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- 0- एसएसपी ने युवाओं को साइबर सुरक्षा से जुड़े कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर दिया जोर0- स्किल गैप एनालिसिस की समीक्षा बैठक में उद्योगों से जानी कुशल मानव संसाधन की जरूरतबिलासपुर. जिले में उद्योगों की आवश्यकता के अनुरूप युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने और उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से स्किल गैप एनालिसिस की समीक्षा बैठक जिला कार्यालय के मंथन सभाकक्ष में आयोजित की गई। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल एवं एसएसपी श्री रजनेश सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि एवं उद्योगपति उपस्थित रहे। बैठक में उद्योगों की वर्तमान एवं भविष्य की जरूरतों, आवश्यक कौशल, प्रशिक्षण की दिशा तथा युवाओं के लिए उपलब्ध रोजगार के अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई। सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल एवं छत्तीसगढ़ लद्यु उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री हरीश केडिया भी बैठक में शामिल रहे।बैठक में कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने कहा कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण को उद्योगों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण ऐसा हो, जिसमें युवाओं को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल भी मिले और प्रशिक्षण के बाद उनके लिए रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। उन्होंने उद्योगों एवं प्रशिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण कार्यक्रमों को निरंतर अपडेट करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री डिमांड के अनुरूप इमर्जिंग एवं फ्यूचर रेडी स्किल को प्रशिक्षण व्यवस्था में शामिल करना समय की आवश्यकता है।कलेक्टर ने इंडस्ट्री इंस्टीट्यूट लिंकेज को मजबूत करने तथा ट्रेनिंग को इंटर्नशिप एवं प्लेसमेंट से जोड़ने पर जोर दिया, ताकि प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं को उनकी स्किल के अनुरूप रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकें। एसएसपी श्री रजनेश सिंह ने ’’युवाओं को साइबर सुरक्षा से जुड़े कौशल प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया।’’ उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में भी प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता बढ़ रही है। युवाओं को साइबर सुरक्षा एवं इससे जुड़े तकनीकी क्षेत्रों में रोजगारपरक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाए, ताकि वे इस क्षेत्र में उपलब्ध अवसरों का लाभ उठा सकें।छत्तीसगढ़ लघु उद्योग संघ के अध्यक्ष श्री हरीश केडिया ने कहा कि ने स्किल गैप की पहचान कर उसी के अनुरूप प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाने से युवाओं को उनकी योग्यता और उद्योगों की आवश्यकता के अनुसार रोजगार से जोड़ने में मदद मिलेगी। इससे एक ओर युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे, वहीं दूसरी ओर उद्योगों को आवश्यकता के अनुरूप कुशल मानव संसाधन उपलब्ध हो सकेगा। बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों से विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक तकनीकी एवं व्यावहारिक कौशल की जानकारी ली गई। उद्योगपतियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में आवश्यक मानव संसाधन, कौशल एवं रोजगार की संभावनाओं से अवगत कराया। प्राप्त सुझावों के आधार पर प्रशिक्षण की दिशा तय करने तथा युवाओं के कौशल को उद्योगों की मांग से जोड़ने पर चर्चा हुई।बैठक में सीएनसी , सीएडी, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक्स , लॉजिस्टिक्स, क्वालिटी कंट्रोल, सोलर टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में प्रशिक्षण की संभावनाओं पर चर्चा की गई। भविष्य की मांग को देखते हुए स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, एआई आधारित, , ग्रीन टेक्नोलॉजी, सोलर एनर्जी एवं फ्यूचर रेडी स्किल्स को चरणबद्ध रूप से प्रशिक्षण व्यवस्था से जोड़ने पर भी विचार किया गया।बैठक में आगामी रोजगार मेलों की तैयारियों की भी जानकारी दी गई। जिला रोजगार अधिकारी ने बताया कि 30 सितंबर को संभाग स्तरीय रोजगार मेला तथा 7 एवं 8 अक्टूबर को राज्य स्तरीय रोजगार मेला’’ आयोजित किया जाएगा। युवाओं को रोजगार के अवसरों से जोड़ने के लिए ’’ई-रोजगार पोर्टल पर पंजीयन’’ कराने पर भी जोर दिया गया।
- बिलासपुर. कार्यालय कलेक्टर की खनिज शाखा बिलासपुर द्वारा कार्यालयीन कार्यों में उपयोग के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत महिन्द्रा स्कॉर्पियो वाहन किराये पर लेने हेतु निविदा आमंत्रित की गई है। निविदा प्रपत्र 7 अक्टूबर 2026 तक कार्यालयीन समय में प्राप्त किए जा सकते हैं। अंतिम तिथि 7 अक्टूबर को दोपहर 1 बजे तक निविदा प्राप्त की जाएगी। भरे हुए निविदा प्रपत्र को निर्धारित समयावधि में कार्यालय में उपस्थित होकर निविदा बॉक्स में डालना अनिवार्य होगा।निविदा 8 अक्टूबर 2026 को दोपहर 3 बजे खोली जाएगी। निविदा प्रपत्र एवं अन्य शर्तें कार्यालय से 500 रुपये के निविदा प्रपत्र शुल्क के डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से प्राप्त की जा सकती हैं। डिमांड ड्राफ्ट कलेक्टर (खनिज शाखा), बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंक की कलेक्टोरेट शाखा बिलासपुर, छत्तीसगढ़ में हो, में देय हो जमा करके कार्यालयीन समय में प्राप्त कर सकते है। निविदा के साथ 1 लाख रुपये की धरोहर राशि जमा करना अनिवार्य है। बिना धरोहर राशि के प्रस्तुत निविदा स्वीकार नहीं की जाएगी। निविदा की विस्तृत शर्तें कार्यालय के सूचना पटल तथा जिला बिलासपुर की वेबसाइट www. bilaspur.gov.in पर देखी जा सकती हैं।
- 0- आयुष स्वास्थ्य मेले में 973 लोगों का निःशुल्क इलाजबिलासपुर. ग्यारहवें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस एवं सेवा संकल्प अभियान के तहत आयुष विभाग, बिलासपुर द्वारा चिंगराजपारा में निःशुल्क जिला स्तरीय आयुष स्वास्थ्य मेले का आयोजन किया गया। मेले में क्षेत्र के 973 नागरिकों को आयुष चिकित्सा पद्धति के माध्यम से निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। इस दौरान विभिन्न रोगों की जांच एवं उपचार के साथ शुगर, बीपी, आंख एवं सिकलिंग सहित अन्य स्वास्थ्य जांच की गई।स्वास्थ्य मेले में सर्दी-खांसी के 236, चर्म रोग के 143, एब्डोमिनल बीमारी के 259, दर्द संबंधी 240, दंत रोग के 52 तथा आंखों की जांच 42 लोगों की गई। इसके अलावा 26 लोगों की सिकलिंग, 79 की शुगर तथा 85 लोगों की बीपी जांच की गई। आयुष मेले का शुभारंभ कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने भगवान धन्वंतरि के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं पूजा अर्चना कर किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री संदीप अग्रवाल, वार्ड पार्षद श्रीमती रेखा सूर्यवंशी एवं श्रीमती रानी शैलेश देवांगन उपस्थित रहीं। इस अवसर पर जिला आयुष अधिकारी डॉ. यशपाल सिंह ध्रुव ने आयुष विभाग एवं आयुष्मान भारत के अंतर्गत संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं योजनाओं की जानकारी दी। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने आयुष विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने तथा प्रभावी एवं सार्थक चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से जनसामान्य को आयुष चिकित्सा पद्धति से जोड़ने पर जोर दिया।पारंपरिक चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने वालों का सम्मानकार्यक्रम में मिलेट्स के उपयोग को बढ़ावा देने एवं उन्हें जनसामान्य तक पहुंचाने के लिए तुलसी मिलेट्स के संचालक श्री लक्ष्मीनारायण अग्रवाल को शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मानित किया गया। वहीं पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में योगदान के लिए परंपरागत वैद्य डॉ. अशोक शिरोडे एवं डॉ. मनीषा शिरोडे का भी शाल एवं श्रीफल भेंटकर सम्मान किया गया।कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनिल कुमार सोनी ने किया। आयुष स्वास्थ्य मेले में बड़ी संख्या में नागरिकों ने पहुंचकर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया।
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रायपुर प्रेस क्लब में गणेश उत्सव
रायपुर। रायपुर प्रेस क्लब के गणेश उत्सव में बुधवार को खेल समिति की सहभागिता रही। खेल समिति के संयोजक विजय मिश्रा की अगुवाई में सदस्यों ने भगवान गणेश की पूजा-अर्चना कर आरती की और अपने साथ लाए मिष्ठान्न का भोग अर्पित किया। पूजा-अर्चना और आरती के दौरान पत्रकार साथियों ने भगवान गणेश से प्रेस क्लब से जुड़े सभी पत्रकारों एवं उनके परिवारों के सुख, समृद्धि और मंगल की कामना की।
रायपुर प्रेस क्लब द्वारा इस वर्ष गणेश उत्सव को हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष की गौरवपूर्ण थीम से जोड़ा गया है। उत्सव में प्रेस क्लब से जुड़े विभिन्न समूहों और पत्रकारिता की अलग-अलग विधाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक दिन अलग-अलग पत्रकार बिरादरी एवं समितियों को भगवान गणेश की सेवा और आराधना का अवसर दिया जा रहा है। इसी क्रम में बुधवार को खेल समिति के सदस्यों ने सामूहिक रूप से गणेश आराधना में हिस्सा लिया।
