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- एमसीबी/ जिला रोजगार एवं स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) द्वारा शिक्षित बेरोजगार युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 19 जून 2026 (दिन- शुक्रवार) को रोजगार मेला/प्लेसमेंट कैंप का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्रातः 11:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक जिला रोजगार कार्यालय, मनेन्द्रगढ़ में आयोजित होगा। रोजगार मेले में विभिन्न निजी कंपनियों द्वारा भर्ती की जाएगी। इसमें Parisharam Human Resources Pvt. Ltd. द्वारा मीटर इंस्टॉलेशन पद हेतु 100 रिक्तियां (वेतन 15,000 से 20,000 रुपये), LIC अंबिकापुर द्वारा इंश्योरेंस एडवाइजर पद हेतु 50 रिक्तियां (कमीशन आधारित), Little Millennium Pre School मनेन्द्रगढ़ द्वारा टीचर पद हेतु 3 रिक्तियां (वेतन 5,000 से 6,000 रुपये) तथाAlekh Public School सिरौली द्वारा सिक्योरिटी गार्ड पद हेतु 1 रिक्ति उपलब्ध है।प्लेसमेंट कैंप पूर्णतः निःशुल्क है। इच्छुक अभ्यर्थियों को https://erojgar.cg.gov.in अथवा CG Rojgar Panjiyan App के माध्यम से पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। अभ्यर्थियों को अपने साथ शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, रोजगार कार्यालय का जीवित पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड तथा पासपोर्ट साइज फोटो लेकर निर्धारित तिथि एवं स्थान पर उपस्थित होना होगा।
- रायपुर। बदलते तकनीकी दौर में महिला उद्यमियों को आधुनिक साधनों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नवा बिहान क्लस्टर में आयोजित डिजिटल साक्षरता कार्यशाला ने महिलाओं को ऑनलाइन विपणन, ब्रांड निर्माण और इंटरनेट आधारित व्यापार की नई संभावनाओं से परिचित कराया गया।कार्यशाला का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं और महिला संचालित सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को आधुनिक विपणन तकनीकों की जानकारी देकर उनके उत्पादों की बाजार पहुंच बढ़ाना था। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने प्रतिभागियों को उत्पाद पहचान निर्माण, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, गुणवत्ता प्रमाणन, ऑनलाइन विक्रय मंचों तथा बाजार से जुड़ने के विभिन्न तरीकों की व्यवहारिक जानकारी दी।वसुंधरा यादव ने कहा कि महिला उद्यमिता केवल आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की भी मजबूत आधारशिला है। उन्होंने महिलाओं को तकनीकी ज्ञान का अधिकाधिक उपयोग कर अपने व्यवसाय को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए प्रेरित किया।कार्यशाला में सफल महिला उद्यमियों के अनुभव साझा किए गए और प्रतिभागियों को ग्राहक नेटवर्क विकसित करने, ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग बढ़ाने तथा व्यवसाय विस्तार की रणनीतियों पर मार्गदर्शन दिया गया। विशेषज्ञों ने सरकारी सहायता, अनुदान योजनाओं और विपणन सहयोग कार्यक्रमों की भी जानकारी दी गई, जिससे महिलाएं अपने उद्यमों को और मजबूत बना सकें।जिले के विभिन्न क्षेत्रों से शामिल करीब 30 महिला उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों की प्रतिनिधियों ने प्रशिक्षण को उपयोगी और प्रेरणादायक बताया। प्रतिभागियों का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के बाजारों तक पहुंच बनाने में मदद करेंगे।
- -प्रति एकड़ 6.50 लाख रुपये तक शुद्ध लाभरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि नवाचार और उद्यानिकी फसलों के विस्तार का असर अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देने लगा है। महासमुंद जिले के विकासखंड महासमुंद अंतर्गत ग्राम लोहारडीह निवासी प्रगतिशील किसान क्रांति कुमार चंद्राकर ने पारंपरिक धान खेती से आगे बढ़कर ग्राफ्टेड बैंगन की आधुनिक खेती अपनाकर उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। उनकी यह उपलब्धि न केवल व्यक्तिगत आय वृद्धि का उदाहरण है, बल्कि राज्य में कृषि विविधीकरण और तकनीक आधारित खेती की दिशा में एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभरी है। एम.टेक. तक शिक्षित श्री चंद्राकर पूर्व में अपनी 1.46 हेक्टेयर सिंचित भूमि पर मुख्यतः धान की खेती करते थे। परंतु अधिक जल उपयोग, बढ़ती उत्पादन लागत तथा सीमित लाभ के कारण उन्हें अपेक्षित आर्थिक परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे थे। इसी दौरान उन्होंने कृषि में नवाचार और उद्यानिकी फसलों की ओर रुख करने का निर्णय लिया।वर्ष 2025-26 में उन्होंने उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत संचालित ग्राफ्टेड बैंगन एवं टमाटर सीडलिंग प्रदर्शन कार्यक्रम में सहभागिता की। इस योजना के तहत उन्हें 30 हजार रुपये की डीबीटी आधारित अनुदान सहायता प्राप्त हुई, जिससे उन्हें तकनीकी खेती अपनाने में प्रारंभिक सहयोग मिला। तकनीकी मार्गदर्शन के अनुरूप उन्होंने अपने खेत में ड्रिप सिंचाई प्रणाली एवं मल्चिंग तकनीक का उपयोग करते हुए ग्राफ्टेड बैंगन की खेती प्रारंभ की। आधुनिक कृषि तकनीकों के समन्वित उपयोग से न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, बल्कि फसल की गुणवत्ता और बाजार में उसकी स्वीकार्यता भी बेहतर हुई।किसान चंद्राकर के अनुसार, पारंपरिक धान खेती से उन्हें लगभग 35 हजार रुपये का सीमित लाभ प्राप्त होता था, जबकि ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से प्रति एकड़ लगभग 400 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त हुआ। औसतन 25 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक्री के परिणामस्वरूप कुल आय में कई गुना वृद्धि दर्ज की गई। सभी कृषि लागतों,जिसमें श्रम, इनपुट सामग्री एवं अन्य व्यय शामिल है,को घटाने के पश्चात उन्हें प्रति एकड़ लगभग 6.50 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि किसान पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक तकनीक और उच्च मूल्य वाली फसलों को अपनाएं, तो उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। उनकी सफलता के बाद क्षेत्र के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों, विशेषकर ग्राफ्टेड सब्जियों, ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग जैसी तकनीकों की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं। यह बदलाव जिले में कृषि विविधीकरण और जल संरक्षण आधारित खेती को नई दिशा प्रदान कर रहा है। कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के प्रदर्शन कार्यक्रमों से किसानों में तकनीकी जागरूकता बढ़ रही है और छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी एवं टिकाऊ बनाने की दिशा में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है।
- -अब तक जिले की 46 ऐतिहासिक पाण्डुलिपियां पोर्टल पर दर्जरायपुर। राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अभियान का प्रथम चरण 15 जून को पूर्ण हो गया है। इस दौरान सरगुजा जिले में प्राचीन ज्ञान, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी अनेक महत्वपूर्ण एवं दुर्लभ पाण्डुलिपियां प्रकाश में आई हैं, जिनका डिजिटलीकरण और दस्तावेजीकरण किया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत अम्बिकापुर नगर में दो संरक्षकों के पास संरक्षित महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियों का सर्वेक्षण किया गया। बिलासपुर चौक निवासी डॉ. सुधीर पाठक के संग्रह में संवत् 1866 में लिखित वनदुर्गा महात्म्य की एक दुर्लभ पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इसके साथ ही तत्कालीन सरगुजा महाराज को संबोधित भूमि संबंधी एक आवेदन पत्र भी मिला, जो स्वतंत्रता पूर्व काल का बताया गया है। डॉ. पाठक ने जानकारी दी कि यह पत्र उनके पूर्वजों द्वारा लिखा गया था और वर्षों से सुरक्षित रखा गया है।अम्बिकापुर नगर में वनदुर्गा पर आधारित कई महत्वपूर्ण पाण्डुलिपियां पूर्व में भी प्राप्त हो चुकी हैं, जो क्षेत्र की समृद्ध धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती हैं। पाण्डुलिपियों का अवलोकन करते हुए नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप ने कहा कि यह अभियान हमारी प्राचीन ज्ञान-संपदा को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है। इससे वर्तमान और भावी पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों और ऐतिहासिक धरोहरों को समझने का अवसर मिलेगा। सर्वेक्षण के दौरान संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल एवं जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र उपस्थित रहे। श्रीमती अग्रवाल ने स्वयं पाण्डुलिपियों के डिजिटल अपलोड की प्रक्रिया में सहभागिता निभाई। इसी क्रम में बाबूपारा निवासी वरिष्ठ अधिवक्ता श्री वेणुधर सिंह के पास महामाया विजयोत्सव वंदना नामक एक महत्वपूर्ण पाण्डुलिपि प्राप्त हुई। इस पाण्डुलिपि में महाराज रघुनाथ शरण सिंह देव तथा महाराज रामानुज शरण सिंह देव बहादुर की विरुदावली का उल्लेख मिलता है। हालांकि इसके लेखक और लेखन काल का स्पष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है।अपलोडिंग प्रक्रिया के दौरान जिला समिति सदस्य श्रीश मिश्र ने बताया कि राष्ट्रीय पाण्डुलिपि सर्वेक्षण अभियान के तहत देशभर में अब तक एक करोड़ आठ लाख से अधिक पाण्डुलिपियों का जियो-टैगिंग और दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। वहीं सरगुजा जिले में 13 संरक्षकों के पास सुरक्षित 46 पाण्डुलिपियों को ज्ञानभारतम पोर्टल पर सफलतापूर्वक अपलोड किया गया है। सर्वेयर श्री गौरव पाठक द्वारा नगर निगम आयुक्त श्री डी.एन. कश्यप एवं संयुक्त कलेक्टर श्रीमती शारदा अग्रवाल की उपस्थिति में पाण्डुलिपियों के डिजिटलीकरण और अपलोडिंग का कार्य संपन्न कराया गया। यह अभियान देश की अमूल्य सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और बौद्धिक धरोहर के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में सामने आया है।
