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नई दिल्ली। श्री अमरनाथ यात्रा के लिए जम्मू-कश्मीर में सभी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। आज बुधवार को जम्मू में यात्रियों के लिए मौके पर ही पंजीकरण और आरएफआईडी कार्ड जारी करने की प्रक्रिया शुरू हुई। आगामी शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा तीर्थयात्रियों के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।
जम्मू में मौके पर ही रजिस्ट्रेशन कराने और आरएफआईडी कार्ड के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कतारों में खड़े नजर आए। अमरनाथ यात्रा को लेकर श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह भी देखा गया। एक तीर्थयात्री ने समाचार एजेंसी से बात करते हुए कहा, “मैं बहुत उत्साहित हूं। मुझे उम्मीद नहीं थी कि मुझे पहले बैच में मौका मिलेगा। मैं काफी समय से कोशिश कर रहा था।”जम्मू में श्रद्धालुओं ने अमरनाथ यात्रा को लेकर की गई व्यवस्थाओं की प्रशंसा की। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं पिछली बार भी यात्रा पर गया था। इस बार भी यात्रा के लिए जा रहा हूं। यह व्यवस्थाएं बहुत अच्छी लग रही हैं।”तीसरे जत्थे में जाने वाले एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं तीसरी बार यात्रा के लिए जा रहा हूं। सारी सुविधाएं अच्छी हैं। हालांकि, रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी कार्ड के लिए थोड़ी परेशानी होती है। इसके बाद काफी सुकून मिल जाता है और विश्वास हो जाता है कि बाबा के दर्शन कर पाएंगे।”वहीं, अमरनाथ यात्रा का पहला जत्था रवाना होने से पहले श्रीनगर में यात्री ट्रांजिट कैंप में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। एक तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं। मैं वहां पहली बार जा रहा हूं।” एक महिला तीर्थयात्री ने कहा, “मैं बाबा भोलेनाथ में आस्था लेकर आई हूं। उन्होंने हमें बुलाया है और वही दर्शन कराएंगे।”महिला ने बताया कि वह भी पहली बार अमरनाथ यात्रा के लिए आई हैं। उन्होंने प्रशासन की ओर से की गई व्यवस्थाओं की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “हम बुधवार रात को ट्रांजिट कैंप पहुंचे थे। यहां व्यवस्थाएं अच्छी हैं। किसी भी चीज की कमी नहीं है।” गौरतलब हो कि अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई को शुरू होगी और 28 अगस्त को खत्म होगी। पहलगाम रास्ते से मंदिर तक पहुंचने में लगभग चार दिन लगते हैं। बालटाल से जाने वाला रास्ता छोटा है, जहां दर्शन के बाद उसी दिन वापस लौटा जा सकता है। -
नई दिल्ली। तमिलनाडु राज्य के कृष्णगिरि ज़िले के होसुर में केलावरपल्ली बांध के पास दक्षिण पेन्नई नदी में लगातार जमा हो रहे जहरीले झाग ने कृष्णगिरि जिले के किसानों को चिंतित कर दिया है। किसान तमिलनाडु और कर्नाटक सरकार से मांग कर रहे हैं कि वे मिलकर प्रदूषण के स्रोत की जांच करें और तुरंत सुधारात्मक कदम उठाएं।
दरअसल, नदी में लगभग एक महीने से झाग दिखाई दे रहा है और कर्नाटक में हाल ही में हुई बारिश के बाद यह और बढ़ गया है, जिससे केलावरपल्ली बांध में पानी का बहाव भी बढ़ गया है। किसानों को डर है कि पानी की खराब होती गुणवत्ता का सिंचाई, खेती और नदी के पूरे इकोलॉजिकल स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है। केलावरपल्ली बांध इस इलाके में हजारों एकड़ खेती की जमीन के लिए सिंचाई का एक अहम स्रोत है। इस जलाशय पर निर्भर किसानों ने चिंता जताई है कि लगातार प्रदूषण से फसल की खेती पर खतरा मंडरा सकता है और कमांड एरिया में खेती की लंबे समय तक चलने की क्षमता कम हो सकती है।वहीं, स्थानीय किसान संगठनों का मानना है कि यह प्रदूषण मुख्य रूप से साउथ पेन्नई नदी में ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) बिना ट्रीट किया हुआ सीवेज मिलने की वजह से है, खासकर कर्नाटक के शहरी इलाकों से। उन्होंने तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों में नदी के किनारे मौजूद मिलों समेत सभी इंडस्ट्रियल यूनिट्स की व्यापक जांच की भी मांग की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इंडस्ट्री से निकलने वाला कचरा भी इस प्रदूषण की वजह है।किसान संगठनों के प्रतिनिधि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों से मिलकर तुरंत कदम उठाने और दोनों राज्यों को शामिल करते हुए एक समन्वित कार्य योजना बनाने की मांग करेंगे। उन्होंने प्रदूषण के सही स्रोतों का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और बिना ट्रीट किए गए कचरे को नदी में जाने से रोकने के उपाय लागू करने की मांग की है।जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि नदी के पानी की नियमित निगरानी हर महीने की जा रही है। शुरुआती नतीजों से सल्फेट और फॉस्फेट का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया है, जो आमतौर पर केमिकल इंडस्ट्री के कचरे के बजाय सीवेज के प्रदूषण से जुड़े होते हैं। विभाग ने यह भी पाया है कि प्रभावित हिस्से में घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर एक मिलीग्राम प्रति लीटर से नीचे गिर गया है, जो पानी की बहुत खराब गुणवत्ता को दर्शाता है और इसमें मछली सहित जलीय जीवन का पनपना मुश्किल है।पानी के सैंपल लगातार लिए जा रहे हैं और क्वालिटी से जुड़े अलग-अलग पैमानों की बारीकी से जांच के लिए चेन्नई और पोलाची की लैब में भेजे जा रहे हैं। तमिलनाडु प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी प्रदूषण के स्तर का पता लगाने के लिए स्वतंत्र रूप से सैंपल ले रहा है। किसानों ने अधिकारियों से जांच में तेजी लाने और प्रदूषण को रोकने के लिए लंबे समय तक चलने वाले उपाय लागू करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर दक्षिण पेन्नई नदी की हालत लगातार बिगड़ती रही, तो इस इलाके में खेती, जैव-विविधता और लोगों की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। -
नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को जनजातीय समाज के आत्मविश्वास, नेतृत्व और नीति निर्माण क्षमताओं को बढ़ावा देने वाला प्रमुख केंद्र बनना चाहिए तथा शिक्षा के माध्यम से जनजातीय समुदायों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय पर अनेक विशेष जिम्मेदारियां हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के उद्देश्य से स्थापित ऐसे संस्थानों का दायित्व केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें जनजातीय समाज की शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, आजीविका और वनाधिकारों के क्षेत्र में भी जमीनी स्तर पर कार्य करना चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में जनजातीय युवाओं के सर्वांगीण विकास और क्षेत्र के समग्र उत्थान के लिए सार्थक प्रयास करेगा।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि प्रत्येक विश्वविद्यालय, विशेषकर जनजातीय विश्वविद्यालयों में, ऐसी नवाचारी व्यवस्थाएं विकसित की जानी चाहिए, जिनसे वन उपज, हस्तशिल्प, मिलेट, औषधीय पौधों, इको-टूरिज्म और स्थानीय उद्यमिता जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा मिल सके। इससे जनजातीय समाज की आजीविका मजबूत होगी और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जो उन्हें भविष्य के लिए नए संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तेजी से बदलते दौर में स्वयं को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए नए कौशल विकसित करने पर ध्यान देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ अपने परिवेश से सीखते हुए व्यावहारिक कौशल विकसित करने चाहिए। साथ ही उन्होंने विद्यार्थियों से अपने समुदाय, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े रहते हुए समाज और देश के भविष्य को बेहतर बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।राष्ट्रपति ने कहा कि विकसित हो रहे भारत में सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहते हुए आधुनिक विज्ञान के लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से विश्वविद्यालय उत्तरी आंध्र प्रदेश के जनजातीय समुदायों के सशक्तिकरण के लिए ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी हब’ का संचालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय जनजातीय कल्याण, सार्वजनिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा तथा ऊर्जा संरक्षण जैसे विषयों पर अकादमिक और जमीनी स्तर पर कार्य कर रहा है, जो विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य की प्राप्ति में केंद्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि समावेशी, व्यावहारिक और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित शिक्षा के माध्यम से यह विश्वविद्यालय जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा से जोड़ते हुए देश के समतापरक विकास में उनकी प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करेगा। -
