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- -बलौदाबाजार के ऐतिहासिक विकास और युवाओं के स्वर्णिम भविष्य के लिए प्रतिबद्ध-42 लाख रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की हुई घोषणारायपुर। रायपुर जिला के तिल्दा विकासखंड के ग्राम बहेसर और तुलसी मार्ग के बीच की दूरी को कम करने वाली नई सड़क के भूमिपूजन अवसर पर राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और युवाओं के उज्ज्वल भविष्य को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि जीवन में संघर्ष से मिली सफलता ही इतिहास रचती है। एक साधारण परिवार या मजदूर का बच्चा जब मेहनत के बल पर आईएएस या आईपीएस बनता है, तो वह पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन जाता है। उन्होंने युवाओं से महापुरुषों के विचारों से सीख लेते हुए बिना किसी नकारात्मक प्रतिस्पर्धा के एक-दूसरे के सहयोग से आगे बढ़ने का आह्वान किया।मंत्री श्री वर्मा ने क्षेत्रीय जनभावनाओं और बुनियादी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने कई महत्वपूर्ण निर्माण कार्यों की सौगात दी। जिसमें बहेसर में साइकिल स्टैंड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये, रंगमंच के समीप ज्योति कलश हेतु 5 लाख रुपये और रघुनंदन वर्मा के घर से मुख्य मार्ग तक सीसी रोड निर्माण के लिए 5 लाख रुपये की घोषणा शामिल है। इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बहेसर के प्राथमिक शाला में दो नए कमरों के निर्माण के लिए 10 लाख रुपये तथा जर्जर हो चुके पूर्व माध्यमिक शाला भवन के पुनर्निर्माण हेतु 10 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की। उन्होंने विश्वास जताया कि ये सभी कार्य क्षेत्र के विकास को एक नई दिशा देंगे। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों से पूरे प्रदेश का कायाकल्प हो रहा है। छत्तीसगढ़ निरंतर विकास की ओर अग्रसर हो रहा है। उन्होंने अपने राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन के सफर को याद करते हुए कहा कि उन्होंने एक प्राथमिक शाला के शिक्षक के रूप में अपनी सेवा की शुरुआत की थी। उनका उद्देश्य सत्ता, पैसा या रुतबा हासिल करना कभी नहीं रहा, बल्कि बलौदाबाजार विधानसभा क्षेत्र में ऐसे ऐतिहासिक कार्य करना है जिन्हें हमेशा याद रखा जाए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास के मूल मंत्र पर काम कर रही है। किसानों से 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, महतारी वंदन योजना के तहत 70 लाख महिलाओं को आर्थिक संबल देने का कार्य कर रही है।
- -राष्ट्रीय टीम में चुनी गईं कांसाबेल की मधु सिदार और बोड़ला की गीता यादव खेलो इंडिया एक्सीलेंस सेंटर, बिलासपुर में ले रहीं प्रशिक्षण-उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने दोनों खिलाड़ियों को दी बधाई, वीडियो-कॉल पर बात कर तैयारियों की भी ली जानकारीरायपुर। छत्तीसगढ़ के लिए खेल जगत से आज एक और बड़ी खुशखबरी आई है। बिलासपुर के खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की दो खिलाड़ियों गीता यादव और मधु सिदार का चयन भारत की जूनियर महिला हॉकी टीम में हुआ है। ये दोनों चीन के मोकी में आगामी 30 अगस्त से 13 सितम्बर तक होने वाले जूनियर एशिया कप में देश का प्रतिनिधित्व करते हुए अपनी प्रतिभा और दम दिखाएंगी।उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव ने गीता यादव और मधु सिदार से वीडियो-कॉल पर बात कर भारतीय टीम में चयन पर बधाई दी। उन्होंने दोनों खिलाड़ियों को जूनियर एशिया कप हॉकी में अच्छे प्रदर्शन के लिए शुभकामना देते हुए उनकी तैयारियों की भी जानकारी ली। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के सचिव श्री यशवंत कुमार और संचालक श्रीमती तनुजा सलाम ने भी दोनों खिलाड़ियों को बधाई और शुभकामनाएं दी हैं।भारतीय जूनियर हॉकी टीम में चयनित ये दोनों ही खिलाड़ी प्रदेश की पहली आवासीय खेल अकादमी में वरिष्ठ प्रशिक्षक श्री राकेश टोप्पो एवं मुख्य प्रशिक्षक श्री अजीत लकड़ा से हॉकी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।ऐसा रहा है टीम इंडिया तक दोनों खिलाड़ियों का सफरमधु सिदारमधु सिदार हॉकी की नर्सरी कहे जाने वाले जशपुर जिले के कांसाबेल के छोटे से गांव पोंगरो की रहने वाली है। उनके माता-पिता कृषक हैं। वह सब-जूनियर नेशनल चैम्पियनशिप 2024-25, स्कूल नेशनल 2024-25 तथा हरियाणा में सब-जूनियर इंटर जोन चैम्पियनशिप-2025 में भागीदारी कर चुकी हैं। उनकी टीम ने आंध्रप्रदेश में 1 अगस्त से 12 अगस्त 2025 तक आयोजित हॉकी इंडिया नेशनल चैम्पियनशिप में चतुर्थ स्थान हासिल किया था। मधु इस साल मार्च-अप्रैल में छत्तीसगढ़ में आयोजित देश के पहले खेलो इंडिया ट्रायबल गेम्स में भी खेल चुकी है। वह अप्रैल-2026 से बेंग्लुरू में भारतीय टीम के साथ प्रशिक्षण ले रही हैं।गीता यादवकबीरधाम जिले के बोड़ला की गीता यादव ने हॉकी का प्रारंभिक प्रशिक्षण कोच श्री शिवा चौहान से प्राप्त किया है। गीता के अंतरराष्ट्रीय करियर का सफर वर्ष-2024 में प्रारंभ हुआ, जब उन्होंने 12 नवम्बर से 21 नवम्बर 2024 तक नीदरलैण्ड और बेल्जियम टूर में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व किया। उसके बाद 15 मई से 2 जून 2025 तक अर्जेंटीना टूर और 5 जुलाई से 14 जुलाई 2026 तक इंग्लैण्ड और स्कॉटलैण्ड टूर में भी वह भारतीय टीम का हिस्सा थीं।
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-छत्तीसगढ़ के प्रथम "मातृ दूध कोष (Mother Milk Bank)" की घोषणा
रायपुर । विश्व स्तनपान सप्ताह (01–07 अगस्त 2026) के अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) तथा राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केन्द्र (SHSRC), छत्तीसगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में आज रायपुर स्थित नया सभागृह, अटल बिहारी वाजपेयी सभागार, पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम काआयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में स्तनपान के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, शिशुओं के समुचित पोषण एवं स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना था।कार्यक्रम का सबसे महत्वपूर्ण आकर्षण "माता यशोदा सम्मान" रहा, जिसके अंतर्गत राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित 10 माताओं को सम्मानित किया गया। इन माताओं ने अपने मातृ दुग्ध का दान कर ऐसे नवजात शिशुओं को जीवनदायी सहयोग प्रदान किया, जिन्हें अपनी माताओं का दूध उपलब्ध नहीं हो पा रहा था। सम्मान समारोह के माध्यम से मातृ दुग्ध दान को एक सामाजिक आंदोलन का स्वरूप देने का संदेश दिया गया तथा मातृत्व, संवेदनशीलता और मानवता की इस अनूठी मिसाल को समाज के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि श्री अमित कटारिया, सचिव लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, श्री संजीव झा, आयुक्त सह संचालक स्वास्थ्य सेवाएं एवं मिशन संचालक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, डॉ. प्रदीप कुमार पात्रा, कुलपति आयुष विश्वविद्यालय, डा. विवेक चौधरी डीन पंडित जवाहर लाल मेडिकल कॉलेज ने भाग लिए |कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों द्वारा ह्यूमन मिल्क बैंक स्टॉल के अवलोकन से हुआ। इसके पश्चात अतिथियों के मंचासीन होने के बाद दीप प्रज्ज्वलन एवं वंदे मातरम् के साथ कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया गया।मुख्य अतिथि माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, सुरक्षित एवं संपूर्ण आहार है तथा स्वस्थ एवं सशक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने मितानिन कार्यक्रम के 25 वर्षों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि मितानिन बहनों ने दूरस्थ एवं वंचित क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को जन-जन तक पहुँचाने में अतुलनीय भूमिका निभाई है। उन्होंने माता शबरी के सेवा, समर्पण और निस्वार्थ भाव का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस प्रकार माता शबरी ने बिना किसी स्वार्थ के दीन दुखियों, जरूरतमंदों व प्रभु श्रीराम की सेवा की, उसी प्रकार प्रदेश की 72 हजार मितानिन बहनें समाज के गरीब, जरूरतमंद, गर्भवती महिलाओं एवं नवजात शिशुओं की निस्वार्थ भाव से सेवा कर रही हैं और वे आज की वास्तविक 'शबरी' हैं। उन्होंने प्रदेश के प्रथम 'मातृ दूध कोष (Human Milk Bank)' की स्थापना को नवजात शिशुओं के लिए एक ऐतिहासिक एवं जीवनदायी पहल बताते हुए कहा कि इससे अनेक शिशुओं को सुरक्षित मातृ दुग्ध उपलब्ध हो सकेगा। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने एक प्रभावशाली उदाहरण देते हुए कहा कि हमारी संस्कृति में साहस और आत्मविश्वास का प्रतीक भी "माँ का दूध" ही माना जाता है और अक्सर चुनौती देते समय लोग कहते हैं, "माँ का दूध पिया है तो आ जा"। उन्होंने कहा कि यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि माँ के दूध की शक्ति, संस्कार और जीवनदायी महत्व का प्रतीक है। अंत में उन्होंने सभी से संकल्प लेने का आह्वान किया कि प्रदेश का कोई भी नवजात माँ के अमूल्य दूध से वंचित न रहे तथा स्तनपान को जन-आंदोलन बनाया जाए।