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- रायपुर /जिला अस्पताल बीजापुर के विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (SNCU) में एक अत्यंत दुर्लभ एवं गंभीर बीमारी से पीड़ित नवजात शिशु का सफलतापूर्वक उपचार कर उसे नया जीवन प्रदान किया गया है।ग्राम कोरसागुड़ा कोरसागुड़ा, बासागुड़ा विकासखण्ड उसूर निवासी शांति मोटू पूनेम के नवजात को 4 अप्रैल 2026 को गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था। जांच में शिशु को Staphylococcal Scalded Skin Syndrome नामक अत्यंत दुर्लभ त्वचा रोग से पीड़ित पाया गया, जिसमें त्वचा जलने जैसी स्थिति में छिलने लगती है और संक्रमण तेजी से फैलता है। यह बीमारी बहुत ही कम मामलों में देखने को मिलती है।शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नेहा चव्हाण के नेतृत्व में टीम ने 25 दिनों तक लगातार गहन उपचार, एंटीबायोटिक थेरेपी एवं विशेष नर्सिंग देखभाल प्रदान की। उपचार के दौरान शिशु की अत्यंत नाजुक और प्रभावित त्वचा की सुरक्षा के लिए विशेष सावधानियां बरती गईं। शिशु को बाहरी संक्रमण और घर्षण से बचाने हेतु पारंपरिक एवं सहायक उपाय के रूप में स्वच्छ एवं स्टरलाइज किए गए केले के पत्तों का उपयोग किया गया। इन पत्तों को बिस्तर के रूप में इस प्रकार बिछाया गया कि नवजात की त्वचा को मुलायम और सुरक्षित सतह मिले, जिससे शरीर पर रगड़ कम हो और संक्रमण का खतरा घटे। साथ ही नियमित रूप से पत्तों को बदलकर स्वच्छता बनाए रखी गई, जिससे बच्चे को एक संक्रमण-रहित वातावरण मिल सके।मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बी. आर. पुजारी एवं सिविल सर्जन डॉ. रत्ना ठाकुर के मार्गदर्शन में उपचार सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस उपलब्धि में कलेक्टर श्री संबित मिश्रा एवं जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नम्रता चौबे के मार्गदर्शन एवं सतत प्रशासनिक सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने में मदद मिली।शिशु के परिजनों ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपने बच्चे के जीवित रहने की उम्मीद लगभग खो दी थी, लेकिन चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ के समर्पण, निरंतर देखभाल और अथक प्रयासों ने उनके बच्चे को नया जीवन दे दिया। उन्होंने इसे अपने परिवार के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं बताया और पूरे चिकित्सा दल के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।यह सफलता दर्शाती है कि अब दूरस्थ क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं और जिला अस्पताल बीजापुर का SNCU क्षेत्रवासियों के लिए आशा का केंद्र बनकर उभर रहा है।
- रायपुर / राज्य शासन द्वारा बीते वर्ष आयोजित सुशासन तिहार के सकारात्मक परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिख रहा है, जहाँ प्रशासन की तत्परता दूरस्थ वनांचलों में रहने वाले ग्रामीणों के जीवन में स्वावलंबन का नया अध्याय लिख रही है। इसी कड़ी में बस्तर जिले के सुदूर जनपद पंचायत बास्तानार अंतर्गत ग्राम पंचायत छोटे किलेपाल से एक हृदयस्पर्शी सफलता की कहानी सामने आई है, जिसने शासन की संवेदनशीलता और जनहितैषी दृष्टिकोण को सिद्ध किया है।दंतेवाड़ा जिले की सीमा से लगे इस सुदूर ग्राम छोटे किलेपाल के निवासी श्री सामनाथ ठाकुर और रीता ठाकुर, जो एक ही परिवार के सदस्य हैं, दिव्यांग होने के कारण लंबे समय से गंभीर आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना कर रहे थे। शारीरिक अक्षमता के चलते उन्हें अपनी हर छोटी-बड़ी आवश्यकता और दैनिक वस्तुओं के लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर पूरी तरह आश्रित होना पड़ता था। इस निर्भरता के कारण न केवल उनका आत्मसम्मान प्रभावित हो रहा था, बल्कि आर्थिक तंगी के दौर में वे परिवार पर भी एक अतिरिक्त बोझ महसूस कर रहे थे। वर्षों से अपनी विवशता को ही नियति मान चुके इन ग्रामीणों के लिए पिछले वर्ष आयोजित सुशासन तिहार आशा की एक नई किरण बनकर आया।शिविर के दौरान जब इन दिव्यांगों ने पेंशन योजना के लाभ हेतु अपनी मांग रखी, तो प्रशासन ने इसे महज एक औपचारिक आवेदन के रूप में न लेते हुए सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की। जनपद पंचायत बास्तानार के अधिकारियों ने तत्काल सक्रियता दिखाई और ग्राम पंचायत के समन्वय से उनके आधार कार्ड, बैंक पासबुक और राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेजों का संकलन कर त्वरित कार्यवाही सुनिश्चित की। पात्र पाए जाने पर उन्हें तत्काल पेंशन की स्वीकृति प्रदान की गई, जिसकी जानकारी मिलते ही पूरे परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ राज्य सरकार का राजस्व विभाग आम नागरिकों को बड़ी राहत प्रदान करते हुए भूमि और राजस्व संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी और पेपरलेस बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। 'सुशासन' के संकल्प को साकार करते हुए, अब नागरिकों को खसरा-बी-1, नामांतरण और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजस्व विभाग की इस डिजिटल पहल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि हमारी सरकार तकनीक के माध्यम से शासन को जनता के द्वार तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। राजस्व सेवाओं का डिजिटलीकरण आम आदमी के समय और श्रम की बचत सुनिश्चित करेगा। यह पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में एक बड़ा कदम है।राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने जानकारी दी कि विभाग अपनी कार्यप्रणाली में आमूलचूल परिवर्तन कर रहा है। हमारा उद्देश्य तकनीक के उपयोग से मानवीय हस्तक्षेप को कम करना है, जिससे पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आए। 'डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम' (DILMP) के माध्यम से हम राज्य को अत्याधुनिक राजस्व तंत्र प्रदान कर रहे हैं, जिससे नागरिक घर बैठे अपनी भूमि का विवरण प्राप्त कर सकें। राजस्व विभाग द्वारा दी जा रही प्रमुख ऑनलाइन सुविधाओं में नागरिक अब निःशुल्क खसरा और बी-1 की डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित प्रति राज्य के किसी भी कोने से कभी भी बिल्कुल मुफ्त डाउनलोड कर सकते हैं। खसरा या बी-1 में किसी भी संशोधन या बदलाव की सूचना सीधे पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम SMS अलर्ट के माध्यम से प्राप्त होती है, जो किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ को रोकने में सहायक है।कृषि ऋण के लिए बैंक में गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध है, जिससे खरीद-बिक्री के समय पारदर्शिता बनी रहती है। अब नामांतरण के लिए बार-बार आवेदन नहीं करना पड़ता। उप पंजीयक कार्यालय में पंजीयन होते ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसी तरह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध विशेष मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक कहीं से भी अपने स्मार्टफोन से जमीन का रिकॉर्ड देख और डाउनलोड कर सकते हैं। राजस्व विभाग के इन नवाचारों से छत्तीसगढ़ राज्य राजस्व प्रशासन में एक नई डिजिटल क्रांति का गवाह बन रहा है।अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित राजस्व प्रशासन DILMP के तहत राज्य की सभी तहसीलों में 'मॉडर्न रिकॉर्ड रूम' स्थापित कर राजस्व प्रशासन को पूरी तरह अत्याधुनिक और पेपरलेस बनाना है। इन सुविधाओं का उद्देश्य नागरिकों को सशक्त बनाना और समय की बचत करना है। डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILMP) वर्ष 2008-09 में शुरू हुई। यह केंद्र-प्रवर्तित योजना 1 अप्रैल 2016 से पूर्णतः केंद्रीय योजना के रूप में संचालित है। वर्तमान में राज्य के 20 हज़ार 286 गांवों के खसरा और 19 हज़ार 694 गांवों के नक्शों का कंप्यूटरीकरण कार्य पूर्ण किया जा चुका है। इसके साथ ही, 'प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना' के तहत 18,959 गांवों के नक्शों की जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कर उन्हें अत्याधुनिक बनाया गया है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को तहसील कार्यालयों के साथ ऑनलाइन जोड़कर एक एकीकृत नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे काम में गति और सटीकता आई है।राज्य के 1 हज़ार 89 ग्रामों का सर्वेक्षण किया गया, जिनमें से 1,018 का नक्शा उपलब्ध कराया गया है। प्रथम चरण में 717 गांवों का और 454 गांवों का द्वितीय चरण में सत्यापन पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही 233 गांवों का डेटा 'भुईयां' एवं 'भू-नक्शा' सॉफ्टवेयर में अपलोड किया जा चुका है।इसी तरह राज्य की 50 तहसीलों में आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर राजस्व सर्वेक्षण का कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 252 में से 172 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम स्वीकृत हैं, जिनमें से 155 का कार्य पूर्ण हो चुका है। इसके साथ ही राज्य के राजस्व कार्यालयों का डिजिटलीकरण एवं इंटरकनेक्टिविटी का कार्य तेजी से किया जा रहा है। राज्य के सभी 105 उप पंजीयक कार्यालयों को ऑनलाइन कर उन्हें तहसील कार्यालयों के साथ इंटरनेट के माध्यम से जोड़ दिया गया है। प्रधानमंत्री गतिशक्ति योजना के तहत राज्य के सभी राजस्व ग्रामों के खसरा नक्शों का जियोरेफरेंसिंग (Georeferencing) कार्य किया जा रहा है। राज्य के कुल 19,694 गांवों में से 18,959 गांवों में यह कार्य पूर्ण हो चुका है।इस डिजिटल पहल से आम नागरिकों को अनावश्यक भागदौड़ से मुक्ति मिली है और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली में स्पष्टता और सुगमता आई है, जो निश्चित रूप से राज्य के चहुंमुखी विकास में सहायक सिद्ध होगी।
- -विशेष पिछड़ी जनजातियों के द्वार तक पहुँचा अस्पताल- पीएम जनमन योजना से बदली दुर्गम क्षेत्रों की तस्वीररायपुर। छत्तीसगढ़ के दूरस्थ वनांचलों और दुर्गम पहाड़ियों पर बसे विशेष पिछड़ी जनजाति बाहुल्य क्षेत्रों के लिए शासन की मोबाइल मेडिकल यूनिट (MMU) एक वरदान साबित हो रही है। 'अस्पताल खुद ग्रामीण के द्वार' की परिकल्पना को साकार करते हुए, इस सेवा ने पिछले साढ़े तीन महीनों में 2035 लोगों को उनके ही मोहल्ले में स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।पूर्व में इन क्षेत्रों के ग्रामीणों को सामान्य इलाज के लिए भी कई मील पैदल चलना पड़ता था। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 15 जनवरी 2026 से संचालित यह यूनिट विशेष पिछड़ी जनजाति 'कमार' बाहुल्य ग्राम बल्दाकछार और औराई सहित कसडोल क्षेत्र के अन्य गांवों में निरंतर कैंप लगा रही है। अब सुदूर बस्तियों के लोगों को शहर के चक्कर काटने की आवश्यकता नहीं रह गई है।इस चलते-फिरते अस्पताल में सुविधाओं का पूरा तामझाम मौजूद है। प्रत्येक यूनिट में एक मेडिकल ऑफिसर, लैब टेक्निशियन, नर्स और ड्राइवर की दक्ष टीम तैनात रहती है।निःशुल्क जांच: बीपी, शुगर, मलेरिया और हीमोग्लोबिन जैसी महत्वपूर्ण जांचें मौके पर ही की जाती हैं।अनुभवी डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सलाह के साथ-साथ मुफ्त दवाइयां भी वितरित की जा रही हैं।प्रशासन द्वारा कैंप लगाने की तिथि और स्थान एक माह पूर्व ही निर्धारित कर लिया जाता है। ग्रामीणों को समय पर सूचना मिले, इसके लिए गांव-गांव में मुनादी (ढोल बजाकर घोषणा) करवाई जाती है। इससे ग्रामीणों में भारी उत्साह देखा जा रहा है।स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि अस्पताल में लंबी कतारों और परिवहन के सीमित साधनों के कारण पहले हमारा पूरा दिन बर्बाद हो जाता था। अब घर के पास इलाज मिलने से समय और धन दोनों की बचत हो रही है। इस पहल का सबसे बड़ा सकारात्मक प्रभाव ग्रामीणों की सोच पर पड़ा है। विशेष पिछड़ी जनजाति के लोग जो पहले केवल बैगा-गुनिया या पारंपरिक जड़ी-बूटियों पर निर्भर थे, अब उनमें आधुनिक चिकित्सा पद्धति के प्रति विश्वास जागा है। लोग अब बीमारियों को छिपाने के बजाय समय पर जांच और इलाज को प्राथमिकता दे रहे हैं।
- -धनेश्वरी बनीं रोजगार प्रदाता, भगवती बनीं ‘लखपति दीदी’—प्रदेशभर में दिख रहा सशक्तिकरण का असररायपुर। छत्तीसगढ़ शासन की राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में व्यापक बदलाव का माध्यम बन रही है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेशभर में महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बन रही हैं, बल्कि स्वरोजगार के जरिए दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रही हैं। सरगुजा जिले की धनेश्वरी साहू और भगवती सिंह इसकी प्रेरक उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने परिश्रम और योजना के सहयोग से सफलता की नई मिसाल कायम की है।सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम गुमगराकला की धनेश्वरी साहू ने ‘जय संतोषी मां स्वयं सहायता समूह’ से जुड़कर अपने जीवन को नई दिशा दी। समूह के माध्यम से प्राप्त 1 लाख रुपये के ऋण से उन्होंने एक एकड़ भूमि पर आधुनिक तरीके से खीरे की खेती शुरू की। मेहनत और तकनीकी मार्गदर्शन के परिणामस्वरूप उन्हें अच्छी पैदावार मिल रही है, जिसे वे अंबिकापुर मंडी में बेचकर बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।आज धनेश्वरी न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि अपने खेत में 2 से 4 स्थानीय मजदूरों को रोजगार भी उपलब्ध करा रही हैं। उनका यह प्रयास उन्हें एक सफल महिला उद्यमी और रोजगार प्रदाता के रूप में स्थापित कर रहा है।ग्राम पंचायत गुमगरा खुर्द की भगवती सिंह ने ‘रेखा महिला स्व-सहायता समूह’ से जुड़कर आत्मनिर्भरता की राह पकड़ी। प्रारंभ में 15 हजार रुपये की सहायता से सब्जी की खेती शुरू की और बाद में 30 हजार रुपये का निवेश कर ईंट निर्माण का कार्य आरंभ किया। उन्होंने लगभग 50 हजार ईंटों का निर्माण कर अच्छा लाभ अर्जित किया।इसके बाद भगवती ने 50 हजार रुपये का बैंक ऋण लेकर किराना और कपड़े की दुकान शुरू की। विभिन्न आय स्रोतों के चलते उनकी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ हुई और वे ‘लखपति दीदी’ के रूप में पहचानी जाने लगीं। आज वे अपने परिवार के लिए पक्का घर भी बनवा चुकी हैं और बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं।दोनों महिलाओं का कहना है कि ‘बिहान’ योजना से उन्हें न केवल आर्थिक सहयोग मिला, बल्कि आत्मविश्वास और समाज में पहचान भी मिली है। वे अपनी सफलता का श्रेय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित योजनाओं को देते हुए आभार व्यक्त करती हैं।प्रदेश में ‘बिहान’ योजना के माध्यम से हजारों महिलाएं आज स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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सफलता की कहानी
