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- 0- सुशासन तिहार के दौरान स्वामीत्व योजना अंतर्गत कृषक गोपाल राम साहू को अधिकार अभिलेख प्राप्त होने से मिला उन्हें जमीन का मालिकाना हकबालोद. सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आज गुरूर विकासखण्ड के ग्राम अर्जुनी में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान ग्राम छेड़िया के कृषक श्री गोपाल राम साहू को स्वामीत्व योजना के अंतर्गत अधिकार अभिलेख प्राप्त होने से उन्हें उनके आवासीय भूमि का मालिकाना हक प्राप्त हो गया है। शिविर में अधिकार अभिलेख प्राप्त करने के पश्चात् किसान गोपाल राम बहुत ही अभिभूत नजर आ रहे थे। ग्राम अर्जुनी में आज आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के माध्यम से उन्हें प्राप्त अधिकार अभिलेख से अब उनके लिए आवासीय ऋण एवं अन्य सुविधाओं के लाभ लेने हेतु मार्गप्रशस्त होने पर किसान श्री गोपाल राम बहुत ही प्रसन्नचित एवं गदगद नजर आ रहे थे।शिविर में अधिकार अभिलेख प्राप्त होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कृषक गोपाल राम ने कहा कि अब वे इस अधिकार अभिलेख के माध्यम से आवासी ऋण लेकर अपने सपने का आशियाना भी बना सकेंगे। जो उनके जैसे अनेक निम्न मध्यम वर्गीय किसानों के लिए एक बड़े सपने का साकार होने जैसा है। केन्द्र सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना की सराहना करते हुए किसान गोपाल राम ने कहा कि इस योजना के माध्यम से सरकार हम जैसे निम्न मध्यम वर्गीय कृषकों को अपने जमीन का मालिकाना हक प्रदान करने के अलावा हमारे एवं हमारे परिवार के लिए एक सुंदर घर का निर्माण करने के सपने को हकीकत में बदलने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कार्य किया है। किसान गोपाल राम ने राज्य सरकार द्वारा शुरू किए गए सुशासन तिहार 2026 के आयोजन की भी भूरी-भूरी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस सुशासन तिहार के माध्यम से शासन-प्रशासन के लोग हम आम जनों के बीच पहुँचकर हमारी वास्तविक समस्याओं से रूबरू होने के अलावा हमारे मांगों एवं समस्याओं का भी त्वरित निराकरण सुनिश्चित कर रहे हैं। इसके अलावा मेरे जैसे अनेक नागरिकों को शासन के विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित भी किया जा रहा है, जो कि बहुत ही सराहनीय कार्य है।--
- 0- गोढ़ी में उगा 3.7 किलो का शुगरबीट, बायोएथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावादुर्ग. छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण (सीबीडीए), रायपुर द्वारा राष्ट्रीय शर्करा संस्थान (एनएसआई), कानपुर के सहयोग से विगत 05 मई 2026 को जिले के बायोफ्यूल कॉम्प्लेक्स, ग्राम गोढ़ी में किसान सम्मेलन आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कवर्धा, बेमेतरा एवं दुर्ग जिले के गन्ना उत्पादक किसान तथा कृषि विभाग के अधिकारीगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सीमा परोहा, निदेशक, एनएसआई कानपुर, डॉ. लोकेश बाबर, सहायक प्राध्यापक, एनएसआई तथा श्री सुमित सरकार, मुख्य कार्यपालन अधिकारी, सीबीडीए की विशेष उपस्थिति रही।इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य गन्ना आधारित खेती में सफेद चुकंदर (शुगरबीट) को अंतरफसली के रूप में अपनाकर भूमि उपयोग दक्षता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना था। इस दौरान किसानों को शुगरबीट की खेती का प्रत्यक्ष भ्रमण कराया गया एवं फसल की खुदाई भी की गई, जिसमें शुगरबीट का औसत वजन लगभग 3.7 किलोग्राम पाया गया, जो इसकी सफल खेती की संभावनाओं को दर्शाता है। किसानों ने शुगरबीट के लिए शीघ्र मूल्य निर्धारण एवं प्रभावी विपणन तंत्र विकसित करने की मांग की, साथ ही किसानों द्वारा लाए गए गन्ना फसल के नमूनों पर विशेषज्ञों ने रोग प्रबंधन हेतु आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया।अपने संबोधन में श्री सुमित सरकार ने बताया कि सीबीडीए राज्य में बायोडीजल, बायोएथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस एवं ग्रीन हाइड्रोजन जैसे वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विकास हेतु कार्यरत है। इसी क्रम में, नेशनल शुगर इंस्टीट्यूट के सहयोग से राज्य में पहली बार गन्ना एवं सफेद चुकंदर (शुगर बीट) की अंतरफसली खेती पर अनुसंधान प्रारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि गन्ना एक दीर्घकालीन फसल होने के कारण इसकी प्रारंभिक अवस्था में भूमि का पूर्ण उपयोग नहीं हो पाता, इसलिए शुगरबीट जैसी अल्पावधि फसल को अंतरफसली रूप में अपनाना किसानों के लिए लाभकारी है। उन्होंने बताया कि शुगरबीट लगभग 5-6 माह में तैयार हो जाती है और इसे गन्ने के साथ उगाकर अतिरिक्त उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है, जिससे बायोएथेनॉल उत्पादन हेतु अतिरिक्त कच्चा माल उपलब्ध होगा तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा।डॉ. सीमा परोहा ने अपने उद्बोधन में कहा कि गन्ना-शुगरबीट अंतरफसली खेती किसानों के लिए आय बढ़ाने का व्यवहारिक विकल्प है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक का सफल परीक्षण राजस्थान, पंजाब, मध्यप्रदेश एवं महाराष्ट्र में किया जा चुका है तथा छत्तीसगढ़ में सीबीडीए के सहयोग से इसका प्रथम क्रियान्वयन हुआ है, जिसके सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आगामी समय में शुगरबीट के लिए उपयुक्त क्रय मूल्य निर्धारण की दिशा में पहल करने की बात कही। श्री संतोष कुमार मैत्री, सहायक परियोजना अधिकारी, सीबीडीए ने बताया कि राज्य में पहली बार गन्ना एवं शुगरबीट की अंतरफसली खेती पर ग्राम गोढ़ी में अनुसंधान प्रारंभ किया गया है। एनएसआई से प्राप्त एलएस-6 किस्म के माध्यम से किए गए इस अध्ययन के प्रारंभिक परिणाम उत्साहजनक हैं, विशेषकर मुरुम भूमि में इसकी सफलता ने किसानों के लिए नई संभावनाएं खोली हैं। डॉ. लोकेश बाबर ने किसानों को शुगरबीट की खेती अपनाने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि यह कम लागत में अधिक लाभ देने वाली तकनीक है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि एनएसआई द्वारा किसानों को बीज उपलब्ध कराए जाएंगे तथा प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान डॉ. सीमा परोहा ने सीबीडीए परिसर स्थित हर्बेरियम एवं आर्बाेरेटम का भ्रमण किया तथा ऊर्जा फसल नेपियर घास के क्षेत्र का अवलोकन किया, जिससे कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी) उत्पादन की संभावनाएं हैं। किसानों को विश्वास दिलाया गया कि यह पहल छत्तीसगढ़ को जैव ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ किसानों को “अन्नदाता” के साथ “ऊर्जा दाता” के रूप में स्थापित करेगी। अंत में, उपस्थित किसानों एवं अधिकारियों को सम्मान स्वरूप गमछा एवं टोपी प्रदान कर कार्यक्रम का समापन किया ।
- 0- 37 हजार से अधिक श्रमिकों को मिला काम, लक्ष्य से अधिक 100.59 प्रतिशत मानव दिवस सृजितदुर्ग. कलेक्टर श्री अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में जिले की समस्त ग्राम पंचायतों में ’ग्राम रोजगार दिवस’ का भव्य आयोजन किया गया, जिसे शासन के निर्देशानुसार चावल महोत्सव और आवास दिवस के साथ संयुक्त रूप से एक महाअभियान के रूप में मनाया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण विकास, रोजगार, आवास और जल संरक्षण से जुड़ी विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी सीधे ग्रामीणों एवं श्रमिकों तक पहुँचाना और उनकी समस्याओं का मौके पर निराकरण करना था।इस अवसर पर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री बजरंग कुमार दुबे ने बताया कि मनरेगा के तहत जिले में मांग आधारित रोजगार निरंतर उपलब्ध कराया जा रहा है और वर्तमान में जिले के 866 प्रगतिरत निर्माण कार्यों में कुल 37,146 मजदूर कार्यरत हैं, जिनमें धमधा विकासखंड में 15,872, पाटन में 11,390 तथा दुर्ग विकासखंड में 9,884 श्रमिक प्रतिदिन कार्य कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025-26 के लिए जिले को प्राप्त 18,48,633 मानव दिवस सृजन के लक्ष्य के विरुद्ध 18,59,532 मानव दिवस सृजित कर 100.59 प्रतिशत की शानदार उपलब्धि हासिल की गई है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु भी जिले में 7,70,009 मानव दिवस सृजित किए गए हैं और स्वीकृत आवासों को 90 दिनों की समय-सीमा में पूर्ण करने हेतु विशेष कार्ययोजना पर काम किया जा रहा है, साथ ही पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हितग्राहियों को उनके बैंक खातों में अंतरित की गई राशि की विस्तृत जानकारी भी प्रदान की गई। जल संरक्षण की दिशा में “मोर गांव-मोर पानी” एवं “नवा तरिया-आय के जरिया” अभियान के तहत अब तक जिले में 130 अमृत सरोवर पूर्ण किए जा चुके हैं, जिनमें धमधा में 50, दुर्ग में 36 एवं पाटन में 37 सरोवर शामिल हैं, इसके अलावा 15 नए तालाब निर्माण प्रस्तावित हैं और आजीविका डबरी के 30 स्वीकृत कार्यों पर भी प्रगति जारी है। इस महाअभियान के दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को निर्माण सामग्री आपूर्ति जैसे आजीविका कार्यों से जोड़ने, प्रधानमंत्री आवासों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने तथा लंबित जियो-टैगिंग कार्यों को स्थल पर ही पूर्ण करने की कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान ग्राम पंचायत पुरई, धनोरा, बिरोदा, घोटवानी, दनिया, करगाडीह और खमरिया जैसे विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिकों को रोजगार से जुड़े पाया गया, जहाँ जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने मिलकर ग्रामीणों को उनके अधिकारों और योजनाओं के लाभ के प्रति जागरूक किया। जिला प्रशासन की इस पहल को ग्रामीण विकास में पारदर्शिता और जनभागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।--
