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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई है। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। उन्हें लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ''जनव्यवस्था बनाए रखने'' के लिए रासुका के तहत हिरासत में लिया गया और फिर जोधपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। बयान में कहा गया है कि वांगचुक पहले ही रासुका के तहत हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर चुके हैं। इसमें कहा गया है, ''सरकार लद्दाख के विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है ताकि इस क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का समाधान किया जा सके।
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नयी दिल्ली. खाड़ी देशों से एलपीजी लेकर आ रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाज शनिवार सुबह युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर गए। जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने प्रेसवार्ता में बताया कि एलपीजी ला रहे जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये जहाज 92,700 टन एलपीजी ला रहे हैं, और इनके 16-17 मार्च को भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। ये दोनों पोत उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर फंसे हुए थे।
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गुवाहाटी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम विधानसभा चुनाव से पहले शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचे। शाह इस दौरान एक आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होंगे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा शाखा की रैली को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया। शर्मा ने एक पोस्ट में कहा, "मां कामाख्या की धरती पर आदरणीय अमित शाह का हार्दिक स्वागत है। आदरणीय गृह मंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और अपने ज्ञानवर्धक शब्दों से हमारी युवा शक्ति का उत्साह बढ़ाएंगे।" पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि शाह शहर के कैनाधारा राजकीय अतिथि गृह में ठहरेंगे।
भाजपा की असम इकाई के मीडिया संयोजक ध्रुबज्योति मारल ने बताया, "वह (शाह) पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात कर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। अभी कोई कार्यक्रम तय नहीं है, लेकिन हम उनके मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।" शाह रविवार सुबह कालापहाड़ क्षेत्र स्थित 'प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल' (पीएमसीएच) का उद्घाटन करेंगे। प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो परिसर हैं, एक पानबाजार में और दूसरा कालापहाड़ में। यह गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाद राज्य की राजधानी में दूसरा ऐसा संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि शाह युवाओं को प्रेरित करने के लिए उन्हें संबोधित करेंगे।
भाजपा की असम इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने 'एक्स' पर कहा, "माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कल (रविवार को) संबोधित किए जाने वाले 'युवा शक्ति समारोह' की तैयारियों की समीक्षा की गई, जिसमें एक लाख से अधिक युवाओं के भाग लेने की उम्मीद है। यह विकसित और आत्मनिर्भर असम की दिशा में एक बड़ा कदम है।" एक अधिकारी ने बताया कि युवा सम्मेलन के बाद शाह राज्य से रवाना होंगे।
असम विधानसभा की 126 सीट के लिए अप्रैल में चुनाव होने की उम्मीद है और भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 2023 में हुई परिसीमन प्रक्रिया के बाद असम में यह पहला विधानसभा चुनाव होगा। -
वाराणसी (उप्र). भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह स्वीकार किया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद सामने आया था। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एएसआई महानिदेशक वाई. एस. रावत ने कहा कि सारनाथ में सबसे पहले खुदाई का काम जगत सिंह ने कराया था, जिसके कारण इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व का पता चला। रावत ने बताया कि जगत सिंह के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने एएसआई को साक्ष्यों के दस्तावेज सौंपे थे, जिनसे यह साबित होता है कि इस स्थल पर पहली खुदाई जगत सिंह ने ही कराई थी। वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, फलस्वरूप बौद्ध धर्म के प्रसार की शुरुआत हुई। प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि सारनाथ का इलाका कभी उनके परिवार की ज़मींदारी के अंतर्गत आता था और ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि बाबू जगत सिंह ने 1787-88 में वहां खुदाई का काम करवाया था।
उन्होंने कहा, ''जगत सिंह ने उस इलाके में कुछ खुदाई का काम कराया था, जिसके परिणामस्वरूप अंततः इस स्थल की खोज हुई।'' रावत ने कहा कि सारनाथ परिसर में लगी पट्टिका (शिलालेख) में अब संशोधन कर दिया गया है, जिसमें जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देते हुए उनका नाम भी शामिल किया गया है। यह संशोधन हाल में सारनाथ परिसर में लगाई गई नई पट्टिका में देखा जा सकता है। जहां पहले वाली पट्टिका में इस स्थल के पुरातात्विक महत्व की पहली खोज का श्रेय 1798 में ब्रिटिश अधिकारियों को दिया गया था, वहीं नई पट्टिका में यह बताया गया है कि इस स्थल का महत्व 18वीं सदी के आखिर में तब सामने आया, जब काशी के बाबू जगत सिंह ने निर्माण सामग्री के लिए एक प्राचीन टीले की खुदाई कराई थी, फलस्वरूप कई महत्वपूर्ण पुरावशेषों की खोज हुई। इस तरह, संशोधित शिलालेख इस जगह पर शुरुआती खुदाई के काम में जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देता है।
साथ ही, वह यह भी बताता है कि कई पुरातत्वविदों ने बाद में खुदाई की, जिसमें तीसरी सदी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं सदी ईस्वी तक के मठ, स्तूप, मंदिर और मूर्तियां मिलीं। वाराणसी के जगतगंज शाही परिवार के प्रतिनिधि और बाबू जगत सिंह के छठी पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि उनके पूर्वज के ऐतिहासिक योगदान के बारे में शोध और दस्तावेज़ी सबूत इकट्ठा करने की कोशिशें लंबे समय से चल रही थीं। उन्होंने कहा, ''अब एएसआई ने औपचारिक रूप से यह मान लिया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद ही सामने आया था।'' प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सारनाथ और उसके प्राचीन अवशेषों की खोज अंग्रेजों ने की थी, लेकिन एएसआई की इस मान्यता से यह साफ़ हो गया है कि जगत सिंह ने उनसे पहले ही यह काम कर लिया था। प्रदीप नारायण सिंह के अनुसार एएसआई की यह मान्यता इस बात का भी संकेत है कि ब्रिटिश काल के दौरान बाबू जगत सिंह के योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया था और उन्हें सारनाथ की खोज का सही श्रेय नहीं मिला था। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 17 मार्च से औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत 'उद्योग' शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू करने वाली है। न्यायालय की 17 मार्च की कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ करेगी। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल हैं। इससे पहले 16 फरवरी को न्यायालय ने उन व्यापक मुद्दों को तैयार किया था, जिन पर इस पीठ को निर्णय लेना है। देश की सर्वोच्च न्यायालय को विचार करना है कि क्या 1978 के बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड मामले में न्यायमूर्ति वी आर कृष्णा अय्यर द्वारा 'उद्योग' को परिभाषित करने के लिए तय किए गए मानक सही हैं? साथ ही, पीठ यह भी देखेगी कि औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1982 और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (जो 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी है) का मूल अधिनियम में 'उद्योग' शब्द की व्याख्या पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ता है। पीठ द्वारा तय किए गए मुख्य मुद्दों में से एक यह है कि क्या सरकारी विभागों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कल्याण कार्यों, योजनाओं या अन्य उद्यमों को औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(जे) के तहत ''औद्योगिक गतिविधियां'' माना जा सकता है। अदालत ने संबंधित पक्षों को 28 फरवरी तक अपनी लिखित दलीलें देने का मौका दिया था। नौ न्यायाधीशों की यह पीठ 17 मार्च को सुनवाई शुरू करेगी और इसे 18 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि 2017 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे के गंभीर और व्यापक प्रभावों को देखते हुए इसे नौ न्यायाधीशों की पीठ को भेजने का निर्णय लिया था। इससे पहले मई 2005 में भी एक पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। यह कानूनी विवाद दशकों पुराना है। वर्ष 1996 में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सामाजिक वानिकी विभाग को 'उद्योग' माना था, लेकिन 2001 में दो न्यायाधीशों की पीठ ने अलग राय व्यक्त की, जिसके बाद मामला बड़ी पीठों के पास पहुंचता गया।
