- Home
- छत्तीसगढ़
- -प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से घरों की छतें बनीं ऊर्जा उत्पादन की इकाइयां, सरगुजा में 1,733 घरों में स्थापित हुए रूफटॉप सोलर संयंत्र-सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत के साथ स्वच्छ ऊर्जा और ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मिल रहा बढ़ावारायपुर / देश में स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के साथ आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में सहभागी बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना महत्वपूर्ण पहल बनकर सामने आई है। योजना ने घरों की छतों को केवल मकान का हिस्सा नहीं रहने दिया, बल्कि उन्हें बिजली उत्पादन की छोटी इकाइयों में बदलने का रास्ता खोला है। रूफटॉप सोलर संयंत्र के माध्यम से परिवार अपनी बिजली की जरूरतें पूरी करने के साथ अतिरिक्त बिजली को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार विद्युत ग्रिड में भेज सकते हैं। इस तरह बिजली का एक सामान्य उपभोक्ता ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में सहभागी बनकर ‘ऊर्जा दाता’ की भूमिका की ओर बढ़ रहा है। भारत में सौर ऊर्जा की व्यापक संभावनाओं को देखते हुए घरों की खाली छतों का उपयोग बिजली उत्पादन के लिए करना स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत पात्र परिवार अपने घरों पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करा सकते हैं और निर्धारित प्रावधानों के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार से वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं।योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी से संयंत्र स्थापित करने की प्रारंभिक लागत का बोझ कम होता है। वहीं, सौर ऊर्जा से घर की बिजली जरूरतों की पूर्ति होने पर पारंपरिक बिजली पर निर्भरता और घरेलू बिजली खर्च में कमी आने की संभावना रहती है। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजने की व्यवस्था नागरिकों को ऊर्जा व्यवस्था से सीधे जोड़ती है।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को सरगुजा जिले में भी नागरिकों का अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है। वर्ष 2025-26 के लिए जिले में 2,000 रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके विरुद्ध 3,282 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 3,222 आवेदनों में वेंडरों का चयन किया जा चुका है, जबकि 1,733 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं।शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में योजना की पहुंच बढ़ रही है। अम्बिकापुर शहर में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 2,158 आवेदन प्राप्त हुए और 1,360 घरों में संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं अम्बिकापुर ग्रामीण क्षेत्र में 1,000 के लक्ष्य के विरुद्ध 1,124 आवेदन प्राप्त हुए तथा 373 घरों में सोलर संयंत्र स्थापित किए गए हैं।ये आंकड़े बताते हैं कि सरगुजा में नागरिक सौर ऊर्जा को अपनाने के लिए तेजी से आगे आ रहे हैं। योजना के प्रति बढ़ती रुचि यह भी दर्शाती है कि परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में अपनी भागीदारी को लेकर भी जागरूक हो रहे हैं।अम्बिकापुर के राजेंद्र प्रसाद वार्ड, दर्रीपारा निवासी श्री विनोद कुमार राय के परिवार का अनुभव इस बदलाव की तस्वीर प्रस्तुत करता है। सोलर संयंत्र स्थापित करने से पहले उनके घर का बिजली बिल कई बार 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह तक पहुंच जाता था। इससे परिवार के मासिक बजट पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ता था।प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना की जानकारी मिलने के बाद श्री राय ने योजना का लाभ लेने के लिए आवेदन किया और अपने घर की छत पर रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित कराया। लगभग 2 लाख रुपये की लागत वाले संयंत्र पर उन्हें केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार से 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिली। इस तरह उन्हें कुल 1.08 लाख रुपये की अनुदान सहायता प्राप्त हुई।श्री राय ने सब्सिडी की राशि सोलर संयंत्र के लिए लिए गए बैंक ऋण में जमा की। अब उनके लिए सौर ऊर्जा केवल बिजली खर्च कम करने का माध्यम नहीं है, बल्कि बिजली उत्पादन में स्वयं की भागीदारी का अवसर भी है। कई बार उनके घर में सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली घरेलू खपत से अधिक हो जाती है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है और निर्धारित नियमों के अनुसार उसका लाभ मिलता है।अम्बिकापुर के मायापुर निवासी श्रीमती नीधि वर्मा ने भी प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत अपने घर में सोलर बिजली संयंत्र स्थापित कराया। उनके अनुसार संयंत्र लगने से पहले घर का बिजली बिल लगभग 4 से 5 हजार रुपये प्रतिमाह आता था। सौर ऊर्जा से घरेलू बिजली की जरूरतें पूरी होने के बाद बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।श्रीमती वर्मा को भी योजना के तहत लगभग 1.08 लाख रुपये की सब्सिडी मिली, जिसमें केंद्र सरकार की 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की 30 हजार रुपये की सहायता शामिल है। उनका कहना है कि पहले उनका परिवार केवल बिजली का उपभोक्ता था, लेकिन अब घर की छत से बिजली का उत्पादन भी कर रहा है। अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने से उनका परिवार ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया में प्रत्यक्ष रूप से सहभागी बना है।रूफटॉप सोलर व्यवस्था के साथ डिजिटल तकनीक भी बिजली उपयोग को अधिक समझने और नियंत्रित करने में मदद कर रही है। स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप के माध्यम से उपभोक्ता अपने घर की बिजली खपत से संबंधित जानकारी देख सकते हैं।श्री विनोद कुमार राय बताते हैं कि स्मार्ट मीटर और ‘मोर बिजली’ ऐप से वे प्रतिदिन की बिजली खपत पर नजर रखते हैं। इससे परिवार को अनावश्यक रूप से चल रहे विद्युत उपकरणों को बंद करने और बिजली के जिम्मेदार उपयोग के प्रति जागरूकता मिली है।इस तरह प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना केवल सोलर पैनल लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवारों में ऊर्जा बचत, स्मार्ट बिजली उपयोग और जिम्मेदार उपभोक्ता व्यवहार को भी बढ़ावा दे रही है।सौर ऊर्जा का महत्व केवल आर्थिक बचत तक सीमित नहीं है। सूर्य से प्राप्त ऊर्जा का उपयोग बिजली उत्पादन में करने से स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलता है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायता मिलती है। एक घर की छत पर स्थापित सोलर संयंत्र छोटी इकाई जरूर है, लेकिन जब हजारों और लाखों परिवार इससे जुड़ते हैं तो सामूहिक रूप से यह स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन का बड़ा माध्यम बन सकता है।प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना इसी जनभागीदारी को व्यापक स्वरूप देने का प्रयास है। योजना के माध्यम से परिवार अपनी ऊर्जा जरूरतों के प्रति अधिक आत्मनिर्भर बनने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे सकते हैं।परंपरागत व्यवस्था में आम नागरिक विद्युत ग्रिड से बिजली प्राप्त कर उसका उपयोग करता है और बिल का भुगतान करता है। रूफटॉप सोलर इस व्यवस्था में एक नया आयाम जोड़ता है। अब वही उपभोक्ता अपने घर की छत पर बिजली का उत्पादन कर सकता है, पहले अपनी जरूरत पूरी कर सकता है और परिस्थितियों के अनुसार अतिरिक्त बिजली ग्रिड को उपलब्ध करा सकता है।यही प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है—ऊर्जा उत्पादन में नागरिकों की प्रत्यक्ष भागीदारी।सरगुजा में प्राप्त आवेदनों और स्थापित सोलर संयंत्रों की संख्या यह संकेत देती है कि सौर ऊर्जा को लेकर नागरिकों की रुचि बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण परिवार भी अपने घरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आगे आ रहे हैं।विनोद कुमार राय और नीधि वर्मा जैसे परिवारों के अनुभव इस बदलाव को जमीन पर साकार होते दिखाते हैं। जिन घरों में कभी बिजली बिल मासिक बजट का महत्वपूर्ण हिस्सा होता था, उन्हीं घरों की छतें अब बिजली उत्पादन का माध्यम बन रही हैं।सौर ऊर्जा से बिजली खर्च में राहत, अतिरिक्त बिजली से ग्रिड को सहयोग और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण—प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना घर-घर को ऊर्जा आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।जब अधिक से अधिक परिवार सौर ऊर्जा अपनाएंगे, तो ऊर्जा उत्पादन में जनभागीदारी का दायरा भी बढ़ेगा। इस तरह देश की हर ऐसी छत, जिस पर सौर पैनल स्थापित है, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन में अपना योगदान देते हुए ‘विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़’ की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक छोटी लेकिन महत्वपूर्ण इकाई बन सकती है।
- -प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास विजन को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ रहा छत्तीसगढ़-आर्थिक सशक्तिकरण से विकसित भारत के संकल्प को मिल रही मजबूतीरायपुर/ महतारी वंदन योजना महिलाओं के लिए आर्थिक संबल और आत्मविश्वास का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। योजना के माध्यम से महिलाओं को मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उन्हें अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ परिवार की जरूरतों में सहयोग करने और आर्थिक निर्णयों में अधिक आत्मविश्वास के साथ भागीदारी का अवसर दे रही है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने महिला नेतृत्व वाले विकास को विकसित भारत 2047 की यात्रा का महत्वपूर्ण आधार बताया है। उनका विजन है कि महिलाएं केवल विकास की लाभार्थी न रहें, बल्कि विकास की नेतृत्वकर्ता और भागीदार बनें। वित्तीय समावेशन, उद्यमिता, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, स्वच्छता और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका इसी सोच को आगे बढ़ाती है।इसी व्यापक सोच का जमीनी प्रभाव गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम सारबहरा की श्रीमती कविता चक्रधारी के जीवन में भी दिखाई देता है। श्रीमती कविता महतारी वंदन योजना की हितग्राही हैं। उन्होंने बताया कि योजना की 31वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में प्राप्त हो गई है। उनके लिए यह राशि रोजमर्रा की छोटी-छोटी जरूरतों को पूरा करने में उपयोगी साबित हो रही है।श्रीमती कविता चक्रधारी ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि तीज-त्योहार के समय घर-परिवार की कई छोटी-छोटी जरूरतें सामने आती हैं। ऐसे समय में महतारी वंदन योजना की राशि खाते में पहुंचना उनके लिए विशेष रूप से मददगार है। त्योहार से पहले राशि मिलने से उनकी खुशी और भी बढ़ गई है। उन्होंने बताया कि इस सहायता से आवश्यक घरेलू खर्चों को पूरा करने में सुविधा होती है और परिवार की जरूरतों में भी सहयोग मिल पाता है।