इस अवसर पर प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी, महासचिव गौरव शर्मा, उपाध्यक्ष दिलीप साहू, कोषाध्यक्ष दिनेश यदु, संयुक्त सचिव निवेदिता साहू एवं भूपेश जांगड़े सहित कार्यकारिणी सदस्य जाकिर घुड़सेना एवं चंदन साहू मौजूद रहे।
कार्यक्रम में खेल समिति के संयोजक विजय मिश्रा, सहसंयोजक अख्तर हुसैन एवं शंकर चंद्राकर सहित
वरिष्ठ पत्रकार प्रशांत शर्मा, दामु अंबेडारे,राजेंद्र निगम, टीकम वर्मा, सतीश पांडे, प्रदीप चंद्रवंशी,कमलेश गोगिया, पार्थ बेहरा, प्रवीण सिंह (ईटीवी भारत), पवन ठाकुर, तिलक राम साहू, हेमंत डोंगरे, हरिमोहन तिवारी, एवं विनय घाटगे , सहित पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने कहा कि इस वर्ष गणेश उत्सव को पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवपूर्ण यात्रा के साथ-साथ प्रेस क्लब परिवार की सामूहिक सहभागिता का उत्सव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। अलग-अलग समितियों और पत्रकार साथियों की सहभागिता से गणेश उत्सव में आपसी सौहार्द, भाईचारे और संगठनात्मक एकजुटता का भाव मजबूत हो रहा है।
उन्होंने कहा कि खेल पत्रकारों और खेल समिति की सक्रियता प्रेस क्लब की जीवंतता का महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए गणेश उत्सव में उनकी सहभागिता भी विशेष महत्व रखती है।
गुरुवार को प्रेस क्लब की गणेश उत्सव में पत्रकार सपत्नीक शामिल होंगे सभी पत्रकार जनों को अपने परिजन के साथ इस अवसर पर शामिल होने की प्रेस क्लब ने अपील की है, इस दौरान पत्रकार साथियों द्वारा भगवान गणेश के लिए भजन भी प्रस्तुत किया जाएगा,
रायपुर प्रेस क्लब ने सभी पत्रकार साथियों से आगामी आयोजनों में सहभागी बनने और भगवान गणेश की संध्या आरती में शामिल होकर इस सामूहिक उत्सव को गरिमामय बनाने का आह्वान किया है। - -उप मुख्यमंत्री ने किया निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ-भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना की पहल से दिव्यांगजनों को मिला सहारा-कृत्रिम हाथ ने उठाया गिलास, कृत्रिम पैर ने दौड़ाई बाइक, दिव्यांगजनों के जीवन में लौटा आत्मविश्वास-जयपुर से आई विशेषज्ञ टीम मौके पर ही जरूरत के अनुसार तैयार कर रही कृत्रिम अंगरायपुर / जिन हाथों ने वर्षों से किसी का सहारा लिया, वही आज खुद गिलास उठाकर पानी पी रहे थे। जिन पैरों ने कभी साथ छोड़ दिया था, वही कृत्रिम पैर लगने के बाद बाइक चला रहे थे। कबीरधाम जिले के पीजी कॉलेज डोम कवर्धा में बुधवार को ये दृश्य सिर्फ एक शिविर की तस्वीर नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के जीवन में लौटती उम्मीद, बढ़ते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत रही। इस बदलाव के बीच उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा दिव्यांगजनों के बीच पहुंचे और निःशुल्क विशाल दिव्यांग उपकरण वितरण शिविर का शुभारंभ करते हुए हितग्राहियों को कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण प्रदान किए। भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति जयपुर, सकल जैन समाज एवं भारतीय जैन संगटना (छत्तीसगढ़) और जिला प्रशासन के सहयोग से आयोजित शिविर में करीब एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने शिविर में दिव्यांगजनों से मुलाकात की और उन्हें कृत्रिम हाथ-पैर सहित विभिन्न सहायक उपकरण प्रदान किए। शिविर में कृत्रिम हाथ-पैर, कैलिपर्स, ट्राइसाइकिल सहित जरूरत के अनुसार अन्य उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उपकरण प्राप्त करने के बाद हितग्राहियों ने उनका उपयोग कर अपनी क्षमता का प्रदर्शन भी किया। एक हितग्राही ने कृत्रिम पैर की सहायता से बाइक चलाकर दिखया, वहीं एक अन्य दिव्यांगजन ने कृत्रिम हाथ से पानी पीकर बताया कि यह सुविधा उसके दैनिक जीवन को किस तरह आसान बना सकती है।उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि दिव्यांगजनों के लिए आयोजित यह शिविर अद्भुत सेवा का उदाहरण है। जैन समाज सेवा कार्यों में हमेशा आगे रहा है। उन्होंने कहा कि कवर्धा में रहते हुए उन्होंने जैन समाज को बहुत करीब से देखा है। जैन समाज के जीवन में एक ओर समृद्धि और सामाजिक दायित्व है, तो दूसरी ओर त्याग और सेवा की प्रबल भावना भी है। यही संतुलन समाज को सेवा कार्यों के लिए प्रेरित करता है। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए लगभग एक हजार दिव्यांगजनों का पंजीयन हुआ है। श्रवण, दृष्टि और अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित जरूरत के अनुसार कैलिपर, कृत्रिम पैर, हाथ एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उपकरण केवल हाथ-पैर का सहारा नहीं हैं, बल्कि इनके मिलने के बाद व्यक्ति के जीवन में आने वाला बदलाव अधिक महत्वपूर्ण है।उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने एक दिव्यांगजन का उदाहरण देते हुए बताया कि बिजली के तार की चपेट में आने से उसके दोनों हाथ चले गए थे। शिविर में कृत्रिम हाथ मिलने के बाद उसने पहली बार अपने हाथ से पानी का गिलास उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय उसके मन में क्या भाव रहे होंगे, इसे वही व्यक्ति समझ सकता है। कृत्रिम हाथ-पैर की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण यह है कि इनके मिलने से दिव्यांगजन के जीवन में कितना बदलाव आता है और उसका आत्मविश्वास कितना बढ़ता है। उन्होंने कहा कि पिछले तीन-चार वर्षों से कवर्धा में इस तरह के सेवा कार्य लगातार हो रहे हैं। उन्होंने भारतीय जैन संगठन, भगवान महावीर विकलांग सेवा समिति, सकल जैन समाज और एनएसई फाउंडेशन के सहयोग की सराहना की। उन्होंने राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार करने की प्रक्रिया भी देखी।उप मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी तरह के शिविर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में भी आयोजित किए जाएंगे। बस्तर में आईईडी विस्फोटों के कारण दिव्यांग हुए लोगों को चिन्हांकित कर कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। ग्राम पंचायतों के माध्यम से ऐसे दिव्यांगजनों की जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि उन्हें शिविर तक लाकर कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए जा सकें। उन्होंने कहा कि बस्तर के अंदरूनी गांवों में आईईडी विस्फोटों से दिव्यांग हुए लोगों को कृत्रिम हाथ-पैर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें और आत्मनिर्भर जीवन की ओर बढ़ सकें। उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि शिविर का लाभ अधिक से अधिक जरूरतमंद दिव्यांगजनों तक पहुंचे, इसके लिए सभी लोग इसकी जानकारी अपने स्तर पर साझा करें। उन्होंने समाज, संस्थाओं और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को सेवा कार्य के लिए शुभकामनाएं दीं।दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम के अध्यक्ष श्री लोकेश कावड़िया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में दिव्यांगजन हैं, जिन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। दिव्यांगजनों को केवल सहायक उपकरण उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें कौशल प्रशिक्षण, स्वरोजगार और रोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। रायपुर में दिव्यांगजनों के लिए कौशल विकास केंद्र तैयार किया जा रहा है, जहां विभिन्न ट्रेड के साथ डिजिटल मार्केटिंग और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि स्वरोजगार के लिए दिव्यांगजनों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था है तथा पात्र हितग्राहियों को ऋण पर अनुदान भी दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य दिव्यांगजनों को किसी पर निर्भर रहने वाला नहीं, बल्कि स्वाभिमान के साथ अपने परिवार और समाज को योगदान देने वाला बनाना है।इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष श्री ईश्वरी साहू, नगर पालिका परिषद कवर्धा के अध्यक्ष श्री चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्री कैलाश चंद्रवंशी, कलेक्टर श्रीमती तुलिका प्रजापति, पुलिस अधीक्षक श्री जितेन्द्र यादव, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री अभिषेक अग्रवाल, भारतीय जैन संगटना राष्ट्रीय सचिव श्री पंकज लूकड़, प्रदेश अध्यक्ष श्री विजय गंगवाल, प्रदेश महासचिव सीए श्री विकास गोलछा, सकल जैन संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री नेमीचंद गोलछा, जैन श्वेतांबर मूर्तिपूजक संघ कवर्धा के अध्यक्ष श्री खुशाल टाटिया, सकल जैन संघ कवर्धा के सचिव श्री अतुल देशलहरा तथा स्वास्थ्य एवं शिविर प्रोग्राम के प्रदेश प्रमुख डॉ. अतुल जैन सहित जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी एवं अधिकारी उपस्थित रहे।शिविर में राजस्थान से आई विशेषज्ञ टीम द्वारा मौके पर ही कृत्रिम अंग तैयार कर जरूरत के अनुसार उनका परीक्षण और फिटिंग की जा रही है। इससे हितग्राहियों को उनकी शारीरिक आवश्यकता के अनुरूप उपकरण उपलब्ध कराने में सुविधा मिल रही है। शिविर में श्रवण, दृष्टि एवं अस्थि बाधित दिव्यांगजनों सहित विभिन्न श्रेणी के दिव्यांग हितग्राहियों ने पंजीयन कराया है। बड़ी संख्या में पहुंचे हितग्राहियों की जरूरत के अनुसार कृत्रिम अंग एवं अन्य सहायक उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। चार दिवसीय शिविर में 23 से 26 सितंबर तक दिव्यांगजनों को आवश्यकतानुसार उपकरण प्रदान किए जाएंगे।
