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नयी दिल्ली. तेल टर्मिनल पर हमले के बावजूद संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के फुजैराह से तेल भरने के बाद भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का एक टैंकर सुरक्षित निकल गया है। सरकार ने रविवार एक अद्यतन सूचना में कहा कि वह पश्चिम एशिया में स्थिति पर करीब से नज़र रख रही है और स्थिर ईंधन आपूर्ति और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है। 'जग लाडकी' नाम का यह जहाज, जिसमें लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल है, फुजैराह से भारतीय समय के अनुसार 10.30 बजे निकला और इस पर सवार सभी सदस्य सुरक्षित हैं, और अब यह भारत के लिए रवाना हो गया है। 'जग लाडकी' चौथा भारतीय ध्वजवाहक जहाज है जो युद्ध क्षेत्र से बिना किसी नुकसान के बाहर निकला है।
तैयारी के उपायों पर एक अद्यतन सूचना में सरकार ने कहा कि इसके अलावा, सुरक्षित रास्ता भारतीय कूटनीति के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। होर्मुज जलडमरूमध्य में पोत परिवहन की दिक्कतों ने भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाला है। इसमें कहा गया, ''14 मार्च, 2026 को, जब भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी फुजैराह सिंगल पॉइंट मूरिंग पर कच्चा तेल भर रहा था, तो तेल टर्मिनल पर हमला हुआ। जहाज़ आज (रविवार) 10.30 बजे फुजैराह से लगभग 80,800 टन मुरबन कच्चा तेल लेकर सुरक्षित रूप से भारत के लिए रवाना हुआ।'' इसमें कहा गया है कि जहाज और उसमें सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। शनिवार को, दो भारतीय ध्वज वाले एलपीजी जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' - लगभग 92,712 टन तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) लेकर युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। सूचना के अनुसार, शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंचेगा, और नंदा देवी 17 मार्च को कांडला बंदरगाह पर लंगर डालेगा। ये दोनों जहाज़ उन 24 जहाजों में शामिल थे जो इस क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में फंसे हुए थे। पश्चिमी इलाके पर 24 के अलावा, पूर्वी क्षेत्र में चार और जहाज फंसे हुए थे। पूर्वी इलाके में पर चार में से भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग प्रकाश, जो ओमान से अफ्रीका पेट्रोल ले जा रहा था, शुक्रवार को युद्ध प्रभावित इलाके को पार कर गया। जग प्रकाश ने ओमान के सोहर बंदरगाह से पेट्रोल लिया था और अब यह तंजानिया के टांगा जा रहा है। यह 21 मार्च को टांगा पहुंचने वाला है। सरकार ने कहा कि इस इलाके में काम कर रहे भारतीय जहाज और नाविक सुरक्षित हैं, और समुद्री परिचालन पर करीब से नजर रखी जा रही है। अभी, फारस की खाड़ी इलाके के पश्चिम की ओर 22 भारतीय ध्वजवाहक जहाज हैं जिन पर 611 नाविक हैं। भारत अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 60 प्रतिशत एलपीजी ज़रूरतें आयात से पूरी करता है। 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका-इजराइल के हमले और जवाबी ईरानी कार्रवाई से पहले भारत का आधे से ज़्यादा कच्चा तेल आयात, लगभग 30 प्रतिशत गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी आयात सऊदी अरब और यूएई जैसे पश्चिम एशियाई देशों से आता था। इस लड़ाई की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्यम बंद हो गया है, जो खाड़ी देशों की ऊर्जा आपूर्ति का मुख्य रास्ता है। हालांकि, भारत ने रूस जैसे देशों से तेल मंगाकर कच्चे तेल की आपूर्ति में सुधार किया है, लेकिन औद्योगिक ग्राहकों को गैस आपूर्ति कम कर दी गई है। होटल और रेस्तरांओं के लिए भी एलपीजी में कमी की गई है। सरकार ने कहा है कि पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरएसपीएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर नज़र रख रहा है। - श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने रविवार को आतंकवादियों द्वारा पीड़ित सभी लोगों को न्याय दिलाने का संकल्प लिया और यहां आतंकी हमलों के 27 परिजनों को नियुक्ति पत्र सौंपे। सिन्हा ने कहा, "मैं आतंकी हमले के हर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए दृढ़ संकल्पित हूं और दोषियों को जवाबदेह ठहराने के लिए लंबित मामलों की जांच की जाएगी।" सिन्हा ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद से प्रभावित परिवारों से जबरन छीनी गई जमीनें या घर मुक्त कराए जाएंगे और वापस कर दिए जाएंगे और जिन मामलों की अभी जांच होनी बाकी है, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रशासन अन्याय को दूर करने और आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों के दरवाजे पर न्याय का द्वार खोलने में सफल रहा है। उन्होंने कहा, "अब तक लगभग 400 परिजनों को रोजगार मिल चुका है, और हम तब तक अथक प्रयास करते रहेंगे जब तक कि हम न्याय की प्रतीक्षा कर रहे अंतिम परिवार तक नहीं पहुंच जाते।" उपराज्यपाल ने कहा कि आतंकी हमलों के पीड़ितों के परिवारों को न्याय दिलाने के लिए पिछले साल बारामूला से शुरू किए गए इस अभियान ने उन्हें समर्थन तथा साहस प्रदान किया है और उनके भविष्य को संवारने में मदद की है।
- नयी दिल्ली । कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों और विभागों के सचिवों से कहा है कि वे अपने-अपने कार्यालयों द्वारा किए जाने वाले प्रमुख सुधारों के बारे में संक्षिप्त नोट जमा कराएं। सूत्रों ने यह जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि मंत्रालयों और विभागों को ये नोट या टिप्पणियां 17 मार्च तक सचिवालय में जमा करानी होंगी। उन्होंने कहा, ''सभी सचिवों से लागू किए गए और किए जाने वाले बड़े सुधारों पर नोट जमा करने का अनुरोध किया गया है।'' सरकार ने देश की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने और नागरिकों के लिए जीवन को सुगम बनाने को कई कदम उठा रही है। पिछले महीने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा था कि सरकार की 'सुधार एक्सप्रेस' से आम नागरिकों को बड़ा फायदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि अगले दशक के लिए उनकी तीन सुधार प्राथमिकताएं लगातार संरचनात्मक सुधार, नवोन्मेषण को बढ़ाना और कामकाज के संचालन को आसान बनाना हैं।
- नयी दिल्ली। लगभग 75 प्रतिशत कंपनियों को उम्मीद है कि नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद निश्चित अवधि वाले रोजगार में वृद्धि होगी। एक रिपोर्ट में कहा गया कि यह बदलाव कार्यबल के औपचारिककरण की दिशा में एक बड़ा संकेत है। मानव संसाधन समाधान प्रदाता जीनियस एचआरटेक की रिपोर्ट में कहा गया है कि कार्यबल के औपचारिककरण की ओर झुकाव स्पष्ट रूप से बढ़ रहा है। लगभग 75 प्रतिशत उत्तरदाताओं का मानना है कि नई श्रम संहिताओं के बाद कंपनियां रणनीतिक रूप से निश्चित अवधि वाले रोजगार को अपनाएंगी। यह अधिक संगठित, अनुपालन वाले और दस्तावेजी रोजगार व्यवस्था की ओर एक निर्णायक कदम है। उल्लेखनीय है कि नवंबर, 2025 में सरकार ने 29 केंद्रीय श्रम कानूनों की जगह चार व्यापक संहिताओं - मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा - को लागू किया था। इसका मकसद अनुपालन को सरल बनाना, नियमों को आधुनिक बनाना और श्रमिकों के कल्याण को बढ़ाना है। जीनियस एचआरटेक की यह रिपोर्ट जनवरी, 2026 के दौरान पूरे भारत के विभिन्न क्षेत्रों की 1,459 कंपनियों से मिली प्रतिक्रिया पर आधारित है। रिपोर्ट से पता चला कि समग्र तैयारी के बारे में पूछे जाने पर 40 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने कहा कि उनके संगठन इन चार श्रम संहिताओं को लागू करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। हालांकि, 22 प्रतिशत कंपनियों ने आंशिक रूप से तैयार होने की बात कही, जबकि 17 प्रतिशत अभी तैयारी के शुरुआती चरण में हैं और 21 प्रतिशत ने अब तक कोई प्रयास शुरू नहीं किया है।