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नई दिल्ली में FCRA 2.0 पोर्टल और e-OCI कार्ड का शुभारंभ किया। इस अवसर पर केंद्रीय गृह सचिव, विदेश सचिव, आसूचना ब्यूरो के निदेशक समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अमित शाह ने कहा कि दोनों पहल नागरिकों की सुविधा बढ़ाने के साथ-साथ शासन को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाएंगी।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार “Minimum Government, Maximum Governance” के सिद्धांत पर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि जब नीयत साफ, नीति स्पष्ट और तकनीक को अपनाने की इच्छाशक्ति हो, तो शासन ईमानदार लोगों के लिए सरल और नियमों का उल्लंघन करने वालों के लिए सख्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि तकनीक के माध्यम से पारदर्शिता और जवाबदेही दोनों को मजबूत किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले एफसीआरए व्यवस्था फाइलों और जटिल प्रक्रियाओं में उलझी हुई थी तथा प्रभावी निगरानी का अभाव था। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने इस व्यवस्था को मजबूत किया और अब FCRA 2.0 पोर्टल के जरिए आवेदन, नवीनीकरण, वार्षिक विवरणी और अन्य सभी प्रमुख प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे कागजी कार्यवाही कम होगी, आवेदनों का तेजी से निस्तारण होगा और विदेशी अंशदान पर रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जा सकेगी।अमित शाह ने कहा कि नई प्रणाली में भौतिक रूप से दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी। पोर्टल में ई-साइन आधारित प्रमाणीकरण, ओसीआर तकनीक, एनजीओ दर्पण, बैंकिंग प्रणाली और अन्य सरकारी डेटाबेस से एकीकृत व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। उन्होंने कहा कि पूरा डेटा ‘मेघराज’ (गवर्नमेंट क्लाउड) पर सुरक्षित रहेगा, जिससे डेटा सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था और मजबूत होगी। उन्होंने बताया कि आने वाले महीनों में एफसीआरए मोबाइल ऐप, एआई आधारित चैटबॉट और बैंकों के लिए समर्पित ऑनलाइन डैशबोर्ड भी शुरू किया जाएगा।केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि विदेशी अंशदान से जुड़े आवेदनों और दान के प्रवाह में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में कागजी प्रक्रिया कम करना और विदेशी अंशदान पर प्रभावी निगरानी राष्ट्रीय सुरक्षा की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि एफसीआरए कानून के माध्यम से गलत उद्देश्यों से आने वाले विदेशी अंशदान पर और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी।अमित शाह ने e-OCI कार्ड का शुभारंभ करते हुए कहा कि इस नई व्यवस्था से 50 लाख से अधिक ओसीआई कार्डधारकों को सुविधा मिलेगी। उन्होंने बताया कि अब 20 वर्ष की आयु के बाद नया पासपोर्ट बनने पर ओसीआई बुकलेट दोबारा जारी कराने की आवश्यकता नहीं होगी। कार्डधारकों को केवल अपने नए पासपोर्ट का विवरण ऑनलाइन अपडेट करना होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल ओसीआई कार्ड से दस्तावेज खोने या क्षतिग्रस्त होने की समस्या भी समाप्त होगी और रियल टाइम सत्यापन की सुविधा उपलब्ध होगी।गृह मंत्रालय के अनुसार FCRA 2.0 पोर्टल लगभग 14,500 सक्रिय एफसीआरए संगठनों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाएगा। प्रतिवर्ष 15,000 से 20,000 आवेदन और करीब 17,000 वार्षिक विवरणियों के निस्तारण में यह पोर्टल अधिक प्रभावी साबित होगा। वहीं e-OCI कार्ड पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाकर वैश्विक भारतीय प्रवासी समुदाय को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक सेवाएं उपलब्ध कराएगा। मंत्रालय के अनुसार दोनों पहल बेहतर सुशासन, पारदर्शिता और डिजिटल सार्वजनिक सेवा वितरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र का आधुनिकीकरण करने के उद्देश्य से खादी एवं ग्राम उद्योग आयोग (केवीआईसी) अधिनियम, 1956 में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। प्रस्तावित संशोधनों का उद्देश्य अधिनियम को वर्तमान नीतिगत ढांचे के अनुरूप बनाना, संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करना तथा ग्रामीण उद्यमों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है।
सरकार के अनुसार संशोधन के जरिए केवीआईसी अधिनियम को समकालीन आर्थिक और ग्रामीण विकास की प्राथमिकताओं के अनुरूप बनाया जाएगा। इसका उद्देश्य समावेशी और सतत ग्रामीण आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, ग्रामीण उद्यमों को औपचारिक स्वरूप देना तथा घरेलू और वैश्विक बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की भागीदारी बढ़ाना है।प्रस्तावित संशोधनों के तहत ‘ग्रामीण क्षेत्र’ की परिभाषा को विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) के प्रावधानों के अनुरूप किया जाएगा। इससे राष्ट्रीय ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित होगा और अधिक क्षेत्रों को इसका लाभ मिल सकेगा। सरकार ने प्रत्येक कारीगर या श्रमिक के लिए निर्धारित पूंजी निवेश की सीमा को भी बढ़ाने का प्रस्ताव किया है। इसे सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (एमएसएमईडी) अधिनियम के तहत सूक्ष्म उद्यमों के लिए निर्धारित निवेश सीमा के अनुरूप किया जाएगा। इससे ग्राम उद्योगों को एमएसएमई क्षेत्र के विभिन्न लाभों तक पहुंच आसान होगी।संशोधनों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए ब्रांडिंग, निर्यात, नवाचार, मानकीकरण, डिजिटलीकरण और भौगोलिक संकेतक (जीआई) संरक्षण पर विशेष जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे देश और विदेश दोनों बाजारों में खादी एवं ग्राम उद्योगों की पहचान और पहुंच मजबूत होगी। प्रस्ताव के तहत आयोग की संरचना को अधिक समावेशी बनाया जाएगा। इसमें महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, केंद्र सरकार और महात्मा गांधी ग्रामीण औद्योगीकरण संस्थान (एमजीआईआरआई) के प्रतिनिधित्व को बढ़ाया जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार को नए ग्राम उद्योगों को अधिसूचित करने का अधिकार भी दिया जाएगा, ताकि उभरते आर्थिक अवसरों और नई तकनीकों को समय पर शामिल किया जा सके।सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय संशोधित प्रावधानों को केवीआईसी के क्षेत्रीय कार्यालयों, राज्य खादी एवं ग्राम उद्योग बोर्डों (केवीआईबी), खादी संस्थानों, ग्राम उद्योग संस्थानों और उद्यमियों के मौजूदा नेटवर्क के माध्यम से लागू करेगा। अधिनियम लागू होने के बाद मंत्रालय कार्यशालाओं, सेमिनारों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए संशोधित प्रावधानों की जानकारी भी देगा।सरकार के अनुसार इन संशोधनों से खादी एवं ग्राम उद्योग क्षेत्र को वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही नवाचार, मूल्यवर्धन, ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा मिलेगा। इससे विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्रों में ग्राम उद्योगों की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी तथा समावेशी ग्रामीण आर्थिक विकास को गति मिलेगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि संशोधनों के क्रियान्वयन से जुड़ी जागरूकता और संचार गतिविधियां मंत्रालय के मौजूदा बजटीय प्रावधानों के भीतर ही संचालित की जाएंगी। इसके लिए कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह प्रस्ताव किसी नई योजना की शुरुआत नहीं है, बल्कि केवीआईसी अधिनियम, 1956 के वैधानिक ढांचे को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने का प्रयास है। -
नई दिल्ली। सहकारिता मंत्रालय ने अपनी स्थापना के पांच वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में देशभर में सप्ताहभर चलने वाले समारोहों की शुरुआत की है। 29 जून से 6 जुलाई, 2026 तक आयोजित होने वाले इन कार्यक्रमों का उद्देश्य मंत्रालय की उपलब्धियों, पहलों और भविष्य की कार्ययोजना को जन-जन तक पहुंचाना है। समारोह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में आयोजित किए जा रहे हैं। समारोहों में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, राष्ट्रीय महासंघों, राज्य सहकारिता विभागों, सहकारी बैंकों, जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों (डीसीसीबी), शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी), प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) तथा स्थानीय सहकारी संस्थाओं की भागीदारी होगी। राष्ट्रीय, राज्य, जिला, शहरी और ग्राम स्तर पर विभिन्न थीम आधारित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सप्ताहभर के कार्यक्रमों के लिए दिनवार विषय निर्धारित किए गए हैं। इनमें पैक्स का रूपांतरण, डिजिटल सहकारिता, वित्तीय साक्षरता, किसान कल्याण, डेयरी एवं मत्स्य सहकारिता, अन्न भंडारण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और तकनीक आधारित सेवाएं, सहकार संवाद, जन-जागरूकता, हरित विकास, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी तथा सहकारी संस्थाओं की सफलता की कहानियों का प्रसार शामिल है।इन विषयों के तहत सहकारी शपथ समारोह, जागरूकता शिविर, सहकारी चौपाल, सामान्य निकाय बैठकें, पैक्स सदस्यता अभियान, सहकारी योजनाओं का प्रचार, ईआरपी और ई-पैक्स प्रदर्शन, डिजिटल भुगतान जागरूकता, केसीसी और डीबीटी शिविर, किसानों के लिए आउटरीच कार्यक्रम, सहकारी उत्पाद प्रदर्शनियां, युवा प्रतियोगिताएं, सेमिनार, पैनल चर्चा, स्वास्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण तथा उत्कृष्ट सहकारी संस्थाओं और सदस्यों का सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।समारोहों के दौरान किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), फसल ऋण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) खरीद, बीज वितरण, अन्न भंडारण योजनाओं और आधुनिक कृषि पद्धतियों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही डेयरी और मत्स्य सहकारिता को बढ़ावा देने के अलावा एआई टूल्स, ड्रोन, फिनटेक, माइक्रो-एटीएम, रुपे केसीसी कार्ड और अन्य डिजिटल सेवाओं का भी प्रदर्शन किया जाएगा। मंत्रालय के अनुसार समारोहों के दौरान कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में आउटरीच कार्यक्रम, युवा प्रतियोगिताएं, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के अभियान तथा लाभार्थियों के अनुभव साझा करने जैसे कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। हरित सहकारिता के तहत वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान और जलवायु अनुकूल कृषि को लेकर भी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे।सप्ताहभर चलने वाले इन समारोहों का समापन 6 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम के साथ होगा। इसमें केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित कई केंद्रीय मंत्री शामिल होंगे। समापन समारोह में नीति संवाद, पोर्टल लॉन्च, सहकारी प्रदर्शनी, सहकारी उत्पादों का प्रदर्शन तथा पूरे सहकारी तंत्र की भागीदारी होगी। मंत्रालय के अनुसार इन समारोहों से सहकारी आंदोलन के प्रति जन-जागरूकता बढ़ेगी और इसे आधुनिक, पारदर्शी, तकनीक-संचालित तथा जन-केंद्रित विकास मॉडल के रूप में नई गति मिलेगी। -