कविता ने कहा कि महतारी वंदन योजना महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। नियमित आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं में अपनी आवश्यकताओं को लेकर स्वयं निर्णय लेने का आत्मविश्वास बढ़ रहा है। छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भरता कम होने से महिलाओं में आत्मनिर्भरता की भावना मजबूत हो रही है।उन्होंने कहा कि आर्थिक सशक्तिकरण केवल किसी एक परिवार की स्थिति को बेहतर नहीं करता, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ता है। जब महिला अपने खर्च और आवश्यकताओं को लेकर निर्णय लेने में सक्षम होती है, तो परिवार के आर्थिक प्रबंधन में भी उसकी भूमिका मजबूत होती है।कविता जैसी महिलाओं के अनुभव बताते हैं कि योजनाओं का वास्तविक महत्व तब सामने आता है, जब उनका लाभ सीधे परिवारों के जीवन में दिखाई देता है। महतारी वंदन योजना के माध्यम से मिलने वाली नियमित सहायता महिलाओं के लिए आर्थिक सहयोग के साथ-साथ आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बन रही है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन में नारी शक्ति को विकसित भारत की निर्माण यात्रा का महत्वपूर्ण आधार माना गया है। महिला नेतृत्व वाले विकास की यह अवधारणा महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के साथ उन्हें विकास की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है।छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना के माध्यम से महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा सकता है। योजना से जुड़ी श्रीमती कविता चक्रधारी की कहानी यह दर्शाती है कि आर्थिक सहायता मिलने से महिलाओं के दैनिक जीवन में सुविधा के साथ आत्मविश्वास भी बढ़ रहा है।महतारी वंदन योजना की 31वीं किस्त की राशि प्राप्त होने पर श्रीमती कविता चक्रधारी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति हृदय से धन्यवाद एवं आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए संचालित ऐसी योजनाओं से उन्हें नियमित आर्थिक सहयोग मिल रहा है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में अधिक सक्षम हो रही हैं।श्रीमती कविता के चेहरे की खुशी और उनके शब्दों में व्यक्त संतोष सेवा संकल्प अभियान की उस भावना को सामने लाता है, जिसमें जनसेवा, जनभागीदारी और योजनाओं के जमीनी प्रभाव को केंद्र में रखा गया है। महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण केवल उनके जीवन में बदलाव नहीं लाता, बल्कि मजबूत परिवार, आत्मनिर्भर समाज और विकसित भारत की नींव को भी मजबूत करता है।
- -चिकन स्टोर और सिलाई के काम से बढ़ी आमदनी, वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक-आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल बनीं मंझगवा की कमलेशरायपुर / सेवा संकल्प अभियान के तहत शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों की सफलता की कहानियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आए सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता की तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मंझगवा की श्रीमती कमलेश यादव की कहानी भी इसी बदलाव की प्रेरक मिसाल है। कभी छोटे-से व्यवसाय को आगे बढ़ाने का सपना देखने वाली कमलेश यादव आज अपनी मेहनत, हुनर और स्वसहायता समूह से मिले आर्थिक सहयोग के बल पर ‘लखपति दीदी‘ के रूप में नई पहचान बना रही हैं।श्रीमती कमलेश यादव वंदना महिला स्वसहायता समूह से जुड़ीं और समूह की अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालते हुए आर्थिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आरएफ, सीआईएफ और बैंक लोन के माध्यम से वित्तीय सहयोग मिला। कमलेश ने इस सहयोग का उपयोग केवल आर्थिक सहायता के रूप में करने के बजाय इसे आय का स्थायी साधन बनाने की दिशा में लगाया। उन्होंने प्राप्त सहयोग से चिकन स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। इसके साथ ही वे सिलाई का कार्य भी कर रही हैं। व्यवसाय और हुनर के इन दोनों माध्यमों ने उनकी आय बढ़ाने के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।कमलेश यादव की कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि जब महिलाओं को संगठित होने का मंच, आर्थिक संसाधनों तक पहुंच और अपने हुनर को आगे बढ़ाने का अवसर मिलता है, तो वे अपने परिवार के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकती हैं। आज कमलेश की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो गई है। आर्थिक गतिविधियों में निरंतर भागीदारी और आत्मविश्वास के साथ वे ‘लखपति दीदी‘ के रूप में अपनी नई पहचान बना रही हैं।देश में महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी बनाने के बजाय उन्हें आर्थिक रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महिला सशक्तिकरण के विजन में स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें आर्थिक गतिविधियों से जोड़ना महत्वपूर्ण पहल है। लखपति दीदी‘ की अवधारणा भी ग्रामीण महिलाओं की आय और आर्थिक भागीदारी को बढ़ाने की इसी सोच से जुड़ी है।श्रीमती कमलेश यादव की सफलता इस विजन के स्थानीय स्तर पर दिखाई देने वाले प्रभाव का उदाहरण है। स्वसहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें वित्तीय संसाधन मिले और उन्होंने अपनी क्षमता तथा मेहनत के आधार पर व्यवसाय खड़ा किया। चिकन स्टोर और सिलाई के माध्यम से आय के अलग-अलग स्रोत विकसित कर उन्होंने यह साबित किया कि अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने हुनर को आजीविका और व्यवसाय में बदल सकती हैं।श्री कमलेश यादव का कहना है कि महिला स्वसहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव का महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। समूह के माध्यम से मिले वित्तीय सहयोग ने उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने और अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का अवसर दिया। वे अपनी सफलता के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करती हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए मिल रहा सहयोग उनके जैसे अनेक परिवारों के लिए नई उम्मीद और बेहतर भविष्य का रास्ता तैयार कर रहा है।कमलेश यादव की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। उनकी उपलब्धि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है। उनकी कहानी बताती है कि स्वसहायता समूह से जुड़कर महिलाएं सामूहिक रूप से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकती हैं, वित्तीय संसाधनों का उपयोग कर सकती हैं और अपने पारंपरिक हुनर को आय के स्थायी साधन में बदल सकती हैं।कमलेश की यात्रा सपने से शुरुआत, समूह से जुड़ाव, आर्थिक सहयोग, व्यवसाय की स्थापना और अंततः ‘लखपति दीदी‘ की पहचान तक पहुंचने की कहानी है। यह कहानी बताती है कि सही अवसर, निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास के साथ ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिख सकती हैं। महिला सशक्तिकरण केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को अपने निर्णय लेने, रोजगार के साधन विकसित करने और सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने की दिशा में एक निरंतर प्रक्रिया है।
- -71 सोलर हाईमास्ट से रोशन हो रहे गांव, 672 सोलर पम्पों से पेयजल और 4,300 सोलर पम्पों से किसानों के खेतों को मिल रहा सिंचाई का सहारा-प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सौर ऊर्जा और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत के विकास के विजन से जुड़ रही जमीनी पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का हो रहा विस्ताररायपुर / सुकमा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में सौर ऊर्जा अब केवल बिजली का विकल्प नहीं, बल्कि रोशनी, पेयजल, सिंचाई और रोजमर्रा की सुविधाओं को मजबूत करने का माध्यम बन रही है। गांवों में सोलर हाईमास्ट से रात रोशन हो रही है, सोलर पम्पों से पेयजल की उपलब्धता आसान हुई है और किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाने में सौर ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास विजन में गांवों में आधुनिक सुविधाओं की पहुंच बढ़ाने, स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष जोर रहा है। ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना में ग्रामीण भारत को मजबूत आधार देना इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के ‘विकसित भारत विकसित छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने, छत्तीसगढ़ को सौर ऊर्जा का केंद्र बनाने और किसानों को ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया था। इसी व्यापक सोच के अनुरूप सुकमा जैसे दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं का विस्तार ग्रामीण जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रहा है।कभी शाम ढलते ही अंधेरे में सिमट जाने वाले सुकमा के कई गांवों में अब सौर ऊर्जा से संचालित हाईमास्ट रोशनी का माध्यम बन रहे हैं। नियद नेल्लानार योजना के जरिए सिलगेर, सालातोंग, टेकलगुडियम, पूवर्ती, बगडेगुड़ा, सुरपनगुड़ा, दुलेड़, मोरपल्ली, मंडीमरका, बेदरे, केरलापेन्दा और तोकनपल्ली सहित विभिन्न ग्रामों एवं नगरीय निकाय क्षेत्रों में 71 सोलर हाईमास्ट संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। वहीं 8 अन्य संयंत्रों की स्थापना प्रगतिरत है।इन हाईमास्ट की रोशनी का लाभ केवल सड़कों और चौक-चौराहों तक सीमित नहीं है। शाम के बाद जरूरी काम से आने-जाने वाले ग्रामीणों, बाजार जाने वाले परिवारों, बच्चों और युवाओं तथा सार्वजनिक आयोजनों में शामिल होने वाले लोगों के लिए यह रोशनी सुविधा का नया आधार बनी है। महिलाओं, बुजुर्गों और राहगीरों के लिए भी गांवों में आवागमन पहले की तुलना में अधिक सुविधाजनक हुआ है।सौर ऊर्जा आधारित सुविधाओं के रखरखाव में भी प्रशासन की तत्परता दिखाई दे रही है। सुशासन तिहार में प्राप्त शिकायतों पर क्रेडा जिला कार्यालय द्वारा कार्रवाई करते हुए खराब सोलर हाईमास्ट संयंत्रों की एलईडी लाइट और बैटरियों को बदला गया। इससे बंद पड़ी रोशनी फिर से शुरू हुई और ग्रामीणों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सुविधा मिल सकी।सौर ऊर्जा का दूसरा महत्वपूर्ण प्रभाव ग्रामीण पेयजल व्यवस्था में दिखाई दे रहा है। जल जीवन मिशन के तहत जिले के विभिन्न गांवों में 672 सोलर पम्प स्थापित किए गए हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा का उपयोग पेयजल व्यवस्था को सुगम बनाने में किया जा रहा है। केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक सुरक्षित और पर्याप्त पेयजल की सुविधा पहुंचाना है। वर्ष 2026 में केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक जारी रखने तथा इसे केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण से आगे बढ़ाकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर अधिक केंद्रित करने का निर्णय लिया है।