- -नवीन तहसील एवं अनुविभागीय कार्यालय भवनों से नागरिकों को मिल रही बेहतर राजस्व सेवाएंरायपुर। कोरबा जिले में राजस्व प्रशासन को अधिक सक्षम एवं जनोन्मुख बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत नवीन तहसील एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवनों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल, कोरबा द्वारा निर्मित इन आधुनिक भवनों में अधिकांश स्थानों पर नियमित कार्यालयीन कार्य प्रारंभ हो चुके हैं, जिससे प्रशासनिक सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। पर्यावरण एवं अधोसंरचना मद के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2023-24 में कोरबा जिले के लिए 5 नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा 1 अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन के निर्माण हेतु कुल 4 करोड़ 3 लाख 63 हजार रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई थी। इस स्वीकृति के अंतर्गत भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान एवं अजगरबहार में नवीन तहसील कार्यालय भवन तथा पाली में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय भवन का निर्माण कराया गया है।वर्तमान में भैंसमा, बरपाली, दीपका, पसान तथा पाली स्थित नवीन भवनों में नियमित रूप से कार्यालयीन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इन भवनों के उपयोग में आने से अधिकारियों एवं कर्मचारियों को बेहतर कार्य वातावरण प्राप्त हुआ है, वहीं आम नागरिकों को राजस्व संबंधी सेवाएं अधिक व्यवस्थित, सुगम और सुविधाजनक रूप से उपलब्ध हो रही हैं। अजगरबहार तहसील कार्यालय भवन का निर्माण कार्य भी पूर्ण हो चुका है। वर्तमान में विद्युत कनेक्शन से संबंधित औपचारिकताएं प्रक्रियाधीन हैं। विद्युत लाइन जोड़ने एवं भवन हस्तांतरण की प्रक्रिया पूर्ण होते ही वहां भी कार्यालयीन कार्य प्रारंभ कर दिए जाएंगे, जिससे क्षेत्रवासियों को स्थानीय स्तर पर राजस्व सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल द्वारा निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण निर्माण कार्य संपादित कर प्रशासनिक अधोसंरचना के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया गया है। नवीन कार्यालय भवनों के संचालन से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूती मिली है तथा शासकीय सेवाओं की दक्षता एवं प्रभावशीलता में वृद्धि हुई है। साथ ही नागरिकों को उनके निकटतम क्षेत्र में राजस्व सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है।
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-समय पर पहचान और बेहतर रेफरल व्यवस्था से रोगियों को मिलेंगी अधिक समग्र स्वास्थ्य सेवाएं
रायपुर । स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा PATH एवं The Bristol Myers Squibb Foundation के सहयोग से टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं के एकीकरण विषय पर राज्य स्तरीय बैठक का आयोजन रायपुर में किया गया। बैठक का उद्देश्य टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध जांच एवं निदान तंत्र का प्रभावी उपयोग करते हुए फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान एवं देखभाल सेवाओं को सुदृढ़ बनाने की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करना था।बैठक में राज्य क्षय अधिकारी एवं उप संचालक (एनसीडी) डॉ. संजीव मेश्राम तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, रायपुर डॉ. मिथलेश चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय रायपुर एवं बिलासपुर के प्रतिनिधियों, जिला स्वास्थ्य अधिकारियों तथा टीबी एवं गैर-संचारी रोग ( NCD ) के क्षेत्र में कार्यरत विभिन्न विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।बैठक के दौरान PATH के उप निदेशक डॉ. अजय पाटले ने टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के आकलन से प्राप्त प्रमुख निष्कर्षों को प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि टीबी कार्यक्रम के अंतर्गत उपलब्ध स्क्रीनिंग एवं डायग्नोस्टिक व्यवस्थाओं का उपयोग फेफड़ों के कैंसर की शीघ्र पहचान को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।अपने संबोधन में डॉ. संजीव मेश्राम ने समय पर जांच, शीघ्र पहचान एवं प्रभावी रेफरल व्यवस्था के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों और कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच सेवाओं का एकीकरण किया जा सकता है, जिससे रोगियों को अधिक समग्र, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।बैठक के दौरान प्रतिभागियों ने विभिन्न सुझाव एवं अनुशंसाएं साझा कीं। इन सुझावों के आधार पर छत्तीसगढ़ में टीबी एवं फेफड़ों के कैंसर की प्रारंभिक जांच एवं देखभाल सेवाओं के एकीकृत मॉडल को विकसित करने की दिशा में आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से दोनों रोगों की समय पर पहचान, बेहतर उपचार प्रबंधन तथा रोगियों के स्वास्थ्य परिणामों में उल्लेखनीय सुधार संभव होगा। - -मक्का उत्पादन, जैविक खाद और आधुनिक तकनीकों का समन्वय बन रहा सफलता की नई पहचानरायपुर ।छत्तीसगढ़ में कृषि को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के लिए किसान अब फसल विविधीकरण, जैविक पोषण प्रबंधन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपना रहे हैं। राज्य शासन और कृषि विभाग द्वारा प्रोत्साहित वैज्ञानिक खेती की पद्धतियां किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन और अधिक आय अर्जित करने का अवसर प्रदान कर रही हैं। इसके सकारात्मक परिणाम प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में देखने को मिल रहे हैं। सरगुजा जिले के ग्राम सरगांवा के प्रगतिशील किसान श्री बिराज विश्वास ने फसल विविधीकरण और नैनो उर्वरकों के उपयोग के माध्यम से खेती में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। उन्होंने पारंपरिक खेती की पद्धति में बदलाव करते हुए पिछले चार वर्षों से धान के स्थान पर मक्का उत्पादन को अपनाया है। आधुनिक कृषि तकनीकों के उपयोग से वे अपनी कृषि भूमि में वर्षभर उत्पादन लेकर बेहतर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे हैं।श्री बिराज विश्वास का मानना है कि फसल विविधीकरण किसानों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। मक्का उत्पादन के साथ-साथ वे सब्जी खेती भी कर रहे हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। आधुनिक कृषि यंत्रों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक खेती की पद्धतियों के उपयोग से उत्पादन लागत में कमी आई है तथा उत्पादकता में वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि भूमि की उर्वरता बनाए रखने के लिए वे जैविक खादों का अधिक उपयोग करते हैं। गोबर खाद एवं अन्य जैविक स्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों का प्रयोग फसलों को आवश्यक पोषण उपलब्ध कराने में सहायक सिद्ध हो रहा है। नैनो उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्व सीधे पौधों तक पहुंचते हैं, जिससे उनकी उपयोग दक्षता बढ़ती है और फसलों को बेहतर वृद्धि के लिए आवश्यक पोषण प्राप्त होता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नैनो उर्वरक खेती की लागत कम करने, पोषक तत्वों के प्रभावी उपयोग को बढ़ाने तथा पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वहीं फसल विविधीकरण किसानों को बाजार आधारित उत्पादन और जोखिम प्रबंधन के बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण, जैविक खेती तथा नैनो उर्वरकों के उपयोग के लिए निरंतर प्रोत्साहित किया जा रहा है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से किसानों को नई तकनीकों से जोड़ा जा रहा है, जिससे कृषि क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिल रहा है। श्री बिराज विश्वास जैसे प्रगतिशील किसानों की सफलता यह दर्शाती है कि वैज्ञानिक खेती, नवाचार और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और भविष्य उन्मुख बनाया जा सकता है। उनकी पहल आज अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।
- रायपुर ।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की सरकार द्वारा जनता की समस्याओं के त्वरित और संवेदनशील निराकरण के लिए शुरू किया गया ‘सुशासन तिहार’ कइयों की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण लेकर आ रहा है। ऐसा ही एक मानवीय और प्रेरक उदाहरण सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले से सामने आया है, जहाँ जिला प्रशासन की तत्परता से बरमकेला ब्लॉक के ग्राम पंचायत लिमपाली निवासी संतराम चौहान के जीवन की एक बड़ी बाधा दूर हो गई है। संतराम चौहान पिछले कई वर्षों से पैरालिसिस (लकवा) जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित होने के कारण उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं था। विडंबना यह थी कि आधार कार्ड अपडेट न होने की वजह से वे पिछले चार सालों से विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित थे। शारीरिक अक्षमता के कारण उनका आधार केंद्र तक पहुँच पाना पूरी तरह असंभव था।संतराम के परिवार के लिए ग्राम झाल में आयोजित श्सुशासन तिहारश् एक वरदान साबित हुआ। परिवार ने शिविर में अपनी इस लाचारी को साझा करते हुए आवेदन प्रस्तुत किया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सारंगढ़-बिलाईगढ़ की कलेक्टर ने तत्काल कड़े निर्देश जारी किए। कलेक्टर के निर्देश पर ई-गवर्नेंस की टीम बिना किसी देरी के आवश्यक बायोमेट्रिक उपकरणों और पूरे सेटअप के साथ सीधे संतराम चौहान के घर पहुँच गई।संतराम के घर पहुँचे ई-गवर्नेंस टीम के सदस्य अगस्ती भोई ने बताया कि यह कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण था। पैरालिसिस के गंभीर असर के कारण संतराम के फिंगरप्रिंट और आँखों के स्कैन (डेमोग्राफिक व बायोमेट्रिक अपडेट) लेने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई प्रयासों के बाद अंततः टीम को सफलता मिली। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्र में नेटवर्क की कमी ने भी परीक्षा ली, लेकिन टीम की प्रतिबद्धता के आगे हर बाधा छोटी साबित हुई।जिला प्रशासन ने इस मौके पर अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि राज्य सरकार के मंशानुरूप बुजुर्गों, दिव्यांगों और शारीरिक रूप से अक्षम नागरिकों के लिए श्घर पहुँच सेवाश् सुनिश्चित की जा रही है, ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी उसका हक मिल सके। अब आधार अपडेट होने से संतराम चौहान के लिए शासकीय योजनाओं के द्वार खुल गए हैं। इस संवेदनशील पहल के लिए संतराम के परिवार ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का सहृदय आभार व्यक्त किया है।