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नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में आज रविवार तड़के गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हुई है। बूंदाबांदी से लोगों को गर्मी से थोड़ी राहत मिली। मौसम में अचानक आए बदलाव से राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के लिए सुबह का मौसम ठंडा और सुहावना हो गया।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने दिल्ली के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें लोगों को दिन के दौरान मध्यम वर्षा, बिजली गिरने और तेज हवाओं की आशंका के बारे में चेतावनी दी गई है। हालांकि, नोएडा और गुरुग्राम जैसे पड़ोसी शहरों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। यहां बादल छाए रहने के साथ हल्की बारिश की आशंका है।रविवार की सुबह की बारिश मार्च के पहले पखवाड़े में राजधानी को जकड़े हुए भीषण गर्मी से राहत लेकर आई। शहर पर काले बादल छा गए, साथ ही गरज और तेज हवाएं चलीं, जिससे तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हो गया। आईएमडी के अनुसार, मौसम में ये बदलाव पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में वायुमंडलीय गतिविधि की वजह से है।मौसम एजेंसी ने इससे पहले रविवार और सोमवार के लिए पश्चिमी हिमालय के कुछ हिस्सों और आसपास के मैदानी इलाकों में गरज, बिजली गिरने और तेज हवाओं का पूर्वानुमान लगाया था। इस तरह के मौसम आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ से होता है, जो अक्सर उत्तरी भारत में बारिश, तूफान और तापमान में उतार-चढ़ाव लाता है।आईएमडी ने दिल्ली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि निवासियों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि दिन भर मध्यम बारिश, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना है। मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि बारिश के दौरान सतह पर हवा की गति 30 से 40 किमी प्रति घंटा तक हो सकती है, और हवा के झोंके 50 किमी प्रति घंटा तक पहुंच सकते हैं।नोएडा और गुरुग्राम सहित आसपास के एनसीआर शहरों में येलो अलर्ट जारी किया गया है, जो हल्की बारिश और बादल छाए रहने की संभावना को दर्शाता है, हालांकि जोखिम का स्तर अपेक्षाकृत कम है। अधिकारियों ने निवासियों को सतर्क रहने की सलाह दी है, खासकर गरज के साथ बारिश और तेज हवाओं के दौरान। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, बादल छाए रहने और लगातार बारिश के कारण दिल्ली का अधिकतम तापमान लगभग 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। -
नई दिल्ली। ईरान-इजरायल संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट के कई देशों में 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं रद्द करने का फैसला लिया गया है। सीबीएसई का यह फैसला बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सीबीएसई के सभी स्कूलों पर लागू होगा। इस संबंध में बोर्ड ने 15 मार्च को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी किया है। बोर्ड का कहना है कि क्षेत्र की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
गौरतलब है कि भारत के अलावा विदेशों में भी सीबीएसई बोर्ड के लाखों छात्र हैं। यही कारण है कि दुनियाभर के 26 देशों में ये बोर्ड परीक्षाएं एक साथ आयोजित की जा रही थी। लेकिन ईरान इजरायल संघर्ष के बाद मिडिल ईस्ट ये कई देशों में यह परीक्षाएं नहीं हो सकीं। रविवार को बोर्ड द्वारा जारी किए गए सर्कुलर के अनुसार बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में स्थित सीबीएसई से संबद्ध सभी विद्यालयों के विद्यार्थियों की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाएं अब आयोजित नहीं की जाएंगी।बोर्ड ने इन देशों में परीक्षाएं आयोजित करने की संभावना का कई बार पुन आकलन किया। लेकिन इन देशों से प्राप्त सूचनाओं, स्थानीय विद्यालयों के अनुरोधों तथा स्थानीय प्रशासन की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए परीक्षा रद्द का का निर्णय लिया गया है। इससे पहले 1 मार्च, 3 मार्च, 5 मार्च, 7 मार्च और 9 मार्च 2026 को भी इस विषय पर सर्कुलर जारी किए गए थे। पहले कुछ परीक्षाओं को स्थगित किया गया था। हालांकि अब इन सभी परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया जा चुका है।रविवार को सीबीएसई बोर्ड द्वारा लिए गए नवीनतम निर्णय के अनुसार 16 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 के बीच आयोजित होने वाली कक्षा 12 की सभी बोर्ड परीक्षाएं इन देशों के विद्यार्थियों के लिए पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं। साथ ही पहले जिन परीक्षाओं को स्थगित किया गया था, उन्हें भी अब रद्द मान लिया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन देशों के विद्यार्थियों के परिणाम किस आधार पर घोषित किए जाएंगे, इस पर विचार करने के उपरांत यह जानकारी अलग से जारी की जाएगी।परिणाम घोषित करने की प्रक्रिया और मूल्यांकन पद्धति के बारे में सीबीएसई जल्द ही विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर संयम भारद्वाज द्वारा जारी इस सर्कुलर के बाद मध्य पूर्व के इन देशों में पढ़ने वाले हजारों भारतीय विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बीच नई स्थिति को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि बोर्ड परिणाम घोषित करने के लिए कौन-सा तरीका अपनाता है। परीक्षा रद्द करने की आधिकारिक सूचना दूतावासों को भी दी गई है।इस संबंध में भारतीय दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को सूचना भेजी गई है। जिन देशों में स्थित दूतावासों को आधिकारिक सूचना दी गई है उनमें अबू धाबी स्थित भारतीय दूतावास, रियाद स्थित भारतीय दूतावास, मस्कट में भारतीय दूतावास, दोहा के भारतीय दूतावास, मनामा में भारतीय दूतावास, कुवैत सिटी स्थित भारतीय दूतावास, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास, दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास और दुबई स्थित केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का क्षेत्रीय कार्यालय शामिल है। -
नई दिल्ली। फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज – शिवालिक और नंदा देवी – लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गए। यह जहाज 16 और 17 मार्च को मुंद्रा बंदरगाह और कांदला बंदरगाह पर पहुँचेगा। शिवालिक और नंदा देवी के अलावा, भारत आने वाले कई अन्य जहाज खाड़ी क्षेत्र में स्टैंडबाय पर हैं और सुरक्षित तथा निर्बाध आवागमन सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
कल शनिवार को नई दिल्ली में चौथे अंतर-मंत्रालय संवाददाता सम्मेलन में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूदा समुद्री परिस्थितियों और इस क्षेत्र में कार्यरत भारतीय नाविकों तथा जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में मीडिया को जानकारी दी। इस दौरान, बताया गया कि पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई नई समुद्री दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं।वर्तमान में फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय ध्वज वाले 22 जहाज हैं जिनमें 611 नाविक सवार हैं। पोत परिवहन महानिदेशालय जहाज मालिकों, आरपीएसएल एजेंसियों और भारतीय दूतावासों के साथ मिलकर स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है। पिछले 24 घंटों में, पोत परिवहन महानिदेशालय के नियंत्रण कक्ष ने नाविकों, उनके परिवारों और समुद्री क्षेत्र से जुड़े हितधारकों से लगभग 312 कॉल और 460 ईमेल का जवाब दिया। पिछले 15 दिनों में, इसने 2,737 कॉल और 4,900 से अधिक ईमेल का जवाब दिया है।पोत परिवहन महानिदेशालय की त्वरित प्रतिक्रिया टीम चौबीसों घंटे सातों दिन कार्यरत है और पोत परिवहन कंपनियों, दूतावासों, विदेश मंत्रालय और पी एंड आई क्लब के बीमाकर्ताओं के साथ समन्वय स्थापित कर रही है। लगभग 1,300 नाविकों और उनके परिवारों की चिंताओं का समाधान किया जा चुका है। वहीं, पिछले 24 घंटों में, खाड़ी क्षेत्र के हवाई अड्डों और क्षेत्रीय स्थानों से 30 नाविकों को स्वदेश वापस लाया गया है, जिससे स्वदेश वापसी करने वालों की कुल संख्या 253 हो गई है।सरकार समुद्री व्यापार पर परिचालन संबंधी प्रभाव को कम करने के लिए बंदरगाहों, पोत परिवहन लाइनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रही है। बंदरगाहों को लंगरगाह, बर्थ किराया और भंडारण शुल्क में छूट जैसे राहत उपाय प्रदान करने का परामर्श दिया गया है। कुछ मामलों में पट्टे की अवधि भी बढ़ाई गई है, जिसमें कामराज बंदरगाह पर 25,000 मीट्रिक टन बैराइट्स कार्गो का पट्टा भी शामिल है।वहीं, ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रमुख बंदरगाह एलपीजी जहाजों को प्राथमिकता दे रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में छह एलपीजी जहाजों को प्रमुख बंदरगाहों पर जगह मिली है। बंदरगाह उन मालवाहक जहाजों के लिए सुरक्षित लंगरगाह क्षेत्र भी उपलब्ध करा रहे हैं जो खाड़ी की ओर जा रहे हैं और वर्तमान में वहां से गुजरने में असमर्थ हैं।