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन रवि अग्रवाल का कार्यकाल छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने मंगलवार को उनकी पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दे दी। अब वह 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक अथवा अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, अनुबंध (कॉन्ट्रैक्ट) के आधार पर सीबीडीटी के चेयरमैन के रूप में कार्य करते रहेंगे।
कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) द्वारा जारी आदेश के अनुसार, रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति केंद्र सरकार के पुनर्नियोजित अधिकारियों पर लागू सामान्य नियमों एवं शर्तों के तहत तथा भर्ती नियमों में आवश्यक छूट प्रदान करते हुए की गई है। इस फैसले से देश के सर्वोच्च प्रत्यक्ष कर प्रशासनिक निकाय सीबीडीटी के कामकाज में निरंतरता बनी रहेगी।सरकारी आदेश में कहा गया है कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने रवि अग्रवाल को छह महीने की अवधि के लिए पुनः सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी प्रदान की है। यह नियुक्ति 1 जुलाई 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक या अगले आदेश तक, जो भी पहले हो, प्रभावी रहेगी।भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) के 1988 बैच के अधिकारी रवि अग्रवाल को जून 2024 में नितिन गुप्ता के स्थान पर सीबीडीटी का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में प्रत्यक्ष कर प्रशासन में डिजिटलीकरण, कर अनुपालन को मजबूत करने और करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया है।वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अधीन कार्यरत सीबीडीटी आयकर विभाग की सर्वोच्च नीति-निर्माण संस्था है। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों के क्रियान्वयन, कर नीति निर्माण, कर संग्रह, कर अनुपालन को बढ़ावा देने तथा करदाता सेवाओं में सुधार के लिए जिम्मेदार है। बोर्ड में चेयरमैन के अलावा भारत सरकार के विशेष सचिव स्तर के अधिकतम छह सदस्य हो सकते हैं। रवि अग्रवाल की पुनर्नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब देश में प्रत्यक्ष कर संग्रह लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रहा है। आयकर विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1 अप्रैल से 17 जून 2026 के दौरान शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह 14.64 प्रतिशत बढ़कर 5.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। यह आंकड़ा प्रत्यक्ष कर संग्रह में निरंतर सुधार और मजबूत कर अनुपालन का संकेत माना जा रहा है। -
नई दिल्ली। 12 लाख सैनिकों वाली भारतीय थलसेना को नया सेना प्रमुख मिल गया है। जनरल धीरज सेठ ने मंगलवार को सेना के प्रमुख (आर्मी चीफ) का पदभार संभाल लिया। जनरल उपेंद्र द्विवेदी का कार्यकाल पूरा होने के बाद एक आधिकारिक समारोह में उन्होंने सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंपी। इससे पहले जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल पर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद साउथ ब्लॉक के लॉन में उन्हें औपचारिक ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ देकर विदाई दी गई।
इस मौके पर जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, “आज मैं भारतीय सेना की कमान जनरल धीरज सेठ को सौंप रहा हूं। वह एक सक्षम और अनुभवी सैन्य नेतृत्वकर्ता हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके नेतृत्व में भारतीय सेना अपनी गौरवशाली परंपराओं, उच्च पेशेवर मानकों और अटूट संकल्प के साथ नई ऊंचाइयों को छुएगी। मुझे भरोसा है कि भारतीय सेना अपनी परंपराओं से जुड़ी रहेगी, वर्तमान चुनौतियों के प्रति सतर्क रहेगी और भविष्य की हर परिस्थिति का सामना करने के लिए सदैव तैयार रहेगी।”जनरल धीरज सेठ इससे पहले वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने 1 अप्रैल 2026 को सेना के वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का पदभार ग्रहण किया था। करीब 28 सालों के बाद भारतीय सेना को आर्मर्ड कोर से सेना प्रमुख मिला है। इससे पहले वर्ष 1997 में 20 लांसर्स के जनरल शंकर रॉय चौधरी सेना प्रमुख के पद से रिटायर हुए थे।जनरल धीरज सेठ राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (खड़कवासला) के पूर्व छात्र हैं। दिसंबर 1986 में उन्हें आर्मर्ड कोर में कमीशन मिला था। लगभग 40 साल के अपने सैन्य करियर में उन्होंने कई महत्वपूर्ण कमान और स्टाफ नियुक्तियों पर कार्य किया है। उन्होंने रेगिस्तानी क्षेत्र में एक आर्मर्ड रेजिमेंट तथा जम्मू-कश्मीर में काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स की कमान संभाली। लेफ्टिनेंट जनरल के पद पर प्रमोट होने के बाद उन्होंने सुदर्शन चक्र कोर का नेतृत्व किया।इसके बाद उन्होंने दिल्ली एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग के तौर पर अपनी जिम्मेदारियां निभाईं, जहां उन्होंने कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों का सफल नेतृत्व किया। उन्होंने दक्षिण पश्चिमी कमान और दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के रूप में भी सेवा दी। पश्चिमी सीमा पर दो ऑपरेशनल कमानों का नेतृत्व करना अपने आप में एक दुर्लभ उपलब्धि माना जाता है।ऑपरेशनल कमानों के अलावा उन्होंने कई महत्वपूर्ण स्टाफ और रणनीतिक पदों पर भी कार्य किया। इनमें जम्मू-कश्मीर में एक स्वतंत्र आर्मर्ड ब्रिगेड के ब्रिगेड मेजर, अंगोला में संयुक्त राष्ट्र मिशन के साथ ऑपरेशंस ऑफिसर, सेना मुख्यालय में सहायक सैन्य सचिव, दक्षिण-पश्चिमी कमान मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल स्टाफ (ऑपरेशंस) तथा डायरेक्टर जनरल, डिसिप्लिन, सेरेमोनियल एंड वेलफेयर जैसे महत्वपूर्ण दायित्व शामिल हैं।कैपेबिलिटी डेवलपमेंट और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में भी उनका योगदान रहा है। उन्होंने स्ट्रेटेजिक प्लानिंग एंड कैपेबिलिटी डेवलपमेंट निदेशालय में कर्नल (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट–मैकेनाइज्ड फोर्सेज), ब्रिगेडियर (पर्सपेक्टिव प्लानिंग एंड एक्विजिशन) और अतिरिक्त महानिदेशक (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट) जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। भारतीय सेना की लांग टर्म इंटीग्रेटेड प्रस्पेक्टिव प्लान और आधुनिकीकरण रोडमैप तैयार करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।जनरल धीरज सेठ का सैन्य करियर खास उपलब्धियों से भरा रहा है। उन्होंने सभी प्रमुख सैन्य प्रशिक्षण कोर्स में बेहतरीन प्रदर्शन किया। जूनियर कमांड कोर्स में पहला स्थान प्राप्त किया और डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज में ‘बेस्ट ऑल-राउंड स्टूडेंट ऑफिसर’ का सम्मान हासिल किया। उन्होंने हायर कमांड कोर्स, नेशनल डिफेंस कॉलेज तथा पेरिस में कमांड एंड स्टाफ कोर्स भी पूरा किया है। भारतीय सेना में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा मेडल (पीवीएसएम), उत्तम युद्ध सेवा मेडल (यूवाईएसएम) और अति विशिष्ट सेवा मेडल (एवीएसएम) से सम्मानित किया जा चुका है। - नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की बिक्री एवं वितरण पर लगाए गए अस्थायी नियामक प्रतिबंध वापस लेने का निर्णय लिया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घोषणा की है कि 1 जुलाई, 2026 से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के खुदरा बिक्री केंद्रों पर मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और हाई स्पीड डीजल (एचएसडी) की बिक्री एवं वितरण पर लागू अस्थायी प्रतिबंध समाप्त कर दिए जाएंगे।मंत्रालय के अनुसार, पश्चिम एशिया संकट के दौरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में तेज बढ़ोतरी के बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को स्थिर रखा। इससे खुदरा और थोक ईंधन कीमतों के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया। इसके चलते कुछ औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं ने खुदरा पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में ईंधन खरीदना शुरू कर दिया, जिससे जमाखोरी, कालाबाजारी और हेराफेरी की घटनाएं सामने आईं तथा ईंधन के समान वितरण पर असर पड़ा।स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 12 जून, 2026 से अस्थायी नियामक उपाय लागू किए गए थे। इनके तहत खुदरा बिक्री केंद्रों पर प्रति ग्राहक या वाहन प्रतिदिन अधिकतम 200 लीटर हाई स्पीड डीजल देने की सीमा तय की गई थी। साथ ही औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपभोक्ताओं को खुदरा पंपों के बजाय निर्धारित उपभोक्ता पंपों से ईंधन खरीदने के निर्देश दिए गए थे। इन उपायों का उद्देश्य खुदरा उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करना और कालाबाजारी तथा जमाखोरी पर रोक लगाना था।सरकार ने देश में पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता और आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा के बाद पाया कि अब अस्थायी प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं है। इसलिए 12 जून, 2026 को जारी आदेश को 1 जुलाई, 2026 से वापस लेने का निर्णय लिया गया है। मंत्रालय ने कहा कि इन अस्थायी उपायों से पूरे देश में खुदरा उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करते हुए पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिली। अब प्रतिबंध हटाए जाने से यह संकेत मिलता है कि ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था सामान्य हो चुकी है और वितरण प्रणाली पूरी तरह बहाल हो गई है।
- नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को कहा कि उन्होंने ग्रीस के विकास मंत्री टाकिस थियोडोरिकाकोस के साथ महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक साझेदारी को और मजबूत बनाने पर चर्चा हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में व्यापार, निवेश, औद्योगिक सहयोग, मजबूत सप्लाई चेन, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विचार-विमर्श हुआ, ताकि दोनों देशों की साझा समृद्धि सुनिश्चित की जा सके।पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि दोनों देशों ने मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप्स और उभरती तकनीकों में सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत और ग्रीस के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए औद्योगिक सहयोग और सुदृढ़ सप्लाई चेन विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया।केंद्रीय मंत्री इस समय एक उच्चस्तरीय भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल के साथ ग्रीस के दौरे पर हैं। इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने के साथ-साथ रणनीतिक आर्थिक सहयोग को नई गति देना है। दौरे के दौरान भारतीय प्रतिनिधिमंडल एथेंस स्टार्टअप बिजनेस इन्क्यूबेटर (टीएचईए) में आयोजित प्रेजेंटेशन और स्टार्टअप पिच कार्यक्रम में भी हिस्सा लेगा, जहां नवाचार आधारित साझेदारी को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। प्रतिनिधिमंडल एथेंस चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एसीसीआई) में भारतीय और ग्रीस के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ विशेष गोलमेज बैठक करेगा। इन बैठकों में इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटलीकरण, रक्षा, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने तथा निजी क्षेत्र के बीच साझेदारी को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा होगी।ग्रीस दौरे से पहले पीयूष गोयल ने ब्रिटेन का तीन दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने लंदन में आयोजित ‘इंडिया-यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस बिजनेस प्लेनरी’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। कार्यक्रम में भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) का समर्थन किया गया और इसे दोनों देशों के व्यापार एवं निवेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।आधिकारिक बयान के अनुसार, ब्रिटेन के बाद ग्रीस का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार की उस नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करना, नवाचार आधारित विकास को प्रोत्साहित करना और प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारत की व्यापार एवं निवेश कूटनीति को नई मजबूती देना लक्ष्य है।
- नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को देश के डिजिटल स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने और इंटरऑपरेबल डिजिटल हेल्थ सिस्टम को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरोग्य सेतु 2.0 सहित कई नई डिजिटल स्वास्थ्य पहलों का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि ये पहल स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक एकीकृत, सुलभ और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव, केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल, नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री डॉ. माणिक साहा, मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव, आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल तथा राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।इस दौरान आरोग्य सेतु 2.0, आयुष्मान ऐप, आयुष्मान सारथी व्हाट्सएप चैटबॉट, नेशनल हेल्थ क्लेम एक्सचेंज (एनएचसीएक्स), इंश्योरेंस प्लान एफएचआईआर ऑब्जेक्ट क्रिएटर, ई-सुश्रुत क्लिनिक, यूनिफाइड हेल्थ इंटरफेस (यूएचआई), ड्रग रजिस्ट्री, कॉमन एलओआईएनसी कोड फॉर इंडिया (सीएलसीआई) और भारत हेल्थ टर्मिनोलॉजी सर्विस (बीएचटीएस) का शुभारंभ किया गया। इन पहलों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं तक आसान पहुंच, बेहतर दक्षता और स्वास्थ्य रिकॉर्ड के निर्बाध आदान-प्रदान को सुनिश्चित करना है।जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के तहत अब तक 90 करोड़ से अधिक आभा खाते बनाए जा चुके हैं और 100 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड डिजिटल रूप से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल स्वास्थ्य इकोसिस्टम में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है और सही तथा बोधि जैसी पहलें स्वास्थ्य सेवा वितरण को और मजबूत बना रही हैं।स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि नया आरोग्य सेतु 2.0 एप्लिकेशन माताओं और बच्चों से लेकर युवाओं, बुजुर्गों तथा पुरानी बीमारियों से पीड़ित लोगों तक सभी आयु वर्ग के नागरिकों को एक ही मंच पर विभिन्न डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं तक सहज पहुंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से इन पहलों को प्रभावी ढंग से लागू करने का भी आह्वान किया।प्रतापराव जाधव ने कहा कि ये पहल आयुष सेवाओं की पहुंच बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ने में मदद करेंगी। वहीं, अनुप्रिया पटेल ने कहा कि डिजिटल स्वास्थ्य रिकॉर्ड विशेष रूप से महिलाओं को अपनी स्वास्थ्य देखभाल की जिम्मेदारी लेने में सक्षम बनाएंगे और आशा तथा आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का प्रशासनिक बोझ भी कम करेंगे।नीति आयोग के सदस्य डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन देश में बिखरे हुए डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों को एकीकृत कर अधिक कुशल और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित कर रहा है। वहीं, एनएचए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुनील कुमार बरनवाल ने कहा कि नई पहलें स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, दक्षता और मरीजों के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ प्रत्येक भारतीय के लिए डिजिटल रूप से सशक्त स्वास्थ्य इकोसिस्टम तैयार करेंगी।--
- नयी दिल्ली. केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को कहा कि गांवों के समृद्ध और आत्मनिर्भर बने बिना विकसित भारत का सपना साकार नहीं हो सकता। चौहान ने राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों के साथ विचार-विमर्श किया। यह दो दिवसीय सम्मेलन 'ग्रामोदय से राष्ट्रोदय' विषय पर यहां पूसा परिसर में आयोजित किया गया। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, इसमें प्रमुख ग्रामीण विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित ग्राम-विकसित भारत' के दृष्टिकोण को साकार करने की रणनीतियों पर चर्चा हुई।सम्मेलन के दूसरे दिन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि गांव केवल मिट्टी, खेत और चौपालों का समूह नहीं हैं, बल्कि वे भारत की शक्ति, चेतना और देश की आत्मा का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने कहा, ''ग्रामीण भारत की प्रगति के बिना राष्ट्रीय प्रगति संभव नहीं है,'' और देश के विकास में गांवों की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। सम्मेलन में 29 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों और नीति-निर्माताओं ने भाग लिया। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और अन्य राज्यों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल हुए। चौहान ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी पूरा होगा, जब गांव आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनें, रोजगार के अवसर बढ़ें और वहां गुणवत्तापूर्ण बुनियादी ढांचा तथा आवश्यक सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध हों। उन्होंने घोषणा की कि 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' (वीबी-जी राम-जी) योजना एक जुलाई से पूरे देश में लागू की जाएगी। यह योजना वर्तमान महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का स्थान लेगी। मंत्री ने कहा कि नयी योजना के क्रियान्वयन के लिए 95,682 करोड़ रुपये की अंतरिम मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने राज्यों से सभी प्रक्रियागत औपचारिकताएं शीघ्र पूरी करने का आग्रह किया, ताकि योजना का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके। सम्मेलन में 'लखपति दीदी डैशबोर्ड' का शुभारंभ किया गया। साथ ही स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए डिजिटल मंच 'एसएचई एलईएपीएस (सेल्फ हेल्प एंटरप्रेन्योर-लाइवलीहुड्स एंड एंटरप्राइज एप्लीकेशन फॉर प्रॉस्पेरिटी एंड सस्टेनेबिलिटी)' यानी 'स्वयं सहायता उद्यमी – समृद्धि और सतत विकास के लिए आजीविका एवं उद्यम अनुप्रयोग' भी शुरू किया गया।चौहान ने कहा कि 'लखपति दीदी' बनाने का लक्ष्य तीन करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ महिलाओं का कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इसके लिए अगले पांच वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के बैंक ऋण से जोड़ने का रोडमैप तैयार किया गया है। ग्रामीण विकास कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए उन्होंने राज्यों से कहा कि वे अपनी वित्तीय हिस्सेदारी समय पर जारी करें, ताकि परियोजनाओं और भुगतान में देरी न हो। उन्होंने ग्रामीण विकास से संबंधित रिक्त पदों को जल्द भरने और अधिकारियों के बार-बार तबादले से बचने की भी आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालने वाले अधिकारियों को सामान्यतः दो से तीन वर्ष तक एक ही स्थान पर कार्य करना चाहिए। चौहान ने सरकारी योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार, सामाजिक अंकेक्षण को मजबूत करने तथा पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित निगरानी प्रणाली के अधिक उपयोग पर भी जोर दिया। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि जहां कुछ राज्यों ने अच्छा प्रदर्शन किया है, वहीं अन्य राज्यों को कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता है। उन्होंने ग्रामीण आवास योजना के पात्र भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि उपलब्ध कराने और लंबित आवास मामलों का शीघ्र समाधान करने पर जोर दिया। झारखंड, बिहार, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की बहु-चैनल विपणन व्यवस्था, सामुदायिक उद्यम और परिवार आधारित आजीविका ऋण योजनाओं जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए चौहान ने कहा कि इन सफल मॉडलों का दस्तावेजीकरण कर अन्य राज्यों के साथ साझा किया जाएगा। उन्होंने राज्यों को आश्वासन दिया कि यदि मौजूदा नियमों या प्रक्रियाओं में व्यावहारिक कठिनाइयां आती हैं तो ग्रामीण विकास मंत्रालय, केंद्रीय मंत्रिमंडल और वित्त मंत्रालय के साथ मिलकर आवश्यक संशोधन करेगा।सामान्य से कम वर्षा की आशंका पर चिंता जताते हुए चौहान ने 14 राज्यों से सतर्क रहने और किसी भी प्रतिकूल स्थिति से निपटने की तैयारी रखने का आग्रह किया। उन्होंने राज्यों को जल संरक्षण संरचनाओं को मजबूत करने तथा आवश्यकता पड़ने पर ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त रोजगार के अवसर सृजित करने की तैयारी करने के निर्देश दिए। केंद्र और राज्यों के बीच साझेदारी का आह्वान करते हुए चौहान ने कहा कि यह प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि सहयोग का समय है। उन्होंने कहा कि केंद्र को नीति निर्माण, राज्यों को क्रियान्वयन, पंचायतों को जमीनी नेतृत्व और नागरिकों को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी पर ध्यान देना चाहिए। सम्मेलन का समापन वीबी-जी राम-जी पहल के तहत आयोजित लोगो डिजाइन, प्रश्नोत्तरी और डिजिटल सामग्री प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित करने के साथ हुआ। इस अवसर पर ग्रामीण विकास से जुड़े नए विचारों, नवाचारों और उभरते मॉडलों पर आधारित कई प्रकाशनों का भी विमोचन किया गया।
- नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को छोटे क्लीनिकों के लिए ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ नामक हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम लॉन्च किया। सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्यूटिंग (सी-डैक) द्वारा विकसित इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उद्देश्य छोटे क्लीनिकों में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण को बढ़ावा देना और उन्हें सरकार समर्थित, किफायती तथा उपयोग में आसान डिजिटल समाधान उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, देश के अधिकांश छोटे ओपीडी क्लीनिक अभी भी मैनुअल व्यवस्था पर निर्भर हैं। बड़े हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम महंगे और जटिल होने के कारण छोटे क्लीनिक उन्हें अपनाने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ इस कमी को दूर करेगा और आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद करेगा।सरकार की योजना इस सिस्टम को सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों, उप-स्वास्थ्य केंद्रों और निजी क्लीनिकों में लागू करने की है। फिलहाल 800 से अधिक स्वास्थ्य संस्थान इस प्लेटफॉर्म से जुड़ चुके हैं और इसके माध्यम से 680 से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड तैयार किए जा चुके हैं।यह एक क्लाउड आधारित हल्का हॉस्पिटल मैनेजमेंट सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से छोटे ओपीडी क्लीनिकों के लिए विकसित किया गया है। इसमें मरीजों का पंजीकरण, बिलिंग, एमआईएस रिपोर्टिंग, स्पीच-टू-टेक्स्ट, क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम और आयुष्मान भारत से संबंधित जानकारी खोजने जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसे इस तरह तैयार किया गया है कि इसके संचालन के लिए विशेष तकनीकी ज्ञान की आवश्यकता न हो। इस प्लेटफॉर्म का उपयोग केवल हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्री में पंजीकृत डॉक्टर ही कर सकेंगे। इससे यह सुनिश्चित होगा कि केवल प्रमाणित चिकित्सकों को ही इस डिजिटल सुविधा का लाभ मिले।डिजिटल हेल्थ सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) और सी-डैक के बीच समझौता किया जाएगा। इसके तहत सी-डैक सॉफ्टवेयर का रखरखाव और अपग्रेडेशन करेगा, जबकि एनएचए वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराएगा। एनएचए मरीजों को भेजे जाने वाले एसएमएस और क्लाउड होस्टिंग का खर्च भी वहन करेगा। साथ ही कॉल सेंटर के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। ‘ई सुश्रुत क्लिनिक’ की मूल कीमत 499 रुपए प्रति माह (पांच उपयोगकर्ताओं के लिए) निर्धारित की गई है। हालांकि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण की ओर से 200 रुपए की सब्सिडी मिलने के बाद इसका प्रभावी शुल्क 299 रुपए प्रति माह रहेगा। इसके अलावा शुरुआती तीन महीने यह सेवा पूरी तरह नि:शुल्क उपलब्ध कराई जाएगी। पांच से अधिक उपयोगकर्ता जोड़ने पर प्रत्येक अतिरिक्त उपयोगकर्ता के लिए 50 रुपए प्रति माह का शुल्क देना होगा।
- नयी दिल्ली. पूर्वोत्तर राज्यों में सोमवार को हुई भारी बारिश ने भारी तबाही मचाई, जिससे कई स्थानों पर सड़कें और पुल बह गए। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अरुणाचल प्रदेश और असम के मुख्यमंत्रियों से फोन पर बात कर हालात और नुकसान की जानकारी ली। अरुणाचल प्रदेश के कम से कम 12 जिलों में जनजीवन प्रभावित हुआ है, जबकि असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार धीमाजी जिले के चार राजस्व मंडलों के 69 गांवों में करीब 16,000 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अगले पांच दिनों के दौरान पूर्वोत्तर भारत तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश होने की संभावना जताई है।वहीं, विभाग ने कहा कि अगले दो दिनों के दौरान उत्तर प्रदेश और उससे सटे राज्यों में लू चलने, कुछ स्थानों पर भीषण लू की आशंका है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू से फोन पर बात की और राज्य में भारी बारिश, अचानक आई बाढ़ तथा भूस्खलन से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए केंद्र की ओर से हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। अधिकारियों के अनुसार, बातचीत के दौरान शाह ने प्रभावित क्षेत्रों, नुकसान और लोगों को राहत पहुंचाने की तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने राहत कार्यों तथा अन्य आवश्यक सहायता के लिए केंद्र सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। इसी तरह, शाह ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से भी बातचीत कर नदियों का जलस्तर बढ़ने से हुए नुकसान की जानकारी ली। शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में बताया कि उन्होंने गृह मंत्री को राज्य में जारी राहत और पुनर्वास कार्यों की जानकारी दी।इस बीच, उत्तर भारत के कई राज्यों में सोमवार को भी भीषण गर्मी का असर बना रहा। हालांकि, दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के साथ जल्द राहत मिलने की संभावना है। दिल्ली में लू का प्रकोप जारी रहा और ज्यादातर मौसम केंद्रों पर अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। लगातार दूसरे दिन राजधानी में रात भी इस मौसम की सबसे गर्म रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार, राजधानी के आधार केंद्र सफदरजंग में अधिकतम तापमान 42.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक है। हालांकि, शाम साढ़े चार बजे से साढ़े छह बजे के बीच दिल्ली और आसपास के इलाकों में गरज-चमक के साथ आंधी आई, जिससे तापमान में तेज गिरावट दर्ज की गई और तेज हवाएं चलीं। राजस्थान में भी कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी का दौर जारी रहा। श्रीगंगानगर राज्य का सबसे गर्म स्थान रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि राजधानी जयपुर में अधिकतम तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग ने कहा कि दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। इसके प्रभाव से इस सप्ताह राजस्थान के कई हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है, जिससे गर्मी से राहत मिल सकती है। विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्तरी सीमा फिलहाल गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और बिहार के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। आईएमडी ने कहा, ''अगले दो से तीन दिनों के दौरान गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।'' उत्तराखंड में मैदानी क्षेत्रों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहा, जबकि पर्वतीय इलाकों में यह सामान्य दर्ज किया गया। हालांकि, मौसम विभाग ने अगले तीन से चार दिनों के दौरान राज्य में अधिकतम तापमान में चार से छह डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आने का अनुमान जताया है। मौसम विभाग ने मंगलवार के लिए राज्य के कई हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने का पूर्वानुमान जारी किया है। पौड़ी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना को देखते हुए येलो अलर्ट जारी किया गया है। राज्य के सभी पर्वतीय जिलों में कुछ स्थानों पर आकाशीय बिजली, तेज बारिश और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है। मैदानी क्षेत्रों, विशेषकर हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जिलों के कुछ हिस्सों के लिए भी इसी तरह की चेतावनी जारी की गई है। इस बीच, पंजाब में भीषण गर्मी और अधिक नमी के कारण सोमवार को बिजली की मांग में अभूतपूर्व बढ़ोतरी दर्ज की गई। इससे राज्य की बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा और पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (पीएसपीसीएल) को केंद्रीय ग्रिड से रिकॉर्ड मात्रा में बिजली लेनी पड़ी। आईएमडी के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से काफी अधिक दर्ज किया गया।वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के कुछ स्थानों तथा उत्तराखंड, हरियाणा और पंजाब के कई इलाकों में तापमान सामान्य से 3.1 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में अचानक आई बाढ़ के कारण मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग बंद हो गया। अधिकारियों ने बताया कि इस आपदा के चलते करीब एक दर्जन गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाढ़ के साथ आए मलबे के कारण जिला मुख्यालय केलांग जाने वाला मार्ग अवरुद्ध हो गया है। जिले के दूरदराज क्षेत्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण जोबरंग पुल भी पानी में डूब गया है। अधिकारियों ने बताया कि जिस्पा में अचानक आई बाढ़ के कारण मनाली-लेह राजमार्ग बंद हो गया, जबकि झालमा नाला में आई बाढ़ से कई गांवों तक पहुंचना संभव नहीं रह गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पहाड़ों की चोटियों पर बर्फ पिघलने से झालमा नाले का जलस्तर बढ़ गया। इस अचानक आई बाढ़ के वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की 70 आरसीसी इकाई तीन मशीनों के साथ पूरी रात मनाली-लेह राजमार्ग को बहाल करने के काम में जुटी रहीं।