- -गणित तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम-रीजनल साइंस सेंटर में दो दिवसीय ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ इंटरैक्टिव सत्र का आयोजनरायपुर / विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति रूचि, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य में विभिन्न शैक्षणिक एवं जन-जागरूकता गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर द्वारा गणित शिक्षण को सरल, रूचिकर, गतिविधि-आधारित एवं रचनात्मक बनाने के उद्देश्य से 22 एवं 23 सितंबर को ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथमेटिक्स : फ्रॉम फीयर टू फैसिनेशन’ विषय पर दो दिवसीय इंटरैक्टिव सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन उप मुख्यमंत्री एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के नेतृत्व में किया गया।कार्यक्रम के प्रथम दिवस 22 सितंबर को रायपुर के चार विकासखंडों से विज्ञान एवं गणित विषय के लगभग 120 शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की। रायपुर जिले के अन्य शिक्षकों के लिए सत्र का ऑनलाइन प्रसारण भी किया गया। प्रशिक्षण के दौरान शिक्षकों को गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए गतिविधियों, प्रयोगों, अनुभवों तथा दैनिक जीवन से जोड़कर पढ़ाने की विभिन्न तकनीकों से परिचित कराया गया। हैंड्स-ऑन गतिविधियों के माध्यम से यह समझाया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और सहज तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। कार्यक्रम के दूसरे दिन 23 सितंबर को बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थियों के लिए विशेष इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया। इसमें एससीईआरटी के बी.एड. एवं डी.एड. विद्यार्थी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के बी.एड. विद्यार्थी तथा आईटीईपी के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। सत्र का उद्देश्य भावी शिक्षकों को गणित शिक्षण की नवीन, गतिविधि-आधारित एवं व्यावहारिक पद्धतियों से परिचित कराना रहा, ताकि वे भविष्य में कक्षा में गणित को अधिक प्रभावी एवं आनंददायक तरीके से प्रस्तुत कर सकें।इस अवसर पर छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर के परियोजना निदेशक प्रभारी डॉ. शैलेश कुमार सिंह ने कहा कि गणित को विद्यार्थियों के लिए केवल सूत्रों और गणनाओं का विषय न बनाकर सोचने, समझने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने का माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने गतिविधि-आधारित एवं अनुभवात्मक शिक्षण को गणितीय अवधारणाओं को सहज रूप से समझाने का प्रभावी माध्यम बताते हुए भावी शिक्षकों को कक्षा में नवीन शिक्षण तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन, बेंगलुरु के मैथ कोच श्री बी. एन. राव ने प्रशिक्षण के दोनों दिवसों पर प्रतिभागियों के साथ संवाद करते हुए गणित शिक्षण की नवीन एवं गतिविधि-आधारित विधियों पर मार्गदर्शन दिया। उन्होंने हैंड्स-ऑन गतिविधियों, व्यावहारिक उदाहरणों, गणितीय खेलों और दैनिक जीवन से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से बताया कि किस प्रकार गणितीय अवधारणाओं को सरल और आनंददायक बनाया जा सकता है। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों को केवल उत्तर बताने के बजाय स्वयं सोचने, तर्क करने, प्रश्न पूछने और समाधान खोजने के लिए प्रेरित करने पर विशेष जोर दिया। सत्र के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तरी और रचनात्मक अभ्यास विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि एवं जिज्ञासा विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दो दिवसीय कार्यक्रम के माध्यम से वर्तमान शिक्षकों के साथ-साथ भावी शिक्षकों को भी गणित शिक्षण की नवीन पद्धतियों से जोड़ने का प्रयास किया गया। कार्यक्रम में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि गणित केवल अंकों और सूत्रों का विषय नहीं है, बल्कि यह विद्यार्थियों में तार्किक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा एवं समस्या-समाधान की क्षमता विकसित करने का प्रभावी माध्यम है। कार्यक्रम के सफल आयोजन में छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर की टीम, संबंधित अधिकारियों एवं कार्यक्रम से जुड़े सभी सहयोगियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
- -सौर पंप से अब कर पा रहे सालभर सिंचाई, खेती के साथ मछली पालन से बढ़ी आमदनीरायपुर, / दंतेवाड़ा जिले के ग्राम मुरकी निवासी किसान श्री चरण सिंह ठाकुर के लिए सौर सुजला योजना खेती में नई संभावनाओं का आधार बनी है। योजना के तहत स्थापित सोलर पंप से सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने न केवल अपनी कृषि गतिविधियों का विस्तार किया, बल्कि खेती के साथ मछली पालन को जोड़कर आमदनी का अतिरिक्त साधन भी तैयार किया है।विकासखंड दंतेवाड़ा के ग्राम मुरकी में रहने वाले श्री ठाकुर पहले सिंचाई के लिए पारंपरिक साधनों और पानी की उपलब्धता पर निर्भर थे। पर्याप्त एवं नियमित सिंचाई सुविधा नहीं होने के कारण खेती का दायरा सीमित था। सौर पंप लगने से उनकी यह समस्या काफी हद तक दूर हो गई। अब उन्हें सिंचाई के लिए बिजली अथवा डीजल पर निर्भर नहीं रहना पड़ता और वे समय पर फसलों को पानी दे पा रहे हैं।सिंचाई की सुविधा मिलने के बाद श्री ठाकुर खरीफ और रबी, दोनों मौसमों में खेती कर रहे हैं। वे धान के साथ उड़द और अरहर जैसी दलहनी फसलें उगा रहे हैं। इसके अलावा लौकी, भिंडी, करेला, बरबट्टी सहित विभिन्न मौसमी सब्जियों का उत्पादन कर स्थानीय बाजार में बिक्री से अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। फसलों में विविधता आने से उनकी खेती अधिक उपयोगी और लाभकारी हुई है।श्री ठाकुर ने सौर पंप की सुविधा का उपयोग केवल खेतों की सिंचाई तक सीमित नहीं रखा है। वे इसके माध्यम से तालाब में पानी की उपलब्धता बनाए रखते हुए मछली पालन भी कर रहे हैं। खेती और मछली पालन के समन्वित प्रयास से उपलब्ध भूमि एवं जल संसाधनों का बेहतर उपयोग हो रहा है और परिवार के लिए आय के अलग-अलग स्रोत विकसित हुए हैं। इन्हीं गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आमदनी में 80 से 90 हजार रुपये का इजाफा हुआ है।श्री ठाकुर बताते हैं कि सोलर पंप ने खेती के प्रति उनका भरोसा बढ़ाया है। अब वे मौसम के साथ अलग-अलग फसलें और सब्जियां उगा पा रहे हैं। मछली पालन से भी अतिरिक्त आय मिल रही है। सौर ऊर्जा से संचालित होने के कारण पंप पर ईंधन का खर्च नहीं आता, जिससे खेती की लागत कम रखने में मदद मिलती है।दूरस्थ एवं आदिवासी बहुल दंतेवाड़ा जिले में सौर सुजला योजना किसानों तक स्वच्छ ऊर्जा आधारित सिंचाई सुविधा पहुंचाकर उनकी खेती को नया आधार दे रही है। श्री चरण सिंह ठाकुर का उदाहरण बताता है कि सिंचाई के भरोसेमंद साधन और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से किसान परंपरागत खेती से आगे बढ़कर बहुफसली कृषि, सब्जी उत्पादन और मछली पालन जैसी गतिविधियां अपनाते हुए अपनी आय बढ़ा सकते हैं।
- -सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने कहा—किसानों की मेहनत, तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से मिली उपलब्धि-छत्तीसगढ़ में किसी सहकारी शक्कर कारखाने को पहली बार इस श्रेणी में मिला नेशनल अवॉर्डरायपुर / कवर्धा के भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने को लगातार दो पेराई सत्रों—2024-25 और 2025-26—के लिए ‘हाइएस्ट शुगर रिकवरी–अदर एरिया’ श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है। नेशनल को-ऑपरेटिव शुगर फेडरेशन ने नई दिल्ली के डॉ. आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित शुगर फैक्ट्री एफिशिएंसी अवॉर्ड समारोह में कारखाने को सम्मानित किया।समारोह में केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने यह पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर केंद्रीय सहकारिता राज्य मंत्री श्री कृष्ण पाल गुर्जर भी उपस्थित रहे। छत्तीसगढ़ के सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। छत्तीसगढ़ के लिए यह विशेष गौरव का अवसर है कि राज्य में पहली बार किसी सहकारी शक्कर कारखाने को इस श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।सहकारिता मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर कारखाने से जुड़े गन्ना उत्पादक किसानों और कारखाना प्रबंधन को बधाई देते हुए कहा कि किसानों द्वारा गुणवत्तापूर्ण गन्ने की आपूर्ति, कारखाने की तकनीकी दक्षता और बेहतर प्रबंधन से यह उपलब्धि हासिल हुई है। उन्होंने कहा, यह सम्मान किसानों की मेहनत और सहकारिता व्यवस्था की सामूहिक शक्ति का सम्मान है।सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में 'सहकार से समृद्धि’ के संकल्प के अनुरूप सहकारी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। राज्य सरकार सहकारी संस्थाओं को किसानों की आर्थिक प्रगति और ग्रामीण विकास का मजबूत माध्यम बनाने के लिए काम कर रही है। हमारा प्रयास है कि संस्थाएं आधुनिक, पारदर्शी, जवाबदेह और किसान हितैषी बनें तथा उनके काम का सीधा लाभ किसानों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि सहकारिता को गांवों की अर्थव्यवस्था से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।सहकारिता मंत्री श्री कश्यप ने कहा कि सहकारिता विभाग में डिजिटलीकरण, प्राथमिक कृषि साख समितियों (पैक्स) के कम्प्यूटरीकरण और आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार पर काम किया जा रहा है। इससे सहकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाने की सफलता प्रदेश की अन्य सहकारी संस्थाओं को भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करेगी।समारोह में भोरमदेव सहकारी शक्कर कारखाना, कवर्धा को दो पेराई सत्रों वर्ष 2024-25 एवं 2025-26 के लिए “हाईएस्ट शुगर रिकवरी इन अदर एरिया” का नेशनल अवॉर्ड प्राप्त हुआ। कारखाने की ओर से यह पुरस्कार आयुक्त सहकारिता श्री रमेश शर्मा, विभागीय अधिकारियों और कारखाना प्रबंधन के द्वारा संयुक्त रूप से ग्रहण किया गया।