रायपुर / पलाश (टेसू या ढाक) का फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता का प्रतीक है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, आजीविका और स्वास्थ्य के लिए एक बहुमूल्य संसाधन है। इसके नारंगी-लाल फूलों को जंगल की आग भी कहा जाता है, जो वसंत ऋतु में ग्रामीण क्षेत्रों में समृद्धि लाते हैं। पलाश के फूल, बीज और गोंद (कमरकस) आयुर्वेद में चर्म रोग, पेट के कीड़े, डायबिटीज, और यौन स्वास्थ्य में सुधार के लिए प्रयुक्त होते हैं। इन औषधीय उत्पादों को बेचकर भी ग्रामीण अपनी आय बढ़ाते हैं।पलाश फूल (ब्यूटिया मोनोस्पर्मा), जिसे टेसू, ढाक या “जंगल की आग” (फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट) भी कहा जाता है, भारत का एक महत्वपूर्ण औषधीय और सांस्कृतिक फूल है। बसंत ऋतु में खिलने वाले इसके आकर्षक नारंगी फूल न केवल प्राकृतिक सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि औषधीय उपयोग, प्राकृतिक होली रंग और त्वचा की देखभाल में भी काम आते हैं। छत्तीसगढ़ के वन मण्डल कटघोरा में पलाश के वृक्ष बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। पसान, केन्दई, जटगा, एतमानगर, कटघोरा, चौतमा और पाली जैसे क्षेत्रों में इसकी भरपूर उपलब्धता है। यहां के आदिवासी और वनवासी परिवारों के लिए लघु वनोपज संग्रहण आजीविका का प्रमुख साधन है। पलाश फूल का संग्रहण मुख्यत मार्च-अप्रैल माह में किया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ, रायपुर द्वारा वर्ष 2025 में इसका संग्रहण दर 11.50 रूपए प्रति किलोग्राम निर्धारित किया गया। यह दर संग्राहकों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने में मददगार साबित हुई है।वर्ष 2022-23 में 116 संग्राहकों से 402 क्विंटल, वर्ष 2023-24 में 40 संग्राहकों से 58 क्विंटल,वर्ष 2024-25 में 107 संग्राहकों से 147 क्विंटल और वर्ष 2025-26 में 20 संग्राहकों से 76 क्विंटल संग्रहण किया गया इसके साथ ही साथ पलाश के मूल्य में भी वृद्धि हुई है। वर्ष 2022-23 में 900 रुपये प्रति क्विंटल मिलने वाला पलाश वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1150 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। इसके बाद संघ मुख्यालय द्वारा इसे 1600 रुपये प्रति क्विंटल की दर से विक्रय किया गया, जिससे संग्राहकों को बेहतर लाभ मिला।वन धन विकास केंद्र पसान, मोरगा, डोंगानाला, गुरसियां और मानिकपुर के माध्यम से संग्रहण कार्य को संगठित रूप दिया गया है। इन केंद्रों ने स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण, संग्रहण और विपणन में सहयोग प्रदान किया। वर्ष 2025-26 में पलाश फूल संग्रहण करने वाले 20 संग्राहकों को कुल 87,400 रुपए का भुगतान किया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और जीवन स्तर में सुधार आया। यह पहल शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसमें लघु वनोपज के माध्यम से ग्रामीण और आदिवासी परिवारों को रोजगार और आय के अवसर मिल रहे हैं।पलाश के फूल मां लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय माना जाता है, इसलिए इन्हें पूजा-पाठ में उपयोग किया जाता है। मान्यता है कि इन्हें तिजोरी में रखने से धन-समृद्धि बढ़ती है। पलाश के पत्तों से बने पत्तल और दोने शादियों और अन्य आयोजनों में इको.फ्रेंडली विकल्प के रूप में बहुत लोकप्रिय हैं, जो ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा साधन है। आगामी सीजन में कटघोरा वनमण्डल के सभी समितियों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर अधिक से अधिक लोगों को पलाश फूल संग्रहण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इससे न केवल आजीविका के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि वन संसाधनों का सतत और समुचित उपयोग भी सुनिश्चित होगा। पलाश सिर्फ फूलों की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता,आजीविका और समृद्धि की नई उड़ान की कहानी है।पलाश के फूलों का सबसे बड़ा व्यावसायिक उपयोग होली के लिए प्राकृतिक और हर्बल गुलाल, रंग बनाने में होता है। आदिवासी और ग्रामीण महिलाएं पलाश ब्रांड के माध्यम से इन फूलों से इको-फ्रेंडली रंग तैयार कर अपनी आजीविका बढ़ा रही हैं। - -छत्तीसगढ़ में आर्थिक और सामाजिक सशक्त हो रहीं महिला श्रमिक--डॉ. दानेश्वरी सम्भाकर उप संचालक (जनसंपर्क)रायपुर। हर वर्ष 1 मई को मनाया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस श्रमिकों के योगदान को सम्मान देने का अवसर होता है। छत्तीसगढ़ में यह दिवस इसलिए भी खास है, क्योंकि यहां की अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और उनका योगदान पहले से अधिक प्रभावी होता जा रहा है।राज्य के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं लंबे समय से कृषि कार्य, वनोपज संग्रहण, तेंदूपत्ता तोड़ने और हस्तशिल्प जैसे कार्यों में सक्रिय रही हैं, वहीं शहरी क्षेत्रों में उनकी उपस्थिति निर्माण कार्य, घरेलू सेवाओं और लघु व्यवसायों में तेजी से बढ़ी है। यह बदलाव केवल रोजगार तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं की सामाजिक पहचान और आत्मनिर्भरता को भी नई मजबूती दे रहा है। इसके बावजूद यह भी सच है कि असंगठित क्षेत्र में काम करने वाली महिला श्रमिकों को लंबे समय तक उचित वेतन, सुरक्षित कार्यस्थल और सामाजिक सुरक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ा। वेतन असमानता, सीमित स्वास्थ्य सुविधाएं, मातृत्व लाभों की कमी और पारंपरिक सोच जैसी बाधाएं उनके सामने बनी रहीं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने इन चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए महिला श्रमिकों के सशक्तिकरण को प्राथमिकता दी है। नई श्रमिक नीतियों के जरिए असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने और कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों को लागू करने की दिशा में ठोस पहल की गई है। महिला शक्ति केंद्रों को केवल सहायता केंद्र नहीं, बल्कि परामर्श, कानूनी सहयोग और रोजगार मार्गदर्शन के प्रभावी माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। वहीं सखी वन स्टॉप सेंटर के जरिए हिंसा से प्रभावित महिलाओं को त्वरित सहायता और पुनर्वास की सुविधा मिल रही है।राज्य में संचालित विभिन्न योजनाएं महिला श्रमिकों के जीवन में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार तैयार कर रही हैं। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रसूति के बाद 20 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है, जिससे आर्थिक दबाव कम होता है। मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना महिलाओं को स्वरोजगार की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जबकि निर्माण मजदूर सुरक्षा उपकरण सहायता योजना कार्यस्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करती है।महतारी वंदन योजना के अंतर्गत महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है। दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पंजीकृत निर्माण महिला श्रमिकों को, जिनका कम से कम तीन वर्षों का पंजीयन है, एक लाख रुपये तक की सहायता देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।इसके साथ ही राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे महिलाओं को आय के साधन मिलने के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता विकसित करने का अवसर भी मिल रहा है। राज्य सरकार के कौशल विकास कार्यक्रम महिला श्रमिकों को प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ रहे हैं। घरेलू कामगारों, ठेका श्रमिकों और हमाल परिवारों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं, जबकि सक्षम योजना के जरिए विधवा, परित्यक्ता और तलाकशुदा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया जा रहा है।आज छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिक केवल श्रमशक्ति नहीं रहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार बन चुकी हैं। उनकी भूमिका अब सहायक तक सीमित नहीं, बल्कि निर्णय लेने तक पहुंच रही है। योजनाओं की बढ़ती पहुंच और जागरूकता के कारण उनके भीतर आत्मविश्वास बढ़ा है, जिससे समाज में उनका सम्मान भी लगातार बढ़ रहा है।छत्तीसगढ़ में महिला श्रमिकों के लिए किए जा रहे प्रयास यह स्पष्ट करते हैं कि संवेदनशील नीतियों और प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए सकारात्मक बदलाव संभव है। सुरक्षा, सम्मान और रोजगार के अवसरों के साथ महिला श्रमिक आज राज्य के विकास की मजबूत आधारशिला बन रही हैं। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और सशक्तिकरण का भी प्रतीक बनकर उभर रहा है।
