- Home
- देश
-
नई दिल्ली। भारत में नए वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत के साथ ही 1 अप्रैल 2026 से देश के डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नया आयकर अधिनियम, 2025 लागू होने जा रहा है, जो करीब 60 साल पुराने 1961 के कानून की जगह लेगा, और इसमें नियमों, शब्दावली और टैक्स व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। नए सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब ‘फाइनेंशियल ईयर (एफवाई)’ और ‘असेसमेंट ईयर (एवाई)’ की जगह एक ही ‘टैक्स ईयर’ होगा। इससे टैक्स फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने और लोगों को ज्यादा स्पष्टता मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा, इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) फाइल करने की समय सीमा में भी बदलाव किया गया है। वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए 31 जुलाई की डेडलाइन वही रहेगी, लेकिन जो लोग ऑडिट के दायरे में नहीं आते (जैसे सेल्फ-एम्प्लॉयड और प्रोफेशनल्स), उन्हें अब 31 अगस्त तक का समय मिलेगा।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित फैसले के तहत फ्यूचर्स और ऑप्शंस में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (एसटीटी) बढ़ा दिया गया है, जिससे डेरिवेटिव ट्रेडिंग महंगी हो जाएगी। हाउस रेंट अलाउंस (एचआरए) क्लेम करने के नियम सख्त किए गए हैं। अब कुछ मामलों में मकान मालिक की जानकारी जैसे पैन देना जरूरी होगा। साथ ही, ज्यादा एचआरए छूट वाले शहरों की सूची में बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद को भी शामिल किया गया है।सरकार ने कर्मचारियों को कुछ राहत भी दी है। मील (भोजन) से जुड़े टैक्स बेनिफिट बढ़ाए गए हैं और टैक्स-फ्री गिफ्ट की सालाना सीमा भी बढ़ाई गई है। पुराने टैक्स सिस्टम में बच्चों की पढ़ाई और हॉस्टल खर्च पर मिलने वाली छूट भी बढ़ाई गई है।अब शेयर बायबैक पर टैक्स डिविडेंड की जगह कैपिटल गेन के रूप में लगेगा, जिससे निवेशकों पर असर पड़ेगा। वहीं, सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स छूट केवल उन्हीं बॉन्ड्स पर मिलेगी जो मूल इश्यू के दौरान खरीदे गए हों। नए नियमों के तहत अब डिविडेंड या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर लिए गए कर्ज के ब्याज को टैक्स में छूट के रूप में क्लेम नहीं किया जा सकेगा।अब टैक्सपेयर्स एक ही घोषणा पत्र जमा करके कई इनकम स्रोतों पर टीडीएस से बच सकते हैं। एनआरआई से प्रॉपर्टी खरीदने पर टीडीएस काटने के लिए अब टीएएन की जरूरत नहीं होगी, सिर्फ पैन से काम हो जाएगा। विदेश यात्रा पर टीसीएस घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि शिक्षा और इलाज के लिए विदेश भेजे जाने वाले पैसे पर भी टीसीएस कम किया गया है।अब टैक्सपेयर्स को रिटर्न में सुधार (रिवाइज) करने के लिए 31 मार्च तक का समय मिलेगा, हालांकि दिसंबर के बाद देरी से करने पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा।इसके अलावा, मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा दिए गए मुआवजे पर प्राप्त ब्याज को पूरी तरह से कर-मुक्त कर दिया गया है।वहीं, सरकार ने आकलन वर्ष 2-26-27 के लिए आयकर रिटर्न फॉर्म (आईटीआर-1 से आईटीआर-7 तक) नोटिफाई कर दिए हैं, जिससे व्यक्तियों, पेंशनभोगियों और अन्य करदाताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने रिटर्न दाखिल करना शुरू करने में मदद मिलेगी।विशेषज्ञों का कहना है कि अपडेट किए गए फॉर्म में कुछ महत्वपूर्ण बदलाव शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आईटीआर-1 (सहज) फॉर्म में दो मकानों से होने वाली आय भी दिखाई जा सकती है, जबकि पहले यह सीमा एक मकान तक ही थी। इससे कई करदाताओं के लिए फाइलिंग प्रक्रिया आसान होने की उम्मीद है। - जयपुर. राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले के नोहर इलाके में सोमवार को एक कार और जीप की आमने-सामने की टक्कर में तीन महिलाओं की मौत हो गई और कई बच्चों समेत करीब एक दर्जन लोग घायल हो गए। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि यह हादसा भद्रकाली बाईपास रोड पर हुआ।पुलिस के अनुसार, जीप में सवार लोग हरियाणा में एक शोक सभा में शामिल होने के बाद अपने गांव बुधवालिया लौट रहे थे। पुलिस ने बताया कि मृतकों की पहचान राजबाला (40), रोशनी (48) और कलावती देवी (40) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, गंभीर रूप से घायल लोगों में तीन से छह साल की उम्र के चार बच्चे भी शामिल हैं।
- नयी दिल्ली. केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जे. पी. नड्डा ने सोमवार को कहा कि भारत में घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार मौजूद है और पश्चिम एशिया में जारी संकट के बीच किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। नड्डा ने उर्वरक कंपनियों और हरित अमोनिया बनाने वालों के बीच हरित अमोनिया की आपूर्ति से जुड़े एक समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर कहा, '' यह ही नहीं, भारत ने कई संकट देखे हैं। हम उर्वरक आपूर्ति के मामले में पूरी तरह सक्षम हैं। डरने की कोई जरूरत नहीं है।'' इस समझौते को '' ऐतिहासिक और आगे की दिशा में कदम'' करार देते हुए मंत्री ने हिंदी कहावत '' आपदा में अवसर ढूंढना है'' का उल्लेख किया और कहा कि हरित अमोनिया के साथ यह प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।उन्होंने कहा कि सरकार उर्वरक क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करने एवं आत्मनिर्भरता की दिशा में काम कर रही है। भारत ने 2024-25 में 306.67 लाख टन यूरिया का उत्पादन किया और घरेलू मांग पूरी करने के लिए 56.47 लाख टन यूरिया का आयात किया। चालू वित्त वर्ष 2025-26 के पहले 11 महीनों में देश ने 98 लाख टन यूरिया का आयात किया है।सरकार ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण यूरिया का घरेलू उत्पादन प्रभावित हुआ है और उर्वरक विभाग इसके प्रभाव को कम करने के लिए कदम उठा रहा है। बयान में कहा गया, '' आगामी खरीफ 2026 मौसम के लिए कुल आवश्यकता लगभग 390 लाख टन आंकी गई है, जबकि खरीफ 2025 के दौरान वास्तविक बिक्री 361 लाख टन रही।'' सरकार ने कहा कि पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में वर्तमान में पर्याप्त भंडार उपलब्ध है..'' इस समय देश में सभी प्रकार के उर्वरकों का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। आगामी ढाई महीनों में किसी उर्वरक की बड़ी आवश्यकता नहीं है।'' खाड़ी क्षेत्र उर्वरक आयात का प्रमुख स्रोत बना हुआ है। यहां से 20-30 प्रतिशत यूरिया और 30 प्रतिशत डीएपी का आयात होता है। साथ ही भारत के लगभग 50 प्रतिशत तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आयात भी इसी क्षेत्र से होते हैं, जो यूरिया उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है। इसके अलावा घरेलू उत्पादन में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे पदार्थ और मध्यवर्ती उत्पाद जैसे अमोनिया, सल्फर और सल्फ्यूरिक अम्ल, जो फॉस्फेट एवं पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों के उत्पादन में काम आते हैं... वे भी प्रभावित हुए हैं।--
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस पर घुसपैठियों को जमीन कब्जाने की "अनुमति" देने का आरोप लगाते हुए सोमवार को कहा कि असम में घुसपैठ केवल चुनावी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह राज्य की अस्मिता की रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय है। नौ अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले असम में भाजपा के बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं को डिजिटल माध्यम से संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि राज्य ने लंबे समय तक अस्थिरता का दौर देखा, लेकिन पिछले एक दशक में स्थिति बदली है क्योंकि भाजपा की डबल-इंजन सरकार ने राज्य में शांति सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि पहली बार वोट देने वाले और युवा मतदाताओं को असम में पिछली कांग्रेस सरकारों के "कुशासन" के बारे में याद दिलाने की जरूरत है और उन्हें आगाह करना चाहिए कि सबसे छोटी गलती भी राज्य को पीछे धकेल सकती है। उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता राज्य में पार्टी की जीत की हैट्रिक सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं। मोदी ने कहा, "घुसपैठ सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं है। यह असम की पहचान और राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा का विषय है। कांग्रेस ने घुसपैठियों को अवैध तरीके से भूमि कब्जाने की अनुमति दी।" उन्होंने आरोप लगाया कि जहां-जहां घुसपैठिए बसते हैं, वे छोटे व्यवसायों और स्थानीय निवासियों की आजीविका पर कब्जा कर लेते हैं। 'मेरा बूथ, सबसे मजबूत संवाद' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि भाजपा कार्यकर्ताओं को अवैध भूमि कब्जाने के मामलों और स्थानीय निवासियों की समस्याओं के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा, "लोगों को पता होना चाहिए कि कांग्रेस ने अतिक्रमण होने दिया, जबकि भाजपा अधिकारों की रक्षा कर रही है।" प्रधानमंत्री ने बताया कि पूर्वोत्तर में विभिन्न संगठनों के साथ 12 शांति समझौते किए गए हैं और कार्यकर्ताओं को यह याद दिलाना चाहिए कि कांग्रेस "सिर्फ कागजों पर समझौते करती थी।" उन्होंने कहा, "हमने वह दौर देखा है जब असम हिंसा में जल रहा था। लेकिन पिछले दशक में स्थिति बदली है और आज राज्य में नया आत्मविश्वास दिख रहा है।" मोदी ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासन में शांति समझौतों को नजरअंदाज किया गया और युवाओं को अशांति की ओर धकेला गया। उन्होंने कहा, "कांग्रेस शासन के दौरान उग्रवादी और छात्र संगठनों के साथ कोई समझौता सफल नहीं हुआ। कांग्रेस ने बोडो मुद्दे के साथ विश्वासघात किया।" उन्होंने कहा कि भाजपा ने शांति स्थापित करने और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करने के लिए काम किया है और समझौतों को ईमानदारी से लागू किया जा रहा है। उन्होंने बोडो क्षेत्रों की संस्कृति को समृद्ध बताते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस ने इस क्षेत्र की अनदेखी की। उन्होंने कहा, "बोडोलैंड कभी कर्फ्यू और बम धमाकों से जूझता था, लेकिन आज वहां शांति व स्थिरता है। यह देश के लिए एक बड़ा मॉडल है।" उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए शांति सबसे जरूरी है। प्रधानमंत्री ने भाजपा कार्यकर्ताओं को एआई से बने वीडियो से लोगों को सावधान करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता ऐसे कार्यक्रम आयोजित करें जहां हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल हुए लोगों के अनुभव साझा किए जा सकें। मोदी ने कहा कि सभी कार्यकर्ताओं के पास नमो ऐप होना चाहिए, जिससे उन्हें 'नारी शक्ति' के सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिलेगी। उन्होंने कहा, "भाजपा की डबल-इंजन सरकार देशभर में महिलाओं की पहली पसंद है।"
प्रधानमंत्री ने 'अरुणोदय' योजना और 'लखपति दीदी' कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनकी सफलता की कहानियां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं को चाय बागानों के बूथों पर जाकर 'चाय पर चर्चा' जैसे कार्यक्रम आयोजित करने चाहिए और लोगों की समस्याएं सुननी चाहिए। मोदी ने कहा कि चाय बागान के श्रमिकों को दिए गए भूमि अधिकार उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित करेंगे और उनकी गरिमा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार चाय बागान श्रमिकों तक केंद्र की योजनाएं नहीं पहुंचने दे रही है। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव के लिए नौ अप्रैल को मतदान होगा। राज्य में 2016 से भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार है। -
नयी दिल्ली. कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की सेहत में "शानदार सुधार" हुआ है और अब वह "पूरी तरह से सामान्य" हैं तथा उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने पर जल्द फैसला होने की उम्मीद है। चिकित्सकों ने सोमवार को यह जानकारी दी। बुखार आने के बाद उन्हें 24 मार्च को रात करीब 10.22 बजे सर गंगा राम अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
अस्पताल के अध्यक्ष डॉ. अजय स्वरूप के अनुसार, गांधी को अब भी नसों के माध्यम से एंटीबायोटिक दवा दी जा रही हैं, जो कुछ और दिनों तक जारी रहेंगी, हालांकि उनके स्वास्थ्य संबंधी सभी संकेतक सामान्य सीमा के भीतर हैं। उन्होंने कहा, "मरीज और इलाज करने वाले चिकित्सक से चर्चा के बाद ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी देने का फैसला लिया जाएगा। अन्यथा, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं।" चिकित्सकों ने बताया कि उनका 'सिस्टमेटिक इंफेक्शन' का इलाज किया रहा है और एंटीबायोटिक दवाओं का उन पर अच्छा असर हो रहा है। वह वरिष्ठ चिकित्सकों की एक टीम की निगरानी में हैं और उनकी हालत स्थिर है। एहतियात के तौर पर सोनिया गांधी को कुछ समय के लिए निगरानी में रखा जा सकता है। -
नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को जानकारी दी गई कि एशियाटिक सोसायटी, कोलकाता ने 23 मार्च तक कुल 2,033 पांडुलिपियों को स्कैन किया है। इन पांडुलिपियों में कुल 1,46,099 पेज शामिल हैं। यह कार्य ज्ञान भारतम मिशन के तहत संस्था को क्लस्टर सेंटर बनाए जाने के बाद किया गया।
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लिखित जवाब में बताया कि एशियाटिक सोसायटी अब तक 11,528 पांडुलिपियों को डिजिटाइज कर चुकी है, जिनमें कुल 5,72,890 पेज शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस पहल से देश की प्राचीन ज्ञान परंपरा को संरक्षित करने में मदद मिल रही है।मंत्री ने बताया कि संस्था में आग से बचाव और आपदा प्रबंधन के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं। सोसायटी का संपर्क राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पश्चिम बंगाल सरकार के फायर एवं इमरजेंसी विभाग और स्थानीय पुलिस से लगातार बना रहता है।उन्होंने बताया कि सोसायटी की ऐतिहासिक इमारत भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के अधीन है और इसके संरक्षण व मरम्मत का काम एएसआई द्वारा किया जाता है।शेखावत ने कहा कि म्यूजियम में रखी पांडुलिपियों, दुर्लभ पुस्तकों और वस्तुओं के लिए उचित तापमान और नमी बनाए रखने की व्यवस्था की गई है। संस्था समय-समय पर इनकी स्थिति की जांच भी करती है, जो क्यूरेटर की निगरानी में कैटलॉगिंग स्टाफ द्वारा की जाती है।उन्होंने बताया कि सोसायटी के पास अपना संरक्षण और बाइंडिंग सेक्शन भी है। वर्ष 2022 में पांडुलिपि संरक्षण केंद्र बनने के बाद से अब तक 35,624 पन्नों का संरक्षण और 4,596 दुर्लभ पन्नों की मरम्मत की जा चुकी है। म्यूजियम और आर्काइव सेक्शन में कैटलॉग तैयार करना एक नियमित प्रक्रिया के रूप में जारी है। -
-केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने लोक सभा में वामपंथी उग्रवाद से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया
-गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, नक्सलवाद के कारण गरीबी फैली
-कम्युनिस्ट पार्टी अन्याय का विरोध करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी संसदीय प्रणाली का विरोध करने के लिए बनी
-नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं
-नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने इसे स्वीकार कर लिया था
-नक्सल-मुक्त भारत मोदी सरकार की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक
--जिस कम्युनिस्ट पार्टी की नींव ही दूसरे देश की विचारधारा से प्रेरित हो, वो भारत का भला कैसे करेगी?