सुकमा के ग्रामीण क्षेत्रों में सोलर पम्पों के माध्यम से पेयजल व्यवस्था को ऊर्जा की उपलब्धता से जोड़ा जाना दूरस्थ गांवों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है। जिन परिवारों को पहले पानी के लिए नदी, झिरिया या कुओं तक जाना पड़ता था, उनके लिए गांव में ही सौर ऊर्जा से संचालित पम्प के माध्यम से पानी उपलब्ध होने से समय और श्रम की बचत हो रही है। इसका लाभ विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को मिल रहा है, जिन्हें पानी लाने में अतिरिक्त समय और मेहनत नहीं करनी पड़ती।सौर ऊर्जा का सबसे सीधा प्रभाव सुकमा के किसानों के खेतों में भी दिखाई दे रहा है। सौर सुजला योजना के तहत पिछले आठ वर्षों में जिले में 4,300 सोलर पम्प किसानों के खेतों तक पहुंच चुके हैं। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित 200 सोलर पम्पों का लक्ष्य भी पूरा किया गया है। सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा आधारित पम्प किसानों को खेतों तक पानी पहुंचाने में सहारा दे रहे हैं। इससे कृषि कार्यों को समय पर करने और उपलब्ध जल स्रोतों का उपयोग करने में सुविधा मिल रही है। सुकमा में सौर ऊर्जा का विस्तार केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कोन्टा विकासखंड के जगरगुंडा में सोलर स्ट्रीट लाइट स्थापित की गई है। वहीं पोलमपल्ली, चिंतागुफा, चिंतलनार और भेज्जी में 4.8 किलोवाट क्षमता के सोलर स्ट्रीट लाइट संयंत्रों की स्थापना स्वीकृत है। नगरीय निकाय क्षेत्रों में खराब स्ट्रीट लाइटों के सुधार का कार्य भी जारी है।इस तरह एक ओर गांवों की गलियां और चौक-चौराहे रोशन हो रहे हैं, तो दूसरी ओर घरों तक पेयजल और खेतों तक सिंचाई पहुंचाने में सौर ऊर्जा मददगार बन रही है। इससे ग्रामीणों के समय और श्रम की बचत के साथ उनकी दैनिक गतिविधियों में सुविधा बढ़ रही है।प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के विकास के संदर्भ में बुनियादी सुविधाओं की उपलब्धता और ग्रामीणों के जीवन को आसान बनाने को सरकार की प्राथमिकताओं से जोड़ा है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भी उनका जोर स्वच्छ ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और आम नागरिकों को ऊर्जा उत्पादन में भागीदार बनाने पर रहा है। पीएम सूर्य घर जैसी पहल के माध्यम से घरों में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने तथा किसानों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार की नीतियां इसी व्यापक ऊर्जा आत्मनिर्भरता की सोच को आगे बढ़ाती हैं।सौर ऊर्जा से जुड़े इस राष्ट्रीय विजन का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि ऊर्जा का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि दूरस्थ और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंचे। सुकमा में सौर हाईमास्ट, सोलर पम्प और सोलर स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं का विस्तार इसी आवश्यकता के अनुरूप स्थानीय स्तर पर हो रहे प्रयासों को दर्शाता है।आज सुकमा में सौर ऊर्जा रात की रोशनी, घरों के पेयजल और खेतों की सिंचाई इन तीनों जरूरतों को पूरा करने में सहयोगी बन रही है। 71 सोलर हाईमास्ट, 672 सोलर पम्प और सौर सुजला योजना के तहत 4,300 सोलर पम्पों का लाभ इस बदलाव की तस्वीर को स्पष्ट करता है।दूरस्थ अंचलों में सुविधाओं का यह विस्तार सेवा, सुशासन और आत्मनिर्भरता की दिशा में बढ़ते कदमों को रेखांकित करता है। यही बदलाव विकसित भारत के उस विजन से जुड़ता है, जिसमें गांवों को आधुनिक सुविधाओं से सशक्त, किसानों को अधिक सक्षम और नागरिकों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने पर जोर दिया गया है।
- -जल जन सेवा संकल्प के तहत जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान, जलस्रोतों के संरक्षण के साथ स्वच्छ पर्यावरण का दिया संदेशरायपुर / ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत जिले में जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में गौरेला विकासखंड के ग्राम देवरगांव स्थित मल्हनिया जलाशय में ‘जल जन सेवा संकल्प‘ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से जल संरक्षण, जलस्रोतों की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करते हुए सामूहिक जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।कार्यक्रम में जल संसाधन विभाग एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की सहभागिता रही। इस अवसर पर जल संरक्षण जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के माध्यम से ग्रामीणों एवं स्थानीय नागरिकों को जल के महत्व, जलस्रोतों की सुरक्षा तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। प्रतिभागियों ने जल संरक्षण को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने और भविष्य के लिए जलस्रोतों को सुरक्षित रखने का संदेश दिया।जल जन सेवा संकल्प कार्यक्रम के अंतर्गत मल्हनिया जलाशय एवं उसके आसपास के क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया गया। अभियान के दौरान जलाशय परिसर की साफ-सफाई करते हुए लोगों को जलस्रोतों में कचरा नहीं डालने, आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रेरित किया गया।अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि जलस्रोत ग्रामीण जीवन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार हैं। इनके संरक्षण के लिए प्रशासनिक प्रयासों के साथ नागरिकों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। उन्होंने नागरिकों से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और उनके संरक्षण में निरंतर सहयोग करने की अपील की।‘जल जन सेवा संकल्प‘ का उद्देश्य आम नागरिकों को जल संरक्षण के प्रति जिम्मेदार बनाना तथा सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से जलस्रोतों की स्वच्छता एवं सुरक्षा को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि जल संरक्षण केवल किसी एक विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है।विभागीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने नागरिकों से जल का अनावश्यक अपव्यय रोकने, पानी का विवेकपूर्ण उपयोग करने, जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने तथा अपने आसपास के लोगों को भी जल संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की।‘सेवा संकल्प अभियान‘ के माध्यम से जिले में जनहित और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को व्यापक रूप दिया जा रहा है। जल संरक्षण और स्वच्छता से जुड़ा यह आयोजन सेवा की भावना को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मल्हनिया जलाशय में आयोजित कार्यक्रम ने लोगों को यह संदेश दिया कि जलस्रोतों और प्रकृति की सेवा भी समाज तथा आने वाली पीढ़ियों के प्रति महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।जल संरक्षण जागरूकता रैली और स्वच्छता अभियान के माध्यम से ग्रामीणों में सामूहिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया गया। कार्यक्रम के दौरान जल, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया। सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित यह पहल जिले में जनभागीदारी के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संवर्धन की दिशा में सामूहिक प्रयासों को गति देने वाली रही।
- -नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने दिखाई राष्ट्र निर्माण की कल्पना, युवा शक्ति, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता को बनाया केंद्ररायपुर / ‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा, जनजागरूकता और राष्ट्र निर्माण की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया। अभियान के तहत विद्यार्थियों ने कला, अभिनय और अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की अपनी कल्पना को प्रस्तुत किया। जिले के गौरेला स्थित रानी दुर्गावती चौराहा के पास आईटीआई गौरेला एवं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की बालिकाओं द्वारा नुक्कड़ नाटक और रंगोली के माध्यम से जनजागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। वहीं ‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के शासकीय एवं निजी सहित सभी 905 विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।रानी दुर्गावती चौराहा में आयोजित नुक्कड़ नाटक में बालिकाओं ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा भाव, नमो गाथा तथा देश को समृद्ध, सशक्त और मजबूत राष्ट्र बनाने में युवा शक्ति की भूमिका को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। नाटक के माध्यम से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि देश के विकास में युवाओं की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है और शिक्षा, कौशल, मेहनत तथा नवाचार के माध्यम से युवा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।नुक्कड़ नाटक में युवाओं को आत्मनिर्भर बनने, स्वरोजगार के अवसरों का लाभ उठाने तथा अपनी क्षमता और कौशल के अनुरूप आर्थिक गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित किया गया। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना एवं मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना जैसी योजनाओं के माध्यम से युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी दिया गया।जनजागरूकता कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने स्वच्छता को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने, पानी एवं बिजली की बचत करने और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने का संदेश दिया। नाटक के माध्यम से मेहनत, लगन, अनुशासन, एकता और भाईचारे जैसे मूल्यों को भी प्रभावी तरीके से प्रस्तुत किया गया। रंगोली के माध्यम से भी सामाजिक सरोकारों, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण से जुड़े संदेशों को आकर्षक रूप में प्रदर्शित किया गया। रंगों और रचनात्मक आकृतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने समाज को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित करने वाले विचारों को सामने रखा।‘पच्चीस करोड़ बच्चों के सपनों का भारत‘ थीम के तहत जिले के सभी 905 शासकीय एवं निजी विद्यालयों में ड्रॉइंग एवं भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी कल्पनाशीलता और विचारों के माध्यम से विकसित भारत के सपने को चित्रों और भाषणों में अभिव्यक्त किया।ड्रॉइंग प्रतियोगिता में बच्चों ने स्वच्छ एवं सुंदर भारत, हरित पर्यावरण, आधुनिक शिक्षा, तकनीकी प्रगति, आत्मनिर्भरता, सामाजिक एकता और सशक्त राष्ट्र जैसे विषयों को चित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया। वहीं भाषण प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों ने विकसित भारत के निर्माण में शिक्षा, युवा शक्ति, नवाचार, कौशल विकास, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सहभागिता की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।प्रतियोगिताओं में विद्यार्थियों की कल्पनाओं में ऐसा भारत दिखाई दिया, जो स्वच्छ, शिक्षित, आत्मनिर्भर, तकनीकी रूप से सक्षम और पर्यावरण के प्रति संवेदनशील हो। बच्चों ने अपने चित्रों और विचारों के माध्यम से आधुनिक सुविधाओं के साथ प्रकृति संरक्षण, सामाजिक सद्भाव और समान अवसरों वाले भारत की परिकल्पना प्रस्तुत की।इन गतिविधियों ने विद्यार्थियों को केवल प्रतियोगिता का मंच ही नहीं दिया, बल्कि उन्हें अपने विचारों को सार्वजनिक रूप से व्यक्त करने और राष्ट्र के भविष्य को लेकर अपनी कल्पना साझा करने का अवसर भी प्रदान किया। इससे बच्चों में रचनात्मक सोच, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहन मिला।‘सेवा संकल्प अभियान‘ के अंतर्गत आयोजित इन गतिविधियों के माध्यम से जिले के बच्चों और युवाओं ने सेवा, समर्पण, अनुशासन और जनभागीदारी की भावना को अभिव्यक्त किया। नुक्कड़ नाटक, रंगोली, ड्रॉइंग और भाषण जैसे माध्यमों से विद्यार्थियों ने यह संदेश दिया कि विकसित भारत का निर्माण केवल योजनाओं और संसाधनों से नहीं, बल्कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी, जिम्मेदारी और सकारात्मक सोच से भी संभव है। जिले के 905 विद्यालयों में विद्यार्थियों की सहभागिता ने अभियान को व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा। बच्चों की रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विकसित भारत की कल्पना को समाज के सामने लाने वाली ये गतिविधियां नई पीढ़ी में राष्ट्र निर्माण की भावना, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल साबित हुईं।