- -बचेली की श्रीमती कुमारी ने डिजिटल सुविधाओं से जुड़कर बनाई नई पहचानरायपुर / दंतेवाड़ा जिले के बचेली की निवासी श्रीमती कुमारी के पास पहले अपना स्मार्टफोन नहीं था। सरकारी योजनाओं और अन्य जरूरी जानकारी के लिए उन्हें दूसरों की मदद लेनी पड़ती थी। महतारी वंदन योजना के तहत हर माह मिलने वाली राशि में से कुछ हिस्सा नियमित रूप से बचाकर उन्होंने अपने लिए स्मार्टफोन खरीदा। अब वे इससे नई नई जानकारियां हासिल करने के साथ आसपास के लोगों के साथ साझा करने और विभिन्न समस्याओं के निराकरण में मदद करती हैं।सीमित संसाधनों के कारण श्रीमती कुमारी के लिए नया फोन खरीदना कठिन था। महतारी वंदन योजना की सहायता राशि मिलने पर उन्होंने थोड़ी-थोड़ी बचत शुरू की। कुछ महीनों बाद जमा रकम से स्मार्टफोन खरीदा और उसका उपयोग करना सीखा। अब वे मोबाइल पर देश-दुनिया की खबरें देखती हैं और सरकारी योजनाओं तथा डिजिटल सेवाओं के बारे में जानकारी जुटाती हैं।श्रीमती कुमारी अपने आसपास के लोगों, विशेषकर बुजुर्गों को भी जरूरत पड़ने पर जानकारी खोजने में मदद करती हैं। किसी योजना की जानकारी हो या कोई अन्य जरूरी सूचना, वे मोबाइल के माध्यम से उसे उपलब्ध कराने का प्रयास करती हैं। अपनी जरूरत के लिए खरीदा गया स्मार्टफोन अब उनके लिए दूसरों के काम आने का माध्यम भी बन गया है।
- रायपुर। हर परिवार का सपना होता है कि उसका अपना ऐसा घर हो, जहां परिवार सुरक्षित वातावरण में रह सके और मौसम की चुनौतियों की चिंता न हो। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए इस सपने को पूरा करने में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के माध्यम से पात्र परिवारों को आवास निर्माण के लिए सहायता मिल रही है, जिससे कच्चे और असुरक्षित मकानों से निकलकर अनेक परिवार अपने पक्के आशियाने में पहुंच रहे हैं।शहरों में योजना से लाभान्वित परिवारों के अनुभव बताते हैं कि पक्का मकान मिलने से उनके रहन-सहन में सकारात्मक बदलाव आया है। कोरबा के पोड़ीबहार निवासी श्री आनंद राम लंबे समय से कच्चे मकान में रह रहे थे। बारिश के दिनों में टपकती छत, सीलन और जहरीले जीव-जंतुओं का डर परिवार की परेशानी बढ़ाता था। आवास स्वीकृत होने और किश्तों में सहायता प्राप्त होने के बाद उन्होंने निर्माण शुरू किया। आज उनका पक्का घर परिवार को सुरक्षा और सुकून दे रहा है। वे इसे अपने परिवार के बेहतर भविष्य की नींव बताते हैं।कोसाबाड़ी की श्रीमती ललिता रजक ने भी बरसों से पक्के घर का सपना संजोया था। खराब आर्थिक परिस्थितियों के कारण मकान निर्माण कठिन था। योजना के सहयोग से उनका यह सपना पूरा हुआ और परिवार को स्थायी आवास के साथ सुरक्षा, सुविधा एवं आत्मविश्वास का अनुभव मिला। वे अपने पक्के घर को परिवार की खुशियों और सुरक्षित भविष्य का आधार मानती हैं।काशीनगर निवासी श्रीमती गुंजा साहू का परिवार भी लंबे समय तक कच्चे मकान में रहा। बारिश के दौरान पानी टपकने और सीलन की समस्या के साथ सांप-बिच्छुओं का डर बना रहता था। पीएम आवास (शहरी) 2.0 के तहत उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की सहायता मिली। अपनी बचत राशि के साथ उन्होंने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया। आज उनका परिवार सुरक्षित वातावरण में सुकून से रह रहा है।छुरीकला नगर पंचायत के श्री सुनील कुमार तिवारी के परिवार की कहानी भी आवास योजना से आए बदलाव को सामने रखती है। वे मिट्टी से बने दो कमरों के मकान में पत्नी और बेटी के साथ रहते थे। सीमित आय के बीच पक्का मकान बनाना कठिन था। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 2.26 लाख रुपये की स्वीकृत लागत में केंद्रांश और राज्यांश की सहायता प्राप्त हुई, जिसके बाद उनका पक्का घर तैयार हुआ। वे कहते हैं कि योजना ने उनके परिवार को सुरक्षित आवास के साथ बेहतर भविष्य की उम्मीद दी है।पथर्रीपारा निवासी श्री सनातन प्रसाद पाठक भी पहले कच्चे मकान में रहते थे। ठेका मजदूरी से परिवार का भरण-पोषण करने वाले श्री पाठक के लिए हर बारिश चिंता लेकर आती थी। योजना का लाभ मिलने के बाद उनका पक्का मकान तैयार हुआ और परिवार को मौसम की परेशानियों से राहत मिली। इसी क्षेत्र के श्री धरम लाल ध्रुव के परिवार ने भी योजना के सहयोग से अपना पक्का घर बनाया। उनका कहना है कि मजबूत छत और दीवारों वाले घर में अब परिवार सुरक्षित और सुकून से रह रहा है।लाभार्थी परिवारों ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति योजना के संचालन तथा जरूरतमंद परिवारों तक इसका लाभ पहुंचाने के लिए आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि आवास निर्माण के लिए मिली सहायता ने उनके वर्षों पुराने सपने को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया है।प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) से नगरीय निकायों के आर्थिक रूप से कमजोर अनेक परिवारों को आवास निर्माण का सहारा मिल रहा है। किसी के लिए यह वर्षों पुराने सपने का पूरा होना है, तो किसी के लिए परिवार की सुरक्षा और स्थायित्व की नई शुरुआत। पक्के आशियाने के साथ इन परिवारों के जीवन में सुविधा, आत्मविश्वास और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद जुड़ रही है।
- -मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठकरायपुर /छत्तीसगढ़ सरकार राज्य की प्राकृतिक धरोहरों को संवारने और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक बड़ी परियोजना पर कार्य कर रही है। रायपुर के अटारी स्थित प्रसिद्ध नंदनवन को पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल के तहत नए और आकर्षक स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इस कायाकल्प योजना पर लगभग 50 करोड़ रूपए की लागत आएगी।मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नंदनवन पुनर्विकास की प्रस्तावित परियोजना के प्रस्ताव का प्रस्तुतिकरण किया गया। जिसका नंदन वन पीपीपी समिति द्वारा अनुमोदन किया गया। बैठक में नंदनवन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और इसे पर्यावरण व पर्यटन के एक बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में चर्चा की गई।पीपीपी मॉडल पर आधारित योजना के अंतर्गत नंदनवन को आधुनिक एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए सार्वजनिक-निजी सहभागिता ली जाएगी। बॉटनिकल गार्डन का पुनर्विकास, प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए बॉटनिकल गार्डन को नए सिरे से संवारा जाएगा। परिसर में पर्यटकों के लिए विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा, स्वच्छ सुविधाएं और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। बच्चों और परिवारों के मनोरंजन के लिए नए आकर्षण और गतिविधियां जोड़ी जाएंगी। सुशासन नीति के तहत राज्य सरकार छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करते हुए पर्यटन के क्षेत्र को नई गति दे रही है। नंदनवन का यह पुनर्विकास प्रकृति, पर्यावरण और आधुनिक जन-सुविधाओं का एक बेहतरीन संगम साबित होगा, जिससे स्थानीय व बाहरी पर्यटकों के अनुभव में बड़ा सुधार आएगा।बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री मनोज कुमार पिंगुआ, पीसीसीएफ श्री अरूण कुमार पांडेय, विधि एवं विधायी विभाग के प्रमुख सचिव श्री मनीष कुमार ठाकुर, नीति आयोग के सदस्य श्री आशीष भट्ट, वित्त विभाग सहित समीति के अन्य सदस्य एवं अन्य विभागों के प्रमुख अधिकारी शामिल हुए।
- -सेवा मेरा योगदान के तहत सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों ने स्वच्छता, जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेशमहासमुंद / सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ पहल के तहत जल संरक्षण, स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आज जिला मुख्यालय महासमुंद के वार्ड क्रमांक 27 स्थित बंधवा तालाब में विशेष स्वच्छता अभियान, जल स्रोत जागरूकता कार्यक्रम एवं वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। सुबह 8 बजे आयोजित इस कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूप कुमारी चैधरी, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा सहित जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन, नगरपालिका, स्थानीय नागरिकों तथा विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। जिले के सभी नगरीय निकायों में भी जल स्रोतों का संरक्षण, स्वच्छता अभियान एवं वृक्षारोपण किया गया।कार्यक्रम में सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा, पूर्व विधायक डॉ. विमल चोपड़ा, छत्तीसगढ़ राज्य बीज विकास निगम के अध्यक्ष श्री चंद्रहास चंद्राकर, जिला स्काउट एवं गाइड संघ के जिलाध्यक्ष श्री ऐतराम साहू, नगरपालिका उपाध्यक्ष श्री देवीचंद राठी, जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती हुलसी चंद्राकर, जनपद सदस्य श्रीमति निधि चंद्राकर, श्री प्रदीप चंद्राकर, श्री महेन्द्र सिक्का, राहुल चंद्राकर, पीयूष साहू, महेंद्र जैन, भाऊ राम साहू, प्रकाश शर्मा, श्रीमती मीना वर्मा सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों एवं नागरिकों ने स्वयं श्रमदान करते हुए तालाब परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों में स्वच्छता अभियान चलाया। जनप्रतिनिधियों ने हाथों में झाड़ू लेकर कचरा एवं अन्य अपशिष्ट पदार्थों की सफाई की और नागरिकों को सार्वजनिक स्थलों तथा जल स्रोतों को स्वच्छ रखने का संदेश दिया। इस अवसर पर कलेक्टर श्री विनय लंगेह, जिला पंचायत सीईओ सुश्री अनुपमा आनंद, अपर कलेक्टर श्री रवि साहू सहित जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।