अपने संबोधन में श्री अमित कटारिया, आईएएस, सचिव, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने कहा कि छत्तीसगढ़ का मितानिन कार्यक्रम पिछले25 वर्षों से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जन्म के प्रथम घंटे में स्तनपान, छह माह तक केवल माँ का दूध तथा माताओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराना स्वस्थ एवं कुपोषण-मुक्त समाज की आधारशिला है। उन्होंने स्तनपान संबंधी भ्रांतियों को दूर करने, प्रत्येक माँ को उचित सहयोग एवं मार्गदर्शन प्रदान करने तथा स्तनपान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया। - -धमतरी की बेटी ने कौशल विकास के दम पर रची सफलता की नई इबारत, स्वतंत्रता दिवस समारोह में होंगी शामिलरायपुर । धमतरी जिले के ग्राम नवागांव की बेटी रेणुका गोस्वामी को आगामी 15 अगस्त के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के लिए आमंत्रण मिलने पर उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल रेणुका गोस्वामी की मेहनत और प्रतिभा का गौरव है, बल्कि छत्तीसगढ़ की बेटियों, ग्रामीण युवाओं और कौशल विकास की सफलता का भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि रेणुका गोस्वामी ने दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से कौशल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने जीवन को नई दिशा दी और आज वे अपने परिश्रम एवं प्रतिभा के बल पर सफलता के नए आयाम स्थापित कर रही हैं। उनका राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना प्रदेश के लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।रेणुका गोस्वामी धमतरी जिले के ग्राम नवागांव की निवासी हैं। उन्होंने वर्ष 2018 में दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया और कॉर्पोरेट क्षेत्र में अपने करियर की शुरुआत की। निरंतर मेहनत, कौशल और लगन के बल पर उन्होंने विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य करते हुए अपनी पहचान बनाई। वर्तमान में वे रायपुर के एक प्राइवेट फर्म में एचआर मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं तथा लगभग 40 हजार रुपए प्रतिमाह का वेतन प्राप्त कर रही हैं। उनकी सफलता से परिवार की आर्थिक स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार आया है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य कर रही है। रेणुका गोस्वामी जैसी सफल युवतियां इस बात का प्रमाण हैं कि सही मार्गदर्शन, कौशल प्रशिक्षण और दृढ़ संकल्प के बल पर ग्रामीण अंचल के युवा भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राष्ट्रपति भवन में रेणुका गोस्वामी की उपस्थिति प्रदेश की बेटियों और युवाओं का उत्साह बढ़ाएगी तथा अन्य युवाओं को भी अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित करेगी।
- -एक किलो का ट्यूमर निकाल महिला को दिया नया जीवनरायपुर। छत्तीसगढ़ आयुर्विज्ञान संस्थान (सिम्स), बिलासपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक अत्यंत जटिल और उच्च जोखिम वाली सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। सिम्स के डॉक्टरों ने दर्रीघाट (बिलासपुर) निवासी 78 वर्षीय बुजुर्ग महिला के बाएं अंडाशय से लगभग 1 किलोग्राम वजन का कैंसरयुक्त ट्यूमर सुरक्षित बाहर निकालकर उन्हें नया जीवन प्रदान किया है।निजी अस्पताल ने बताया था 3 लाख का खर्च, आयुष्मान योजना से मुफ्त हुआ इलाज, मरीज पिछले 5-6 महीनों से पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द और तेजी से बढ़ रही गांठ से पीड़ित थीं। परिजन पहले उन्हें एक निजी अस्पताल ले गए थे, जहां जांच के बाद ऑपरेशन व इलाज के लिए 2 से 3 लाख रुपये का खर्च बताया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिवार चिंतित था। इसके बाद मरीज को सिम्स, बिलासपुर में भर्ती कराया गया, जहां आयुष्मान भारत योजना के तहत उनका पूरा इलाज और जटिल ऑपरेशन बिल्कुल मुफ्त किया गया।सोनोग्राफी जांच में रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अर्चना सिंह ने पाया कि मरीज के बाएं अंडाशय में 15×12×10 सेंटीमीटर आकार का विशाल ट्यूमर था, जो आसपास के अंगों पर भारी दबाव डाल रहा था। इसके बाद बहुविषयक विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने 3 अगस्त 2026 को कैंसर की चरण निर्धारण शल्य चिकित्सा, ट्यूमर भार कम करने, गर्भाशय एवं दोनों अंडाशयों को निकालने, बाईं मूत्रवाहिनी की मरम्मत और उसमें श्डबल-जे स्टेंटश् प्रत्यारोपण जैसी बेहद जटिल प्रक्रियाओं को सफलता पूर्वक पूरा किया।इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन में विभिन्न विभागों की टीमों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। गायनेकोलॉजिकल सर्जरी टीम के विभागाध्यक्ष एवं प्रोफेसर डॉ. संगीता रमन जोगी, डॉ. दीपिका, डॉ. सौम्या और डॉ. वर्षा, जनरल सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. रघुराज सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. बी. डी. तिवारी और डॉ. गरिमा और एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. मधुमिता मूर्ति, डॉ. बी. रायजादा, डॉ. एस. कुजूर और डॉ. एम. देववर्मा का इस सफल आपरेशन में का महत्वपूर्ण योगदान रहा। सिम्स के अधिष्ठाता डॉ. रमणेश मूर्ति और चिकित्सा अधीक्षक डॉ. लखन सिंह ने बताया कि रजोनिवृत्ति के बाद इस आकार का कैंसर ट्यूमर होना बेहद दुर्लभ और जोखिम भरा होता है। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव और आंत व मूत्राशय जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। हालांकि, डॉक्टरों के सटीक संज्ञाहरण प्रबंधन और उच्च स्तरीय कौशल से मरीज का सुरक्षित ऑपरेशन संपन्न हुआ। मरीज की हालत संतोषजनक है और वे डॉक्टरों की निगरानी में स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं। मरीज के परिजनों ने जीवनरक्षक मुफ्त इलाज के लिए सिम्स प्रबंधन और डॉक्टरों का आभार जताया है।
- -SASCI 2026-27 के तहत प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़-सीबीजी इकोसिस्टम के विकास के लिए भारत सरकार ने स्वीकृत किए 50 करोड़ रुपये-स्वच्छ ऊर्जा, किसानों की आय में वृद्धि और हरित अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बलरायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में स्वच्छ ऊर्जा, हरित विकास और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ को एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उपलब्धि प्राप्त हुई है। राज्य में कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) इकोसिस्टम के विकास के लिए किए जा रहे नवाचारों और प्रभावी प्रयासों की सराहना करते हुए भारत सरकार के पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने पूंजीगत निवेश विशेष सहायता योजना (SASCI) 2026-27 के अंतर्गत छत्तीसगढ़ को 50 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की है। इस योजना के तहत यह प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जैव ईंधन के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ तेजी से राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बना रहा है और यह उपलब्धि उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। मुख्यमंत्री ने ऊर्जा विभाग तथा छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के अधिकारियों को इस सफलता के लिए बधाई दी।मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नई कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति राज्य के कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण क्षेत्र में परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी। इससे कृषि अवशेषों का वैज्ञानिक उपयोग सुनिश्चित होगा, किसानों को अतिरिक्त आय का नया स्रोत मिलेगा तथा पराली और अन्य जैव अवशेषों के बेहतर प्रबंधन से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए हरित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए प्रतिबद्ध है।उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य छत्तीसगढ़ को जैव ईंधन एवं स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनाना है। सीबीजी नीति के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश में निवेश, रोजगार, किसानों की आय, जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण को नई गति मिलेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को और अधिक मजबूती प्राप्त होगी।राज्य सरकार ने कम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति-2026 को 8 जून 2026 को अधिसूचित किया है। इस नीति के माध्यम से राज्य में उपलब्ध कृषि अपशिष्ट, पैडी स्ट्रॉ तथा अन्य बायोमास का वैज्ञानिक रूपांतरण कर औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपयोग के लिए स्वच्छ गैसीय ईंधन का उत्पादन किया जाएगा। इससे किसानों को बायोमास की आपूर्ति से अतिरिक्त आय प्राप्त होगी, वहीं संयंत्रों से प्राप्त जैविक खाद जैविक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।मुख्यमंत्री श्री साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ने सीबीजी क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने, उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने तथा विभिन्न विभागों के बीच समन्वित कार्यप्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। इसी क्रम में 3 अगस्त 2026 को मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर में प्रमुख सचिव, ऊर्जा विभाग श्री सुबोध कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई।बैठक में राज्य में सीबीजी परियोजनाओं के त्वरित विकास के लिए बायोमास संग्रहण व्यवस्था, सिंगल विंडो क्लीयरेंस, जैव उर्वरक के उपयोग, विभागीय समन्वय तथा निवेश प्रोत्साहन जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रमुख सचिव ने सभी विभागों को समयबद्ध एवं समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुमित सरकार ने राज्य में सीबीजी संयंत्रों की स्थापना, निवेश संभावनाओं, नीति के क्रियान्वयन तथा भावी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। इस अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग, कृषि, नगरीय प्रशासन एवं विकास, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, पशुधन विकास, परिवहन तथा पर्यावरण संरक्षण मंडल सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