मंत्रालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य समुद्री हितधारकों के समन्वय से स्थिति पर लगातार नजर रख रहा है। मंत्रालय ने कहा- संघर्ष शुरू होने के बाद से, भारत लगातार तनाव कम करने और संवाद के माध्यम से मुद्दों के समाधान का आह्वान करता रहा है। भारत ने माल और ईंधन के निर्बाध परिवहन को सुनिश्चित करने और ऊर्जा सुविधाओं सहित नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों से बचने के महत्व पर जोर दिया है।भारत ने खाडी सहयोग परिषद (जीसीसी) देशों, ईरान, अमेरिका और इज़राइल सहित प्रमुख हितधारकों के साथ राजनीतिक और राजनयिक स्तर पर घनिष्ठ संपर्क बनाए रखा है। प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री और भारतीय मिशन ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षित समुद्री आवागमन सहित भारत की प्राथमिकताओं को रेखांकित करने के लिए अपने समकक्षों के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रहे हैं।इसके साथ ही, संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान के मद्देनज़र, ईरानी अधिकारियों ने फंसे हुए ईरानी नागरिकों को वापस लाने के लिए कल रात कोच्चि से एक चार्टर्ड उड़ान की व्यवस्था की। इस उड़ान में 107 चालक दल के सदस्य, 35 ईरानी पर्यटक, 3 राजनयिक और जहाज आईरिस लावन के गैर-आवश्यक चालक दल के सदस्य सवार थे। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को कांग्रेस पार्टी पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने राज्य में अपने 15 साल के कार्यकाल के दौरान असम के स्वास्थ्य बजट से हर साल लगभग 150 करोड़ रुपए का गबन किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार ने सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था को बुरी तरह से कमजोर कर दिया है।
गुवाहाटी में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि एक दशक पहले असम में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खराब थी। उन्होंने इसके लिए कांग्रेस शासन के दौरान हुए कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासन के दौरान, स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के लिए आवंटित धन को कथित तौर पर नेताओं और उनके परिवारों के फायदे के लिए इस्तेमाल किया गया, जिससे अस्पताल और चिकित्सा बुनियादी ढांचा कमजोर स्थिति में पहुंच गया।अमित शाह ने कहा कि लगभग 10 साल पहले, असम में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई थी। कांग्रेस सरकार लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के बजाय अपने नेताओं के परिवारों की आर्थिक भलाई को लेकर अधिक चिंतित थी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें समाज के सभी वर्गों के लिए सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की प्रशंसा करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले कुछ वर्षों में राज्य के स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि असम की चिकित्सा सुविधाएं अब तेजी से गुजरात, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे अधिक विकसित राज्यों के मानकों के बराबर पहुंच रही हैं।गृह मंत्री शाह के अनुसार, रविवार को शुरू की गई परियोजनाएं राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की डिलीवरी को और मजबूत करेंगी और लोगों, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वालों के लिए गुणवत्तापूर्ण इलाज तक पहुंच को बेहतर बनाएंगी।गृह मंत्री ने आगे कहा कि केंद्र और असम सरकार मिलकर मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार करने, नई सुविधाएं स्थापित करने और मौजूदा अस्पतालों को अपग्रेड करने पर काम कर रहे हैं, ताकि लोगों को अब बेहतर इलाज के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। उन्होंने कहा कि सरकार एक मजबूत हेल्थकेयर सिस्टम बनाने पर लगातार ध्यान दे रही है, जो हर नागरिक के लिए इलाज को किफायती और सुलभ बनाना सुनिश्चित करे। -
नई दिल्ली। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है। इन राज्यों के किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता नहीं होंगे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुताबिक, भीड़ और अव्यवस्था को रोकने के लिए यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी मतदान केंद्र पर 1200 से अधिक मतदाता न हों। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के बूथ मतदान केंद्र से कम से कम 100 मीटर की दूरी पर स्थापित किए जा सकेंगे। मतदाता सूचना पर्ची पर मतदान केंद्र का स्पष्ट नाम, संख्या, भाग संख्या और मतदाता का क्रमांक भी अंकित होगा।मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि पिछले 12 महीनों के दौरान चुनाव प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और मतदाताओं के लिए अधिक सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से 13 से अधिक नई पहलें शुरू की गई हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण पहल मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण है, जो संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुरूप यह सुनिश्चित करता है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक मतदान केंद्र पर शत-प्रतिशत वेब प्रसारण की व्यवस्था की जाएगी।प्रत्येक मतदान केंद्र के पीठासीन अधिकारी हर दो घंटे में डाले गए मतों की संख्या दर्ज करेंगे, जिससे मीडिया और जनता को प्राप्त होने वाला मतदान प्रतिशत लगभग सटीक रहेगा। मतदान समाप्त होने के बाद, अंतिम आंकड़ों के अनुसार मतदान प्रतिशत तुरंत प्रदर्शित किया जाएगा। एक नई व्यवस्था के तहत मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार के बाहर मतदाता अपने मोबाइल फोन जमा कर सकेंगे। मतदान कर बाहर आने के बाद वे अपना मोबाइल वापस प्राप्त कर सकेंगे। इससे मतदान केंद्र के भीतर अनुशासन और गोपनीयता सुनिश्चित होगी। मतदाताओं की सुविधा के लिए इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों पर सभी उम्मीदवारों के रंगीन चित्र भी प्रदर्शित किए जाएंगे ताकि मतदाता आसानी से अपनी पसंद के उम्मीदवार की पहचान कर सकें।चुनाव आयोग ने एक और महत्वपूर्ण पहल के रूप में सभी डिजिटल सेवाओं को एक ही मोबाइल अनुप्रयोग में एकीकृत किया है, जिसे ‘ईसीआई नेट’ नाम दिया गया है। इस एकीकृत अनुप्रयोग में लगभग 40 विभिन्न सेवाएं शामिल हैं। इसके माध्यम से मतदाता अपने पहचान पत्र, मतदान केंद्र की जानकारी, उम्मीदवारों का विवरण, उम्मीदवारों के शपथपत्र, मतदान की प्रगति और मतगणना से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।आयोग ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों के बारे में जागरूकता और प्रशिक्षण के लिए देशभर में बड़े पैमाने पर अभ्यास कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस अभियान में 35 लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से भाग लिया। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक मतदाता मतदान प्रक्रिया को समझ सके और बिना किसी कठिनाई के अपना मत दे सके। मतदान केंद्रों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए चुनाव आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रत्येक मतदान केंद्र पर पेयजल, शौचालय, स्पष्ट संकेत पट्ट, रैंप, व्हीलचेयर, वॉलेंटियर्स, सहायता काउंटर, मतदाता सहायता केंद्र और पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाएगी।मतदान कक्ष के अंदर भी पर्याप्त रोशनी और बाहर छाया की व्यवस्था की जाएगी ताकि मतदाताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। चुनाव के लिए वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष व्यवस्थाएं की जाएंगी। मतदान केंद्र भूतल पर बनाए जाएंगे, और वहां रैंप की सुविधा उपलब्ध होगी। वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांग मतदाताओं को मतदान में प्राथमिकता दी जाएगी। उनके बैठने के लिए विशेष रूप से बेंच लगाए जाएंगे। आवश्यकता पड़ने पर वे घर से मतदान करने के लिए भी आवेदन कर सकेंगे, तथा उनके लिए परिवहन की पर्याप्त व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी।मतदाता पहचान और सुविधा के लिए सभी बूथस्तर अधिकारियों को पहचान पत्र भी प्रदान किए गए हैं, ताकि नागरिक उन्हें आसानी से पहचान सकें। इसके साथ ही चुनावी कर्मचारियों के कठिन परिश्रम को देखते हुए उनके मानदेय में भी वृद्धि की गई है। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है कि डाक मतपत्रों की गणना इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों की गणना से दो चरण पहले की जाएगी। इसके अतिरिक्त चुनाव से संबंधित सभी सांख्यिकीय आंकड़े मतगणना समाप्त होने के 72 घंटे के भीतर उपलब्ध करा दिए जाएंगे।चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि इन सभी व्यवस्थाओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश के प्रत्येक मतदाता को स्वतंत्र, निष्पक्ष, पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण में मतदान करने का अवसर मिले और लोकतंत्र का यह महोत्सव पूरी गरिमा और उत्साह के साथ संपन्न हो। ( - जम्मू. केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने शनिवार को कहा कि ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वैश्विक पहुंच ने भारत को अपनी ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित रखने में मदद की। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति के कारण कई देशों को एलपीजी और गैस की आपूर्ति या तो कम कर दी गई या पूरी तरह रोक दी गई, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। सिंह ने कहा, "यह हमारे लिए गर्व की बात है कि हमारे प्रधानमंत्री की विश्व भर में इतनी प्रतिष्ठा और सम्मान है कि कोई भी उनकी बात को अनसुना नहीं करता।" उन्होंने कहा, "आज भी, जब कई अन्य देशों को गैस की आपूर्ति रोक दी गई है, तो मोदी के सिर्फ एक फोन के बाद ही हमारे जहाज वहां (होर्मुज जलडमरूमध्य) से रवाना हो चुके हैं।" सिंह ने यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी के हस्तक्षेप के बाद वहां फंसे भारतीय छात्रों को सुरक्षित निकालने में मदद मिली थी। खाड़ी देशों से शनिवार तड़के एलपीजी लेकर आ रहे दो भारतीय जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरे, जिससे युद्धग्रस्त और संकरे जलमार्ग से सुरक्षित रूप से गुजरने वाले भारतीय जहाजों की संख्या बढ़कर तीन हो गई है। जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में शेष 22 जहाज प्रतीक्षा में हैं क्योंकि भारत सरकार क्षेत्र की सरकारों के साथ उनकी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए बातचीत कर रही है।
- नयी दिल्ली. भारत ने अफगान क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की शनिवार को निंदा की और कहा कि अफगानिस्तान की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "भारत अफगानिस्तान के क्षेत्र में पाकिस्तान के हवाई हमलों की निंदा करता है, जिनके कारण कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक बुनियादी ढांचे को नुकसान हुआ है।" उन्होंने कहा, "यह पाकिस्तानी सेना की ओर से की गई उकसावे की एक और कार्रवाई है, जो अफगानिस्तान की संप्रभुता के विचार के खिलाफ रही है।" जायसवाल ने अफगानिस्तान पर पाकिस्तान के हवाई हमले के बारे में पूछे गए सवाल के जवाब में यह बात कही।उन्होंने कहा, "भारत एक बार फिर यह दोहराता है कि अफगानिस्तान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का पूरी तरह सम्मान किया जाना चाहिए।" पाकिस्तानी सेना ने हालिया कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान में हवाई हमले किए हैं।
- नयी दिल्ली. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के मद्देनजर, भारत ने शनिवार को कहा कि वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए खाड़ी सहयोग परिषद, ईरान, अमेरिका और इजराइल सहित सभी प्रमुख पक्षों के साथ संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि संवाद और कूटनीति की वकालत करने के साथ ही भारत ने लगातार इस क्षेत्र से माल और ऊर्जा आपूर्ति के निर्बाध पारगमन को सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव असीम महाजन ने बताया कि मौजूदा संघर्ष में पांच भारतीय नागरिकों की जान चली गई है और एक लापता है। उन्होंने कहा कि 28 फरवरी को शुरू हुए संघर्ष के बाद से लगभग 1,72,000 भारतीय भारत लौट चुके हैं। जायसवाल ने प्रेस वार्ता में कहा, ''हमने पूरे क्षेत्र में ऊर्जा अवसंरचना सहित नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने से बचने का भी आह्वान किया है। हमारा मानना है कि ये वैश्विक समुदाय के एक बड़े हिस्से की प्राथमिकताएं हैं क्योंकि संघर्ष का प्रभाव वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है।'' ईरान द्वारा फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच स्थित एक संकरे समुद्री परिवहन मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को लगभग अवरुद्ध कर दिए जाने के बाद वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है। वैश्विक तेल और एलएनजी (द्रवीकृत प्राकृतिक गैस) का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इस मार्ग से होकर गुजरता है। उन्होंने कहा, ''हम खाड़ी सहयोग परिषद के सभी सदस्यों के अलावा ईरान, अमेरिका और इजराइल सहित सभी महत्वपूर्ण वार्ताकारों के साथ विभिन्न राजनीतिक एवं राजनयिक स्तरों पर संपर्क में हैं, ताकि उनके साथ अपनी प्राथमिकताओं, विशेष रूप से हमारी ऊर्जा सुरक्षा से संबंधित मुद्दों पर चर्चा कर सकें।''
- नयी दिल्ली. पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने शनिवार को कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों को मौजूदा सुरक्षा खतरे से निपटने और भविष्य की चुनौतियों का अनुमान लगाने में सक्षम होना चाहिए, तथा ऐसी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए जो उन्हें ''भविष्य के युद्धों को प्रभावी ढंग से लड़ने'' में सक्षम बनाती हों। उन्होंने यहां एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में यह भी कहा कि जहां राष्ट्रीय हित शामिल होते हैं, वहां ''हम सैन्य बल या सैन्य शक्ति की प्रधानता देखते हैं''। पूर्व सेना प्रमुख जनरल ने रूस-यूक्रेन के लंबे युद्ध और अमेरिका, इजराइल व ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया संघर्ष के उदाहरण दिए। जनरल पांडे ने अप्रैल 2022 से जून 2024 तक थलसेना के 29वें प्रमुख के रूप में कार्य किया।उनके कार्यकाल में सेना ने उच्च स्तर की युद्ध तत्परता और आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की योजनाओं पर जोर दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली मराठी प्रतिष्ठान द्वारा दिल्ली के डॉ. आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में किया गया। पूर्व सेना प्रमुख ने कहा, ''हम एक बेहद जटिल दुनिया में रह रहे हैं... न केवल मौजूदा सुरक्षा खतरों से निपटना है, बल्कि भविष्य में आने वाली चुनौतियों का अनुमान भी लगाना है। एक बार अनुमान लगा लेने के बाद, आपको उसी के अनुसार खुद को तैयार करना होगा।'' उन्होंने कहा, ''आपके पास वे क्षमताएं होनी चाहिए जो आपको भविष्य के युद्धों से प्रभावी ढंग से लड़ने में सक्षम बनाएंगी। इसलिए सशस्त्र बलों को भविष्य के लिए तैयार रहना होगा।''
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (रासुका) के तहत उपलब्ध शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है। एक आधिकारिक बयान में शनिवार को यह जानकारी दी गई है। लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर लेह में हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद, 26 सितंबर 2025 को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। उन्हें लेह के जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर ''जनव्यवस्था बनाए रखने'' के लिए रासुका के तहत हिरासत में लिया गया और फिर जोधपुर जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। बयान में कहा गया है कि वांगचुक पहले ही रासुका के तहत हिरासत की अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर चुके हैं। इसमें कहा गया है, ''सरकार लद्दाख के विभिन्न हितधारकों और सामुदायिक नेताओं के साथ सक्रिय रूप से बातचीत कर रही है ताकि इस क्षेत्र के लोगों की चिंताओं का समाधान किया जा सके।
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नयी दिल्ली. खाड़ी देशों से एलपीजी लेकर आ रहे भारतीय ध्वज वाले दो जहाज शनिवार सुबह युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर गए। जहाजरानी मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी। जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने प्रेसवार्ता में बताया कि एलपीजी ला रहे जहाज 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' अब गुजरात के मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि ये जहाज 92,700 टन एलपीजी ला रहे हैं, और इनके 16-17 मार्च को भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचने की संभावना है। ये दोनों पोत उन 24 जहाजों में शामिल थे, जो क्षेत्र में युद्ध शुरू होने के बाद से होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिमी किनारे पर फंसे हुए थे।
