अहिंदी भाषी विद्यार्थियों ने अध्ययन यात्रा में जाना भिलाई में क्या है हिंदी का महत्व
-टी सहदेव
भिलाई नगर। केंद्रीय हिंदी निदेशालय के द्वारा प्रायोजित छात्र अध्ययन यात्रा के अंतर्गत कल्याण महाविद्यालय भिलाई में केरल, महाराष्ट्र और असम के चालीस से अधिक विद्यार्थी तीन दिन के लिए भिलाई आए। इस दौरान उन्होंने जाना कि बहुभाषिक भिलाई की संपर्क भाषा हिंदी कैसे लाखों लोगों का जीवन बदल रही है। ये अहिंदी भाषी 23 जनवरी से 25 जनवरी तक रुके। केंद्रीय हिंदी निदेशालय की सहायक निदेशक डॉ किरण झा और अधिकारी सुनील कुमार ने इनका नेतृत्व किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ सुधीर शर्मा, प्राध्यापक डॉ फिरोजा जाफर अली, डॉ अंजन कुमार और कैलाश ठाकुर के संयोजन में वे विभिन्न सत्रों और लेखक संवाद में उपस्थित रहे।
*रायपुर साहित्य उत्सव का भ्रमण*
प्रथम दिन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ विनय शर्मा के मुख्य आतिथ्य में उद्घाटन हुआ। प्राचार्य डॉ शर्मा ने इस यात्रा को महाविद्यालय और भिलाई के लिए गौरव का विषय बताया। इसी दिन बाहर से आए विद्यार्थियों के साथ महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने रायपुर साहित्य उत्सव का भ्रमण कर विभिन्न सत्रों और पुस्तक मेले का आनंद लिया। निदेशालय के अधिकारियों डॉ किरण झा और सुनील कुमार ने विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी दी। दूसरे दिन वरिष्ठ आलोचक डॉ जयप्रकाश ने हिंदी कहानी और हिंदी भाषा की महत्ता पर रोचक व्याख्यान दिया। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रश्नों का जवाब देते हुए कहा कि प्रेमचंद की ईदगाह कहानी की संवेदना समाज में आज भी जीवित है।
*कविता लेखन की बारीकियों को जाना*
द्वितीय सत्र में वरिष्ठ कवि शरद कोकाश ने कविता लेखन की बारीकियों और मन मशीन के बारे में बताया। महाविद्यालय के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ के एन दिनेश ने अन्य विषयों के लिए हिंदी के सामाजिक महत्व पर जानकारी दी। बाद में प्राध्यापक और राजनीति विभाग की अध्यक्ष डॉ मणिमेखला शुक्ल ने छत्तीसगढ़ी लोकगीतों का सुंदर गायन किया। तीसरे दिन वरिष्ठ कवि रवि श्रीवास्तव के साथ सार्थक संवाद का आयोजन किया गया। श्रीवास्तव ने भिलाई की बहुभाषिकता और उसके इतिहास पर रोचक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि किस तरह 70 साल पहले बहुभाषी समाज ने हिंदी सीखी। उन्होंने अपनी तीन कविताएं भी सुनाईं।
*अंतिम सत्र में प्रमाणपत्र वितरित*
द्वितीय सत्र में वरिष्ठ साहित्यकार डॉ परदेशी राम वर्मा ने छत्तीसगढ़ी लोककथाओं के मर्म और लोककथाओं में नैतिक शिक्षा के महत्व को उदाहरण सहित प्रस्तुत किया। अंतिम सत्र में विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। इस दौरान पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया। अंतिम सत्र में महाविद्यालय के शोधार्थी जितेंद्र साहू, घनश्याम टंडन, मनोहर दास, कैलाश ठाकुर, रजनी पटेल आदि को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन डॉ अंजन कुमार और आभार व्यक्त डॉ फिरोजा जाफर अली ने किया।






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