- नयी दिल्ली. सार्वजनिक क्षेत्र के केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, पंजाब नेशनल बैंक और इंडियन बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को कुल 9,439 करोड़ रुपये का लाभांश दिया है। केनरा बैंक के नवनियुक्त प्रबंध निदेशक (एमडी) एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ब्रजेश कुमार सिंह ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 2,397 करोड़ रुपये के लाभांश का चेक सौंपा। इस अवसर पर वित्तीय सेवा सचिव संजय लोहिया भी मौजूद रहे। केनरा बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति शेयर 4.20 रुपये का लाभांश घोषित किया है, जो दो रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर का 210 प्रतिशत है। पीएनबी के प्रबंध निदेशक और सीईओ अशोक चंद्रा ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को 2,416 करोड़ रुपये का लाभांश चेक सौंपा। बैंक ऑफ बड़ौदा ने एक बयान में कहा कि उसके एमडी एवं सीईओ देबदत्त चंद ने वित्त मंत्री को 2,811 करोड़ रुपये के लाभांश का चेक सौंपा। बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए प्रति इक्विटी शेयर 8.50 रुपये का लाभांश घोषित किया है, जो दो रुपये अंकित मूल्य वाले प्रत्येक शेयर का 425 प्रतिशत है। इंडियन बैंक के एमडी एवं सीईओ बिनोद कुमार ने वित्त मंत्री को 1,815.05 करोड़ रुपये के लाभांश का चेक सौंपा। चेन्नई स्थित इंडियन बैंक ने एक बयान में कहा कि वह समावेशी बैंकिंग और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देकर सरकार के विकसित भारत लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
- नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच के अनुरोध वाली याचिका पर त्वरित सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति एम. एम. सुंदरेश और न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने कहा कि इस मामले को ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा। पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, ''आसमान नहीं टूट पड़ेगा ...इतनी क्या जल्दी है।''अधिवक्ता अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के नेतृत्व वाले एक बहु-विषयक विशेष जांच दल (एसआईटी) को श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के मामलों और प्रशासन से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं व अन्य कथित अवैधताओं की जांच करनी चाहिए। इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करने के अनुरोध वाली याचिका में केंद्र, उत्तर प्रदेश सरकार और मंदिर ट्रस्ट को सार्वजनिक हित की रक्षा करने तथा करोड़ों भक्तों व दानदाताओं का विश्वास बनाए रखने के लिए आवश्यक नियामक, पर्यवेक्षी और ऑडिट तंत्र का गठन व संचालन करने का निर्देश देने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका में कहा गया, ''श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े धन के कथित गबन और अन्य कथित अनियमितताओं की खबरें सही साबित हों या नहीं, लेकिन इन खबरों ने उन पीढ़ियों के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, जिन्होंने अयोध्या की गौरवपूर्ण विरासत की पुनर्स्थापना के लिए लंबा संघर्ष किया है।'' इसमें आरोप लगाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने बिना किसी प्राथमिकी या नियमित आपराधिक मामला दर्ज किए इस मामले की जांच शुरू कर दी है। याचिका में कहा गया है कि मंदिर ट्रस्ट से कथित रूप से धन गायब होने और अन्य कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित रिपोर्टों की सत्यता की स्वतंत्र रूप से जांच की जानी चाहिए। याचिका के अनुसार, यह जांच ऐसी एकीकृत जांच एजेंसी द्वारा कराई जानी चाहिए, जिसके पास जटिल वित्तीय और आपराधिक मामलों की जांच के लिए आवश्यक विशेषज्ञता, संसाधन और संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो। इसमें कहा गया है, ''ऐसी जांच से आम लोगों का भरोसा अधिक मजबूत होगा, बजाय इसके कि केवल प्रशासनिक अधिकारियों वाली विशेष जांच टीम (एसआईटी) प्रारंभिक जांच करे, जिनके पास आपराधिक मामलों की जांच की विशेषज्ञता शायद नहीं हो।'' राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के आरोपों के बाद मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया था। इस विशेष जांच दल (एसआईटी) में लखनऊ के मंडल आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजीपी) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल है।
- नयी दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली। राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने उन्हें अपने चैंबर में शपथ दिलाई।खरगे हाल में कर्नाटक से संसद के उच्च सदन के लिए लगातार दूसरी बार निर्वाचित हुए हैं।इस मौके पर राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, सदन के नेता जे पी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू, कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाद्रा की मौजूदगी रही। राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष 83 वर्षीय खरगे इससे पहले लोकसभा और कर्नाटक विधानसभा के सदस्य रह चुके हैं। खरगे ने 1972 में पहली बार कर्नाटक विधानसभा का चुनाव जीता और बाद में लगातार नौ बार विधायक चुने गए। वह कर्नाटक सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे और 1999 से 2004 तक विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। खरगे 2009 और 2014 में कर्नाटक के गुलबर्गा लोकसभा क्षेत्र से सांसद निर्वाचित हुए। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्होंने रेल मंत्री और श्रम एवं रोजगार मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। वह वर्ष 2014 से 2019 तक लोकसभा में कांग्रेस के नेता रहे।
- पुरी । भगवान जगन्नाथ और उनके भाई-बहनों के पारंपरिक स्नान अनुष्ठान का आयोजन सोमवार तड़के 12वीं शताब्दी के मंदिर परिसर में किया गया। इस दौरान देव स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान के दर्शन के लिए लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान यात्रा वार्षिक रथ यात्रा का पूर्व आयोजन मानी जाती है। इस अवसर पर भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को गर्भगृह से बाहर लाया जाता है और सार्वजनिक रूप से 108 कलशों के जल से पवित्र स्नान कराया जाता है। मंदिर परिसर में बने ऊंचे मंच पर आयोजित इस अनुष्ठान का दर्शन श्रद्धालु मंदिर के सामने स्थित भव्य मार्ग से करते हैं। इस वर्ष स्नान यात्रा की शुरुआत सुबह 5:15 बजे देवताओं की पारंपरिक 'पाहंडी' यानी शोभायात्रा के साथ हुई, जो सुबह आठ बजे तक चली। स्कंद पुराण के अनुसार, 12वीं शताब्दी के इस मंदिर में काष्ठ प्रतिमाओं की स्थापना करने वाले राजा इंद्रद्युम्न ने ही इस स्नान अनुष्ठान की शुरुआत की थी। वेदी पर विराजमान किए जाने के बाद सेवायतों ने 'मंगला आरती' की, जो मंदिर के कपाट खुलने के बाद भगवान की पहली आरती होती है। स्नान पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं को खुले मंडप से मंगला आरती के दर्शन का अवसर मिलता है। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर परिसर स्थित 'सुनाकुआ' (स्वर्ण कुएं) के पवित्र जल से भरे कुल 108 कलशों का जल भगवान की प्रतिमाओं पर अर्पित किया जाता है। अधिकारियों ने बताया कि इसके तुरंत बाद पुरी के गजपति महाराज दिव्यसिंह देव पारंपरिक रूप से 'स्नान मंडप' की झाड़ू लगाने की रस्म निभाएंगे और इसके बाद भगवान को 'गज वेश' (हाथी स्वरूप की पोशाक) में सजाया जाएगा। पुलिस महानिरीक्षक (मध्य क्षेत्र) सत्यजीत नाइक ने बताया कि पुरी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और इसके लिए पुलिस बल की 79 प्लाटून तैनात की गई हैं।
- ग्रेटर नोएडा । उत्तर प्रदेश एक और जिले के कई गांवों को हाईटेक शहर बनाने की तैयारी कर रही है। यह जल्द ही औद्योगिक विनिर्माण केंद्र बनने के साथ लाखों रोजगार पैदा करने वाले गंतव्य के रूप में उभरेगा। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास की गति को और तेज करते हुए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने एक बेहद महत्वाकांक्षी नई परियोजना पर काम शुरू कर दिया है। यमुना एक्सप्रेसवे के चरण दो विकास के तहत 'महायोजना/मास्टर प्लान 2041' के अंतर्गत 'हाथरस अर्बन सेंटर' को एक हाई-टेक औद्योगिक और आवासीय सैटेलाइट टाउन के रूप में डिजाइन किया जा रहा है। यीडा द्वारा विकसित किए जा रहे चार मुख्य अर्बन नोड्स (अलीगढ़, मथुरा, आगरा और हाथरस) में से हाथरस को विशेष तौर पर एक प्रमुख औद्योगिक विनिर्माण केंद्र के रूप में चुना गया है। इस विशाल परियोजना के लिए हाथरस और सासनी तहसील के कुल 50 से अधिक गांवों को अधिसूचित किया गया है, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग चार हजार हेक्टेयर (करीब 10 हजार एकड़) होगा। इस अत्याधुनिक शहर के नियोजन के लिए सलाहकार कंपनी 'आरवी इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स लिमिटेड' को नियुक्त किया गया है। मास्टर प्लान 2041 के तहत इस अर्बन सेंटर को चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है। पहला औद्योगिक जोन, इस विशाल भूभाग का मुख्य ध्यान फैक्ट्रियों और भारी विनिर्माण इकाइयों पर केंद्रित होगा। दूसरा आवासीय क्षेत्र, यहां काम करने वाले लोगों के लिए आधुनिक सोसायटी, फ्लैट्स और किफायती आवास विकसित किए जाएंगे। तीसरा वाणिज्यिक और लॉजिस्टिक्स हब जो व्यापारिक गतिविधियों के लिए मॉल, कमर्शियल टावर, होटल और विशाल भंडारगृह के लिए विशेष स्थान आरक्षित हैं। चौथा हरित क्षेत्र, जहां पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए कुल योजना क्षेत्र का 15 प्रतिशत से अधिक हिस्सा पूरी तहत हरित और खुले क्षेत्र के रूप में संरक्षित रहेगा। प्रस्तावित हाथरस अर्बन सेंटर की भौगोलिक स्थिति इसकी सबसे बड़ी ताकत है। यह नया शहर सीधे नोएडा (जेवर) अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे के कैचमेंट एरिया में आता है, जिसके लिए यीडा एक एक्सप्रेस-रोड नेटवर्क विकसित कर रहा है। इसके साथ ही यह क्षेत्र यमुना एक्सप्रेसवे के काफी करीब है और राष्ट्रीय राजमार्ग-93 (आगरा-अलीगढ़), बरेली-मथुरा राजमार्ग से बेहतर रूप से जुड़ा हुआ है। इसे आगरा के एक 'सैटेलाइट टाउन' के रूप में देखा जा रहा है, जिससे ताजनगरी का औद्योगिक दबाव भी कम होगा। यमुना औद्योगिक एक्सप्रेसवे विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी आर के सिंह ने बताया कि इस महायोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर दी गई है।