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नई दिल्ली। महाराष्ट्र राज्य के कृषि विभाग ने शुक्रवार को किसानों और नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 17 से 20 मार्च के बीच अशांत मौसम की आशंका जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में, खासकर दोपहर के समय, बादल छाए रहने की संभावना है। इसमें विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि विभाग ने इन क्षेत्रों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, इन मौसम संबंधी घटनाओं की तीव्रता 18 मार्च से 20 मार्च के बीच पहुंचने की आशंका है।विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित भंडारण में ले जाएं या उन्हें बारिश और हवा से बचाने के लिए जलरोधी सामग्री से अच्छी तरह ढक दें। कृषि गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की दैनिक जानकारी पर बारीकी से नज़र रखें। संभावित ओलावृष्टि और तेज हवाओं से खड़ी फसलों को बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए।कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “बिजली गिरने और तेज हवाओं के पूर्वानुमान को देखते हुए, हम सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और मौसम संबंधी नवीनतम सूचनाओं के प्रति सतर्क रहें।”अधिकारी के अनुसार, यह मौसम पैटर्न महाराष्ट्र में मानसून पूर्व संक्रमण काल की विशेषता है। मार्च के मध्य में, भूभाग पर बढ़ती गर्मी अक्सर स्थानीय वायुमंडलीय अस्थिरता का कारण बनती है। जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी से भरी हवाएं इस शुष्क गर्मी से टकराती हैं, तो संवहनी बादलों का निर्माण होता है, जिससे रिपोर्ट में उल्लेखित “दोपहर की आंधी” आती है।उन्होंने कहा, “किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है क्योंकि गेहूं, चना और विभिन्न फलों जैसी फसलें या तो कटाई के लिए तैयार हैं या खुले खेतों में पड़ी हैं।”अधिकारी ने आगे सलाह दी कि किसानों को कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित, ढके हुए भंडारण क्षेत्र या गोदाम में ले जाना चाहिए। यदि आंतरिक भंडारण उपलब्ध नहीं है, तो फसलों की सुरक्षा के लिए प्लास्टिक की चादरें या तिरपाल का उपयोग करना चाहिए। भौतिक क्षति को कम करने के लिए उच्च मूल्य वाले बागों पर ओलावृष्टि से बचाव के जाल लगाने चाहिए। ओले पिघलने के बाद जलभराव को रोकने के लिए खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए और पशुओं को मजबूत शेड में सुरक्षित रखना चाहिए तथा जानवरों को पेड़ों के नीचे रखने से बचना चाहिए।बता दें कि रबी की फसल की कटाई इस समय चल रही है, ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों से संभावित नुकसान को कम करने के लिए फसल संरक्षण, योजना और सुरक्षा सहित तत्काल एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया है। -
नई दिल्ली। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने शुक्रवार को संकेत दिया कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को जल्द ही सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जा सकती है। राजदूत फतहली ने कहा कि भारत और ईरान क्षेत्र में साझा हित रखते हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमारा मित्र देश है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देखेंगे। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के क्षेत्र में समान हित हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के बाद मौजूदा हालात में भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में ईरान की मदद की है।राजदूत का यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है।तख्त-रवांची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने के आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यह मार्ग बंद था। उन्होंने कहा कि ईरान दुश्मन देशों को इस स्ट्रेट का इस्तेमाल नहीं करने देगा। उनके मुताबिक, जो देश ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल रहे हैं, उन्हें इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही का लाभ नहीं दिया जाएगा।बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इधर, भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।इसके साथ ही डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा 28 फरवरी 2026 को जारी सुरक्षा संबंधी सलाह अभी भी लागू है। मंत्रालय ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और परिस्थितियों को देखते हुए निगरानी व तैयारी के उपाय और मजबूत किए गए हैं। -
नई दिल्ली। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने शुक्रवार को विधानसभा को सूचित किया कि महाराष्ट्र के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन बोर्डों के स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने के लिए अधिसूचना लागू कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे इस मुद्दे पर सदस्य हारून खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मंत्री भुसे ने कहा कि 1 मार्च, 2020 की अधिसूचना के अनुसार, शिक्षा का माध्यम या प्रबंधन बोर्ड कोई भी हो, मराठी सभी स्कूलों में अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का पालन करने वाले विद्यालयों में भी, मराठी को ‘द्वितीय भाषा’ या ‘तृतीय भाषा’ के रूप में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में मराठी को हटाया नहीं जा सकता।विधायक हारून खान की विशेष शिकायत के बाद, मंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग संबंधित विद्यालय का तत्काल निरीक्षण करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यदि मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो प्रबंधन को कानूनी आवश्यकताओं से अवगत कराने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह नियम सरकारी, निजी, गैर-सरकारी और सभी विदेशी बोर्ड स्कूलों पर लागू होता है।मंत्री ने कहा कि चूंकि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करने में कोई समझौता नहीं करेगी कि नई पीढ़ी इसे सीखे। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों को पहले चेतावनी दी जाएगी, और लगातार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।इस बीच, मंत्री भुसे ने घोषणा की कि तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, निजी पूर्व-प्राथमिक स्कूलों के अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण, विनियमन और गुणवत्ता आश्वासन के लिए कानून लाने की प्रक्रिया चल रही है।निजी पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के लिए अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण का मुद्दा सदस्य मनीषा चौधरी ने उठाया। राज्य, जिला प्रशासन और अभिभावकों के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, 24 अप्रैल, 2025 के सरकारी परिपत्र के माध्यम से ‘पूर्व-विद्यालय पंजीकरण पोर्टल’ पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। मंत्री के अनुसार, विद्यालयों से स्थान, कक्षाओं की संख्या, प्रबंधन, छात्र संख्या, बुनियादी ढांचा, खेल का मैदान, स्वच्छता, पेयजल, सीसीटीवी और कर्मचारियों से संबंधित विवरण प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से असम के कोकराझार में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी। पीएम ने कहा कि खराब मौसम के कारण वे स्वयं कोकराझार नहीं आ सके और उन्होंने उपस्थित नागरिकों से इसके लिए क्षमा मांगी। पीएम मोदी ने बताया कि वे गुवाहाटी से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा और रूपनाथ ब्रह्मा जैसे महान व्यक्तित्वों को नमन करते हैं। पीएम ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना उनके प्रति एक ऋण है, जिसे वे समर्पित सेवा और क्षेत्रीय विकास के माध्यम से चुकाना चाहते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “आपकी सेवा और इस क्षेत्र के विकास के माध्यम से इस ऋण को चुकाना हमेशा से मेरा प्रयास रहा है।”