- -बस्तर में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में 17 जोड़े बंधे परिणय सूत्र में-टाऊन हाल में आयोजित कार्यक्रम में विधायक किरण सिंह देव ने नव विवाहितों को दिया आशीर्वादरायपुर ।मुख्यमंत्री कन्या विवाह' राज्य सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक कल्याणकारी योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य गरीब, निराश्रित, और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों की शादी के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना है। यह योजना मुख्य रूप से सामूहिक विवाह के माध्यम से सम्पन्न होती है, जिससे गरीब परिवारों पर विवाह का भारी आर्थिक बोझ कम हो सके और फिजूलखर्ची पर रोक लगे।जगदलपुर स्थित पंडित श्यामा प्रसाद मुखर्जी सभागार (टाउन हॉल) में सोमवार को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत एक भव्य और गरिमामय सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन किया गया। इस पावन अवसर पर मंत्रोच्चार और शहनाई की गूंज के बीच कुल 17 जोड़े सदा-सदा के लिए एक-दूसरे के साथ दाम्पत्य सूत्र में बंध गए। समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने नवविवाहित जोड़ों के ऊपर अक्षत और पुष्प वर्षा कर उन्हें सुखी और समृद्ध दांपत्य जीवन का आशीर्वाद दिया।इस विवाह समारोह की सबसे अनूठी और गौरवशाली विशेषता यह रही कि इसमें पुनर्वासित 2 विशेष जोड़े भी शामिल हुए। नारायणपुर जिले में आत्मसमर्पण करने वाले इन पूर्व नक्सली दंपत्तियों में पिलसाय सलाम संग सिरबत्ती और पतिराम संग मनाय कश्यप शामिल हैं, जिन्होंने गृहस्थ जीवन अपनाकर समाज की मुख्यधारा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया। विधायक श्री किरण सिंह देव ने इन जोड़ों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के तहत ऐसे कदमों से बस्तर में शांति और खुशहाली के एक नए युग की शुरुआत हो रही है।विवाह समारोह को संबोधित करते हुए जगदलपुर विधायक श्री किरण सिंह देव ने मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की महत्ता पर प्रकाश डाला और कहा कि बेटियो का विवाह सबसे महत्वपूर्ण कार्य होता है। हमारी संवेदनशील सरकार के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं महिला बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी रजवाड़े जी के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में सामूहिक कन्या विवाह योजना के तहत विवाह हो रहा है। इस योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों की बेटियों का सम्मानपूर्ण विवाह कराना समाज का सबसे पुनीत कार्य है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलती है।विधायक श्री देव ने कहा कि आज विवाह के बंधन में बंधे सभी 17 जोड़े एक सशक्त समाज और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण में अपनी सहभागिता देंगे। इसके साथ ही यह योजना गरीब बेटियों के विवाह में होने वाले आर्थिक बोझ को कम कर समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने कहा कि विगत दिनों प्रदेश के विधायक बेमेतरा ने मुख्यमंत्री सामूहिक कन्या विवाह योजना में विवाह कर सभी को इस योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरणा दी।इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूपसिंह मंडावी, नगर निगम सभापति श्री खेमसिंह देवांगन, जनपद अध्यक्ष श्री पदलाम नाग, उपाध्यक्ष श्री पुरुषोत्तम कश्यप, पुलिस अधीक्षक श्री शलभ सिन्हा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, नवविवाहित जोड़ों के परिजन तथा बड़ी संख्या में प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने वर-वधू को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
- - बस्तर संभाग सहित 10 जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों में 16.20 लाख लोगों की होगी जांच, 2063 सर्वे दल पहुंचेंगे घर-घररायपुर ।कभी मलेरिया के सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में गिने जाने वाले बस्तर अंचल की तस्वीर अब तेजी से बदल रही है। जिन गांवों में एक समय बरसात का मौसम आते ही मलेरिया का खतरा बढ़ जाता था, वहां अब लगातार चल रहे स्वास्थ्य अभियानों के कारण संक्रमण दर में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की जा रही है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ सरकार एक बार फिर व्यापक तैयारी के साथ ‘मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के 14वें चरण की शुरुआत 15 जून से की गई । इस अभियान के माध्यम से न केवल संभावित संक्रमित व्यक्तियों की पहचान की जाएगी, बल्कि मलेरिया उन्मूलन की दिशा में अब तक मिली सफलता को और आगे बढ़ाने का प्रयास भी किया जाएगा।राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित यह अभियान इस बार बस्तर संभाग के सातों जिलों-बस्तर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव के साथ-साथ गरियाबंद, कबीरधाम तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के संवेदनशील ग्रामों में संचालित किया जा रहा है । अभियान के तहत राज्य के 36 विकासखंडों के 697 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 2476 गांवों में व्यापक सर्वेक्षण किया जाएगा तथा लगभग 16.20 लाख लोगों की मलेरिया जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।दरअसल, छत्तीसगढ़ ने पिछले एक दशक में मलेरिया नियंत्रण के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्ष 2015 में बस्तर संभाग का वार्षिक परजीवी सूचकांक (एपीआई) 27.40 था, जो वर्ष 2025 में घटकर 6.98 पर पहुंच गया है। इसी अवधि में राज्य का एपीआई 5.21 से घटकर 0.90 हो गया है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2025 में मलेरिया के कुल प्रकरणों में 80.09 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। यह उपलब्धि निरंतर चलाए गए चरणबद्ध अभियानों, घर-घर पहुंचकर जांच करने की रणनीति और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के प्रयासों का परिणाम मानी जा रही है।जनवरी 2026 में संचालित अभियान के 13वें चरण के परिणाम भी उत्साहजनक रहे हैं। उस चरण में मलेरिया धनात्मकता दर 4.60 प्रतिशत से घटकर मात्र 0.48 प्रतिशत रह गई। विशेषज्ञों के अनुसार यह कमी इस बात का संकेत है कि समुदाय आधारित निगरानी और सक्रिय रोगी खोज की रणनीति प्रभावी रूप से काम कर रही है।अभियान के 14वें चरण को सफल बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक स्तर पर तैयारी की है। कुल 2063 सर्वे दलों का गठन किया गया है, जो गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर बुखार से पीड़ित व्यक्तियों की पहचान करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर त्वरित जांच किट के माध्यम से मलेरिया की जांच की जाएगी और संक्रमित पाए जाने वाले व्यक्तियों को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही लोगों को मलेरिया से बचाव, मच्छर नियंत्रण तथा समय पर जांच और उपचार के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।इस बार अभियान में बच्चों और किशोरों की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। इसके लिए 4420 स्कूलों, 346 छात्रावासों, 591 आश्रमों, 77 पोटाकेबिनों तथा 334 अर्धसैनिक बल शिविरों में अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। इन संस्थानों में रहने वाले विद्यार्थियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की जांच कर संक्रमण की प्रारंभिक अवस्था में ही पहचान सुनिश्चित की जाएगी, ताकि बीमारी के प्रसार को रोका जा सके। मलेरिया के खिलाफ लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समुदाय की सक्रिय भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि अभियान के दौरान सर्वे दलों को स्थानीय स्तर पर जनसहयोग प्राप्त हो, इसके लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि यदि सर्वे दल उनके गांव या घर पहुंचे तो वे जांच में सहयोग करें तथा बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द या कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं।
- रायपुर। मानसून के आगमन और वन्यजीवों के प्रजनन काल को देखते हुए, हर साल की तरह इस वर्ष भी देश के अधिकांश टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यानों और अभयारण्यों में जंगल सफारी 15 जून से 1 अक्टूबर तक साढ़े 3 महीने के लिए पर्यटकों के लिए बंद कर दी गई है । पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख अरुण पांडेय ने बताया, हर साल मानसून के पहले टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान और अभ्यारण्यों को बंद कर दिया जाता है।छत्तीसगढ़ में प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा तथा उनके प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। प्रदेश के सभी टाइगर रिजर्व, राष्ट्रीय उद्यान (नेशनल पार्क) और वन्यजीव अभयारण्यों को आज (15 जून) से पर्यटकों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है। मानसून के आगमन के साथ ही जंगलों में पर्यटन गतिविधियों पर यह अस्थायी रोक आगामी 1 अक्टूबर 2026 तक प्रभावी रहेगी। इसके बाद वन्यप्राणी सप्ताह के अवसर पर 2 अक्टूबर 2026 से जंगल सफारी और अन्य पर्यटन गतिविधियां दोबारा शुरू की जाएंगी।वन विभाग के आला अधिकारियों के अनुसार, इस रोक के पीछे दो मुख्य कारण हैं। वर्षा ऋतु के दौरान जंगलों के भीतर स्थित कच्चे मार्ग और सफारी ट्रैक बुरी तरह प्रभावित हो जाते हैं। लगातार बारिश से नदी-नालों में उफान और रास्तों में जलभराव के कारण आवागमन बेहद कठिन और जोखिम भरा हो जाता है। मानसून का समय वन्यप्राणियों के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। यह अवधि अधिकांश वन्य प्रजातियों के प्रजनन और उनके शावकों के पालन-पोषण का समय होती है। इस दौरान इंसानी दखल को रोककर वन्यजीवों को एक शांत और प्राकृतिक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है।अगले साढ़े तीन महीनों के लिए प्रदेश के इन प्रमुख संरक्षित वन क्षेत्रों में पर्यटकों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा, जिनमें अचानकमार टाइगर रिजर्व, उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व, बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, प्रदेश के अन्य सभी अधिसूचित अभयारण्य और संरक्षित वन क्षेत्र शामिल हैं।पर्यटकों के लिए प्रवेश बंद रहने के दौरान वन विभाग शांत बैठेने के बजाय जंगलों के भीतर कई महत्वपूर्ण कार्य संपादित करेगा। अवैध शिकार को रोकने के लिए गश्त तेज की जाएगी और वन्यजीवों की क्लोज मॉनिटरिंग होगी। जंगलों के भीतर प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण और संवर्धन किया जाएगा। आगामी पर्यटन सत्र को ध्यान में रखते हुए सफारी मार्गों, ट्रैकों और रिसॉर्ट्स की मरम्मत व रखरखाव किया जाएगा, ताकि 2 अक्टूबर से पर्यटकों को बेहतर और सुरक्षित अनुभव मिल सके।वन विभाग का कहना है कि वन्यजीव संरक्षण हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता है। हर साल हजारों पर्यटक छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व और राष्ट्रीय उद्यानों का भ्रमण करते हैं, लेकिन मानसून ब्रेक इस अनुभव को सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम पर्यावरण संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और सतत पर्यटन विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के लिए भले ही यह कुछ महीनों का इंतजार है, लेकिन पारिस्थितिकी संतुलन और वन्यजीव संरक्षण के दृष्टिकोण से मानसून का यह ग्रीन ब्रेक बेहद जरूरी और सराहनीय कदम माना जा रहा है। आगामी 2 अक्टूबर से छत्तीसगढ़ के जंगल एक बार फिर नए रोमांच के साथ सैलानियों के स्वागत के लिए तैयार होंगे।