इस अवसर पर सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि जल स्रोत हमारे जीवन का आधार हैं। उन्होंने कहा कि जल स्त्रोतों की स्वच्छता और संरक्षण केवल शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। यदि हम अपने आसपास के तालाब, कुएं और अन्य जल स्रोतों को स्वच्छ रखेंगे तथा उनमें कचरा जाने से रोकेंगे, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल का बेहतर संरक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा। सांसद ने नागरिकों से आह्वान किया कि वे स्वच्छता अभियान को केवल एक दिन का कार्यक्रम न मानकर इसे अपनी दैनिक आदत और सामूहिक जिम्मेदारी बनाएं। उन्होंने कहा कि जल का विवेकपूर्ण उपयोग, वर्षा जल का संरक्षण, प्लास्टिक एवं अन्य कचरे का उचित निपटान और अधिक से अधिक पौधरोपण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।विधायक श्री योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का कार्य किसी एक व्यक्ति या संस्था तक सीमित नहीं है। जनभागीदारी से ही स्वच्छ, सुंदर और हरा-भरा महासमुंद बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तालाब हमारे पारंपरिक जल स्रोत हैं और इनके संरक्षण से भूजल स्तर बनाए रखने के साथ पर्यावरणीय संतुलन को भी मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि तालाब एवं अन्य जल स्रोतों में कचरा, प्लास्टिक और गंदगी न डालें तथा अपने आसपास के सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करें। उन्होंने कहा कि आज किया गया श्रमदान और वृक्षारोपण आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण आधार बनेगा। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से सेवा, सहभागिता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।स्वच्छता अभियान के बाद बंधवा तालाब परिसर में जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों द्वारा वृक्षारोपण किया गया। इस दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने जल स्रोतों को स्वच्छ एवं सुरक्षित रखने, जल का अपव्यय रोकने तथा उपलब्ध जल का विवेकपूर्ण उपयोग करने का संकल्प भी लिया।
- -शहर को पेयजल, सामुदायिक भवन, अधोसंरचना और अमृत मिशन सहित विभिन्न विकास कार्यों की मिली बड़ी सौगात-विकास कार्यों के लिए 5 करोड़ की घोषणा-नगरीय निकायों के विकास के लए राशि की कमी नहीं होगी - श्री अरुण सावरायपुर. । . उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री श्री अरुण साव ने आज सरायपाली के नई मंडी प्रांगण में आयोजित लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सरायपाली नगर पालिका क्षेत्र के लिए 23 करोड़ 28 लाख 61 हजार रुपए के विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं 154 करोड़ 88 लाख रुपए की लागत के विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर क्षेत्रवासियों को पेयजल, सामुदायिक भवन, अधोसंरचना और अमृत मिशन सहित विभिन्न विकास कार्यों की सौगात मिली। सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, विधायक श्रीमती चातुरी नंद, छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष श्री रामलाल चौहान और छत्तीसगढ़ शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री राजेंद्र नायक भी कार्यक्रम में शामिल हुए।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने कार्यक्रम में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के जल जीवन मिशन अंतर्गत रेट्रो फिटिंग एवं एकल ग्राम योजना के कुल 24 ग्रामों में पेयजल सुविधा के लिए 1818. 61 लाख रुपये के कार्यों तथा 510 लाख रुपये के विभिन्न वार्डों में सामुदायिक भवनों एवं अन्य निर्माण कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने एसटीपी निर्माण से संबंधित 10.21 करोड़ रुपये तथा जल प्रदाय अमृत मिशन 2.0 अंतर्गत 139.55 करोड़ रुपए के विकास कार्यों एवं 512 लाख रुपये के विभिन्न विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन भी किया।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने लोकार्पण और भूमिपूजन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कोई भी शुभ कार्य होता है तो इंद्रदेव का आशीर्वाद मिलता है। आज वर्षा के रूप में भी हमें आशीर्वाद मिल रहा है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार विकास और जनसुविधाओं से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में अभूतपूर्व विकास कार्य हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जिस कार्य का भूमिपूजन करती है, उसका लोकार्पण भी हमारी ही सरकार करती है। विकास कार्यों को समयबद्ध रूप से पूरा कर जनता को उसका लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के माथे पर नक्सलवाद का कलंक था, जिसे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि लोक निर्माण विभाग द्वारा ढाई वर्ष में लगभग 12 हजार 666 करोड़ रुपये के विकास कार्य किए गए हैं।उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ-साथ अब सरायपाली का विकास भी तीव्र गति से हो रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सुशासन की सरकार में लगातार विकास के काम हो रहे है। देश की दशा और दिशा बदलने का काम हमारी डबल इंजन की सरकार कर रही है। उन्होंने कहा कि सरायपाली के विकास के लिए पैसों की कोई कमी नही होगी। उप मुख्यमंत्री ने सांसद की मांग पर क्षेत्र के विकास के लिए 5 करोड़ रुपए देने की घोषणा की।सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी ने कहा कि उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव द्वारा बिना भेदभाव के सभी क्षेत्रों में विकास कार्य कराए जा रहे हैं, जिसका लाभ आम जनता को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही रेल लाइन की मांग की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ा है और अब सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। विधायक श्रीमती चातुरी नंद ने अमृत मिशन 2.0 की स्वीकृति के लिए उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह केवल पानी की योजना नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों के जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण सौगात है। महानदी का पानी जब घर-घर पहुंचेगा, तो इसका लाभ बड़ी संख्या में लोगों को मिलेगा। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय सहित इस कार्य से जुड़े सभी अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया। राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया, स्काउट गाइड संघ के जिलाध्यक्ष श्री ऐतराम साहू, नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती चंद्र, उपाध्यक्ष श्री हेमंत प्रधान और कलेक्टर श्री विनय कुमार लंगेह सहित जनप्रतिनिधि, पार्षदगण, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक भी कार्यक्रम में मौजूद थे।
- -सेवा संकल्प अभियान के तहत आयोजित सामूहिक भोज में समानता, सहभागिता और अपनत्व का दिया संदेशरायपुर / सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में सामाजिक सहभागिता और समरसता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘नेवता भोज’ का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के तहत मल्टीपर्पस स्कूल पेंड्रा के असेंबली हॉल में आयोजित नेवता भोज में आयुर्वेद दिवस पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर एवं कार्यशाला में शामिल बैगा पुजारियों, ग्रामीणजनों, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने एक साथ बैठकर सामूहिक रूप से भोजन किया। सामूहिक भोज के इस आयोजन ने समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का सकारात्मक संदेश दिया।नेवता भोज के दौरान जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों, बैगा पुजारियों और ग्रामीणों ने एक साथ भोजन कर सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत किया। एक ही पंक्ति में साथ बैठकर भोजन करने की यह पहल सामाजिक दूरी को कम करने और समाज के विभिन्न वर्गों के बीच संवाद एवं आत्मीयता बढ़ाने का माध्यम बनी।कार्यक्रम में विधायक श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, जिला पंचायत अध्यक्ष सुश्री समीरा पैकरा, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेंद्र बहादुर सिंह, कलेक्टर श्री विजय दयाराम के., पुलिस अधीक्षक श्री मनोज खिलारी, वनमंडलाधिकारी श्री कुमार निशांत, जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे सहित जनप्रतिनिधिगण, अधिकारी-कर्मचारी, बैगा पुजारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए।नेवता भोज की विशेषता यह रही कि इसमें समाज के विभिन्न वर्गों ने बिना किसी भेदभाव के एक साथ बैठकर भोजन किया। इससे आपसी अपनत्व और सामुदायिक भावना को बढ़ावा देने के साथ यह संदेश भी गया कि सामूहिक सहभागिता से सामाजिक समरसता को और मजबूत किया जा सकता है।कार्यक्रम के दौरान बैगा पुजारियों एवं ग्रामीणजनों की सहभागिता ने आयोजन को स्थानीय सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भ से भी जोड़ा। जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ उनके सामूहिक रूप से भोजन करने से संवाद और सहभागिता का वातावरण बना। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने सामाजिक सद्भाव और एकजुटता को मजबूत करने वाले ऐसे आयोजनों को महत्वपूर्ण बताया।प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना के अंतर्गत आयोजित नेवता भोज का उद्देश्य सामुदायिक सहभागिता की भावना को बढ़ावा देना है। सेवा संकल्प अभियान के साथ आयोजित इस कार्यक्रम ने इस उद्देश्य को सामाजिक संवाद और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से सामने रखा।नेवता भोज के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि समाज की वास्तविक शक्ति आपसी सहयोग, सम्मान, समानता और सहभागिता में निहित है। जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी, बैगा पुजारी और ग्रामीण एक साथ बैठकर भोजन करते हैं, तो यह केवल भोजन का आयोजन नहीं रहता, बल्कि आपसी विश्वास और सामाजिक जुड़ाव को मजबूत करने का अवसर बन जाता है। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित यह नेवता भोज सामाजिक समरसता, सामुदायिक भावना और जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में सामने आया। सामूहिक भोज में सभी वर्गों की सहभागिता ने ‘साथ चलें, साथ बढ़ें’ की भावना को मजबूत करते हुए समानता, अपनत्व और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया।