-माओवादियों ने रेड कॉरिडोर भेदभाव का विरोध करने कल इए नहीं बल्कि सरकार की पहुँच कम होने के कारण चुना था
-वामपंथी विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि “MAO” को अपना आदर्श माना
-ये मोदी सरकार है जो हथियार उठायेगा उसको हिसाब देना पड़ेगा
-लाल आतंक की परछाई थी इसलिए बस्तर विकास से पिछड़ गया था, लाल आतंक की परछाई हट गई, अब बस्तर विकसित हो रहा है
-नक्सलमुक्त भारत मोदी सरकार के सबसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण सफलता
नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में नियम 193 के अंतर्गत वामपंथी उग्रवाद (LWE) से देश को मुक्त कराने के प्रयास पर चर्चा का जवाब दिया।चर्चा का जवाब देते हुए केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों और उनके समर्थकों ने भोले भाले आदिवासियों के सामने एक गलत प्रकार का नेरेटिव रखा गया था कि वे उनके अधिकारों और उन्हे न्याय दिलाने के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज बस्तर से नक्सलवाद लगभग समाप्त हो चुका है और वहां हर गांव में स्कूल बनाने और राशन की दुकान खोलने की मुहिम शुरू हो चुकी है। गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद की वकाल करने वाले बताएं कि 1970 से अब तक यह सब क्यों नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि 2014 में श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आने के बाद पूरे देश के हर गरीब को घर, गैस, पीने का पानी, 5 लाख तक का बीमा, 5 किलो मुफ्त अनाज मिला, लेकिन बस्तर वाले छूट गए क्योंकि सत्य को झुठलाया गया और लाल आतंक की परछाई के कारण वहां विकास नहीं पहुंचा था। श्री शाह ने कहा कि लाल आतंक इसीलिए नहीं था कि वहां विकास नहीं था, बल्कि लाल आतंक के कारण वहां विकास नहीं हुआ था, लेकिन आज लाल आतंक की परछाई हट गई है और बस्तर विकसित हो रहा है।श्री अमित शाह ने कहा कि यह नरेन्द्र मोदी जी की सरकार है और जो भी हथियार उठाएगा उसे हिसाब चुकता करना पड़ेगा। गृह मंत्री ने कहा कि सरकार संवेदनशील है और सभी समस्याओं को सुनना और उनका निराकरण करना चाहती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने योजनाएं बनाई हैं लेकिन उन पर अमल नहीं करने देंगे क्योंकि वामपंथी उग्रवादी और उनके समर्थकों की आइडियोलॉजी यानी उनका अवैध शासन वहां चलता रहे। श्री शाह ने कहा कि आजादी के बाद 75 साल में से 60 साल तक देश में मुख्य़ विपक्षी पार्टी का शासन रहा तब भी आदिवासी विकास से महरूम कैसे रहे। उन्होंने कहा कि विकास तो अब नरेन्द्र मोदी जी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टी को अपने अंदर झांककर देखना चाहिए कि दोषी कौन है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, बिहार, बंगाल, केरल, कर्नाटक के कुछ हिस्से और उत्तर प्रदेश के 3 ज़िलों सहित 12 राज्यों में पूरा रेड कॉरिडोर बनाकर रखा था। इन क्षेत्रों में 12 करोड़ लोग सालों तक गरीबी में जीते रहे और 20,000 युवा मारे गए इसके लिए कौन जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद का मूल कारण विकास की मांग नहीं बल्कि एक आइडियोलॉजी है। नक्सलवाद का मूल कारण विकास की कमी नहीं बल्कि वामपंथी विचारधारा है, जिसे 1969 में राष्ट्रपति चुनाव जीतने के लिए तत्कालीन सत्तारूढ़ दल की नेता ने स्वीकार कर लिया था।
श्री अमित शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने पूरे देश के सामने स्वीकारा किया था कि कश्मीर और नॉर्थईस्ट की तुलना में देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने सबसे बड़ी समस्या हथियारबंद माओवादी हैं। उन्होंने कहा कि 2014 में परिवर्तन हुआ और प्रधानमंत्री मोदी जी के शासन में कई वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण हुआ, धारा 370 और 35A हट गई, राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर बन चुका है, GST आज वास्तविकता बन चुका है, नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) बन चुका है, विधायी मंडलों में मातृशक्ति को 33% आरक्षण दिया गया है। उन्होंने कहा कि आजादी के वक्त से इस देश की जनता जो कई सारे बड़े काम चाहती थी वे सभी काम नरेन्द्र मोदी जी के शासन के 12 साल में हुए और अब नक्सलवाद से मुक्त भारत की रचना भी नरेन्द्र मोदी जी के शासन के अंदर ही होगी। श्री शाह ने कहा कि पिछले 12 साल देश के लिए बहुत शुभ साबित हुए हैं। देश को गरीबी से मुक्ति दिलाने, युवाओं के लिए नई शिक्षा पद्धति लाने, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा को सुनिश्चित करने, देश के मूलों से न जुड़ी नीतियों को दरकिनार करने के लिए गत 12 साल में बहुत कुछ हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर सबसे अधिक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसले को देखा जाए तो निसंकोच नक्सलमुक्त भारत सबसे ऊपर होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलमुक्त भारत जो बड़ी घटना देश में आकार लेने जा रही है, उसका पूरा श्रेय हमारे केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, विशेषकर कोबरा और सीआरपीएफ के जवानों, राज्य पुलिस, विशेषकर छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस और डीआरजी के जवानों और स्थानीय आदिवासियों को जाता है। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवाद के समाप्त होने में जनता का भी बड़ा योगदान है।
श्री अमित शाह ने कहा कि इस विचारधारा का विकास और विकास की मांग से भी कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि यह कौन सी विचारधारा है? क्या है माओवादी विचारधारा? इसका ध्रुव वाक्य क्या है? इनका ध्रुव वाक्य है कि सत्ता बंदूक की नली से निकलती है। ये विकास के लिए नहीं बल्कि अपनी आइडियोलॉजी के अस्तित्व, उसकी विजय और आइडियोलॉजी को भोले-भाले आदिवासियों में फैलाकर कर सत्ता हासिल करने के लिए है। इनका लोकतंत्र पर कोई विश्वास नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इनकी तुलना भगत सिंह जी और बिरसा मुंडा से कर दी। शहीद भगत सिंह और भगवान बिरसा मुंडा, जो अंग्रेजों के सामने लड़े, उनकी तुलना आप संविधान तोड़कर हाथ में हथियार लेकर निर्दोषों की हत्या करने वालों लोगों के साथ कर रहे हैं? यह विचारधारा कहती है कि दीर्घकालीन युद्ध ही उनकी विचारधारा को फैला सकता है। उनको अपने लोगों का खून बहाने से भी कोई परहेज़ नहीं है। इस विचारधारा के समर्थकों ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद भगत सिंह या सुभाष चंद्र बोस को नहीं बल्कि माओं को अपना आदर्श माना है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सच्चाई यह है कि इन्होंने पूरे रेड कॉरिडोर को इसीलिए चुना था क्योंकि वहां राज्य की पहुंच कम थी। भोले भाले आदिवासियों को बरगलाकर उनके हाथों में हथियार पकड़ा दिए गए। उन्होंने कहा कि जो आदिवासी 15 अगस्त 1947 से पहले भगवान बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, रानी दुर्गावती, मुर्मू बंधुओं को हीरो मानकर चलता था, वह आदिवासी 1970 आते-आते माओ को अपना हीरो कैसे मानने लगा? श्री शाह ने कहा कि विकास और अन्याय के कारण नहीं बल्कि कठिन भूगोल और राज्य की अनुपस्थिति के कारण अपनी विचारधारा को फैलाने के लिए वामपंथियों ने इस क्षेत्र को चुना और भोले-भाले आदिवासियों को बरगलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों ने सालों तक उस क्षेत्र में विकास को पहुंचने नहीं दिया, लेकिन अब नरेन्द्र मोदी जी के शासन में वहां घर-घर विकास पहुंच रहा है। गृह मंत्री ने कहा कि गरीबी के कारण नक्सलवाद नहीं फैला, बल्कि नक्सलवाद के कारण इस पूरे क्षेत्र में वर्षों तक गरीबी रही। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद की जड़ें गरीबी और विकास से नहीं जुड़ी बल्कि वैचारिक हैं।श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलबाड़ी में साक्षरता का दर 32%, बस्तर में 23%, सहरसा, बिहार में 33% और बलिया, उत्तर प्रदेश में 31% था। इसी प्रकार, नक्सलबाड़ी में प्रति व्यक्ति आय ₹500, बस्तर में ₹190, सहरसा में ₹299 और बलिया में ₹374 थी। उन्होंने कहा कि चारों क्षेत्र में प्रति व्यक्ति आय भी एक समान थी, लेकिन नक्सलबाड़ी और बस्तर में वामपंथी उग्रवाद पनपा और सहरसा और बलिया में नहीं। ऐसा इसीलिए हुआ क्योंकि सहरसा और बलिया का भूगोल उनके अनुकूल नहीं था, वहां घने जंगल, नदी नाले, छुपने की पहाड़ियां नहीं थी, हथियार लेकर अपनी मूवमेंट करने, आदिवासियों को दबाने और उनको जबरदस्ती अपनी आइडियोलॉजी के साथ जोड़ने की अनुकूलता नहीं थी। उन्होंने कहा कि अगर विकास ही पैमाना होता, अगर प्रति व्यक्ति आय ही पैमाना होता, तो देश के बहुत सारे हिस्से ऐसे थे जहां 1970 में विकास नहीं पहुंचा था, लेकिन वहाँ नक्सलवाद क्यों नहीं फैला?