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गुवाहाटी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह असम विधानसभा चुनाव से पहले शनिवार को दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचे। शाह इस दौरान एक आधिकारिक कार्यक्रम में शामिल होंगे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की युवा शाखा की रैली को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर शाह का स्वागत किया। शर्मा ने एक पोस्ट में कहा, "मां कामाख्या की धरती पर आदरणीय अमित शाह का हार्दिक स्वागत है। आदरणीय गृह मंत्री विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन करेंगे और अपने ज्ञानवर्धक शब्दों से हमारी युवा शक्ति का उत्साह बढ़ाएंगे।" पार्टी के एक पदाधिकारी ने बताया कि शाह शहर के कैनाधारा राजकीय अतिथि गृह में ठहरेंगे।
भाजपा की असम इकाई के मीडिया संयोजक ध्रुबज्योति मारल ने बताया, "वह (शाह) पार्टी पदाधिकारियों से मुलाकात कर आगामी विधानसभा चुनावों की रणनीतियों पर चर्चा करेंगे। अभी कोई कार्यक्रम तय नहीं है, लेकिन हम उनके मार्गदर्शन की प्रतीक्षा कर रहे हैं।" शाह रविवार सुबह कालापहाड़ क्षेत्र स्थित 'प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल' (पीएमसीएच) का उद्घाटन करेंगे। प्राग्ज्योतिषपुर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के दो परिसर हैं, एक पानबाजार में और दूसरा कालापहाड़ में। यह गुवाहाटी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के बाद राज्य की राजधानी में दूसरा ऐसा संस्थान होगा। उन्होंने बताया कि शाह युवाओं को प्रेरित करने के लिए उन्हें संबोधित करेंगे।
भाजपा की असम इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने 'एक्स' पर कहा, "माननीय केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा कल (रविवार को) संबोधित किए जाने वाले 'युवा शक्ति समारोह' की तैयारियों की समीक्षा की गई, जिसमें एक लाख से अधिक युवाओं के भाग लेने की उम्मीद है। यह विकसित और आत्मनिर्भर असम की दिशा में एक बड़ा कदम है।" एक अधिकारी ने बताया कि युवा सम्मेलन के बाद शाह राज्य से रवाना होंगे।
असम विधानसभा की 126 सीट के लिए अप्रैल में चुनाव होने की उम्मीद है और भाजपा के नेतृत्व वाला गठबंधन लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहा है। वर्ष 2023 में हुई परिसीमन प्रक्रिया के बाद असम में यह पहला विधानसभा चुनाव होगा। -
वाराणसी (उप्र). भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यह स्वीकार किया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद सामने आया था। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। एएसआई महानिदेशक वाई. एस. रावत ने कहा कि सारनाथ में सबसे पहले खुदाई का काम जगत सिंह ने कराया था, जिसके कारण इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व का पता चला। रावत ने बताया कि जगत सिंह के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने एएसआई को साक्ष्यों के दस्तावेज सौंपे थे, जिनसे यह साबित होता है कि इस स्थल पर पहली खुदाई जगत सिंह ने ही कराई थी। वाराणसी से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित सारनाथ दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बौद्ध तीर्थ स्थलों में से एक है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश दिया था, फलस्वरूप बौद्ध धर्म के प्रसार की शुरुआत हुई। प्रदीप नारायण सिंह ने बताया कि सारनाथ का इलाका कभी उनके परिवार की ज़मींदारी के अंतर्गत आता था और ऐतिहासिक रिकॉर्ड से पता चलता है कि बाबू जगत सिंह ने 1787-88 में वहां खुदाई का काम करवाया था।
उन्होंने कहा, ''जगत सिंह ने उस इलाके में कुछ खुदाई का काम कराया था, जिसके परिणामस्वरूप अंततः इस स्थल की खोज हुई।'' रावत ने कहा कि सारनाथ परिसर में लगी पट्टिका (शिलालेख) में अब संशोधन कर दिया गया है, जिसमें जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देते हुए उनका नाम भी शामिल किया गया है। यह संशोधन हाल में सारनाथ परिसर में लगाई गई नई पट्टिका में देखा जा सकता है। जहां पहले वाली पट्टिका में इस स्थल के पुरातात्विक महत्व की पहली खोज का श्रेय 1798 में ब्रिटिश अधिकारियों को दिया गया था, वहीं नई पट्टिका में यह बताया गया है कि इस स्थल का महत्व 18वीं सदी के आखिर में तब सामने आया, जब काशी के बाबू जगत सिंह ने निर्माण सामग्री के लिए एक प्राचीन टीले की खुदाई कराई थी, फलस्वरूप कई महत्वपूर्ण पुरावशेषों की खोज हुई। इस तरह, संशोधित शिलालेख इस जगह पर शुरुआती खुदाई के काम में जगत सिंह की भूमिका को मान्यता देता है।
साथ ही, वह यह भी बताता है कि कई पुरातत्वविदों ने बाद में खुदाई की, जिसमें तीसरी सदी ईसा पूर्व से लेकर 12वीं सदी ईस्वी तक के मठ, स्तूप, मंदिर और मूर्तियां मिलीं। वाराणसी के जगतगंज शाही परिवार के प्रतिनिधि और बाबू जगत सिंह के छठी पीढ़ी के वंशज प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि उनके पूर्वज के ऐतिहासिक योगदान के बारे में शोध और दस्तावेज़ी सबूत इकट्ठा करने की कोशिशें लंबे समय से चल रही थीं। उन्होंने कहा, ''अब एएसआई ने औपचारिक रूप से यह मान लिया है कि सारनाथ का इतिहास सबसे पहले बाबू जगत सिंह द्वारा कराई गई खुदाई के बाद ही सामने आया था।'' प्रदीप नारायण सिंह ने कहा कि लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि सारनाथ और उसके प्राचीन अवशेषों की खोज अंग्रेजों ने की थी, लेकिन एएसआई की इस मान्यता से यह साफ़ हो गया है कि जगत सिंह ने उनसे पहले ही यह काम कर लिया था। प्रदीप नारायण सिंह के अनुसार एएसआई की यह मान्यता इस बात का भी संकेत है कि ब्रिटिश काल के दौरान बाबू जगत सिंह के योगदान को नजरअंदाज कर दिया गया था और उन्हें सारनाथ की खोज का सही श्रेय नहीं मिला था। -
नयी दिल्ली. उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 17 मार्च से औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947 के तहत 'उद्योग' शब्द की परिभाषा के विवादास्पद मुद्दे पर सुनवाई शुरू करने वाली है। न्यायालय की 17 मार्च की कार्यसूची के अनुसार, इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की पीठ करेगी। इस पीठ में न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना, न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा, न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूयान, न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति जोयमाल्य बागची, न्यायमूर्ति आलोक अराधे और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली शामिल हैं। इससे पहले 16 फरवरी को न्यायालय ने उन व्यापक मुद्दों को तैयार किया था, जिन पर इस पीठ को निर्णय लेना है। देश की सर्वोच्च न्यायालय को विचार करना है कि क्या 1978 के बेंगलुरु वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड मामले में न्यायमूर्ति वी आर कृष्णा अय्यर द्वारा 'उद्योग' को परिभाषित करने के लिए तय किए गए मानक सही हैं? साथ ही, पीठ यह भी देखेगी कि औद्योगिक विवाद (संशोधन) अधिनियम, 1982 और औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 (जो 21 नवंबर, 2025 से प्रभावी है) का मूल अधिनियम में 'उद्योग' शब्द की व्याख्या पर क्या कानूनी प्रभाव पड़ता है। पीठ द्वारा तय किए गए मुख्य मुद्दों में से एक यह है कि क्या सरकारी विभागों द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कल्याण कार्यों, योजनाओं या अन्य उद्यमों को औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 2(जे) के तहत ''औद्योगिक गतिविधियां'' माना जा सकता है। अदालत ने संबंधित पक्षों को 28 फरवरी तक अपनी लिखित दलीलें देने का मौका दिया था। नौ न्यायाधीशों की यह पीठ 17 मार्च को सुनवाई शुरू करेगी और इसे 18 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उल्लेखनीय है कि 2017 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश टी एस ठाकुर की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने इस मुद्दे के गंभीर और व्यापक प्रभावों को देखते हुए इसे नौ न्यायाधीशों की पीठ को भेजने का निर्णय लिया था। इससे पहले मई 2005 में भी एक पांच न्यायाधीशों की पीठ ने इस मामले को बड़ी पीठ के पास भेज दिया था। यह कानूनी विवाद दशकों पुराना है। वर्ष 1996 में तीन न्यायाधीशों की पीठ ने सामाजिक वानिकी विभाग को 'उद्योग' माना था, लेकिन 2001 में दो न्यायाधीशों की पीठ ने अलग राय व्यक्त की, जिसके बाद मामला बड़ी पीठों के पास पहुंचता गया।