- दुर्ग. राज्य शासन द्वारा 11 मई तक ’’सही दवा-शुद्ध आहार - यही छत्तीसगढ़ का आधार’’ थीम के अंतर्गत 15 दिवसीय सघन जांच अभियान संचालित किये जाने हेतु प्रत्येक जिले में कार्यरत खाद्य एवं औषधि प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देशित किया गया है।औषधि शाखा द्वारा अभियान के ग्यारहवे दिवस चतुर्थ चरण के द्वितीय दिवस 07 मई को कोटपा एक्ट के अंतर्गत जिले के ग्रामीण क्षेत्र करंजा भिलाई, जेवरा-सिरसा, समोदा में तम्बाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में जनजागरूकता लाते हुए जिन पान ठेलों एवं होटलों में कोटपा एक्ट के उल्लंघन पाए गए ऐसे 32 जगहों पर औषधि निरीक्षकों एवं पुलिस दल द्वारा नियमानुसार चालानी कार्यवाही की गई। कोटपा एक्ट के तहत् इस प्रकार की कार्यवाही आगे भी जारी रहेगी। इसी तरह खाद्य शाखा द्वारा जिले में संचालित ढ़ाबाओं का रॉयल खालसा ढ़ाबा पुलगांव, ठाकरे ढ़ाबा एवं खन्ना ढ़ाबा अंजोरा, केडएम केडबी स्टेशन रोड दुर्ग एवं श्री सांई इंटरप्राईजेस दुर्ग की जांच/निरीक्षण खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत् किया गया, जिसमें संचालकों को वेज-नानवेज को अलग-अलग भण्डारण एवं तैयार करने के निर्देश व उचित साफ-सफाई के साथ व्यवसाय संचालित किये जाने एवं साथ ही साथ निर्देशित किया गया कि नियमों का उल्लंघन पाये जाने पर नियमानुसार कड़ी कार्यवाही की जाएगी।
- 0- हितग्राहियों को मिला योजनाओं का लाभबिलासपुर. मस्तूरी ब्लॉक के सीपत शासकीय हाई स्कूल प्रांगण में सुशासन तिहार के तहत समाधान शिविर का आयोजन जिला पंचायत अध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी के मुख्य आतिथ्य में किया गया। ग्रामीणों की समस्याओं के निराकरण के लिए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कुल 331 आवेदनों में से 201 प्रकरणों का मौके पर ही निराकरण किया। शेष आवेदनों के निराकरण के लिए संबंधित विभागों को समयसीमा निर्धारित की गई। शिविर में जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल ने पहुंचकर विभिन्न विभागों के स्टॉल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। शिविर में विभिन्न विभागों के अधिकारियों द्वारा आमजनों को शासन की जन कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी दी गई तथा पात्र हितग्राहियों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए आवश्यक प्रक्रिया समझाई गई। साथ ही, विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित करते हुए चेक, स्वीकृति आदेश एवं आवश्यक दस्तावेज वितरित किए गए।जिला पंचायतअध्यक्ष श्री राजेश सूर्यवंशी ने कहा कि कहा कि समाधान शिविर शासन की मंशा के अनुरूप ग्रामीणों की समस्याओं के त्वरित निराकरण का सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि प्रशासन गांव-गांव पहुंचकर लोगों को योजनाओं का लाभ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और ऐसे शिविरों से आमजन को सीधा फायदा मिल रहा है। जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरस्वती सोनवानी ने कहा कि ग्रामीणों को अब अपनी समस्याओं के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। जिला पंचायत सीईओ श्री संदीप अग्रवाल ने कहा कि समाधान शिविर के माध्यम से एक ही स्थान पर विभिन्न विभागों की सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं, जिससे समय और संसाधनों की बचत हो रही है। शिविर में जिला पंचायत सदस्य श्री राजेन्द्र धीवर, श्री दीपक शर्मा,जनपद पंचायत सभापति श्री मनोज खरे, जिला पंचायत सदस्य के प्रतिनिधि श्री चंद्र प्रकाश सूर्या, एसडीएम शिवकुमार कंवर, सीईओ मस्तुरी जे.आर. भगत, सीपत तहसीलदार गरिमा ठाकुर,अबकारी विभाग से नवनीत तिवारी, जलसंसाधन विभाग एसडीओ शुभम साहू,पी एच ई विभाग अरूण भार्गव, विधुत विभाग कौशल जायसवाल सहायक यंत्री, मनेरगा कार्यक्रम अधिकारी रूचि विश्वकर्मा शामिल हुए।शिविर में 8 हितग्राहियों को राशन कार्ड, 5 को श्रम कार्ड, 7 को मनरेगा जॉब कार्ड, 5 को आयुष्मान कार्ड, 3 किसान को ऋण पुस्तिका, 2 को मछली जाल का वितरण, 16 हितग्राहियों का महतारी वंदन ई केवाईसी, 112 लोगों का बीपी शुगर जांच सहित अन्य हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया गया। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत हितग्राहियों के खाते भी खोले गए। राजस्व विभाग द्वारा को जाति प्रमाण पत्र, आय एवं निवास प्रमाण पत्र दिये गये। साथ ही प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण अंतर्गत ग्राम के हितग्राही को आवास पूर्णता प्रमाण पत्र एवं ग्रामीणों को आयुष्मान कार्ड वितरित किए गए। शिविर में मस्तुरी विकासखण्ड अंतर्गत सीपत, गुड़ी, नरगोडा़, पोड़ी, जांजी सहित पंचायत के ग्रामीण शामिल हुए। इस दौरान देवेश शर्मा, राज्यवर्धन कौशिक,अभिलेष यादव, मदन पाटनवार, फिरत अनंत, जायसवाल, बलराम पाटनवार, सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं बड़ी संख्या में ग्रामीणों की उपस्थिति रही। समाधान शिविर कार्यक्रम का संचालन बी एल कुर्रे ने किया।
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सुशासन तिहार बना योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम
बिलासपुर/मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में जिले में 1 मई से सुशासन तिहार का सफल आयोजन किया जा रहा है। गांव सहित नगरीय निकायों में भी जनसमस्या निवारण शिविरों के माध्यम से शासकीय योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने एवं लोगों की समस्याओं का निराकरण करने का कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में 8 मई को तखतपुर विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत विजयपुर में सुशासन शिविर का आयोजन किया जाएगा। शिविर में क्षेत्र से लगे हुए ग्राम पोड़ीकला, परसाकापा, निगारबंद, पूरा, बहुरता, टिहुलाडीह, पड़रिया, चोरमा, पकरिया, बेलपान, टिकरी, दर्री, विजयपुर, लिम्हा, सिलतरा, ठाकुरकापा एवं करनकापा के ग्रामीण भी शामिल हो सकते है। साथ ही नगर निगम बिलासपुर क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्र 38, 39 एवं 41 के वार्डवासियों के लिए गुजराती समाज भवन टिकरापारा एवं नगर पालिका परिषद बोदरी में वार्ड क्र. 1,2,3 हेतु वार्ड क्रमांक 2 शासकीय प्राथमिक शाला बोदरी में शिविर का आयोजन किया जाएगा।
इन शिविरों में आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, ड्राईविंग लाईसेंस, स्वास्थ्य सेवाएं तथा महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं सहित अन्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही है। कलेक्टर ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अपने निकटतम शिविर में पहुंचकर अधिक से अधिक संख्या में इसका लाभ उठाएं और शासन की योजनाओं से जुड़कर अपनी समस्याओं का समाधान कराएं। सुशासन तिहार-2026 का उद्देश्य आम जनता की समस्याओं का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना, शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना तथा विकास कार्यों में गति लाने के साथ ही आम जनता, जनप्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों से सीधा संवाद स्थापित करना है। -
बिलासपुर/विश्व रेडक्रॉस दिवस के अवसर पर बिलासपुर जूनियर रेडक्रॉस के 30 बच्चों एवं शिक्षकों के दल को शहर के नया बस स्टैंड से रायपुर के लिए रवाना किया गया। दल को डॉ. बी.एल. गोयल, चेयरमैन प्रबंध समिति रेडक्रॉस द्वारा हरी झंडी दिखाकर प्रस्थान कराया गया। रायपुर रवाना हुआ यह दल विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों में भाग लेकर बिलासपुर जिले का प्रतिनिधित्व करेगा। कलेक्टर श्री संजय अग्रवाल ने सभी बच्चों एवं शिक्षकों को शुभकामनाएं दी गईं। इस अवसर पर सर्वश्री सौरभ सक्सेना, आदित्य पांडेय, लक्ष्मीनारायण मिश्रा, मनीष मिश्रा, धरम लाल साहू, रवि राज साहू, गीतेश्वरी चन्द्रा एवं सौखी लाल यादव उपस्थित रहे।
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2000 से अधिक छात्र-छात्राएँ, स्वयंसेवक एवं समाजसेवी होंगे शामिल
राज्यपाल रमेन डेका के संरक्षण में सेवा, रक्तदान व स्वास्थ्य जागरूकता का दिया जाएगा संदेश
रायपुर। भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा, रायपुर द्वारा विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर 8 मई को राजधानी के अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम, मेकाहारा हॉस्पिटल परिसर, शासकीय मेडिकल कॉलेज के पीछे राज्य स्तरीय भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