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ये डरने वाली नहीं बल्कि सबके साथ न्याय करने वाली सरकार है। उन्होंने कहा कि 1970 के दशक में नक्सलवाद की शुरुआत नक्सलबाड़ी और बंगाल से हुई। 1971 के एक ही वर्ष में वहां 3620 हिंसा की घटनाएं हुई थीं,1980 का दशक आते-आते पीपल्स वॉर ग्रुप बन गया और फिर यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा राज्यों में फैला। 1990 के दशक में वामपंथी विचारधारा सिकुड़ती गई और यहां पर भी उग्रवादी गुटों और वामपंथी पार्टियों में विलय शुरू हुआ। 2004 में दो प्रमुख गुट मिल गए और सीपीआई माओवादी का गठन किया। 1970 से 2004 के कालखंड में चार साल छोड़कर पूरा समय मुख्य विपक्षी पार्टी का शासन रहा है।
अमित शाह ने कहा कि यही समय है जब नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ ये आंदोलन 12 राज्यों, देश के 17% भूभाग और 10% से ज्यादा आबादी में पहुंच गया। उन्होंने कहा कि सत्ता के समर्थन के बगैर देश के बीचो-बीच, तिरुपति से लेकर पशुपतिनाथ तक, रेड कॉरिडोर संभव ही नहीं था। उन्होंने कहा कि जो हथियार पकड़े गए हैं, उसमें से 92% हथियार पुलिस से लूटे हुए थे। थाने लूट लिए गए, गोलियां लूट ली गई और उनका उपयोग निर्दोष जवानों, बच्चों, कृषकों को मारने के लिए किया गया। वामपंथी विचारधारा ने इसे एक भ्रांति की तरह प्रोपेगेंडा के माध्यम से अपनी विचारधारा को टिकाने के लिए फैलाया कि अन्याय से बचने के लिए हथियार हाथ में उठाए।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि लोकतंत्र का मूल सिद्धांत है कि किसी भी समस्या का समाधान बहस से निकल सकता है, हथियारों से नहीं। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने इस देश में वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया, स्टेट का वैक्यूम, सारी व्यवस्थाएं नष्ट कर गवर्नेंस का वैक्यूम, संविधान से श्रद्धा खत्म कर संविधान का वैक्यूम और पुलिस थानों को जलाकर सिक्योरिटी वैक्यूम खड़ा करने का प्रयास किया है। गृह मंत्री ने कहा कि माओवादी और नक्सली हिंसा करने वालों के दिन अब लद गए हैं और मोदी सरकार में ये लंबे समय नहीं चलेगा।श्री अमित शाह ने कहा कि माओवादी उग्रवादियों को अन्याय के खिलाफ हथियारों की लड़ाई लडने वालों की तरह मानने की गलती नहीं करनी चाहिए क्योंकि वामपंथी विचारधारा अपना आधार खो बैठी है इसलिए सारे वामपंथी अलग-अलग थ्योरी रच-रच कर अपने अस्तित्व को बचाने में लगे हैं। इनका एकमात्र एजेंडा है, देश में वैक्यूम खड़ा करना है। स्टेट, गवर्नेंस, संविधान और सिक्योरिटी का वैक्यूम खड़ा कर रक्तपात करना ही उनका उद्देश्य है जो अब सफल नहीं होगा। श्री शाह ने कहा कि नक्सलियों ने कई सारे भोले-भाले ग्रामीणों को एनिमी इन्फॉर्मर बताकर फांसी पर चढ़ा दिया। इन्होंने जनता अदालत के नाम से एक दिखावा किया जहां न कोई वकील है, न जज है, वे स्वयं बैठे हैं, स्वयं फैसले करते हैं और फांसी देते हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलियों ने ना जनता ना सरकार के नाम से एक भ्रांति खड़ी की और विकास योजनाओं को रोकने का काम किया। इन्हें संविधान और न्याय व्यवस्था को निशाना बनाकर संविधान का वैक्यूम खड़ा करना था। जो लोग अब कह रहे हैं बातचीत करो, उनको पता होना ताहिए कि मैं 50 बार सार्वजनिक मंचों पर बस्तर में जाकर कह चुका हूं कि हथियार डाल दीजिए, सरकार आपके पूरे पुनर्वास की व्यवस्था करेगी। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार की पॉलिसी है, चर्चा उसी से होती है जो हथियार डालता है, लेकिन जो गोली चलाता है, उसको जवाब गोली से ही दिया जाता है।श्री अमित शाह ने कहा कि जैसे ही रूस में साम्यवादियों की सरकार का गठन हुआ, यहां पर 1925 में सीपीआई की स्थापना हुई। जब रूस में कम्युनिस्टों की सरकार बनी, उसी वक्त यहां सीपीआई की स्थापना हुई। इसके बीच में कोई रिलेशनशिप है क्या? रूस की सरकार ने स्पॉन्सर कर दुनियाभर में कम्युनिस्ट पार्टी की रचना की। अब जिस पार्टी की नींव ही किसी दूसरे देश की प्रेरणा से की गई है, वो हमारे देश का भला कैसे सोचेगी? इन्होंने तो अंग्रेजों का भी समर्थन किया था। 1964 में कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सिस्ट बनी, ये भी समझने की बात है कि सीपीआईएम क्यों बना? यह भी समझना पड़ेगा कि जब सीपीआई थी, तो फिर सीपीआईएम क्यों बनी? 1964 में सोवियत रूस और चीन के बीच झगड़ा हुआ तो दोनों साम्यवादी राष्ट्र के अंदर अलग-अलग विचारधारा की साम्यवादी सरकारें आई। जैसे ही अलग-अलग विचारधारा की सरकारें आई, तो यहां पर चीन की एक समर्थित पार्टी सीपीआई मार्क्सिस्ट बना दी। इसके बाद 1969 में संसदीय राजनीति का विरोध करने के लिए सीपीआई एमएल मार्क्सिस्ट की स्थापना हुई। इसका उद्देश्य विकास का वैक्यूम बनाना या अधिकारों की रक्षा नहीं था बल्कि उसके संविधान में उद्देश्य था संसदीय राजनीति का विरोध कर सशस्त्र क्रांति करना।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इन्होंने सशस्त्र क्रांति और संसदीय राजनीति का विरोध करने के दो उद्देश्यों के साथ सीपीआई मार्क्सिस्ट बनाई और यही आज के माओइस्ट हैं। उसके बाद 1975 में जैसे ही कांग्रेस का समर्थन मिला, एमसीसी माओइस्ट बनी और बिहार झारखंड केंद्रीय पार्टी बनी। फिर पीडब्ल्यूजी 1980 में बना। वह आंध्र केंद्रित बना। 1982 में दलित किसान केंद्रीय सशस्त्र संघर्ष सीपीआई एमएल पार्टी यूनिटी बिहार में बनी। दलित किसान केंद्रीय संघर्ष उनका उद्देश्य था। 1998 में पीपल्स वॉर ग्रुप बना और उसमें माओवादियों का एकत्रीकरण हुआ। इतना सब करने के बाद भी वह सफल नहीं हुए और 2000 में पीएलजीए बना, गुरिल्ला फोर्स बनाई और 2004 में ये पीडब्ल्यूजी एमसीसी का विलय हो गया। 2014 में मोदी जी आए और 2026 में सब की समाप्ति हो गई। ये 1925 से लेकर 2026 तक 101 साल का उनका इतिहास है। इसे अन्याय के खिलाफ संघर्ष का स्वरूप मानकर महिमामंडित मत करो। ये लोग वोट की जगह बुलेट से शासन प्राप्त करना चाहते हैं। कुछ लोग चर्चा से मानते नहीं है, वहां बल प्रयोग कर उनके अत्याचार से निर्दोष नागरिकों को बचाना पड़ता है। ये हमारी पार्टी की सरकार है और हर नागरिक की सुरक्षा नरेन्द्र मोदी जी ने सुनिश्चित की है। जो भी नागरिकों के साथ अन्याय करेगा, समझा तो ठीक है वरना ये फोर्स इसी के लिए बनाई गई है। इसका उपयोग भी होगा, परिणाम भी आएगा और आज आ भी गया हैश्री अमित शाह ने कहा कि अर्बन नक्सली कहते हैं कि हथियार उठाकर घूमने वाले माओवादियों के साथ चर्चा करो क्योंकि वो अन्याय के लिए लड़ रहे हैं, उन्हें मारना नहीं चाहिए और इनके प्रति सिंपैथी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एक भी बुद्धिजीवी दिव्यांग बनने वाले किसान, 5000 से ज्यादा सिक्योरिटी फोर्सेज के जवानों, उनकी विधवाओं के लिए नहीं है, इनके अनाथ बच्चों के लिए नहीं लिखता। उन्होंने कहा कि इनकी मानवता संविधान तोड़कर हथियार लेकर घूमने वालों के लिए ही है। इनके हथियारों से जो नागरिक मारे जा रहे हैं, इनके लिए आपकी मानवता नहीं है। मानवता के दोहरे चरित्र को स्वीकार नहीं कर सकते, यह मानवतावादी नहीं हैं, बल्कि नक्सलियों के समर्थक हैं। ये लोग गरीबों के हाथ में हथियार देकर अपनी विचारधारा को फैलाना चाहते हैं, मगर उनके भी दिन लद गए हैं।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सलवा जुडूम की शुरुआत 2005 में सरकार समर्थित जनआंदोलन के रूप में हुई। आदिवासी युवाओं को एसपीओ बनाया गया और उनको आतंक फैलाने वालों के सामने लड़ने के लिए ट्रेनिंग दी गई। सलवा जुडूम की शुरुआत श्रीमान कर्मा ने की थी जिन्हें नक्सलियों ने मौत के घाट उतार दिया था। 5 जुलाई 2011 को सर्वोच्च अदालत ने नंदिनी सुंदर और अन्य लोगों ने एक विवाद दायर किया और सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस सुदर्शन रेड्डी के नेतृत्व में तय किया कि नक्सलियों के खिलाफ राज्य की ये लड़ाई गैरकानूनी है और तुरंत ही इनको हथियार वापस देने का ऑर्डर कर दिया। इसका परिणाम हुआ उनके हथियार वापस दिए गए और इन्होंने चुन-चुन कर सलवा जुडूम से जुड़े हुए लोगों को मार दिया और वही सुदर्शन रेड्डी विपक्ष के उपराष्ट्रपति पद के प्रत्याशी बने। जो देश की कानून और व्यवस्था को मानते हैं, वो सुदर्शन रेड्डी को कभी अपना प्रत्याशी नहीं बनाते। उन्होंने कहा कि अगर कोई व्यक्ति जज बनकर अपनी व्यक्तिगत आइडियोलॉजी का उपयोग कर, संवैधानिक कपड़े पहनकर, अपनी आइडियोलॉजी को ऑर्डर में कन्वर्ट कर, हजारों बेगुनाह आदिवासियों की जान जाए ऐसा फैसला देता है, तो इस जजमेंट की घोर निंदा करते हैं। आइडियोलॉजी जनता के कल्याण से ऊपर नहीं है।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में 2014 के बाद नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्र में 17,589 किलोमीटर सड़कें बनाने की मंजूरी दी है, जिसमें 12,000 किलोमीटर सड़कें बन चुकी हैं। विकास इसीलिए हो रहा है कि धीरे-धीरे-धीरे नक्सलवाद समाप्त हो रहा है। लगभग-लगभग 5,000 मोबाइल टावर, ₹6,000 करोड़ के खर्चे से हम लगा चुके हैं। दो अन्य योजनाओं में और 8,000 4G टावर बनाने का फैसला नरेन्द्र मोदी जी ने किया है। 1804 बैंक शाखाएं 12 साल में खुली हैं, 1321 एटीएम खुले हैं, 37,850 बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंस बनाए गए और 6025 डाकघर खुले। यह सब सिर्फ 12 साल में हुआ है। हमने माओवादियों के साथ चर्चा नहीं की, उन्हें समाप्त किया और विकास को आगे बढ़ाया। 259 एकलव्य आदर्श विद्यालय बनाए, इसके साथ-साथ 46 आईटीआई, 49 स्किल डेवलपमेंट सेंटर बनाए, 16 कौशल विकास केंद्र बनाए और लगभग इस सबके लिए 800 करोड़ रुपए का खर्च 12 साल में हमने किया है। सिविक प्रोग्राम में 212 करोड़ के कार्य किए जो स्वास्थ्य शिविर और दवाओं से जुड़े हुए हैं और जनजाति युवा एक्सचेंज के कार्यक्रम भी हमने बनाए। सिक्योरिटी के लिए राज्यों की सहायता के लिए एसआरई लेकर आए जिसमें 10 साल में 3000 करोड़ दिया। स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम लेकर आए और इसमें 5000 करोड़ दिया। उन्होंने पूछा कि ये सब 1970 से अब तक क्यों नहीं हुआ था? पिछली सरकारें करने जाती थीं तो वो धमाके कर मार देते थे। हमने धमाके करने वालों को समाप्त किया, तो अब विकास हो रहा है।केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 2014 के बाद क्लियर पॉलिसी और स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल विल इस काम में जुड़ी है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी जी ने ये स्पष्ट कर दिया इस देश के किसी भी कोने में चाहे कश्मीर हो, उत्तर पूर्व हो, या वामपंथी उग्रवादी प्रभावित क्षेत्र हो, गैरकानूनी प्रवृत्ति नहीं चलेगी और इस पर कठोर हाथों से काम होगा। केन्द्र और राज्यों के बीच में अलाइनमेंट हुआ। स्टेट की कैपेसिटी में गवर्नमेंट, गवर्नेंस और पुलिसिंग में हमने सुधार किया। सीएपीएफ और स्टेट पुलिस का समन्वय बढ़ाया। एक्शनेबल इंटेलिजेंस को नीचे तक परकोलेट करने की व्यवस्था की और जिम्मेदारियां भी स्पष्ट कर दी। ऑल एजेंसी अप्रोच शुरू किया और सिर्फ हथियार ही नहीं, बल्कि एनआईए, ईडी, इंटेलिजेंस एजेंसी, जैसे सभी नेटवर्क, फंडिंग और सपोर्ट सिस्टम, पर हमने प्रहार किया। इफेक्टिव सरेंडर पॉलिसी लेकर आए। डेवलपमेंट और गवर्नेंस में हमने कोई वैक्यूम नहीं छोड़ा और अब पहले जहां राज्य की उपस्थिति नहीं थी, वहां आज राज्य की उपस्थिति है और नक्सलवाद की हार का सबसे बड़ा कारण यह है कि राज्य अब हर गांव में पहुंच चुका है, वहां पंचायत बन चुकी है। विकास के लिए हमने Whole of Government अप्रोच लिया और सुरक्षा नकेल कसने के लिए Whole of Agency अप्रोच लिया।श्री अमित शाह ने कहा कि 20 अगस्त, 2019, 24 अगस्त 2024 और कल 31 मार्च 2026 की तीन महत्वपूर्ण तारीखों के बारे में बताना चाहूंगा। 20 अगस्त 2019 को गृह मंत्रालय में एक मीटिंग हुई और पूरा पुलिस कोऑर्डिनेशन, मॉडर्नाइजेशन, रिटायर्ड नक्सलियों को पुलिस फोर्स में लेना, इनका कोऑर्डिनेशन खुफिया एजेंसी के साथ, ये सब 20 अगस्त को डिजाइन किया। छत्तीसगढ़ में विपक्षी पार्टी की सरकार थी जिसने सहयोग नहीं दिया। बिहार 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था, महाराष्ट्र एक तहसील छोड़कर 2024 के पहले नक्सल मुक्त हो चुका था। ओडिशा 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। झारखंड एक जिला छोड़कर 2024 के पहले नक्सलमुक्त हो चुका था। सिर्फ छत्तीसगढ़ बचा हुआ था क्योंकि छत्तीसगढ़ की विपक्षा पार्टी की सरकार ने नक्सलवादियों को बचा कर रखा था। जनवरी 2024 में छत्तीसगढ़ में हमारी सरकार बनी और दूसरे ही दिन, वहां पूरे समर्थन का भरोसा मिल गया। साझा रणनीति बनी और 24 अगस्त 2024 को हमने घोषित किया था कि 31 मार्च 2026 को नक्सलवाद पूरे देश से समाप्त कर देंगे।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इसके बाद हमने सुरक्षा घेरे में बढ़ोतरी की। प्रधानमंत्री मोदी जी के 11 साल में 596 फोर्टिफाइड पुलिस स्टेशन बने। नक्सल प्रभावित जिले जो 2014 में 126 थे, आज सिर्फ दो बचे हैं। मोस्ट इफेक्टेड जिले 2014 में 35 थे, आज शून्य है। नक्सल घटनाएं दर्ज करने वाले पुलिस स्टेशन जो 350 थे, आज 60 हैं। पिछले 6 साल में 406 नए सीएपीएफ के कैंप बनाए, 68 नाइट लैंडिंग हेलीपैड बनाए, 400 बुलेट प्रूफ, ब्लास्ट प्रूफ गाड़ियां हमारे जवानों को दी गई, पांच अस्पताल हमारे जवानों के लिए बनाए गए और कम्युनिकेशन की सारी व्यवस्था दुरुस्त कर दी गई।श्री अमित शाह ने कहा कि 2024, 2025 और 2026 का संयुक्त आंकड़ा देखें तो तीन सालों में मारे गए नक्सली, 2026 के मार्च तक 706 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए। 2218 गिरफ्तार हुए, उनको पकड़कर हमने जेलों में डाला है, अदालतों की शरण में ले गए और 4839 लोगों ने आत्मसमर्पण किया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष संवाद की बात करता है। शासन का यही अप्रोच होना चाहिए जो वार्ता करना चाहता है, उसके साथ वार्ता करनी चाहिए और जो हमारे जवानों, किसानों, आदिवासियों, बच्चों पर गोली चलाता है, उसका जवाब गोली से देना चाहिए। हमने संवाद, सुरक्षा और समन्वय तीनों का उपयोग किया है। नवीनतम टेक्नोलॉजी का उपयोग कर सटीक निगरानी और ढेर सारे टेलीफोन बिलों का विश्लेषण किया है। लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम, मोबाइल फोन की गतिविधियां, साइंटिफिक कॉल लॉग्स, सोशल मीडिया एनालिसिस, फॉरेंसिक और तकनीकी संस्थानों की सहायता लेकर इस पूरे अभियान का गृह मंत्रालय ने नेतृत्व किया है। ड्रोन सर्वेलेंस, सैटेलाइट उपयोग, इमेजिंग टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित डेटा एनालिसिस से ये सफलता प्राप्त हुई है।