- -कार्टून कला बच्चों में रचनात्मकता, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच विकसित करने का सशक्त माध्यम : मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय-कार्टून वॉच पत्रिका के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से की सौजन्य मुलाकात-'मुस्कुराता बस्तर' प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला की स्मारिका की भेंटरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज मंत्रालय महानदी भवन में कार्टून वॉच के संपादक श्री त्र्यंबक शर्मा ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर उन्होंने मुख्यमंत्री श्री साय को बस्तर में आयोजित 'मुस्कुराता बस्तर' अभियान के अंतर्गत कार्टून प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यशाला की विस्तृत जानकारी दी तथा इस अभिनव पहल पर आधारित स्मारिका भी भेंट की।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए कहा कि कला समाज को जोड़ने और नई पीढ़ी के व्यक्तित्व निर्माण का प्रभावी माध्यम है। कार्टून केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों को सरल, सहज और प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त करने की सशक्त विधा है। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही रचनात्मक अभिव्यक्ति के अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो उनमें आत्मविश्वास, संवेदनशीलता, तार्किक सोच और सकारात्मक दृष्टिकोण का विकास होता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के साथ कला, साहित्य, खेल और संस्कृति जैसी गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए समान रूप से आवश्यक हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर आयोजित किए जाएंगे, जिससे अधिकाधिक विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिल सके। उल्लेखनीय है कि जनसंपर्क विभाग और कार्टून वॉच के द्वारा 'मुस्कुराता बस्तर' अभियान के तहत जगदलपुर सहित बस्तर अंचल के विभिन्न शासकीय विद्यालयों के लगभग 100 विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्टून प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में देश के प्रतिष्ठित कार्टूनिस्टों ने बच्चों को कार्टून कला की बारीकियों, रेखांकन, व्यंग्य की अभिव्यक्ति, दृश्य संप्रेषण और रचनात्मक सोच के विविध आयामों से परिचित कराया। प्रशिक्षण के दौरान बच्चों को अपनी कल्पनाशीलता को चित्रों के माध्यम से अभिव्यक्त करने तथा सामाजिक विषयों पर सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया गया।
- -पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से परिवारों को आर्थिक राहत, हरित ऊर्जा से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्परायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर रही है। इसी का परिणाम है कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना प्रदेश के हजारों परिवारों के जीवन में आर्थिक समृद्धि, ऊर्जा आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का नया अध्याय लिख रही है। यह योजना केवल बिजली बिल में राहत देने तक सीमित नहीं है, बल्कि स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा को जन-जन तक पहुंचाकर हरित भविष्य के निर्माण की मजबूत आधारशिला भी बन रही है।गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के पेंड्रा निवासी श्री लखन लाल कश्यप इस परिवर्तन की सशक्त मिसाल बनकर उभरे हैं। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेकर उन्होंने अपने घर की छत पर 5 किलोवॉट क्षमता का सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराया है। इस संयंत्र के स्थापित होने के बाद उनका मासिक बिजली बिल पूरी तरह शून्य हो गया है। इससे जहां परिवार की नियमित मासिक बचत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, वहीं वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण में भी सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।श्री लखन लाल कश्यप ने बताया कि योजना की जानकारी मिलते ही उन्होंने आवेदन किया। निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके घर पर सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित किया गया। इस कार्य में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा निर्धारित अनुदान प्राप्त होने से संयंत्र की स्थापना पर आने वाला आर्थिक व्यय काफी कम हो गया। सरकार की इस सहायता ने सौर ऊर्जा अपनाने का उनका सपना सहज और किफायती बना दिया।उन्होंने बताया कि पहले प्रत्येक माह बिजली बिल का भुगतान करना पड़ता था, जिससे घरेलू बजट पर अतिरिक्त भार पड़ता था। अब सौर ऊर्जा के उपयोग से बिजली बिल पूरी तरह समाप्त हो गया है। इससे होने वाली बचत का उपयोग परिवार की अन्य आवश्यकताओं में किया जा रहा है। साथ ही उन्हें यह संतोष भी है कि वे स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से प्रदूषण कम करने और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में अपना योगदान दे रहे हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार प्रदेश में अक्षय ऊर्जा को बढ़ावा देने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने तथा आम नागरिकों तक स्वच्छ ऊर्जा के लाभ पहुंचाने के लिए लगातार प्रयासरत है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश के अधिकाधिक परिवार सौर ऊर्जा से जुड़ रहे हैं और बिजली पर होने वाले मासिक खर्च में उल्लेखनीय कमी ला रहे हैं। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिल रही है।श्री लखन लाल कश्यप का कहना है कि सौर ऊर्जा भविष्य की सबसे भरोसेमंद, किफायती और पर्यावरण हितैषी ऊर्जा है। इससे न केवल आर्थिक बचत होती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित होता है। उन्होंने प्रदेश के सभी पात्र परिवारों से प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना का लाभ उठाकर अपने घरों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापित कराने की अपील की।उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस जनहितकारी योजना ने सौर ऊर्जा को आम नागरिकों की पहुंच में ला दिया है। सरकार से प्राप्त अनुदान के कारण आर्थिक बोझ काफी कम हुआ और आज वे बिना बिजली बिल की चिंता के स्वच्छ एवं अक्षय ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार यह योजना आर्थिक बचत, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण तीनों उद्देश्यों को एक साथ पूरा करने वाली दूरदर्शी पहल है।प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से छत्तीसगढ़ में ऊर्जा आत्मनिर्भरता का दायरा लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अधिक से अधिक परिवार इस योजना से जुड़ें, अपने बिजली व्यय में बचत करें, स्वच्छ ऊर्जा को अपनाएं और विकसित एवं हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण में सहभागी बनें।