यह आयोजन राज्यपाल एवं भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा के अध्यक्ष श्री रमेन डेका के संरक्षण, मार्गदर्शन एवं प्रेरणा में हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन राज्य शाखा के चेयरमैन श्री तोमन साहू, वाइस चेयरमैन श्री रुपेश कुमार पाणिग्राही एवं कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल के नेतृत्व में किया जा रहा है।
कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रूपल पुरोहित ने बताया कि इस राज्य स्तरीय आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग 2000 से अधिक छात्र-छात्राएँ, रेड क्रॉस स्वयंसेवक, शिक्षकगण, रेड क्रॉस काउंसलर, सामाजिक कार्यकर्ता एवं युवा प्रतिभाएँ सहभागिता करेंगी। यह आयोजन सेवा, मानवता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं युवा सहभागिता को समर्पित है।
कार्यक्रम में समूह नृत्य, नाटक एवं प्रहसन, चित्रकला प्रतियोगिता तथा रेड क्रॉस के सिद्धांतों पर आधारित रचनात्मक प्रस्तुतियाँ होंगी। इनके माध्यम से रक्तदान, अंगदान, प्राथमिक उपचार, महिला स्वास्थ्य जागरूकता, नशामुक्ति, आपदा प्रबंधन एवं मानव सेवा जैसे विषयों पर व्यापक जनजागरूकता का संदेश प्रसारित किया जाएगा।
उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे। अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा एवं वरिष्ठ अतिथि के रूप में राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा उपस्थित रहेंगी।
पुरस्कार वितरण समारोह में मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव करेंगे। समारोह में उत्कृष्ट प्रतिभागियों, समर्पित स्वयंसेवकों एवं समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को सम्मानित किया जाएगा।
राज्य शाखा के चेयरमैन श्री तोमन साहू ने प्रदेशवासियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं स्वयंसेवकों से अधिक से अधिक संख्या में सहभागिता का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि रेड क्रॉस केवल एक संस्था नहीं, बल्कि मानवता, करुणा एवं सेवा का वैश्विक प्रतीक है। -
गुढियारी आगजनी के समय विश्वदीप द्वारा किए राहत कार्य सराहनीय, राजधानी की जनता रखेगी याद - कलेक्टर डॉ सिंह
रायपुर/ रेडक्रॉस सभाकक्ष में रायपुर नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप को उनके नवीन दायित्व के लिए भावभीनी विदाई दी गई। श्री विश्वदीप को बीजापुर जिले में कलेक्टर के रूप में नई जिम्मेदारी मिली है।
इस अवसर पर कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह ने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी को सदैव जनता के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे जिले, जिसे अब भारत सरकार द्वारा नक्सलमुक्त घोषित किया गया है, वहां विकास और नवाचार की अपार संभावनाएं हैं। आशा है की आप ऐसा कार्य करेंगे जिससे बीजापुर जिले को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी।
डॉ सिंह ने कहा कि एक कलेक्टर को परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करना आना चाहिए। प्रशासनिक दायित्वों में कभी सौम्य व्यवहार की आवश्यकता होती है तो कभी कठोर निर्णय लेने की क्षमता भी जरूरी होती है।
कलेक्टर डॉ. सिंह ने नगर निगम आयुक्त श्री विश्वदीप के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने लगभग 28 माह 3 दिन तक साथ कार्य किया, जिसमें अनेक बड़े आयोजन और चुनौतीपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि श्री विश्वदीप की कार्यशैली सदैव जनहित और तत्परता से परिपूर्ण रही है।
उन्होंने विशेष रूप से गुढियारी आगजनी की घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि उस कठिन समय में श्री विश्वदीप ने अपनी जान की परवाह किए बिना अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर ऑयल से भरे टैंकर के ढक्कन हटाने का साहसिक कार्य किया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। कलेक्टर डॉ सिंह ने कहा कि आपके प्रशिक्षण का यह अंतिम दिन है और कल से आप कलेक्टर की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेंगे।
कलेक्टर डॉ सिंह ने विश्वास जताया कि श्री विश्वदीप को जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहां कार्य करने की व्यापक संभावनाएं हैं और वे अपने अनुभव व क्षमता से इस दायित्व का सफलतापूर्वक निर्वहन करेंगे।
निगम आयुक्त श्री विश्वदीप ने अपने उद्बोधन में कहा कि रायपुर में कार्य करने का अनुभव अद्भुत रहा। जिले में मुझे विभिन्न दायित्वों में कार्य करने का महत्वपूर्ण अवसर मिला। रायपुर जिला पंचायत सीईओ तथा निगम आयुक्त के रूप में काम करने से सीखने का व्यापक अनुभव प्राप्त हुआ। लोकसभा, विधानसभा उपचुनाव, नगरीय निकाय चुनाव साथ ही एसआईआर के चुनौतीपूर्ण कार्य को पूरी टीम के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न किया। इसका पूरा श्रेय कलेक्टर डॉ सिंह और जिला एवं निगम टीम को जाता है। मैने यहां सीखा कि बड़े आयोजनों के समय किस प्रकार बिना दबाव में आए सफलतापूर्वक कार्य किया जाए।
श्री विश्वदीप ने कहा की कलेक्टर डॉ सिंह और पूरे जिले के टीम के साथ बहुत से प्रोजेक्ट में कार्य किया है। निश्चित रूप से यह अनुभव बीजापुर में काम आएगा। मैं कलेक्टर डॉ सिंह तथा जिले के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार व्यक्त करता हूं।
इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत श्री कुमार बिश्वरंजन सहित जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। -
उज्बेक अध्ययन दल ने लिया कृषि विश्वविद्यालय की शैक्षणिक एवं अनुसंधान अधोसंरचनाओं और सुविधाओं का जायजा
अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में द्विपक्षीय सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई
रायपुर। भारत एवं उजबेकिस्तान के मध्य कृषि शिक्षा, अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में आपसी सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए उज़बेकिस्तान से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधि मंडल ने आज यहां इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में उपलब्ध शिक्षण, अनुसंधान एवं विस्तार अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियांे का जायजा लिया। इस दौरान अध्ययन दल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर की अनुसंधान प्रयोगशालाओं, कृषि अनुसंधान परियोजनाओं, स्टार्टअप एवं इन्क्यूबेशन सुविधाओं तथा विश्वविद्यालय की विभिन्न शैक्षणिक एवं नवाचार संरचनाओं का अवलोकन भी किया। इस प्रतिनिधिमंडल में बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उप-कुलपति प्रो. अब्रोर जोरायेव तुरोबोविच तथा समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी आॅफ वेटरनरी मेडिसीन लाइवस्टाॅक एवं बायोटेक्नोलाॅजीस से अनुसंधान एवं नवाचार के उप-कुलपति प्रो. तयलाकोव तोलिब इसाकुलोविच सहित अन्य वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं वैज्ञानिक शामिल हैं। इस अवसर पर “भारत एवं उज्बेकिस्तान के मध्य द्विपक्षीय शैक्षणिक, अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग सुदृढ़ीकरण” विषय पर आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन भी किया गया।
कृषि महाविद्यालय रायपुर के सेमिनार हाॅल में कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल के मुख्य आतिथ्य में आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान उजबेकिस्तान के बुखारा एवं समरकंद विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों द्वारा इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के साथ छात्र एवं संकाय विनिमय के साथ ही अनुसंधान के विभिन्न क्षेत्रों एवं कृषि उद्यमिता विकास के संबंध में सार्थक विचार-विमश किया गया। इस दौरान दोनो देशों के मध्य शैक्षणिक संबंधों को और अधिक सदृढ़ करने के साथ-साथ नवीन अनुसंधान एवं तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में मिल-जुल कर कार्य करने पर प्रतिबद्धता व्यक्त की गई। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक शिक्षण द्वारा विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक अधोसंरचनाओं, शिक्षण सुविधाओं, संचालित पाठ्यक्रमों, संकाय सदस्यों, शैक्षणिक गतिविधियों आदि के संबंध में जानकारी दी गई। इसके साथ ही संचालक अनुसंधान द्वारा विश्वविद्यालय में उपलब्ध अनुसंधान अधोसंरचनाओं, अनुसंधान सुविधाओं, अनुसंधान योजना एवं गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई। औषधीय एवं सुगंधित पौधांे के उत्पादन, कृषि व्यवसाय एवं उद्यमिता, जैव प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन आदि विषयों पर भी विचार मंथन किया गया तथा आपसी सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई। विभिन्न विभागाध्यक्षों द्वारा विभागीय गतिविधियों प्रस्तुत की गई। बुखारा स्टेट यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय सहयोग के उप-कुलपति प्रो. अब्रोर जोरायेव तुरोबोविच द्वारा उनके विश्वविद्यालय में उपलब्ध शैक्षणिक एवं अनुसंधान अधोसंरचनाओं, सुविधाओं तथा गतिविधियों के बारे में जानकारी दी गई और कृषि विश्वविद्यालय के साथ द्विपक्षीय सहयोग की संभावानाओं को रेखांकित किया गया। समरकंद स्टेट यूनिवर्सिटी आॅफ वेटरनरी मेडिसीन लाइवस्टाॅक एवं बायोटेक्नोलाॅजीस से अनुसंधान एवं नवाचार के उप-कुलपति प्रो. तयलाकोव तोलिब इसाकुलोविच ने उनके विश्वविद्यालय के संबंध में विस्तृत जानकारी दी और द्विपक्षीय सहयोग की रूप-रेखा बताई। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय प्रकोष्ट प्रभारी डाॅ. हुलास पाठक ने अतिथियों का स्वागत करते हुए संगोष्ठी की रूप-रेखा प्रतिपादित की। कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डाॅ. आरती गुहे ने कार्यक्रम के अंत में अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उजबेकिस्तान के बुखारा एवं समरकंद विश्वविद्यालयों से आए अध्ययन दल ने इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय स्थित विभिन्न अधोसंरचनाओं, सुविधाओं, अनुसंधान योजनाओं एवं गतिविधियों का अवलोकन किया। उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुसंधान प्रक्षेत्र में लगाई गई औषधीय एवं सगंध फसलों का अवलोकन किया तथा इसमें गहरी रूचि दिखाई। अध्ययन दल द्वारा टिशू कल्चर लैब में केला, गन्ना, बांस आदि फसलों के ऊतक प्रवर्धित पौधों में भी रूचि दर्शायी। उन्होंने कृषि संग्रहालय में प्रदर्शित प्रारूपों का भी अवलोकन किया। अध्ययन दल ने जैव उर्वरक प्रयोगशाला, जैविक नियंत्रण प्रयोगशाला, डाॅ. आर. एल. रिछारिया जैव प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला तथा बायोटेक पार्क का भी अवलोकन किया और वहां संचालित गतिविधियों का जायजा लिया।
गौरतलब है कि इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय कुलपति डाॅ. गिरीश चंदेल के नेतृत्व में कृषि विश्वविद्यालय के उच्चस्तरीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल ने विगत माह उजबेकिस्तान के तरमेज़, डेनाऊ, ताशकंद, बुखारा एवं समरकंद स्थित प्रमुख विश्वविद्यालयों, कृषि संस्थानों एवं अनुसंधान केंद्रों का दौरा किया था एवं इन सभी संस्थानों के साथ शिक्षण, अनुसंधान, उद्यमिता विकास तथा प्रौद्योगिकी विकास के क्षेत्र में आपसी सहयोग हेतु समझौते किये गए थे। विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों के साथ हस्ताक्षरित अनेक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) के माध्यम से छात्र एवं संकाय विनिमय, संयुक्त अनुसंधान सहयोग, क्षमता निर्माण, एग्री-उद्यमिता सहयोग तथा दीर्घकालिक संस्थागत साझेदारी के नए अवसर विकसित हुए। इसी संवाद को बढ़ाने के लिए उज्बेकिस्तान से 8 सदस्यीय उच्चस्तरीय शैक्षणिक प्रतिनिधिमंडल छत्तीसगढ़ पहुंचा है। कल यह दल रायपुर के आस-पास निजी क्षेत्र में स्थापित कृषि उद्यमिता विकास एवं अनुसंधान संस्थानों का दौरा करेगा। - रायपुर। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आम जनता को राहत पहुंचाने और सुशासन को मजबूत करने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसी क्रम में बिजली उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान करने के उद्देश्य से “मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना-2026” लागू की गई है। यह योजना घरेलू, बीपीएल एवं कृषि उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल के भुगतान में राहत देने के साथ-साथ आसान समाधान उपलब्ध करा रही है।योजना के अंतर्गत उपभोक्ताओं को बकाया बिजली बिल का भुगतान एकमुश्त अथवा आसान किस्तों में करने की सुविधा दी गई है। विशेष बात यह है कि 31 मार्च 2023 तक के बकाया बिजली बिलों पर 100 प्रतिशत सरचार्ज माफी का लाभ भी प्रदान किया जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को आर्थिक राहत मिल रही है।राज्य सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी उपभोक्ता आर्थिक कारणों से बिजली सुविधा से वंचित न रहे। इसी सोच के साथ योजना को सरल और सुलभ बनाया गया है। योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए उपभोक्ताओं का पंजीयन अनिवार्य रखा गया है।उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए पंजीयन की व्यवस्था विभिन्न माध्यमों से उपलब्ध कराई गई है। उपभोक्ता “मोर बिजली” एप, CSPDCL की आधिकारिक वेबसाइट, नजदीकी बिजली कार्यालय तथा विशेष पंजीयन शिविरों के माध्यम से आसानी से अपना पंजीयन करा सकते हैं। यह योजना 12 मार्च 2026 से लागू है तथा योजना का लाभ लेने की अंतिम तिथि 30 जून 2026 निर्धारित की गई है। अब तक लाखों उपभोक्ता योजना से जुड़ चुके हैं और बड़ी संख्या में प्रकरणों का निराकरण कर उपभोक्ताओं को करोड़ों रुपए की राहत प्रदान की जा चुकी है। आंकड़ों की बात करें तो अब तक प्रदेश के 07 लाख 24 हजार उपभोक्ताओं ने योजना का लाभ लेने के लिए पंजीयन कराया है। 1 लाख 63 हजार प्रकरणों का निराकरण कर कुल 06 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक की राहत प्रदान की जा चुकी है।मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा है कि राज्य सरकार जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है और आम नागरिकों को राहत पहुंचाने वाली योजनाओं को प्राथमिकता के साथ लागू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री बिजली बिल भुगतान समाधान योजना 2026 इसी जनहितकारी सोच का परिणाम है, जो लाखों उपभोक्ताओं के जीवन में राहत और विश्वास लेकर आई है।
- -वित्तमंत्री शिविर में पहुंचकर योजनाओं की जमीनी हकीकत की ली जानकारी, हितग्राही मूलक योजनाओं के तहत बांटी गई सामग्री-प्रदेश सहित जिले के विकास के लिए सरकार हरसंभव मदद कर रही: वित्त मंत्रीरायपुर। प्रदेश के वित्तमंत्री श्री ओ.पी. चौधरी आज उत्तर बस्तर कांकेर जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने सुशासन तिहार एवं बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के अंतर्गत कांकेर विकासखण्ड के ग्राम माकड़ीखूना में आयोजित शिविर में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं। साथ ही विभिन्न हितग्राही मूलक योजनाओं के तहत सामग्री का वितरण किया।वित्त मंत्री श्री चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र के सहयोग से लंबे समय से चली आ रही माओवादी समस्या को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर रही है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 18 लाख आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिससे जरूरतमंदों को आवास की सुविधा मिल रही है। वहीं महतारी वंदन योजना से महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं।उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश में तेंदूपत्ता की खरीदी 5500 रुपए प्रति मानक बोरा की दर से की जा रही है, जिससे वन आश्रित परिवारों को लाभ मिल रहा है। सरकार प्रदेश सहित कांकेर जिले के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयासरत है। साथ ही बस्तर क्षेत्र में पर्यटन की अपार संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए विकास की व्यापक कार्ययोजना तैयार की जा रही है।कार्यक्रम में सांसद श्री भोजराज नाग ने कहा कि बस्तर क्षेत्र, जो लंबे समय तक नक्सल प्रभावित रहा, अब विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। कांकेर विधायक श्री आशाराम नेताम ने कहा कि सुशासन तिहार के माध्यम से सरकार गांव-गांव पहुंचकर योजनाओं की जमीनी स्थिति का आकलन कर रही है।कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने जानकारी दी कि सुशासन तिहार और बस्तर मुन्ने कार्यक्रम के तहत 14 अधोसंरचना एवं 31 व्यक्तिमूलक योजनाओं के संतृप्तिकरण के लिए शिविर आयोजित किए जा रहे हैं, जिससे अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों को लाभ मिल सके।शिविर में विभिन्न योजनाओं के तहत हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया। खाद्य विभाग द्वारा 3 हितग्राहियों को राशन कार्ड, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत आवास की चाबी, मनरेगा के तहत जॉब कार्ड तथा व्यक्तिगत शौचालय निर्माण हेतु स्वीकृति पत्र प्रदान किए गए। शिविर स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर योजनाओं की जानकारी भी दी गई।इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री निखिल राखेचा, नगरपालिका अध्यक्ष कांकेर श्री अरुण कौशिक, जिला पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती तारा ठाकुर, जिला पंचायत सीईओ श्री हरेश मंडावी, एसडीएम श्री अरुण वर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।कांकेर प्रवास के दौरान वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी ने घड़ी चौक के समीप निर्माणाधीन नालंदा परिसर (सेंट्रल लाइब्रेरी) का निरीक्षण किया। उन्होंने कार्य को गुणवत्ता के साथ समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए तथा शहर के मध्य विकसित हो रहे इस परिसर की सराहना की।