बूढ़ा पहाड़ क्षेत्र में बिहार में 2022 में ऑपरेशन ऑक्टोपस चला। ऑपरेशन डबल बुल गुमला, लोहरदगा और लातेहार जिलों में चला 8 से 25 फरवरी, 2022 में, तीनों जिले नक्सलवाद से मुक्त हो गए। ऑपरेशन थंडरस्टॉर्म झारखंड के सरायकेला, पश्चिमी सिंहभूम और खूंटी जिले में 1 से 3 सितंबर 2022 में चला। ऑपरेशन भीमबर्ग मुंगेर जिले के जून व जुलाई 2022 में चला। ऑपरेशन चक्रबांधा बिहार के गया और औरंगाबाद जिलों में 2022 में चला और ये सारे एरिया इससे मुक्त हो गए। ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट तेलंगाना और छत्तीसगढ़ की सीमा में 50 किलोमीटर लंबी और 37 किलोमीटर चौड़ी एक पहाड़ी पर चला। वहां पर नक्सलियों ने अपना एक परमानेंट कैंप बनाया था और वहां 5 साल लड़ सकने के लिए हथियार, सोलर लाइट की व्यवस्थाएं, ढेर सारी आईडी बनाने की फैक्ट्रियां और 5 साल का अनाज था। इसके अलावा 400 से 500 कैडर वहां पर एकत्रित थे। गृह मंत्री ने कहा कि 45 डिग्री टेंपरेचर पहाड़ पर पत्थर गर्म हो जाता था। शरीर में से 2 लीटर, 3 लीटर पसीना बह जाता था लेकिन जवानों ने उफ तक नहीं की और 21 दिन तक ऑपरेशन चला। 30 से ज्यादा माओवादी मारे गए, बाकी नीचे उतरते ही पुलिस के साथ मुठभेड़ों में मारे गए या सरेंडर कर दिया और यह पूरा असला हमने जब्त कर लिया। इसी ने महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मतलब बस्तर और तेलंगाना में माओवादी आंदोलन का अंत कर दिया। श्री शाह ने कहा कि कोबरा, सीआरपीएफ, डीआरजी और छत्तीसगढ़ पुलिस के जवानों ने अमानवीय धैर्य के साथ इनके किले को तोड़ा है।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर 2024 की शुरुआत में कुल 21 थे, जो इनकी पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व है। एक पकड़ा गया है, सात सरेंडर हुए हैं, 12 मारे गए हैं और एक फरार है, उसके साथ भी वार्ता चल रही है। 21 के 21 सेंट्रल कमिटी मेंबर और पोलित ब्यूरो मेंबर समाप्त हो चुके हैं और उनकी केंद्रीय व्यवस्था टूट चुकी है। दंडकारण्य में 27 की स्टेट कमेटी थी, तीन अरेस्ट हुए, 20 सरेंडर हुए, 11 मारे गए और दो से बातचीत जारी है। दंडकारण्य की उनकी मुख्य स्टेट कमेटी थी, वो समाप्त हो चुकी है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, एमएमसी स्टेट कमेटी, तीन सरेंडर कर गए, तीन की ही बची थी। ओडिशा, चार बचे थे, एक सरेंडर हुआ, तीन मारे गए। ओएससी, ओडिशा, पांच ने सरेंडर किया, पांच मारे गए, 10 ही थे। डिस्टर्ब रीजन ब्यूरो, अरेस्ट एक हुआ, तीन मारे गए, एक फरार है। तेलंगाना में छह सरेंडर हो गए, तीन मारे गए, एक भी नहीं बचा है तो उनकी पोलित ब्यूरो मेंबर और सीएमसी पूरा समाप्त हो चुका है। हमने लक्ष्य रखा था कि 31 मार्च को देश को नक्सलवाद मुक्त करेंगे और हम नक्सलमुक्त हो गए हैं, ऐसा कहने में अब कोई संकोच नहीं है। बसव राजू उनके महासचिव न्यूट्रलाइज हुए, हिड़मा जिन्होंने 27 लोगों को मारा था, गजुरल्ला रवि 11 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए।कदारी सत्यनारायण रेड्डी 46 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। गणेश उइके 44 वर्ष से एक्टिव थे, न्यूट्रलाइज हुए। वेणुगोपाल आत्मसमर्पण किया। 46 वर्ष से एक्टिव थे। वासुदेव आत्मसमर्पण किया, 36 वर्ष से एक्टिव थे। पल्लूरी प्रसाद राव चंदना 46 वर्ष से एक्टिव थे, आत्मसमर्पण किया। रामदेव मांझी देबू 36 वर्ष से एक्टिव थे, समर्पण किया। टिपरी तिरुपति 44 वर्ष से एक्टिव थे, उन्होंने भी सरेंडर कर दिया है। सभी मुख्य हथियारी माओवादी समाप्त हो चुके हैं। हमने ल्यूक्रेटिव पुनर्वास पॉलिसी को अपनाया है, जिसमें आत्मसमर्पण की प्रोत्साहन राशि 50,000 घोषित की गई है, जो सामूहिक सरेंडर पर दोगुना कर देते हैं। मोबाइल सबको सरकार की ओर से देते हैं। हथियार जमा कराने पर और मुआवजा देते हैं। पुनर्वासन केंद्र पर कौशल प्रशिक्षण व टूल किट का वितरण करते हैं। ₹10,000 प्रति माह 36 माह तक हम उनको देते हैं। सभी को मोदी जी ने प्रधानमंत्री आवास योजना की गिफ्ट दी है। नक्सल मुक्त पंचायत होते ही गांव के विकास के लिए ₹1 करोड़ दिया जाता है।
श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों ने 15000 बच्चों का जीवन बर्बाद कर दिया इसका जिम्मेदार कौन है? उन्होंने कहा कि आप तो एसी चेंबर में बैठकर कोर्ट के प्रोटेक्शन के तहत आर्टिकल लिखते हैं और वहां जीवन के जीवन उजड़ गए हैं और किसी को परवाह नहीं है। उन्होंने कहा कि जो अपने आप को ह्यूमन राइट का चैंपियन मानते हैं उनसे पूछा जाए कि 32 साल की आयु तक मेहंदी ना लगाने वाली बच्ची के ह्यूमन राइट की कौन चिंता करेगा? उन्होंने कहा कि उसकी चिंता नरेन्द्र मोदी जी करेंगे और कोई नहीं। उन्होंने कहा कि इन लोगों का अधिकार छीन लिया है, इसका हिसाब कभी न कभी देना पड़ेगा। श्री शाह ने कहा कि जिन्होंने भी शब्द या प्रच्छन्न रूप से नक्सलियों का समर्थन किया है, वह सब इस पाप के उतने ही भागीदार हैं जितना बंदूक लेकर घूमने वाले हैं।केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि इनकी नौकरी और रोजगार के लिए हमने ढेर सारे प्रयास किए हैं, कौशल केंद्र बनाए हैं। बारहवीं तक इनके बच्चों के लिए बारहवीं तक की मुक्त मुफ्त शिक्षा करी है। महिलाओं को 2 लाख और पुरुषों को 5 लाख के ऋण की व्यवस्था की है। वहां बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम के माध्यम से संस्कृति और खेल को बढ़ावा दे रहे हैं। वहां अब 1 लाख 20 हजार कलाकारों ने बस्तर पंडुम में भागीदारी की और 5 लाख 50 हजार आदिवासी खेले हैं। जो इसको न्याय की लड़ाई कहते हैं, वो बस्तर पंडुम और बस्तर ओलंपिक में जाएं। श्री शाह ने कहा कि पीड़ितों पर जुल्म ढाने वालों के लिए भाषण करने के लिए आपके पास बहुत समय है। श्री अमित शाह ने कहा कि जब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की सरकार बनी, तब एक नेशनल एडवाइजरी काउंसिलबनी थी। एक नई नेशनल एडवाइजरी काउंसिल एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल फोरम खड़ा किया गया जो देश के कानून बनाता था। उन्होंने कहा कि हर्ष मंदर इसके सदस्य थे, जिनके एनजीओ अमन वेदिका में शीर्ष नक्सली नेता की पत्नी को जिम्मेदारी दी गई थी और रिकॉर्ड है कि वह उन नक्सलियों में शामिल थी जिन्होंने अपहरण के केस अर्बन एरिया में किए थे। उन्होंने कहा कि ये एनएससी देश का नीति निर्धारण करती थी। उन्होंने कहा कि रामदयाल मुंडा कहते थे कि नक्सल ऑपरेशन जरूरत से ज्यादा कठोर है। उन्होंने कहा कि इस प्रच्छन्न समर्थन ने ही नक्सलियों की हिम्मत बढ़ाई। उन्होंने कहा कि नंदिनी सुंदर, रामचंद्र गुहा, ई ए एस शर्मा, ये सारे लोग सलवा जुडूम के केस के साथ भी जुड़े थे। जब सरकार की एक एक्स्ट्रा कॉन्स्टिट्यूशनल अथॉरिटी, जो पीएम से भी ऊपर थी, उसके सदस्य अगर नक्सलवाद के समर्थक हों तो किस तरह से नक्सलियों का हौसला टूटेगा? कैसे टूटेगा? उन्होंने कहा कि यह मुख्य विपक्षी पार्टी ने किया था। ये तो इतिहास है और जो लोग इस बात का विरोध करते हैं, आने वाले दिनों में सैकड़ों पुस्तकें लिखी जाएगी जो आपके कारनामों से भरी हुई होगी। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नेता प्रतिपक्ष अपने लंबे राजनीतिक करियर में कई बार नक्सलियों और उनके हमदर्दों के साथ देखे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा में कई नक्सल फ्रंटल संगठनों ने हिस्सा लिया, इसका रिकॉर्ड है। उन्होंने कहा कि वे 2010 में ओडिशा में लाडो सिकोका के साथ मंच पर दिखे। सिकोका ने उसी मंच से भड़काऊ भाषण दिया और उन्हें माला भी पहनाई। उन्होंने कहा कि 2018 में हैदराबाद में गुम्मांडी विट्ठल राव उर्फ गद्दार से नेता प्रतिपक्ष ने मुलाकात की जो विचारधारा के करीब रहे। मई 2025 में कोऑर्डिनेशन कमिटी ऑफ पीस के साथ मुलाकात की। आज जब 172 जवानों को मारने वाला हिडमा मारा गया तब इंडिया गेट पर नारे लगे, कितने हिडमा मारोगे? हर घर से निकलेंगे हिड़मा और इस वीडियो को नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं शेयर किया है।श्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलियों के समर्थकों ने 1970 से लेकर मार्च 2026 तक नक्सलवाद का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये नरसंहार का समर्थन है और 20 हजार लोग जो मारे गए, इसका दोषी अगर कोई एक है तो मुख्य विपक्षी पार्टी की वामपंथी विचारधारा है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के साथ रहते-रहते, ये पार्टी और उसके नेता खुद नक्सलवादी बन गए हैं। उन्होंने कहा कि इसका जवाब इस देश की जनता को चुनाव में देना पड़ेगा क्योंकि ये बात यहां रुकेगी नहीं, बल्कि जनता की अदालत में जाएगी।
- नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रविवार को फैसला लिया है कि अब राशन की दुकानों के साथ-साथ पेट्रोल पंप पर भी केरोसिन मिल सकेगा। अब सरकारी तेल कंपनियां तय किए गए पेट्रोल पंपों से भी केरोसिन रख और बांट सकेंगी। हर जिले में राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन अधिकतम 2 पेट्रोल पंप चुनेंगे, जहां यह सुविधा दी जाएगी। इन पेट्रोल पंपों पर अधिकतम 5 हजार लीटर तक केरोसिन रखा जा सकेगा।सरकार ने सप्लाई आसान बनाने के लिए 60 दिनों के लिए सार्वजनिक वितरण प्रणाली के नियमों में ढील दी है, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक तेल समय पर पहुंच सके।नियमों में क्या छूट दी गई-- केरोसिन बांटने वाले एजेंट और डीलरों को लाइसेंस लेने से छूट दी गई- टैंकरों से केरोसिन उतारने (सप्लाई) के नियम भी आसान किए गए- पेट्रोल पंपों पर केरोसिन स्टोर और वितरण की अस्थायी अनुमति दी गई
-
नई दिल्ली। भारत सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के बीच, वह प्रमुख क्षेत्रों में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए निरंतर निगरानी बनाए हुए है और उचित तैयारी एवं प्रतिक्रियात्मक उपाय कर रही है। प्रयासों का मुख्य उद्देश्य निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति बनाए रखना, समुद्री गतिविधियों की सुरक्षा करना और क्षेत्र में भारतीय नागरिकों को जरूरी सहायता प्रदान करना है।
कल रविवार को जारी एक बयान में केंद्र सरकार ने देश में पेट्रोल और डीजल की स्थिति स्पष्ट की। सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के लगातार बंद रहने के मद्देनजर, देश भर में पेट्रोलियम उत्पादों की बिना रूके उपलब्धता बनाए रखने के लिए सक्रिय उपाय किए जा रहे हैं। वर्तमान स्थिति इस प्रकार है-सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त स्टॉक बना हुआ है।घरेलू खपत को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों से एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ा दिया गया है।रिटेल आउटलेटदेश भर में सभी खुदरा दुकानें सामान्य रूप से चल रही हैं।भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये प्रति लीटर की कमी की है।इसके अलावा, भारत सरकार ने घरेलू बाजार में इन उत्पादों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डीजल पर 21.5 रुपये प्रति लीटर और विमानन टरबाइन ईंधन (एटीएफ) पर 29.5 रुपये प्रति लीटर का निर्यात शुल्क लगाया है।वहीं दूसरी ओर कुछ क्षेत्रों में अफरा – तफरी मचने से खरीदारी की खबरें सामने आई हैं। कुछ अफवाहों के चलते कुछ राज्यों के कुछ खुदरा दुकानों पर अफरा-तफरी मच गई, जिसके परिणामस्वरूप दुकानों पर असामान्य रूप से अधिक बिक्री और भारी भीड़ देखने को मिली। हालांकि, यह सूचित किया जाता है कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है।सरकार ने जनता इस तरह की अफवाहों पर विश्वास न करने की सलाह दी है। सरकार ने कहा,” पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। कृपया पेट्रोल और डीजल की जल्दबाजी में खरीदारी से बचें। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे अफवाहों से सावधान रहें और सही जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें।” इसके अलावा, सरकार ने सभी नागरिकों से वर्तमान स्थिति देखते हुए अपने दैनिक उपयोग में ऊर्जा संरक्षण के लिए आवश्यक प्रयास करने का अनुरोध किया है। -