पीएम ने कहा कि गुवाहाटी की अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्हें बागुरुम्बा दहौ उत्सव में जीवंत बोडो संस्कृति का अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। पीएम मोदी ने कहा कि बोडो समुदाय अपनी भाषा, विरासत और परंपराओं को सावधानीपूर्वक संरक्षित करने के लिए अपार प्रशंसा का पात्र है। श्री मोदी ने कहा कि बाथौ जैसी आध्यात्मिक प्रथाएं और बैसागु जैसे त्योहार भारत की समग्र सांस्कृतिक शक्ति को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “ये परंपराएं भारत की सांस्कृतिक शक्ति को सुदृढ़ करती हैं”।प्रधानमंत्री ने कहा कि दोहरी इंजन वाली सरकार असम की विरासत को संरक्षित करने और इसकी तीव्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि चालू कार्यक्रम के दौरान 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आरंभ किया गया। पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि बोडोलैंड में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए विशेष रूप से 1,100 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम माला अभियान का तीसरा चरण राज्य भर में कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। श्री मोदी ने कहा, “इन पहलों के माध्यम से असम की सड़क कनेक्टिविटी और भी मजबूत होगी।”प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में क्षेत्रीय परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि ये परिवहन परियोजनाएं जनता को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी। श्री मोदी ने कहा कि बेहतर व्यवस्था से किसानों को बड़े बाजारों तक सुगम पहुंच मिलेगी और वे सशक्त बन सकेंगे। प्रधानमंत्री ने इन परिवर्तनकारी विकास कार्यों के शुभारंभ पर नागरिकों को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “ये परियोजनाएं सुनिश्चित करेंगी कि किसानों की उपज सरलता से प्रमुख बाजारों तक पहुंचे।”प्रधानमंत्री ने कहा कि कोकराझार और आसपास के क्षेत्रों ने पिछले कई दशकों में भारी पीड़ा और नुकसान झेला है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब पहाड़ियों में केवल हिंसा और हथियारों की आवाजें गूंजती थीं। पीएम मोदी ने कहा कि अब वातावरण में सद्भाव आ गया है और ‘खाम’ और ‘सिफुंग’ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि हवा में गूंज रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बोडोलैंड और असम वर्तमान में शांति और समृद्धि का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “आज बोडोलैंड शांति और विकास के पथ पर चल पड़ा है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बीटीआर क्षेत्र में छह महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की आधारशिला आज रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें एक रेलवे कार्यशाला की स्थापना भी शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि भूटान के लिए आगामी रेल संपर्क और विभिन्न स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यह क्षेत्र एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र बन जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोकराझार में वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव इस क्षेत्र की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक है। श्री मोदी ने बल देकर कहा, “इन परियोजनाओं के माध्यम से कोकराझार व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि वे हाग्रामा मोहिलारी और हेमंत बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली टीमों को विकास के प्रति उनके समर्पण के लिए हार्दिक बधाई देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार स्थायी स्थिरता को प्राथमिकता देती है। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि बोडो शांति समझौता एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी जिसने सभी प्रमुख संगठनों को एक मंच पर एकजुट किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समावेशी दृष्टिकोण अतीत की राजनीति से अलग था। श्री मोदी ने कहा, “हमने सभी को साथ लाकर स्थायी शांति के लिए ईमानदारी से प्रयास किए।”श्री मोदी ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने वादों को पूरा करने में सदैव ही सफल रही है। उन्होंने छठी अनुसूची के तहत 2003 में गठित बीटीसी का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बोडोलैंड विश्वविद्यालय और केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे संस्थान इस प्रतिबद्धता के प्रमाण हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “हमारी दोहरी इंजन वाली सरकार ने ईमानदारी से किए गए हर वादे को पूरा करने का प्रयास किया है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि 2020 के बोडो समझौते के तहत किए गए सभी वादों को सरकार द्वारा व्यवस्थित रूप से पूरा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वादे के मुताबिक बोडो भाषा को सहयोगी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया है। श्री मोदी ने बताया कि 1,500 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज लागू किया गया है और साथ ही नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना भी की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 10,000 पूर्व विद्रोहियों को मुख्यधारा में शामिल करना इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत है। श्री मोदी ने कहा, “हम युवाओं को मुख्यधारा में लाने के अपने हर वादे को पूरा कर रहे हैं।”प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बोडो समुदाय की आस्था और परंपराओं को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने का काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि बोडो की पारंपरिक आस्था, बाथू को उच्च सम्मान दिया गया है और उसे एक अलग जनगणना कोड भी दिया गया है। श्री मोदी ने कहा कि आध्यात्मिक महत्व के विभिन्न स्थलों के विकास और संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के कदम जनजातीय आबादी की सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “बोडो समाज की परंपराओं को अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है।”प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में अवैध कब्जेदारों से भूमि वापस लेने के लिए चलाए गए व्यापक अभियान पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने असम के मूल निवासियों को कानूनी भूमि स्वामित्व प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है। श्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण अभियान में जनजातीय समुदाय के सक्रिय सहयोग की सराहना की।प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर राज्य के सपने को साकार करने के लिए असम में विकास की गति को तीव्र करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनता के निरंतर आशीर्वाद से ‘विकसित असम’ का संकल्प अवश्य पूरा होगा। श्री मोदी ने सभी नई परियोजनाओं की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “जनता के आशीर्वाद से विकसित असम का संकल्प अवश्य पूरा होगा।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 22वीं किस्त जारी कर दी। इस किस्त के तहत देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 18,640 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे भेजी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी से इस किस्त को जारी किया। सरकार के अनुसार इस बार करीब 9.32 करोड़ किसान परिवारों को इसका लाभ मिला है। यह राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी गई है, जिससे उन्हें खेती और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।पीएम-किसान योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6,000 रुपए की सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। सरकार का मानना है कि समय पर मिलने वाली यह राशि किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।किस्त जारी होने के बाद किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सरकार की ओर से संदेश भेजा जाता है। इसके अलावा बैंक की ओर से भी ट्रांजैक्शन से संबंधित मैसेज प्राप्त होता है। किसान अपने मोबाइल पर आए मैसेज के जरिए आसानी से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में 22वीं किस्त की राशि पहुंची है या नहीं।अगर किसी पात्र किसान के खाते में राशि नहीं पहुंचती है, तो वे योजना के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। किसान 155261 या 011-24300606 पर कॉल करके अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। यह हेल्पलाइन सेवा कार्यदिवसों में सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहती है।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर से इस योजना का शुभारंभ किया था। तब से लेकर अब तक यह योजना देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।