-
*प्रधानमंत्री स्वामित्व योजना से ग्राम कुर्रा के मोतीलाल परिवार को मिला भू-अधिकार का दस्तावेजी आधार*
रायपुर/ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना ग्रामीण परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। रायपुर जिले के गोबरा नवापारा तहसील के ग्राम कुर्रा में इस योजना ने एक परिवार की वर्षों पुरानी चिंता को दूर किया है।पीढ़ियों से जिस घर में मोतीलाल का परिवार रह रहा था, उसकी सरकारी अभिलेखों में स्पष्ट पहचान नहीं थी। घर और जमीन से जुड़ा विधिवत दस्तावेज न होने के कारण परिवार के पास अपनी संपत्ति का पर्याप्त दस्तावेजी आधार नहीं था। स्वामित्व योजना के तहत हुए ड्रोन सर्वे ने इस स्थिति को बदलने का रास्ता तैयार किया।ग्राम कुर्रा में ड्रोन से आबादी क्षेत्र का सर्वे किया गया। सर्वे के बाद आवश्यक राजस्व प्रक्रिया पूरी कर मोतीलाल पिता गुहरी राम के पुश्तैनी मकान की पहचान की गई और उन्हें पट्टा एवं भू-अधिकार संबंधी दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। अब संपत्ति की खसरा क्रमांक और रकबा सहित सरकारी अभिलेखों में स्पष्ट पहचान है।मोतीलाल की पत्नी तिजिया बाई साहू कहती हैं, "वर्षों से जिस घर में रह रहे थे, अब उसकी सरकारी रिकॉर्ड में भी पहचान है। इससे हमें अपनी संपत्ति को लेकर सुरक्षा और भरोसा मिला है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी और छत्तीसगढ़ शासन के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।"एक परिवार के लिए यह बदलाव सिर्फ कागज मिलने तक सीमित नहीं है। पुश्तैनी घर को मिली दस्तावेजी पहचान ने उसके अधिकार, सुरक्षा और भविष्य को लेकर परिवार का भरोसा मजबूत किया है। कुर्रा की यह कहानी दिखाती है कि ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक और राजस्व व्यवस्था का समन्वय किस तरह ग्रामीण परिवारों की वर्षों पुरानी संपत्ति को अभिलेखीय पहचान देने में मददगार बन रहा है। - -सेवा सेतु पोर्टल ने संवारा बेटी का भविष्य, डमरूधर को घर बैठे मिला जाति प्रमाण पत्ररायपुर। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत छत्तीसगढ़ में डिजिटल गवर्नेंस की गूंज अब ग्रामीण आंचल के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रही है। शासन की योजनाओं और डिजिटल सेवाओं को पारदर्शी व त्वरित रूप से नागरिकों तक पहुंचाने की यह पहल कुम्हारी (कोसीर) निवासी श्री डमरूधर के लिए उस समय एक बड़ा सहारा बनी, जब उनकी बेटी के शैक्षणिक भविष्य के लिए जाति प्रमाण पत्र की अत्यंत आवश्यकता थी।डमरूधर की बेटी को शैक्षणिक संस्थान में प्रवेश और छात्रवृत्ति से जुड़ी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए अतिशीघ्र जाति प्रमाण पत्र जमा करना था। पहले ऐसे दस्तावेजों के लिए सरकारी दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन डमरूधर ने समय की नजाकत को समझते हुए 'सेवा सेतु पोर्टल' के माध्यम से घर बैठे ऑनलाइन आवेदन किया।आवेदन जमा होते ही संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए डिजिटल माध्यम से दस्तावेजों का सत्यापन किया। पूरी प्रक्रिया समय-सीमा के भीतर पारदर्शी तरीके से पूरी हुई और प्रमाण पत्र बनते ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। डमरूधर ने बिना किसी भाग-दौड़ के इसे सीधे डाउनलोड कर लिया। 'सेवा सेतु पोर्टल' की इस त्वरित व्यवस्था ने न केवल डमरूधर के श्रम और समय की बचत की, बल्कि उनकी बेटी की पढ़ाई की राह में आ रही प्रशासनिक बाधा को भी खत्म कर दिया। अपनी खुशी जाहिर करते हुए डमरूधर ने कहा कि बेटी के दाखिले के लिए प्रमाण पत्र समय पर मिलना हमारे लिए बहुत बड़ी राहत की बात रही। बिना किसी दफ्तर के चक्कर काटे, घर बैठे काम होना शासन-प्रशासन की एक बेहतरीन पहल है। डमरूधर की यह सफलता की कहानी इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सेवा संकल्प अभियान और सेवा सेतु पोर्टल किस प्रकार आम नागरिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। डिजिटल गवर्नेंस की यह व्यवस्था प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुगम, पारदर्शी और पूरी तरह से नागरिक-केंद्रित बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
- -पति के साये के बिना भी संतोषी ने पाई आर्थिक स्वावलंबन की नई राहरायपुर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के साल्हेवना गांव की रहने वाली संतोषी साहू के जीवन में ‘सेवा संकल्प अभियान’ और ‘महतारी वंदन योजना’ उम्मीद की एक नई किरण लेकर आए हैं। पति स्वर्गीय खोलबहरा साहू के असामयिक निधन के बाद संतोषी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। परिवार के भरण-पोषण से लेकर बच्चों की छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करना उनके लिए एक दैनिक संघर्ष बन गया था। सीमित संसाधनों और कमजोर आर्थिक स्थिति के चलते उन्हें अक्सर दूसरों के आगे हाथ फैलाना पड़ता था।राज्य शासन के महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित ‘महतारी वंदन योजना’ ने संतोषी के इस संघर्षपूर्ण जीवन को नई दिशा दी है। वर्ष 2024 से संतोषी को नियमित रूप से प्रतिमाह 1,000 रुपये (वार्षिक 12,000 रुपये) की वित्तीय सहायता सीधे उनके बैंक खाते में प्राप्त हो रही है। यह राशि केवल एक आर्थिक मदद भर नहीं है, बल्कि इसने उन्हें आत्मसम्मान के साथ जीने का भरोसा दिया है।महतारी वंदन योजना से आए इस बदलाव को साझा करते हुए संतोषी बताती हैं कि पहले घर के छोटे-मोटे खर्चों और बच्चों की प्राथमिक जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था या सोचना पड़ता था। इस योजना से हर महीने मिलने वाले पैसों ने मुझे एक नई ताकत दी है। अब मैं खुद को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर महसूस करती हूँ।हर महीने तय समय पर मिलने वाली इस सहायता से संतोषी न केवल अपने घरेलू खर्च आसानी से उठा पा रही हैं, बल्कि बच्चों की इच्छाएं पूरी करने और अपने फैसले स्वयं लेने में सक्षम हुई हैं।संतोषी साहू का यह बदलाव इस बात का जीवंत प्रमाण है कि किस प्रकार राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जमीनी स्तर पर असहाय और जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उनके जीवन में स्वाभिमान और नए आत्मविश्वास का संचार कर रही हैं।
-
*वाटर एटीएम दुरुस्त करें, पैनिक बटन चालू करें: कलेक्टर ने दिए निर्देश*
रायपुर/ कलेक्ट्रेट परिसर स्थित रेडक्रॉस सभाकक्ष में कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने जिले के विभिन्न विभागों की समय-सीमा फॉलो-अप बैठक ली। बैठक में शासन की प्राथमिकता वाली योजनाओं और जन शिकायतों के निराकरण की गहन समीक्षा की गई।कलेक्टर ने कहा कि आने वाले दिनों में रक्तदान शिविर, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य शिविर, समस्या समाधान शिविर जैसे आयोजन किए जाएंगे, जिसमें पूरा जिला प्रशासन समन्वय बनाकर कार्य करेगा।कलेक्टर ने नगर निगम को निर्देशित करते हुए कहा कि शहर में लगे वाटर एटीएम को दुरुस्त किया जाए, ताकि आम नागरिकों को शुद्ध पेयजल प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि राजधानी में कई स्थानों पर पैनिक बटन खराब होने की जानकारी मिली है, इसे पुलिस प्रशासन एवं नगर निगम समन्वय बनाकर दुरुस्त करें, ताकि महिलाएं आपातकालीन स्थिति में इसका उपयोग कर सकें।कलेक्टर ने निर्देश दिए कि जो शासकीय इमारतें जर्जर हो गई हैं, उनका सर्वे कर उन्हें ध्वस्त करने की कार्यवाही की जाए। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत खाता सुधार की प्रगति की समीक्षा करते हुए पात्र हितग्राहियों को जल्द लाभ दिलाने के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए।बैठक में एग्रीस्टेक की प्रगति की भी जानकारी ली गई। कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी से स्कूलों में बंटने वाले पाठ्य पुस्तक एवं गणवेश की समीक्षा करते हुए समय पर वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।बैठक में नगर निगम आयुक्त श्री संबित मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ श्री कुमार बिश्वरंजन, डीसीपी ट्रैफिक डॉ. अर्चना झा, अपर कलेक्टर श्री कीर्तिमान सिंह राठौर सहित जिले के सभी विभाग प्रमुख उपस्थित थे। - -अबूझमाड़ में हिंसा के अंधेरे से जनसेवा और आत्मनिर्भरता की नई भोररायपुर । छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला और विशेष रूप से अबूझमाड़ का दुर्गम क्षेत्र लंबे समय तक भय, हिंसा और नक्सली साए की भयावहता झेलता रहा। कभी जिन हाथों ने भटकाव की राह पर बंदूकें उठाई थीं, वे अब समाज निर्माण और आत्मनिर्भरता का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। छत्तीसगढ़ शासन की 'नक्सलवादी आत्मसमर्पण, पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025' ने अबूझमाड़ के युवाओं को केवल हथियार छोड़ने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उनके लिए सम्मानजनक जीवन, परिवार से पुनर्मिलन और आर्थिक स्वावलंबन के नए द्वार खोल दिए हैं। आज नारायणपुर में पुनर्वास की यह प्रक्रिया केवल कागजी दावों तक सीमित न रहकर ज़मीनी स्तर पर एक जीवंत सामाजिक क्रांति के रूप में दिखाई दे रही है।हिंसा के अंधियारे को पीछे छोड़ मुख्यधारा में लौटे ये आत्मसमर्पित व्यक्ति अब केवल अपनी आजीविका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि जनसेवा और सामाजिक आयोजनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित 'आशीर्वाद का दिया' कार्यक्रम में जब इन्होंने एक साथ दीप प्रज्ज्वलित किए, तो वह केवल एक आयोजन भर नहीं था, बल्कि अबूझमाड़ के दूरस्थ अंचलों में शांति, सद्भावना और सामाजिक स्वीकार्यता का एक सशक्त संदेश था। इस अनूठी सहभागिता ने समाज में आपसी विश्वास को मजबूत करते हुए 'विकसित भारत 2047' के राष्ट्रीय संकल्प को नई ऊर्जा दी है। यह सुखद बदलाव इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब संवेदनशील नीतियां सही दिशा में आजीविका, सम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ती हैं, तो परिवर्तन स्वयं चलकर आता है और हिंसा का अंधेरा छंटकर स्थायी शांति की नई भोर में बदल जाता है।