नई दिल्ली। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के बाद सोमवार को विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। जदयू के नेता और बिहार के मंत्री विजय कुमार चौधरी ने बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पहले ही राज्यसभा के लिए निर्वाचित घोषित हो चुके हैं, और यह संवैधानिक रूप से अनिवार्य था। मुख्यमंत्री भी आज विधान परिषद की सदस्यता का त्याग करेंगे। उन्हीं के इस्तीफा का पत्र लेकर एमएलसी संजय कुमार उर्फ गांधी और हमलोग विधान परिषद आए हैं। सभापति आएंगे और आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
नीतीश कुमार के इस कदम के साथ ही बिहार में नेतृत्व परिवर्तन होने की संभावना है। हालांकि उनके मुख्यमंत्री पद छोड़ने को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। नीतीश कुमार 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य हैं। नीतीश कुमार 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हो गए। इसके बाद विधान परिषद की सदस्यता से उनके इस्तीफे की चर्चा शुरू हो गयी थी। नीतीश कुमार उन नेताओं में शामिल हैं जो चारों सदनों के सदस्य बने हैं। नीतीश कुमार ने राज्यसभा चुनाव लड़ने के दौरान कहा था कि उनकी इच्छा राज्यसभा की सदस्यता के रूप में निर्वाचित होने की थी , इस कारण उन्होंने यह निर्णय लिया। नीतीश कुमार 1985 में हरनौत विधानसभा सीट से विधानसभा पहुंचे थे। इसके बाद 1989 में वे नौवीं लोकसभा के सदस्य चुने गए। वे 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं। अब पहली बार राज्यसभा सदस्य के रूप में वे अपनी नई पारी की शुरुआत करने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि 10 अप्रैल को वे राज्यसभा की सदस्यता ग्रहण करेंगे। नीतीश कुमार ने केंद्र में रेल मंत्री, कृषि मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे, जहां उन्होंने रेलवे में व्यापक सुधार किए। साल 2005 से बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभाल रहे हैं। नीतीश कुमार ने ‘सुशासन बाबू’ के रूप में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री रहते कई ऐसी योजनाएं बनाई, जिनकी चर्चा पूरे देश में हुई। शराबबंदी, साइकिल योजना और पंचायती राज में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे फैसले नीतीश कुमार ने लिए। ( -
नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद बिहार विधानसभा के बांकीपुर निर्वाचन क्षेत्र की जनता के नाम भावुक संदेश लिखा है। उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा।
भाजपा के अध्यक्ष नितिन नवीन राज्यसभा के सदस्य चुने गए हैं। इसके कारण उन्होंने अपने विधायक पद से इस्तीफा दिया है। उन्होंने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भावुक पोस्ट करते हुए लिखा, “कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में अंगुली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।”उन्होंने पोस्ट में लिखा, “बांकीपुर और बिहार के मेरे सभी परिवारजन और कार्यकर्ता साथी, जनवरी 2006 में पिताजी के आकस्मिक निधन के बाद पार्टी ने मुझे पटना पश्चिम से उपचुनाव लड़ने का अवसर दिया और दिनांक 27 अप्रैल 2006 को मैं पहली बार पटना पश्चिम क्षेत्र से निर्वाचित होकर सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। पिछले 20 सालों में पिताजी स्वर्गीय नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा की ओर से बनाए गए इस क्षेत्र को पारिवारिक भाव से सींचने, संवारने और विकास के पटल पर आगे ले जाने का निरंतर प्रयास किया है।”नितिन नवीन ने लिखा, “मैंने सदैव अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए समर्पित भाव से कार्य किया। इसी का प्रतिफल है कि यहां की देवतुल्य जनता ने मुझे लगातार 5 बार सदन में अपना प्रतिनिधि चुनकर सेवा का सौभाग्य प्रदान किया। सदन के अंदर हो या सदन के बाहर, दोनों ही स्थानों का उपयोग मैंने अपने क्षेत्र और बिहार की जनता की आवाज उठाने और उनकी समस्याओं के समाधान का मार्ग निकालने के लिए किया।”उन्होंने ‘एक्स’ पोस्ट में कहा कि बिहार विधानसभा के सदस्य के रूप में मुझे सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई वरिष्ठ विधायकों से बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला। मैंने अपने क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों का समाधान जनता और कार्यकर्ताओं के सुझावों से ही निकाला है। नितिन नवीन ने आगे लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी ने जब मुझे बिहार सरकार के मंत्री के रूप में काम करने का अवसर दिया, तब मुझे कई अहम फैसलों, नीतियों और योजनाओं का क्रियान्वयन करने में सफलता मिली। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री जी का धन्यवाद व्यक्त करता हूं।”अपने पोस्ट में नितिन नवीन ने लिखा, “मैंने यह हमेशा कहा है कि जनता ने मुझे समस्याएं भी बताई और उन समस्याओं के समाधान का रास्ता भी मुझे जनता ने ही दिखाया। कार्यकर्ताओं ने मुझे भाई के रूप में, परिवार के सदस्य के रूप में और अभिभावक के रूप में अंगुली पकड़कर आज इस मुकाम तक पहुंचाया है। मैं पटना और बिहार की जनता को आश्वस्त करता हूं कि जो परिवार का भाव उन्होंने मुझे दिया है, उसका मैं सदैव सम्मान करता रहूंगा।”‘एक्स’ पोस्ट में बांकीपुर के निर्वाचित सदस्य पद से इस्तीफे का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा, “पार्टी ने मुझे जो नई भूमिका दी है, उसके माध्यम से भी मैं अपने क्षेत्र और बिहार के विकास के लिए सदैव तत्पर और संकल्पित रहूंगा। मेरे कार्यकर्ताओं और बिहार की जनता के साथ मेरा जो अटूट संबंध है, वह सदैव बना रहेगा और मुझे हमेशा नई ऊर्जा, प्रेरणा और मार्गदर्शन देता रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2047 के ‘विकसित भारत’ और ‘विकसित बिहार’ बनाने के सपने को साकार करने की दिशा में मैं निरंतर प्रयासरत रहूंगा।”( -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में जारी ''भीषण युद्ध'' के कारण पैदा हो रही चुनौतियों का सभी नागरिकों से एकजुट होकर सामना करने की अपील करते हुए रविवार को कहा कि सभी को सतर्क रहना चाहिए तथा अफवाहों के झांसे में नहीं आना चाहिए। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे और वहां काम कर रहे एक करोड़ भारतीयों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए वह उन देशों के अत्यंत आभारी हैं। उन्होंने कहा कि ''हमारे पड़ोस'' में एक महीने से अधिक समय से ''भीषण युद्ध'' जारी है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''यह निस्संदेह चुनौतीपूर्ण समय है। मैं आज 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से 140 करोड़ देशवासियों से एक बार फिर आग्रह करता हूं कि हमें इस चुनौती से पार पाने के लिए एकजुट होकर आगे आना होगा। मैं अपने सभी देशवासियों से अपील करता हूं कि वे सतर्क रहें और अफवाहों के झांसे में न आएं।'' पश्चिम एशिया संघर्ष 28 फरवरी को उस समय शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अपने पड़ोस में अमेरिका के सहयोगियों और इजराइल को निशाना बनाया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नौवहन को बाधित कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिये दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। संघर्ष शुरू होने के बाद से ईरान ने बहुत कम पोतों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी है। पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से मोदी ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, ईरान, फ्रांस, इजराइल और मलेशिया सहित विश्व के कई नेताओं से बात की है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की है। मोदी ने दोनों नेताओं के बीच 24 मार्च को टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद कहा था कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर ''विचारों का सार्थक आदान-प्रदान'' हुआ।
-
त्रिशूर (केरल) . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल विधानसभा चुनाव के लिए राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रचार अभियान के तहत रविवार को यहां एक रोड शो किया। रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में लोग उनकी एक झलक पाने के लिए सड़कों पर कतार में खड़े थे। रोड शो की शुरुआत जिला अस्पताल के निकट हुई। भीषण गर्मी की परवाह किये बिना, लोग कई घंटे पहले सड़क के किनारे एकत्र हो गए थे और नारे लगा रहे थे और अपने मोबाइल फोन से उन पलों की फोटो खींच रहे थे जब प्रधानमंत्री ने एक खुले वाहन से उनका अभिवादन किया। त्रिशूर जिले में राजग के प्रमुख उम्मीदवारों पद्मजा वेणुगोपाल और लोकसभा में त्रिशूर का प्रतिनिधित्व करने वाले केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने रोड शो में हिस्सा लिया। इससे पहले, मोदी कुट्टानेल्लूर हेलीपैड पर पहुंचे, जहां भाजपा-राजग के नेताओं ने उनका स्वागत किया।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को नगालैंड की पारंपरिक मोरूंग शिक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रथा के माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जा सकती है। नगालैंड की मोरूंग प्रणाली एक पारंपरिक सामुदायिक शिक्षा मॉडल है, जो सामाजिक, सांस्कृतिक और जीवन कौशल सीखने के केंद्र के रूप में कार्य करता है। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा कि नगा समुदाय शिक्षा के माध्यम से अतीत को संरक्षित करने और भविष्य को तैयार करने का एक प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस समुदाय के लोग अपनी आदिवासी परंपराओं का बहुत सम्मान करते हैं तथा वे इस पर गर्व तो करते ही हैं, साथ ही अपने रुख को आधुनिक भी रखते हैं। उन्होंने कहा कि नगा जनजाति में मोरूंग शिक्षा की एक पारंपरिक व्यवस्था थी, इसमें, बुजुर्ग लोग अपने अनुभवों से युवाओं को पारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन के कौशल के बारे में बताते थे। उन्होंने कहा, ''समय के साथ यह प्रणाली अब मोरूंग की शिक्षा की अवधारणा में बदल गया है। इसके माध्यम से बच्चों में गणित और विज्ञान जैसे विषयों में रुचि पैदा की जाती है। मोदी ने कहा, इसमें समुदाय के बुजुर्ग उन्हें कहानियां, लोकगीत और पारंपरिक खेलों के साथ जीवन के कौशल सिखाते हैं। इस तरह हमारा नगालैंड अपनी सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखते हुए, बच्चों की शिक्षा को आगे ले जा रहा है। आपको भी अपने क्षेत्र में ऐसे प्रयासो के बारे में पता चले, तो मुझे जरूर साझा कीजिएगा।'' प्रधानमंत्री ने नगालैंड के चिजामी गांव से सामने आए एक बेहद प्रेरणादायक प्रयास के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा कि चिजामी गांव की महिलाएं मिलकर 150 से अधिक तरह के पारंपरिक बीजों को सुरक्षित रख रही हैं। उन्होंने कहा कि इन बीजों को एक सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है, जिसे गांव की महिलाएं ही चलाती हैं। उन्होंने कहा कि ''इनमें चावल, बाजरा, मक्का, दालें, सब्जियां और कई तरह की जड़ी-बूटियां शामिल हैं। यह एक ऐसा प्रयास है, जिसमें ज्ञान भी सुरक्षित है, परंपरा भी जीवित है और आने वाली पीढ़ियों के लिये एक मजबूत आधार भी तैयार हो रहा है।'' उन्होंने कहा, ''आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है, तब ऐसे प्रयास हमें यह बताते हैं कि समाधान हमेशा कहीं दूर नहीं होता। कई बार हमारे अपने पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रयास ही हमें सबसे मजबूत रास्ता दिखाते हैं।
-
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' के लाभों पर प्रकाश डाला और कहा कि इसका प्रभाव देश के हर कोने में देखा जा रहा है। घरेलू छतों पर सौर ऊर्जा लगाने की यह योजना, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी पहल कहा जाता है, का लक्ष्य मार्च 2027 तक एक करोड़ घरों को सौर ऊर्जा की आपूर्ति करना है। प्रधानमंत्री ने कहा कि अगर कोई आज किसी भी शहर, चाहे वह बड़ा हो या छोटा, का दौरा करे तो उसे निश्चित रूप से एक बदलाव नजर आएगा कि बड़ी संख्या में घरों की छतों पर सौलर पैनल लगाए गए हैं। मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में कहा, ''कुछ साल पहले तक, यह सोलर पैनल चंद ही घरों की छतों पर देखने को मिलते थे। लेकिन आज 'पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना' का असर देश के हर कोने में नजर आ रहा है।'' उन्होंने कहा कि इस योजना ने गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा के जीवन में गहरा बदलाव लाया है, जिन्होंने इस पहल के माध्यम से सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षण प्राप्त किया और चार महीने का 'सोलर पीवी तकनीशियन पाठ्यक्रम' पूरा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश के मेरठ के अरुण कुमार अब अपने क्षेत्र में ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं, और हाल ही में उन्होंने दिल्ली में एक कार्यक्रम में भाग लिया, जहां उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। मोदी ने कहा कि कुमार ने बताया था कि वह न केवल अपने बिजली बिल में बचत कर रहे हैं बल्कि अपनी अतिरिक्त बिजली बेच भी रहे हैं। मोदी ने जयपुर के मुरलीधर का भी किस्सा साझा किया, जिन्होंने खेती के लिए डीजल पंप पर निर्भरता से मुक्ति पाई और सौर पंप को अपनाया, जिससे उन्हें हजारों रुपये की बचत हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा पहल के लाभ पूर्वोत्तर के क्षेत्रों में भी मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में, जहां रियांग जनजाति के कई गांव बिजली की समस्या से जूझ रहे थे, वहां सौर मिनी-ग्रिड ने उनके घरों को रोशन किया है। मोदी ने बताया कि अब वहां बच्चे शाम ढलने के बाद भी पढ़ाई कर पाते हैं, लोग अपने मोबाइल फोन चार्ज कर पाते हैं और गांवों का सामाजिक जीवन भी बदल गया है। प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश में सौर ऊर्जा क्रांति के अनगिनत उदाहरण हैं। आप भी इस क्रांति में शामिल हों और दूसरों को भी इससे जोड़ें।''