- -नया राशन कार्ड मिलने से उमरगांव के मांझी परिवार को मिली बड़ी राहत-मुख्यमंत्री और प्रशासन का जताया आभाररायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा ग्रामीण अंचलों में चलाया जा रहा “सुशासन तिहार 2026” अभियान आम जनता के लिए संकटमोचक साबित हो रहा है। विकास की मुख्यधारा से दूर बैठे ग्रामीणों की समस्याओं का मौके पर ही निपटारा कर यह अभियान उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेर रहा है। ऐसी ही एक सुखद कहानी सामने आई है ग्राम उमरगांव से जहां के निवासी श्री रामचंद मांझी के लिए यह अभियान एक नई सुबह लेकर आया।नारायणपुर जिले के उमरगांव के रामचंद मांझी लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण परेशान थे। राशन कार्ड के अभाव में उनका परिवार शासन की जनकल्याणकारी खाद्यान्न योजनाओं के लाभ से वंचित था। उन्होंने कई बार प्रयास किए, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक उलझनों के कारण उनकी समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा था। श्री रामचंद मांझी ने कहा कि लंबे समय से राशन कार्ड न होने के कारण परिवार के भरण-पोषण में दिक्कत आ रही थी। शासकीय खाद्यान्न योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा था, लेकिन सुशासन तिहार ने हमारी चिंता को हमेशा के लिए दूर कर दिया।गौरदंड में आयोजित सुशासन तिहार समाधान शिविर रामचंद के लिए उम्मीद की नई किरण बना। उन्होंने शिविर में मौजूद अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रखी। जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और शिविर की त्वरित कार्यप्रणाली के चलते, मौके पर ही उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर नया राशन कार्ड जारी कर दिया गया।नया राशन कार्ड हाथ में आते ही रामचंद के चेहरे की चिंता खुशी में बदल गई। अब उनके परिवार को हर महीने शासकीय उचित मूल्य की दुकान से नियमित और किफायती खाद्यान्न प्राप्त हो सकेगा। इससे न केवल उनके परिवार की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हुई है, बल्कि उनके घर की आर्थिक स्थिति को भी एक बड़ा सहारा मिला है। रामचंद मांझी ने इस त्वरित और पारदर्शी व्यवस्था के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि शासन की यह जमीनी पहल हम जैसे गरीब ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रही है।उमरगांव के रामचंद मांझी की यह कहानी महज एक उदाहरण है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने में आयोजित हो रहे समाधान शिविरों में रोज ऐसी कई कहानियां आकार ले रही हैं। आवेदनों पर बिना किसी देरी के स्थल पर ही कार्रवाई की गई, ग्रामीणों को दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति और अंतिम छोर के व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं की सीधी पहुंच सुशासन तिहार 2026 के माध्यम से साय सरकार का यह संकल्प अब हकीकत में बदल रहा है, जहां हर गांव खुशहाल हो रहा है और हर नागरिक का हक सुरक्षित हो रहा है।
- -हरी खाद के रूप में डेंचा और मूंग के बीजों का पर्याप्त स्टॉक उपलब्धरायपुर । छत्तीसगढ़ शासन के कृषि विभाग द्वारा खरीफ वर्ष 2026 के लिए राज्य की सभी सहकारी समितियों में उन्नत बीजों का पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है। भारत सरकार और राज्य सरकार के निर्देशों के तहत किसानों को उत्तम क्वालिटी के बीज सही समय पर मुहैया कराए जा रहे हैं। इसके लिए छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम के प्रक्रिया केंद्रों से लगातार बीजों की सप्लाई की जा रही है।इस साल किसानों के लिए पिछले वर्ष की तुलना में अधिक मात्रा में बीज उपलब्ध कराए गए हैं। पिछले साल (खरीफ 2025) में इस समय तक जहां 4.01 लाख क्विंटल बीज का भंडारण हुआ था, वहीं इस साल (खरीफ 2026) में अब तक रिकॉर्ड 4.03 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का भंडारण पूरा हो चुका है। सहकारी समितियों के अलावा, बीज प्रक्रिया केंद्रों में अलग से बफर स्टॉक भी रखा गया है, ताकि किसान वहां से सीधे भी बीज खरीद सकें। धान के उन्नत बीजों के साथ-साथ इस बार खेतों की सेहत सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसके लिए समितियों में 5,945 देंचा और 5,946 क्विंटलमूंग , हरी खाद के रूप में 'ढेंचा' और मूंग' के बीजों का भंडारण किया गया है, जिसका उठाव किसानों ने शुरू कर दिया है। हरी खाद कम खर्च में मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ाने का सबसे बढ़िया प्राकृतिक तरीका है। इससे यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे रासायनिक खादों पर होने वाला खर्च कम हो जाता है।कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, हरी खाद का पूरा फायदा लेने के लिए सबसे पहले खेतों में ढेंचा या मूंग के बीजों की बुवाई करें। इसके बाद फसल को 45 से 60 दिनों तक (फूल आने से पहले) बढ़ने दें। फिर ट्रैक्टर या हल चलाकर इस खड़ी फसल को मिट्टी में अच्छी तरह पलटकर मिला दें और हल्की सिंचाई कर दें। इस प्रक्रिया के 2 से 3 सप्ताह बाद जब यह खाद मिट्टी में गल जाए, तब धान, मक्का, गेहूं या गन्ना जैसी मुख्य फसलों की बुवाई करें।गौरतलब है कि कृषि विभाग द्वारा इस पूरी वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी की जा रही है ताकि किसानों को खेती के समय कोई परेशानी न हो।
- -कृषि विज्ञान केन्द्र सुरगी में जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन आयोजित-प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, नवाचार एवं उत्पादन क्षमता बढ़ाने में सुरगी मॉडल बना प्रदेश में मिसाल-सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य शीघ्र होगा पूर्णरायपुर। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह सोमवार को राजनांदगांव जिला के कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी में आयोजित जैविक कृषि कार्यशाला सह कृषक सम्मेलन में शामिल हुए। इस अवसर पर उनका खुमरी पहनाकर आत्मीय स्वागत किया गया। विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यक्रम स्थल पर लगाए गए विभिन्न कृषि एवं जैविक उत्पादों के स्टॉलों का अवलोकन किया तथा उत्कृष्ट कार्य करने वाले कृषकों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में किसानों के हित में अनेक ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में यूरिया की बाजार कीमत लगभग 2,220 रुपए प्रति क्विंटल है, किंतु केंद्र सरकार की सब्सिडी नीति के कारण किसानों को यह मात्र 266 रुपए में उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आज रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं। ऐसे में किसानों को जैविक एवं प्राकृतिक खेती की दिशा में आगे बढ़ते हुए गोबर खाद एवं जैविक खाद का अधिकाधिक उपयोग करना चाहिए।डॉ. रमन सिंह ने कहा कि राजनांदगांव जिले में कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित कृषि विज्ञान केन्द्र, सुरगी आज प्रदेश ही नहीं बल्कि देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। यहां छह राज्यों के विद्यार्थी अध्ययन एवं अनुसंधान के लिए आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सुरगी उनका गोद ग्राम है, जहां निरंतर विकास कार्य संचालित किए जा रहे हैं। सुरगी-खरखरा डायवर्सन नहर लाईनिंग का 19 करोड़ रुपए का कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण हो चुका है। वहीं शिवनाथ डायवर्सन से जुड़ी मुख्य नहर एवं लघु नहरों का कार्य लगभग 27 करोड़ रुपए की लागत से कराया जा रहा है, जिसका 90 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।उन्होंने बताया कि सुरगी सौर चलित सिंचाई परियोजना, कृषि महाविद्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, हाई स्कूल, विद्युत उपकेन्द्र, शौचालय उन्नयन तथा विभिन्न अधोसंरचनात्मक कार्यों सहित ग्राम पंचायत सुरगी में करोड़ों रुपए के विकास कार्य संपादित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्नत खेती, नवाचार, उत्पादन क्षमता वृद्धि, कम लागत में बेहतर उत्पादन तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग के कारण सुरगी मॉडल प्रदेशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। कृषि विज्ञान केन्द्र द्वारा ड्रोन एवं आधुनिक मशीनों के माध्यम से कृषि कार्यों को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को नई तकनीकों का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कृषकों से कार्यशाला में प्राप्त ज्ञान एवं तकनीकों को अपने खेतों में लागू करने का आह्वान किया।सांसद श्री संतोष पाण्डेय ने कहा कि प्राकृतिक खेती वर्तमान समय की आवश्यकता है। रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए गोबर, गौमूत्र से निर्मित जीवामृत एवं नीमास्त्र के उपयोग के लाभ बताए। उन्होंने कहा कि जैविक उत्पादों की बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में जिले में लगभग 550 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती की जा रही है, जिसका प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है। उन्होंने ग्राम भर्रेगांव की महिला स्व-सहायता समूह द्वारा प्राकृतिक उत्पाद निर्माण एवं विपणन के कार्य की सराहना की।समाजसेवी श्री कोमल सिंह राजपूत ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकास, विश्वास एवं जनकल्याण की भावना के साथ कार्य किए जा रहे हैं। कृषि प्रधान क्षेत्र सुरगी में कृषि विज्ञान केन्द्र की स्थापना से किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों का लाभ मिल रहा है।कलेक्टर श्री जितेन्द्र यादव ने बताया कि खरीफ वर्ष 2025 में धान विक्रय करने वाले 1 लाख 24 हजार 101 किसानों को कृषक उन्नयन योजना के तहत 1,484 करोड़ रुपए की राशि उनके खातों में अंतरित की गई। किसानों को 454.12 करोड़ रुपए की अंतर राशि का भुगतान भी किया गया। उन्होंने बताया कि खरीफ 2026 में धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, लघुधान्य एवं कपास की खेती करने वाले कृषकों को 15 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है, जो पूर्व में 11 हजार रुपए प्रति एकड़ थी। इसके अतिरिक्त सभी प्रकार की खरीफ फसलों पर 10 हजार रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है।