इस संबंध में बीते दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फरवरी 2019 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक किसानों के खातों में 4.09 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है। 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह कुल राशि बढ़कर लगभग 4.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि इस बार की किस्त में 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसानों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को सीधे आय सहायता प्रदान कर कृषि क्षेत्र में एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रही है। सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता से किसानों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और खेती से जुड़ी जरूरी जरूरतों को समय पर पूरा करना आसान हो जाता है। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति ने पश्चिम बंगाल और केरल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार एक बैठक आयोजित की। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर आयोजित बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और भाजपा की चुनाव समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे। भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि बैठक में पश्चिम बंगाल की लगभग 160 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की सूची पर व्यापक चर्चा हुई और लगभग 140 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों अंतिम रूप दिया गया। इससे पहले, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों और पार्टी की रणनीति पर चर्चा करने के लिए नड्डा के आवास पर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में शाह, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी उपस्थित थे। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति पश्चिम बंगाल की शेष सीटों के लिए पार्टी उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही फिर से बैठक करेगी। राज्य में विधानसभा की 294 सीटें हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की चुनाव समिति की बैठक में केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों और पार्टी के संभावित उम्मीदवारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर हो सकते हैं, जिसका कार्यक्रम जल्द ही घोषित होने की संभावना है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में रसोई गैस की स्थिति को लेकर दहशत फैलाने की कोशिश करने वालों पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि वे न केवल जनता के सामने खुद को बेनकाब कर रहे हैं बल्कि देश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां 'एनएक्सटी समिट' को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट से कोई भी देश अछूता नहीं है लेकिन भारत इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग मौजूदा हालात का फायदा उठाकर कुछ उत्पादों की कालाबाजारी करने की कोशिश कर रहे हैं और चेतावनी दी कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वे ऐसे समय में कालाबाजारियों और जमाखोरों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाएं।" रसोई गैस के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में एलपीजी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, और कुछ लोग "अनावश्यक रूप से दहशत फैला रहे हैं।" मोदी ने कहा, ''मैं इस समय कोई राजनीतिक बयान देना नहीं चाहता। जो लोग दहशत फैला रहे हैं, वे न केवल जनता के सामने अपने इरादों को उजागर कर रहे हैं, बल्कि देश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई मोर्चों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है और पिछले कुछ दिनों में उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के बारे में कई देशों के नेताओं से बात की है। उन्होंने कहा, "हम आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी कि किसानों और नागरिकों को वैश्विक चुनौतियों के बोझ से बचाया जा सके।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न मौजूदा संकट से निपटने में हर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका है- चाहे वह राजनीतिक दल हों, मीडिया हो, युवा हों, शहर हों या गांव हों। उन्होंने कहा कि हर कोई इस बात से भलीभांति अवगत है कि वैश्विक परिस्थितियां अचानक बदल सकती हैं, जैसा कि लोगों ने हाल के वर्षों में देखा है - चाहे वह कोविड-19 महामारी की शुरुआत हो, रूस-यूक्रेन संकट हो, या अब घर के करीब एक बड़े संघर्ष का बढ़ना हो। मोदी ने कहा, "इस युद्ध ने दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में हमारी प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। कठिन समय किसी भी राष्ट्र के लिए परीक्षा का काम करता है। हमें धैर्य और शांति के प्रति प्रतिबद्धता के साथ इन परिस्थितियों का सामना करना होगा।" मोदी ने कहा कि कई वैश्विक संकटों के बावजूद, विश्व नेता और विशेषज्ञ भारत की ओर बड़ी आशा से देखते हैं, जिससे भारत की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा, ''आज पूरी दुनिया जानती है कि यदि आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना होगा और भारत में रहना होगा।'' उन्होंने कहा, ''हमारा एक ही लक्ष्य है, एक ही मंजिल है, और वो है विकसित भारत। भारत न केवल प्रगति कर रहा है, बल्कि अगले स्तर की ओर अग्रसर है।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विश्व एक कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन भारत तेज और स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है। मोदी ने कहा, ''कई वैश्विक नेता कह रहे हैं कि भारत पूरी दुनिया के लिए केंद्रबिंदु बनता जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने इथेनॉल और जैव ईंधन पर विशेष जोर दिया है। मोदी ने यह भी कहा कि 2014 तक देश में केवल 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब दोगुने से भी अधिक बढ़कर 33 करोड़ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने एलपीजी बॉटलिंग क्षमता को दोगुना कर दिया है, जबकि वितरण केंद्रों की संख्या 13,000 से बढ़कर 25,000 हो गई है।
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खरगोन (मध्यप्रदेश). पिछले साल प्रयागराज कुंभ मेले के दौरान चर्चा में आई मोनालिसा भोंसले द्वारा केरल में एक मुस्लिम युवक से शादी किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को मध्यप्रदेश के खरगोन में रह रहे उसके परिजनों ने कहा कि यह शादी उनकी मर्जी के खिलाफ की गई है। भोंसले के परिवार के सदस्यों ने यहां संवाददाताओं को बताया कि महेश्वर की निवासी एवं घुमंतू पारधी समुदाय से संबंध रखने वाली मोनालिसा ने बुधवार को केरल के पूवर के अरुमानूर स्थित नैनार मंदिर में फरमान खान नामक युवक से विवाह किया। उन्होंने बताया कि दोनों की पहचान करीब छह महीने पहले फेसबुक के जरिए हुई थी।
मोनालिसा के पिता जयसिंह भोंसले ने कहा, ''दो मार्च को केरल से कुछ लोग आए और हमसे कहा कि वे मेरी बेटी को फिल्मों में काम दिलाने और अभिनय का प्रशिक्षण देने में मदद करेंगे। मैं उसके साथ केरल गया था, लेकिन वहां उसने फरमान खान नाम के युवक से शादी कर ली।'' उन्होंने कहा, ''मैंने इस कदम का विरोध किया और उसे महेश्वर लौटने के लिए कहा, लेकिन उसने इनकार कर दिया।'' जयसिंह ने कहा कि उन्होंने केरल में पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उन्हें बताया गया कि मोनालिसा बालिग है और अपनी पसंद के व्यक्ति से शादी करने के लिए कानूनी रूप से स्वतंत्र है। मोनालिसा के चाचा विजय सिंह भोंसले ने बताया कि वह इस साल जनवरी में 18 वर्ष की हुई थी।उन्होंने कहा, ''कुछ लोग उसे अभिनय के अवसरों के बहाने केरल ले गए थे। हम बहुत पढ़े-लिखे नहीं हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि यह सब कैसे हुआ। शायद किसी ने उसे प्रभावित किया है। परिवार के पास उसके फैसले को स्वीकार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''उसके भाग्य में जो लिखा है, वही होगा। हम केवल यह आशा करते हैं कि वह अपने करियर में सफल हो और जीवन में आगे बढ़े।'' परिवार के सदस्यों के अनुसार, मोनालिसा ने इससे पहले फिल्म निर्माता सनोज मिश्रा की 'द डायरी ऑफ मणिपुर' नामक फिल्म में लिया गया था और उसे मिला पारिश्रमिक उसकी यात्रा, ठहरने और प्रशिक्षण पर खर्च हुआ था। मोनालिसा के चचेरे भाई जय भोंसले ने बताया कि उसने एक बार अपने इलाके में एक स्कूल खोलने की इच्छा भी जताई थी। शादी की खबर फैलने के बाद महेश्वर में उसके घर पहुंचे पत्रकारों ने पाया कि परिवार इस मुद्दे पर ज्यादा बात करने से बच रहा है। मोनालिसा की दादी प्रमिला ने कहा कि वह फिल्म से जुड़े काम के सिलसिले में बाहर गई थी।