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नई दिल्ली। महाराष्ट्र राज्य के कृषि विभाग ने शुक्रवार को किसानों और नागरिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की है। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में 17 से 20 मार्च के बीच अशांत मौसम की आशंका जताई है। मौसम विभाग के मुताबिक, राज्य के कई हिस्सों में, खासकर दोपहर के समय, बादल छाए रहने की संभावना है। इसमें विदर्भ, मराठवाड़ा, खानदेश और मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।
कृषि विभाग ने इन क्षेत्रों में आंधी-तूफान, बिजली गिरने और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में ओलावृष्टि की भी प्रबल संभावना है। मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, इन मौसम संबंधी घटनाओं की तीव्रता 18 मार्च से 20 मार्च के बीच पहुंचने की आशंका है।विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को सुरक्षित भंडारण में ले जाएं या उन्हें बारिश और हवा से बचाने के लिए जलरोधी सामग्री से अच्छी तरह ढक दें। कृषि गतिविधियों की योजना बनाते समय स्थानीय मौसम की दैनिक जानकारी पर बारीकी से नज़र रखें। संभावित ओलावृष्टि और तेज हवाओं से खड़ी फसलों को बचाने के लिए एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए।कृषि विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “बिजली गिरने और तेज हवाओं के पूर्वानुमान को देखते हुए, हम सभी किसानों से अपील करते हैं कि वे अपनी फसलों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और मौसम संबंधी नवीनतम सूचनाओं के प्रति सतर्क रहें।”अधिकारी के अनुसार, यह मौसम पैटर्न महाराष्ट्र में मानसून पूर्व संक्रमण काल की विशेषता है। मार्च के मध्य में, भूभाग पर बढ़ती गर्मी अक्सर स्थानीय वायुमंडलीय अस्थिरता का कारण बनती है। जब बंगाल की खाड़ी या अरब सागर से आने वाली नमी से भरी हवाएं इस शुष्क गर्मी से टकराती हैं, तो संवहनी बादलों का निर्माण होता है, जिससे रिपोर्ट में उल्लेखित “दोपहर की आंधी” आती है।उन्होंने कहा, “किसानों के लिए यह एक महत्वपूर्ण समय है क्योंकि गेहूं, चना और विभिन्न फलों जैसी फसलें या तो कटाई के लिए तैयार हैं या खुले खेतों में पड़ी हैं।”अधिकारी ने आगे सलाह दी कि किसानों को कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित, ढके हुए भंडारण क्षेत्र या गोदाम में ले जाना चाहिए। यदि आंतरिक भंडारण उपलब्ध नहीं है, तो फसलों की सुरक्षा के लिए प्लास्टिक की चादरें या तिरपाल का उपयोग करना चाहिए। भौतिक क्षति को कम करने के लिए उच्च मूल्य वाले बागों पर ओलावृष्टि से बचाव के जाल लगाने चाहिए। ओले पिघलने के बाद जलभराव को रोकने के लिए खेतों में उचित जल निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए और पशुओं को मजबूत शेड में सुरक्षित रखना चाहिए तथा जानवरों को पेड़ों के नीचे रखने से बचना चाहिए।बता दें कि रबी की फसल की कटाई इस समय चल रही है, ऐसे में कृषि विभाग ने किसानों से संभावित नुकसान को कम करने के लिए फसल संरक्षण, योजना और सुरक्षा सहित तत्काल एहतियाती उपाय करने का आग्रह किया है। -
नई दिल्ली। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने शुक्रवार को संकेत दिया कि मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट से भारतीय जहाजों को जल्द ही सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जा सकती है। राजदूत फतहली ने कहा कि भारत और ईरान क्षेत्र में साझा हित रखते हैं। उन्होंने कहा, “भारत हमारा मित्र देश है। आप इसे दो-तीन घंटों के भीतर देखेंगे। हमारा मानना है कि ईरान और भारत के क्षेत्र में समान हित हैं।”
उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध के बाद मौजूदा हालात में भारत सरकार ने कई क्षेत्रों में ईरान की मदद की है।राजदूत का यह बयान उस वक्त आया है जब एक दिन पहले ईरान के उप विदेश मंत्री मजीद तख्त-रवांची ने कहा था कि तेहरान ने कुछ देशों के जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की अनुमति दी है।तख्त-रवांची ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान द्वारा जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगें बिछाने के आरोप सही नहीं हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान यह मार्ग बंद था। उन्होंने कहा कि ईरान दुश्मन देशों को इस स्ट्रेट का इस्तेमाल नहीं करने देगा। उनके मुताबिक, जो देश ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई में शामिल रहे हैं, उन्हें इस मार्ग से सुरक्षित आवाजाही का लाभ नहीं दिया जाएगा।बता दें कि होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इधर, भारत के पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में भारतीय झंडे वाले जहाजों की संख्या 28 बनी हुई है और सभी जहाजों तथा उनके चालक दल की सुरक्षा पर नजर रखी जा रही है।इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 भारतीय नाविक सवार हैं, जबकि चार जहाज जलडमरूमध्य के पूर्व में हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक मौजूद हैं। मंत्रालय के अनुसार, संबंधित प्राधिकरण, जहाज प्रबंधक और भर्ती एजेंसियां भारतीय दूतावासों और स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहे हैं तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है।इसके साथ ही डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग द्वारा 28 फरवरी 2026 को जारी सुरक्षा संबंधी सलाह अभी भी लागू है। मंत्रालय ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र की समुद्री स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और परिस्थितियों को देखते हुए निगरानी व तैयारी के उपाय और मजबूत किए गए हैं। -
नई दिल्ली। स्कूल शिक्षा मंत्री दादाजी भुसे ने शुक्रवार को विधानसभा को सूचित किया कि महाराष्ट्र के सभी माध्यमों और सभी प्रबंधन बोर्डों के स्कूलों में मराठी भाषा को अनिवार्य विषय बनाने के लिए अधिसूचना लागू कर दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि इस नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वे इस मुद्दे पर सदस्य हारून खान द्वारा उठाए गए एक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे।
मंत्री भुसे ने कहा कि 1 मार्च, 2020 की अधिसूचना के अनुसार, शिक्षा का माध्यम या प्रबंधन बोर्ड कोई भी हो, मराठी सभी स्कूलों में अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय पाठ्यक्रम का पालन करने वाले विद्यालयों में भी, मराठी को ‘द्वितीय भाषा’ या ‘तृतीय भाषा’ के रूप में पढ़ाया जाना अनिवार्य है। किसी भी परिस्थिति में मराठी को हटाया नहीं जा सकता।विधायक हारून खान की विशेष शिकायत के बाद, मंत्री ने घोषणा की कि शिक्षा विभाग संबंधित विद्यालय का तत्काल निरीक्षण करेगा। उन्होंने आगे कहा कि यदि मराठी नहीं पढ़ाई जा रही है, तो प्रबंधन को कानूनी आवश्यकताओं से अवगत कराने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यह नियम सरकारी, निजी, गैर-सरकारी और सभी विदेशी बोर्ड स्कूलों पर लागू होता है।मंत्री ने कहा कि चूंकि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है, इसलिए सरकार यह सुनिश्चित करने में कोई समझौता नहीं करेगी कि नई पीढ़ी इसे सीखे। नियमों का पालन न करने वाले संस्थानों को पहले चेतावनी दी जाएगी, और लगातार उल्लंघन करने पर स्कूल की मान्यता रद्द कर दी जाएगी।इस बीच, मंत्री भुसे ने घोषणा की कि तीन से छह वर्ष की आयु के बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित पूर्व-प्राथमिक शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए, निजी पूर्व-प्राथमिक स्कूलों के अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण, विनियमन और गुणवत्ता आश्वासन के लिए कानून लाने की प्रक्रिया चल रही है।निजी पूर्व-प्राथमिक विद्यालयों के लिए अनिवार्य पोर्टल पंजीकरण का मुद्दा सदस्य मनीषा चौधरी ने उठाया। राज्य, जिला प्रशासन और अभिभावकों के लिए एक केंद्रीकृत डेटाबेस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से, 24 अप्रैल, 2025 के सरकारी परिपत्र के माध्यम से ‘पूर्व-विद्यालय पंजीकरण पोर्टल’ पर पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया था। मंत्री के अनुसार, विद्यालयों से स्थान, कक्षाओं की संख्या, प्रबंधन, छात्र संख्या, बुनियादी ढांचा, खेल का मैदान, स्वच्छता, पेयजल, सीसीटीवी और कर्मचारियों से संबंधित विवरण प्रदान करने की अपेक्षा की जाती है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से असम के कोकराझार में विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी। पीएम ने कहा कि खराब मौसम के कारण वे स्वयं कोकराझार नहीं आ सके और उन्होंने उपस्थित नागरिकों से इसके लिए क्षमा मांगी। पीएम मोदी ने बताया कि वे गुवाहाटी से संवाद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे बोडोफा उपेंद्रनाथ ब्रह्मा और रूपनाथ ब्रह्मा जैसे महान व्यक्तित्वों को नमन करते हैं। पीएम ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का आना उनके प्रति एक ऋण है, जिसे वे समर्पित सेवा और क्षेत्रीय विकास के माध्यम से चुकाना चाहते हैं। पीएम मोदी ने कहा, “आपकी सेवा और इस क्षेत्र के विकास के माध्यम से इस ऋण को चुकाना हमेशा से मेरा प्रयास रहा है।”