- - हितग्राहियों ने प्रधानमंत्री मोदी के दीर्घायु जीवन की कामना कीरायपुर । प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 25 साल सेवा के उपलक्ष्य में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत नारायणपुर जिले में जन-उत्साह का अनूठा माहौल देखने को मिला। जनपद पंचायत नारायणपुर की विभिन्न ग्राम पंचायतों में 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' के अंतर्गत निर्मित पक्के मकानों में भव्य दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।नवनिर्मित पक्के मकानों में निवास कर रहे हितग्राही परिवारों ने अपने-अपने आशियानों को दीपों की कतारों से सजाया और सुख, समृद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना की। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री को सेवा के 25 वर्षों की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की प्रार्थना की।योजना के लाभान्वित परिवारों ने खुशी साझा करते हुए कहा कि 'प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण' ने उनके वर्षों पुराने पक्के घर के सपने को साकार किया है। हितग्राहियों का कहना था कि इस योजना से उन्हें न केवल एक सुरक्षित और सम्मानजनक छत मिली है, बल्कि यह नया आवास उनके परिवार के बेहतर और खुशहाल भविष्य का मजबूत आधार बना है।सेवा संकल्प अभियान का यह आयोजन ग्रामीण अंचल में शासकीय योजनाओं से आए जमीनी बदलाव और खुशहाली को प्रदर्शित करने का माध्यम बना। इस अवसर पर दीप प्रज्वलन के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा, सम्मान और जनभागीदारी का एक सकारात्मक और प्रेरणादायक संदेश प्रसारित किया गया।
-
*- सेवा संकल्प अभियान में 6,991 समूहों की 78,501 दीदियों के घर भी जले ‘आशीर्वाद के दीये’*
दुर्ग/ सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। अभियान के अंतर्गत जिले के 126 अमृत सरोवरों में ‘आशीर्वाद का दीया’ जलाया गया। इनमें दुर्ग के 38, धमधा के 50 और पाटन के 38 अमृत सरोवर शामिल हैं। ग्रामीणों ने सरोवरों के किनारे दीप प्रज्ज्वलित कर जल संरक्षण की इन परिसंपत्तियों के संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का संकल्प लिया।*थनौद के अमृत सरोवर में भी जला आशीर्वाद का दीया*ग्राम पंचायत थनौद, जनपद पंचायत दुर्ग में निर्मित अमृत सरोवर के किनारे भी ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रज्ज्वलित किया गया। सरपंच श्रीमती मोनका देशमुख, सचिव श्रीमती रेखा साहू और पंच श्री धनराज देवांगन की मौजूदगी में ग्रामीणों ने दीप जलाकर जल संरक्षण और अमृत सरोवर के सतत संरक्षण का संकल्प लिया। कार्यक्रम में श्री उत्तम देवांगन, श्री बैशखू देवांगन, श्री श्यायलू देशमुख, श्रीमती पार्वती सिन्हा, श्रीमती चंदीका सिन्हा, श्रीमती लीला यादव, श्रीमती कुलेश्वरी ढीमर, श्री टेकसिंग साहू, श्रीमती शकुन देशमुख, श्रीमती उषा साहू, श्रीमती मैना साहू, श्रीमती सुनीता साहू, श्रीमती कमलेश्वरी एवं श्री गणेश राम देशमुख सहित ग्रामीणों ने सहभागिता की। ग्रामीणों ने कहा कि अमृत सरोवर गांव की महत्वपूर्ण जल परिसंपत्ति है। इसके संरक्षण से जल उपलब्धता बढ़ाने के साथ खेती और ग्रामीण आजीविका को भी सहारा मिलता है। दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से जलस्रोतों को स्वच्छ रखने और पानी के सदुपयोग का संदेश दिया गया। - -आर्थिक तंगी और 66 प्रतिशत दिव्यांगता को मात देकर पूजा ने हासिल की नीट में सफलता-मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में मिला प्रवेश, पढ़ाई के लिए डीएमएफ मद से 2.50 लाख रुपये की सहायता स्वीकृत-मजदूर मां की बेटी ने चार वर्षों तक घर पर रहकर की नीट की तैयारी, कठिन परिस्थितियों के बावजूद नहीं छोड़ा हौसलारायपुर / प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के सामने आर्थिक अभाव और विपरीत परिस्थितियां भी बाधा नहीं बन सकतीं। सरगुजा जिले की आदिवासी बेटी कुमारी पूजा सिंह ने अपने संघर्ष और लगन से इसे साबित कर दिखाया है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाली और 66 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद पूजा ने नीट-2026 में सफलता हासिल कर मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया है। उनके डॉक्टर बनने के सपने को आर्थिक परिस्थितियों के कारण रुकने न देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के निर्देश पर कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से शिक्षण शुल्क के लिए 2 लाख 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से अब पूजा के लिए मेडिकल शिक्षा की राह आसान हुई है। राज्य शासन की मंशा है कि आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभावान विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा आर्थिक अभाव के कारण बाधित न हो। पूजा की पारिवारिक परिस्थितियों और उनकी उपलब्धि को देखते हुए जिला प्रशासन द्वारा उन्हें आवश्यक आर्थिक सहयोग उपलब्ध कराया गया है।कलेक्टर श्री अजीत वसंत ने पूजा की सफलता की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद पूजा ने जिस लगन, आत्मविश्वास और मेहनत के साथ नीट में सफलता हासिल की है, वह अन्य विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायी है।कुमारी पूजा सिंह विकासखंड सीतापुर के ग्राम राधापुर की निवासी हैं। उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है। पूजा के पिता श्री चक्रधर सिंह दूसरी शादी के बाद अपनी दूसरी पत्नी के साथ निवास करते हैं। ऐसे में परिवार के भरण-पोषण और बेटी की पढ़ाई की जिम्मेदारी उनकी मां के कंधों पर रही।पूजा की मां के पास स्वयं की कृषि भूमि नहीं है। परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए वे गांव में दूसरे लोगों के खेतों में मजदूरी करती हैं। सीमित आय और संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई जारी रखने में कोई कसर नहीं छोड़ी। मां की मेहनत और बेटी के दृढ़ संकल्प ने मिलकर पूजा के सपने को आगे बढ़ाया।पूजा ने अपनी प्रारंभिक एवं पूर्व माध्यमिक शिक्षा ग्राम राधापुर में पूरी की। इसके बाद उन्होंने शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, सीतापुर से हाईस्कूल और हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। वर्ष 2022 में उन्होंने कक्षा 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वे प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के लिए बड़े शहर जाकर महंगी कोचिंग ले सकें। इसके बावजूद पूजा ने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया। उन्होंने वर्ष 2022 से 2026 तक लगातार चार वर्षों तक घर पर रहकर नीट परीक्षा की तैयारी की। 66 प्रतिशत दिव्यांगता और आर्थिक चुनौतियों के बीच भी उन्होंने डॉक्टर बनने के अपने संकल्प को कमजोर नहीं पड़ने दिया।पूजा की निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास का परिणाम वर्ष 2026 में सामने आया। उन्होंने नीट परीक्षा में सफलता हासिल की और काउंसलिंग के माध्यम से मेडिकल कॉलेज जगदलपुर में प्रवेश प्राप्त किया। सीमित संसाधनों के बीच एक मजदूर मां की बेटी का मेडिकल कॉलेज तक पहुंचना उनके परिवार के साथ-साथ पूरे सरगुजा जिले के लिए गौरव की उपलब्धि है।पूजा की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियां लक्ष्य की राह में स्थायी बाधा नहीं होतीं। यदि संकल्प मजबूत हो और मेहनत निरंतर जारी रहे तो सीमित संसाधनों में भी बड़े सपनों को साकार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की संवेदनशील पहल से मिली आर्थिक सहायता ने अब यह सुनिश्चित किया है कि पूजा की मेडिकल शिक्षा आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो।मां की मेहनत, बेटी का संघर्ष और शासन का सहयोग—इन तीनों के समन्वय ने पूजा के डॉक्टर बनने के सपने को नई उड़ान दी है। पूजा की यह सफलता सरगुजा सहित प्रदेश के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े लक्ष्य निर्धारित कर उन्हें हासिल करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।
- -रायपुर में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित, प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों से जगमगाया छत्तीसगढ़-ऐतिहासिक जनभागीदारी के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्जरायपुर / प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम ने जनभागीदारी और सेवा भावना का नया अध्याय रचा है। रायपुर में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में 25 लाख से अधिक दीप प्रज्वलित किए गए, वहीं प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों की रोशनी से सेवा, सुशासन और जनभागीदारी का संदेश दिया गया। इस ऐतिहासिक आयोजन के लिए ‘आशीर्वाद का दीया’ का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया।वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की जनता की व्यापक सहभागिता और सामूहिक संकल्प का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्षों की सेवा यात्रा पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दीया’ में प्रदेशवासियों ने जिस उत्साह और आत्मीयता के साथ भागीदारी की, वह अभूतपूर्व है।श्री चौधरी ने कहा कि रायपुर में 25 लाख से अधिक दीपों का प्रज्वलन और प्रदेशभर में 1.50 करोड़ से अधिक दीयों का जलना छत्तीसगढ़ की जनता के उत्साह और जनभागीदारी की व्यापकता को दर्शाता है। यह केवल दीप प्रज्वलन का आयोजन नहीं, बल्कि सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की भावना के प्रति जनसहभागिता का सामूहिक उत्सव बना।‘आशीर्वाद का दीया’ के माध्यम से प्रदेश के विभिन्न जिलों में गांवों से लेकर शहरों तक नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न वर्गों ने सहभागिता की। दीपों की रोशनी के माध्यम से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की 25 वर्षों की सार्वजनिक सेवा यात्रा के प्रति आभार और विकसित भारत के संकल्प के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की भावना को अभिव्यक्ति मिली।इस व्यापक जनभागीदारी ने ‘आशीर्वाद का दीया’ को विशेष पहचान दिलाई और आयोजन का नाम गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़वासियों की सामूहिक सहभागिता और उत्साह का प्रमाण है।