उन्होंने कहा, ''अगर वह शादी करना चाहती थी, तो हमें बता सकती थी। हम इसकी व्यवस्था कर देते।''मोनालिसा के वीडियो वायरल होने के बाद उसकी पढ़ाई और अभिनय प्रशिक्षण में मदद कर रहे उज्जैन के महेंद्र लोधी ने बताया कि परिवार के फोन आने के बाद उन्होंने उससे बात की थी। लोधी ने कहा, ''उसने मुझे बताया कि उसका परिवार उसकी शादी कहीं और करना चाहता था, जबकि उसने पहले ही किसी को चुन लिया था, इसलिए उसने उससे शादी करने का फैसला किया।'' उन्होंने दावा किया कि मोनालिसा प्रशिक्षण के दौरान उज्जैन में किराये के मकान में रह रही थी और उसे 'लाइफ' नामक एक तेलुगू फिल्म में भी काम करने का मौका मिला था। महेश्वर थाना प्रभारी जगदीश गोयल ने कहा कि परिवार ने उसके ठिकाने के बारे में कई बार पुलिस से संपर्क किया था। उन्होंने कहा, ''मुझे पहले पता नहीं था कि वह केरल में है। बाद में हमने संबंधित पुलिस थाने से संपर्क किया और उसकी लोकेशन प्राप्त कर परिवार की चिंता दूर की।'' इससे पहले दिन में मोनालिसा ने तिरुवनंतपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि एक मुस्लिम युवक के साथ उसकी शादी उसकी अपनी पसंद से और हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुई है। उसने इन आरोपों को खारिज कर दिया कि यह 'लव जिहाद' का मामला है।'लव जिहाद' शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी समूहों द्वारा मुस्लिम पुरुषों पर हिंदू महिलाओं को प्रेम के बहाने धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने के आरोपों के संदर्भ में किया जाता है। चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी मोनालिसा ने कहा कि उसके माता-पिता चाहते थे कि वह अपनी चाची के बेटे से शादी करे, लेकिन उसने इसका विरोध किया। मोनालिसा ने यह भी कहा कि उसके पिता उससे नाराज हैं। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार रात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से फोन पर बात की और पश्चिम एशिया की ''गंभीर स्थिति'' पर चर्चा की। मोदी ने क्षेत्र में बढ़ते तनाव और आम लोगों की जान जाने के साथ-साथ असैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की। प्रधानमंत्री ने ईरान के राष्ट्रपति को बताया कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान और ईंधन के निर्बाध परिवहन की आवश्यकता भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। मोदी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''क्षेत्र में गंभीर स्थिति पर चर्चा के लिए मैंने ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेश्कियन से बातचीत की। मैंने तनाव बढ़ने, नागरिकों की जान जाने और असैन्य बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त की।'' प्रधानमंत्री ने शांति और स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया और संकट को समाप्त करने के लिए संवाद और कूटनीति का आग्रह किया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, पेजेश्कियन ने प्रधानमंत्री मोदी को ईरान की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया और क्षेत्र में हाल के घटनाक्रम पर अपना दृष्टिकोण साझा किया। बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके माध्यम से भारत के ऊर्जा आयात का एक बड़ा हिस्सा आता है। दो दिन पहले, भारत आ रहे एक तेल टैंकर पर ईरानी सेना ने उस समय गोलीबारी की जब वह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की कोशिश कर रहा था। पिछले महीने अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान के खिलाफ शुरू किए गए समन्वित हमले के बाद प्रधानमंत्री ने पिछले 10 दिनों में कई पश्चिम एशियाई देशों के नेताओं से बात की है। अमेरिका और इज़राइल के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई मारे गए। इसके जवाब में ईरान ने इज़राइल और खाड़ी क्षेत्र में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया, जिनमें दुबई और दोहा जैसे वैश्विक व्यापार और विमानन केंद्र भी शामिल हैं। इससे पहले मोदी ने ओमान, कुवैत, बहरीन, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), जॉर्डन, इज़राइल और कतर के नेताओं से बात की और उनके देशों पर हुए हमलों पर चिंता व्यक्त करते हुए कुछ देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की निंदा की। उन्होंने इन देशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा पर भी चर्चा की।खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं। इनमें से लगभग 10,000 भारतीय नागरिक ईरान में रहते हैं, जबकि 40,000 से अधिक इज़राइल में रहते हैं। - नयी दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बृहस्पतिवार को लोकसभा में कांग्रेस सदस्यों को कड़े शब्दों में संदेश दिया कि वे मुद्दा उठा कर सदन से भाग नहीं सकते और मंत्री का जवाब सुनने के लिए उन्हें यहां बैठना होगा। कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई और के. सुरेश की कुछ टिप्पणियों के बाद वित्त मंत्री ने यह बात कही।वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनुदान की अनुपूरक मांगों के दूसरे बैच पर चर्चा में भाग लेते हुए बोरदोलोई ने कहा कि असम में राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के लिए शुरूआती प्रावधान 288 करोड़ रुपये था और हाल तक 1,800 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि असम की ''डबल इंजन सरकार'' ने इस पूरी कवायद को ठंडे बस्ते में डालने का निर्णय लिया, जो सार्वजनिक धन की बर्बादी है। बोरदोलोई ने भाजपा नीत असम सरकार पर ''सार्वजनिक ऋण और अनुत्पादक व्यय के चिंताजनक स्तर'' को लेकर भी सवाल उठाए। इस पर, वित्त मंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए कहा कि यदि वह असम के बारे में उनके सवालों का जवाब देंगी, तो फिर उन्हें अन्य राज्यों पर भी बोलना होगा। वहीं, पीठासीन सभापति जगदंबिका पाल ने कांग्रेस सदस्य बोरदोलोई से कहा कि वह अनुदान की मांग पर ही बोलें। इस पर, कांग्रेस सांसद के. सुरेश ने कहा कि आसन का कहना है कि केवल अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें, इसलिए सत्तारूढ़ दल के सदस्यों को भी केवल अनुदान मांगों तक सीमित रहना चाहिए।उन्होंने कहा, ''आप हमें अनुमति नहीं देते, लेकिन उन्हें (सत्तापक्ष के सदस्यों को) अनुमति देते हैं। यह ठीक नहीं है।'' इस पर पाल ने कहा कि मैं सभी से आग्रह करता हूं कि वे अनुदान की अनुपूरक मांगों पर ही अपनी बात रखें। इसके बाद, वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि यदि सदस्यों को यह लगता है वे जो विषय उठा रहे हैं वह अनुदान की अनुपूरक मांगों से संबंधित है तो ''मैं जवाब देने के लिए तैयार हूं।'' वित्त मंत्री ने कहा, ''मैं यह देखकर चकित हूं कि के. सुरेश (बोरदोलोई का) बचाव कर रहे हैं। जब मैं केरल के बारे में बात करूंगी तो क्या वह उस वक्त बचाव करेंगे? यहां बैठे अन्य राज्यों के सदस्य अपने राज्य के बारे में बोलेंगे तो क्या मुझे जवाब देना चाहिए?'' उन्होंने कहा, ''यह केवल इसलिए नहीं हो सकता कि मैं विपक्ष में हूं तो कोई भी मुद्दा उठाऊं और जब मंत्री जवाब दें तो गायब हो जाऊं, बहिर्गमन कर जाऊं, प्रदर्शन करूं और मंत्री के खिलाफ नारेबाजी करूं...यह एकतरफा नहीं हो सकता।'' सीतारमण ने विपक्षी सदस्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि वे बोलना चाहते हैं तो ''मैं यहां जवाब देने के लिए तैयार हूं लेकिन प्रदर्शन नहीं होना चाहिए...उन्हें जवाब सुनने के लिए यहां बैठना होगा, मुद्दा उठाकर (सदन से) भाग नहीं सकते।--