-
मन की बात
नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से चीनी का सेवन कम करने और खाना पकाने के तेल का उपयोग 10 प्रतिशत तक घटाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे छोटे प्रयास लोगों को मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से दूर रखेंगे। मोदी ने अपने मासिक रेडियो संबोधन 'मन की बात' में कहा कि 'इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर' युवराज दुआ के पोस्ट पर कई लोगों ने टिप्पणी की है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री से अपने पिता को चीनी का सेवन कम करने के लिए कहने का अनुरोध किया था। प्रधानमंत्री ने कहा, ''मुझे खुशी है कि मेरी अपील का उनके पिता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा। मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि चीनी का सेवन कम करें, और जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, हमें खाना पकाने के तेल का उपयोग भी 10 प्रतिशत तक कम करना होगा। ये छोटे प्रयास आपको मोटापे और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से बचाएंगे।'' मोदी ने कहा कि उन्होंने हमेशा सभी से सेहत पर ध्यान देने का आह्वान किया है।
उन्होंने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के लिए अब 100 दिन से भी कम समय बचा है, विश्व भर में योग के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। अलमिस जी अफ्रीका के जिबूती में स्थित अपने अरविंद योग केंद्र के माध्यम से योग को बढ़ावा दे रहे हैं। वह कई अन्य स्थानों पर भी लोगों को योग सिखाते हैं।'' अलमिस जी अफ्रीका के जिबूती में रहने वाले एक योग शिक्षक और प्रचारक हैं, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रशंसा किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त हुई। वह जिबूती में अरविंद योग केंद्र के संस्थापक हैं। मोदी ने कहा कि वह अक्सर कहते हैं कि ''जो खेलता है, वही ऊंचाई प्राप्त करता है'' और उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि देश के युवा अब उन खेलों को अपना रहे हैं, जो पहले इतने लोकप्रिय नहीं थे। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रतिभाशाली एथलीट गुलवीर सिंह ने एक ऐसे ही खेल में कमाल कर दिखाया है और कुछ ही हफ्ते पहले उन्होंने 'न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन' में तीसरा स्थान हासिल करके इतिहास रच दिया। सिंह एक घंटे से कम समय में 'हाफ मैराथन' पूरी करने वाले पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।
उन्होंने स्क्वैश खिलाड़ी ''बेटी अनाहत सिंह'' का भी जिक्र किया, जिन्होंने 'स्क्वैश ऑन फायर ओपन' में एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि अनाहत सिंह ने महज 17 साल की उम्र में यह सफलता हासिल की और प्रोफेशनल स्क्वैश एसोसिएशन (पीएसए) की विश्व रैंकिंग में शीर्ष 20 में जगह बनाने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई महिला खिलाड़ी बन गईं। मोदी ने कहा, ''मुझे अस्मिता एथलेटिक्स लीग के बारे में भी पता चला। इसमें आठ मार्च को महिला दिवस के अवसर पर कई खेल आयोजनों का आयोजन किया गया। लीग में लगभग दो लाख बेटियों ने हिस्सा लिया।'' उन्होंने कहा, ''यह देखकर खुशी होती है कि भारत की महिलाएं देश में हो रहे इस खेल परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।'' -
नई दिल्ली। करीब हजार पीएनजी ग्राहकों ने एलपीजी कनेक्शन को छोड़ दिया है। इससे उन लोगों के लिए एलपीजी उपलब्धता में सुधार होगा, जिनके घरों के आसपास पीएनजी की सुविधा नहीं है। यह जानकारी पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी की ओर से रविवार को दी गई।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस सचिव नीरज मित्तल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “कल तक लगभग 6000 पीएनजी उपभोक्ताओं ने अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दिया। उन्हें बहुत-बहुत धन्यवाद! आप भी उन नेक नागरिकों के इस मजबूत और साहसी समूह में शामिल हों, जिन्होंने बिना पीएनजी वाले लोगों को एलपीजी दिलाने में मदद करने के लिए एलपीजी कनेक्शन का उपयोग बंद कर दिया है।”उन्होंने आगे कहा, “आज ही मायपीएनजीडीडॉटइन पर अपना एलपीजी कनेक्शन छोड़ दें।” उन्होंने उन अन्य लोगों से भी एलपीजी छोड़ने का आग्रह किया जिनके पास पीएनजी कनेक्शन हैं और अभी भी एलपीजी का लाभ उठा रहे हैं। मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार को देशभर में 54 लाख से ज्यादा एलपीजी सिलेंडर्स की डिलीवरी हुई है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला के प्रभावित होने के बाद भी घरेलू स्तर पर आपूर्ति सामान्य बनी हुई है। देश में किसी भी डीलरशिप पर एलपीजी खत्म होने की रिपोर्ट नहीं मिली है। देश में ऑनलाइन एलपीजी बुकिंग बढ़कर 91 प्रतिशत हो गई है।वितरक स्तर पर कालाबाजारी को रोकने के लिए डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड (डीएसी) डिलीवरी की हिस्सेदारी बढ़कर 84 प्रतिशत हो गई है, जो कि फरवरी 2026 में 53 प्रतिशत थी। मंत्रालय ने आगे कहा कि सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं और कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, “देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार है। घरेलू खपत को पूरा करने के लिए रिफाइनरियों से एलपीजी उत्पादन बढ़ाया गया है।” उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी गई है और पीएनजी के घरेलू उपभोक्ताओं और ट्रांसपोर्ट सीएनजी की 100 प्रतिशत मांग को पूरा किया जा रहा है। ग्रिड से जुड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को उनकी औसत खपत का 80 प्रतिशत आपूर्ति की जा रही है। बयान में कहा गया,“एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी जारी है। अब तक लगभग 2,900 छापे मारे जा चुके हैं और कल 1,700 से अधिक सिलेंडर जब्त किए गए। सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (ओएमसी) ने अब तक एलपीजी वितरकों को 390 से अधिक कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।”इसके अलावा, देश भर में सभी खुदरा ईंधन आउटलेट सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपए प्रति लीटर की कमी की है। - नयी दिल्ली/सरकार में शीर्ष पदों के लिए चयन करने वाली संस्था लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीईएसबी) ने सार्वजनिक क्षेत्र की इस्पात कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक पद के लिए अशोक कुमार पांडा के नाम की सिफारिश की है। पांडा उन 10 चयनित उम्मीदवारों में शामिल थे जिनका साक्षात्कार सेल में चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (सीएमडी) पद के लिए लिया गया था। सेल के वर्तमान सीएमडी अमरेंदु प्रकाश का कार्यकाल दो अप्रैल, 2026 को समाप्त हो रहा है। उन्होंने 31 मई, 2023 को इस पद का कार्यभार संभाला था। पीईएसबी ने 28 मार्च को जारी अधिसूचना में बताया कि उसने इस पद के लिए अशोक कुमार पांडा के नाम की सिफारिश की है। केंद्र सरकार के उपक्रमों में शीर्ष पदों पर नियुक्ति का अंतिम निर्णय मंत्रिमंडल की नियुक्ति समिति (एसीसी) लेती है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करते हैं। पांडा के अलावा, सेल के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पद के लिए साक्षात्कार दिया था।इनमें मनीष राज गुप्ता (निदेशक, खनन), आलोक वर्मा (राउरकेला इस्पात संयंत्र के प्रभारी निदेशक), बिपिन कुमार गिरी (कार्यकारी निदेशक, खदान विकास) और अनिश सेनगुप्ता (कार्यकारी निदेशक, परियोजनाएं) शामिल हैं।
- सैनिकों और उनके परिवारों के लिए आशीर्वाद मांगापुरी/ थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने शनिवार को पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की और सैनिकों एवं उनके परिजनों के लिए भगवान से आशीर्वाद मांगा। उन्होंने संवादददाताओं के साथ बातचीत में कहा, ''मैं स्वयं को बहुत सौभाग्यशाली मानता हूँ कि मुझे भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। मेरा मुख्य उद्देश्य भारतीय सेना की ओर से तथा इसके कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए आशीर्वाद प्राप्त करना था। मुझे विश्वास है कि भगवान के आशीर्वाद से आने वाले दिनों में भारतीय सेना और भी बेहतर प्रदर्शन करेगी।'' इस दौरान उनकी पत्नी सुनीता द्विवेदी भी उनके साथ थीं। जनरल द्विवेदी ने कहा कि मंदिर में उन्हें पवित्रता और शांति का अनुभव हुआ, जहाँ सदियों पुरानी परंपराएँ आज भी सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, ''मैं हर साल मंदिर आने की कोशिश करूँगा।''जनरल द्विवेदी का स्वागत पुरी के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने किया जो उन्हें मंदिर तक ले गए। वह मंदिर में लगभग एक घंटे तक रहे। थलसेना प्रमुख के तीन-दिवसीय ओडिशा दौरे का आज दूसरा दिन है। उनके दौरे की शुरुआत शुक्रवार को लोक भवन में राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति के साथ एक बैठक से हुई थी। बाद में, थलसेना प्रमुख एक विशेष विमान से गोपालपुर के लिए रवाना हो गए जहाँ वह सेना वायु रक्षा कॉलेज में प्रशिक्षण बुनियादी ढांचे की समीक्षा करेंगे और अधिकारियों तथा पूर्व सैनिकों के साथ बातचीत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, वह गोपालपुर स्थित 'फील्ड फायरिंग रेंज' में गोलीबारी का प्रदर्शन भी देखेंगे। थलसेना प्रमुख का 29 मार्च को नयी दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है।
- मुंबई। रेमंड के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का शनिवार शाम मुंबई में निधन हो गया। उनके परिवार ने यह जानकारी दी। वह 87 वर्ष के थे।विजयपत सिंघानिया बेटे एवं समूह के वर्तमान अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर उनके निधन की जानकारी साझा की। रेमंड समूह के प्रवक्ता ने बताया कि सिंघानिया का मुंबई में निधन हो गया और उनका अंतिम संस्कार रविवार को किया जाएगा। पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया एक कुशल पायलट भी थे और उन्होंने 'हॉट एअर बैलून' में सबसे अधिक ऊंचाई हासिल करने का विश्व रिकॉर्ड बनाया था। उन्होंने वर्ष 2000 तक रेमंड के चेयरमैन के रूप में दो दशक तक जिम्मेदारी संभाली।गौतम को कंपनी की बागडोर सौंपने के बाद विजयपत ने कंपनी में अपनी पूरी 37 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने बेटे को हस्तांतरित कर दी। कुछ साल पहले विजयपत सिंघानिया और उनके बेटे के बीच कानूनी विवाद हुआ था, लेकिन बाद में उन्होंने मामले को सुलझा लिया था।
-
-श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की एक अनूठी पहल की जानकारी दी जहां किसानों ने खेतों में छोटे पुनर्भरण तालाब और सोख्ते बनाए हैं
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए कहा है कि दुनिया भर में पेट्रोल और डीज़ल का संकट बढ़ रहा है। आज आकाशवाणी से मन की बात कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि मौजूदा समय चुनौतीपूर्ण है क्योंकि भारत की ऊर्जा ज़रूरतों के एक बड़े हिस्से की पूर्ति पश्चिम एशिया से ही होती है।