- -ठेकेदारों को नए पोर्टल पर कराना होगा नामांकन, विभागीय अधिकारियों को भी यूजर आईडी, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट की प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश-निविदा सृजन, प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन सहित सभी कार्यवाहियां नए पोर्टल पर हीरायपुर ।लोक निर्माण विभाग में ई-टेंडरिंग की व्यवस्था अब नए सरकारी पोर्टल GePNIC पर शिफ्ट होने जा रही है। 1 अक्टूबर 2026 से विभाग की सभी नई निविदाओं का सृजन और प्रकाशन Government e-Procurement-NIC (GePNIC) के माध्यम से होगा। निविदा जारी करने से लेकर उसके मूल्यांकन और आगे की पूरी ऑनलाइन प्रक्रिया इसी पोर्टल पर पूरी की जाएगी। विभाग ने नई व्यवस्था शुरू होने से पहले सभी ठेकेदारों और विभागीय अमले को जरूरी तकनीकी तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए हैं।नई निविदाओं में भाग लेने वाले ठेकेदारों के लिए GePNIC पर नामांकन (Enrollment) कराना जरूरी होगा। विभाग ने ठेकेदारों को समय रहते पोर्टल पर नामांकन कराने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार शुरू किया है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी ने सभी विभागीय अधिकारियों के साथ ही ठेकेदार संघ के अध्यक्ष श्री वीरेश शुक्ला और श्री रूपेश सिंघल को पत्र भेजकर ठेकेदारों तक नई व्यवस्था की जानकारी पहुंचाने और उन्हें नामांकन के लिए प्रेरित करने को कहा है।नई व्यवस्था में सिर्फ टेंडर प्रकाशित करना ही नहीं, बल्कि निविदा की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन GePNIC पर होगी। इसमें निविदा का सृजन, प्रकाशन, बिड प्राप्ति, तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन सहित संबंधित कार्यवाहियां शामिल हैं। विभाग ने अंतिम समय में तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए ठेकेदारों को पोर्टल पर नामांकन की प्रक्रिया पहले ही पूरी करने के निर्देश दिए हैं।पुराने ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर 30 सितम्बर 2026 तक प्रकाशित निविदाओं की बिड प्राप्ति, मूल्यांकन, स्वीकृति और अन्य लंबित ऑनलाइन कार्यवाही 31 मार्च 2027 तक पुराने पोर्टल पर पूरी की जाएंगी। इसके बाद वर्तमान ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर किसी तरह की निविदा संबंधी कार्यवाही नहीं होगी।विभागीय स्तर पर भी नई व्यवस्था को लेकर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। सभी निविदा आमंत्रण अधिकारियों, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन समिति के सदस्यों तथा संबंधित कर्मचारियों को यूजर आईडी बनवाने, रोल मैपिंग और डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) की प्रक्रिया तत्काल पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। नई व्यवस्था 1 अक्टूबर से ही बिना किसी तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन के सुचारू व प्रभावी तरीके से काम करना शुरू कर दें, इस पर विभाग का विशेष जोर है।पीडब्ल्यूडी में टेंडर प्रक्रिया के इस बदलाव के साथ ठेकेदारों को पुराने पोर्टल के बजाय GePNIC को नए निविदा प्लेटफॉर्म के रूप में अपनाना होगा। विभाग ने अधिकारियों और ठेकेदारों से नई व्यवस्था की तैयारी निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने को कहा है, ताकि 1 अक्टूबर से सभी नई निविदाएं निर्बाध रूप से नए पोर्टल पर संचालित की जा सकें।
- -‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर प्री-एनआईटी कॉन्फ्रेंस, बेहतर संचालन और पर्यटक सुविधाओं के विस्तार पर जोररायपुर । छत्तीसगढ़ में पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को बढ़ावा देने और छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न पर्यटन इकाइयों को लीज़ पर दिए जाने की प्रक्रिया को निवेशकों के लिए सरल एवं सुगम बनाने के उद्देश्य से ‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर प्री-एनआईटी (नोटिस इनवाइटिंग टेंडर) कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। कॉन्फ्रेंस में निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स को पर्यटन बोर्ड की विभिन्न प्रॉपर्टीज, लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया, उपलब्ध सरकारी प्रोत्साहनों, पीपीपी मॉडल तथा डिजिटल तकनीक के उपयोग से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। साथ ही पर्यटन क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाकर पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को नई गति देने की संभावनाओं पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।पर्यटन बोर्ड की प्रॉपर्टीज में निवेश के अवसरों की दी जानकारीकार्यक्रम की शुरुआत छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक श्री सौमिल रंजन चौबे के प्रस्तुतीकरण से हुई। उन्होंने उपस्थित निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को बोर्ड के विभिन्न होटल, मोटल, रिसॉर्ट एवं पर्यटन इकाइयों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने प्रॉपर्टीज की लोकेशन, उपलब्ध सुविधाओं, प्रमुख विशेषताओं तथा पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र में उनके विकास की संभावनाओं से अवगत कराया।श्री चौबे ने बताया कि छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड की कई प्रॉपर्टीज प्रमुख पर्यटन स्थलों और आकर्षक लोकेशन पर स्थित हैं। निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश के माध्यम से इन इकाइयों में पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाओं का विकास किया जा सकता है। उन्होंने लीज़ एवं टेंडर प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी देते हुए निवेशकों और स्टेकहोल्डर्स की जिज्ञासाओं एवं प्रश्नों का समाधान भी किया।उन्होंने कहा कि बोर्ड का प्रयास है कि निवेशकों को लीज़ प्रक्रिया से संबंधित सभी आवश्यक जानकारियां स्पष्ट, पारदर्शी और सुगम तरीके से उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अधिक से अधिक योग्य निवेशक इसमें भाग ले सकें और पर्यटन इकाइयों का बेहतर संचालन एवं विकास सुनिश्चित हो सके।पर्यटन क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को मिल रही नई दिशापर्यटन एवं संस्कृति सचिव डॉ. एस. भारतीदासन ने निवेशकों एवं स्टेकहोल्डर्स को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार एवं राज्य नेतृत्व के मार्गदर्शन में पर्यटन उद्योग को उद्योग का दर्जा मिलने के बाद छत्तीसगढ़ स्पष्ट रणनीति के साथ पर्यटन विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। राज्य में पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, ऐतिहासिक विरासत और विविध पर्यटन स्थलों को बेहतर सुविधाओं से जोड़कर पर्यटन गतिविधियों का विस्तार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि राज्य में सुरक्षा एवं परिस्थितियों में सुधार के साथ पर्यटन गतिविधियों में भी बढ़ोतरी हुई है और निवेशकों की रुचि पर्यटन क्षेत्र में बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में राज्य में पर्यटन क्षेत्र को निवेश के लिए अनुकूल बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के रिसॉर्ट्स और अन्य प्रॉपर्टीज की आकर्षक लोकेशन निजी क्षेत्र के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करती हैं।पर्यटन को अनुभव और रोजगार से जोड़ने पर जोरछत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विविधताओं से समृद्ध राज्य है। यहां के पर्यटन स्थल केवल भ्रमण के केंद्र नहीं हैं, बल्कि राज्य की संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक विरासत और स्थानीय जीवन को जानने-समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के होटल एवं रिसॉर्ट अपनी आकर्षक लोकेशन के कारण पर्यटकों के लिए विशेष महत्व रखते हैं। बोर्ड का प्रयास है कि इन प्रॉपर्टीज का विकास इस तरह किया जाए कि वे पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के साथ छत्तीसगढ़ के पर्यटन अनुभव को भी और समृद्ध बनाएं।श्री शर्मा ने कहा कि पर्यटन के विकास के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के अवसर भी बढ़ते हैं। राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को पर्यटन से जोड़कर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।सिंगल विंडो से निवेश प्रक्रिया होगी आसानकॉन्फ्रेंस में निवेशकों के लिए प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर विशेष जोर दिया गया। निवेशकों को विभिन्न विभागों और प्रक्रियाओं के लिए अलग-अलग स्थानों पर जाने की आवश्यकता कम हो, इसके लिए सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से निवेश प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने की दिशा में जानकारी साझा की गई।इस व्यवस्था का उद्देश्य विभिन्न प्रक्रियाओं एवं आवश्यक अनुमतियों को सरल बनाना तथा पर्यटन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाना है। इससे निवेशकों को आवश्यक जानकारी एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने और परियोजनाओं की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है।सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहनों की जानकारीकार्यक्रम में सीएसआईडीसी के उप संचालक श्री अमेय त्रिपाठी ने छत्तीसगढ़ में पर्यटन एवं संबंधित क्षेत्रों में निवेश के लिए उपलब्ध सब्सिडी, प्रोत्साहन एवं अन्य सरकारी सुविधाओं की जानकारी दी। प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पात्र परियोजनाओं, निवेश सुविधाओं तथा विभिन्न प्रकार की सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं से संबंधित जानकारी साझा की गई।पीपीपी मॉडल से पर्यटन विकास को नई गति देने पर चर्चाअर्नेस्ट एंड यंग के पार्टनर एवं पीपीपी एक्सपर्ट श्री अंकुर गर्ग ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया। उन्होंने पीपीपी मॉडल की संरचना, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भूमिका, निवेश, परियोजना संचालन और राजस्व मॉडल सहित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी।उन्होंने पर्यटन परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता एवं निवेश का उपयोग करते हुए सुविधाओं के विकास और संचालन को बेहतर बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की। कॉन्फ्रेंस में पीपीपी मॉडल को पर्यटन क्षेत्र में निवेश और अधोसंरचना विकास के एक संभावित माध्यम के रूप में समझाया गया।डिजिटल पहचान सत्यापन से पर्यटन सेवाओं को सुगम बनाने पर जोरकार्यक्रम में यूआईडीएआई दिल्ली के डायरेक्टर लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने आधार आधारित डिजिटल एवं ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था की उपयोगिता के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डिजिटल पहचान सत्यापन की व्यवस्था पर्यटन क्षेत्र के साथ-साथ पुलिस एवं अन्य सरकारी विभागों के लिए भी उपयोगी हो सकती है।उन्होंने सिक्योर क्यूआर कोड के माध्यम से दस्तावेजों की प्रामाणिकता जांचने की प्रक्रिया की जानकारी दी। इससे अधिकृत संस्थाओं को पहचान एवं दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया को तेज और व्यवस्थित बनाने में सहायता मिल सकती है। उन्होंने बताया कि ऐसी डिजिटल व्यवस्था का उपयोग संबंधित संस्था के पंजीकरण, लागू नियमों और वैध उद्देश्य के अनुरूप किया जाना आवश्यक है।एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ से पर्यटन निवेश को नई दिशा‘एक्सप्लोर, इनवेस्ट, ट्रांसफार्म’ थीम पर आयोजित प्री-एनआईटी कॉन्फ्रेंस का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ में पर्यटन निवेश की संभावनाओं को निवेशकों के सामने प्रस्तुत करना और टूरिज्म बोर्ड की विभिन्न होटल, मोटल एवं रिसॉर्ट इकाइयों को लीज़ पर देने की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट एवं सुगम बनाना रहा। कॉन्फ्रेंस में सरकारी प्रोत्साहनों, सिंगल विंडो सुविधा, पीपीपी मॉडल, हॉस्पिटैलिटी सेक्टर, पर्यटक सुविधाओं के विस्तार और डिजिटल तकनीक के उपयोग पर व्यापक चर्चा हुई।कार्यक्रम के माध्यम से छत्तीसगढ़ को पर्यटन निवेश के लिए संभावनाशील गंतव्य के रूप में प्रस्तुत करने के साथ राज्य की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पर्यटन संपदा को निवेश, रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में संवाद को आगे बढ़ाया गया।