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राजमहेंद्रवरम . आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में संदिग्ध रूप से मिलावटी दूध पीने के कारण मारे गए लोगों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है और सात अन्य लोगों का राजमहेंद्रवरम के अस्पतालों में इलाज जारी है। एक अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, इस मामले का पता सबसे पहले 22 फरवरी को चला था जब कई बुजुर्ग व्यक्तियों को पेशाब न आना, उल्टी, पेट दर्द और अन्य दिक्कतों के कारण अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। लालाचेरुवु के चौडेश्वरनगर और स्वरूपनगर इलाकों के निवासी कथित तौर पर मिलावटी दूध पीने के बाद बीमार पड़ गए। अधिकारी ने कहा, ''पूर्वी गोदावरी जिले में संदिग्ध मिलावटी दूध मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है और सात लोगों का राजमहेंद्रवरम के अस्पतालों में इलाज किया जा रहा है।' प्राधिकारियों ने कहा कि महामारी विज्ञान संबंधी पुख्ता साक्ष्य दूध में मिलावट को संभावित कारण के रूप में इंगित करते हैं तथा विभिन्न विभागों ने इस मामले में समन्वित कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने बताया कि नैदानिक जांच में रक्त में यूरिया और 'सीरम क्रिएटिनिन' का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया जो विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का संकेत देता है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि दूध का सेवन ही विषाक्त पदार्थों के संपर्क में आने का मुख्य स्रोत था। ऐसा बताया जा रहा है कि कोरुकोंडा मंडल में स्थित एक डेरी 106 परिवारों को दूध की आपूर्ति करती है। आपूर्ति को तुरंत रोक दिया गया है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में आपातकालीन चिकित्सा शिविर स्थापित किए गए हैं और चिकित्सकों एवं विशेषज्ञों का एक दल तैनात किया गया है। डेरी से आवश्यक नमूने लिये गए हैं और संदिग्ध दूध विक्रेता को हिरासत में लिया गया है। डेरी को सील कर दिया गया है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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बेंगलुरु/ भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने तमिलनाडु के महेंद्रगिरि स्थित अपने प्रणोदन परिसर में नोजल सुरक्षा प्रणाली और बहु-तत्व इग्नाइटर का इस्तेमाल करते हुए 22 टन थ्रस्ट स्तर पर अपने क्रायोजेनिक इंजन (सीई20) का समुद्र तल पर सफलतापूर्वक परीक्षण (हॉट टेस्ट) किया है। इससे पहले, नोजल सुरक्षा प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए समुद्र तल परीक्षण 19 टन थ्रस्ट स्तर पर किए जा रहे थे। सीई20 क्रायोजेनिक इंजन 'लॉन्च व्हीकल मार्क-3' (एलवीएम3) के ऊपरी क्रायोजेनिक चरण को शक्ति प्रदान करता है। इसरो ने अपनी वेबसाइट पर एक पोस्ट में कहा, ''एलवीएम3 वाहन की भार वहन क्षमता को बढ़ाने के लिए, एलवीएम3 के भावी मिशनों को उन्नत सी32 चरण के साथ संचालित करने की योजना है, जिसमें सीई20 इंजन के लिए 22 टन का थ्रस्ट होगा। इस बात को ध्यान में रखते हुए, सीई20 इंजन का उड़ान स्वीकृति परीक्षण भी 22 टन थ्रस्ट स्तर पर आयोजित किया जाना आवश्यक है।'' इसमें कहा गया है, ''इसलिए, वर्तमान परीक्षण (10 मार्च को) ने नोजल सुरक्षा प्रणाली (एनपीएस) का इस्तेमाल करते हुए 22 टन थ्रस्ट स्तर पर 165 सेकंड की परीक्षण अवधि के साथ इंजन के समुद्र-स्तर परीक्षण को सफलतापूर्वक पूरा किया।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने बृहस्पतिवार को कहा कि देश में पेट्रोल-डीजल और केरोसिन की कोई कमी नहीं है, एलपीजी उत्पादन में 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है और सरकार की प्राथमिकता है कि देश में करोड़ों परिवारों की रसोई में खाना पकाने के लिए गैस की कमी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर अफवाह नहीं फैलाई जानी चाहिए।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच युद्ध के कारण होर्मुज जलडमरुमध्य में बनी प्रतिकूल स्थिति का जिक्र करते हुए पुरी ने लोकसभा में कहा कि पश्चिम एशिया के संघर्ष में कोई भूमिका नहीं होने के बावजूद भारत को इसके परिणामों से पार पाना होगा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा यह मुद्दा उठाए जाने के बाद पुरी ने कहा, ''दुनिया ने ऐसा संकट, ऊर्जा के इतिहास में कभी नहीं देखा। होर्मुज जलडमरूमध्य से 20 प्रतिशत कच्चा तेल की आपूर्ति होती है। इतिहास में पहली बार वाणिज्यिक पोत परिवहन के लिए होर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है।'' उन्होंने देश में एलपीजी सिलेंडर की कमी से निपटने के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए कहा, ''पिछले पांच दिन में एलपीजी उत्पादन 28 प्रतिशत बढ़ा है। मोदी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि भारत के 33 करोड़ परिवारों, खासकर गरीबों और वंचितों की रसोई को (एलपीजी की) किसी कमी का सामना नहीं करना पड़े।'' पुरी ने कहा कि एलपीजी सिलेंडर के मांग प्रबंधन उपाय के तौर पर शहरों में 25 दिन के न्यूनतम अंतराल पर बुकिंग की जा सकती है, वहीं ग्रामीण तथा दुर्गम क्षेत्रों में 45 दिन के बाद सिलेंडर की बुकिंग की जा सकती है।उन्होंने कहा, ''भारत को कच्चा तेल की आपूर्ति सुरक्षित है। 45 प्रतिशत कच्चा तेल होर्मुज से आता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उत्कृष्ट कूटनीतिक पहुंच के कारण भारत ने इस अवधि में जो कच्चा तेल प्राप्त किया, वह संकटग्रस्त होर्मुज से ऐसे समय में आपूर्ति हो सकने वाली मात्रा से अधिक है।'' पुरी ने कहा, ''देश में रिफाइनरी उच्च क्षमता के साथ काम कर रही हैं। कई मामलों में तो शत-प्रतिशत से अधिक काम कर रही हैं। देश में पेट्राल, डीजल, एटीएफ (विमान का ईंधन), केरोसिन की कमी नहीं है। खुदरा विक्रेता के पास भंडार है और इन उत्पादों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाएं सामान्य तरीके से काम कर रही हैं।'' पुरी ने कहा कि घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग से डिलीवरी का मानक समय ढाई दिन बना हुआ है जो बदला नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों में निर्बाध आपूर्ति प्राथमिकता के साथ की जा रही है। उन्होंने कहा कि व्यावसायिक एलपीजी को पूरी तरह विनियमित तरीके से बेचा जा रहा है जो बाजार मूल्य पर उपलब्ध है। पुरी ने यह भी कहा कि हाल ही में 60 रुपये के समायोजन के बाद बिना सब्सिडी वाले सिलेंडर का मूल्य 913 रुपये है, जबकि बाजार द्वारा तय मूल्य लगभग 987 रुपये है।
पुरी ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि एक पड़ोसी देश ने सारे स्कूल बंद कर दिए हैं, घर से काम करने के नियम जारी किए हैं और सड़कों पर सरकारी वाहनों की संख्या आधी कर दी है। उन्होंने कहा कि एक और पड़ोसी देश में विश्वविद्यालय तय समय से पहले बंद कर दिए गए और ईंधन बचाने के लिए ईद की छुट्टियां बढ़ा दी गईं। मंत्री ने कहा कि यह अफवाह फैलाने और झूठे विमर्श पैदा करने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि देश में स्कूल खुले हुए हैं और पेट्रोल-डीजल सामान्य तरीके से मिल रहा है। विपक्ष की नारेबाजी के बीच पेट्रोलियम मंत्री ने कहा कि इस संकट से पहले भारत के कच्चे तेल का करीब 45 प्रतिशत आयात होर्मुज मार्ग से हो रहा था। उन्होंने कहा, ''कच्चे तेल का गैर-होर्मुज स्रोत से आयात बढ़कर करीब 70 प्रतिशत हो गया है जो संघर्ष शुरू होने से पहले 55 प्रतितश था।'' पुरी ने सदन में कहा कि भारत आज 40 देशों से कच्चे तेल का आयात करता है जो 2006-07 में 27 देशों से होता था। अमेरिका और इजराइल द्वारा गत 28 फरवरी को संयुक्त रूप से हमला किए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य मार्ग से तेल और गैस लेकर आने वाले जहाजों की आवाजाही रोक दी है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया को 20 प्रतिशत कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस और एलपीजी की आपूर्ति होती है। पुरी ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आपूर्ति अवरुद्ध हो गई। उन्होंने कहा कि कच्चा तेल की खरीद में विविधता लाई गई है और खाड़ी क्षेत्र के उपलब्ध स्रोतों के अलावा अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से मालवाहक जहाज आ रहे हैं।
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नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव के बुधवार को ध्वनिमत से खारिज होने के बाद गुरुवार को अध्यक्ष के आसन पर बैठे। उन्होंने कहा कि भारत के संसदीय इतिहास में तीसरी बार लोकसभा अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पर संकल्प आया और इस पर दो दिनों तक 12 घंटे से अधिक चर्चा हुई। उनका हमेशा प्रयास रहा है कि सदन के भीतर प्रत्येक सदस्य नियमों और प्रक्रियाओं के तहत अपने विचार व्यक्त कर सके और सभी को पर्याप्त अवसर मिले।