- -स्कूल के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर गर्मियों के लिए वैकल्पिक रनिंग वाटर की व्यवस्था की जाएगी, सहायक अभियंता को व्यवस्था के निर्देश-कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में होती है जल की आपूर्ति, ग्रीष्म ऋतु के कारण अभी नहीं भर पा रही टंकीरायपुर. । बस्तर जिले के पिपलावंड ग्राम पंचायत के जामगुड़ा बसाहट में अभी 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने ग्रीष्म काल में रनिंग वाटर की वैकल्पिक व्यवस्था के लिए स्कूल परिसर के नलकूप की जल आवक क्षमता का परीक्षण कर 2 हॉर्स-पॉवर का पंप लगाकर स्कूल के साथ ही जामगुड़ा बसाहट में कनेक्शन के निर्देश सहायक अभियंता को दिए हैं।जल जीवन मिशन के अंतर्गत कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना से जामगुड़ा में पाइपलाइन से जल की आपूर्ति होती है। पहले से संचालित समूह जलप्रदाय योजना में रेट्रोफिटिंग के माध्यम से पिपलावंड में जल आपूर्ति की व्यवस्था बनाई गई है। रेट्रोफिटिंग योजना के तहत यहां 70 लाख 29 हजार रुपए की लागत से 3530 मीटर पाइपलाइन बिछाकर और दो सोलर जलापूर्ति सिस्टम स्थापित कर 237 एफ.एच.टी.सी. (Functional Household Tap Connection) प्रदान किए गए हैं, जिनके काम पूर्ण किए जा चुके हैं। पिपलावण्ड कोसारटेड़ा समूह जलप्रदाय योजना का अंतिम छोर का गांव है, जिसके कारण ग्रीष्म काल में दो महीने टंकी नहीं भरने के कारण पेयजल व्यवस्था बाधित रहती है।लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जगदलपुर परिक्षेत्र के अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने आज पिपलावंड एवं जामगुड़ा का दौरा कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्थाएं देखीं तथा मैदानी अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि पेयजल के लिए एक हजार की आबादी वाले पिपलावंड में अभी 14 कार्यरत हैंडपंप, दो पॉवर पंप और दो सोलर पंप हैं। वहीं 300 जनसंख्या वाले गांव के जामगुड़ा बसाहट में 3 हैंडपंपों, एक सोलर पंप और एक पॉवर पंप से लोगों को पानी मिल रहा है।अधीक्षण अभियंता और कार्यपालन अभियंता ने गांव पहुंचकर सरपंच श्री केशवराम बघेल और दुलाय कश्यप से मिलकर पेयजल व्यवस्था की जानकारी ली। दुलाय कश्यप ने बताया कि अमूमन रोड के पार बसे रिश्तेदार द्वारा लूज पाइप से पानी उनके घर तक पहुंचाया जाता है। वह कभी-कभी रोड पार कर पानी लाने जाती है। उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग से उसे बैटरीचलित ट्राइसिकल मिली है। इसका उपयोग कर वह पेयजल एवं निस्तारी के लिए अपने रिश्तेदार के निजी नलकूप या 200 मीटर दूर स्कूल के पॉवर पम्प से पानी लाती थी। उनका ट्राइसिकल पिछले दो माह से खराब है। समाज कल्याण विभाग और सरपंच को उन्होंने यह बात बताई है, परंतु सुधार नहीं हो पाने के कारण परेशानी हो रही है।
- -महिला पत्रकारों ने नारी शक्ति वंदन के संकल्प को महिला सशक्तिकरण की ओर बताया ऐतिहासिक कदमरायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा स्थित कार्यालय कक्ष में पत्रकार श्रीमती नीरा साहू द्वारा गुजरात यात्रा पर लिखी गई पुस्तक ‘अविस्मरणीय यात्रा’ का विमोचन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री साय ने श्रीमती साहू को उनकी उत्कृष्ट रचना के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं।कार्यक्रम के दौरान उपस्थित महिला पत्रकारों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र एवं शासकीय संकल्प के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने इसे महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और अधिकारों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल बताया, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करेगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने महिला पत्रकारों के अध्ययन भ्रमण की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण पत्रकारों की दृष्टि को व्यापक बनाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह यात्रा-वृत्तांत पर्यटन प्रेमियों के लिए एक उपयोगी मार्गदर्शिका सिद्ध होगा।इस अवसर पर सुश्री निशा द्विवेदी, सुश्री चित्रा पटेल, सुश्री लवलीना शर्मा, जनसंपर्क विभाग की उप संचालक डॉ. दानेश्वरी संभाकर, सहायक संचालक सुश्री संगीता लकड़ा एवं सुश्री आमना खातून सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।
- रायपुर । दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना भूमिहीन परिवारों के लिए आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बनकर उभरी है। योजना के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे उनके बैंक खातों में अंतरित की जा रही है, जिससे उनकी दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ-साथ भविष्य की योजनाओं को भी मजबूती मिल रही है। जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम कन्हाईबंद की निवासी श्रीमती सावित्री यादव इस योजना से लाभान्वित हो रही हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व में उनका जीवन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में व्यतीत हो रहा था। भूमिहीन होने के कारण उनके पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था और वे पूर्णतः मजदूरी कार्य पर निर्भर थीं। सीमित आय के कारण परिवार का भरण-पोषण एवं अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करना उनके लिए एक बड़ी चुनौती था।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समाज के प्रत्येक वर्ग के कल्याण हेतु प्रभावी एवं संवेदनशील पहल की जा रही है। साथ ही श्रमवीरों एवं भूमिहीन कृषि मजदूरों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए संचालित योजनाएं उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही हैं।उन्होंने बताया कि कई बार उन्हें आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता था, लेकिन योजना के तहत प्राप्त होने वाली वार्षिक सहायता राशि ने उनके जीवन में उल्लेखनीय परिवर्तन लाया है। अब वे इस राशि का उपयोग घरेलू खर्चों एवं अन्य आवश्यक जरूरतों की पूर्ति में कर रही हैं, जिससे उन्हें काफी राहत मिली है। श्रीमती सावित्री यादव ने कहा कि यह योजना उनके जैसे भूमिहीन परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस योजना ने न केवल उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त किया है, बल्कि उनके जीवन में आत्मविश्वास एवं सुरक्षा की भावना भी विकसित की है।
- रायपुर।छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा घोषित वर्ष 2026 के हाईस्कूल एवं हायर सेकेंडरी परीक्षा परिणाम में रायपुर जिले के प्रयास आवासीय विद्यालयों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए नया कीर्तिमान स्थापित किया है। शैक्षणिक सत्र 2025-26 में इन विद्यालयों के कुल 8 विद्यार्थियों ने राज्य की टॉप-10 मेरिट सूची में स्थान प्राप्त किया, जिससे जिले का नाम गौरवान्वित हुआ है।प्रमुख रूप से दीपांशि बौद्ध ने कक्षा 10वीं में प्रदेश में द्वितीय स्थान हासिल कर विशेष उपलब्धि मेरिट सूची में स्थान दर्ज की। इसके अलावा अन्य सफल विद्यार्थियों में आदित्य बसु, विशाल यादव, कोमल कुमार पटेल, दिव्यांश साहू, तोषण दास साहू, हिमांशु कश्यप तथा भारती जैसे नाम शामिल हैं। रायपुर जिले में संचालित प्रयास आवासीय विद्यालय सड्डू (बालक), गुढ़ियारी (बालिका), नवीन गुढ़ियारी (अनुसूचित जाति बालिका) एवं ओबीसी सड्डू (बालक) के विद्यार्थियों ने अनुशासन, मेहनत और गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन के बल पर यह सफलता हासिल की है। इन परिणामों ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रयास विद्यालय राज्य में शैक्षणिक उत्कृष्टता के मजबूत केंद्र बन चुके हैं और आने वाले समय में भी इसी प्रकार बेहतर परिणाम देते रहेंगे।