- -शिकायत पर तत्काल कार्रवाई, अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर जब्तरायपुर / मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन-प्रशासन तक आम नागरिकों की शिकायतों की पहुंच और उनके समयबद्ध निराकरण पर जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त एक शिकायत पर खनिज विभाग द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए अवैध रेत परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया है।कलेक्टर श्री विजय दयाराम के. के निर्देशानुसार गौरेला पेन्ड्रा मरवाही जिले में अवैध रेत खनन एवं परिवहन के विरुद्ध खनिज विभाग द्वारा लगातार निगरानी और कार्रवाई की जा रही है। सीएम हेल्पलाइन में अवैध रेत परिवहन से संबंधित शिकायत प्राप्त होने पर खनिज विभाग की टीम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए कोलबिर्रा, पथर्रा एवं मटियाडाड़ क्षेत्र में जांच एवं कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान अवैध रेत परिवहन में संलिप्त पाए गए 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया गया।जब्त किए गए सभी वाहनों को कोटमी चौकी में सुरक्षित रखा गया है। मामले में संबंधित वाहन मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के प्रावधानों के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। खनिज विभाग द्वारा अवैध खनन एवं परिवहन से जुड़े मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से प्राप्त शिकायत पर हुई इस त्वरित कार्रवाई से यह भी स्पष्ट होता है कि नागरिकों द्वारा दर्ज कराई गई शिकायतों को संबंधित विभागों तक पहुंचाकर उनके निराकरण की प्रक्रिया को प्रशासनिक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। राज्य के आधिकारिक डिजिटल सेवा तंत्र में शिकायत पटल और आवेदन की स्थिति ट्रैक करने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिससे नागरिक शासकीय सेवाओं और शिकायतों से संबंधित प्रक्रिया की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा जनसमस्याओं के निराकरण को शासन की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया है। खनिज विभाग की इस कार्रवाई से अवैध रेत परिवहन पर निगरानी और शिकायतों के आधार पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया को बल मिला है। जिले में खनिज संसाधनों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागीय स्तर पर कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।
- -प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, हस्तशिल्प, होमस्टे और इको-टूरिज्म से स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था को मिल रहा विस्तार-बस्तर में पर्यटन संभावनाओं का नया अध्यायरायपुर / छत्तीसगढ़ का बस्तर अब अपनी नई पहचान गढ़ रहा है। कभी नक्सलवाद और हिंसा के संदर्भ में चर्चा में रहने वाला यह क्षेत्र आज अपनी प्राकृतिक सौंदर्य, समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, परंपराओं और आतिथ्य के कारण पर्यटन के नए केंद्र के रूप में उभर रहा है। बदलते वातावरण के साथ बस्तर में पर्यटन, इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय उद्यमिता के नए अवसर आकार ले रहे हैं।बस्तर की सबसे बड़ी विशेषता यहां प्रकृति और संस्कृति का अद्भुत संगम है। चित्रकोट और तीरथगढ़ जलप्रपात, कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान, कुटुमसर एवं कैलाश गुफाएं, मां दंतेश्वरी मंदिर, दलपत सागर और बस्तर पैलेस जैसे स्थल पर्यटकों को प्रकृति, रोमांच, अध्यात्म और इतिहास का अनूठा अनुभव देते हैं। यहां आने वाला पर्यटक केवल दर्शनीय स्थल नहीं देखता, बल्कि स्थानीय जीवन, पारंपरिक खान-पान, हस्तशिल्प, लोकनृत्य और संगीत से भी जुड़ता है। यही कारण है कि बस्तर को केवल पर्यटन स्थल के रूप में नहीं, बल्कि अनुभव आधारित पर्यटन के एक विशिष्ट क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।पर्यटन के विस्तार के लिए बेहतर कनेक्टिविटी महत्वपूर्ण आधार है। बस्तर में सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने के प्रयास पर्यटन की संभावनाओं को नई गति दे रहे हैं। ‘बस्तर 2.0’ ब्लूप्रिंट में 228 नई सड़कों और 267 पुलों के निर्माण का प्रस्ताव दूरस्थ क्षेत्रों तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।जगदलपुर स्थित मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट बस्तर को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वर्तमान में रायपुर और हैदराबाद के लिए हवाई संपर्क उपलब्ध है। वहीं रावघाट-जगदलपुर रेल परियोजना जैसी योजनाएं भविष्य में क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने की संभावनाएं रखती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ केवल पर्यटकों को ही नहीं मिलेगा। इससे स्थानीय उत्पादों को बाजार, ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर संपर्क और युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार के नए अवसर मिल सकते हैं।बस्तर में ग्रामीण और जनजातीय होमस्टे पर्यटन विकास की महत्वपूर्ण कड़ी बन है। छत्तीसगढ़ होमस्टे नीति 2025-30 के माध्यम से पर्यटकों को स्थानीय परिवारों के साथ रहकर ग्रामीण जीवन, जनजातीय संस्कृति, स्थानीय कला, हस्तशिल्प और पारंपरिक खान-पान का अनुभव देने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।होमस्टे की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि पर्यटन का आर्थिक लाभ सीधे स्थानीय परिवारों तक पहुंच रहा है। पर्यटकों के ठहरने के साथ भोजन, स्थानीय गाइड, परिवहन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से आसपास के अन्य परिवारों के लिए भी आय के अवसर बन रहे हैं।बस्तर में नए कमरे के निर्माण पर प्रति कमरा 1 लाख रुपये और पूर्व से निर्मित कमरे के नवीनीकरण पर प्रति कमरा 50 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है। न्यूनतम एक से अधिकतम नौ कमरों तक सहायता की व्यवस्था से ग्रामीण परिवार अपनी क्षमता के अनुसार पर्यटन गतिविधियों से जुड़ सकते हैं। वर्तमान में 85 हितग्राहियों को अनुदान हेतु बैंको को प्रस्ताव भेजी जा चुका है तथा 27 होमस्टे पूर्व से छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के साथ पंजीकृत हैं।बस्तर की जनजातीय संस्कृति उसकी सबसे बड़ी विशिष्टताओं में शामिल है। बेलमेटल और धातु शिल्प, लकड़ी एवं बांस की कला, पारंपरिक आभूषण, नृत्य, संगीत और खान-पान देश-दुनिया के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इस सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच दे रहे हैं। वर्ष 2026 के बस्तर पंडुम में जनजातीय संस्कृति की 12 विधाओं को मंच मिला और लगभग 55 हजार आदिवासी लोगों की सहभागिता हुई। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का अवसर दिया।बस्तर में धार्मिक, सांस्कृतिक, इको और एडवेंचर पर्यटन की संभावनाएं एक साथ मौजूद हैं। मां दंतेश्वरी मंदिर और बस्तर दशहरा आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को आधार देते हैं, वहीं कांगेर घाटी और धुड़मारास जैसे क्षेत्र प्रकृति एवं रोमांच आधारित पर्यटन के लिए नए अवसर प्रस्तुत करते हैं।धुड़मारास में एडवेंचर पर्यटन, ग्लास ब्रिज और कैनोपी वॉक जैसी सुविधाओं की योजना तथा गांव का यूएन टूरिज्म बेस्ट टूरिज्म विलेज डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए चयन ग्रामीण पर्यटन की संभावनाओं को नई पहचान दे रहा है।बस्तर के पर्यटन विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसका लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। होमस्टे संचालक, पर्यटन गाइड, स्थानीय ड्राइवर, भोजन सेवा, हस्तशिल्प विक्रेता, सांस्कृतिक कलाकार और साहसिक पर्यटन से जुड़े युवा इस नई पर्यटन अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।बस्तर के पर्यटन रोडमैप के अंतर्गत 45 युवाओं को पर्यटन प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया गया है। यह संकेत है कि पर्यटन को केवल दर्शनीय स्थलों के विकास तक सीमित न रखकर स्थानीय कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने की दिशा में भी काम हो रहा है।बस्तर का पर्यटन ऐसे मॉडल में से एक है, जिसमें प्रकृति सुरक्षित रहे, जनजातीय संस्कृति की मौलिकता बनी रहे और पर्यटन से पैदा होने वाली आय का लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे। सड़कें बस्तर को जोड़ रही हैं, हवाई संपर्क दूरी कम कर रहा है, रेल कनेक्टिविटी की संभावनाएं विस्तार पा रही हैं, होमस्टे गांवों को पर्यटन अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे हैं और बस्तर पंडुम जैसे आयोजन इसकी सांस्कृतिक पहचान को देश के सामने ला रहे हैं।बस्तर अब केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह संभावनाओं का नया अध्याय है, जहां जंगलों की हरियाली, जलप्रपातों की सुंदरता, जनजातीय संस्कृति की जीवंतता और स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी मिलकर छत्तीसगढ़ के पर्यटन को नई दिशा दे रही है। बस्तर की नई पहचान अब उसके अतीत से नहीं, बल्कि शांति, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और स्थानीय विकास की नई संभावनाओं से लिखी जा रही है।
- - महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में हुआ हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ में राजमाता के ओजस्वी संवादों ने दर्शकों में भरा जोशरायपुर। ‘यह राजपाट, यह धन-दौलत और यह वैभव मेरा नहीं है। मैं तो केवल ईश्वर की प्रतिनिधि हूं। यह साम्राज्य प्रजा की धरोहर है। इस सिंहासन पर बैठकर यदि मैंने अपनी प्रजा के आंसुओं को नहीं पोंछा, तो मैं ईश्वर के सामने क्या मुंह दिखाऊंगी? राजा का पहला और अंतिम धर्म केवल प्रजा की सेवा और सुरक्षा करना है।‘ इन ओजस्वी संवादों ने दर्शकों तो तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। मौका था महाराष्ट्र मंडल में आयोजित शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में आयोजित हिंदी नाटक ‘गगन की ओर निशाना’ के मंचन का।दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के तत्वावधान में भूमिका नाट्य समूह नाटक भोपाल की ओर से प्रस्तुत ‘गगन की ओर निशाना’ में हर आयुवर्ग के कलाकारों ने प्रभावी अभिनय किया। लेखक व निर्देशन गोपाल दुबे ने बताया कि अहिल्या बाई होल्कर की कहानी को वर्तमान परिदृश्य से जोड़कर मंचित किया गया। जिसमें दो युवा मध्य प्रदेश के महेश्वर शहर में स्थित अहिल्या बाई होल्कर के किले के सामने बैठकर संवाद करते दिखाए गए। तभी एक बुजुर्ग उन्हें अहिल्या बाई होल्कर की कहानी बताता है।मंचन में छोटी अहिल्या का किरदार मिहिका शाह, बड़ी अहिल्या के रूप में प्रीति झा और युवा अहिल्या का किरदार दुर्गा ने निभाया। तीनों ही कलाकारों ने अपने अपने संवादों से दर्शकों को प्रभावित किया। वहीं संदीप शर्मा, रुपेश तिवारी, आशीर्वाद झा, प्रीति झा तिवारी, यशिल दुबे, रंजीत ठाकुर, शिव रघुवंशी, संगीता ठाकुर, अकुल खरे, दुर्गा सिंह, आशीर्वाद झा, भूमिका शर्मा, उद्देश्य अगरैया, लोकेंद्र प्रताप सिंह, कार्तिक वानखेड़े, संदीप शर्मा, रुपेश तिवारी, गोपाल दुबे, गुंजन श्रीवास्तव, विदुषी, लोकेंद्र, जितेंद्र परमार, निश्चय दुबे, कार्तिक वानखेड़े नजर आए। वहीं परदे के पीछे मंच व्यस्थापक आशीर्वाद झा, मंच परिकल्पना जितेंद्र परमार, वेशभूषा भूमिका दुबे, प्रकाश परिकल्पक तानाजी, पोस्टर भूमिका दुबे, संगीत संदीप शर्मा और तालवृंद सुरेंद्र वानखेड़े ने सहभागिता निभाई।
- रायपुर। महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में मुख्य लॉबी में प्रतिष्ठित श्रीगणेश की पूजा आईएएस अफसर रीना बाबा साहब कंगाले ने सपरिवार की। दक्षिण मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र नागपुर के तत्वावधान में मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह के कुमुदिनी वरवंडकर रंगमंच पर मराठी फिल्म सितारों से सुसज्जित सुप्रसिद्ध नाटक ‘आता थाबावचं कसं’ में मुख्य अतिथि रीना कंगाले ने महाराष्ट्र मंडल के इस भव्य आयोजन की जमकर प्रशंसा की और कहा कि हम भी सौभाग्यशाली है कि मंडल के सभागृह में हमें इतना जबर्दस्त नाटक देखने को मिल रहा है।इससे पहले खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग, वाणिज्यिक कर (आबकारी ) विभाग की सचिव रीना कंगाले का मंडल अध्यक्ष अजय मधुकर काले, उपाध्यक्ष गीता दलाल और सचिव चेतन गोविंद दंडवते ने रीना कंगाले का सूत, शाल, श्रीफल से सम्मान किया। बताते चलें कि गत कई वर्षों से रीना कंगाले महाराष्ट्र मंडल गणेशोत्सव में किसी एक दिन श्रीगणेश के समक्ष अपनी उपस्थित जरूर देती हैं।
- रायपुर। स्नेहा जोशी ने बेहद जटिल और काफी हद तक क्लासिकल मराठी गाने ‘प्रियकरा’ की बेहतरीन प्रस्तुति में साईंनाथ रमेश की सहभागिता भी गजब की रही। यह गाना महाराष्ट्र मंडल के संत ज्ञानेश्वर सभागृह में बैठे संगीतप्रेमी दर्शकों को इतना भाया कि उनकी ओर से वंस मोर की मांग उठी। जिसे पूरी विनम्रता से स्नेहा और साईंनाथ ने पूरा किया भी।बात हो रही है महाराष्ट्र मंडल में शहीद मेजर यशवंत गोरे स्मृति गणेशोत्सव में छठवें दिन भिलाई के अलंकार ग्रुप के मराठी संगीतमय कार्यक्रम की। वंस मोर की मांग एक गाने पर ही नहीं थमी, बल्कि स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’, और पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’ पर भी उठी, जिसे गायकों ने मुखड़ा गाकर पूरा किया। एक से बढ़कर एक मराठी भाव गीतों व फिल्मी गानों से सजे इस कार्यक्रम को संगीत के शौकीन दर्शक लंबे समय तक याद रखेंगे। कार्यक्रम में चार चांद लगाने के लिए कुछ हास्य प्रहसन की प्रस्तुतियां भी शामिल की गईं।कार्यक्रम की शुरुआत अजय लोंढे के प्रस्तुत हृदय स्पर्शी गीत ‘सुर निरागस हो’ से हुई। तत्पश्चात श्रीकांत देव ने ‘गारवा’, स्नेहा जोशी ने ‘रुपेरी वाळूत’ और अजय लोंढे ने ‘मन उधाण वाऱ्याचे’ प्रस्तुत कर वातावरण को सुरमयी बना दिया। पूजा नालमवार के ‘अधीर मन झाले’, आशीष करमरकर के ‘राधा ही बावरी’ और स्नेहा जोशी के ‘अप्सरा आली’ ने दर्शकों की विशेष वाहवाही बटोरीं।इसके बाद दिलीप पाठक ने ‘गुलाबी साड़ी’ और साईनाथ रमेश अय्यर ने ‘येड़ लागलंय’ प्रस्तुत कर कार्यक्रम में और रंग भर दिया। आशीष करमरकर और रेवती जोशी की ‘गोमू संगतीने’, श्रीकांत देव और स्नेहा जोशी की ‘जीव रंगला दंगला’ और दिलीप पाठक और पूजा नालमवार की ‘मी डोलकर’ प्रस्तुतियों पर भी रसिकों ने खूब एंजॉय किया। अजय लोंढे और रेवती जोशी का ‘बहरला हा मधुमास’, साईनाथ रमेश एवं स्नेहा जोशी का ‘प्रियकरा’ और अंत में स्नेहा जोशी, पूजा नालमवार और रेवती जोशी द्वारा प्रस्तुत ‘दिसला ग बाई दिसला’ ने कार्यक्रम का समापन उत्साह और उमंग से भरपूर वातावरण में किया।कार्यक्रम में प्रस्तुत दो हास्य नाटिकाओं ने इस 'संगीतमय परिवार' में एक अलग ही रंग भर दिया। रेवती जोशी और स्मिता फडे़ द्वारा प्रस्तुत सास-बहू के रिश्ते पर आधारित हास्य प्रसंग ने दर्शकों को हंसाया। वहीं दूसरी हास्य नाटिका के माध्यम से हास्य के साथ सामाजिक जागरूकता का सुंदर संदेश दिया गया। मनोरंजन के साथ समाजोपयोगी संदेश देने का यह प्रयास विशेष रूप से सराहनीय रहा। सभी कलाकारों ने अपनी- अपनी प्रस्तुतियों में स्वर की मधुरता, अभिनय की सहजता, नृत्य की स्फूर्ति और मंच पर आत्मविश्वास का सुंदर समन्वय प्रस्तुत किया। कार्यक्रम के निर्देशक हर्षवर्धन वझे ने प्रत्येक कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने का भरपूर अवसर दिया।
- बिलासपुर/एकीकृत बाल विकास परियोजना बिलासपुर शहरी अंतर्गत प्रियदर्शनी नगर वार्ड 28 के आंगनबाड़ी केंद्र 54 पुराना टंकी के पास तारबहार में आंगनबाड़ी सहायिका के रिक्त पद पर 8 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाईन आवेदन किये जा सकते है। इच्छुक एवं पात्र आवेदिका ई-भर्ती ऑनलाईन लिंक https://aww.e-bharti.in/login में जाकर अनिवार्य दस्तावेजों की फाइल अपलोड कर आवेदन कर सकती है।
- स्वच्छता के लिए जनभागीदारी जरूरी, मिलकर बदलें शहर की तस्वीर : विधायक*स्वच्छता अभियान नहीं, जीवन का संकल्प बनाएं : विधायक श्री सुशांत शुक्ला*बिलासपुर/सेवा संकल्प अभियान के तहत जनसेवा, जनभागीदारी और सेवा भावना को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न सेवा गतिविधियां आयोजित की जा रही है। इसी क्रम में आज छठ घाट पर स्वच्छता एवं पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। तखतपुर विधायक श्री धर्मजीत सिंह, बेलतरा विधायक श्री सुशांत शुक्ला, कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी सहित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने छठ घाट की साफ-सफाई की। इस दौरान महापौर ने उपस्थित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में पौधारोपण कर स्वच्छता के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।विधायक श्री धर्मजीत सिंह ने कहा कि स्वच्छ और साफ-सुथरे शहर में लोग आना पसंद करते हैं। बिलासपुर को स्वच्छता के क्षेत्र में और आगे ले जाने के लिए जनता की भागीदारी जरूरी है। उन्होंने नागरिकों से अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखने तथा गंदगी फैलाने वालों को रोकने के लिए जागरूक करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नागरिक स्वयं जागरूक होकर स्वच्छता की जिम्मेदारी निभाएं और इसे जनआंदोलन का रूप दें। विधायक श्री सुशांत शुक्ला ने कहा कि स्वच्छता केवल अभियान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे जीवन का संकल्प बनाना होगा। जिस तरह हम अपने घर को स्वच्छ रखते हैं, उसी भावना से मोहल्ले, गांव और सार्वजनिक स्थानों को भी साफ रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सेवा संकल्प का उद्देश्य केवल प्रशासन की गतिविधियों तक सीमित नहीं है। जनभागीदारी के माध्यम से इसे जनआंदोलन का रूप देना होगा। प्रत्येक नागरिक स्वयं गंदगी नहीं फैलाने और दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करने का संकल्प ले।कार्यक्रम में नगर निगम कमिश्नर श्री प्रकाश कुमार सर्वे, सीईओ जिला पंचायत श्री संदीप अग्रवाल, श्री मोहित जायसवाल, पार्षद श्री श्याम साहू, एडिशनल कमिश्नर श्री खजांची कुमार, अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने छठ घाट की साफ-सफाई में सहभागिता निभाई तथा पौधारोपण कर स्वच्छ एवं हरित शहर के लिए सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।