ओम बिरला ने कहा कि भारत के लोकतंत्र और उसके संविधान पर सभी को गर्व होना चाहिए। उन्होंने कहा, “सदन में सहमति और असहमति की एक महान परंपरा रही है। मैंने हमेशा कोशिश की है कि सदन में संतुलन बना रहे और सभी की आवाज सुनी जाए।”उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी के लिए नियम समान हैं और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं माना जा सकता। ओम बिरला ने उदाहरण देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को भी सदन में बोलने से पहले नोटिस देना पड़ता है।स्पीकर ने स्पष्ट किया कि नियमों से परे जाकर किसी को बोलने का अधिकार नहीं दिया जा सकता और सदन केवल प्रक्रिया के अनुसार ही चलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि चेयर के पास ऐसा कोई बटन नहीं होता जिससे किसी सांसद का माइक बंद या चालू किया जा सके। सदस्य तभी बोल सकते हैं जब उनकी बारी आती है।ओम बिरला ने लोकसभा में कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना बेहद जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि संसद में सभी सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया जाता है और सदन की कार्यवाही हमेशा नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार चलती है।ओम बिरला ने कहा कि वे उन सभी सांसदों के आभारी हैं, जिन्होंने उनकी कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे संसद में संवैधानिक गरिमा और मर्यादा को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।विपक्ष के इस आरोप पर कि उन्हें सदन में बोलने का पर्याप्त मौका नहीं दिया गया, लोकसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि लोकसभा की कार्यवाही तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत चलती है। उन्होंने कहा कि किसी भी सदस्य को सदन में बोलने से पहले स्पीकर की अनुमति लेना अनिवार्य होता है।ओम बिरला ने कहा कि संसद में कोई भी फोटो, दस्तावेज, उद्धरण या छपी हुई सामग्री सदन में पेश करने से पहले स्पीकर की अनुमति लेनी पड़ती है। उन्होंने संकेत दिया कि विपक्ष ने कई बार इन नियमों का पालन नहीं किया, जिसके कारण उन्हें कठिन फैसले लेने पड़े।सांसदों के निलंबन को लेकर उठे सवालों पर ओम बिरला ने कहा कि वे किसी भी सदस्य को निलंबित करना नहीं चाहते, लेकिन कभी-कभी सदन की गरिमा बनाए रखने के लिए कठिन निर्णय लेने पड़ते हैं।उन्होंने कहा, “मुझे ऐसे फैसले लेने में दुख होता है, लेकिन यह भी देखना चाहिए कि आखिर निलंबन की नौबत क्यों आती है। जब संसद के नियमों का उल्लंघन होता है, तब मुझे अपनी जिम्मेदारी निभानी पड़ती है।”उन्होंने बताया कि नियम 377 के तहत स्पीकर के पास सदन में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखने की शक्ति होती है। विपक्ष की महिला सांसदों के विरोध प्रदर्शन का जिक्र करते हुए स्पीकर ने कहा कि जब कुछ सांसद तख्तियां लेकर ट्रेजरी बेंच की ओर बढ़े, तब संसद की गरिमा की रक्षा के लिए उन्हें कार्रवाई करनी पड़ी।ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने हमेशा सदन की गरिमा बढ़ाने और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करने की कोशिश की है और आगे भी इसी भावना के साथ काम करते रहेंगे। -
नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में राज्य सरकार ने प्रयागराज के दो प्रमुख आस्था केंद्रों के पर्यटन विकास की योजना को मंजूरी दी है। करछना स्थित फलाहिरी बाबा मंदिर और सोरांव तहसील के दुर्गा मंदिर देवी धाम पचदेवा के विकास एवं सौंदर्यीकरण पर लगभग 3.46 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इन परियोजनाओं के माध्यम से मंदिर परिसरों का कायाकल्प किया जाएगा और श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि तीर्थ नगरी प्रयागराज देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के साथ-साथ कम चर्चित आस्था केंद्रों के समग्र विकास पर भी विशेष ध्यान दे रहा है। इसी क्रम में करछना स्थित फलाहिरी बाबा मंदिर के पर्यटन विकास के लिए लगभग 1.64 करोड़ रुपए तथा सोरांव तहसील के दुर्गा मंदिर और देवी धाम पचदेवा के सौंदर्यीकरण और पर्यटन सुविधाओं के विकास के लिए करीब 1.82 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए हैं।उन्होंने बताया कि फलाहिरी बाबा मंदिर के विकास के लिए 40 लाख रुपए और सोरांव स्थित दुर्गा मंदिर परियोजना के लिए 45 लाख रुपए की पहली किस्त जारी कर दी गई है। इन परियोजनाओं के तहत मंदिर परिसर का सौंदर्यीकरण, आधुनिक लाइटिंग व्यवस्था, भव्य प्रवेश द्वार, श्रद्धालुओं के लिए यात्री शेड, स्टाम्प फ्लोरिंग युक्त मार्ग, बैठने के लिए बेंच, स्वच्छ शौचालय, पेयजल सुविधा, डस्टबिन, साइनेज और म्यूरल आर्ट जैसे कार्य कराए जाएंगे।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि संगम नगरी प्रयागराज सदियों से आस्था और सांस्कृतिक चेतना का प्रमुख केंद्र रही है और यह प्रदेश के आध्यात्मिक पर्यटन के महत्वपूर्ण त्रिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विभाग का प्रयास है कि प्रसिद्ध तीर्थस्थलों के साथ-साथ अल्पज्ञात धार्मिक स्थलों को भी पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाया जाए।उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में लगभग 69 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों ने प्रयागराज का भ्रमण किया। वहीं हाल ही में आयोजित माघ मेला 2026 में करीब 21 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हुआ, जो जिले में तेजी से बढ़ रहे धार्मिक पर्यटन की मजबूत तस्वीर प्रस्तुत करता है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को असम के गुवाहाटी में आयोजित एक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-Kisan) की 22वीं किस्त के रूप में देश के 9.32 करोड़ किसानों के खातों में ₹18,640 करोड़ की राशि सीधे तौर पर हस्तांतरित करेंगे।
केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने यह जानकारी गुरुवार को अपने आवास पर पत्रकारों को दी। पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने भारत सरकार की कृषि के क्षेत्र में पिछले 12 वर्षों में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भारत अब अनाज की कमी वाले देश से निकलकर एक वैश्विक शक्ति बन गया है और ये साकार हुआ है सरकार की नीति और किसानों कि मेहनत के कारण।उन्होंने जानकारी देते हुए बताया की भारत 150 मिलियन टन चावल उत्पादन के साथ चीन को पीछे छोड़कर आज दुनिया में पहले स्थान पर है।केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2014 के कुल खाद्यान्न उत्पादन 252 मिलियन टन के मुकाबले आज देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन बढ़कर 357 मिलियन टन हो गया है। बागवानी (Horticulture) में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। फल और सब्जियों का उत्पादन 277 मिलियन टन से बढ़कर 369 मिलियन टन तक पहुंच गया है।उन्होंने कहा कि दाल उत्पादन में आज भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। आज भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है। सरकार तुअर, मसूर और उड़द जैसी दालों की रिकॉर्ड खरीदारी कर रही है।शिवराज सिंह ने कहा कि किसानों की सहायता के लिए सरकार ने “भारत विस्तार” (Bharat Vistar) नामक एक AI डिजिटल प्लेटफॉर्म का पहला चरण लॉन्च किया है। इसके माध्यम से किसान केवल एक फोन कॉल के जरिए अपनी स्थानीय भाषा में खेती से जुड़ी समस्त जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। पिछले वर्षों में हमने एमएसपी गेहूं, धन कपास तिलहन और दलहन की रिकार्ड खरीदी की है और किसानों को सस्ते दामों पर खाद खरीदना सुनिश्चित किया है। इस दौरान, केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि 2014 में जो कृषि ऋण ₹8 लाख 45 हजार करोड़ था, वह अब बढ़कर ₹28 लाख 69 हजार करोड़ हो गया है। फसल बीमा योजना के तहत किसानों के खातों में लगभग ₹2 लाख करोड़ की क्लेम राशि जमा की गई है। साथ ही बजट में भारी वृद्धि की गई है। यूपीए सरकार के समय का ₹27,000 करोड़ का कृषि बजट अब बढ़कर ₹1.40 लाख करोड़ सालाना से अधिक हो गया है। -
नई दिल्ली। मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान (एमडीएनआईवाई) 13 मार्च 2026 को विज्ञान भवन में योग महोत्सव-2026 का आयोजन करेगा। यह कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के लिए 100 दिन शेष रहने की शुरुआत का प्रतीक होगा। कार्यक्रम सुबह 9 बजे से आयोजित किया जाएगा।
आयुष मंत्रालय ने अपने विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर “100 दिन शेष” अभियान की शुरुआत की है। इसके तहत देशभर में 100 संगठन, 100 अलग-अलग स्थानों और शहरों में योग के प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।कार्यक्रम में आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा, एस-व्यासा सोसाइटी के अध्यक्ष एच.आर. नागेंद्र और आयुष मंत्रालय की संयुक्त सचिव मोनालिसा दाश सहित कई गणमान्य व्यक्ति, योग गुरु, विशेषज्ञ और योग प्रेमी शामिल होंगे।इस अवसर पर प्रतापराव जाधव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2014 में 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया था। योग की वैश्विक स्वीकार्यता भारत के लिए गर्व का विषय है, क्योंकि यह देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।आयुष मंत्रालय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन के लिए नोडल मंत्रालय है। हर वर्ष इस दिवस का मुख्य कार्यक्रम सामूहिक योग प्रदर्शन होता है, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस-2026 की तैयारियां पहले से शुरू हो चुकी हैं।मंत्रालय के अनुसार, योग दिवस से पहले के 100 दिनों को जागरूकता और जनभागीदारी बढ़ाने के लिए विशेष अभियान के रूप में मनाया जाता है। इस दौरान देशभर के लोगों को योग को समग्र स्वास्थ्य और कल्याण के मार्ग के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया जाता है। आगामी 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर देशभर के 100 प्रतिष्ठित स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है। इसके साथ ही योग दिवस-2026 की तैयारियां तेजी से आगे बढ़ रही हैं। -