- -जशपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) के 19 मरीजों सहित 60 टीबी रोगियों को गोद लेकर पोषण सहायता प्रदान कर रहे हैं निरंजनरायपुर /टीबी केवल एक बीमारी नहीं है। यह गरीबी, कुपोषण और सामाजिक उपेक्षा से जुड़ी ऐसी चुनौती है, जो हर साल हजारों परिवारों को आर्थिक और मानसिक संकट में धकेल देती है। जब कोई व्यक्ति टीबी से ग्रसित होता है, तब उसके सामने केवल दवा लेने की चुनौती नहीं होती, बल्कि पौष्टिक भोजन जुटाने, नियमित उपचार जारी रखने और सामाजिक भेदभाव से लड़ने जैसी अनेक कठिनाइयाँ भी खड़ी हो जाती हैं। यही कारण है कि देशव्यापी प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान में "निक्षय मित्र" की अवधारणा को विशेष महत्व दिया गया है।विशेषज्ञों का मानना है कि टीबी के उपचार में दवा जितनी आवश्यक है, उतना ही आवश्यक है पर्याप्त पोषण। लेकिन दूरस्थ और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। कई मरीज केवल इसलिए उपचार बीच में छोड़ देते हैं क्योंकि उनके पास पोषणयुक्त भोजन की व्यवस्था नहीं होती। ऐसे समय में निक्षय मित्र न केवल पोषण सहायता प्रदान करते हैं, बल्कि मरीजों के मनोबल को भी मजबूत बनाते हैं।छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले से ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है। जिले के दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में निवासरत विशेष पिछड़ी जनजातियों (PVTG) के बीच स्वास्थ्य एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यरत जिला डाटा प्रबंधक निरंजन प्रसाद गुप्ता ने अक्टूबर 2024 से निक्षय मित्र के रूप में जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने न केवल पीवीटीजी समुदाय के 19 टीबी मरीजों को गोद लिया, बल्कि जिले के कुल 60 टीबी मरीजों को नियमित रूप से पोषण आहार एवं आवश्यक सहयोग प्रदान कर उपचार की राह में उनका साथ निभाया।जशपुर के पहाड़ी कोरवा और बिरहोर जैसे विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदायों में टीबी की रोकथाम, समय पर पहचान और उपचार सुनिश्चित करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित होने के कारण मरीज अक्सर उपचार में देरी कर देते हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए मरीजों को पोषण सहायता, स्वास्थ्य परामर्श और निरंतर मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया, जिससे उपचार की निरंतरता बनी रही।निरंजन गुप्ता की पहल केवल पोषण किट तक सीमित नहीं रही। उन्होंने घर-घर पहुंचकर मरीजों और उनके परिजनों को टीबी के लक्षणों, नियमित दवा सेवन, संक्रमण से बचाव तथा उपचार पूरा करने के महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस सतत संवाद का सकारात्मक प्रभाव यह हुआ कि समुदाय में स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति विश्वास बढ़ा और लोग स्वयं स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचने लगे।टीबी के खिलाफ लड़ाई में दवा और निदान जितने महत्वपूर्ण हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है पोषण और सामाजिक सहयोग। कुपोषण और टीबी का संबंध एक दुष्चक्र की तरह है कुपोषण से बीमारी बढ़ती है और बीमारी से कुपोषण। ऐसे में निक्षय मित्र द्वारा दिया गया पोषण सहयोग मरीज की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और उपचार को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इन उल्लेखनीय प्रयासों के लिए निरंजन गुप्ता को दिसंबर 2024 में राज्य स्तरीय निक्षय मित्र पुरस्कार से सम्मानित किया गया।टीबी मुक्त भारत का लक्ष्य केवल स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य नहीं है। यह समाज के हर उस व्यक्ति का दायित्व है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। जशपुर की यह पहल बताती है कि एक व्यक्ति भी यदि संवेदनशीलता के साथ आगे आए, तो वह दर्जनों परिवारों के जीवन में नई उम्मीद जगा सकता है। आज आवश्यकता है कि अधिक से अधिक नागरिक, संस्थाएं और सामाजिक संगठन निक्षय मित्र बनकर इस राष्ट्रीय अभियान से जुड़ें, ताकि कोई भी टीबी मरीज केवल संसाधनों के अभाव में उपचार से वंचित न रहे।
- -बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के विष्णुभोग चावल और केवची के प्राकृतिक शहद ने बटोरी सराहना-स्वसहायता समूहों की मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान, जैविक उत्पादों के लिए खुले देश-विदेश के नए बाजाररायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने, महिला स्वसहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने तथा जैविक कृषि को प्रोत्साहन देने के प्रयास लगातार नई सफलताएं प्राप्त कर रहे हैं। इसी कड़ी में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के महिला स्वसहायता समूहों एवं किसान उत्पादक संगठन द्वारा तैयार किए जा रहे जैविक उत्पादों ने देश के सबसे बड़े एवं प्रतिष्ठित जैविक उद्योग व्यापार मेला एवं सम्मेलन ’बायोफैच इंडिया-2026’ में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है।नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला एवं सम्मेलन में जिले के प्रसिद्ध ’अरपा बिहान विष्णुभोग राइस’ तथा ’केवची के जंगलों से संग्रहित प्राकृतिक शहद’ का राष्ट्रीय स्टॉल में आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इन उत्पादों ने देश-विदेश से पहुंचे खरीदारों, निर्यातकों, उद्योग विशेषज्ञों एवं जैविक उत्पादों से जुड़े प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। यह उपलब्धि न केवल गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के जैविक उत्पादों के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई संभावनाओं का द्वार खोलने वाली साबित हुई है।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती, जैविक कृषि, स्थानीय उत्पादों के मूल्य संवर्धन तथा महिला स्वसहायता समूहों की आर्थिक मजबूती को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी सोच का परिणाम है कि बिहान से जुड़ी महिलाएं आज केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के व्यापारिक आयोजनों में अपने उत्पादों का सफल प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं की आय में वृद्धि तथा उन्हें स्थायी बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है।बायोफैच इंडिया-2026 प्राकृतिक एवं जैविक उत्पादों तथा मोटे अनाज आधारित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने वाला विश्वस्तरीय मंच है, जहां देश-विदेश के आयातक, निर्यातक, विपणन विशेषज्ञ, उद्योग प्रतिनिधि और व्यापारिक संस्थाएं एकत्रित होकर जैविक उत्पादों के व्यापार एवं निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करते हैं। ऐसे प्रतिष्ठित मंच पर छत्तीसगढ़ के उत्पादों की प्रभावी उपस्थिति राज्य के किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए नए व्यापारिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।जिला मिशन प्रबंधक श्री दुर्गाशंकर सोनी ने बताया कि गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जैविक विष्णुभोग धान एवं प्राकृतिक शहद के साथ-साथ सूरन, कटहल तथा अन्य जैविक सब्जियों के उत्पादन को भी लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। इन उत्पादों की गुणवत्ता, प्राकृतिक उत्पादन पद्धति तथा विशिष्ट स्वाद के कारण राष्ट्रीय बाजार में इनकी मांग तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला स्वसहायता समूह आर्थिक रूप से सशक्त होकर आत्मनिर्भर बनने के साथ लखपति दीदी अभियान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्पादों की भागीदारी से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ रहा है और उनके लिए बेहतर विपणन के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा है कि राज्य के प्रत्येक जिले की विशिष्ट कृषि एवं वन आधारित उत्पादों को राष्ट्रीय और वैश्विक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे किसानों, महिला स्वसहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों की आय में सतत वृद्धि हो तथा स्थानीय उत्पादों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित पहचान और मूल्य प्राप्त हो। बायोफैच इंडिया-2026 में गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के जैविक उत्पादों की प्रभावशाली उपस्थिति इसी दूरदर्शी सोच और ग्रामीण विकास के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण है।सम्मेलन में राज्य स्तर से राज्य कार्यक्रम प्रबंधक श्री राजन सोनी, जिले से जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल तथा तिपान किसान उत्पादक संगठन के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री जितेन्द्र खैरवार ने सहभागिता कर गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के जैविक उत्पादों का प्रभावी प्रदर्शन एवं प्रचार-प्रसार किया। उनके प्रयासों से जिले के उत्पादों को खरीदारों एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के बीच व्यापक सराहना प्राप्त हुई।
- -वन धन योजना से मिली आत्मनिर्भरता की नई पहचानरायपुर / जनजातीय कार्य मंत्रालय और ट्राइफेड की एक पहल है, जिसे 2018 में शुरू किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य वनों से लघु वनोपज एकत्र करने वाले आदिवासी समुदायों को प्रशिक्षित करना, उनके उत्पादों का मूल्यवर्धन करना और उन्हें उद्यमी बनाकर स्थायी आजीविका प्रदान करना है। छत्तीसगढ़ के जंगलों में मिलने वाला महुआ अब ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं के लिए आय और आत्मनिर्भरता का मजबूत साधन बन गया है। राज्य शासन की वन धन विकास केंद्र योजना के माध्यम से महिलाओं को महुआ से मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इससे उनकी आमदनी बढ़ रही है और वे सफल उद्यमी बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।राजनांदगांव जिले के कोरिनभाठा वन धन विकास केंद्र की महिलाओं ने इस योजना का पूरा लाभ उठाया है। पहले वे महुआ केवल संग्रह करती थीं, लेकिन अब प्रशिक्षण के बाद महुआ से लड्डू, कुकीज़, एनर्जी बार, स्क्वैश और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार कर रही हैं। आधुनिक प्रसंस्करण और आकर्षक पैकेजिंग के कारण इन उत्पादों की बाजार में अच्छी मांग बन रही है। वन धन विकास केंद्र में महिलाओं को केवल उत्पाद बनाना ही नहीं सिखाया जाता, बल्कि गुणवत्ता, स्वच्छ उत्पादन, पैकेजिंग, लेबलिंग, भंडारण और विपणन की भी जानकारी दी जाती है। इससे वे बाजार की जरूरत के अनुसार बेहतर उत्पाद तैयार कर पा रही हैं और उन्हें उचित मूल्य भी मिल रहा है। महुआ के मूल्यवर्धन से उसकी उपयोगिता और बाजार मूल्य दोनों बढ़े हैं। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। महिलाओं की आय में वृद्धि हुई है और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। महुआ के फूलों और बीजों के मूल्यवर्धन से ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की आय कई गुना बढ़ गई है। अब केवल कच्चे महुआ को बेचने के बजाय उससे लड्डू, कुकीज, जैम, और एनर्जी बार जैसे उत्पाद बनाए जा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर नए रोजगार और स्थायी आजीविका के साधन विकसित हुए हैं।इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ के माध्यम से व्यापक बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे वन आधारित उत्पादों को नई पहचान मिल रही है और ग्रामीण महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के बेहतर अवसर प्राप्त हो रहे हैं। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद संघ की एक अनूठी पहल है। इसके तहत वनों से मिलने वाले प्राकृतिक और शुद्ध उत्पादों जैसे वन शहद, एलोवेरा जेल, हर्बल जूस, महुआ उत्पाद, आयुर्वेदिक चूर्ण और तेलों को महिला स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार कर बेचा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य आदिवासियों और स्थानीय लोगों को आजीविका देना है।कोरिनभाठा की महिलाओं की यह सफलता दिखाती है कि सही प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और विपणन सहयोग मिलने पर वन संपदा को रोजगार और समृद्धि का मजबूत आधार बनाया जा सकता है। वन धन विकास केंद्र योजना आज महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रही है।
- -जिले में खुलेगा छत्तीसगढ़ का पहला हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट निर्माण संयंत्र-बीईएमएल के हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट संयंत्र की स्थापना की मिली मंजूरी-79.70 एकड़ शासकीय भूमि रियायती दर पर आबंटन के प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद से मिली स्वीकृतिमुंगेली // छत्तीसगढ़ के औद्योगिक विकास के मानचित्र पर मुंगेली जिले ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) के प्रस्तावित हैवी अर्थ मूविंग इक्वीपमेंट निर्माण संयंत्र की स्थापना के लिए ग्राम चंद्रगढ़ी, तहसील पथरिया में 79.70 एकड़ शासकीय भूमि रियायती दर पर आबंटित करने के प्रस्ताव को मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य मंत्रिपरिषद ने मंजूरी प्रदान कर दी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय के साथ मुंगेली में बड़े औद्योगिक निवेश और आधुनिक विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हो गया है।यह संयंत्र राज्य का पहला उद्योग होगा, जिसकी स्थापना से छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी और राज्य में आधुनिक भारी मशीन निर्माण उद्योग की शुरुआत होगी। जिले में इस प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम की परियोजना शुरू होने से रोजगार, कौशल विकास, तकनीकी प्रशिक्षण, उद्यमिता और सहायक उद्योगों के लिए नए अवसर सृजित होंगे।कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर जिलेवासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बीईएमएल संयंत्र जिले में औद्योगिक विकास का आधार बनेगा। कैबिनेट के द्वारा मिली मंजूरी जिले में औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि तैयार करने में ऐतिहासिक कदम है। इससे आधुनिक विनिर्माण का आधार मजबूत होगा तथा स्थानीय युवाओं, उद्यमियों और व्यवसायियों के लिए विकास के नए रास्ते खुलेंगे। यह पहल जिले को आधुनिक विनिर्माण और इंजीनियरिंग गतिविधियों के नए केंद्र के रूप में नई पहचान दिलाएगी।विशेष प्रयासों से परियोजना को मुंगेली तक लाने में मिली सफलता - पथरिया एसडीएम श्रीमती रेखा चंद्रा ने बताया कि बीईएमएल की प्रस्तावित परियोजना के लिए प्रारंभिक स्तर पर रायगढ़ एवं जांजगीर-चांपा जिलों में भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान कंपनी ने जिले में भी उपयुक्त भूमि की उपलब्धता में रुचि व्यक्त की।कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के निर्देश पर महाप्रबंधक, जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र तथा राजस्व विभाग ने त्वरित कार्यवाही करते हुए उपयुक्त शासकीय भूमि की खोज और चिन्हांकन की प्रक्रिया प्रारंभ की। संयुक्त टीम द्वारा विस्तृत सर्वेक्षण के बाद 79 एकड़ से अधिक भूमि की उपलब्धता का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। भूमि की उपयोगिता का परीक्षण करने के बाद आवश्यक प्रक्रिया पूरी करते हुए भूमि उद्योग विभाग को हस्तांतरित की गई।परियोजना के सुचारु क्रियान्वयन के लिए भूमि तक पहुंच मार्ग सुनिश्चित करने की दिशा में भी विशेष प्रयास किए गए। इसके परिणामस्वरूप 79.70 एकड़ भूमि औद्योगिक प्रयोजन के लिए चिन्हांकित कर रियायती दर पर बीईएमएल को आबंटित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया, जिसे अब राज्य मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिल गई है।औद्योगिक दृष्टि से रणनीतिक स्थान - महाप्रबंधक उद्योग विभाग श्री किशोर राजपूत ने बताया कि ग्राम चंद्रगढ़ी, प.ह.नं. 19, राजस्व निरीक्षक मंडल पथरिया, तहसील पथरिया में विभिन्न खसरों की कुल 79.70 एकड़ शासकीय भूमि का औद्योगिक प्रयोजन के लिए चयन किया गया है। यह भूमि बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से लगभग 30 किलोमीटर तथा मुख्य मार्ग से जुड़ा हुआ है, जिससे परियोजना के लिए इसकी उपयोगिता और बेहतर होती है। भूमि आबंटन एवं औद्योगिक प्रयोजन की प्रक्रिया के तहत संबंधित विभागों से आवश्यक अभिमत एवं अनापत्ति प्रमाण-पत्र प्राप्त करने की कार्यवाही भी की गई है।रोजगार के साथ विकसित होगा औद्योगिक इकोसिस्टम - बीईएमएल जैसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक उपक्रम के संयंत्र की स्थापना से जिले में प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों, इंजीनियरिंग, मशीन पार्ट्स, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, सर्विसिंग और अन्य सहायक उद्योगों के विकास की संभावनाएं भी मजबूत होंगी।
- - बिलासपुर नगर वृत्त केे 81 प्रतिशत उपभोक्ताओं के बिजली बिल में आई कमीबिलासपुर । स्मार्ट मीटर को लेकर उपभोक्ताओं के बीच फैली भ्रांतियों और अफवाहों को तुलनात्मक अध्ययन ने स्थिति स्पश्ट कर दिया है, बिलासपुर नगर वृत्त में जुलाई-2026 के दौरान स्मार्ट मीटरधारी घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली खपत में उल्लेखनीय कमी दर्ज हुई है। स्लैब-वार उपभोग आंकड़ों के अनुसार कुल 86,568 स्मार्ट मीटरधारी घरेलू उपभोक्ताओं में से 70,368 उपभोक्ता (लगभग 81 प्रतिशत) 400 यूनिट तक बिजली खपत की श्रेणी में रहे हैं।छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने बिलासपुरबिलासपुर नगर वृत्त वृत्त के माह जून-जुलाई के खपत का तुलनात्मक अध्ययन किया। इसमें पता चला कि जुलाई 2026 में कुल बिजली खपत 25.56 मिलियन यूनिट (एमयू) रही, जो जून-2026 में दर्ज 35.94 मिलियन यूनिट (एमयू) की तुलना में 28.88 प्रतिशत कम है।जारी आंकड़ों के अनुसार जून-2026 की तुलना में जुलाई-2026 में कुल स्मार्ट मीटरधारी घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 86,568 पर स्थिर रही, किंतु उपभोक्ताओं के स्लैब-वार वितरण में उल्लेखनीय परिवर्तन दर्ज किया गया। 400 यूनिट तक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या जून में 55,392 से बढ़कर जुलाई में 70,368 हो गई, जो 27.04 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं इस वर्ग की कुल बिजली खपत 10.00 मिलियन यूनिट से बढकर 12.28 मिलियन यूनिट हुई, जो कि जून की तुलना में 22.80 प्रतिषत अधिक है।इसी प्रकार 400 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं की संख्या 31,176 से घटकर 16,200 रह गई, जो 48.04 प्रतिशत की कमी दर्शाती है। इस वर्ग की कुल बिजली खपत भी 25.93 मिलियन यूनिट से घटकर 13.27 मिलियन यूनिट दर्ज की गई।सर्वाधिक कमी 600 यूनिट से अधिक बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के वर्ग में दर्ज की गई। इस श्रेणी में उपभोक्ताओं की संख्या में 60.14 प्रतिशत की कमी तथा बिजली खपत में 53.81 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। विभाग के अनुसार, बिजली खपत में आई यह कमी मुख्यतः मानसून सीजन के दौरान तापमान में गिरावट के कारण एयर कंडीषनर, कूलर एवं अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग में स्वाभाविक कमी का परिणाम है।बिलासपुर क्षेत्र के कार्यपालक निदेषक श्री ए.के.अम्बस्थ ने बताया कि यह सभी आंकड़े स्मार्ट मीटरधारी घरेलू उपभोक्ताओं के वास्तविक मीटर रीडिंग पर आधारित हैं, जिससे स्पश्ट है कि स्मार्ट मीटर के सम्बन्ध में यह भ्रांती कि मीटर तेज चलता है, सर्वथा मिथ्या है, एवं इस बात कि पुश्टि होती है कि मीटर वास्तविक विद्युत उपभोग के अनुसार खपत रिकार्ड करता है।