- - डॉ. दिनेश मिश्रअध्यक्ष, अंधश्रद्धा निर्मूलन समितिरायपुर/ शरद विषुव (Autumnal Equinox) पृथ्वी की खगोलीय व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण प्राकृतिक घटना है। यह हमें प्रकृति की अद्भुत व्यवस्था को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझने का अवसर देता है।शरद विषुव वह खगोलीय क्षण है जब सूर्य का प्रत्यक्ष Subsolar Point भूमध्य रेखा (Equator) पर पहुँचता है। इस समय सूर्य की किरणें भूमध्य रेखा पर लगभग लंबवत पड़ती हैं। इसके बाद सूर्य का प्रत्यक्ष मार्ग उत्तरी गोलार्ध से दक्षिणी गोलार्ध की ओर बढ़ता हुआ दिखाई देता है।इसके साथ ही उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म ऋतु से शरद ऋतु की ओर, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में शीत ऋतु से वसंत ऋतु की ओर ऋतु परिवर्तन का क्रम आगे बढ़ता है।दिन और रात लगभग बराबर‘Equinox’ का अर्थ Equal Night अर्थात ऐसी स्थिति है, जब दिन और रात की अवधि लगभग बराबर होती है। हालांकि, वायुमंडलीय अपवर्तन तथा सूर्योदय और सूर्यास्त की वैज्ञानिक परिभाषाओं के कारण अधिकांश स्थानों पर दिन और रात बिल्कुल 12-12 घंटे के नहीं होते।-भूमध्य रेखा पर ‘Zero Shadow’विषुव के आसपास भूमध्य रेखा पर दोपहर के समय सूर्य लगभग सिर के ठीक ऊपर दिखाई दे सकता है। इसलिए किसी सीधी खड़ी वस्तु की छाया उस समय बहुत छोटी हो सकती है और कुछ स्थानों पर लगभग ‘Zero Shadow’ जैसी स्थिति दिखाई दे सकती है।पृथ्वी की गति और ऋतु परिवर्तनऋतु परिवर्तन के पीछे वैज्ञानिक कारण हैं। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और उसकी धुरी लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। पृथ्वी के अक्षीय झुकाव और सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा के कारण वर्ष भर सूर्य की प्रत्यक्ष स्थिति तथा पृथ्वी के विभिन्न भागों में मिलने वाले सूर्य के प्रकाश की मात्रा बदलती रहती है।इसलिए सूर्य की स्थिति में होने वाले परिवर्तन, दिन-रात की अवधि और ऋतु-चक्र को किसी चमत्कार या अलौकिक घटना के रूप में देखने के बजाय इनके पीछे के वैज्ञानिक कारणों को समझना चाहिए।अंधविश्वास के स्थान पर वैज्ञानिक दृष्टिकोणप्रकृति में होने वाली प्रत्येक घटना को समझने के लिए जिज्ञासा, प्रश्न करने की प्रवृत्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण आवश्यक है। ग्रहण, विषुव, संक्रांति, ऋतु परिवर्तन या आकाशीय घटनाओं को लेकर समाज में प्रचलित भ्रांतियों और अंधविश्वासों को तथ्यों तथा वैज्ञानिक जानकारी के माध्यम से दूर किया जा सकता है।विज्ञान हमें डरना नहीं, समझना सिखाता है।प्रश्न करना सिखाता है, अंधविश्वास करना नहीं।अतः शरद विषुव के अवसर पर आइए हम प्रकृति की इस अद्भुत खगोलीय व्यवस्था को समझें और समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण एवं तर्कशील सोच को बढ़ावा दें।“प्रकृति को समझें, उसके रहस्यों को जानें।अंधविश्वास नहीं—वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएँ।
- रायपुर /छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रदेश में धान की खेती के क्षेत्रफल का सटीक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित आकलन करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। आज यहाँ मंत्रालय महानदी भवन में खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता सेटेलाइट-आधारित मैपिंग, डिजिटल क्रॉप सर्वे और भू-स्थानिक डेटा के बेहतर समन्वय से राज्य की धान उपार्जन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से किया गया है। गैर-जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों की मैपिंग विशेष रूप से वन अधिकार अधिनियम के तहत आबंटित भू-भागों और डुबान क्षेत्रों में स्थित ऐसे कृषि क्षेत्रों की पहचान कर उनकी जीआईएस आधारित पॉलीगॉन लेयर तैयार की जाएगी, जो वर्तमान में डिजिटल रूप से मैप नहीं हैं।खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए आकलन तैयार पॉलीगॉन लेयर और भू-स्थानिक डेटा के आधार पर आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान की फसल के वास्तविक रकबे का सटीक आकलन किया जाएगा। सेटेलाइट इमेजरी से सत्यापन अन्य जियो-रेफरेंस्ड क्षेत्रों में भूमि खंडों (खसरों) के अक्षांश-देशांतर का सेटेलाइट इमेजरी से मिलान कर धान की फसल की डिजिटल उपस्थिति की पुष्टि की जाएगी। इस तकनीकी पहल से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों एफआरए एवं डुबान क्षेत्र की कृषि भूमि की डिजिटल पहचान मजबूत होगी तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे के लिए एक मजबूत आधार ढाँचा तैयार होगा।इस दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव श्री सोनमणि बोरा, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव सुश्री रीना बाबा साहेब कंगाले, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की संचालक डॉ. फरिहा आलम एवं संचालक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद श्री कवीश्वर उपस्थित रहे।
- रायपुर / छत्तीसगढ़-शासन जल संसाधन विभाग द्वारा बेमेतरा जिले विभिन्न सिंचाई योजनाओं के कार्यों के लिए 28 करोड़ 49 लाख 81 हजार रुपये स्वीकृत किये गये हैं।जल संसाधन विभाग द्वारा स्वीकृत सिंचाई योजनाओं में बेमेतरा जिले के दनिया उद्वहन सिंचाई योजना का विस्तारीकरण कार्य के लिए 3 करोड़ 64 लाख 92 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 254 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। धनेली जलाशय के शीर्ष कार्य बण्डपार मुरमीकरण तथा नहर का रिमाडलिंग एवं लाईनिंग तथा पक्के कार्य के लिए 4 करोड़ 92 लाख 92 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 65 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। हरदी भिभौरी जलाशय का जीर्णोद्धार एवं नहर लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 97 लाख 65 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 344 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। छिरहा एनीकट का निर्माण कार्य के लिए 4 करोड़ 98 करोड़ 57 लाख रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 50 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। टेगना व्यपवर्तन का जीर्णोद्धार एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 98 लाख 29 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 150 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। टेमरी उद्वहन सिंचाई योजना लाईनिंग कार्य का मरम्मत तथा शेष मुख्य नहर एवं 5 माईनरों रिमाडलिंग एवं लाईनिंग कार्य के लिए 4 करोड़ 97 लाख 46 हजार रूपए स्वीकृत किए गए है। योजना के कार्य पूर्ण होने से 473 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी।
- -8 हजार से अधिक पदों पर मिलेंगे रोजगार के अवसर-अधिकाधिक युवाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने और व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देशरायपुर / प्रदेश के युवाओं को रोजगार के अधिकाधिक अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा राज्य स्तरीय रोजगार मेले का आयोजन 7 एवं 8 अक्टूबर 2026 को राजधानी रायपुर स्थित बलबीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में किया जाएगा। यह आयोजन मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मुख्य आतिथ्य में होगा। रोजगार मेले में तकनीकी एवं गैर-तकनीकी क्षेत्रों के 8 हजार से अधिक पदों की रिक्तियां में रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे ।कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा एवं रोजगार विभाग द्वारा रोजगार मेले में प्रदेश के वृहद उद्योगों एवं निजी प्रतिष्ठानों को शामिल कर अधिक से अधिक रिक्त पद युवाओं के लिए उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। इच्छुक युवा ई-रोजगार पोर्टल पर उपलब्ध रिक्तियों की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही रोजगार मेले के लिए अपना पंजीयन भी करा सकते हैं।राज्य एवं जिला स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित आवेदकों को कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री के करकमलों से ऑफर लेटर वितरित किए जाने की भी तैयारी है। इसके लिए जिलों से चयनित अभ्यर्थियों की सूची 01 अक्टूबर 2026 तक प्रेषित करने के निर्देश दिए गए हैं। रोजगार मेले में अधिकाधिक युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सभी जिलों में ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने को कहा गया है। साथ ही जिला एवं राज्य स्तरीय रोजगार मेलों में चयनित युवाओं की कार्यक्रम में उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।शासन ने इस महत्वपूर्ण आयोजन को सफल बनाने तथा प्रदेश के अधिकाधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर विशेष प्रयास करने को कहा गया है।

























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