नई दिल्ली। भारतीय स्कूली छात्रों की पाठ्य पुस्तकों को स्वदेशी और भारतीय ज्ञान प्रणालियों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। मौजूदा साल में ही छात्रों को यह स्वदेशी सिलेबस पढ़ने को मिलेगा। एनसीईआरटी ने अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों में नए बदलाव लागू किए हैं। इसके तहत अंग्रेजी भाषा की पाठ्यपुस्तकों को तैयार करने के लिए अब विदेशी लेखकों को नहीं बल्कि भारतीय शिक्षाविदों को तरजीह दी है।
एनसीईआरटी, यानी राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, ने कक्षा 9 की अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक में व्यापक बदलाव किए हैं। शिक्षाविदों का कहना है कि हुए नए बदलावों के चलते सिलेबस सटीक और थोड़ा हुआ है। कक्षा 9 की अंग्रेजी की इस पाठ्यपुस्तक में भारतीय साहित्य पर ज्यादा ध्यान दिया गया है। इस पाठ्यपुस्तक में राज्यसभा की मनोनीत सांसद सुधा मूर्ति का अध्याय है। पाठ्यपुस्तक में रवीन्द्रनाथ टैगोर जैसे सुप्रसिद्ध व महान भारतीय लेखकों की रचनाएं भी शामिल की गई हैं।एनसीईआरटी के एक अधिकारी ने बताया कि पहले पुस्तक में कुल 29 अध्याय थे। अब इनकी संख्या घटाकर 16 कर दी गई है। खास बात यह है कि पहले इन 29 चैप्टर्स में से 15 चैप्टर विदेशी या अंतरराष्ट्रीय लेखकों द्वारा लिखे गए थे। यह सिलसिला वर्ष 2006-07 से लेकर 2025-26 के शैक्षणिक वर्ष तक जारी रहा, लेकिन अब इसमें बदलाव कर दिया गया है।अधिकारियों का कहना है कि अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तकों की संख्या भी दो से कम कर एक कर दी गई है। इस पुस्तक में अब कुछ 16 चैप्टर्स होंगे। कक्षा 9 की इस नई अंग्रेजी पाठ्यपुस्तक का नाम कावेरी है। पाठ्यपुस्तक में पहला चैप्टर राज्यसभा सांसद व लेखिका सुधा मूर्ति की पुस्तक ‘हाउ आई टॉट माय ग्रैंडमदर टू रीड एंड अदर स्टोरीज’ से लिया गया है।सुधा मूर्ति की यह पुस्तक वर्ष 2004 में प्रकाशित हुई थी। सभी पुस्तकें तय नियमों के तहत राष्ट्रीय विद्यालय शिक्षा पाठ्यक्रम ढांचा 2023 के अनुरूप तैयार की गई हैं। अंग्रेजी की इस पाठ्यपुस्तक में सुधा मूर्ति के अलावा भी कई अन्य भारतीय लेखकों की रचनाएं शामिल की गई हैं। जिन लेखकों की रचनाओं को सम्मिलित किया गया है, उनमें तमिल के महान कवि सुब्रमण्यम भारती, नागा लेखिका टेमसुला आओ, प्रसिद्ध कवि रवीन्द्रनाथ टैगोर और असमिया उपन्यासकार मित्रा फुकन जैसे लेखक शामिल हैं।एनसीईआरटी के अधिकारियों का कहना है कि नई पुस्तकों में भारतीय ज्ञान प्रणालियों (आईकेएस) को महत्व दिया गया है। वहीं, अंग्रेजी की पाठ्यपुस्तक के 16 चैप्टर्स में से आठ चैप्टर्स भारतीय लेखकों द्वारा लिखित हैं और छह अंतरराष्ट्रीय लेखक भी इस पुस्तक का हिस्सा हैं। - नई दिल्ली। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि भारतीय रेल अपने पूरे नेटवर्क में सुरक्षा और कामकाज को बेहतर बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निरीक्षण सिस्टम, ड्रोन निगरानी और कई नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है। लोकसभा में लिखित जवाब में रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में तकनीकी सुधार एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और कई नई प्रणालियों को शुरू किया गया है या पायलट प्रोजेक्ट के रूप में उनका परीक्षण किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि रेलवे में मशीन विजन इंस्पेक्शन सिस्टम (एमवीआईएस), व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर (डब्ल्यूआईएलडी), ऑनलाइन मॉनिटरिंग ऑफ रोलिंग स्टॉक (ओएमआरएस), इंटीग्रेटेड ट्रैक मॉनिटरिंग सिस्टम्स (आईटीएमएस) और ओवरहेड इक्विपमेंट (ओएचई) जैसे सिस्टम लगाए जा रहे हैं।मंत्री के अनुसार, एमवीआईएस एक एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित सिस्टम है, जो चलती ट्रेन में लटके हुए, ढीले या गायब हिस्सों का पता लगाने में मदद करता है। इस सिस्टम की तीन यूनिट नॉर्थईस्ट फ्रंटियर रेलवे में, दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड में और एक साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लगाई गई हैं। रेलवे ने डीएफसीसीआईएल के साथ समझौता भी किया है, जिसके तहत मालगाड़ियों के लिए नेटवर्क में चार और एमवीआईएस यूनिट लगाई जाएंगी।मंत्री ने बताया कि रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (आरडीएसओ) भी उद्योगों के साथ मिलकर इस तकनीक को और विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि व्हील इम्पैक्ट लोड डिटेक्टर सिस्टम ट्रैक पर पहियों के असर को मापकर खराब पहियों की पहचान करता है और ऐसे 24 सिस्टम पूरे रेलवे नेटवर्क में लगाए जा चुके हैं।वहीं ओएमआरएस सिस्टम ट्रेन के बेयरिंग और पहियों की स्थिति पर नजर रखता है और अब तक 25 ओएमआरएस सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनमें एक सिरपुर कागजनगर में सिकंदराबाद डिवीजन के साउथ सेंट्रल रेलवे के तहत लगाया गया है। रेल पटरियों की जांच के लिए आईटीएमएस सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग की मदद से रेल, स्लीपर और फास्टनिंग में खराबी का पता लगाता है।इसके अलावा, रायपुर डिवीजन में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में ड्रोन के जरिए ओवरहेड उपकरणों की थर्मल इमेजिंग से निगरानी शुरू की गई है। आरडीएसओ त्रि-नेत्र नाम का एक सिस्टम भी विकसित कर रहा है, जिसमें ऑप्टिकल कैमरा, इंफ्रारेड कैमरा और रडार या लिडार जैसे उपकरण होंगे, ताकि कोहरे या खराब मौसम में लोको पायलट को ट्रेन चलाने में मदद मिल सके। मंत्री ने यह भी बताया कि सरकार ने 26 फरवरी को नई रेल टेक पॉलिसी लागू की है, जिससे रेलवे में नई तकनीकों और नवाचार को तेजी से अपनाया जा सके।
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नई दिल्ली। संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) ने कंबाइंड मेडिकल सर्विस (सीएमएस) परीक्षा 2026 के लिए ऑफिशियल नोटिफिकेशन अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। यूपीएससी ने इस साल सीएमएस के कुल 1,358 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं, जिसके माध्यम से केंद्र सरकार के विभिन्न विभागों और संस्थानों में कंबाइंड मेडिकल सर्विस के रिक्त पद भरे जाएंगे।
यूपीएससी ने सीएमएस के जिन पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं, उनमें पहली कैटेगरी के जनरल ड्यूटी में मेडिकल ऑफिसर ग्रेड और मेडिकल ऑफिसर सब कैडर ऑफ सेंट्रल हेल्थ सर्विस के 864, दूसरी कैटेगरी के असिस्टेंट डिविजनल मेडिकल ऑफिसर के 450, जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर के 14 और जनरल ड्यूटी मेडिकल ऑफिसर ग्रेड-II के 30 पद शामिल हैं।आयोग की ओर से जारी पदों के लिए ऑनलाइन मोड में आवेदन प्रक्रिया 11 मार्च से शुरू हो गई है और अप्लाई करने की अंतिम तिथि 31 मार्च निर्धारित की गई है। ऐसे में जो योग्य और इच्छुक उम्मीदवार एप्लीकेशन फॉर्म भरने की सोच रहे हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट पर अंतिम तिथि को शाम 6 बजे से पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म जमा कर दें।एप्लीकेशन फॉर्म भरने वाले कैंडिडेट्स को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन मोड में करना होगा, जो जनरल/ओबीसी/ईडब्लूएस कैंडिडेट्स के लिए 200 रुपए निर्धारित किए गए हैं। महिला/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और दिव्यांग श्रेणी के कैंडिडेट्स को आवेदन शुल्क में छूट दी गई है।कैंडिडेट्स का चयन लिखित परीक्षा और पर्सनैलिटी टेस्ट/पर्सनल इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद चयनित उम्मीदवारों की सैलरी वेतन मैट्रिक्स स्तर 10 के अनुसार 56,100 से 177,500 रुपए प्रति महीने होगी।अभ्यर्थियों की अधिकतम आयु 32 साल निर्धारित है, जिसकी गणना 1 अगस्त के आधार पर की जाएगी। आरक्षित वर्ग से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। आयोग की ओर से लिखित परीक्षा का आयोजन निर्धारित परीक्षा केंद्रों पर 2 अगस्त को किया जाएगा। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए उम्मीदवार सबसे पहले यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। होमपेज पर जाने के बाद संबंधित पद के लिए एक्टिव आवेदन लिंक पर क्लिक करें। इसके बाद रजिस्ट्रेशन कर लॉगिन करें। फिर फॉर्म में मांगी गई सभी जानकारियों को दर्ज करें। मांगे गए सभी डॉक्यूमेंट्स को सही साइज और फॉन्ट में अपलोड करें। फिर आवेदन शुल्क का भुगतान करें। इसके बाद फॉर्म को चेक कर सबमिट कर दें। लास्ट में एप्लीकेशन फॉर्म का प्रिंट आउट भविष्य के लिए निकाल लें।


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