- -22 पावर प्लांटों के अधिकारियों की बैठक में सुरक्षा मानकों, प्रशिक्षण और इमरजेंसी प्लान की गहन समीक्षारायपुर । राज्य में औद्योगिक दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के उद्देश्य से संचालनालय, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, श्रम विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा नवा रायपुर स्थित इन्द्रावती भवन में पावर प्लांट प्रबंधन के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बुधवार 29 अप्रैल को प्रातः 11 बजे कॉन्फ्रेंस हॉल क्रमांक-2, तृतीय तल में आयोजित इस बैठक में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित 22 पावर प्लांटों के यूनिट हेड एवं सेफ्टी ऑफिसर उपस्थित रहे।बैठक में विगत वर्षों में घटित औद्योगिक दुर्घटनाओं के कारणों का विश्लेषण करते हुए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस रणनीति पर चर्चा की गई। इस दौरान कारखानों द्वारा अपनाई जा रही मानक संचालन प्रक्रिया, सुरक्षित कार्य पद्धति, जोखिम प्रबंधन उपायों और कार्यस्थल पर सुरक्षा संस्कृति को मजबूत करने के प्रयासों की विस्तार से समीक्षा की गई।संचालनालय के अधिकारियों ने विशेष रूप से श्रमिकों को प्रदान किए जाने वाले सुरक्षा प्रशिक्षण, नियमित सुपरविजन, सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता और उनके प्रभावी उपयोग पर जोर दिया। साथ ही प्रत्येक पावर प्लांट में ऑन-साइट इमरजेंसी प्लान की तैयारी, उसकी समय-समय पर समीक्षा तथा मॉकड्रिल के आयोजन की स्थिति का भी आंकलन किया गया, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।प्रभारी संचालक ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि औद्योगिक सुरक्षा के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी कारखाना प्रबंधन को निर्देशित किया कि वे निर्धारित सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें। निर्देशों की अवहेलना करने वाले संस्थानों के विरुद्ध कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।उन्होंने यह भी कहा कि “शून्य दुर्घटना” केवल एक लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक औद्योगिक इकाई की जिम्मेदारी है। इसके लिए प्रबंधन और श्रमिकों के बीच बेहतर समन्वय, सतत प्रशिक्षण और सुरक्षा के प्रति जागरूकता आवश्यक है। बैठक में यह भी सुझाव दिया गया कि सुरक्षा ऑडिट को नियमित बनाया जाए और संभावित जोखिमों की पहचान कर समय रहते आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। बैठक के अंत में सभी पावर प्लांट प्रबंधन से अपेक्षा की गई कि वे सुरक्षा को सर्वाेच्च प्राथमिकता देते हुए कार्यस्थलों पर सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करें, ताकि श्रमिकों के जीवन की रक्षा के साथ-साथ औद्योगिक उत्पादन भी निर्बाध रूप से जारी रह सके।
- रायपुर। राज्यपाल श्री रमेन डेका ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर प्रदेश के नागरिकों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। राज्यपाल ने अपने संदेश में कहा है कि भगवान बुद्ध ने प्रेम, करूणा एवं अहिंसा की भावना को सर्वाेपरि मानते हुए पूरे विश्व को नई राह दिखाई। उन्होंने कहा कि आज भी भगवान बुद्ध की शिक्षा प्रासंगिक है। इस समय आवश्यकता है कि समाज में सामाजिक सद्भाव और बंधुत्व कायम रखने के लिए उनके आदर्शों को अपनाते हुए उनके बताए हुए रास्ते पर चलें।
- 1 मई अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष-छगन लोन्हारे, उप संचालक जंनसंपर्करायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिकों की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए लगातार आर्थिक मदद दी जा रही है। श्रम विभाग के तीनों मंडल-छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल, छत्तीसगढ़ असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल एवं छत्तीसगढ़ श्रम कल्याण मंडल के माध्यम से योजनाओं का सफल क्रियान्वयन हो रहा है। इसी का परिणाम है कि बीते 02 साल 04 माह में श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लगभग 800 करोड़ रूपए डीबीटी के माध्यम से उनके खाते में अंतरित किए जा चुके हैं। इस वर्ष अटल उत्कृष्ट शिक्षा योजना में श्रमिकों के 200 बच्चों को प्रदेश के उत्कृष्ट निजी स्कूलों में दाखिला दिया जाएगा।मजदूर दिवस दुनिया भर में मनाया जाता है। 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस या श्रमिक दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों, सामाजिक न्याय और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए संकल्प लेना है। यह दिन श्रमिकों के योगदान को याद करने और उनके संघर्षों को सम्मानित करने के लिए भी मनाया जाता है। यह दिवस वर्ष 1886 में शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में मजदूरों के विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की याद में मनाया जाता है, जहां अनेक श्रमिकों ने 8 घंटे के कार्य दिवस की मांग की थी। सन् 1889 में द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय संगठन ने 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के रूप में घोषित किया था। इस दिन को मनाने का उद्देश्य मजदूरों के अधिकारों को सुनिश्चित करना, सामाजिक न्याय को बढ़ावा देना और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों के लिए आवाज बुलंद करना है। भारत में मजदूर दिवस मनाने की शुरुआत 1923 में चेन्नई (मद्रास) से हुई थी। भारतीय संविधान निर्माण सभा के अध्यक्ष डॉ. भीमराव अंबेडकर ने श्रमिकों के काम का समय 12 घंटे से घटाकर 8 घंटे किया। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को प्रसूति अवकाश की सुविधा उपलब्ध कराई।मुख्यमंत्री श्री साय का मानना है कि श्रम विभाग एक अत्यंत महत्वपूर्ण विभाग है, जो बड़े पैमाने पर श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के साथ-साथ औद्योगिक इकाइयों का औचक निरीक्षण भी तकनीक के माध्यम से किया जाए, ताकि श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। राज्य सरकार के इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को नई दिशा मिल रही है।