकान आबंटित किए जाने हेतु इच्छुक पात्र एजेंसियों से आगामी 23 मार्च तक आवेदन आमंत्रित किया गया है। उचित मूल्य दुकान संचालन के लिए वृहत्ताकार आदिम जाति सेवा सहकारी समिति, कृषि साख समितियों, वन सुरक्षा समितियों, महिला स्व-सहायता समूह, ग्राम पंचायत एवं अन्य सहकारी समितियां जो शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालित करने के इच्छुक हैं, ऐसी संस्था से समस्त दस्तावेजों के साथ निर्धारित प्रारूप में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कांकेर में कार्यालयीन समय पर आवेदन आगामी 23 मार्च तक जमा करने कहा गया है।
- रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि छत्तीसगढ़ में रोजगार और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं और महिला कोष की योजनाएं महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि शिविरों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से अधिक से अधिक जरूरतमंद महिलाओं तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे इसका लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन सकें।मंत्री श्रीमती राजवाड़े अटल नगर, नवा रायपुर स्थित मंत्रालय में छत्तीसगढ़ महिला कोष के शासी बोर्ड एवं आमसभा की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं। बैठक में महिला कोष की विभिन्न योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई।बैठक में वित्तीय वर्ष 2024-25 में ऋण योजना के तहत 1500 महिला स्व-सहायता समूहों को 30 करोड़ रुपये तथा सक्षम योजना के तहत 1000 पात्र महिलाओं को 14 करोड़ रुपये के ऋण वितरण की साख योजना के कार्योत्तर अनुमोदन एवं उपलब्धियों की जानकारी दी गई। साथ ही सक्षम योजना, ऋण योजना और स्वावलंबन योजना के लक्ष्यों एवं उपलब्धियों पर भी चर्चा की गई।बैठक में यह जानकारी दी गई कि महिला स्व-सहायता समूहों को वर्तमान में द्वितीय बार अधिकतम 6 लाख रुपये तक ऋण दिए जाने का प्रावधान है। इसी प्रकार सक्षम योजना के अंतर्गत महिलाओं को अधिकतम 2 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन प्रावधानों में आवश्यकता अनुसार संशोधन किए जाने के संबंध में भी विचार-विमर्श किया गया।सितंबर 2025 की स्थिति में जिलों में कुल 8 लाख 2 हजार 843 रुपये की राशि ब्याज के रूप में जमा होने की जानकारी दी गई, जिसका उपयोग महिला कोष के सॉफ्टवेयर निर्माण के लिए किए जाने पर विचार किया गया। बैठक में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं एवं सहायिकाओं को भी पात्रता के आधार पर सक्षम योजना से लाभान्वित करने तथा योजना में महिलाओं की आयु सीमा 25 से 50 वर्ष करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई।महिला एवं बाल विकास विभाग की संचालक श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक एवं सामाजिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष का गठन किया गया है। इसके तहत महिलाओं को मात्र 3 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे वे स्वरोजगार और छोटे व्यवसाय प्रारंभ कर आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं।बैठक में महिला एवं बाल विकास, वाणिज्य एवं उद्योग, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास, समाज कल्याण, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ग्रामोद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन, वन तथा कौशल विकास एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रतिनिधियों के साथ ही नेहरू युवा केन्द्र, नाबार्ड, छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक, भारतीय स्टेट बैंक तथा यूनिसेफ के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
- -स्व सहायता समूह से जुड़कर कांसाबेल की महिलाओं ने स्वरोजगार की राह अपनाईरायपुर । पारंपरिक कौशल, जैसे मिट्टी के बर्तन, कढ़ाई और लकड़ी का काम, स्थानीय सामग्रियों का उपयोग कर पर्यावरण-अनुकूल उत्पादों के माध्यम से न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन – बिहान योजना के तहत जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की मिसाल गढ़ रही हैं। कांसाबेल विकासखंड के ग्राम सेम्हर कछार की हरियाली स्व-सहायता समूह की 11 महिलाओं ने छिंद कासा से आकर्षक टोकरी और अन्य पारंपरिक हस्तशिल्प उत्पाद तैयार कर अपनी आजीविका को मजबूत किया है।समूह की सदस्य श्रीमती बालमुनि भगत ने बताया कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वरोजगार का अवसर मिला। पहले महिलाएं केवल घरेलू कामकाज तक सीमित थीं, लेकिन अब वे अच्छी कमाई कर रही हैं। यह कार्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ आत्मविश्वास भी दे रहा है। उन्होंने बताया कि यह न केवल एक व्यवसाय है, बल्कि यह परंपराओं, कौशल और सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुँचाता है।महिलाओं ने बताया कि बिहान योजना ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, सहयोग और विपणन सुविधा मिलने से उनका उत्पाद अब स्थानीय हाट-बाजार और मेलों में लोकप्रिय हो चुका है। महिलाएं कहती हैं कि अब वे सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि अपनी पहचान खुद बना रही हैं।समूह की दीदियों ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की योजनाओं से हम सशक्त और आत्मनिर्भर हो रहे हैं। हम महिलाओं के लिए हस्तशिल्प उत्पाद आय का मुख्य जरिया है, जो लाखों लोगों को, विशेषकर महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है।






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