- -फेसिंग कार्य तत्काल प्रारंभ करने दिए निर्देश-चारा, पेयजल और सुरक्षा व्यवस्था पर दिया जोरबिलासपुर /कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने बुधवार को जनपद पंचायत कोटा अंतर्गत ग्राम जोगीपुर में निर्माणाधीन गौ अभ्यारण्य का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों एवं उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गौ अभ्यारण्य में गौवंश के लिए चारा, स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं की समुचित व्यवस्था समय पर सुनिश्चित की जाए, ताकि पशुओं के संरक्षण एवं देखभाल में किसी प्रकार की कमी न रहे। इस दौरान जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल भी मौजूद रहे।निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री अग्रवाल ने गौ अभ्यारण्य की चारों ओर फेंसिंग का कार्य तत्काल प्रारंभ करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फेंसिंग पूर्ण होने से गौवंश की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा आसपास के किसानों की फसलों को भी नुकसान से बचाया जा सकेगा। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ निर्माण कार्यों में तेजी लाने, गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखने तथा सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि निर्माणाधीन जोगीपुर अभ्यारण्य 184 एकड़ में फैला हुआ है। राज्य सरकार द्वारा इसके विकास के लिए प्रथम चरण में 1 करोड़ 32 लाख रूपए की मंजूरी प्रदान की गई है। निरीक्षण के दौरान जनपद पंचायत कोटा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, तहसीलदार, पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा पंचायत प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
- बिलासपुर /राज्य व्यावसायिक परीक्षा (एससीवीटी) एवं हायर सेकण्डरी व आईटीआई की संयुक्त अध्यापन योजना में कक्षा 12वीं के विद्यार्थियों की आईटीआई ट्रेड की परीक्षा (पुरानी प्रणाली एवं नई परीक्षा प्रणाली) माह अप्रैल 2026 की प्रायोगिक एवं सैद्धांतिक परीक्षाएं 17 अगस्त 2026 से 24 अगस्त 2026 तक सम्पन्न होनी है।परीक्षा हेतु प्रवेश सत्र 2025-2026 में प्रवेशित एकवर्षीय व्यवसाय, सत्र 2025-2027 में प्रवेशित द्विवर्षीय व्यवसाय के प्रथम वर्ष एवं सत्र 2024-2026 में प्रवेशित द्विवर्षीय व्यवसाय के द्वितीय वर्ष के नियमित पात्र प्रशिक्षणार्थी एवं सत्र 2023-2025 में प्रवेशित द्विवर्षीय व्यवसाय के द्वितीय वर्ष, सत्र 2024-2026 में प्रवेशित द्विवर्षीय व्यवसाय के प्रथम वर्ष, सत्र 2024-2025 में प्रवेशित एकवर्षीय व छः माह व्यवसाय के पूरक पात्र प्रशिक्षणार्थी जिनके प्रयास शेष हैं तथा सत्र 2023-2024 के छः माह व्यवसाय एवं सत्र 2022-2024 के द्विवर्षीय व्यवसाय के पूरक पात्र प्रशिक्षणार्थी जिनके प्रयास शेष हैं, आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 7 अगस्त 2026 तक है।
- बिलासपुर, /शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मझगाँव (कोटा) में सरस्वती साइकिल योजना के अंतर्गत कक्षा 9वीं की 37 छात्राओं को निःशुल्क साइकिलों का वितरण किया गया। कार्यक्रम में श्री मोहित जायसवाल, श्री प्रभु सिंह जगत उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। इसके बाद छात्राओं कु. मानवी एवं कु. रोहिणी ने स्वागत गीत प्रस्तुत किया। विद्यालय परिवार की ओर से प्राचार्य श्री शैलेश कुमार पांडेय ने अतिथियों का स्वागत किया। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत कक्षा 12वीं की छात्रा कु. शिवांगनी एवं उनके साथियों ने आकर्षक कर्मा नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। श्री मोहित जायसवाल ने छात्राओं को साइकिल मिलने पर शुभकामनाएं देते हुए उन्हें नियमित विद्यालय आने, मन लगाकर अध्ययन करने तथा अपने उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्री प्रभु सिंह जगत ने साइकिल प्राप्त करने वाली सभी छात्राओं को बधाई देते हुए इसे उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करने की महत्वपूर्ण पहल बताया। इस दौरान विद्यालय के विद्यार्थियों ने स्कूल की अधूरी बाउंड्री वाल के निर्माण की मांग को ज्ञापन भी सौंपा। कार्यक्रम के अंत में अतिथियों ने विद्यालय परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता श्री शोभाराम पालके ने किया तथा आभार प्रदर्शन श्रीमती पूनम सिंह रावत ने किया। इस अवसर पर श्री सुलेश पांडेय, श्री बजरंग जायसवाल, श्री महाराज सिंह नायक, ग्राम सरपंच श्रीमती भगवती देवी, श्री उत्तम जायसवाल सहित जनप्रतिनिधि, शिक्षक, अभिभावक एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
- -कलेक्टर संजय अग्रवाल ने किया सम्मानित, सुशासन एवं अभिसरण विभाग में नई जिम्मेदारी के लिए दी शुभकामनाएंबिलासपुर । जिला कार्यालय में पदस्थ संयुक्त कलेक्टर श्री अभिषेक दीवान के रायपुर स्थानांतरण पर बुधवार को जिला कार्यालय में भावभीना विदाई समारोह आयोजित किया गया। श्री दीवान का स्थानांतरण रायपुर स्थित सुशासन एवं अभिसरण विभाग में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) के रूप में हुआ है।कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने श्री अभिषेक दीवान के लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी कार्यकुशलता, सरल व्यवहार एवं समर्पित कार्यशैली से जिला प्रशासन की विभिन्न योजनाओं और दायित्वों के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि वे अपने अनुभव और दक्षता से वहां भी उत्कृष्ट कार्य करेंगे।इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से कलेक्टर श्री अग्रवाल ने श्री दीवान को शाल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया तथा उनके सुखद, सफल एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की।संयुक्त कलेक्टर श्री अभिषेक दीवान ने अपने संबोधन में बिलासपुर में बिताए लगभग डेढ़ वर्ष के सेवाकाल की स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि जिले में कार्य करते हुए उन्हें अधिकारियों एवं कर्मचारियों का सदैव सहयोग और आत्मीयता मिली। उन्होंने सभी के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बिलासपुर की यादें उनके लिए सदैव विशेष रहेंगी। विदाई समारोह में नगर निगम आयुक्त श्री प्रकाश सर्वे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल, अपर कलेक्टर श्री शिवकुमार बनर्जी सहित जिला प्रशासन के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- बिलासपुर /मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट के रिकॉर्ड्स कार्यालय द्वारा मिशन निरंतर मिलाप के अंतर्गत पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रितों के लिए विशेष आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पूर्व सैनिकों की पेंशन संबंधी समस्याओं का त्वरित समाधान उपलब्ध कराना तथा विभिन्न कल्याणकारी सेवाओं की जानकारी देना था।कार्यक्रम को सेवानिवृत्त जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल आशीष पांडे ने संबोधित किया। उन्होंने पूर्व सैनिकों से संवाद करते हुए उन्हें शासन एवं सेना द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी दी तथा अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों को ऐसे कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में लगभग 38 पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रितों ने भाग लिया। मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट की टीम ने पेंशन एवं स्पर्श पोर्टल से संबंधित शिकायतों और समस्याओं का मौके पर ही निराकरण किया। साथ ही जिन मामलों में विस्तृत प्रक्रिया की आवश्यकता थी, उनके शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक मार्गदर्शन एवं कार्रवाई सुनिश्चित की गई।उल्लेखनीय है कि मिशन निरंतर मिलाप के चरण-4 का शुभारंभ 17 जून 2026 को अतिरिक्त महानिदेशक (मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री) मेजर जनरल आर. प्रेम राज कुमार, एसएम, वीएसएम द्वारा किया गया था। इस चरण के अंतर्गत देश के मध्य एवं पूर्वी क्षेत्र के पूर्व सैनिकों तक पहुंचकर उनकी पेंशन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। यह अभियान लेफ्टिनेंट जनरल पी. एस. शेखावत, पीवीएसएम, एवीएसएम, एसएम, चीफ ऑफ स्टाफ, मुख्यालय दक्षिण-पश्चिमी कमान एवं कर्नल ऑफ द मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री रेजिमेंट के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। अभियान का नेतृत्व ब्रिगेडियर पी. सुनील कुमार, एसएम’, कमांडेंट, एमआईसी एंड एस द्वारा किया जा रहा है तथा इसका क्रियान्वयन लेफ्टिनेंट कर्नल अशोक कुमार, चीफ रिकॉर्ड ऑफिसर के निर्देशन में किया जा रहा है।रेजिमेंट के अधिकारियों ने बताया कि यह पहल आगामी एक वर्ष तक देशभर में निरंतर जारी रहेगी, ताकि अधिक से अधिक पूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रितों को उनके घर के निकट ही पेंशन संबंधी सहायता, मार्गदर्शन और शिकायतों के त्वरित निराकरण की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके।