प्रदेश के श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि प्रदेश में विष्णु देव सरकार के सुशासन में अब मजदूर का बच्चा मजदूर नहीं रहेगा। श्रम विभाग द्वारा श्रमिकों के हितों में अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से मुख्यमंत्री नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना, मिनीमाता महतारी जतन योजना, मुख्यमंत्री श्रमिक औजार किट योजना, मुख्यमंत्री नोनी बाबू मेधावी शिक्षा प्रोत्साहन योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु निःशुल्क गणवेश एवं पुस्तक कॉपी हेतु सहायता राशि योजना, निर्माण श्रमिकों के बच्चों हेतु उत्कृष्ट खेल प्रोत्साहन योजना, मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना, शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना संचालित की जा रही है। देश के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच है कि हर हाथ को काम इस दिशा में प्रदेश के वाणिज्य उद्योग एवं श्रम विभाग द्वारा हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। श्रम विभाग के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 256 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का कहना है कि विष्णु देव के सरकार की सोच है कि हर हाथ को काम मिले उसका उन्हें उचित दाम मिले और हर पेट को अन्न मिले यह हमारी सरकार की आदर्श नीति है। इस नीति को क्रियान्वित करने हेतु राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। शहीद वीर नारायण सिंह श्रम अन्न योजना के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में 38 भोजन केन्द्र संचालित है। इस योजना के अंतर्गत श्रमिकों को 5 रूपये में गरम भोजन, दाल चावल, सब्जी, आचार प्रदाय किया जा रहा है, जिसका विस्तार चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 में समस्त जिलों में किया जा रहा है। श्रमिक आवास की राशि प्रति आवास 01 लाख रूपए से बढ़ाकर 1.50 लाख कर दी है। इसी तरह ई-रिक्शा की राशि भी एक लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रूपए की जाएगी।उल्लेखनीय है कि भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के तहत 5 सितंबर 2008 से अब तक 33 लाख 14 हजार से अधिक श्रमिक पंजीकृत किए जा चुके हैं। मंडल द्वारा 26 योजनाएं संचालित की जा रही हैं तथा 60 श्रमिक वर्ग अधिसूचित हैं। एक प्रतिशत उपकर (सेस) से वर्ष 2025-26 में 315 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जबकि मंडल गठन से अब तक कुल 2,808 करोड़ रुपये का उपकर संग्रहित हुआ है। मार्च 2026 तक 2,558 करोड़ रुपये विभिन्न योजनाओं में व्यय किए जा चुके हैं।औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा हेतु चालू वित्तीय वर्ष में 10 करोड़ रूपए का बजट प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग के अंतर्गत कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं का मुख्य दायित्व श्रमिकों एवं उनके परिवार के सदस्यों को भी चिकित्सा हित लाभ उपलब्ध कराया जाता है। कर्मचारी राज्य बीमा सेवाएं के लिए 76 करोड़ 38 लाख रूपए का प्रावधान राज्य सरकार द्वारा किया गया है।
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-सदन का ऐतिहासिक सत्र सुनने विधानसभा पहुंची थी मिस इंडिया छत्तीसगढ़
रायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय से आज विधानसभा में मिस इंडिया छत्तीसगढ़ 2026 सुश्री अनुष्का सोन ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर सुश्री अनुष्का ने मुख्यमंत्री को नारी सशक्तिकरण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों के लिए धन्यवाद देते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों को लेकर विशेष सत्र आयोजित करना एक प्रेरणादायक पहल है। उन्होंने कहा कि इससे समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की प्रेरणा मिलती है।सुश्री अनुष्का ने बताया कि वे आज विधानसभा की ऐतिहासिक कार्यवाही को सुनने विशेष रूप से पहुंची थीं और इस अनुभव को उन्होंने अत्यंत प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि नीति निर्माण की प्रक्रिया को करीब से देखना उनके लिए एक नई सीख रही, जिससे वे समाज में महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए और अधिक प्रोत्साहित कर सकेंगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और सम्मान को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि यह सुखद है कि समाज के विभिन्न क्षेत्रों से महिलाएं आगे आकर अपनी भागीदारी सुनिश्चित कर रही हैं, जो एक सशक्त और जागरूक समाज की पहचान है। मुख्यमंत्री श्री साय ने विश्वास जताया कि इस तरह की पहल महिलाओं के आत्मविश्वास को और मजबूत करेंगी तथा उन्हें नेतृत्व की भूमिका में आगे आने के लिए प्रेरित करेंगी।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नई पीढ़ी की बेटियां शिक्षा, कला, खेल और सामाजिक क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं, जो प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने सुश्री अनुष्का सोन को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे समाज में सकारात्मक बदलाव की प्रेरक बनें। इस अवसर पर विधायक श्री अनुज शर्मा उपस्थित थे। - -राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से भेंट कर जताया आभाररायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से आज विधानसभा स्थित कार्यालय में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा के नेतृत्व में महिला प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सौजन्य मुलाकात की।इस अवसर पर महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री का अभिनंदन करते हुए नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में विधानसभा में आयोजित विशेष सत्र तथा इस संबंध में पारित शासकीय संकल्प के लिए विशेष धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक पहल महिलाओं के सम्मान, सशक्तिकरण और उनके अधिकारों की दिशा में एक मजबूत कदम है, जिससे समाज में सकारात्मक परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त होगा।महिला प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री श्री साय के नेतृत्व में प्रदेश में महिलाओं के उत्थान हेतु किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि राज्य में महिला सशक्तिकरण को और अधिक गति मिलेगी तथा महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुदृढ़ होगी।मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन जैसी ऐतिहासिक पहल समाज में समानता और न्याय के नए आयाम स्थापित करेंगे।मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं विकास यात्रा की सशक्त सहभागी हैं और उनके सशक्तिकरण के बिना समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी है।मुख्यमंत्री ने महिला प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।
- 0- बीएमओ शहरी डॉ. पंकज किशोर मिश्रा ने ग्रहण की सदस्यतारायपुर। जिला रेडक्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष एवं कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के समक्ष स्वास्थ्य विभाग के खण्ड चिकित्सा अधिकारी शहरी रायुपर डॉ. पंकज किशोर मिश्रा ने रेडक्रॉस सोसाइटी में संरक्षक सदस्य के रूप में सदस्यता ली। कलेक्टर डॉ. सिंह ने सदस्यता राशि ग्रहण की। इंडियन रेडक्रॉस सोसाइटी एक स्वतंत्र मानव समाजसेवी संस्था है, जो आपदा एवं संकट की परिस्थितियों में पीड़ितों की सहायता के लिए समर्पित है। संस्था द्वारा भूकंप, आग, बाढ़ एवं सूखा जैसी प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाने के साथ-साथ प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता अभियान तथा रक्तदान शिविरों का नियमित आयोजन किया जाता है।संस्था से जुड़ने के लिए विभिन्न श्रेणियों में सदस्यता प्रदान की जाती है, जिसमें संरक्षक सदस्य के लिए 25,000 रुपए, उप संरक्षक सदस्य के लिए 12,000 रुपए, आजीवन सदस्य के लिए 1,000 रुपए तथा वार्षिक सदस्यता के लिए 100 रुपए निर्धारित किए गए हैं। इस अवसर पर रेडक्रॉस के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए अधिक से अधिक लोगों से संस्था से जुड़कर मानव सेवा में योगदान देने का आह्वान किया गया।--