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भुवनेश्वर. ओडिशा पुलिस की अपराध शाखा ने कम से कम 46 ऐसी फर्जी वेबसाइटों को ब्लॉक किया है जो 16 जुलाई से शुरू होने वाली सालाना रथ यात्रा के दौरान पुरी आने वाले पर्यटकों को होटल में रहने की जगह और दूसरी सुविधाएं देने के नाम पर ठग रही थीं। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बताया कि ऑनलाइन होटल का कमरा बुक करते समय कथित तौर पर ठगी का शिकार हुए लोगों से कई शिकायतें मिलने के बाद अपराध शाखा के साइबर प्रकोष्ठ ने कार्रवाई शुरू की। पुरी के एक पुलिस थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में, राजस्थान के एक पर्यटक ने आरोप लगाया कि उसने एक वेबसाइट के जरिए अपने परिवार के लिए तीन कमरे बुक किए थे। हालांकि, होटल पहुंचने पर उन्हें पता चला कि उनके नाम पर ऐसी कोई बुकिंग नहीं की गयी थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "सिर्फ पिछले हफ्ते ही, अपराध शाखा के साइबर विशेषज्ञों ने पर्यटकों को ठगने वाली 46 फर्जी वेबसाइटों का पता लगाया। सबसे ज्यादा-11 वेबसाइट - 27 जून को ब्लॉक की गईं, जबकि 20 जून और 22 जून के बीच ऐसे 15 पोर्टल को बंद किया गया।" अधिकारी ने कहा, "हम रथ यात्रा के दौरान पुरी आने वाले पर्यटकों को निशाना बनाने वाली नकली होटल बुकिंग वेबसाइटों की पहचान करने और उन्हें ब्लॉक करने के लिए चौबीसों घंटे काम कर रहे हैं।" अधिकारी ने कहा कि धोखाधड़ी करने वाले सालाना त्योहार का फायदा उठा रहे थे। इस उत्सव में लाखों श्रद्धालु पुरी आते हैं। अधिकारी ने कहा, "उन्होंने कमरे का आकर्षक किराया, वीआईपी दर्शन और दूसरी सेवाओं की पेशकश करने वाले नकली पोर्टल बनाए हैं और मासूम श्रद्धालुओं से अग्रिम भुगतान की मांग कर रहे हैं।" काम करने के तरीके के बारे में बताते हुए अधिकारी ने कहा कि धोखाधड़ी करने वाले आम तौर पर असली होटलों की वेबसाइट की क्लोन बनाते थे या ऐसी मिलती-जुलती वेबसाइटें बनाते थे जो ऑनलाइन सर्च रिज़ल्ट में प्रमुखता से दिखाई देती थीं। अपराध शाखा के सूत्रों ने बताया कि पिछले एक साल में ओडिशा में ऑनलाइन होटल बुकिंग के दौरान ऐसे घोटालों में लगभग 30 पर्यटकों को करीब 5 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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श्रीनगर. जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को दक्षिण कश्मीर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा मंदिर में 'प्रथम पूजा' की, जिसके साथ इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गयी। तीन जुलाई से शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा के मद्देनजर उपराज्यपाल सिन्हा ने कहा कि प्रशासन, श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड, सेना, पुलिस, सुरक्षा बल, स्थानीय समुदाय, सेवा प्रदाता और स्वयंसेवक पूरी समन्वय भावना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। सिन्हा ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल पर लिखा, ''हर-हर महादेव! श्री अमरनाथ जी की पवित्र गुफा में 'प्रथम पूजा' करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिसके साथ वार्षिक अमरनाथ यात्रा की औपचारिक शुरुआत हुई। बाबा बर्फानी से सभी के लिए शांति, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना की।'' उन्होंने कहा, ''सभी संबंधित पक्ष श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षित, सुगम और यादगार यात्रा सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। बुनियादी ढांचे में उल्लेखनीय सुधार, बेहतर सुविधाओं और जम्मू कश्मीर के लोगों के अमूल्य सहयोग के साथ हम श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं, ताकि उन्हें आध्यात्मिक रूप से संतोषजनक यात्रा का अनुभव मिल सके। बाबा अमरनाथ जी सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें।
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नयी दिल्ली. केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने सोमवार को अपनी त्रि-भाषा नीति के कार्यान्वयन के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए, जिसमें कक्षा 10वीं के मौजूदा बैच के विद्यार्थियों को तीन भाषाएं पढ़ने से छूट दी गई है। कक्षा नौवीं के विद्यार्थियों को एक बार की राहत देते हुए, सीबीएसई ने स्पष्ट किया कि मौजूदा बैच को तीन भाषाएं पढ़नी होंगी, लेकिन वे दो विदेशी भाषाएं और एक भारतीय भाषा पढ़ सकते हैं। ये घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब एक महीने से अधिक पहले सीबीएसई ने घोषणा की थी कि एक जुलाई से 9वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए कम से कम दो भारतीय भाषाओं सहित तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। सीबीएसई के इस आदेश के खिलाफ कई विद्यार्थियों और अभिभावकों ने अदालत का रुख किया था।
सीबीएसई की अकादमिक निदेशक प्रज्ञा एम सिंह ने कहा, ''कक्षा 10वीं के मौजूदा बैच को त्रि-भाषा नीति का पालन नहीं करना होगा। कक्षा सातवीं से नौवीं के मौजूदा बैच को कक्षा 10 में जाने पर तीसरी भाषा में बोर्ड परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी।'' उन्होंने कहा, ''एक बार की राहत के रूप में वर्ष 2026-27 में पहले से 9वीं कक्षा में पढ़ रहे विद्यार्थी दो गैर-भारतीय (विदेशी) भाषाओं का अध्ययन जारी रख सकेंगे और उन्हें तीसरी भाषा के रूप में एक भारतीय भाषा अनिवार्य रूप से जोड़नी होगी।'' अप्रैल में, सीबीएसई ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा छह से त्रि-भाषा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने और कक्षा नौवीं के वास्ते गणित तथा विज्ञान के लिए दो-स्तरीय प्रणाली शुरू करने की घोषणा की थी। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत गणित और विज्ञान विषयों को दो स्तरों में पढ़ाया जाएगा-एक अनिवार्य मानक (स्टैंडर्ड) स्तर और दूसरा वैकल्पिक उन्नत (एडवांस्ड) स्तर। इसके तहत सभी विद्यार्थी 80 अंकों की समान परीक्षा देंगे। हालांकि, जो विद्यार्थी अधिक दक्षता हासिल करना चाहते हैं, वे अतिरिक्त उन्नत (एडवांस्ड) स्तर की परीक्षा भी दे सकेंगे। इस परीक्षा का उद्देश्य विषय की गहन वैचारिक समझ और उच्च स्तर की विश्लेषणात्मक एवं तार्किक सोच का आकलन करना होगा। सीबीएसई ने कहा था कि दो-स्तरीय (स्टैंडर्ड और एडवांस्ड) नयी व्यवस्था के तहत पहली 10वीं बोर्ड परीक्षा वर्ष 2028 में आयोजित की जाएगी। यह परीक्षा वर्ष 2026-27 में 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए होगी। हालांकि, 15 मई को बोर्ड ने स्पष्ट किया था कि विदेशी भाषा चुनने वाले विद्यार्थी ऐसा तभी कर सकेंगे, जब वे कम से कम दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन कर चुके हों। ऐसे में विदेशी भाषा या तो तीसरी भाषा के रूप में चुनी जा सकेगी या अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में पढ़ी जा सकेगी। - मरने से पहले बनाया वीडियोफरीदाबाद/ हरियाणा के फरीदाबाद में एक कारोबारी पत्नी के टॉर्चर से इस कदर तंग आ गया कि उसने अपनी जिंदगी ख़त्म कर ली. गारमेंट्स कारोबारी ने अपनी दुकान के अंदर फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया. सुसाइड से पहले पत्नी और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए वीडियो बनाया.मामला जिले के सेक्टर-3 स्थित हाउसिंग बोर्ड परिसर का है. वारदात रविवार (28 जून) सुबह की है. मृतक की पहचान 28 साल के राहुल के रूप में हुई है. जो बल्लभगढ़ के सेक्टर-3 स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी का रहने वाला था. उसने चार माह पहले सेक्टर-3 में किराये की दूकान पर गारमेंट बिजनेस शुरू किया था.कारोबारी ने किया सुसाइडदो साल राहुल की ज्योति (26) नाम की युवती से लव मैरिज हुई थी. शादी के बाद पत्नी राहुल को प्रताड़ित करती थी जिससे तंग आकर उसने सुसाइड कर लिया. उसने अपने दूकान को अंदर से बंद कर फांसी लगा ली. सुसाइड से पहले राहुल ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट की थी. जिसमे उसने पत्नी और ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का आरोप लगाया.पत्नी और ससुराल पक्ष पर आरोपवीडियो में उसने बताया, उसकी मौत के लिए उसकी पत्नी और ससुराल पक्ष जिम्मेदार हैं. उन्हें सजा मिलनी चाहिए. पत्नी ज्योति, सास वीना, ससुर बिट्टू और साली नीतू पर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे. शादी के बाद पत्नी चाहती थी कि माता पिता को छोड़ कर अकेले रहे. जिसके बाद सब छोड़कर अकेले रहा.पत्नी पीटती थी और परेशान करती थीपत्नी के कहने पर घर के सभी काम झाडू लगाना, बर्तन साफ करता था इसके बाद बावजूद वो पीटती थी और परेशान करती थी. ससुराल वाले भी मारपीट करते थे. जिस वजह से काफ़ी समय से मानसिक तनाव में था. वीडियो में आखरी में राहुल ने अपनी संपत्ति मां, बहन और भाइयों के नाम को करने को कही है.पत्नी और ससुराल पक्ष पर केस दर्जमामले की जानकारी मिलने के बाद पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच में जुट गयी है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है. साथ ही पत्नी और ससुराल पक्ष समेत सभी आरोपियों पर केस दर्ज कर लिया गया है. मामले में आगे की कार्रवाई जारी है.