उन्होंने कहा कि विश्व समुदाय के साथ भारत के संबंधों, तमाम देशों से मिल रहे सहयोग और पिछले दशक में भारत के अभ्युदय के कारण देश इस परिस्थितियों से निपटने में सक्षम हुआ है। श्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि कोविड काल की तरह, मौजूदा संकट से भी भारत उबर जाएगा।प्रधानमंत्री ने कहा कि खाड़ी देशों में लाखों भारतीय रहते हैं। उन्होंने 1 करोड़ से अधिक भारतीयों को हर तरह की सहायता देने के लिए खाड़ी देशों को धन्यवाद दिया और लोगों से अपील की कि वे सामूहिक रूप से इस चुनौती का मुका़बला करें। श्री मोदी ने कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे के राजनीतिकरण से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह 140 करोड़ देशवासियों के हित का मामला है और इसमें स्वार्थगत राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। श्री मोदी ने यह भी कहा कि इस मामले में अफ़वाह फैलाने वाले लोग देश को नुक़सान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने देशवासियों से अफ़वाहों के प्रति सतर्क रहने और केवल सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।प्रधानमंत्री ने ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण की चर्चा की जो भारत की महान संस्कृति और धरोहर को प्रदर्शित करने के लिए जन-भागीदारी की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य देशभर से पांडुलिपियों के संबंध में सूचना जुटाना है। प्रधानमंत्री ने अनुरोध किया कि जिन लोगों के पास पांडुलिपि या इसके बारे में सूचना हो, वे इसे ज्ञान भारतम ऐप पर साझा करें। उन्होंने कहा कि अब तक हज़ारों पांडुलिपियां प्राप्त हो चुकी हैं और प्रत्येक प्रविष्टि का सत्यापन किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के नमसाई के चाओ नान्तिसिंध लोकांग ने ताई लिपि और अमृतसर के अमित सिंह राणा ने गुरमुखी में उपलब्ध पांडुलिपि साझा की है। कुछ संगठनों ने ताड़पत्र पर लिखी पांडुलिपियां उपलब्ध कराई हैं। श्री मोदी ने कहा कि राजस्थान के अभय जैन पुस्तकालय ने ताम्रपत्र पर लिखी पांडुलिपि भेजी है। इसी प्रकार, लद्दाख के हेमिस बौद्धविहार से तिब्बती पांडुलिपि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली है।ज्ञान भारतम् सर्वेक्षण इस वर्ष मध्य जून तक जारी रहेगा। श्री मोदी ने सर्वेक्षण के ज़रिए अपनी-अपनी संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को साझा करने की अपील की।प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में माई भारत संगठन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है क्योंकि यह देश के युवाओं के सकारात्मक कार्यों से जोड़ रहा है। उन्होंने माई भारत द्वारा हाल ही में आयोजित बजट प्रतियोगिता की चर्चा की जिसका उद्देश्य युवाओं को बजट प्रक्रिया और नीति निर्माण की जानकारी देना था। इस क्विज से लगभग एक लाख साठ हज़ार प्रतिभागियों को निबंध प्रतियोगिता के लिए चुना गया। श्री कहा कि उन्होंने इस प्रतियोगिता के लिए प्राप्त कुछ आलेखों को पढ़ा है जिनसे पता चलता है कि आज का युवा देश के विकास में योगदान करना चाहता है।उन्होंने तेलंगाना के सूर्यापेट के कोटला रघुवीर रेड्डी, उत्तरप्रदेश के बाराबांकी के सौरभ बैसवार और बिहार के गोपालगंज के सुमीत कुमार की खासतौर से चर्चा की जिन्होंने किसानों के मुद्दे पर निबंध लिखे हैं। इसी प्रकार, पंजाब में मोबाली की आंचल, ओडिशा में केंद्रपाड़ा के ओम प्रकाश रथ ने महिलाओं के नेतृत्व में विकास को बढ़ावा देने पर विचार साझा किए हैं।हरियाणा के यमुनानगर से प्रथम बरार ने लिखा है कि हरित और स्वच्छ भारत ही खुशहाली का एकमात्र विकल्प है। दिल्ली के शंख गुप्ता का सुझाव है कि ग्रामीण खेल प्रतिभाओं की पहचान के प्रयास किए जाने चाहिए। श्री मोदी ने विचार साझा करने वाले सभी युवाओं की सराहना की और कहा कि ये विचार देश को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण होंगे।प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में संपन्न टी-20 क्रिकेट विश्वकप में भारतीय टीम की जीत पर गर्व व्यक्त किया। उन्होंने कर्नाटक के हुबली में, जम्मू-कश्मीर क्रिकेट टीम के रणजी ट्रॉफी जीतने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की। जम्मू-कश्मीर ने लगभग सात दशक बाद पहली बार रणजी ट्रॉफी जीती है।प्रधानमंत्री ने कहा कि यह सफलता वर्षों के अनवरत प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कप्तान पारस डोगरा और युवा कश्मीरी गेंदबाज आकिब नबी के प्रदर्शन की भी सराहना की, जिन्होंने 60 विकेट लिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के लोगों में खेलों के प्रति ज़बरदस्त जुनून है और अब यह बड़े खेल आयोजन का केन्द्र बन रहा है। गुलमर्ग, पहले ही खेलो इंडिया शीतकालीन खेल के आयोजक के तौर पर अपनी पहचान बना चुका है। फुटबॉल जैसे खेल भी यहां बहुत लोकप्रिय हैं।प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तरप्रदेश के गुलवीर सिंह की चर्चा की जिन्होंने न्यूयॉर्क सिटी हाफ मैराथन में तीसरा स्थान हासिल कर इतिहास रचा है। उन्होंने महज 17 वर्ष की उम्र में, स्क्वॉश का एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब जीतने वाली अनाहत सिंह की भी प्रशंसा की। इस जीत के साथ अनाहत विश्व रैंकिंग में शीर्ष 20 में पहुंचने वाली सबसे कम उम्र की एशियाई खिलाड़ी बन गई हैं। श्री मोदी ने अस्मिता एथलेटिक्स लीग का भी उल्लेख किया जिसमें महिला दिवस पर 8 मार्च को कई प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं।प्रधानमंत्री मोदी ने फिटनेस पर भी ध्यान देने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि दुनियाभर में योग के प्रति आकर्षण लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने अफ्रीका के जिबूती के अल्मिस का जिक्र किया जहां अरविंद योग केंद्र में योग को बढ़ावा दिया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने लोगों से चीनी का सेवन कम करने की अपील भी की। उन्होंने इंस्टाग्राम कंटेंट क्रिएटर युवराज दुआ की एक पोस्ट का उल्लेख किया जिसमें प्रधानमंत्री से अपने पिता को चीनी का सेवन कम करने के लिए कहने का अनुरोध किया गया था। श्री मोदी ने यह भी कहा कि खाद्य तेल का उपयोग 10 प्रतिशत तक कम करने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से मोटापे और जीवन-शैली से जुड़ी बीमारियों से बचाव संभव है।प्रधानमंत्री मोदी ने बेंगलुरु में शिक्षा से जुड़ी एक अनूठी पहल की जानकारी दी। बेंगलुरु की एक टीम प्रयोग शिक्षा अनुसंधान संस्थान चला रही है जिसने अन्वेषण नाम से एक प्रयोग शुरू किया है। इसमें नौवीं से 12वीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को रसायन विज्ञान, भूविज्ञान और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में नवाचार का अवसर मिल रहा है।प्रधानमंत्री ने नागा समुदाय की सराहना की जो अतीत को संरक्षित कर रहा है और शिक्षा के माध्यम से भविष्य के लिए स्वयं को तैयार कर रहा है। उन्होंने बताया कि नागा जनजातियों में मोरंग शिक्षा प्रणाली में बुजुर्ग अपने समुदाय के युवाओं कोपारंपरिक ज्ञान, इतिहास और जीवन कौशल से जुड़े अपने अनुभव साझा करते हैं।प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में ग्रीष्म ऋतु के आगमन के साथ ही जल संरक्षण के प्रति नये सिरे से प्रतिबद्धता व्यक्त करने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में ‘जल संचय अभियान’ से लोगों में व्यापक जागरूकता आई है और देशभर में लगभग 50 लाख कृत्रिम जल संचयन केंद्र बनाए गए हैं। जल संकट से निपटने के लिए अब प्रत्येक गांव में सामुदायिक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। श्री मोदी ने बताया कि अमृत सरोवर अभियान के तहत देश भर में लगभग 70 हजार अमृत सरोवर बनाए गए हैं।श्री मोदी ने जन-भागीदारी से जल संरक्षण संबंधी कुछ प्रेरणादायक उदाहरण साझा किए। उन्होंने त्रिपुरा के जम्पुई पहाड़ियों में तीन हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित वांगमुन गांव की चर्चा की जहां गंभीर जल संकट से निजात के लिए लगभग हर घर की छत पर वर्षाजल संचयन प्रणाली स्थापित की गई है।श्री मोदी ने छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले की एक अनूठी पहल की जानकारी दी जहां किसानों ने खेतों में छोटे पुनर्भरण तालाब और सोख्ते बनाए हैं। इससे बारिश का पानी धीरे-धीरे जमीन में रिस जाता है। इस मॉडल को इलाक़े के 12 सौ से अधिक किसानों ने अपनाया है। इसी प्रकार, तेलंगाना के मंचरियाल जिले के मुधिगुंटा गांव में भी चार सौ परिवारों ने अपने घरों में सोख्ते बनाए हैं। इससे इन इलाक़ों के भू-जल स्तर में सुधार हुआ है और प्रदूषित पानी से होने वाली बीमारियों में काफी कमी आई है।प्रधानमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार मछुआरों का जीवन आसान बनाने के लिए पहल कर रही है। उन्होंने कहा कि मछुआरे आत्मनिर्भर भारत की मजबूत नींव हैं। श्री मोदी ने कहा कि बंदरगाह विकास और मछुआरों के लिए बीमा योजनाएं उपयोगी साबित हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अब मछुआरों को मौसम की जानकारी मिल रही है, मत्स्य-पालन और समुद्री शैवाल के क्षेत्र में नवाचार हो रहे हैं और मछुआरे आत्मनिर्भर बन रहे हैं।प्रधानमंत्री ने ओडिशा के संबलपुर की सुजाता भुयान का उदाहरण दिया जिन्होंने हीराकुंड में मछली पालन को महज दो-तीन वर्ष में ही एक सफल व्यवसाय में बदल दिया है।प्रधानमंत्री ने लक्षद्वीप के मिनिकॉय की हव्वा गुलजार का भी जिक्र किया, जो पहले मछली प्रसंस्करण इकाई चलाती थीं। कोल्ड स्टोरेज स्थापित करने के बाद से उनका व्यवसाय और बेहतर हो गया है। श्री मोदी ने बेलगावी के शिवलिंग सतप्पा हुद्दार की चर्चा की जिन्होंने एक तालाब फार्म बनाया और इस व्यवसाय के लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया।प्रधानमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी में, एक घंटे में 251 हजार से अधिक पौधे लगाकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया गया है। यह हजारों लोगों की भागीदारी से संभव हुआ। उन्होंने कहा कि “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अंतर्गत देशभर में लाखों पेड़ लगाए गए हैं। श्री मोदी ने नागालैंड के चिज़ामी गांव की महिलाओं द्वारा सामूहिक रूप से 150 से अधिक किस्मों के पारंपरिक बीजों का संरक्षण करने को प्रेरणादायी बताया। इन बीजों को गांव की महिलाओं द्वारा संचालित सामुदायिक बीज बैंक में संरक्षित किया जा रहा है।प्रधानमंत्री ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का प्रभाव देश के हर कोने में देखा जा रहा है। इस योजना के तहत गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले की पायल मुंजपारा ने सौर ऊर्जा प्रौद्योगिकी में चार महीने का पाठ्यक्रम किया और अब वह एक कुशल सौर ऊर्जा उद्यमी के रूप में अपनी पहचान बना रही हैं। इसी प्रकार, मेरठ के अरुण कुमार भी अब अपने क्षेत्र में ऊर्जा प्रदाता बन गए हैं। जयपुर के मुरलीधर की खेती पहले डीजल पंप से होती थी जिस पर हर साल हजारों रुपये खर्च होते थे। सौर पंप अपनाने के बाद उनकी खेती का तरीका पूरी तरह बदल गया है।प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से पूर्वोत्तर के कई क्षेत्रों को लाभ मिल रहा है। त्रिपुरा में रियांग जनजाति के कई गांव अब सौर मिनी-ग्रिड से रोशन रहते हैं। श्री मोदी ने लोगों से सौर ऊर्जा क्रांति में शामिल होने और दूसरों को भी इससे जोड़ने का आग्रह किया।अंत में, प्रधानमंत्री ने लोगों से अपने आसपास की प्रेरणादायक कहानियां साझा करते रहने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन संदेशों के कारण भी दूर-दराज के लोग मन की बात को उत्साहपूर्वक सुनते हैं। -
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से भारत के सामने आई चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से जागरुक रहने और अफवाहों से बचने की अपील की है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हम सब मिलकर कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए राष्ट्र को संबोधित किया। उन्होंने कार्यक्रम के 132 वें एपिसोड में देशवासियों से अपील करते हुए कहा, “वो जागरूक रहें, अफवाहों के बहकावे में ना आएं। सरकार की तरफ से जो आपको निरंतर जानकारी दी जा रही है, उस पर भरोसा करें और उसी पर विश्वास करके कोई कदम उठाएं।”