- -रायपुर में मानवता का महाकुंभ- राज्यपाल के संरक्षण में जुटेगा प्रदेशभर का युवा-सेवा, रक्तदान और अंगदान का संदेश लेकर आएँगे 2000 से अधिक प्रतिभागीरायपुर / भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी, छत्तीसगढ़ राज्य शाखा द्वारा विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर आज राजधानी रायपुर में एक ऐतिहासिक राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। राज्यपाल और रेड क्रॉस सोसायटी के अध्यक्ष श्री रमेन डेका के संरक्षण व मार्गदर्शन में आयोजित यह कार्यक्रम मानव सेवा ही सर्वाेच्च सेवा है के संकल्प को जन-जन तक पहुँचाने का माध्यम बनेगा।राज्य स्तरीय कार्यक्रम का शुभारंभ 8 मई 2026 को सुबह 10.30 बजे छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के मुख्य अतिथ्य में शासकीय मेडिकल कॉलेज स्थित अटल बिहारी वाजपेयी ऑडिटोरियम में किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री माननीय श्री श्याम बिहारी जायसवाल करेंगे। उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंक राम वर्मा जी और राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी। कार्यक्रम समन्वयक डॉ. रूपल पुरोहित ने बताया कि इस आयोजन में प्रदेश के विभिन्न जिलों से 2000 से अधिक छात्र-छात्राएँ, स्वयंसेवक और सामाजिक कार्यकर्ता हिस्सा ले रहे हैं।कला और संस्कृति समूह नृत्य, नाटक, प्रहसन और चित्रकला प्रतियोगिताओं के माध्यम से रेड क्रॉस के सिद्धांतों का प्रदर्शनकिया जाएगा। रक्तदान, अंगदान, नशामुक्ति, महिला स्वास्थ्य, प्राथमिक उपचार और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों पर रचनात्मक प्रस्तुतियाँ होगी।8 मई 2026 को अपरान्ह 4.30 बजे पुरस्कार वितरण समारोह के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह होंगे, अध्यक्षता शिक्षा मंत्री श्री गजेंद्र यादव जी करेंगे। समारोह में समाजसेवा में उत्कृष्ट योगदान देने वाले स्वयंसेवकों और विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।सोसायटी के चेयरमैन श्री तोमन साहू, वाइस चेयरमैन श्री रुपेश कुमार पाणिग्राही और कोषाध्यक्ष श्री संजय पटेल ने कहा कि रेड क्रॉस केवल एक संस्था नहीं, बल्कि करुणा और सेवा का वैश्विक प्रतीक है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ के युवाओं को समाजहित में सक्रिय योगदान देने हेतु नई ऊर्जा प्रदान करेगा।
- -उप मुख्यमंत्री ने लोक निर्माण विभाग के कार्यों की समीक्षा की-अधिकारियों को दिए निर्देश - कॉर्पोरेट दफ्तरों की तरह पूरी क्षमता और दक्षता से काम करें मुख्य अभियंता कार्यालय, कार्य संस्कृति सुधारे-परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की खराब स्थिति पर अधिकारियों पर होगी कार्रवाई, ठेकेदारों से तत्काल मरम्मत कराने को कहा-सभी मुख्य अभियंताओं को प्राथमिकता वाले कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करने के दिए निर्देशरायपुर ।उप मुख्यमंत्री तथा लोक निर्माण मंत्री श्री अरुण साव ने आज विभागीय मुख्य अभियंताओं की बैठक लेकर सड़कों एवं पुल-पुलियों के कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में आयोजित बैठक में अधिकारियों को कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति के बाद तत्परता से तकनीकी स्वीकृति और टेंडर की प्रक्रिया पूर्ण कर कार्यारंभ करने के निर्देश दिए। श्री साव ने बैठक में कहा कि सभी मुख्य अभियंता कार्यालय कॉर्पोरेट दफ्तरों की तरह पूरी क्षमता और दक्षता से काम करें। उन्होंने विभाग की कार्य संस्कृति में बदलाव लाते हुए फील्ड से लेकर कार्यालय तक तेज गति और जवाबदेही से काम करने को कहा।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने परफॉर्मेंस गारंटी की सड़कों की नियमित मॉनिटरिंग करने और इनके खराब होने पर संबंधित ठेकेदारों से त्वरित मरम्मत कराने को कहा, ताकि नागरिकों को किसी तरह की परेशानी न हो। उन्होंने कहा कि परफॉर्मेंस गारंटी वाली सड़कों की स्थिति खराब पाए जाने पर अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। उन्होंने ऐसी सड़कों का तत्काल ठेकेदारों से मरम्मत कराने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता को भारत सरकार के साथ लगातार समन्वय कर स्वीकृतियों एवं कार्यों में तेजी लाने को कहा।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने सभी मुख्य अभियंताओं को प्राथमिकता वाले कार्यों की खुद मॉनिटरिंग करने को कहा। उन्होंने फील्ड पर निकलकर प्राथमिकता वाली सड़कों के कार्यों की प्रगति का हर सप्ताह निरीक्षण करने के निर्देश दिए। उन्होंने नई सड़कों के निर्माण और चौड़ीकरण के लिए कलेक्टरों के साथ समन्वय कर भू-अर्जन की कार्यवाहियों में तेजी लाने को कहा। उन्होंने ब्लैक-स्पॉट्स दूर करने के साथ ही सड़कों व पुलों के निर्माण के दौरान सड़क सुरक्षा के सभी मानकों का गंभीरता से पालन सुनिश्चित करने को कहा।उप मुख्यमंत्री श्री साव ने निर्माण कार्यों और निर्माण सामग्रियों में गुणवत्ता पर जोर देते हुए समय-सीमा में काम पूर्ण करने को कहा। उन्होंने कहा कि बहुत दिनों तक लंबित काम विभाग की छवि खराब करता है। इस तरह की स्थिति न बने। हर हाल में समय-सीमा में काम पूर्ण करने का प्रयास करें। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता श्री वी.के. भतपहरी, अपर सचिव श्री एस.एन. श्रीवास्तव, सभी परिक्षेत्रों के मुख्य अभियंताओं के साथ ही सेतु संभाग और राष्ट्रीय राजमार्ग संभाग के मुख्य अभियंता भी बैठक में मौजूद थे।
- रायपुर /माओवाद प्रभावित और अत्यंत सुदूर ग्राम पंचायत पुजारी कांकेर में पहली बार प्रशासन का ऐसा व्यापक शिविर आयोजित हुआ, जहां कभी जनताना सरकार की जन-अदालत लगती थी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के “सुशासन तिहार-2026” के तहत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर ने ग्रामीणों में नई उम्मीद जगाई।शिविर में पहली बार सभी विभागों का अमला एक साथ गांव पहुंचा, जिसे देखने और योजनाओं का लाभ लेने बड़ी संख्या में महिला, पुरुष, युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। ग्रामीण पूरे समय शिविर में मौजूद रहे और स्थानीय भाषा में योजनाओं की जानकारी लेकर लाभ उठाने के लिए आवेदन भी किए।इस शिविर में पुजारी कांकेर सहित मारुड़बाका, नेलाकांकेर, संकनपल्ली, तिम्मापुर, ईलमिड़ी, सेमलडोडी, लंकापल्ली, एंगपल्ली, गलगम, उसूर, आवापल्ली, चिंताकोंटा, मुरदंडा, चेरकडोडी, नुकनपाल, पुसगुड़ी और मुरकीनार ग्राम पंचायतों के ग्रामीण शामिल हुए। शिविर में प्राप्त आवेदनों में से 29 का मौके पर निराकरण किया गया, जबकि शेष आवेदनों पर कार्यवाही जारी है।शिविर में क्रेडा, जल जीवन मिशन, शिक्षा, स्वास्थ्य, आयुष, कृषि, उद्यानिकी, वन, मत्स्य, विद्युत, राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास सहित सभी विभागों ने योजनाओं की जानकारी दी और पात्र हितग्राहियों से आवेदन प्राप्त किए।मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के संकल्प का परिणाम है कि आज पुजारी कांकेर जैसे क्षेत्र में प्रशासनिक अमला पहुंचा है, जहां कभी माओवाद के भय से साप्ताहिक बाजार भी बंद हो जाते थे। अब ग्रामीण खुलकर अपनी समस्याएं और मांगें प्रशासन के सामने रख रहे हैं।शिविर में पात्र हितग्राहियों को विभिन्न योजनाओं के तहत सहायक उपकरण, बैशाखी, वाकिंग स्टिक, श्रवण यंत्र, मत्स्य जाल, आईस बॉक्स, मृदा परीक्षण प्रमाण पत्र सहित अन्य सामग्री वितरित की गई। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती माताओं की गोदभराई और नवजात शिशुओं का अन्नप्राशन संस्कार कराया गया। स्वास्थ्य विभाग ने निःशुल्क स्वास्थ्य जांच, दवा वितरण और स्वास्थ्य सलाह दी, वहीं पशुधन विकास विभाग ने पशुओं के उपचार एवं संक्रमण से बचाव संबंधी जानकारी प्रदान की।एसडीएम उसूर श्री भूपेन्द्र गावरे के नेतृत्व तथा सीईओ जनपद पंचायत उसूर श्री प्रभाकर चंद्राकर के समन्वय से शिविर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
- -आपसी सहमति से सुलझेंगे लंबित मामले-सुप्रीम कोर्ट की विशेष पहलः समाधान समारोह के जरिए घर बैठे आभासी (Virtual) माध्यम से भी जुड़ सकेंगे पक्षकाररायपुर / आम जनता को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने तथा आपसी सहमति से विवादों के निपटारे को बढ़ावा देने के लिए भारत के सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा समाधान समारोह विशेष लोक अदालत 2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत आगामी 09 मई 2026 को नेशनल लोक अदालत से होगी, जिसका समापन अगस्त माह में विशेष लोक अदालत के वृहद आयोजनों के साथ होगा।नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ 09 मई 2026 को किया जाएगा। विशेष लोक अदालत (सुप्रीम कोर्ट परिसर) 21, 22 एवं 23 अगस्त 2026 का किया जाएगा। पूर्व सुलह वार्ता (Pre-Litigation) इसकी प्रक्रिया 21 अप्रैल 2026 से ही प्रारंभ हो चुकी है। इस बार की लोक अदालत की विशेषता यह है कि पक्षकार भैतिक (शारीरिक) उपस्थिति के साथ-साथ आभासी (Virtual) माध्यम से भी जुड़ सकते हैं। प्रशिक्षित मध्यस्थ और विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारी आपसी सुलह कराने में सहयोग करेंगे। अपने लंबित मामलों को इस विशेष लोक अदालत में शामिल करने के लिए पक्षकारों को सर्वाेच्च न्यायालय की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध गूगल फॉर्म भरना होगा। आवेदन की अंतिम तिथि 31 मई 2026 तक भर सकेंगे।यहाँ करें संपर्क (सहायता केंद्र)किसी भी प्रकार की जानकारी या तकनीकी सहायता के लिए पक्षकार निम्नलिखित केंद्रों और नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं1. सर्वाेच्च न्यायालय (वन स्टॉप सेंटर/वार रूम) में संपर्क नंबर 011-2311565652, 011-23116464 ईमेल[email protected] पता कक्ष क्रमांक 806 एवं 808, बी ब्लॉक, अतिरिक्त भवन परिसर, सुप्रीम कोर्ट में संपर्क किया जा सकता है।2. जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, रायपुर का पता जिला न्यायालय परिसर, रायपुर 0771-2425944, 91-8301508992 में नंबर संपर्क किया जा सकता है।विधिक सेवा प्राधिकरण ने सभी अधिवक्ताओं, वादीगणों और संबंधित पक्षों से अपील की है कि वे इस समाधान समारोह में सक्रिय रूप से भाग लें। यह लंबित मामलों को बिना किसी कटुता के, आपसी समझौते के माध्यम से समाप्त करने का एक सुनहरा अवसर है।