कलेक्टर ने बताया कि जिले के किसानों ने रबी वर्ष 2025-26 में लगभग 70 प्रतिशत क्षेत्र में फसल चक्र परिवर्तन करते हुए मक्का, चना, मसूर एवं सरसों जैसी फसलों की खेती कर 19 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की उपज का विक्रय कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है। पीएम-आशा योजना के तहत जिले में पहली बार दलहन एवं तिलहन फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी की गई, जिसके अंतर्गत 16,224 क्विंटल चना, मसूर एवं सरसों का उपार्जन कर किसानों को 9.37 करोड़ रुपए से अधिक का लाभ मिला। उन्होंने बताया कि पॉपकॉर्न कंपनी के साथ अनुबंध के माध्यम से किसानों से 5 करोड़ रुपए मूल्य का मक्का खरीदा गया है तथा भविष्य में सोयाबीन की खरीदी भी की जाएगी।उप संचालक कृषि श्री टीकम सिंह ठाकुर ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए जिले में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक एवं बीज उपलब्ध हैं। समितियों के माध्यम से 45,650 मीट्रिक टन उर्वरक वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 34,480 मीट्रिक टन उर्वरक का भंडारण तथा 26,183 मीट्रिक टन का वितरण किया जा चुका है। किसानों को समय पर कृषि ऋण, उन्नत बीज एवं उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में 43 नई सेवा सहकारी समितियों की स्थापना की गई है।कार्यक्रम में कृषक श्री एनेश्वर वर्मा एवं प्राकृतिक खेती से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य श्रीमती नीता साहू ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित राजनांदगांव के अध्यक्ष श्री सचिन बघेल, उपाध्यक्ष श्री भरत वर्मा, श्री संतोष अग्रवाल, कृषक प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में कृषक उपस्थित थे।
- -30 स्कूल बसों की जांच, चालक-परिचालकों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण-अनुपस्थित 45 स्कूल बस संचालकों को जारी किया गया नोटिसरायपुर / स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण एक सुरक्षा अभियान है, जिसे परिवहन विभाग, पुलिस और स्थानीय प्रशासन द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा संचालित वाहनों की फिटनेस जांचना और छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करना है।विद्यार्थियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गरियाबंद जिले में स्कूल बसों का विशेष निरीक्षण अभियान चलाया गया। यह अभियान माननीय सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के दिशा-निर्देशों तथा छत्तीसगढ़ राजपत्र में जारी अधिसूचना के अनुरूप संचालित किया गया। परिवहन विभाग, यातायात पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और जिला सेनानी कार्यालय की संयुक्त टीम ने 15 जून को जिले में संचालित स्कूल बसों का निरीक्षण कर सुरक्षा मानकों और परमिट संबंधी शर्तों की जांच की।प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले में पंजीकृत 75 स्कूल बसों में से 30 बसों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान बसों में निर्धारित सड़क सुरक्षा प्रोटोकॉल, आवश्यक उपकरणों तथा अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं का परीक्षण किया गया। परिवहन विभाग द्वारा प्रदूषण प्रमाण-पत्र, कर (टैक्स), बीमा, फिटनेस प्रमाण-पत्र और परमिट सहित सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच की गई, ताकि विद्यार्थियों के परिवहन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने स्कूल बस चालकों और परिचालकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि बच्चों को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराने वाले कर्मचारी शारीरिक रूप से स्वस्थ हों और अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें।जिला सेनानी कार्यालय द्वारा बसों में लगाए गए अग्निशमन यंत्रों की जांच की गई तथा चालक-परिचालकों को इनके उपयोग की जानकारी दी गई। साथ ही आपातकालीन परिस्थितियों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अपनाए जाने वाले आवश्यक उपायों के बारे में भी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।निरीक्षण के दौरान 45 स्कूल बसें उपस्थित नहीं मिलीं। इस पर संबंधित स्कूल बस संचालकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए नियमित निरीक्षण और आवश्यक कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।जिला प्रशासन ने कहा कि स्कूल बसों में सुरक्षा मानकों का पालन बच्चों की सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। संयुक्त निरीक्षण अभियान के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सभी स्कूल वाहन निर्धारित नियमों और सुरक्षा मानकों के अनुरूप संचालित हों, जिससे विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुगम परिवहन सुविधा मिल सके।
- -महावीर चौक फ्लाईओवर के नीचे 17 जून तक प्रदर्शित होंगी केंद्र सरकार की उपलब्धियां-सांसद संतोष पाण्डेय एवं महापौर मधुसूदन यादव ने किया उद्घाटन, एलईडी के माध्यम से भी दी जा रही योजनाओं की जानकारीरायपुर। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जनसंपर्क विभाग द्वारा 15 से 17 जून 2026 तक राजनांदगांव के महावीर चौक स्थित फ्लाईओवर के नीचे केंद्र सरकार की उपलब्धियों पर आधारित तीन दिवसीय फोटो प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। प्रदर्शनी का शुभारंभ सांसद श्री संतोष पाण्डेय एवं महापौर श्री मधुसूदन यादव ने किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभिन्न विकास कार्यों एवं जनकल्याणकारी योजनाओं से संबंधित प्रदर्शित जानकारी का निरीक्षण किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों एवं बड़ी संख्या में नागरिकों की उपस्थिति रही।फोटो प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी एवं जनहितकारी नेतृत्व में देश तथा छत्तीसगढ़ में हुए विकास कार्यों और शासन की योजनाओं के प्रभाव को आकर्षक चित्रों एवं जानकारी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। प्रदर्शनी में किसान कल्याण, गरीब कल्याण, अधोसंरचना विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल इंडिया, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास तथा सांस्कृतिक धरोहर संरक्षण जैसे विभिन्न विषयों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है।प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों के खातों में 4.3 लाख करोड़ रुपए की राशि अंतरण, किसानों को लागत से कम से कम डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की गारंटी, कृषि निर्यात में वृद्धि तथा लगभग 2 करोड़ किसानों एवं 3 लाख व्यापारियों के ई-नाम पोर्टल से जुड़ने संबंधी जानकारी प्रदर्शित की गई है। वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 4 करोड़ पक्के आवासों के निर्माण, सेमीकंडक्टर निर्माण, मुफ्त राशन योजना तथा 9 करोड़ लाभार्थियों के पोषण क्रय जैसे जनकल्याणकारी कार्यों को भी दर्शाया गया है।देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए किए गए प्रयासों को भी प्रदर्शनी में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देते हुए लगभग 38,400 करोड़ रुपए के रिकॉर्ड रक्षा निर्यात की जानकारी दी गई है। अधोसंरचना विकास के अंतर्गत विश्व के सबसे ऊंचे चिनाब रेलवे ब्रिज, समुद्र पर निर्मित अटल सेतु, राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क के 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक विस्तार तथा वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों की शुरुआत जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को प्रदर्शित किया गया है।प्रदर्शनी में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, डिजिटल अभियान, ‘3 करोड़ लखपति दीदी’ पहल, युवा शक्ति सशक्तिकरण तथा अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण सहित विभिन्न उपलब्धियों को भी दर्शाया गया है। साथ ही एलईडी स्क्रीन के माध्यम से शासन की योजनाओं एवं उपलब्धियों की जानकारी नागरिकों तक पहुंचाई जा रही है।जनसंपर्क विभाग द्वारा प्रदर्शनी स्थल पर आगंतुकों को जनमन पत्रिका एवं सुशासन के नवीन आयाम पुस्तक का भी वितरण किया जा रहा है। इस अवसर पर श्री दिनेश गांधी, श्री राजेश श्यामकर, श्री रघु शर्मा, श्री बलवंत साहू, श्री प्रखर श्रीवास्तव, श्री आशुतोष सिंह, श्री ईशान शर्मा, श्री अरविंद बैद, श्री हेतल भोजानी, श्री सज्जन सिंह ठाकुर, श्री सतीश यादव, श्री अश्विनी, श्री परमेश्वर लहरे, श्री मनोज साहू सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
- -मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ-हितग्राहियों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का मिला लाभरायपुर / वन एवं जलवायु परिवर्तन, सहकारिता, परिवहन एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा बीजापुर जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने जिले को 18 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दी। उन्होंने मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ करते हुए 16 करोड़ 58 लाख रुपये से अधिक लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा 2 करोड़ 9 लाख रुपये के विभिन्न निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों की जनकल्याणकारी योजनाओं के हितग्राहियों को सामग्री एवं प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।वन मंत्री श्री कश्यप ने स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि एवं अधोसंरचना विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें मिरतुर और बेदरे में ट्रांजिट हॉस्टल निर्माण, उसूर में वरिष्ठ कृषि अधिकारी भवन, आवापल्ली एवं कुटरू में शासकीय महाविद्यालय भवन, भैरमगढ़ महाविद्यालय में अतिरिक्त कक्ष निर्माण तथा दुगईगुड़ा से चिंताकोंटा तक सड़क एवं पुल-पुलिया निर्माण कार्य शामिल हैं। इन परियोजनाओं से शिक्षा, कृषि सेवाओं और आवागमन सुविधाओं को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को नई गति प्राप्त होगी।लोकार्पित कार्यों में जिला अस्पताल परिसर में रैन बसेरा, दाल-भात केंद्र, अत्याधुनिक अटल आरोग्य लैब, कार्यालय सह गोदाम भवन, विद्यालय भवन, पंचायत भवन, पुलिया निर्माण तथा शैक्षणिक संस्थानों में तार फेंसिंग जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। अटल आरोग्य लैब में अब 134 प्रकार की जांच सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी।कार्यक्रम के दौरान मलेरिया मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के 14वें चरण का शुभारंभ किया गया। अभियान के माध्यम से जिले में मलेरिया नियंत्रण, समय पर जांच और उपचार के लिए विशेष गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।कार्यक्रम में विभिन्न शासकीय योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। स्वामित्व योजना के अंतर्गत वनाधिकार पट्टों का वितरण किया गया। वहीं निष्क्षय योजना के तहत पोषण आहार फूड बॉक्स, पुनर्वासित परिवारों को आयुष्मान कार्ड, गर्भवती महिलाओं को जच्चा-बच्चा कार्ड तथा दिव्यांगजनों को बैटरी चालित ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि बीजापुर में अब विकास की नई धारा बह रही है। पहले जिन क्षेत्रों तक पहुंचना कठिन था, वहां आज सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाएं पहुंच रही हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार तथा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जनकल्याण और विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, महतारी वंदन योजना तथा तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए संचालित विभिन्न योजनाएं लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के सभी वर्गों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बीजापुर आने वाले वर्षों में विकास और समृद्धि की नई ऊंचाइयों को छुएगा।इस अवसर पर बस्तर सांसद श्री महेश कश्यप, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती गीता सोम पुजारी, कलेक्टर श्री विश्वदीप, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, डीएफओ डॉ. सागर यादव, जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्रीमती नम्रता चैबे सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
- रायपुर / वाणिज्य, उद्योग, श्रम, आबकारी व सार्वजनिक उपक्रम मंत्री श्री लखनलाल देवंागन एवं महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने आज नगर पालिक निगम कोरबा के पौने 37 करोड़ रूपये की लागत वाले जलप्रदाय योजना विस्तार कार्य का भूमिपूजन किया, इस कार्य के पूर्ण हो जाने के पश्चात निगम क्षेत्र की ऐसे बस्तियॉं जहॉं पानी की किल्लत थी, वह समस्या अब दूर होगी तथा समस्याजनित बस्तियों, पारों एवं मोहल्लों में पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा जिला खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से 36 करोड़ 73 लाख रूपये की लागत से जलप्रदाय योजना का विस्तार कार्य किया जाना हैं, इसके अंतर्गत 20 एमएलडी के जलउपचार संयंत्र के साथ-साथ इमलीडुग्गू में 12 लाख 60 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी, दादरखुर्द में 22 लाख 50 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी एवं रूमगरा में 10 लाख 80 हजार लीटर की क्षमता वाली पानी टंकी यानी उच्च स्तरीय जलागार का निर्माण किया जाएगा, वहीं 15.3 किलोमीटर पाईप लाईन भी बिछाई जाएगी। योजना के पूर्ण होने पर इमलीडुग्गू मोतीसागरपारा, भिलाईखुर्द, बरबसपुर, कर्रानाला, मानिकपुर, रूमगरा, ढेलवाडीह, खरमोरा, दादरखुर्द, बेलगिरी बस्ती में निवासरत नागरिकों को पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित किये जाने के साथ-साथ निचले स्तर पर स्थित बस्तियों जहॉं पर लो प्रेशर के फलस्वरूप पेयजल आपूर्ति बाधित हो रही थी, उन समस्त स्थानों में निर्वाध पेयजल की आपूर्ति हो सकेगी तथा नगर निगम कोरबा क्षेत्र की लगभग 60 हजार जनसंख्या इस कार्य से लाभान्वित होंगे। आज इमलीडुग्गू गौमाता चौक में आयोजित भूमिपूजन कायक्रम के दौरान इस महत्वपूर्ण विकास कार्य का भूमिपूजन उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवंागन व महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत के हाथों सम्पन्न किया गया।इस अवसर पर उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने हम सबको जिला खनिज न्यास मद के रूप में एक बड़ी सौगात दी है, जिसके परिणाम स्वरूप जिलों में अरबों रूपये के विकास कार्य इस मद के अंतर्गत हो रहे हैं, उन्होने कहा कि आज जिस महत्वपूर्ण पेयजल योजना विस्तार कार्य का शुभारंभ किया गया है, वह भी जिला खनिज न्यास मद से स्वीकृत हुआ है। उन्होने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी की सोच है कि हर व्यक्ति के पास पक्का मकान हों, हर घर में बिजली की सुविधा व शौचालय हों, हर घर तक पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित हों, और इन्ही सब का परिणाम है कि आज इस दिशा में व्यापक स्तर पर कार्य हो रहे हैं। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में प्रदेश में दर्जनों जनकल्याणकारी व गरीब हितैषी योजनाएं संचालित हो रही हैं, जिसके परिणाम स्वरूप लोगों का जीवन स्तर ऊपर उठ रहा है, उनकी समस्याएं दूर हो रही हैं।इस अवसर पर महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज इस महत्वपूर्ण कार्य का भूमिपूजन किया गया है, इस कार्य के पूर्ण हो जाने के पश्चात निगम क्षेत्र की ऐसी बस्तियों जहॉं पानी की किल्लत थी तथा पानी की कम आपूर्ति होती थी, वहांॅ पर पर्याप्त पानी की आपूर्ति हो सकेगी तथा पानी की किल्लत दूर होगी। महापौर श्रीमती राजपूत ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में देश व प्रदेश का चहुमुंखी विकास हो रहा है, वहीं कोरबा के विकास के लिये उपमुख्यमंत्री व नगरीय प्रशासन मंत्री श्री अरूण साव एवं उद्योग मंत्री श्री लखनलाल देवांगन का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त हो रहा है।इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष श्री गोपाल मोदी ने अपने उद्बोधन में कहा कि पेयजल योजना विस्तार का यह कार्य निगम की पेयजल व्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा तथा आमनागरिकों को पर्याप्त पानी मिल सकेगा। उन्होने कहा कि विगत 12 साल में केन्द्र सरकार के द्वारा देश व प्रदेश का तेजी से विकास किया गया है, 12 साल में लाखों किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं, 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आयें हैं तथा 50 करोड़ लोगों का आयुष्मान योजना में निःशुल्क इलाज हो रहा है।भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी केसाथ ही पार्षद अशोक चावलानी, नरेन्द्र देवांगन, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, फिरतराम साहू, उर्वशी राठौर, अजय गोंड़, सरोज शंाडिल्य, अजय कुमार चन्द्रा, पार्षद रूबीदेवी सागर, धनश्री साहू, युगल कैवर्त, सुनीता चौहान, सुलोचना यादव, राधा महंत, राकेश वर्मा, सीमा कंवर, उपेन्द्र पटेल, ईश्वर पटेल, प्रताप सिंह कंवर, जिला उपाध्यक्ष प्रफुल्ल तिवारी, महामंत्री अजय विश्वकर्मा, सुफलदास महंत, दिनेश शर्मा, सुकेश दलाल, विनय जायसवाल, प्रदीप मजूमदार, राकेश खरे, आत्माराम गंर्धव, रितू जायसवाल, नरेन्द्र पाटनवार, आकाश श्रीवास्तव, मनोज सिंह राजपूत, अनिल यादव आदि के साथ काफी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।
- -सामाजिक सुरक्षा एवं मुख्यमंत्री पेंशन योजनाओं से जरूरतमंदों को मिल रहा संबल-वृद्धजन, विधवा एवं दिव्यांग हितग्राहियों को लंबित पेंशन राशि का भी किया गया भुगतानरायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य में सामाजिक सुरक्षा और मुख्यमंत्री पेंशन योजनाएं वृद्धों, निराश्रित महिलाओं और दिव्यांगों के लिए एक मजबूत सहारा बनकर उभर रही हैं । मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सरकार द्वारा दी जा रही पेंशन से जरूरतमंदों को महंगाई के इस दौर में सम्मानजनक जीवन जीने की वास्तविक सुविधा मिल रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न सामाजिक सहायता एवं पेंशन योजनाओं के माध्यम से महासमुंद जिले के हजारों जरूरतमंद हितग्राहियों को नियमित आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। जिले में सामाजिक सुरक्षा पेंशन, सुखद सहारा योजना और मुख्यमंत्री पेंशन योजना के अंतर्गत कुल 53 हजार 561 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया गया है।महासमुंद जिले के उप संचालक समाज कल्याण श्रीमती संगीता सिंह ने बताया कि राज्य शासन द्वारा संचालित पेंशन योजनाओं के अंतर्गत सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के 24 हजार 253, सुखद सहारा योजना के 9 हजार 76 तथा मुख्यमंत्री पेंशन योजना के 20 हजार 232 हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है। इन योजनाओं के माध्यम से वृद्धजन, निराश्रित महिलाओं और अन्य पात्र हितग्राहियों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे उनके जीवनयापन में सहूलियत मिल रही है।समाज कल्याण विभाग के अनुसार, केंद्र सरकार द्वारा संचालित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन एवं इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजनाओं के हितग्राहियों को भी लंबित पेंशन राशि का भुगतान किया गया है।भारत सरकार द्वारा नवीन एसएनए-एस्पर्श प्रणाली लागू किए जाने के कारण पेंशन भुगतान में कुछ समय के लिए विलंब की स्थिति बनी थी। अब प्रक्रिया सुचारु होने के बाद पात्र हितग्राहियों को अप्रैल 2026 तक की पेंशन राशि जारी कर दी गई है। केंद्र प्रायोजित योजनाओं के अंतर्गत इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के 32 हजार 52, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना के 9 हजार 469 तथा इंदिरा गांधी राष्ट्रीय दिव्यांग पेंशन योजना के 945 हितग्राहियों को पेंशन राशि का भुगतान किया जा चुका है। सामाजिक सहायता योजनाएं समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। नियमित पेंशन भुगतान से वृद्धजन, विधवा महिलाओं और दिव्यांगजनों को सम्मानपूर्वक जीवनयापन में सहायता मिल रही है। शासन की इन योजनाओं से हजारों परिवारों को सामाजिक और आर्थिक संबल प्राप्त हो रहा है।