- -'शहरीकरण की बढ़ती जरूरतों के अनुरूप तैयार हो रहा नया छत्तीसगढ़, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को प्राथमिकता'-विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026 में शामिल हुए उप मुख्यमंत्रीरायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राज्य की अधोसंरचना को नई मजबूती दी जा रही है। सड़क, परिवहन और कनेक्टिविटी से लेकर आवास, जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन तक के लिए आने वाले समय की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकास की आधारभूत संरचना तैयार की जा रही है। मजबूत अधोसंरचना आर्थिक विकास की बुनियाद है और राज्य सरकार इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। अधोसंरचना विकास पर अब तक 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जा चुके हैं। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज 'विकसित छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' में ये बातें कहीं।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने नवा रायपुर में इकोनॉमिक टाइम्स ग्रुप द्वारा आयोजित 'छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव-2026' के विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। विकास की इस रफ्तार को बनाए रखने के लिए राज्य में अधोसंरचना के विस्तार पर लगातार काम किए जा रहे हैं। बेहतर सड़कें, सुगम परिवहन और मजबूत कनेक्टिविटी न केवल लोगों की आवाजाही को आसान बनाती हैं, बल्कि उद्योग, व्यापार और निवेश के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार करती हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। केंद्र सरकार उन राज्यों और क्षेत्रों की विकास संबंधी जरूरतों पर भी विशेष ध्यान दे रही है, जो लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा में अपेक्षाकृत पीछे रहे हैं। श्री साव ने विशेष रूप से पूर्वोत्तर राज्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां कनेक्टिविटी, अधोसंरचना और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जा रही है। इससे देश के अलग-अलग हिस्सों के बीच विकास का संतुलन मजबूत हो रहा है और दूरस्थ क्षेत्रों को भी व्यापक आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ रहे हैं।श्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विकास का लाभ अधिक से अधिक क्षेत्रों और लोगों तक पहुंचाने के लिए अधोसंरचना को लगातार मजबूत किया जा रहा है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण और शहरों की बढ़ती आबादी के साथ लोगों की जरूरतें भी बदल रही हैं। ऐसे में केवल वर्तमान जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर शहरी सुविधाओं और अधोसंरचना का विकास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आर्थिक प्रगति के लिए मजबूत अधोसंरचना जरूरी है। सड़कों और परिवहन सुविधाओं के विस्तार से कनेक्टिविटी बेहतर होती है और इसका सीधा लाभ आर्थिक गतिविधियों को मिलता है। छत्तीसगढ़ में इसी दृष्टि से अधोसंरचना विकास को विकास की गति से जोड़ते हुए काम किया जा रहा है।कॉन्क्लेव में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संचालक श्री नीलेश महादेव क्षीरसागर ने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरों की जरूरतों का स्वरूप भी बदल रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप आधुनिक शहरी अधोसंरचना तैयार की जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0, बेहतर जलापूर्ति और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में राज्य सरकार प्रभावी ढंग से काम कर रही है।कॉन्क्लेव में छत्तीसगढ़ के विकास, अधोसंरचना, शहरीकरण और निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में इकोनॉमिक टाइम्स के सीनियर एसोसिएट एडीटर श्री अर्पित गुप्ता, टीपीआरईसी (TPREC) के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री संजय बांगा तथा अनिएक्स (Anniex) के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर श्री नीरव शाह भी मौजूद थे।
-
दुर्ग/ देश के प्रधानमंत्री जी की सार्वजनिक सेवा समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शासन द्वारा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। आज पाटन स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में भी विद्यार्थियों के लिए ड्रॉइंग एवं रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए अपनी कला-कौशल और रचनात्मक सोच का प्रदर्शन किये। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने आयोजन में शामिल होकर विद्यार्थियों की बनाई हुई कलाकृतियों का अवलोकन कर उनका उत्साहवर्धन किया।
विद्यालय परिसर में आयोजित चित्रकारी प्रतियोगिता में विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा देखने को मिली। विद्यार्थियों ने रंगों और चित्रों के माध्यम से देश की प्रगति, आत्मनिर्भरता, शिक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं तकनीक सहित विभिन्न विषयों को अपनी चित्र में स्थान दिये। रंगोली के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाओं को आकर्षित रूप में प्रस्तुत किये।इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से विकसित भारत की सुंदर तस्वीर को कागज और रंगों में जीवंत रूप से उकेरा है। विद्यार्थियों की कलाकृतियों में केवल रंग और आकृतियां ही नहीं, बल्कि उनके सपने, उनकी सोच और देश के भविष्य को लेकर उनकी कल्पनाएं भी दिखाई देती हैं।मंत्री श्री गजेन्द्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने विकसित भारत का जो संकल्प देश के सामने रखा है, उसमें युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। आज के विद्यार्थी ही कल के भारत का नेतृत्व करेंगे। इसलिए बच्चों में शुरू से ही रचनात्मक सोच, नवाचार, आत्मनिर्भरता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए उनकी बनाई कलाकृतियों के विषय में जानकारी ली और उनकी कल्पनाओं की सराहना की। मंत्री ने कहा कि पढ़ाई के साथ-साथ विद्यार्थियों को अपनी रुचि और प्रतिभा को आगे बढ़ाने के लिए भी पर्याप्त अवसर मिलना चाहिए। कला, खेल, विज्ञान, तकनीक और अन्य रचनात्मक गतिविधियां बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।मंत्री श्री यादव ने कहा कि प्रतियोगिता में किसी विद्यार्थी की सफलता केवल पुरस्कार प्राप्त करने तक सीमित नहीं होती। मंच पर आकर अपनी कला प्रस्तुत करना, दूसरों की कला को देखना और उससे सीखना भी विद्यार्थी के व्यक्तित्व निर्माण का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे आयोजन बच्चों में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा, सहयोग और अपनी प्रतिभा के प्रति विश्वास पैदा करते हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उसे प्रोत्साहित करना शिक्षक और विद्यालय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। बच्चों को जितने अधिक अवसर अपनी प्रतिभा को सामने लाने के मिलेंगे, उनका आत्मविश्वास उतना ही मजबूत होगा। - -उच्च शिक्षा विभाग की विशेष पहल-छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं का अंग्रेजी सम्प्रेषण कौशल संवरेगारायपुर । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप और उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा के मार्गदर्शन व निर्देशों के तहत छत्तीसगढ़ शासन का उच्च शिक्षा विभाग प्रदेश के अनुसूचित जनजातीय (ST) क्षेत्रों के विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण पहल करने जा रहा है। जनजातीय क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं में अंग्रेजी भाषा के सम्प्रेषण कौशल को निखारने के लिए 90 घंटे का एक विशेष प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है।उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा ने इस पहल को युवाओं के आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक मील का पत्थर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का लाभ अनुसूचित जनजाति वर्ग के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे और हर योग्य विद्यार्थी को इसका लाभ मिले। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार का ध्येय प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों के विद्यार्थियों को भी वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धी क्षमताओं से लैस करना है। इसी उद्देश्य को साकार करने के लिए 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम कार्यपालन समिति' का गठन किया गया है, जो इस 90-दिवसीय/घंटे के पाठ्यक्रम का संचालन और निगरानी करेगी।राष्ट्रीय गुणवत्ता सुधार एवं गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ और राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से संचालित होगा। यह विशेष पाठ्यक्रम प्रदेश भर के अनुसूचित जनजातीय क्षेत्रों के महाविद्यालयों में संचालित किया जाएगा। इस पहल से दूरस्थ अंचलों में पढ़ने वाले युवाओं में अंग्रेजी में बातचीत करने और अपने विचारों को प्रभावी ढंग से व्यक्त करने की झिझक दूर होगी, जिससे उन्हें रोजगार एवं उच्च शिक्षा के नए अवसर प्राप्त होंगे। पाठ्यक्रम के सुचारू संचालन, उच्च गुणवत्ता और प्रभावी अनुवीक्षण को सुनिश्चित करने के लिए आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग की अध्यक्षता में 'राज्य-स्तरीय अंग्रेजी सम्प्रेषण पाठ्यक्रम अनुवीक्षण समिति' की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के वरिष्ठ अधिकारियों ने पाठ्यक्रम के क्रियान्वयन की चरणबद्ध रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की।
-
- स्कूली बच्चों की रही बढ़-चढ़ कर भागीदारी
दुर्ग/देश के प्रधानमंत्री जी की सार्वजनिक सेवा समर्पण के 25 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शासन द्वारा 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर 2026 तक सेवा संकल्प अभियान आयोजित किया जा रहा है। अभियान की इस कड़ी में जिले के सभी विद्यालयों में शुक्रवार 18 सितम्बर को मेरे सपनों का भारत चित्र सेवा अंतर्गत ड्राइंग प्रतियोगिता आयोजित की गई। जिसमें स्कूली बच्चों ने बढ़-चढ़ कर अपनी भागीदारी ली। इस दौरान सभी स्कूलों के विद्यार्थियों ने नारी सशक्तिकरण, मेरे सपनों का भारत, विकसित भारत-2047, डिजिटल इंडिया और ऑपरेशन सिन्दूर शीर्षक के आधार पर नयनाभिराम चित्र बनाकर प्रदर्शित किया।कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह ने सेजेश विद्यालय दीपक नगर पहुंचकर स्कूली बच्चों द्वारा बनाये गये ड्राइंग का अवलोकन किया और नन्हीं कर कमलों से बनाये चित्रकारी का सराहना की। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकगण उपस्थित थे। -
सेवा संकल्प अभियान