- -गोंडेरास और नीलावाया में ऐतिहासिक सुशासन चौपालरायपुर /छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन तिहार 2026 अभियान के तहत अब विकास की किरण केवल दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि सीधे सुदूर वनांचलों तक पहुँच रही है। इसी क्रम में छत्तीसगढ के सुकमा जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता की एक नई मिसाल पेश की। बुधवार को कलेक्टर श्री अमित कुमार और पुलिस अधीक्षक श्री किरण चव्हाण ने किसी प्रोटोकॉल की परवाह न करते हुए, खुद मोटरसाइकिल चलाकर 30 किलोमीटर लंबे उबड़-खाबड़ और दुर्गम रास्तों को पार किया और पहुंचविहीन ग्राम गोंडेरास व नीलावाया पहुँचे।जिला प्रशासन सुशासन तिहार के माध्यम से 31 व्यक्तिगत योजनाओं और 14 सामुदायिक सुविधाओं को सीधे ग्रामीणों के द्वार तक पहुँचा रहा है। कलेक्टर और एसपी का यह दौरा साबित करता है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ दूरी मिटाता है, तो जनता के मन में व्यवस्था के प्रति विश्वास और बदलाव की नई उम्मीद जागती है।गोंडेरास गांव में कलेक्टर और एसपी ने किसी आलीशान मंच के बजाय इमली के पेड़ के नीचे बिछी खाट पर बैठकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। ग्रामीणों द्वारा सोलर प्लेट्स के खराब होने की शिकायत पर कलेक्टर ने तत्काल क्रेडा विभाग को सभी घरों में मरम्मत सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। गाँव में आंगनबाड़ी और पंचायत भवन जैसे बुनियादी कार्यों के लिए 70 लाख रुपये की स्वीकृति दी गई, जिसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत को ही सौंपी गई है। शिविर में 17 किसान क्रेडिट कार्ड, 12 जाति प्रमाण पत्र और 11 पीएम-किसान प्रकरणों का निराकरण, 2 किसान किताब, 2 पटवारी प्रतिवेदन सहित कई दस्तावेज मौके पर ही वितरित किए गए।ग्राम नीलावाया पहुँचकर अधिकारियों ने जमीन पर बैठकर चौपाल लगाई। बारिश के दिनों में ग्रामीणों को होने वाली 15 किमी की अतिरिक्त दूरी को खत्म करने के लिए कलेक्टर ने मौके पर ही नाले पर पुलिया निर्माण की स्वीकृति दी। 4 मोतियाबिंद मरीजों को जिला अस्पताल भेजने और गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित प्रसव के लिए सचिव को कड़े निर्देश दिए गए। शिविर के दौरान 2 गर्भवती महिलाओं की गोद भराई की रस्म पूरी की गई और 22 बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र तत्काल बनाकर सौंपे गए।कलेक्टर श्री अमित कुमार ने ग्रामीणों से कहा कि शासन का लक्ष्य नियद नेल्ला नार (आपका अच्छा गाँव) योजना के जरिए हर घर को बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं के सैचुरेशन (पूर्णता) से जोड़ना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय पंचायत को निर्माण एजेंसी बनाना कार्य में तेजी और पारदर्शिता लाने का एक बड़ा कदम है। यह पहली बार है जब कोई कलेक्टर हमारे गाँव तक मोटरसाइकिल से पहुँचा है। अब हमें भरोसा है कि हमारी समस्याएँ अनसुनी नहीं रहेंगी। गांव के सरपंच श्री जोगा वंजामी ने अधिकारियों के आगमन को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह पहली बार है जब कोई कलेक्टर उनके गांव तक पहुंचा है।
- रायपुर । छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग का वह हिस्सा, जिसे कभी 'अबूझ' (अनजान) कहा जाता था, अब डिजिटल संकेतों से जुड़कर अपनी नई पहचान लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड अंतर्गत सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना ने सदियों के संचार सन्नाटे को तोड़ दिया है। अब यहाँ के ग्रामीण अपनों से बात करने के लिए पहाड़ियों की ऊंचाइयों पर नहीं चढ़ते, बल्कि घर बैठे दुनिया से जुड़ रहे हैं। छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्र में संचार क्रांति का यह अध्याय वास्तव में सराहनीय है। 'नो सिग्नल' से सीधे 'कनेक्टिविटी' तक का यह सफर केवल तकनीक का नहीं, बल्कि विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का है।पहाड़ियों की चढ़ाई से मिली मुक्तिग्राम पंचायत मेटानार के आश्रित ग्राम ताहकाडोंड और उसके आसपास के क्षेत्र लंबे समय से 'नो नेटवर्क ज़ोन' में थे। ग्रामीणों के लिए एक फोन कॉल करना किसी चुनौती से कम नहीं था; उन्हें सिग्नल खोजने के लिए ऊंचे पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक आना पड़ता था। टावर की स्थापना के साथ ही अब ताहकाडोंड, कदेर और ब्रेहबेड़ा जैसे गांवों के लगभग 400 ग्रामीण सीधे तौर पर लाभान्वित हो रहे हैं।कनेक्टिविटी का यह विस्तार केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन रक्षक भी सिद्ध हो रहा है।अब आपात स्थिति में ग्रामीण तुरंत 108 एंबुलेंस को कॉल कर सकते हैं। त्वरित स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध होने और समय पर इलाज मिलने से मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी और गंभीर बीमारियों के प्रबंधन में मदद मिलेगी।इंटरनेट के माध्यम से ग्रामीण अब ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल भुगतान और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लिए आवेदन घर बैठे कर पा रहे हैं। यह डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम का संकेत है। पारदर्शिता और ई-गवर्नेंस के साथ शासन की योजनाओं की जानकारी अब सीधे हितग्राहियों तक पहुँच रही है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो रही है और कार्यों में तेजी आई है।अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में मोबाइल टावर की स्थापना शासन की सेवाओं को अंतिम छोर तक पहुँचाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह न केवल संचार सुविधा है, बल्कि विकास का एक सशक्त माध्यम है।ताहकाडोंड के ग्रामीणों ने इस पहल पर हर्ष व्यक्त करते हुए इसे एक नए युग की शुरुआत बताया है। मोबाइल नेटवर्क आने से न केवल शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार होगा, बल्कि स्थानीय उत्पादों के बाजार और युवाओं के लिए सूचना के नए द्वार भी खुलेंगे। शासन का यह प्रयास सिद्ध करता है कि भौगोलिक बाधाएं अब विकास के आड़े नहीं आएंगी।
- -प्रदेश के कुल चने का 50% अकेले खरीदारायपुर ।छत्तीसगढ़ में 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना' को धरातल पर उतारने में धमतरी जिला एक मॉडल बनकर उभरा है। सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने वाली केंद्र और राज्य शासन की इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत धमतरी ने न केवल भंडारण बुनियादी ढांचे में विस्तार किया है, बल्कि चना खरीदी के क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए पूरे प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है।4 पैक्स समितियों में बनेंगे 2500 मीट्रिक टन के महा-गोदामयोजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु NCCF रायपुर द्वारा जिले की चार प्रमुख प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों (PACS) को 'गोदाम हायरिंग एश्योरेंस लेटर' जारी कर दिए गए हैं। अंवरी, कोसमर्रा, पोटियाडीह (अमदी) और कोलियारी समितियों में अत्याधुनिक भंडारण व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। प्रत्येक गोदाम की क्षमता 2500 मीट्रिक टन होगी, जिसे विशेष रूप से चने के वैज्ञानिक भंडारण के लिए तैयार किया जा रहा है।चना खरीदी में धमतरी का दबदबा: लक्ष्य के पार पहुँचने की तैयारीधमतरी जिले ने कृषि क्षमता और प्रशासनिक मुस्तैदी का लोहा मनवाते हुए अब तक 97 हजार क्विंटल चने की खरीदी पूरी कर ली है। प्रारंभिक लक्ष्य 1 लाख क्विंटल रखा गया है,जिसमेवर्तमान स्थिति लक्ष्य के करीब होने के बावजूद खरीदी निरंतर जारी है। पूरे छत्तीसगढ़ राज्य में हुई कुल चना खरीदी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले धमतरी जिले से दर्ज किया गया है।प्रशासनिक सक्रियता और आगामी रणनीतियोजना को गति देने के लिए एग्रीमेंट और एमओयू की प्रक्रिया तेजी से पूर्ण कर ली गई है। जमीनी स्तर पर तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु NCCF मुख्यालय, नई दिल्ली के साथ आरसीएस (RCS) अधिकारियों और पैक्स प्रबंधकों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उच्च स्तरीय बैठक की तैयारी की जा रही है। गौरतलब है कि धमतरी जिले ने चना खरीदी और भंडारण व्यवस्था में जो उत्कृष्टता दिखाई है, वह किसानों की मेहनत और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का परिणाम है। इससे खाद्यान्न की बर्बादी में रोक लगेगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिलेगा।क्या है 'विश्व की सबसे बड़ी अनाज भंडारण योजना'?भारत सरकार द्वारा 31 मई 2023 को शुरू की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में ही PACS के माध्यम से भंडारण, प्रोसेसिंग यूनिट और कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना है। इससे न केवल परिवहन लागत में कमी आएगी, बल्कि भंडारण के अभाव में होने वाली अनाज की बर्बादी पर भी लगाम लगेगी।धमतरी की यह सफलता आज प्रदेश के अन्य जिलों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनी हुई है।