- 0- मौके पर ही आवेदन का समाधान करने का करें प्रयास :- कलेक्टर डॉ गौरव सिंह0- गुणवत्तापूर्ण निराकरण करने के दिए निर्देशरायपुर। सुशासन तिहार की तैयारियों को लेकर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने अधिकारियों की बैठक लेकर व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा की और स्पष्ट निर्देश दिए कि आमजन से जुड़े आवेदनों का अधिकतम निराकरण शिविर स्थल पर ही सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर ने बताया कि 1 मई से प्रारंभ हो रहे ‘सुशासन तिहार’ के लिए ज़िले भर में शिविरों के आयोजन हेतु स्थल एवं समय निर्धारित कर दिए गए हैं तथा प्रत्येक शिविर के लिए नोडल अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। ब्लॉक स्तर पर भी अधिकारियों को शिविर संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि शिविरों का संचालन व्यवस्थित और प्रभावी हो तथा आवेदन करने की प्रक्रिया सरल और सहज बनी रहे।डॉ. सिंह ने निर्देशित किया कि यथासंभव मौके पर ही प्राप्त आवेदनों का निराकरण किया जाए और निराकरण की गुणवत्ता (क्वालिटी डिस्पोजल) सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी एसडीएम को निर्देश दिए कि वे अपने क्षेत्र से प्राप्त प्रत्येक आवेदन को स्वयं पढ़ें और निराकरण होने या न होने की स्थिति में उसका विस्तृत कारण दर्ज करें। कलेक्टर ने जिला एवं सब-डिवीजन स्तर के अधिकारियों की शिविरों में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही नोडल अधिकारियों को स्पष्ट किया कि शिविर का सुचारू संचालन एवं जनप्रतिनिधियों तक समय पर सूचना पहुंचाना उनकी जिम्मेदारी होगी।
- रायपुर. श्री विष्णुदेव साय की पर्यावरण संरक्षण हेतु प्रतिबद्धता के अनुरूप रायपुर जिला प्रशासन द्वारा “प्रोजेक्ट ग्रीन पालना” अभियान को प्रभावशाली ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है। इस अभिनव पहल के तहत शासकीय अस्पतालों में प्रसव उपरांत माताओं को फलदार पौधे भेंट स्वरूप दिए जा रहे हैं, ताकि एक नई ज़िंदगी के आगमन के साथ एक नया वृक्ष भी धरती पर जन्म ले।कलेक्टर डॉ गौरव सिंह के मार्गदर्शन में इस अभियान के तहत आज ग्रीन पालना में एमसीएच कालीबाड़ी में 04, मंदिरहसौद में 05 आज दिनांक में कुल 09 प्रसुताओं को 45 पौधे भेंट किए गए।यह प्रयास मातृत्व के साथ प्रकृति से जुड़ाव को भी बढ़ावा देता है। प्रोजेक्ट ग्रीन पालना न सिर्फ नवजात के जीवन की शुरुआत को यादगार बनाता है, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए हरियाली और शुद्ध वातावरण की नींव भी रखता है।--
- रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह के निर्देशानुसार एवं जिला शिक्षा अधिकारी श्री हिमांशु भारती के नेतृत्व में “प्रोजेक्ट सेकंड इनिंग” के अंतर्गत प्राचार्यों की दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, केन्द्री परिसर में किया गया। कार्यशाला के दूसरे दिन जिले के 220 प्राचार्यों सहित समस्त विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं बीआरसीसी उपस्थित रहे।कार्यक्रम में अज़ीम प्रेमजी फाउंडेशन अभनपुर के श्री महेश मिश्रा ने फिल्म ‘शोले’ के उदाहरण के माध्यम से नेतृत्व और प्रबंधन के बीच अंतर स्पष्ट करते हुए प्रभावी लीडरशिप के लिए टीम वर्क की महत्ता पर प्रकाश डाला।संस्थान के प्राचार्य श्री आर.के. मिश्रा ने एसआईसीटी के अंतर्गत विद्यार्थियों से संवाद बढ़ाने और प्रेरणा के माध्यम से शैक्षणिक वातावरण सुदृढ़ करने पर जोर दिया। वहीं सेवानिवृत्त उप संचालक श्री आशुतोष चावरे ने “स्कूल के आईना” विषय पर 10वीं एवं 12वीं के परीक्षा परिणामों में सुधार के लिए ब्लूप्रिंट आधारित रणनीति साझा की।सेवानिवृत्त अपर संचालक डॉ. योगेश शिवहरे ने अकादमिक लीडरशिप, टीम बिल्डिंग, साझा लक्ष्य, विश्वास एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। सहायक संचालक श्रीमती नीलम शर्मा ने विभागीय जांच एवं सूचना के अधिकार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।डीएमसी समग्र शिक्षा श्री अरुण शर्मा ने जनगणना पोर्टल में प्रविष्टि की प्रक्रिया समझाई, जबकि सहायक संचालक श्री अशोक नारायण बंजारा ने सिविल सेवा आचरण नियम 1965, अपील नियम 1966 एवं शिक्षा के अधिकार संबंधी प्रावधानों के अध्ययन पर जोर दिया।कार्यशाला के समापन की घोषणा विकासखंड शिक्षा अधिकारी अभनपुर श्रीमती धनेश्वरी साहू द्वारा की गई। इस कार्यशाला के माध्यम से प्राचार्यों को शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार, नेतृत्व कौशल विकास एवं प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने हेतु महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्राप्त हुए।--
- 0- सुप्रसिद्ध डायटिशन डॉ. अभया जोगलेकर ने बताया कई हफ्ते रहने वाले भीषण गर्मी में अपने आपको कैसे रखें सेहतमंदरायपुर। सुप्रसिद्ध डायटिशियन डॉ. अभया जोगलेकर ने जोर देकर कहा कि इस गर्मी केवल भोजन ही न करें, बल्कि 'सात्विक’ आहार अपनाएं, जो न केवल आपके शरीर को पोषण दे, बल्कि मन को भी शांत भी रखे। भीषण गर्मी और बढ़ता तापमान हमारी ऊर्जा सोख लेता है। इसके साथ ही हमारी पाचन क्रिया और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा प्रभाव डालता है। आयुर्वेद और आधुनिक पोषण विज्ञान दोनों ही इस बात पर जोर देते हैं कि 'जैसा अन्न, वैसा मन और तन'। जब सूर्य का ताप अपने चरम पर हो, तब सही आहार ही हमारा सबसे बड़ा सुरक्षा कवच बनता है।समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदानित और महाराष्ट्र मंडल द्वारा संचालित सियान गुड़ी में वरिष्ठ नागरिकों के लिए आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में डॉ. जोगलेकर ने कहा कि भीषण गर्मी को देखते हुए आहार की ‘सात्विक’ (SATVIK) मार्गदर्शिका उन बुनियादी सिद्धांतों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है, जो हर उम्र के व्यक्ति, चाहे वे बच्चे हों, बुजुर्ग हों या गर्भवती महिलाएं… को हाइड्रेटेड, ऊर्जावान और स्वस्थ रखने में मदद करती है।बद्री प्रसाद लोधी स्नातकोत्तर शासकीय महाविद्यालय की प्राचार्य और वरिष्ठ डायटिशियन डॉ. अभया जोगलेकर ने सात्विक शब्द की अंग्रेजी में स्पेलिंग लिखकर प्रत्येक अल्फाबेट का अर्थ समझाया। उन्होंने बताया कि एस का आशय सीजनल (मौसमी) से है। तेज गर्मी के दौरान स्थानीय और मौसमी फलों व सब्जियों का चुनाव करना चाहिए। हमारे यहां अभी लाल भाजी, चौलाई, चेच, अमाड़ी, पालक, मेथी, गोल, खेड़ा, प्याज, कांदा भाजी बाजार में आ रहे हैं। अतः इन सब्जियों का पर्याप्त सेवन करें। इस मौसम में पाई जाने वाली गंगा इमली, ताजी इमली का भी सेवन करें।डॉ. जोगलेकर के अनुसार ए अर्थात एक्विअस (जलयुक्त) होता है। मतलब ग्रीष्मकाल में ऐसे खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें, जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो जैसे खीरा, तरबूज, ककड़ी, खीरा, तरोई, लौकी। साथ ही दिनभर पर्याप्त पानी पीयें। प्यास लगने का इंतज़ार न करें, क्योंकि गर्मी के दिनों में पसीने की अधिकता से शरीर में पानी और मिनरल्स की कमी को पूरा करने के लिए सादे पानी के अलावा एल्कलाइन वाटर (खीरे, पुदीना नींबू, धनिया पत्ती से बना), नारियल पानी, नींबू पानी, शिकंजी, छाछ, लस्सी और ताजे फलों का रस, गन्ने का रस (हायजिनिक) बेहतरीन विकल्प हैं। स्थानीय फल, बेल से निर्मित शरबत पीयें, जो पेट को ठंडा रखता है। दोपहर के समय बुजुर्गों को चने का सत्तू, जौ का सत्तू या गोंद कतीरा का शरबत देना फायदेमंद होता है। यह लू से बचाने में मदद भी करता है।प्राचार्य डॉ. जोगलेकर ने टी का आशय टेंपर्ट यानी संतुलित तासीर का खाद्य बताया। उन्होंने कहा कि गर्मियों में पाचन शक्ति थोड़ी धीमी हो जाती है, इसलिए मसालेदार भारी और तैलीय भोजन के बजाय हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन करें। अत्यधिक गर्म तासीर वाले मसालों और कैफीन (चाय, काफी) से बचें। इनके स्थान पर पुदीना, सौंफ और हरा धनिया जैसे ठंडे तासीर वाले मसालों का उपयोग करें।