*2,447 स्कूलों में चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता का आयोजन*बिलासपुर। सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले के 2,447 स्कूलों में आज चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिता आयोजित की गई। करीब ढाई लाख बच्चों ने भाग लेकर बीते 25 वर्षों के भारत और आगामी 25 वर्षों के सपनों के भारत को चित्रों और भाषणों के माध्यम से अभिव्यक्त किया।प्रतियोगिता की पहली श्रेणी में स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, सेना का शौर्य, नया कश्मीर और नक्सलवाद जैसे विषय रखे गए। बच्चों ने इन विषयों पर चित्र बनाकर अपनी सोच को रंगों में उतारा। वहीं भाषण प्रतियोगिता में बच्चों ने इन्हीं विषयों से जुड़े देश की उपलब्धियों, बदलाव और चुनौतियों पर अपने विचार रखे। दूसरी श्रेणी में बच्चों को सपनों का भारत, विकसित भारत 2047, नक्सल मुक्त भारत, महिला सशक्तिकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभाव जैसे विषय दिए गए। बच्चों ने अपने चित्रों में भविष्य के भारत की तस्वीर उकेरी और भाषणों के माध्यम से बताया कि वे आने वाले 25 वर्षों में भारत को किस रूप में देखना चाहते हैं।आयोजन में जिला शिक्षा अधिकारी श्री संदीप पांडे सहित चारों विकासखंडों के विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अधिकारियों ने बच्चों की रचनात्मकता और विचारों की सराहना की। प्रतियोगिता के माध्यम से बच्चों को देश की विकास यात्रा को समझने तथा भारत के भविष्य को लेकर अपनी कल्पना और विचार व्यक्त करने का अवसर मिला। -
*अकादमिक गतिविधियों, संयुक्त अनुसंधान, डिजिटल शिक्षा और जनजातीय विषयों पर अध्ययन को मिलेगा नया आधार*
बिलासपुर | पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़, बिलासपुर ने अकादमिक एवं अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने की दिशा में दो महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MOU) पर सहमति बनाई है। विश्वविद्यालय ने *महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MUMT), बिलासपुर* तथा *ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर (TRKC), नई दिल्ली* के साथ सहयोग का समझौता किया है।इन दोनों MOU के माध्यम से शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, संकाय विकास, विद्यार्थी सहभागिता, नवाचार, प्रकाशन और जनजातीय विषयों पर अध्ययन एवं शोध को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का रास्ता तैयार हुआ है।*MUMT के साथ अकादमिक सहयोग का विस्तार*महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के तहत दोनों संस्थान अकादमिक, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, विस्तार और संस्थागत विकास के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे।इसके अंतर्गत संयुक्त संगोष्ठी, कार्यशाला, विशेषज्ञ व्याख्यान, अकादमिक आयोजन, अंतर्विषयी अधिगम, पाठ्यचर्या संवर्धन तथा अकादमिक सामग्री के विकास जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।इसके साथ ही *MOOCs, मुक्त शैक्षिक संसाधन (OER), डिजिटल एवं स्व-अध्ययन सामग्री* तथा तकनीक आधारित शिक्षण संसाधनों के विकास और सह-विकास की संभावनाएं भी रखी गई हैं।सक्षम प्राधिकारियों की स्वीकृति के अधीन अल्पकालिक, प्रमाणपत्र एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम भी संचालित किए जा सकेंगे।*संयुक्त शोध, सर्वे और प्रकाशन पर जोर*MOU के तहत दोनों संस्थानों के बीच *संयुक्त अनुसंधान, सर्वेक्षण, क्षेत्र अध्ययन, प्रायोजित अनुसंधान, परामर्श, संयुक्त प्रकाशन और शोध प्रसार* जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा।संकाय विकास कार्यक्रम, प्रशिक्षण, पुनश्चर्या गतिविधियां, विशेषज्ञ व्याख्यान, अकादमिक यात्राएं और श्रेष्ठ प्रशासनिक प्रथाओं के आदान-प्रदान का भी प्रावधान रखा गया है।*विद्यार्थियों के लिए खुलेंगे नए अवसर*समझौते के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए *इंटर्नशिप, परियोजना कार्य, क्षेत्रीय अनुभव, शैक्षिक भ्रमण, कौशल विकास, करियर मार्गदर्शन और उद्यमिता* से जुड़े अवसर विकसित किए जा सकेंगे।सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेलकूद एवं सह-पाठ्यचर्या गतिविधियों में भी विद्यार्थियों की सहभागिता को बढ़ावा दिया जा सकेगा।हालांकि प्रवेश, क्रेडिट ट्रांसफर, संयुक्त अथवा द्वैध उपाधि जैसे विनियमित विषय संबंधित *यूजीसी एवं सक्षम प्राधिकरणों के नियमों* तथा दोनों संस्थानों की स्वीकृति के बाद ही लागू होंगे।*TRKC के साथ जनजातीय विषयों पर विशेष सहयोग*ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर (TRKC), नई दिल्ली के साथ हुए MOU में *जनजातीय मुद्दों एवं अनुसूचित जनजातियों से जुड़े विषयों पर संयुक्त अध्ययन और अनुसंधान* को विशेष महत्व दिया गया है।इसके अंतर्गत सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यक्रम, प्रकाशन, ज्ञान-साझाकरण तथा विशेषज्ञ सहयोग जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाया जा सकेगा।TRKC की ओर से रणनीति निर्माण, योजना तैयार करने और कार्य-रोडमैप विकसित करने में बौद्धिक सहयोग प्रदान किया जाएगा। आवश्यकता के अनुसार केंद्र अपनी विशेषज्ञता और ज्ञान भी उपलब्ध करा सकेगा।वहीं विश्वविद्यालय अपने संस्थागत नियमों के अनुसार निर्धारित गतिविधियों के आयोजन एवं संबंधित व्यय की व्यवस्था करेगा।*MOU पर किसने किए हस्ताक्षर ?*दोनों संस्थानों के बीच हुए समझौते में प्रतिनिधियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। *पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय की ओर से कुलसचिव श्री चंद्रभूषण मिश्र* ने MOU पर हस्ताक्षर किए।वहीं *ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर, नई दिल्ली (TRKC) की ओर से छत्तीसगढ़ के प्रान्त संयोजक श्री राजीव शर्मा* ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।इस औपचारिक समझौते के साथ दोनों संस्थानों के बीच जनजातीय विषयों पर अध्ययन, अनुसंधान, ज्ञान-साझाकरण और अकादमिक सहयोग को आगे बढ़ाने का संस्थागत आधार तैयार हुआ है।*दो सदस्यीय संचालन समिति करेगी समन्वय*MOU के तहत होने वाली गतिविधियों की निगरानी और समन्वय के लिए दोनों पक्षों से एक-एक प्रतिनिधि वाली *दो सदस्यीय संचालन समिति* गठित करने का प्रावधान भी किया गया है।बौद्धिक संपदा, स्वामित्व, प्रोत्साहन और ज्ञान-साझाकरण जैसे विषय संबंधित कार्य की प्रकृति के अनुसार आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।*जनजातीय समाज, संस्कृति और परंपरा पर शोध को मिलेगा मंच*विश्वविद्यालय के अनुसार जनजातीय अनुसंधान से जुड़े समझौते से *जनजातीय समाज, संस्कृति, परंपरा और समसामयिक विषयों* पर अध्ययन एवं शोध को संस्थागत स्तर पर आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा।वहीं MUMT के साथ अकादमिक सहयोग से शिक्षकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, नवाचार और अनुसंधान से जुड़े नए अवसर विकसित किए जा सकेंगे।*इन दो MOU का व्यापक उद्देश्य*दोनों समझौतों का उद्देश्य केवल संस्थागत औपचारिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि उपलब्ध विशेषज्ञता और संसाधनों के साझा उपयोग के माध्यम से *शिक्षा, शोध, कौशल विकास और ज्ञान-साझाकरण* को मजबूत करना है।विशेष रूप से जनजातीय विषयों पर होने वाला संयुक्त अध्ययन छत्तीसगढ़ के जनजातीय समाज से जुड़े सामाजिक, सांस्कृतिक और समसामयिक विषयों को अकादमिक एवं अनुसंधान के दायरे में और व्यापक रूप से सामने लाने में उपयोगी आधार प्रदान कर सकता है।*इस दौरान उपस्थित रहे*पण्डित सुन्दरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति *प्रो. वी. के. सारस्वत* एवं कुलसचिव *श्री चंद्रभूषण मिश्र* उपस्थित रहे।महर्षि प्रबंधन एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति *प्रो. डॉ. नरेश कुमार तिवारी* एवं कुलसचिव *डॉ. विजय गरुडिक* शामिल हुए।वहीं ट्राइबल रिसर्च एंड नॉलेज सेंटर, नई दिल्ली की ओर से छत्तीसगढ़ के प्रान्त संयोजक *श्री राजीव शर्मा* एवं सामाजिक कार्यकर्ता *श्री वैभव सुरंगे* उपस्थित रहे। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई आयुक्त एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशानुसार 18 सितंबर 2026 को जोन क्रमांक-01 अंतर्गत वार्ड क्रमांक-12, रानी अवंती बाई कोहका क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान प्रतिष्ठानों में अनुज्ञप्ति (लाइसेंस) नहीं पाए जाने तथा गीला एवं सूखा कचरा पृथक-पृथक नहीं रखने पर संबंधित संचालकों के विरुद्ध चालानी कार्रवाई की गई।
कार्रवाई के दौरान अदिति कैफे फास्ट फूड पर अनुज्ञप्ति लाइसेंस नहीं होने पर ₹2,000, जय मां शारदा स्वीट्स बेकरी पर ₹1,500 तथा गीला-सूखा कचरा पृथक नहीं रखने पर ₹500 का जुर्माना लगाया गया। इसी प्रकार फ्यूजन तड़का पर गीला एवं सूखा कचरा पृथक नहीं रखने पर ₹1,000 तथा अनुज्ञप्ति लाइसेंस नहीं पाए जाने पर ₹4,000 की चालानी कार्रवाई की गई। इस प्रकार कुल ₹9,000 की राशि जुर्माने के रूप में वसूल की गई। निगम द्वारा प्रतिष्ठान संचालकों को अनुज्ञप्ति लाइसेंस अनिवार्य रूप से प्राप्त करने तथा गीले एवं सूखे कचरे को पृथक-पृथक रखने के निर्देश दिए गए हैं। निगम की टीम द्वारा स्वच्छता एवं नियमों के पालन को लेकर आगे भी नियमित निरीक्षण एवं कार्रवाई जारी रहेगी। -
भिलाईनगर। नगर पालिक निगम भिलाई में कर वसूली कार्य को प्रभावी एवं लक्ष्य के अनुरूप संचालित करने के उद्देश्य से निगम आयुक्त सुरुचि सिंह ने सभागार कक्ष में संबंधित अधिकारियों एवं वसूली एजेंसी के साथ बैठक आयोजित की। बैठक में कर वसूली की प्रगति, डोर-टू-डोर सर्वे, ड्रोन सर्वे सहित निगम के मैदानी कार्यों की विस्तारपूर्वक समीक्षा की गई।
आयुक्त ने वसूली एजेंसी एसपीएस द्वारा किए जा रहे कर वसूली कार्यों की गहन समीक्षा की। अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त करते हुए एजेंसी को वसूली कार्य में गंभीरता एवं तेजी लाने तथा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में डोर-टू-डोर सर्वे कार्य की भी समीक्षा की गई। आयुक्त ने संबंधित टीम को सर्वे कार्य में गंभीरता बरतते हुए प्रत्येक क्षेत्र में व्यवस्थित एवं प्रभावी सर्वे करने के निर्देश दिए। वहीं आईआईटी टीम द्वारा किए जा रहे ड्रोन सर्वे कार्य को भी शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए। निगम के मैदानी कार्यों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए वाहनों में जीपीएस सिस्टम लगाया जाएगा, जिससे वाहनों की लोकेशन एवं उनके संचालन की नियमित निगरानी की जा सकेगी। इसके साथ ही प्लेसमेंट कर्मचारियों की उपस्थिति एवं कार्यों की मॉनिटरिंग के लिए बायोमेट्रिक प्रणाली लागू की जा रही है। इससे कर्मचारियों की उपस्थिति एवं मैदानी कार्यों की निगरानी को अधिक पारदर्शी एवं व्यवस्थित बनाया जा सकेगा।आयुक्त ने जोन आयुक्तों एवं सहायक राजस्व अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में कर वसूली, सर्वे तथा अन्य मैदानी कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को कार्यों की निरंतर समीक्षा करते हुए आवश्यक सुधार एवं कार्रवाई सुनिश्चित करने कहा। बैठक में अपर आयुक्त राजेंद्र कुमार दोहरे, उपायुक्त डी.के. कोसरिया, जोन आयुक्त अमरनाथ दुबे, कुलदीप गुप्ता, कार्यपालन अभियंता सुनील जैन, लेखाधिकारी चंद्रभूषण साहू तथा राजस्व अधिकारी जे.पी. तिवारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
















.jpg)






.jpg)

.jpg)


.jpg)