- -कलेक्टर ने सम्बंधित विभाग से कहा एक माह के भीतर पूर्ण करें कार्य, ग्रामीणों को पेयजल से मिलेगी राहत-जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदमअम्बिकापुर / जिले के सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब इन क्षेत्रों में कुल 113 हैंडपंप एवं बोरवेल की खुदाई की जाएगी, जिससे ग्रामीणों को पारंपरिक स्रोतों से पानी लाने की मजबूरी से राहत मिलेगी।विगत दिनों मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने सरगुजा जिले में पेयजल समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिला कलेक्टर को तत्काल प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा था कि दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित नहीं होना पड़े। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया था कि शासन की योजनाओं खासकर बुनियादी जरूरतों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना यह सर्वोच्च प्राथमिकता है।इसी क्रम में सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित विभागों को एक माह के भीतर सभी 113 हैंडपंप एवं बोरवेल कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं।कलेक्टर ने बताया कि स्थलीय सर्वे पहले ही कर लिया गया है जिले के लुण्ड्रा में 34, बतौली में 06, लखनपुर में 22, अम्बिकापुर में 11, सीतापुर में 16, मैनपाट में 20 तथा उदयपुर में 04 इस तरह इन विकासखण्डों में डीएमएफ मद से 113 हैंडपंप एवं बोरवेल खनन की जाएगी। 24 अप्रैल को आयोजित जिला खनिज संस्थान न्यास की शासी परिषद की बैठक में पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, लुण्ड्रा विधायक श्री प्रबोध मिंज, सहित अन्य सदस्यों की सहमति से यह कार्य की स्वीकृति दी गई है।कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायत सीईओ को निर्देशित किया है कि हैंडपंप खनन, बोरवेल खनन कर दीर्घकालिक समाधान के लिए पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं तथा सभी कार्य प्राथमिकता के आधार पर तेजी से एक माह में पूर्ण किए जाएं, ताकि सुदूर एवं पहाड़ी कोरवा बसाहटों में स्थायी पेयजल सुविधा सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री श्री साय के इस संवेदनशील पहल से जिले के दूरस्थ व वनांचल क्षेत्रों में वर्षों से चली आ रही पेयजल की समस्या से सैकड़ो गांवों के हजारों निवासियों को निश्चित ही राहत मिलेगी।
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- जन समस्या निवारण शिविर में समाधान, रैनु राम को मिला भूमि स्वामित्व का अधिकार
मोहला । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित सुशासन तिहार 2026 आम जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासन का एक सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया है। इसी कड़ी में विकासखंड मानपुर के अंतर्गत ग्राम साल्हेभट्टी में आयोजित जन समस्या निवारण शिविर में ग्राम सेण्डेवाही के आदिवासी किसान श्री रैनु राम, जो वर्षों से अपनी भूमि के स्वामित्व संबंधी दस्तावेज़ के अभाव में कई प्रकार की परेशानियों का सामना कर रहे थे, उनकी समस्या को गंभीरता से लेते हुए राजस्व विभाग ने स्वामित्व योजना के अंतर्गत उन्हें भूमि का पट्टा पत्रक प्रदान किया गया। पट्टा मिलने के बाद श्री रैनु राम के चेहरे पर संतोष और खुशी साफ झलक रही थी। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब उन्हें अपनी जमीन का कानूनी अधिकार मिल गया है, जिससे वे न केवल निश्चिंत होकर खेती कर सकेंगे बल्कि भविष्य में शासकीय योजनाओं का भी पूरा लाभ उठा पाएंगे।
उन्होंने शासन-प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा सुशासन तिहार हमारे जैसे ग्रामीण और आदिवासी किसानों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं हैं। पहले हमें छोटी-छोटी समस्याओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब अधिकारी स्वयं गांव में आकर हमारी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। इससे हमें समय, श्रम और धन—तीनों की बचत हो रही है। सुशासन तिहार 2026 वास्तव में शासन की संवेदनशीलता और जवाबदेही का प्रतीक है, जो आम नागरिकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस पहल ने प्रशासन और जनता के बीच विश्वास को और मजबूत किया है, और यह विश्वास ही एक सशक्त एवं विकसित समाज की नींव है। -
- जनसमस्या निवारण शिविर में मिली त्वरित सुविधा
- ग्रामीणों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ
राजनांदगांव । सुशासन तिहार 2026 के अंतर्गत आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर नागरिकों के लिए शासन की सेवाओं को सरल एवं सुलभ बनाने का प्रभावी माध्यम बन रहा हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में आयोजित शिविरों के माध्यम से लोगों की छोटी-बड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान किया जा रहा है। इसी कड़ी में राजनांदगांव विकासखंड के अचानकपुर भाटापारा निवासी श्री लीलाधर देवांगन का ग्राम सुंदरा में आयोजित शिविर में नि:शुल्क लर्निंग लायसेंस बना है। श्री लीलाधर देवांगन ने बताया कि वे लंबे समय से लर्निंग लायसेंस बनवाना चाहते थे, लेकिन कार्यालयों में जाने और प्रक्रिया की जानकारी के अभाव में यह कार्य नहीं हो पा रहा था। सुशासन तिहार के तहत ग्राम सुंदरा में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर में उन्हें परिवहन विभाग द्वारा दी जा रही सुविधाओं की जानकारी मिली। शिविर में ही आवश्यक दस्तावेजों की जांच कर सरल प्रक्रिया के माध्यम से उनका नि:शुल्क लर्निंग लायसेंस बनाया गया। उन्होंने बताया कि अब लर्निंग लायसेंस मिलने से वे नियमानुसार वाहन चलाने के लिए आगे की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। इससे उन्हें दैनिक कार्यों एवं आवागमन में सुविधा मिलेगी। उन्होंने कहा कि पहले छोटे-छोटे कार्यों के लिए लोगों को जिला मुख्यालय या विभागीय कार्यालयों में जाने की जरूरत नहीं हैं, अब गांव स्तर पर ही समाधान मिलने से समय और खर्च दोनों की बचत हो रही है।
श्री लीलाधर देवांगन ने शासन एवं जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि सुशासन तिहार वास्तव में जनसामान्य के लिए लाभकारी साबित हो रहा है। शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों को विभिन्न विभागों की योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ एक ही स्थान पर मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को बड़ी राहत मिल रही है। - -मौके पर ही निराकृत हुई ग्रामीणों की समस्याएंरायपुर । छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी पहल 'सुशासन तिहार 2026' के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच की दूरी कम होती नजर आ रही है। इसी कड़ी में जिला सारंगढ़-बिलाईगढ़ के सारंगढ़ ब्लॉक के ग्राम उलखर और बरमकेला विकासखंड के ग्राम बड़े नावापारा में शिविरों का आयोजन किया गया, जहां 1400 से अधिक ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं को सीधे आमजन तक पहुंचाना और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान करना था। उलखर शिविर में जहां 638 आवेदन प्राप्त हुए, वहीं बड़े नावापारा में 836 ग्रामीणों ने अपनी मांगों और शिकायतों के निराकरण हेतु पंजीयन कराया।कलेक्टर ने दोनों ही शिविरों का बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्राप्त आवेदनों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए। उन्होंने विभिन्न विभागों के स्टॉलों का अवलोकन कर यह जानने का प्रयास किया कि ग्रामीणों को किन क्षेत्रों में सबसे अधिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। शिविर के दौरान स्वास्थ्य और आयुर्वेद विभाग ने नि:शुल्क जांच शिविर लगाया, वहीं मत्स्य विभाग द्वारा जाल वितरण और समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांग प्रमाण पत्र व पेंशन जैसी सुविधाएं तत्काल प्रदान की गईं। राजस्व विभाग ने किसान पुस्तिका और बी-1 के वितरण में तत्परता दिखाई, तो खाद्य विभाग ने पात्र हितग्राहियों को नए राशन कार्ड सौंपे। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत स्वीकृति और पूर्णता प्रमाण पत्र मिलने से कई परिवारों के अपने घर का सपना साकार हुआ।प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ यह शिविर सामाजिक सरोकारों का भी गवाह बना। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा गर्भवती महिलाओं की गोदभराई कर उन्हें उपहार दिए गए और छोटे बच्चों का अन्नप्राशन संस्कार संपन्न कराया गया। स्थानीय संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के स्टॉल लगाए गए, जिन्होंने ग्रामीणों का मन मोह लिया। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता दिखाते हुए कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने जल बचाने की सामूहिक शपथ ली। इस सफल आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के कर्मचारियों ने एकजुट होकर कार्य किया, जिससे शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के व्यक्ति तक सुगमता से पहुंच सका।