- -किसानों को जैविक खेती की उन्नत तकनीकों से जोड़ने कृषि कार्यशाला का सफल आयोजन-दंतेवाड़ा को जैविक कृषि का मॉडल जिला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहलरायपुर / किसानों और कृषि प्रेमियों को रासायनिक खादों व कीटनाशकों पर निर्भरता कम कर प्राकृतिक और टिकाऊ खेती करने के लिए प्रशिक्षित करने हेतु आयोजित की गई है। दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को उन्नत कृषि तकनीकों की जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय जैविक कृषि कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में बड़ी संख्या में किसानों, ग्रामीण युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा जिले में जैविक खेती की अपार संभावनाएं हैं। यहां की प्राकृतिक परिस्थितियां और किसानों की मेहनत जैविक कृषि के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करती हैं। उन्होंने कहा कि जैविक खेती केवल उत्पादन बढ़ाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से भी जुड़ी है। जैविक खेती अपनाकर किसान भूमि की उर्वरता बनाए रखने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित खाद्यान्न उत्पादन कर सकते हैं।वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को लाभकारी बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित कर रही है। वहीं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार भी किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण और कृषि विकास के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने किसानों से खेतों की मेड़ों पर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का आह्वान करते हुए कहा कि इससे भूमि संरक्षण, जल संवर्धन और पर्यावरण संतुलन को बढ़ावा मिलेगा।क्षेत्रीय विधायक श्री चौतराम अटामी ने कहा कि जिले के किसान जैविक एवं प्राकृतिक खेती को अपनाकर बेहतर उत्पादन और अधिक आय प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को वैज्ञानिक जानकारी, प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर खेती को अधिक उन्नत एवं लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।उन्होंने किसानों से कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा संचालित योजनाओं एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अधिकतम लाभ लेने की अपील की।कार्यशाला के दौरान कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने जैविक खेती, हरी खाद, जैव उर्वरक, वर्मी कम्पोस्ट, प्राकृतिक कीट एवं रोग प्रबंधन, मूल्य संवर्धन तथा जैविक उत्पादों के विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी किसानों को दी। किसानों की समस्याओं का समाधान भी विशेषज्ञों द्वारा किया गया।कार्यक्रम में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र, उद्यानिकी विभाग, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग तथा भूमगादी संस्था द्वारा स्टॉल लगाकर किसानों को विभिन्न योजनाओं, तकनीकों और कृषि नवाचारों की जानकारी दी गई। साथ ही कृषकों को कृषि आदान सामग्री एवं आम के पौधों का वितरण भी किया गया।कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र से जुड़ी महिला स्व-सहायता समूह की सदस्यों द्वारा रागी से तैयार केक का प्रदर्शन किया गया। मुख्य अतिथि ने केक काटकर महिला समूहों के प्रयासों की सराहना की और मूल्य संवर्धन आधारित गतिविधियों को ग्रामीण आजीविका का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। कार्यक्रम में जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुंजाम, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर सहित जनप्रतिनिधि, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न गांवों से आए किसान, ग्रामीण युवा और महिला स्व-सहायता समूहों की सदस्याएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
- -वन मंत्री केदार कश्यप ने किया विभिन्न जनहितकारी निर्माण कार्यों का लोकार्पणरायपुर, / दंतेवाड़ा जिले के नगरीय क्षेत्र में नागरिक सुविधाओं के विस्तार और आधारभूत अधोसंरचना को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए वन, परिवहन, सहकारिता एवं संसदीय कार्य मंत्री तथा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने 1 करोड़ 49 लाख 11 हजार रुपए की लागत से निर्मित विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण किया। लोकार्पित कार्यों में आधुनिक चौपाटी, व्यावसायिक गुमटियां, आकांक्षी शौचालय तथा नवीन आंगनबाड़ी भवन शामिल हैं। इन सुविधाओं से स्थानीय नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, स्वच्छता को बढ़ावा मिलेगा तथा महिला एवं बाल विकास गतिविधियों को नई गति प्राप्त होगी।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा एक प्रमुख धार्मिक नगरी के रूप में विकसित हो रहा है। आने वाले समय में यहां श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी। इसे ध्यान में रखते हुए उन्होंने जिला प्रशासन को दंतेवाड़ा नगर और मंदिर क्षेत्र के समग्र एवं सुनियोजित विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार करने के निर्देश दिए।वन मंत्री श्री कश्यप ने नगर के सीवरेज प्लांट से निकलने वाले पानी के सीधे नदी में प्रवाहित होने पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जल को उपचारित (ट्रीटमेंट) करने के बाद ही नदी में छोड़ा जाए अथवा आवश्यकतानुसार वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। उन्होंने भैरम बाबा मंदिर के समीप नदी तट पर हो रहे कटाव को रोकने के लिए जल संसाधन विभाग को शीघ्र पिचिंग कार्य की योजना तैयार करने के भी निर्देश दिए।नगरपालिका द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए मंत्री श्री कश्यप ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि नगर के प्रमुख चौक-चौराहों और मार्गों का नामकरण स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों एवं महापुरुषों के नाम पर किया जाएगा, जिससे नई पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। इसके अलावा दंतेवाड़ा शहर में एक आकर्षक घड़ी चौक (क्लॉक टॉवर) का निर्माण कराया जाएगा। बच्चों और युवाओं के मनोरंजन तथा खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए स्विमिंग पूल परिसर में वाटर स्लाइडर की सुविधा विकसित करने की भी घोषणा की गई। वन मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि राज्य सरकार दंतेवाड़ा को आधुनिक, स्वच्छ और सुविधायुक्त धार्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है। विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जनसुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस अवसर पर विधायक श्री चैतराम अटामी, राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती ओजस्वी मंडावी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, उपाध्यक्ष श्री अरविन्द कुंजाम, नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर, जनप्रतिनिधि सहित, कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव, डीएफओ श्री रामकृष्ण रांगानाथा वाय तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
- रायपुर / परिवहन विभाग मंत्रालय, नवा रायपुर, अटल नगर ने दो परिवहन अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अस्थाई रूप से स्थानांतरित किया है। संयुक्त सचिव परिवहन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार श्री मृत्युंजय पटेल क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी कार्यालय रायपुर को क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय दुर्ग, एवं श्री प्रतीक शुक्ला सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी, क्षेत्रीय परिवहन आयुक्त कार्यालय से जिला परिवहन अधिकारी, जिला परिवहन कार्यालय, महासमुंद पदस्थ किया गया है।
- रायपुर, /छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राज्य की प्रमुख नदियों के पुनरूद्धार एवं पुनर्जीवित करने गठित राज्य स्तरीय समिति की बैठक आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में प्रवाहित हो रही नदियों के पुर्नजीवन हेतु किए जा रहे कार्यों की विस्तार से समीक्षा की गई। नदियों का संरक्षण से जन स्वास्थ्य और पर्यावरण से जुड़ा हुआ है। इस संबंध में बैठक में जिलों के कलेक्टरों से नदियों के कैचमेंट एरिया में बनायी गई विविध जल संरक्षण एवं संचयन की कार्य योजनाओं को लेकर चर्चा हुई।मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि हाईकोर्ट की गाइड लाइन के अनुसार नदियों के पुनर्जीवित एवं पुनरूद्धार के कार्य करें। उन्होंने अधिकारियों से नदियों के कैचमेंट एरिया में ऐसे जनउपयोगी कार्यों को लिया जाए जो भविष्य में नदियों के आस-पास रहने वाले लोगों की जरूरतों के अनुरूप हो। मुख्य सचिव ने नदियों के कैचमेंट एरिया में किए जाने वाले कार्यों से स्थानीय सरपंचों एवं जनप्रतिनिधियों को आवश्यक रूप से जोड़ने के लिए कहा। मुख्य सचिव ने कलेक्टरों से कहा है कि जिले से उद्गम होने वाली नदियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी रखी जाए। जिससे नदियों के बारे में छात्रों को जानकारी मिले। उन्होंने कहा कि स्थानीय स्कूलों के छात्र-छात्राओं का भ्रमण नदियों के उद्गम स्थल पर कराया जाए और नदियों की जानकारी के संबंध में छात्रों की प्रतियोगिताएं आयोजित की जाए। कलेक्टर ने नदियों के उद्गम स्थलों पर मेला उत्सव जैसे आयोजनों को करने के लिए भी कहा। बैठक में कलेक्टर रायगढ़, कोरबा, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सरगुजा, कोरिया, मोहला-मानपुर-अम्बागढ़ चौकी, गरियाबंद और धमतरी के कलेक्टरों ने अपने-अपने जिले में स्थित नदियों की वास्तविक स्थिति और संचालित कार्ययोजनाओं एवं परियोजनाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। कलेक्टरों को नदियों के संरक्षण, संवर्धन के लिए जिला स्तरीय समितियों के संबंध में जानकारी दी।मुख्य सचिव ने कलेक्टरों को नदियों के कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण, जल ग्रहण, वाटर रिचार्ज और आवश्यकतानुसार जल संरचनाओं के निर्माण के लिए वीबीजीरामजी, कैम्पा, नरेगा, डीएमएफ सहित अन्य मदो से विविध कार्ययोजना बनाने कहा है। नदियों के महत्वपूर्ण स्थलों को पर्यटन से जोड़ने के लिए भी कार्ययोजना तैयार कर कार्यवाही करने कहा है। इसी तरह से नदियों में किसी भी तरह के अपशिष्ट नहीं डाले जाना चाहिए। इसके लिए अधिकारियों को निरंतर निगरानी करने के निर्देश दिए है। बैठक में प्रोफेसर डॉ. एम.के. वर्मा ने नदी जल संरक्षण के संबंध में विस्तार से तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। इसी तरह से एनआईटी के प्रोफेसर जल विज्ञानी श्री इश्तियाक अहमद ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से नदी जल संरक्षण और पर्यावरण सहित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारी प्रस्तुत की। बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव श्री राजेश सुकुमार टोप्पो, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की सचिव सुश्री आर. शंगीता सहित वित्त, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, वन एवं जलवायु परिवर्तन, खनिज, छत्तीसगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं केन्द्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारी शामिल हुए।