उन्होंने कहा, “मुझे हर बार की तरह इस बार भी विश्वास है कि जैसे हमने देश के 140 करोड़ देशवासियों के सामर्थ्य से पुराने संकटों को हराया था, इस बार भी हम सब मिलकर के इस कठिन हालत से बहुत ही अच्छी तरह बाहर निकल जाएंगे।” प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मार्च का महीना वैश्विक स्तर पर बहुत ही हलचल भरा रहा है। हम सबको याद है कि पूरा विश्व भूतकाल में कोविड के कारण एक लंबे समय तक अनेक समस्याओं से गुजरा था। हम सभी की अपेक्षा थी कि कोरोना के संकट से निकलने के बाद दुनिया नए सिरे से प्रगति की राह पर आगे बढ़ेगी, लेकिन, दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में लगातार युद्ध और संघर्ष की परिस्थितियां बनती चली गईं।पीएम मोदी ने युद्धग्रस्त क्षेत्र में भारतीयों की मदद के लिए खाड़ी देशों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में हमारे पड़ोस में एक माह से भीषण युद्ध चल रहा है। हमारे लाखों परिवारों के सगे-संबंधी इन देशों में रहते हैं, खासतौर पर खाड़ी देशों में काम करते हैं। मैं खाड़ी देशों का बहुत आभारी हूं, वे ऐसे एक करोड़ से ज्यादा भारतीयों को वहां पर हर प्रकार की मदद दे रहे हैं। - गुवाहाटी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को विश्वास जताया कि भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) असम की 126 सदस्यीय विधानसभा में 90 से अधिक सीट जीतकर लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी करेगा। शाह ने गुवाहाटी में रोड शो के साथ चुनावी राज्य के अपने दो दिवसीय दौरे की शुरुआत की। उन्होंने कहा, ''असम के लोग राज्य में भाजपा और राजग की सरकार बनाने के लिए उत्साहित हैं। हम 90 से अधिक सीट के साथ फिर से सरकार बनाएंगे।'' शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के नेतृत्व में राज्य में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, ''असम में उग्रवाद, बम विस्फोट और गोलीबारी बंद हो गई है। यहां स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी ढांचे का विकास हो रहा है। यह राज्य पूरे पूर्वोत्तर में स्वास्थ्य और शिक्षा का केंद्र बन गया है।'' शाह ने कहा कि रोजगार के व्यापक अवसर पैदा हुए हैं और सेमीकंडक्टर विनिर्माण इकाइयों जैसे आधुनिक उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं।मौजूदा विधानसभा में भाजपा के 64 विधायक हैं, जबकि उसकी सहयोगी असम गण परिषद के नौ, यूपीपीएल (यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल) के सात और बीपीएफ (बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट) के तीन सदस्य हैं।। शाह ने जलुकबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा, गुवाहाटी सेंट्रल से विजय कुमार गुप्ता, न्यू गुवाहाटी से डिप्लू रंजन शर्मा, दिसपुर से प्रद्युत बोरदोलोई और दिमोरिया से असम गण परिषद (अगप) के उम्मीदवार तपन दास के समर्थन में रोड शो किया। शर्मा को छोड़कर, अन्य उम्मीदवार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया शाह के साथ रोड शो में शामिल हुए। यह रोड शो आर्य विद्यापीठ कॉलेज के मैदान से शुरू होकर नेपाली मंदिर के पास समाप्त हुआ। ए के आजाद रोड पर रोडशो के दौरान करीब दो किलोमीटर की दूरी तय की गई। भाजपा के पोस्टरों से सजी खुली एसयूवी पर खड़े शाह का रास्ते में मौजूद उत्साही भीड़ और पार्टी समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। केंद्रीय गृह मंत्री शनिवार शाम को राज्य की राजधानी पहुंचे। अपने दो-दिवसीय दौरे के दौरान, वह कई चुनावी रैलियों को संबोधित करने के साथ-साथ भाजपा के शीर्ष पदाधिकारियों के साथ बैठकें करेंगे। राज्य में मतदान नौ अप्रैल को होगा, जबकि मतगणना चार मई को होगी।
- नोएडा. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को नागरिकों से वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए समर्पण और एकता का आह्वान करते हुए कहा कि 'विकसित भारत' बनाने के लिए सामूहिक प्रयास बहुत जरूरी है। साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच राष्ट्रीय हितों को नुकसान पहुंचा सकने वाले बयान देने के खिलाफ राजनीतिक दलों को आगाह किया। प्रधानमंत्री ने जेवर स्थित नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पहले चरण के उद्घाटन समारोह में एक सभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का जिक्र किया और कहा, "विकसित भारत' के लक्ष्य को हासिल करने के लिए 1.4 अरब देशवासियों का सामूहिक प्रयास और एकता बहुत जरूरी है।" उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी एशिया में एक महीने से युद्ध जारी है और देशवासियों के भरोसे के साथ भारत इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है। मोदी ने कहा कि भारत के हितों की रक्षा और 'परिवारों व किसानों' की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकार की प्राथमिकता समय की बचत और लागत में कमी करके नागरिकों की सुविधा को बढ़ाना है। मोदी ने वैश्विक संकट की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा, "मैं प्रदेश व देश के सभी राजनीतिक दलों से आग्रह पूर्वक कहना चाहता हूं कि इस प्रकार के संकट से ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक है।" उन्होंने कहा, "जो भारतीयों और भारत के हक में है, वही भारत सरकार की नीति व रणनीति हैं। राजनीति के लिए गलत बयानबाजी करने वाले राजनीतिक बहस में कुछ नंबर पाएंगे लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती।" प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने संसद में स्थिति पर विस्तार से चर्चा की और विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ व्यापक व 'बेहद सकारात्मक' विचार-विमर्श भी किया। मोदी ने कहा, "आज जनता से फिर से कहूंगा कि हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ मिलजुलकर इस संकट का सामना करना है। यह पूरे विश्व में परेशानी करने वाला संकट है और हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है।" प्रधानमंत्री ने राजनीतिक दलों को आगाह करते हुए कहा कि कोविड-19 महामारी के संकट में कुछ लोगों ने टीके को लेकर झूठ बोला, अफवाहें फैलाई ताकि सरकार का काम कठिन हो, देश को नुकसान हो लेकिन परिणाम क्या हुआ। मोदी ने कहा, "जनता ने चुनाव के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया। मुझे पूरा भरोसा है कि देश के सभी राजनीतिक दल इससे सबक सीखेंगे और देश को ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ एक बार फिर से शानदार हवाई अड्डे के लिए बहुत बहुत शुभकामनाएं।" प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के इस समय में भी भारत ने अपने तेज विकास को निरंतर जारी रखा है।मोदी ने कहा, " भारत पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष से उत्पन्न चुनौतियों का पूरी ताकत से सामना कर रहा है।" उन्होंने संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से प्राप्त कच्चे तेल और गैस पर भारत की निर्भरता पर प्रकाश डालते हुए कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठा रही है कि इसका बोझ परिवारों और किसानों पर न पड़े।" मोदी ने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण का उद्घाटन करते हुए कहा, "आज से एक विकसित उत्तर प्रदेश और एक विकसित भारत की यात्रा में एक नए अध्याय की शुरुआत हो रही है।" उन्होंने कहा कि यह हवाई अड्डा इस क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देगा।प्रधानमंत्री ने कहा, "नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे व्यापारियों और युवाओं के लिए नए अवसर सृजित करेगा।" मोदी ने राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी (सपा) ने नोएडा को "लूट का एटीएम" बना दिया था, लेकिन भाजपा के नेतृत्व में यह अब विकास के एक शक्तिशाली इंजन के रूप में उभर रहा है। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा, "नोएडा हवाई अड्डे को अटल वाजपेयी (पूर्व प्रधानमंत्री) की सरकार ने 2003 में मंजूरी दे दी थी लेकिन यह नहीं बना। केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने वर्षों तक इस हवाई अड्डे की नींव तक नहीं पड़ने दी।" मोदी ने कहा, "2004 से 2014 तक हवाई अड्डे की फाइलें दबी रही। हमारी सरकार बनी तो उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी। दो तीन साल सपा ने काम नहीं होने दिया लेकिन जैसे ही दिल्ली और उत्तर प्रदेश में भाजपा-राजग की सरकार बनी तो हवाई अड्डे की नींव पड़ी और अब निर्माण भी हो गया है।" प्रधानमंत्री ने पूर्ववर्ती सरकारों पर मुख्यमंत्रियों के नोएडा जाने को लेकर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाते हुए कहा, ''यहां सपा की सरकार थी, मेरा नोएडा आने का कार्यक्रम बना तो तत्कालीन मुख्यमंत्री (अखिलेश यादव) इतने डरे थे कि नोएडा नहीं आये और मुझे भी डरा रहे थे कि अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो, आप मत आओ।" मोदी ने विपक्षी दलों पर तंज कसने के साथ ही कहा कि अब यह इलाका (नोएडा) पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। उन्होंने सरकार की विमानन नीति पर कहा, "हमने आम परिवारों की पहुंच में हवाई यात्रा सुनिश्चित करने के लिए उड़ान योजना शुरू की थी। पिछले कुछ वर्षों में, इस योजना के तहत 1.6 करोड़ से अधिक लोगों ने किफायती किराए पर यात्रा की है।" उन्होंने कहा, "उड़ान योजना का हाल ही में लगभग 29,000 करोड़ रुपये के स्वीकृत परिव्यय के साथ विस्तार किया गया है, जिसमें छोटे शहरों में नए हवाई अड्डों का विकास करने और आने वाले वर्षों में सौ नये हवाई अड्डे और लगभग 200 हेलीपैड बनाने की योजना शामिल है।" मोदी ने कहा, "यह हवाई अड्डा नोएडा, अलीगढ़, आगरा, मथुरा, समेत कई जिलों को लाभ देने वाला है। प्रदेश के किसानों, लघु उद्योगों और नौजवानों के लिए अनेक अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, यह विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। खासतौर पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य हवाई अड्डे के लिए बहुत बहुत बधाई देता हूं।" नोएडा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन प्रणालियों के निर्बाध जुड़ाव के साथ बहु-मॉडल परिवहन केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। भारत के विमानन क्षेत्र में मौजूद एक गंभीर कमी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने रखरखाव, मरम्मत और नवीनीकरण (एमआरओ) क्षेत्र की ओर ध्यान दिलाया और बताया कि 85 प्रतिशत भारतीय विमानों को अभी भी एमआरओ सेवाओं के लिए विदेश भेजना पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार ने एमआरओ क्षेत्र में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लिया है और आज जेवर में एक एमआरओ सुविधा केंद्र की नींव रखी गई है। मोदी ने कहा कि जेवर हवाई अड्डज्ञ पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ने का कार्य करेगा। यह एक अत्याधुनिक हवाई अड्डज्ञ होगा, जहां हर दो मिनट में एक विमान के उड़ान भरने की क्षमता विकसित की जा रही है। इस बीच एक सरकारी बयान में कहा गया है कि नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के प्रथम चरण के उद्घाटन के ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के राजकीय वायुयान ने जेवर रनवे से अपनी पहली उड़ान भरी बयान के अनुसार, इस विशेष उड़ान में उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नोएडा से लखनऊ तक का सफर तय किया। अधिकारियों ने बताया कि नियमित वाणिज्यिक उड़ान संचालन की घोषणा अभी बाकी है और हवाई अड्डे की सुरक्षा योजना को मंजूरी मिलने के बाद संभवतः अगले महीने इसके शुरू होने की उम्मीद है। हवाई अड्डे पर यात्री सेवाएं शुरू होने की योजना पहले सितंबर 2024 से थी।
- प्रयागराज. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि शादीशुदा महिला और पुरुष अपने पति या पत्नी के जीवित रहते हुए उनसे तलाक लिए बगैर किसी तीसरे व्यक्ति के साथ कानूनी रूप से सहजीवन (लिव इन) संबंध में नहीं रह सकते। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने कहा कि सक्षम अदालत से तलाक हासिल किए बिना न्यायालय लिव-इन संबंध में रहने वाले याचिकाकर्ताओं को सुरक्षा प्रदान करने के लिए कोई रिट या निर्देश जारी नहीं कर सकता है। बहरहाल, अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता परेशान हैं या उन्हें किसी प्रकार की हिंसा की आशंका है तो वे एक विस्तृत प्रार्थना पत्र देकर संबंधित पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर सकते हैं और संबंधित अधिकारी प्रार्थना पत्र की विषय वस्तु की जांच कर याचिकाकर्ताओं के जीवन की सुरक्षा के लिए कानून के मुताबिक आवश्यक कार्रवाई करेगा।इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने अंजू और उसके पुरुष साथी द्वारा दायर याचिका निस्तारित कर दी जिसमें प्रतिवादियों को उनके ''शांतिपूर्ण जीवन'' में दखल नहीं देने और सुरक्षा उपलब्ध कराने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। याचिकाकर्ताओं के वकील ने दलील दी कि ''दोनों याचिकाकर्ता पति-पत्नी की तरह साथ रह रहे हैं और उन्हें अपनी जान का खतरा है।'' राज्य सरकार के स्थायी अधिवक्ता ने कहा कि दोनों याचिकाकर्ता किसी अन्य व्यक्तियों के साथ विवाहित हैं और इन याचिकाकर्ताओं का साथ रहना ''अवैध'' है क्योंकि इन्होंने अपने जीवन साथी से तलाक नहीं लिया है। इस पर अदालत ने कहा, ''ऐसी स्थिति में लिव-इन संबंध में होने का दावा करने वाले इन याचिकाकर्ताओं को भारत के संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुए सुरक्षा नहीं दी जा सकती।'' अदालत ने 20 मार्च को दिए अपने निर्णय में कहा, "दो वयस्क व्यक्तियों की निजी स्वतंत्रता में हस्तक्षेप करने का अधिकार किसी को भी नहीं है और उनके माता पिता तक उनके संबंधों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। लेकिन, स्वतंत्रता का अधिकार या निजी स्वतंत्रता का अधिकार अपने आप में पूर्ण नहीं है, बल्कि इस पर कुछ पाबंदियां भी लागू होती हैं।" अदालत ने कहा, "एक व्यक्ति की स्वतंत्रता वहां खत्म हो जाती है जहां दूसरे व्यक्ति का संवैधानिक अधिकार प्रारंभ होता है। एक पति या पत्नी को अपने जीवन साथी के साथ रहने का कानूनी अधिकार है और निजी स्वतंत्रता के नाम पर उसे उसके इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता।" अदालत ने कहा, "यह स्थापित कानून है कि कानून के उलट या दंडात्मक प्रावधान सहित एक कानूनी प्रावधान को विफल करने के लिए निर्देश जारी नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ताओं को कानूनी रूप से सुरक्षा पाने के लिए निर्देश जारी करने की मांग करने का अधिकार नहीं है।"



