उनके मुताबिक वी का अर्थ वाइटिलाइजितंग (ऊर्जादायक) से है। इसके तहत उन्होंने हल्का और ताज़ा भोजन लेकर शरीर को सक्रिय बनाए रखने का सुझाव दिया। डॉ. जोगलेकर ने आई से इम्यून बूस्टर अर्थात रोग प्रतिरोधक को जोड़ा। इसमें विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट युक्त आहार लेने का सुझाव दिया गया। इसके अंतर्गत नींबू की शिकंजी, बीटरुट की कांजी, बासी, बोरे, अंबलि, वेज स्मूदी, नारियल पानी को उन्होंने श्रेष्ठ कहा।वरिष्ठ नागरिकों को उन्होंने के का आशय काइंड टू गट (पाचन अनुकूल) बताया। डॉ. अभया जोगलेकर ने दैनिक आहार में प्रोबायोटिक्स (दही, छाछ) को शामिल करने कहा, इससे शरीर ठंडा रहता है। साथ ही पेट के स्वास्थ (गट हेल्थ) के लिए भी लाभकारी है। उन्होंने उपस्थित बुजुर्गों से एक बार में बहुत अधिक खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा खाने (स्माल मील्स) कहा।सियान गुड़ी में डॉ. जोगलेकर का पूरा संबोधन वरिष्ठ नागरिकों पर केंद्रीत था। उन्होंने बुजुर्गों से कहा कि ग्रीष्म ऋतु में आप लोगों को विशेष सावधानी की आवश्यकता होती है। उम्र के साथ आपको प्यास का अनुभव कम हो सकता है, इसलिए थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, ग्लूकोज या ओआरएस लेते रहें, ताकि शरीर इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बना रहे। गर्म मौसम के अनुरूप ही आपको आहार में दलिया, खिचड़ी या सूप जैसी नरम चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए, ताकि इन्हें चबाने और पचाने में आसानी हो। गेंहू की रोटी के स्थान पर ज्वार की रोटी का सेवन जरूर करें।महाराष्ट्र मंडल की वरिष्ठ सभासद डॉ. अभया ने बुजुर्गों की मांसपेशियों की मजबूती के लिए दालें, पनीर या सोयाबीन का सेवन कराने का सुझाव तो दिया, लेकिन जोर देकर कहा कि ये सब कम तेल-मसाले में बने हों। इसी तरह यदि वे उच्च रक्तचाप या मधुमेह से जूझ रहे हैं, तो पेय पदार्थों में नमक और चीनी की मात्रा का विशेष ध्यान रखें। उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए जामुन, आम (सीमित मात्रा में) और हरी पत्तेदार सब्जियों को जरूर शामिल करना चाहिए।--
- बालोद. जिला खनि अधिकारी श्री प्रवीण चन्द्राकर ने बताया कि ग्राम बघमरा में रेत खदान में अवैध उत्खनन के संबंध में मौका जांच कराया गया। जांच के दौरान उपस्थित वार्ड नं. 01 के पार्षद श्री पोषण निषाद व अन्य ग्रामीणजन मौजूद रहे। इस दौरान रेत का उत्खनन पूर्णतः बंद पाया गया। पार्षद द्वारा बताया गया कि रेत के अवैध उत्खनन की जानकारी उन्हें नहीं है। बीच-बीच में गांव वाले घर बनाने के लिए रेत का उत्खनन, परिवहन किया जाता है। खनिज विभाग द्वारा पार्षद श्री पोषण निषाद को अवगत कराया गया कि भविष्य में यदि किसी व्यक्ति द्वारा रेत उत्खनन, परिवहन कर ग्राम से बाहर बेचा जाता है या व्यवसायिक उपयोग किया जाता है तो उसकी सूचना तत्काल विभाग दें, जिससे त्वरित कार्यवाही की जा सके।--
- 0- डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर के नेतृत्व में खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम के द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों में दबिश देकर गुणवत्ता जांच की गईबालोद,. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार बालोद जिले में खाद्य एवं औषधि पदार्थों की गुणवत्ता जांच हेतु राजस्व खाद्य एवं औषधि प्रसाधन एवं पुलिस विभाग की संयुक्त टीम गठित की गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शासन के ’सही दवा शुद्ध आहार, छत्तीसगढ़ का यही आधार’ की थीम पर जिले में जनस्वास्थ्य सुरक्षा को सुदृढ करने के उद्देश्य से 27 अप्रैल 2026 से 11 मई 2026 तक विशेष 15 दिवसीय जांच अभियान चलाया जा रहा है। इसके अंतर्गत मंगलवार 28 अप्रैल को डिप्टी कलेक्टर श्रीमती प्राची ठाकुर के नेतृत्व में जिला मुख्यालय बालोद के खाद्य एवं औषधि प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर वहाँ उपलब्ध खाद्य एवं औषधि पदार्थों की गुणवत्ता जांच की गई। इसके अंतर्गत अधिकारियों ने कैलाश स्टोर्स, गोविंद जनरल स्टोर्स, पूजा श्रृंगार जवाहर मार्केट बालोद, नमो कलेक्शन, मरारापारा, जय कलेक्शन, अग्रवाल सलेक्शन, बटरफ्लाई स्टोर, नारायग डेली नीड्स, आहुजा कलेक्शन एवं 04 औषधि प्रतिष्ठानों टुवानी मेडिसीन सेंटर, जैन मेडिकल स्टोर्स, साहू मेडिकल स्टोर्स, हर्ष मेडिकल स्टोर्स में सौंदर्य प्रसाधन सामाग्री के संबंध में संयुक्त निरीक्षण किया गया एवं 02 प्रसाधन सामाग्री का नमूना संकलित किया गया।इसी प्रकार खाद्य शाखा से न्यू बस स्टैण्ड बालोद स्थित गंगोत्री डेली नीडस, प्रकाश होटल, ठाकुर पान पैलेस, अशोका बिरयानी, साहू जलेबी एवं विक्की भोजनालय खाद्य प्रतिष्ठानों के निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर संबंधित दुकानदारों को नोटिस भी दिया गया। इस दौरान फर्म मेसर्स गंगोत्री डेली नीड्स में कालातीत सामग्रियां पाई गयी। अधिकारियों ने कालातीत ब्रेड को मौके पर ही नष्ट कराया। अधिकारियों की टीम के द्वारा जिला मुख्यालय बालोद के पुरानी चैपाटी स्थित स्वरूप चाट कॉर्नर, यादव मुंगेडी, मनीष चाट, पुष्पाबाई गन्ना रस एवं घड़ी चैक स्थित गंगा मैय्या फल वाटिका, नमो चाय नाश्ता, छत्तीसगढ़ साहू होटल, देव फल भण्डार, आयुष पान पैलेस, तथा कलाकेन्द्र के पास बालोद स्थित नमन फ्रूट सेंटर, माता रानी कुल्फी, देव सोडा, कृष्णा मोमोस सेंटर, लोकेश डिकेश चाट जिग जेग फास्ट फुड का निरीक्षण कर खाद्य अनुज्ञप्ति बनाने एवं साफ-सफाई रखने के निर्देश दिए गए।
- 0- आयोजित प्रशिक्षण में प्रभारी अधिकारी एवं मास्टर ट्रेनर्स को जनगणना के प्रथम चरण के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईबालोद. कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के कार्यों को सफलतापूर्वक संपादित करने हेेतु जनगणना कार्य में लगे अधिकारी-कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत आज संयुक्त जिला कार्यालय के आॅडिटोरियम में सभी प्रभारी अधिकारियों एवं मास्टर ट्रेनर्स की बैठक आयोजित कर 01 मई से 30 मई तक आयोजित होने वाली जनगणना के प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों के गणना कार्य के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। इस दौरान आम नागरिकों को आॅनलाईन स्वगणना पत्र की जानकारी भरने के संबंध में भी जानकारी देने को कहा गया। इस मौके पर अपर कलेक्टर एवं नोडल अधिकारी श्री अजय किशोर लकरा, डिप्टी कलेक्टर एवं सहायक नोडल अधिकारी श्रीमती प्राची ठाकुर सहित जनगणना कार्य में लगे अधिकारीगण उपस्थित थे।--
- बालोद. अपर कलेक्टर ने जिले के सभी राजस्व अनुविभागीय अधिकारियों, जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों एवं नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को पद्म पुरस्कार 2027 के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं अनुशंसाए आमंत्रित करने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किया है। अपर कलेक्टर ने बताया कि शासन की मंशानुरूप राज्य, जिले के सुदूर वनांचलों, ग्रामीण क्षेत्रों और नगरीय क्षेत्रों से समाज के उन अनछुए और गुमनाम नायकों की पहचान करना है, जो समाज सेवा, कला, शिक्षा, खेल, चिकित्सा, विज्ञान एवं इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में निस्वार्थ भाव से उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं जिन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलाया जा सके। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा गणतंत्र दिवस वर्ष 2027 के अवसर पर घोषित किए जाने वाल पद्म पुरस्कार पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री के लिए नामांकन की प्रक्रिया 15 मार्च 2026 से प्रारंभ हो चुकी है।











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