- -8 को कारण बताओ नोटिस, 2 ठेकेदारों पर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया-बस्तर में निरीक्षण और समीक्षा बैठकों में जताई थी गहरी नाराजगी, लापरवाह और काम में देरी करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई के दिए थे निर्देश-सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सर्वाेच्च प्राथमिकता, लेट-लतीफी बर्दाश्त नहीं की जाएगी - श्री अरुण सावरायपुर । उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव द्वारा सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी गति पर गहरी नाराजगी जाहिर करने और ठेकेदारों पर कार्रवाई के निर्देश के बाद विभाग ने दो ठेकेदारों के पंजीयन निरस्त कर दिए हैं। लोक निर्माण विभाग ने कार्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले 8 ठेकेदारों को कारण बताओ नोटिस भी जारी किए हैं। वहीं पूर्व में दो ठेकेदारों को जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर ठेकेदार के विरूद्ध कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया गया है। लोक निर्माण विभाग ने 10 जून को भी राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर केशलूर-जगदलपुर मार्ग में किरंदुल-विशाखापट्टनम रेलवे लाइन के ऊपर केशलूर के पास बन रहे फोरलेन रेलवे ओवरब्रिज में काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स के अनुरूप नहीं होने पर ठेकेदार मेसर्स अशोक कुमार मित्तल को नोटिस जारी कर कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने पिछले सप्ताह चार दिनों के बस्तर प्रवास के दौरान अपने चारों विभागों के कार्यों का निरीक्षण कर गहन समीक्षा की थी। उन्होंने निरीक्षण और बैठकों के दौरान सड़कों व पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर अधिकारियों एवं ठेकेदारों पर गहरी नाराजगी जताई थी। उन्होंने काम में लापरवाही, देरी और अनुबंध के अनुसार अपेक्षित तेजी नहीं लाने वाले ठेकेदारों के विरूद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए थे।लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने चार पुलों के निर्माण की धीमी प्रगति पर ठेकेदार मेसर्स गुप्ता कन्सट्रक्शन कंपनी का पंजीयन दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। कंपनी द्वारा भवरडींग नदी पर अदनार-तोतर मार्ग, कोंडागांव के घोटिया-मुंडा-चांदाबेड़ा मार्ग और बड़े राजपुर विकासखंड के पलना-मरीगांव-कुंडई मार्ग पर उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जा रहा है। कंपनी कबीरधाम जिले के बांटीपथरा से कुई (दमगढ़) मार्ग में हॉफ नदी पर भी उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग का निर्माण कर रही है। चारों कार्यस्थलों पर कंपनी का काम अपेक्षित गति से काफी पीछे है।विभाग ने कांकेर के आमाबेड़ा- सेमर गांव सड़क पर नेरूल नदी तथा बोड़ागांव-खासगांव-तरादुल मार्ग में डुमरीकेल नाला पर उच्च स्तरीय पुल एवं पहुंच मार्ग के कार्य में लेट-लतीफी पर ठेकेदार श्री निर्भय राम साहू का पंजीयन आगामी दो वर्षों के लिए निरस्त कर दिया है। विभाग द्वारा प्रगति की लगातार समीक्षा कर कार्यों में तेजी लाने के लिए बार-बार निर्देशित और नोटिस जारी करने के बावजूद इन दोनों ठेकेदारों के काम की गति असंतोषजनक है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने नारायणपुर-सोनपुर-मरोदा मार्ग के चौड़ीकरण व सुधार कार्य की धीमी गति पर ठेकेदार श्री पंकज हालदार को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के उत्तर का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए बस्तर परिक्षेत्र के मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है। प्रमुख अभियंता ने सुकमा में पैकपारा-धनीकोड़ता मार्ग तथा केरलापाल-पटेलपारा-सिरसट्टी सड़क के कार्य में भी अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर ठेकेदार श्री आशीष भदौरिया को पूर्व में जारी कारण बताओ नोटिस के जवाब का परीक्षण कर कार्रवाई के लिए मुख्य अभियंता से प्रतिवेदन मंगाया है।विभाग ने कांकेर-अमोड़ा-नरहरपुर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बी.एम.एस. प्रोजेक्ट, कोंडागांव में हडेली-कुदूर मार्ग के ठेकेदार मेसर्स सुराना एंड कंपनी और जगदलपुर-चित्रकोट मार्ग के ठेकेदार मेसर्स एस.के. अरोरा को कार्यों में धीमी प्रगति के कारण कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कार्यस्थलों पर काम की प्रगति मंजूर किए गए निर्माण कार्यक्रम से काफी पीछे होने और तय किए गए माइलस्टोन्स (महत्वपूर्ण पड़ावों) के अनुरूप नहीं होने पर सुकमा के चिंतलनार-मरियागुड़म सड़क के ठेकेदार श्री के. मोहन रेड्डी, ट्रांससॉफ्ट इन्फ्रा और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन, कोंटा-गोलापल्ली मार्ग के ठेकेदार मेसर्स बालाजी इन्फ्रास्ट्रक्चर और मेसर्स राघव कन्सट्रक्शन तथा भेज्जी-चिंतागुफा सड़क का निर्माण कर रहे ठेकेदार श्री के. मोहन रेड्डी एवं श्री गोविन्द्र सिंह देशमुख को लोक निर्माण विभाग के सुकमा संभाग के कार्यपालन अभियंता द्वारा कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। ’”सड़कों व पुलों के निर्माण में गुणवत्ता और समय-सीमा सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसमें किसी प्रकार की लेट-लतीफी और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निर्धारित समयावधि में निर्माण कार्यों के पूरे नहीं होने से लोगों को अनावश्यक परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में निर्माणाधीन सड़कों और पुलों को तेजी से पूरे कर बेहतर कनेक्टीविटी सुनिश्चित करने पर जोर है। वहां काम कर रहे ठेकेदारों और निर्माण एजेंसियों को अनुबंध के अनुसार निर्धारित प्रगति तथा माइलस्टोन्स पूरे करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। काम में अपेक्षित प्रगति नहीं लाने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई की जा रही है।“ - श्री अरुण साव, उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री
- -छत्तीसगढ़ में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र एवं झारखंड की तुलना में सस्ती बिजली-बीते वर्षों में महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत में वृद्धि को देखते हुए विद्युत टैरिफ दरों में की गई है मामूली वृद्धिरायपुर / छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए नई बिजली दरों की घोषणा की गई है। नई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू होंगी। आयोग ने बिजली शुल्क में औसतन 6.23 प्रतिशत की वृद्धि की है। आयोग का कहना है कि पिछले वर्षों में बढ़ी महंगाई, कोयला, बिजली उत्पादन और आपूर्ति लागत तथा पूर्व वर्षों के घाटे की भरपाई को देखते हुए यह मामूली वृद्धि, जरूरी और न्यायसंगत है।घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में औसतन 30 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। हालांकि उपभोग के अलग-अलग स्लैब के अनुसार यह बढ़ोतरी 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक रहेगी। शून्य से 200 यूनिट तक खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए 30 पैसे प्रति यूनिट, 201 से 600 यूनिट तक खपत करने वालों के लिए 40 पैसे प्रति यूनिट तथा 600 यूनिट से अधिक खपत पर 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि निर्धारित की गई है। राज्य के लाखों परिवारों पर बढ़े हुए टैरिफ का वास्तविक प्रभाव केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के आसपास होगा। टैरिफ वृद्धि करते समय आयोग ने आम जनता और निम्न आय वर्ग के हितों का ध्यान रखा है।सरकार की मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत योजना के तहत 400 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक की खपत पर आधा बिजली बिल देने की सुविधा मिल रही है। ऐसे में बड़ी संख्या में निम्न एवं मध्यम आय वर्ग के परिवारों पर वास्तविक अतिरिक्त भार अपेक्षाकृत कम रहेगा। अनुमान है कि इन उपभोक्ताओं के बिल पर प्रभाव औसतन केवल 15 से 20 पैसे प्रति यूनिट के बराबर होगा।इसी प्रकार 201 से 600 यूनिट तक बिजली उपयोग करने वाले कई उपभोक्ता पीएम सूर्यघर योजना के तहत रूफटॉप सोलर संयंत्र लगाकर अपनी ग्रिड आधारित खपत 400 यूनिट के भीतर कर रहे हैं। ऐसे उपभोक्ताओं पर भी बढ़ोतरी का प्रभाव बहुत ही कम होने की संभावना है।गैर-घरेलू श्रेणी के उपभोक्ताओं की बिजली दरों में औसतन 20 से 40 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की गई है। वहीं कृषि पंपों के लिए दरों में 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी घोषित की गई है। हालांकि कृषि उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दी जा रही सब्सिडी के कारण इस वृद्धि का सीधा प्रभाव किसानों पर नहीं होगा।उच्च दाब (एचटी) श्रेणी के औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए भी बिजली शुल्क में संशोधन किया गया है। 220 केवी और 132 केवी श्रेणी में ऊर्जा प्रभार में 30 पैसे प्रति यूनिट तथा डिमांड चार्ज में 25 रुपये प्रति केवीए की वृद्धि की गई है। 33 केवी श्रेणी में 40 पैसे प्रति यूनिट और 11 केवी श्रेणी में 30 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी लागू होगी।नई टैरिफ व्यवस्था में कुछ विशेष रियायतें भी दी गई हैं। बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के आदिवासी विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में स्थित छात्रावासों को व्यावसायिक श्रेणी के बजाय घरेलू श्रेणी में शामिल कर राहत प्रदान की गई है। इसके अलावा विलंबित भुगतान अधिभार की व्यवस्था को भी उपभोक्ता हित में सरल बनाया गया है। अब अतिरिक्त शुल्क केवल वास्तविक विलंब अवधि के आधार पर लगेगा। घरेलू और गैर-घरेलू श्रेणी के 10 किलोवाट से अधिक भार वाले उपभोक्ताओं को ऑफ-पीक अवधि में बिजली उपयोग करने पर 20 पैसे प्रति यूनिट की छूट भी मिलेगी।आयोग के अनुसार संशोधित दरों के बावजूद छत्तीसगढ़ में बिजली शुल्क पड़ोसी राज्यों मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और झारखंड की तुलना में अभी भी कम है। ऐसे में राज्य में उपभोक्ताओं और उद्योगों के लिए बिजली दरें प्रतिस्पर्धी बनी रहेंगी। कुल मिलाकर, बिजली दरों में वृद्धि जरूर हुई है, लेकिन राहत योजनाओं, सब्सिडी और सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली नीतियों के कारण आम घरेलू उपभोक्ताओं पर इसका प्रभाव अपेक्षाकृत कम होगा।



