- -वैज्ञानिक उपलब्धि से मिला किसानों को आर्थिक संबलरायपुर /बस्तर की पहचान अब धीरे-धीरे बदल रही है। पारंपरिक खेती वाले इस क्षेत्र में अब बागवानी के नए प्रयोग सफल होने लगे हैं। महात्मा गाँधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय द्वारा संचालित क्रांतिकारी डेब्रिधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र जगदलपुर के वैज्ञानिकों की 09 वर्षों की सतत मेहनत ने इतिहास रच दिया है। पहली बार बस्तर में लीची के पौधों में सफल फलन हुआ है, जिसे कृषि क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस सफलता की शुरुआत वर्ष 2016-17 में हुई थी, जब तत्कालीन वैज्ञानिक डॉ. गणेश प्रसाद नाग ने अनुसंधान केंद्र अंबिकापुर से लीची की उन्नत किस्मों को लाकर जगदलपुर स्थित महाविद्यालय प्रक्षेत्र में रोपण कराया। उस समय बस्तर की जलवायु में लीची की खेती को लेकर कोई ठोस उदाहरण मौजूद नहीं था, बावजूद इसके वैज्ञानिकों ने इसे चुनौती के रूप में लिया और शोध कार्य शुरू किया।उद्यानिकी महाविद्यालय प्रक्षेत्र में इंद्रा लीची-2, अंबिका लीची-1, चाइना, शाही और रोज सेंटेड जैसी पांच प्रमुख किस्मों के करीब 40 पौधे लगाए गए। शुरुआती वर्षों में इन पौधों की वृद्धि, जलवायु के प्रति अनुकूलन क्षमता और उत्पादन पर लगातार अध्ययन किया गया। लंबे इंतजार और वैज्ञानिक प्रबंधन के बाद अब इन पौधों में फल लगना शुरू हो गया है। फल विज्ञान विभाग के वैज्ञानिक डॉ. रामकुमार देवांगन ने पौध प्रावर्धन, पुष्पन, फल सेट सुधार, ट्रेनिंग, प्रूनिंग और फ्रूट क्रैकिंग जैसी समस्याओं पर गहन शोध किया। वहीं डॉ. भागवत कुमार भगत ने लीची के मूल्य संवर्धन जैसे जूस, जैली और अन्य उत्पाद पर काम कर इसे बाजार से जोड़ने की दिशा में पहल की है।उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रवि रतन सक्सेना ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर वैज्ञानिकों की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में लीची की सफल फलन केवल एक शोध सफलता नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कृषि विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सिद्ध करती है कि वैज्ञानिक अनुसंधान, धैर्य और नवाचार के माध्यम से बस्तर जैसे पारंपरिक कृषि क्षेत्र में भी उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलों की अपार संभावनाएं विकसित की जा सकती हैं। उन्होंने आगे कहा कि लीची जैसी नगदी फसल का सफल उत्पादन किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और क्षेत्र में बागवानी आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगी। कुलपति ने यह भी उल्लेख किया कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नई फसल तकनीकों का विकास करना ही नहीं, बल्कि उन्हें किसानों तक पहुंचाकर उनके आर्थिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त करना है।प्रो. सक्सेना ने वैज्ञानिकों के 09 वर्षों के सतत प्रयास, अनुसंधान क्षमता और समर्पण की प्रशंसा करते हुए विश्वास जताया कि आने वाले समय में बस्तर क्षेत्र लीची उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन के क्षेत्र में भी नई पहचान बनाएगा। उन्होंने इसे आत्मनिर्भर कृषि, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला परिवर्तनकारी कदम बताया। वहीं उद्यानिकी महाविद्यालय जगदलपुर के वर्तमान अधिष्ठाता डॉ. नाग ने बताया कि जिन उन्नत किस्मों को विकसित करने में सफलता मिली है, उनके पौधे अब किसानों को उनकी मांग के अनुसार उपलब्ध कराए जाएंगे। साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जाएगा, ताकि वे इस नई फसल को आसानी से अपना सकें।साल 2016-17 में इस परियोजना की शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर की गई थी। अनुसंधान केंद्र, अंबिकापुर से लाई गई पांच उन्नत किस्मों इंद्रा लीची-2, अंबिका लीची-1, चाइना, शाही और रोज सेंटेड को केडीसीएचआरएस जगदलपुर के प्रक्षेत्र में रोपित किया गया। शुरुआती वर्षों में सबसे बड़ी चुनौती बस्तर की जलवायु के अनुसार पौधों को अनुकूल बनाना था। वैज्ञानिकों ने सिंचाई, पोषण प्रबंधन और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान दिया। लगभग 09 वर्षों के धैर्यपूर्ण प्रयासों के बाद पौधों में सफल फलन हुआ, जो इस बात का प्रमाण है कि बस्तर में भी लीची की खेती संभव है।लीची की सफल खेती बस्तर के किसानों के लिए नई आर्थिक संभावनाएं खोल रही है। अब तक सीमित फसलों पर निर्भर रहने वाले किसान इस नगदी फसल को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकते हैं। बाजार में लीची की अच्छी मांग और कीमत मिलती है, जिससे किसानों को सीधे लाभ की संभावना है, साथ ही बागवानी आधारित खेती से रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। जिससे क्षेत्र के लोगों की आर्थिक समृद्धि को बल मिलेगा। महाविद्यालय प्रक्षेत्र अब एक मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां किसान प्रशिक्षण लेकर आधुनिक तकनीकों को सीख सकेंगे।उद्यानिकी महाविद्यालय के वैज्ञानिकों ने केवल उत्पादन तक सीमित न रहकर लीची के मूल्य संवर्धन पर भी काम शुरू किया है। जूस, जैली, स्क्वैश जैसे उत्पादों के विकास पर शोध किया जा रहा है, जिससे किसानों को कच्चा फल बेचने के बजाय अधिक मुनाफा मिल सके। इसके साथ ही ग्राफ्टिंग, फ्रूट सेट सुधार और फ्रूट क्रैकिंग रोकने जैसी तकनीकों पर भी काम जारी है। भविष्य में यह पहल बस्तर को लीची उत्पादन और प्रसंस्करण का एक प्रमुख केंद्र बना सकती है।
- रायपुर । जिले में सुशासन की अवधारणा को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से आयोजित ‘‘सुशासन तिहार‘‘ आज किसानों के लिए खुशहाली का नया पैगाम लेकर आया है। ग्राम हल्बारास में आयोजित जनसमस्या निवारण शिविर के दौरान उस वक्त एक सुखद दृश्य देखने को मिला, जब बड़ी संख्या में किसानों की समस्याओं का न केवल त्वरित निराकरण किया गया, बल्कि उन्हें शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं से सीधे लाभान्वित भी किया गया। इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) का वितरण और नवीनीकरण रही, जिसने खेती-किसानी को एक नई दिशा देने का मार्ग प्रशस्त किया है।शिविर के दौरान ग्राम हल्बारास के प्रगतिशील किसान श्री हिराधर भागरथी के चेहरे पर उस समय आत्मसंतुष्टि की मुस्कान तैर गई, जब उन्हें अपना किसान क्रेडिट कार्ड प्राप्त हुआ। अपनी भावनाओं को साझा करते हुए श्री भागरथी ने शासन और जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया और बताया कि उनके पास 7 एकड़ से अधिक उपजाऊ भूमि है, लेकिन अब तक संसाधनों की कमी एक बड़ी बाधा थी। उन्होंने विश्वास जताया कि इस कार्ड के माध्यम से अब उन्हें बैंक से सुलभ ऋण प्राप्त होगा, जिससे वे खाद, उन्नत बीज और आधुनिक कृषि उपकरणों की व्यवस्था समय पर कर सकेंगे। श्री भागरथी का कहना है कि अब वे पारंपरिक धान की खेती के दायरे से बाहर निकलकर अन्य नकदी फसलों की ओर कदम बढ़ाएंगे, जिससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी बल्कि वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में भी सक्षम होंगे।इसी कड़ी में, किसान क्रेडिट कार्ड के नवीनीकरण के लिए पहुंचे श्री नवल सिंह राणा के अनुभव इस योजना की जमीनी सफलता को प्रमाणित करते हैं। श्री राणा ने बताया कि केसीसी किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इसने उन्हें साहूकारों के चंगुल और अत्यधिक ब्याज के बोझ से मुक्ति दिलाई है। उन्होंने साझा किया कि इस कार्ड के माध्यम से उन्होंने न केवल खेती बल्कि पशुपालन जैसे सहायक व्यवसायों के लिए भी ऋण प्राप्त किया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में व्यापक सुधार हुआ है। उनका मानना है कि समय पर वित्तीय सहायता मिलने से किसान अपनी आवश्यकताओं को सम्मान के साथ पूरा कर पाते हैं और आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते हैं।सुशासन तिहार के माध्यम से जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित कर रहा है कि सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता और सरलता के साथ पहुँचे। हल्बारास में आयोजित यह शिविर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि जब प्रशासन संवेदनशीलता के साथ जनता के द्वार पर पहुँचता है, तो न केवल समस्याओं का समाधान होता है, बल्कि विकास की प्रक्रिया में आम नागरिक की भागीदारी भी सुनिश्चित होती है। आज दंतेवाड़ा के किसान केसीसी की शक्ति से लैस होकर आधुनिक और लाभप्रद खेती के एक नए युग की ओर अग्रसर हो रहे हैं।













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