- कांकेर। कांकेर जिले में बुधवार को भालू के हमले में 38 वर्षीय एक व्यक्ति और उसकी बहन की मौत हो गई, जबकि एक अन्य बहन घायल हो गई। वन विभाग के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। अधिकारी ने बताया कि यह घटना दोपहर में नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव मरकाटोला में हुई, जब तीनों भाई-बहन खेत में थे। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान हलाल खोर जुर्री (38) और चमरीन बाई (40) के रूप में हुई है, जबकि हमले में उनकी बहन खोरिन बाई (30) घायल हो गई। अधिकारी के मुताबिक, खोरिन को कांकेर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि घटना की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों के अनुसार, मंगलवार को अपने एक बच्चे की मौत के बाद मादा भालू आक्रामक हो गई थी। उन्होंने बताया कि हमले के बाद भी भालू शवों के पास ही रही और उन पर पंजे मारती रही। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें मृतकों के शव के पास मादा भालू दिखाई दे रही है। मौके पर मौजूद कांकेर के विधायक आशाराम नेताम ने कहा कि जब वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचे, तब भालू शवों के पास ही मौजूद थी। उस पर कड़ी नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को उस इलाके से दूर रहने की सलाह दी गई है।
- रायपुर । लोककला और पंडवानी परंपरा को समर्पित प्रसिद्ध पंडवानी गायिका स्वर्गीय तीजन बाई की स्मृति में आयोजित होने वाले 'आरुग सम्मान समारोह' के पोस्टर का विमोचन बुधवार को रायपुर प्रेस क्लब में किया गया।यह सम्मान समारोह 7 अगस्त को शहीद स्मारक, रायपुर में आयोजित होगा। कार्यक्रम का आयोजन अलीम बंसी, तीजन बाई के परिवारजनों द्वारा किया जा रहा है। समारोह में लोककला, संस्कृति और पंडवानी की विरासत को आगे बढ़ाने वाले कलाकारों का सम्मान किया जाएगा तथा स्वर्गीय तीजन बाई के कला-साधना से जुड़े अविस्मरणीय योगदान को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाएगा।पोस्टर विमोचन के अवसर पर रायपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी , कोषाध्यक्ष दिनेश यदु सहित आयोजन समिति के सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने प्रदेशवासियों एवं कला प्रेमियों से बड़ी संख्या में समारोह में शामिल होकर स्वर्गीय तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करने और कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने की अपील की।
- -47 आजीविका डबरियां किसानों के लिए बनेंगी संबल, जल संरक्षण के साथ बढ़ेगी आय-विकसित भारत जी राम जी योजना के तहत सिंचाई, मत्स्य पालन और कृषि गतिविधियों को मिलेगा नया आधाररायपुर / छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू किया गया 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण को एक बड़ा जनआंदोलन बना रहा है। इसके तहत सोख्ता गड्ढे, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, तालाब गहरीकरण और खेत-पोंड जैसी जल संरचनाएं बनाकर भूजल स्तर को बढ़ाया जा रहा है और ग्रामीणों को रोजगार भी मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में 'मोर गांव-मोर पानी' अभियान के तहत 'नवा तरिया आय के जरिया' और अन्य जल संरचनाओं के माध्यम से भूजल संवर्धन और जल संरक्षण को जनआंदोलन का रूप दिया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधा और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर बढ़ रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित मोर गांव-मोर पानी अभियान ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण, सिंचाई विस्तार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रहा है। विकसित भारत जी राम जी योजना के अंतर्गत जांजगीर-चांपा जिले में आजीविका आधारित जल संरचनाओं का निर्माण कर किसानों को कृषि एवं मत्स्य पालन के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं।जांजगीर-चांपा जिले में अभियान के तहत कुल 47 आजीविका डबरियों का निर्माण स्वीकृत किया गया है, जिनमें से 35 डबरियों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। वर्षा जल से भर चुकी इन डबरियों के माध्यम से किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे खेती का रकबा बढ़ने के साथ कृषि उत्पादन में भी वृद्धि हो रही है।आजीविका डबरियां अब केवल जल संरक्षण का माध्यम नहीं रहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का सशक्त स्रोत भी बन रही हैं। वर्तमान में 14 डबरियों में मत्स्य पालन एवं कृषि आधारित गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। डबरियों की मेड़ों पर दलहन, तिलहन तथा अन्य फसलों की खेती से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन और बेहतर आमदनी प्राप्त हो रही है। जिले में 4 डबरियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से वर्षा जल संरक्षण, भू-जल स्तर में सुधार तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को नई गति मिली है। इससे किसान अब वर्षभर कृषि एवं मत्स्य पालन जैसी आजीविका गतिविधियों से जुड़कर अपनी आय में निरंतर वृद्धि कर रहे हैं। मोर गांव-मोर पानी अभियान प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि उत्पादकता बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने की दिशा में राज्य सरकार की महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रहा है। यह अभियान जल संरक्षण को जनभागीदारी से जोड़ते हुए किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रहा है।
- -ओवररेटिंग मामले में दो आबकारी उप निरीक्षक निलंबित-एक एडीईओ के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने के लिए अनुशंसारायपुर/ आबकारी आयुक्त छत्तीसगढ़ ने राज्य के विभिन्न जिलों में शराब दुकानों में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर बिक्री और नियंत्रण में लापरवाही के मामलों में सख्त कार्रवाई करते हुए दो आबकारी उप निरीक्षकों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई राज्य स्तरीय उड़नदस्ता की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई। निलंबित अधिकारियों में बालोद जिले के गुरूर के श्री आशाराम शाक्य (आबकारी उप निरीक्षक) तथा बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम रोहासी स्थित देशी कम्पोजिट मदिरा दुकान के प्रभारी श्री पी.माधव राव (आबकारी उप निरीक्षक) शामिल हैं। एक अन्य मामले में श्रीमती निलोफर जैन सहायक जिला आबकारी अधिकारी जो देश कम्पोजिट मदिरा दुकान अरकार जिला बालोद के प्रभारी सह मंडल प्रभारी का दायित्व था उनके शिथिल नियंत्रण, कर्तव्य की प्रति लापरवाही एवं उदासीनता बरतने के कारण आबकारी आयुक्त द्वारा एडीईओ के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के लिए सचिव वाणिज्यिक-कर (आबकारी) विभाग को पत्र जारी किया है।
- -छोटे किसान और स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएँ ही ग्रामीण बदलाव की असली प्रेरक हैं": इंडिया रूरल कोलोक्वी 2026 में राहुल भगत-ग्रीन इकोनॉमिक ट्रांज़िशन (हरित आर्थिक बदलाव) पर एक रिपोर्ट जारी की गई, जिसमें जलवायु-अनुकूल और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं के रास्ते बताए गए-छठे संस्करण में ज़मीनी स्तर के नेतृत्व, मजबूत स्थानीय शासन और समावेशी ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने के लिए सरकार, समुदाय और विकास क्षेत्र के नेताओं को एक मंच पर लाया गयारायपुर / छठे 'इंडिया रूरल कोलोक्वी' (भारत ग्रामीण संगोष्ठी) के छत्तीसगढ़ चैप्टर की शुरुआत इस ज़ोरदार अपील के साथ हुई कि छोटे किसानों और महिलाओं के नेतृत्व वाले संस्थानों को ग्रामीण बदलाव की नींव के तौर पर पहचाना जाए। टीआरआई और छत्तीसगढ़ सरकार के बीच यह सहयोग पूरे राज्य में समावेशी और सामुदायिक नेतृत्व में होने वाले ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता को मज़बूत करता है।रायपुर में गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए छत्तीसगढ़ सरकार के मुख्यमंत्री के सचिव और 'गुड गवर्नेस एंड कन्वर्जेस' विभाग के सचिव, राहुल भगत ने कहा, "छोटे किसान और स्वयं-सहायता समूहों की महिलाएँ ग्रामीण बदलाव की असली प्रेरक हैं। पहला कदम उठाने का उनका साहस असंख्य लोगों को बदलाव लाने वाला (चेंजमेकर) बनने के लिए प्रेरित करता है।"इस चर्चा में नया रायपुर के ट्राइबल रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, सामुदायिक नेताओं, नागरिक समाज संगठनों और विकास कार्यों से जुड़े लोगों को एक साथ लाने का काम किया गया। इससे पता चला कि कैसे मज़बूत ज़मीनी नेतृत्व, जवाबदेह संस्थान और सामुदायिक ज्ञान मिलकर ग्रामीण छत्तीसगढ़ के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं। इस कार्यक्रम के दौरान 'ग्रीन इकोनॉमिक पाथवेज़ - छत्तीसगढ़' स्टडी रिपोर्ट भी जारी की गई, जिसमें जलवायु-अनुकूल और समावेशी ग्रामीण अर्थव्यवस्था निर्माण के तरीकों पर प्रकाश डाला गया।मुख्य भाषण देते हुए, पद्मश्री पुरस्कार विजेता श्री बुद्री थाती ने स्थानीय समुदायों और प्रकृति के बीच तालमेल को फिर से स्थापित करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "जहाँ कभी बदलाव मुश्किल लगता था, वहाँ प्यार और सच्ची कोशिशों से बदलाव आया। हर इंसान प्यार चाहता है और उन्हें बस ऐसे व्यक्ति की ज़रूरत होती है जो उन्हें सच में समझे।"