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नयी दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने रविवार को कहा कि अगले पांच. छह दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर भारत के कई राज्यों में सक्रिय रूप से आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। वहीं, मौसमी बारिश में देरी के बीच राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दो वर्षों की सबसे गर्म सुबह दर्ज की गई।
आईएमडी ने एक विज्ञप्ति में कहा कि अगले दो से तीन दिनों के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर अरब सागर के कुछ और हिस्सों तथा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड सहित कुछ अन्य राज्यों के क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं।विभाग के अनुसार, इसके बाद अगले दो से तीन दिनों में मानसून के उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के कुछ क्षेत्रों में आगे बढ़ने की संभावना है। हालांकि, विभाग ने 28 और 29 जून को उत्तर प्रदेश में लू चलने की चेतावनी भी दी है, जो कुछ स्थानों पर गंभीर रूप ले सकती है। मौसम पूर्वानुमान एजेंसी 'स्काईमेट' के अनुसार, यदि परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो दिल्ली में चार जुलाई तक मानसून पहुंचने की संभावना है। इस बीच, दिल्ली में पिछले दो वर्षों में रविवार को सबसे गर्म सुबह दर्ज की गई जहां न्यूनतम तापमान 31.1 डिग्री सेल्सियस रहा जो औसत से 3.2 डिग्री अधिक है जबकि अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इससे पहले 14 जून, 2024 को शहर का न्यूनतम तापमान 33.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में लू की स्थिति रही और आईएमडी द्वारा शाम साढ़े पांच बजे दर्ज किया गया 'फील्स लाइक' तापमान लगभग 50.7 डिग्री सेल्सियस था यानि 50.7 डिग्री सेल्सियस तापमान 'जितनी तेज गर्मी महसूस हो रही थी'। हालांकि, सोमवार के लिए विभाग ने गरज के साथ बारिश का पूर्वानुमान जताया है।
स्काईमेट ने कहा कि मानसून के आगमन में देरी तथा शुष्क और नम हवाओं के परस्पर प्रभाव के कारण तापमान और आर्द्रता का स्तर दोनों असामान्य रूप से अधिक बना हुआ है। स्काईमेट के मौसम विज्ञान एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने कहा, ''सामान्यतः मानसून 27-28 जून तक दिल्ली पहुंच जाता है, जिसके बाद तापमान में गिरावट आती है और आर्द्रता बढ़ जाती है। इस वर्ष मानसून लगभग एक सप्ताह की देरी से पहुंचने की संभावना है। पाकिस्तान की ओर से आने वाली शुष्क पश्चिमी हवाएं तापमान बढ़ा रही हैं, जबकि अरब सागर से आने वाली दक्षिण-पश्चिमी हवाएं दिल्ली में नमी बढ़ा रही हैं।'' उन्होंने कहा, ''जब ये शुष्क और नम वायु द्रव्यमान आपस में मिलते हैं तो बादल तो बनते हैं, लेकिन व्यापक वर्षा के लिए पर्याप्त नमी नहीं होती। बादल आमतौर पर शाम चार या पांच बजे बनते हैं, तब तक दिन का अधिकतम तापमान दर्ज हो चुका होता है। यही कारण है कि अधिकतम तापमान और 'फील्स लाइक' तापमान दोनों असामान्य रूप से अधिक बने हुए हैं। उधर, शिमला स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने हिमाचल प्रदेश में चार जुलाई तक बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान जताया है। केंद्र ने कहा कि दो जुलाई से उत्तर-पश्चिम भारत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।विभाग ने 30 जून से चार जुलाई के बीच राज्य के अलग-अलग स्थानों पर 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं और गरज के साथ बारिश का 'अलर्ट' जारी किया है। शनिवार शाम से पिछले 24 घंटों के दौरान राज्य के कई हिस्सों में हल्की बारिश हुई जबकि शिमला, कांगड़ा और मंडी जिलों में गरज के साथ बारिश दर्ज की गई। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज का अधिकतम तापमान 43.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि लखनऊ में अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.6 डिग्री अधिक था।
मौसम विभाग ने कहा कि अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में लू चलने की संभावना है। वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ स्थानों पर गरज, बिजली चमकने और तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर का अधिकतम तापमान 33.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री अधिक था जबकि न्यूनतम तापमान 19.7 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.6 डिग्री अधिक है। जम्मू में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 3.8 डिग्री कम है। मौसम विभाग ने कहा कि 29 जून को जम्मू के मैदानी इलाकों और आसपास के क्षेत्रों में मानसून-पूर्व बारिश होने की संभावना है। साथ ही कुछ स्थानों पर तेज बारिश, गरज और तेज हवाएं चलने का भी पूर्वानुमान जताया गया है।
देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र ने कहा कि उत्तराखंड के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी अधिक बना हुआ है। केंद्र ने पर्वतीय जिलों के अलग-अलग स्थानों पर गरज, बिजली चमकने, तेज से अत्यधिक तेज बारिश और तेज हवाओं को लेकर 'येलो अलर्ट' जारी किया है। देहरादून में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से पांच डिग्री अधिक था जबकि न्यूनतम तापमान 26.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से तीन डिग्री अधिक है। पंजाब और हरियाणा के लिए आईएमडी ने 29 जून तथा एक और दो जुलाई को छिटपुट बारिश का पूर्वानुमान जताया है, जबकि कई स्थानों पर तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। एक से चार जुलाई के बीच दोनों राज्यों में गरज, बिजली चमकने तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार (झोंकों के साथ 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक) से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है।
राजस्थान में कई हिस्सों में उमस भरा मौसम बना रहा, हालांकि झुंझुनू जिले के पिलानी सहित कई स्थानों पर छिटपुट बारिश दर्ज की गई। पिलानी में सुबह से सात मिलीमीटर वर्षा हुई। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में कोटा और उदयपुर संभाग के कुछ हिस्सों में गरज के साथ मध्यम से भारी बारिश का पूर्वानुमान जताया है। साथ ही, दो जुलाई से दक्षिण-पूर्वी और पूर्वी राजस्थान में वर्षा गतिविधियों में तेजी आने की संभावना व्यक्त की है। -
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 135वें एपिसोड के माध्यम से देशवासियों को संबोधित किया। इस दौरान, उन्होंने कहा कि मुझे कई लोगों ने पत्र लिख कर एक खास विषय पर बात करने का सुझाव भेजा है। यह विषय गणेश उत्सव से जुड़ा है। वैसे तो गणेश उत्सव में अभी काफी समय बाकी है। लेकिन लोगों ने यह आग्रह किया है कि इस विषय पर अभी ही बात होनी चाहिए।
दरअसल, गणेश जी की मूर्तियां बनाने का काम बहुत पहले ही शुरू हो जाता है। मूर्ति बनाने वाले और मूर्तियों के व्यापार से जुड़े हुए लोग अभी से सक्रिय हो जाते हैं।मन की बात में पीएम मोदी ने कहा कि मेरा आप सभी के एक आग्रह है, आप प्रयास करें कि आपके घर, सोसाइटी या आसपास की जगहों पर गणपति बप्पा की जो मूर्ति स्थापित हो, वो हमारे देश की मिट्टी से बनी हो। वो हमारे अपने कुम्हारों और स्थानीय कलाकारों के हाथों तैयार हुई हो। जो लोग गणेश जी की मूर्तियां बनाते हैं, उनसे भी मेरा आग्रह है कि वे मिट्टी की मूर्तियों को प्राथमिकता दें। जो मूर्तियां खरीदते हैं वे भी यह जरूर देखें कि गणपति बप्पा की मूर्ति किससे बनी है और किस देश में तैयार हुई है।प्रधानमंत्री ने आगे कहा कि प्लास्टर ऑफ पेरिस से बनी मूर्तियां बिल्कुल न खरीदें। मिट्टी की मूर्तियां पूजा के बाद सहज रूप से पानी में विलीन हो जाती हैं। इससे हमारी नदियां, तालाबों और पर्यावरण की रक्षा होती है। इससे हमारी आस्था भी बनी रहती है और प्रकृति के प्रति हमारा दायित्व भी पूरा होता है। जब हम स्थानीय कारीगरों से मूर्ति खरीदते हैं, तो हम वोकल फॉर लोकल के संकल्प को मजबूत करते हैं।उन्होंने कहा कि मुझे विश्वास है कि इस बार गणेश उत्सव और ऐसी हर उत्सव में हम ऐसी सारी बातों पर जरूर गंभीरता से सोचेंगे और देशहित में कदम भी उठाएंगे। पीएम ने कहा कि हमारे देश की सबसे बड़ी शक्ति हमारे देश के लोग हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे छोटे-बड़े प्रयास, हमें बहुत कुछ सिखाते हैं। ये प्रयास बताते हैं कि जब मन में संकल्प हो और समाज का साथ मिले तो कोई भी बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
















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