पीएम ने कहा कि गुवाहाटी की अपनी पिछली यात्रा के दौरान उन्हें बागुरुम्बा दहौ उत्सव में जीवंत बोडो संस्कृति का अनुभव करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। पीएम मोदी ने कहा कि बोडो समुदाय अपनी भाषा, विरासत और परंपराओं को सावधानीपूर्वक संरक्षित करने के लिए अपार प्रशंसा का पात्र है। श्री मोदी ने कहा कि बाथौ जैसी आध्यात्मिक प्रथाएं और बैसागु जैसे त्योहार भारत की समग्र सांस्कृतिक शक्ति को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि “ये परंपराएं भारत की सांस्कृतिक शक्ति को सुदृढ़ करती हैं”।प्रधानमंत्री ने कहा कि दोहरी इंजन वाली सरकार असम की विरासत को संरक्षित करने और इसकी तीव्र प्रगति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि चालू कार्यक्रम के दौरान 4,500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और आरंभ किया गया। पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि बोडोलैंड में सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाने के लिए विशेष रूप से 1,100 करोड़ रुपये से अधिक आवंटित किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि असम माला अभियान का तीसरा चरण राज्य भर में कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। श्री मोदी ने कहा, “इन पहलों के माध्यम से असम की सड़क कनेक्टिविटी और भी मजबूत होगी।”प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने हाल ही में क्षेत्रीय परिवहन को बढ़ावा देने के लिए कामाख्या-चारलापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और गुवाहाटी-न्यू जलपाईगुड़ी एक्सप्रेस को झंडी दिखाकर रवाना किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि ये परिवहन परियोजनाएं जनता को आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के साथ-साथ व्यापार और पर्यटन को भी बढ़ावा देंगी। श्री मोदी ने कहा कि बेहतर व्यवस्था से किसानों को बड़े बाजारों तक सुगम पहुंच मिलेगी और वे सशक्त बन सकेंगे। प्रधानमंत्री ने इन परिवर्तनकारी विकास कार्यों के शुभारंभ पर नागरिकों को बधाई दी। श्री मोदी ने कहा, “ये परियोजनाएं सुनिश्चित करेंगी कि किसानों की उपज सरलता से प्रमुख बाजारों तक पहुंचे।”प्रधानमंत्री ने कहा कि कोकराझार और आसपास के क्षेत्रों ने पिछले कई दशकों में भारी पीड़ा और नुकसान झेला है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय ऐसा था जब पहाड़ियों में केवल हिंसा और हथियारों की आवाजें गूंजती थीं। पीएम मोदी ने कहा कि अब वातावरण में सद्भाव आ गया है और ‘खाम’ और ‘सिफुंग’ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर ध्वनि हवा में गूंज रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि बोडोलैंड और असम वर्तमान में शांति और समृद्धि का एक नया अध्याय लिख रहे हैं। श्री मोदी ने कहा, “आज बोडोलैंड शांति और विकास के पथ पर चल पड़ा है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए बीटीआर क्षेत्र में छह महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं की आधारशिला आज रखी गई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि रेल संपर्क को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं, जिनमें एक रेलवे कार्यशाला की स्थापना भी शामिल है। श्री मोदी ने कहा कि भूटान के लिए आगामी रेल संपर्क और विभिन्न स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यह क्षेत्र एक प्रमुख लॉजिस्टिक्स केंद्र बन जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि कोकराझार में वंदे भारत और राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव इस क्षेत्र की बढ़ती प्रतिष्ठा का प्रतीक है। श्री मोदी ने बल देकर कहा, “इन परियोजनाओं के माध्यम से कोकराझार व्यापार का एक प्रमुख केंद्र बनने जा रहा है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि वे हाग्रामा मोहिलारी और हेमंत बिस्वा शर्मा के नेतृत्व वाली टीमों को विकास के प्रति उनके समर्पण के लिए हार्दिक बधाई देते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार स्थायी स्थिरता को प्राथमिकता देती है। श्री मोदी ने उल्लेख किया कि बोडो शांति समझौता एक ऐतिहासिक उपलब्धि थी जिसने सभी प्रमुख संगठनों को एक मंच पर एकजुट किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह समावेशी दृष्टिकोण अतीत की राजनीति से अलग था। श्री मोदी ने कहा, “हमने सभी को साथ लाकर स्थायी शांति के लिए ईमानदारी से प्रयास किए।”श्री मोदी ने कहा कि वर्तमान सरकार अपने वादों को पूरा करने में सदैव ही सफल रही है। उन्होंने छठी अनुसूची के तहत 2003 में गठित बीटीसी का उदाहरण दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बोडोलैंड विश्वविद्यालय और केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान जैसे संस्थान इस प्रतिबद्धता के प्रमाण हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “हमारी दोहरी इंजन वाली सरकार ने ईमानदारी से किए गए हर वादे को पूरा करने का प्रयास किया है।”प्रधानमंत्री ने कहा कि 2020 के बोडो समझौते के तहत किए गए सभी वादों को सरकार द्वारा व्यवस्थित रूप से पूरा किया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वादे के मुताबिक बोडो भाषा को सहयोगी राजभाषा का दर्जा दे दिया गया है। श्री मोदी ने बताया कि 1,500 करोड़ रुपये का विशेष विकास पैकेज लागू किया गया है और साथ ही नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना भी की गई है। प्रधानमंत्री ने कहा कि 10,000 पूर्व विद्रोहियों को मुख्यधारा में शामिल करना इस क्षेत्र के लिए एक बड़ी जीत है। श्री मोदी ने कहा, “हम युवाओं को मुख्यधारा में लाने के अपने हर वादे को पूरा कर रहे हैं।”प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बोडो समुदाय की आस्था और परंपराओं को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने का काम किया है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि बोडो की पारंपरिक आस्था, बाथू को उच्च सम्मान दिया गया है और उसे एक अलग जनगणना कोड भी दिया गया है। श्री मोदी ने कहा कि आध्यात्मिक महत्व के विभिन्न स्थलों के विकास और संरक्षण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस तरह के कदम जनजातीय आबादी की सांस्कृतिक पहचान के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “बोडो समाज की परंपराओं को अब राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिल रहा है।”प्रधानमंत्री ने मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व में अवैध कब्जेदारों से भूमि वापस लेने के लिए चलाए गए व्यापक अभियान पर संतोष व्यक्त किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने असम के मूल निवासियों को कानूनी भूमि स्वामित्व प्रदान करने में सफलता प्राप्त की है। श्री मोदी ने इस महत्वपूर्ण अभियान में जनजातीय समुदाय के सक्रिय सहयोग की सराहना की।प्रधानमंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर राज्य के सपने को साकार करने के लिए असम में विकास की गति को तीव्र करना आवश्यक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनता के निरंतर आशीर्वाद से ‘विकसित असम’ का संकल्प अवश्य पूरा होगा। श्री मोदी ने सभी नई परियोजनाओं की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त कीं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “जनता के आशीर्वाद से विकसित असम का संकल्प अवश्य पूरा होगा।” -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना की 22वीं किस्त जारी कर दी। इस किस्त के तहत देश भर के 9.3 करोड़ से अधिक किसान परिवारों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से 18,640 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि सीधे भेजी गई है। इस योजना के तहत पात्र किसानों को प्रत्येक किस्त में 2,000 रुपए की आर्थिक सहायता दी जाती है, जो सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर होती है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने असम के गुवाहाटी से इस किस्त को जारी किया। सरकार के अनुसार इस बार करीब 9.32 करोड़ किसान परिवारों को इसका लाभ मिला है। यह राशि सीधे किसानों के खातों में भेजी गई है, जिससे उन्हें खेती और घरेलू जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल सके।