मजबूत स्थानीय संस्थानों के महत्व पर बात करते हुए, छत्तीसगढ़ सरकार के पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग के सचिव भीम सिंह ने इस बात पर ज़ोर दिया कि टिकाऊ ग्रामीण विकास ज़मीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से काम करने पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा, "हर सरकारी योजना का असली क्रियान्वयन गांव के स्तर पर होता है। अगर गाँव के संस्थान मजबूत नहीं होंगे, तो विकास की गति सीमित ही रहेगी।"वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए, यह लैंगिक समानता पर केंद्रित अपने दृष्टिकोण को और मजबूत कर रहा है तथा समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडलों का विस्तार कर ग्रामीण भारत में समान और सतत विकास को आगे बढ़ा रहा है।इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए, टीआरआई ने 'विकसित छत्तीसगढ़ के लिए जमीनी नेतृत्व' विषय पर भारत ग्रामीण संगोष्ठी के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया। नीति-निर्माताओं, विचारकों और जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों ने इस बात पर अपने विचार साझा किए कि ग्रामीण बदलाव की अगली पीढ़ी का नेतृत्व कौन करेगा। इसमें यह भी चर्चा की गई कि सार्वजनिक संस्थान समुदायों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां कैसे तैयार कर सकते हैं।इस गोष्ठी का एक मुख्य आकर्षण 'ग्राम संवादः ग्रामीण भारत का भविष्य गढ़ते समुदाय' था। यह अपनी तरह की पहली चर्चा थी जिसमें नीतिगत चर्चाओं के केंद्र में समुदाय की आवाज़ को रखा गया। महिला लीडर्स, प्रगतिशील किसानों, चुने हुए प्रतिनिधियों और जमीनी स्तर के संस्थानों ने आजीविका बेहतर बनाने, सार्वजनिक प्रणालियों को मजबूत करने और एक सशक्त समुदाय बनाने को ले कर अपने अनुभव साझा किए। साथ ही, उन्होंने असल जीवन की सच्चाइयों पर आधारित व्यावहारिक समाधान भी पेश किए। इन जानकारियों के आधार पर, 'समाधान मंथन पॉलिसी इनोवेशन लैब' ने अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों की टीमों को एक साथ लाकर सामुदायिक ज्ञान से प्रेरित नीतिगत प्रस्ताव तैयार किए। इन विचारों को सरकारी अधिकारियों, शिक्षाविदों, नागरिक समाज और समुदाय के प्रतिनिधियों की एक प्रतिष्ठित जूरी के समक्ष रखा गया। इससे यह पता चला कि जमीनी स्तर के अनुभव किस तरह बड़े पैमाने पर लागू होने वाली सार्वजनिक नीति-निर्माण और ग्रामीण बदलाव लाने में मदद कर सकते हैं।छत्तीसगढ़ संवाद में राज्य के ग्रामीण भविष्य को आकार देने में सामुदायिक नेतृत्व की शक्ति पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान मजबूत स्थानीय शासन, उत्तरदायी सार्वजनिक संस्थाओं, समुदाय-आधारित नीतिगत समाधानों और विभिन्न क्षेत्रों के बीच साझेदारी पर चर्चा की गई। साथ ही, जमीनी स्तर के ज्ञान को समावेशी ग्रामीण परिवर्तन के लिए बड़े स्तर पर लागू किए जा सकने वाले तरीकों में बदलने पर भी जोर दिया गया।राहुल हीरेमठ, प्रोफेसर, आईआईएम रायपुर, सत्य लता मिरी, अध्यक्ष, जिला परिषद, जांजगीर चांपा, हिना अनिमेष नेताम, निदेशक, जनजातीय अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, मेनका चंद्राकर, उपायुक्त, जनजातीय विभाग, अश्विनी देवांगन, मिशन निदेशक, एसआरएलएम, डॉ. संजीव पाराशर, प्रभारी निदेशक, आईआईएम रायपुर ने भी विभिन्न सत्रों के दौरान अपना संबोधन दिया।भारत ग्रामीण संगोष्ठी के बारे में:ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (टीआरआई) का प्रमुख आयोजन भारत ग्रामीण संगोष्ठी वर्ष 2026 में अपने छठे संस्करण के साथ वापस आ रहा है। एक वर्चुअल श्रृंखला के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन आज एक राष्ट्रीय, बहुराज्यीय मंच बन चुका है, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, शिक्षाविदों, नागरिक समाज संगठनों और समुदायों को एक साथ लाकर ग्रामीण भारत के लिए नए विचारों और ठोस कार्य योजनाओं पर चर्चा करता है। इस वर्ष आठ दिनों तक चलने वाली यह संगोष्ठी असम, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें आजीविका, सुशासन, जलवायु अनुकूलता, लैंगिक समानता, स्वास्थ्य, प्रौद्योगिकी और स्थानीय आर्थिक विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की जाएगी। इन विचार-विमर्शों से प्राप्त सुझावों को ग्रामीण भारत के समृद्ध भविष्य के लिए व्यावहारिक कार्य योजनाओं में बदला जाएगा।
- -राज्य मंत्रिपरिषद से 79.70 एकड़ भूमि को मंजूरीरायपुर / छत्तीसगढ़ के औद्योगिक मानचित्र पर मुंगेली जिले ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य मंत्रिपरिषद ने मुंगेली जिले के पथरिया तहसील अंतर्गत ग्राम चंद्रगढ़ी में भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) के प्रस्तावित हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट निर्माण संयंत्र की स्थापना हेतु 79.70 एकड़ शासकीय भूमि रियायती दर पर आबंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है।यह छत्तीसगढ़ में अपनी तरह का पहला हैवी अर्थ मूविंग इक्विपमेंट (भारी मशीनरी) निर्माण संयंत्र होगा। यह संयंत्र ग्राम चंद्रगढ़ी (तहसील पथरिया) में स्थापित किया जाएगा, जो बिलासपुर-रायपुर राष्ट्रीय राजमार्ग से मात्र 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सार्वजनिक उपक्रम BEML के आने से स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष रोजगार, तकनीकी प्रशिक्षण के साथ-साथ एमएसएमई (MSME), लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन और स्पेयर पार्ट्स निर्माण जैसे सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। पथरिया एसडीएम श्रीमती रेखा चंद्रा ने बताया कि ठम्डस् संयंत्र के लिए शुरुआत में रायगढ़ और जांजगीर-चांपा जिलों में भूमि चिन्हांकन की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार के मार्गदर्शन में जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र तथा राजस्व विभाग की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्यवाही करते हुए 79.70 एकड़ उपयुक्त शासकीय भूमि की खोज कर प्रस्ताव शासन को भेजा, जिसे अब कैबिनेट से मंजूरी मिल गई है। कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने इस उपलब्धि पर जिलेवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि बीईएमएल संयंत्र मुंगेली में आधुनिक विनिर्माण और इंजीनियरिंग गतिविधियों का नया केंद्र बनेगा। यह निर्णय जिले में औद्योगिक विकास की पृष्ठभूमि तैयार करने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खोलने में मील का पत्थर साबित होगा।
- -छत्तीसगढ़ में स्थापित होगा पहला मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक)'माता यशोदा सम्मान' से सम्मानित होंगी 10 प्रेरणादायी माताएंरायपुर । विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) एवं राज्य स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (एसएचएसआरसी) के सहयोग से 6 अगस्त 2026 को रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम प्रातः 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय परिसर स्थित अटल बिहारी वाजपेयी सभागार के नए सभागार में आयोजित होगा।कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे। सचिव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण श्री अमित कटारिया तथा आयुक्त-सह-संचालक, स्वास्थ्य सेवाएं श्री संजीव झा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य मातृ दुग्ध के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, नवजात एवं शिशुओं के समुचित पोषण और बेहतर स्वास्थ्य को प्रोत्साहित करना तथा मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करना है। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा विशेषज्ञों, नर्सिंग अधिकारियों, मितानिनों, जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता रहेगी।कार्यक्रम में राज्य की 10 ऐसी माताओं को 'माता यशोदा सम्मान' से सम्मानित किया जाएगा, जिन्होंने अपने मातृ दुग्ध का दान कर अथवा अन्य शिशुओं को स्तनपान कराकर मानवता और मातृत्व की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की है। ये वे शिशु हैं जिनकी माताओं में पर्याप्त दूध उपलब्ध नहीं हो सका अथवा जिनकी माता का निधन हो चुका है।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ शासन राज्य के पहले मातृ दूध कोष (मदर मिल्क बैंक) की स्थापना की घोषणा भी की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य ऐसे नवजात एवं शिशुओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और पर्याप्त मातृ दुग्ध उपलब्ध कराना है, जिन्हें किसी कारणवश अपनी माता का दूध प्राप्त नहीं हो पाता।स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि माँ का दूध शिशु के लिए सर्वोत्तम, संपूर्ण और प्राकृतिक आहार है। यह न केवल शिशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभकारी है। विश्व स्तनपान सप्ताह के माध्यम से समुदाय में स्तनपान के प्रति सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देने तथा माताओं को आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने पर विशेष बल दिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने मीडिया प्रतिनिधियों एवं आमजन से कार्यक्रम में सहभागिता कर स्तनपान के महत्व का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य तथा पोषण संबंधी जन-जागरूकता को और अधिक सशक्त बनाया जा सके।



