पीएम-किसान योजना का उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत किसानों को हर साल कुल 6,000 रुपए की सहायता दी जाती है, जो तीन समान किस्तों में सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाती है। सरकार का मानना है कि समय पर मिलने वाली यह राशि किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में मदद करती है।किस्त जारी होने के बाद किसानों के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर सरकार की ओर से संदेश भेजा जाता है। इसके अलावा बैंक की ओर से भी ट्रांजैक्शन से संबंधित मैसेज प्राप्त होता है। किसान अपने मोबाइल पर आए मैसेज के जरिए आसानी से यह जांच सकते हैं कि उनके खाते में 22वीं किस्त की राशि पहुंची है या नहीं।अगर किसी पात्र किसान के खाते में राशि नहीं पहुंचती है, तो वे योजना के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। किसान 155261 या 011-24300606 पर कॉल करके अपनी समस्या दर्ज करा सकते हैं। यह हेल्पलाइन सेवा कार्यदिवसों में सुबह 9:30 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध रहती है।गौरतलब है कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत 24 फरवरी 2019 को की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर से इस योजना का शुभारंभ किया था। तब से लेकर अब तक यह योजना देश के करोड़ों किसानों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है।इस संबंध में बीते दिनों केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि फरवरी 2019 में योजना शुरू होने के बाद से अब तक किसानों के खातों में 4.09 लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे ट्रांसफर की जा चुकी है। 22वीं किस्त जारी होने के बाद यह कुल राशि बढ़कर लगभग 4.27 लाख करोड़ रुपए से अधिक हो जाएगी।उन्होंने यह भी बताया कि इस बार की किस्त में 2.15 करोड़ से अधिक महिला किसानों को भी आर्थिक सहायता मिलेगी। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह पहल छोटे और सीमांत किसानों को सीधे आय सहायता प्रदान कर कृषि क्षेत्र में एक स्थायी और सकारात्मक बदलाव लाने का काम कर रही है। सरकार का मानना है कि नियमित आर्थिक सहायता से किसानों की वित्तीय स्थिति मजबूत होती है और खेती से जुड़ी जरूरी जरूरतों को समय पर पूरा करना आसान हो जाता है। -
नयी दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की केंद्रीय चुनाव समिति ने पश्चिम बंगाल और केरल में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों पर चर्चा करने के लिए बृहस्पतिवार एक बैठक आयोजित की। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आवास पर आयोजित बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जे पी नड्डा और भाजपा की चुनाव समिति के अन्य सदस्य उपस्थित थे। भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन ऐसी खबरें हैं कि बैठक में पश्चिम बंगाल की लगभग 160 विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की सूची पर व्यापक चर्चा हुई और लगभग 140 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों अंतिम रूप दिया गया। इससे पहले, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के नामों और पार्टी की रणनीति पर चर्चा करने के लिए नड्डा के आवास पर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में शाह, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी उपस्थित थे। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय चुनाव समिति पश्चिम बंगाल की शेष सीटों के लिए पार्टी उम्मीदवारों के नामों को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही फिर से बैठक करेगी। राज्य में विधानसभा की 294 सीटें हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा की चुनाव समिति की बैठक में केरल में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों और पार्टी के संभावित उम्मीदवारों पर भी विचार-विमर्श किया गया। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव अप्रैल में अलग-अलग तारीखों पर हो सकते हैं, जिसका कार्यक्रम जल्द ही घोषित होने की संभावना है।
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नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में रसोई गैस की स्थिति को लेकर दहशत फैलाने की कोशिश करने वालों पर निशाना साधते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि वे न केवल जनता के सामने खुद को बेनकाब कर रहे हैं बल्कि देश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं। यहां 'एनएक्सटी समिट' को संबोधित करते हुए मोदी ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा संकट से कोई भी देश अछूता नहीं है लेकिन भारत इस चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और देश की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चत करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग मौजूदा हालात का फायदा उठाकर कुछ उत्पादों की कालाबाजारी करने की कोशिश कर रहे हैं और चेतावनी दी कि ऐसे तत्वों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा, "मैं राज्य सरकारों से अनुरोध करता हूं कि वे ऐसे समय में कालाबाजारियों और जमाखोरों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाएं।" रसोई गैस के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान में एलपीजी को लेकर काफी चर्चा हो रही है, और कुछ लोग "अनावश्यक रूप से दहशत फैला रहे हैं।" मोदी ने कहा, ''मैं इस समय कोई राजनीतिक बयान देना नहीं चाहता। जो लोग दहशत फैला रहे हैं, वे न केवल जनता के सामने अपने इरादों को उजागर कर रहे हैं, बल्कि देश को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार कई मोर्चों पर सक्रिय रूप से काम कर रही है और पिछले कुछ दिनों में उन्होंने पश्चिम एशिया के घटनाक्रम के बारे में कई देशों के नेताओं से बात की है। उन्होंने कहा, "हम आपूर्ति शृंखला में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं।" उन्होंने कहा, "सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी कि किसानों और नागरिकों को वैश्विक चुनौतियों के बोझ से बचाया जा सके।" प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से उत्पन्न मौजूदा संकट से निपटने में हर किसी की महत्वपूर्ण भूमिका है- चाहे वह राजनीतिक दल हों, मीडिया हो, युवा हों, शहर हों या गांव हों। उन्होंने कहा कि हर कोई इस बात से भलीभांति अवगत है कि वैश्विक परिस्थितियां अचानक बदल सकती हैं, जैसा कि लोगों ने हाल के वर्षों में देखा है - चाहे वह कोविड-19 महामारी की शुरुआत हो, रूस-यूक्रेन संकट हो, या अब घर के करीब एक बड़े संघर्ष का बढ़ना हो। मोदी ने कहा, "इस युद्ध ने दुनिया को एक गंभीर ऊर्जा संकट में धकेल दिया है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में हमारी प्रतिक्रिया अत्यंत महत्वपूर्ण है। कठिन समय किसी भी राष्ट्र के लिए परीक्षा का काम करता है। हमें धैर्य और शांति के प्रति प्रतिबद्धता के साथ इन परिस्थितियों का सामना करना होगा।" मोदी ने कहा कि कई वैश्विक संकटों के बावजूद, विश्व नेता और विशेषज्ञ भारत की ओर बड़ी आशा से देखते हैं, जिससे भारत की जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा, ''आज पूरी दुनिया जानती है कि यदि आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना होगा और भारत में रहना होगा।'' उन्होंने कहा, ''हमारा एक ही लक्ष्य है, एक ही मंजिल है, और वो है विकसित भारत। भारत न केवल प्रगति कर रहा है, बल्कि अगले स्तर की ओर अग्रसर है।'' प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि विश्व एक कठिन दौर से गुजर रहा है, लेकिन भारत तेज और स्थिर गति से आगे बढ़ रहा है। मोदी ने कहा, ''कई वैश्विक नेता कह रहे हैं कि भारत पूरी दुनिया के लिए केंद्रबिंदु बनता जा रहा है।'' उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भारत ने ऊर्जा क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाया है, और पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने इथेनॉल और जैव ईंधन पर विशेष जोर दिया है। मोदी ने यह भी कहा कि 2014 तक देश में केवल 14 करोड़ एलपीजी कनेक्शन थे, जो अब दोगुने से भी अधिक बढ़कर 33 करोड़ हो गए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में सरकार ने एलपीजी बॉटलिंग क्षमता को दोगुना कर दिया है, जबकि वितरण केंद्रों की संख्या 13,000 से बढ़कर 25,000 हो गई है।


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