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बेंगलुरु. बेंगलुरु में बुधवार शाम हुई भारी बारिश ने तबाही मचा दी, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि और तेज हवाओं के कारण पेड़ उखड़ गए, कई प्रमुख इलाकों में जलभराव हो गया और यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। बेंगलुरु के बड़े हिस्सों में लगभग एक घंटे तक अचानक और तेज बारिश हुई, जिससे पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए और निचले इलाकों में पानी भर गया। कई सड़कें जलमग्न होने के कारण आवागमन ठप हो गया, जिससे व्यस्त समय में यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। मूसलाधार बारिश के दौरान बॉरिंग एंड लेडी कर्जन अस्पताल की एक दीवार गिरने से सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें छह साल की एक बच्ची भी शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि मृतकों में दो लोग केरल के थे, जो अध्ययन दौरे पर आए थे। वे दीवार के पास शरण लिए हुए थे, तभी दीवार गिर गई। एक अन्य घटना में 35 वर्षीय रघु की बैनरघट्टा रोड स्थित वेगा सिटी मॉल के पास करंट लगने से मौत हो गई।
पुलिस ने बताया कि यारब नगर में एक अन्य घटना में छात्र सैयद सुफियान की बारिश के दौरान मोटरसाइकिल खड़ी करते समय बिजली के तार के संपर्क में आने से मौत हो गई। चामराजपेट में भी एक हादसे में मंजुनाथ नामक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जब तूफान के दौरान घर की छत का एक हिस्सा अचानक ढह गया। अचानक हुई इस बारिश ने पूरे शहर में भारी नुकसान पहुंचाया।
पुलिस ने बताया, ''अब तक बारिश से जुड़े हादसों में 10 लोगों की मौत हो चुकी है।'' इन हादसों में दीवार गिरना, करंट लगना और ढांचागत नुकसान शामिल हैं। नगर निकाय के अनुसार, बेंगलुरु में कम से कम 87 पेड़ उखड़ गए और 131 शाखाएं टूट गईं, जिससे जनजीवन प्रभावित हुआ। इनमें से 60 पेड़ और 98 शाखाएं हटा दी गई हैं, जबकि मरम्मत का काम जारी है। सड़क किनारे खड़ी कई कारें और दोपहिया वाहन गिरे हुए पेड़ों के नीचे दब गए।
प्रमुख चौराहों और अंडरपास में जलभराव हो गया, जिसमें केआर सर्किल अंडरपास पूरी तरह डूब गया, जिससे पुलिस को वहां अवरोधक लगाने पड़े। यातायात जाम के कारण यात्री घंटों फंसे रहे। अधिकारियों ने बताया कि कई इलाकों में इमारतों को आंशिक नुकसान पहुंचा है और अचानक इतनी तीव्रता के तूफान के लिए लोग तैयार नहीं थे। प्रशासन ने अगले तीन दिनों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा।जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India, ECI) ने मतगणना केंद्रों में अनाधिकृत प्रवेश को पूरी तरह रोकने के लिए एक नई और आधुनिक क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र मॉड्यूल शुरू करने की घोषणा की है। यह प्रणाली ईसीआईएनईटी प्लेटफॉर्म पर कार्य करेगी और मतगणना प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित तथा दक्ष बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
आयोग द्वारा जारी प्रेस नोट के अनुसार, यह नई व्यवस्था 4 मई 2026 को होने वाली मतगणना से लागू होगी। इसमें असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी की विधानसभा चुनावों के साथ ही 5 राज्यों के 7 विधानसभा क्षेत्रों में उपचुनाव शामिल हैं। बाद में इसे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के सभी भविष्य के आम चुनावों और उपचुनावों में विस्तारित किया जाएगा।यह पहल पिछले एक वर्ष में चुनाव आयोग द्वारा की गई 30 से अधिक सुधारात्मक पहलों की कड़ी में शामिल है। इससे पहले ब्लॉक स्तर के अधिकारियों (बीएलओ) के लिए भी मानकीकृत क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र शुरू किए जा चुके हैं। नई प्रणाली मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के स्तर को और ऊंचा उठाएगी।मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए त्रि-स्तरीय सुरक्षा तंत्र बनाया गया है। इनमें पहले और दूसरे स्तर पर रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) द्वारा जारी पारंपरिक फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी। तीसरा और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरा (मतगणना कक्ष के निकट) में प्रवेश केवल क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही मिलेगा। इससे किसी भी अनधिकृत व्यक्ति के अंदर जाने की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी।नए क्यूआर कोड-आधारित फोटो पहचान पत्र उन सभी अधिकृत व्यक्तियों पर लागू होंगे जिन्हें मतगणना केंद्रों और मतगणना कक्षों में प्रवेश की अनुमति दी गई है। इनमें मुख्य रूप से रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ), सहायक रिटर्निंग ऑफिसर, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी स्टाफ, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट, मतगणना एजेंट और अन्य अधिकृत अधिकारी शामिल हैं।अधिकृत मीडिया कर्मियों की सुविधा के लिए हर मतगणना केंद्र पर मतगणना कक्षों के पास एक अलग मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा। मीडिया कर्मियों का प्रवेश पहले की भांति आयोग द्वारा जारी प्राधिकार पत्रों के आधार पर ही रहेगा। जिला निर्वाचन अधिकारियों और रिटर्निंग अधिकारियों को इस प्रणाली के सुचारू कार्यान्वयन के लिए सभी जरूरी व्यवस्थाएं करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें जांच चौकियों पर प्रशिक्षित कर्मचारियों की तैनाती भी शामिल है ताकि पहुंच नियंत्रण निर्बाध और सुरक्षित रहे।सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों, रिटर्निंग अधिकारियों और सहायक रिटर्निंग अधिकारियों को मतगणना प्रक्रिया में पारदर्शिता, सुरक्षा और दक्षता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। -
नई दिल्ली। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान 1 मई को ओडिशा के दौरे पर रहेंगे, जहां वे प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना-IV (PMGSY-IV) के शुभारंभ के साथ राज्य को बड़ी विकासात्मक सौगात देंगे। इस दौरान 1,701.84 किलोमीटर लंबाई की 827 सड़क परियोजनाओं को करीब 1,698.04 करोड़ रुपए की लागत से आगे बढ़ाया जाएगा।
यह कार्यक्रम रायगड़ा के आईएसीआर ग्राउंड, बरिजोला में आयोजित किया जाएगा, जिसमें मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री मुख्यमंत्री को PMGSY-IV की स्वीकृति पत्र सौंपेंगे और संयुक्त रूप से परियोजनाओं का शुभारंभ एवं शिलान्यास किया जाएगा।इस पहल से 898 बसावटों को पहली बार बारहमासी सड़क संपर्क मिलेगा। इससे स्कूल, अस्पताल, ग्रामीण मंडियों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंच आसान होगी और ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास को गति मिलेगी।नई सड़क परियोजनाओं से स्थानीय व्यापार, रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद है।प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत ओडिशा पहले ही महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल कर चुका है। राज्य में अब तक 17,963 सड़कों (74,725 किमी) और 707 पुलों को स्वीकृति मिल चुकी है, जबकि 17,760 सड़कों (71,742 किमी) और 658 पुलों का निर्माण पूरा हो चुका है। इस कार्यक्रम में ग्रामीण विकास, पंचायती राज एवं पेयजल मंत्री रबी नारायण नायक सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल होंगे। यह पहल नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र और राज्य के साझा विकास संकल्प को भी दर्शाती है। -
नई दिल्ली। प्रसिद्ध गायक और पद्मश्री से सम्मानित कैलाश खेर अपने हालिया आध्यात्मिक एल्बम ‘जोगी’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सिंगर ने ऋषिकेश के परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती के सानिध्य में नया एल्बम लॉन्च किया और अब वे बद्रीनाथ धाम में नारायण की भक्ति में रंगे दिखे। सिंगर ने अपने साथ दर्शन करने आए सभी श्रद्धालुओं को अपने गीत से मंत्रमुग्ध कर दिया।
बीते बुधवार को कैलाश खेर बद्रीनाथ धाम दर्शन करने पहुंचे थे। सिंगर ने मंदिर में पूरे विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना की। अब अभिनेता ने एक बहुत ही प्यारा वीडियो शेयर किया है जिसमें वे भक्तों के सामने श्रीमन नारायण नारायण हरि हरि का जाप कर रहे हैं। भक्त भी सिंगर के साथ मिलकर नारायण का ध्यान कर रहे हैं। इस मौके पर सिंगर पीले कपड़ों में नजर आए और माथे पर तुलसी की माला धारण कर रखी है। सिंगर इस तरीके से पूरे होश के साथ नारायण नाम का जाप कर रहे हैं, वो सुनकर किसी को भी गूजबंप्स आना तय है।बता दें कि 23 अप्रैल को भव्य पूजा-अर्चना के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए थे। छोटी चार धाम यात्रा में बद्रीनाथ धाम महत्वपूर्ण स्थान रखता है। भक्त गंगोत्री और यमुनोत्री के बाद बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम के दर्शन करते हैं। बद्रीनाथ धाम भारी बर्फबारी की वजह से 6 माह तक बंद रहते हैं और अप्रैल के महीने में मंदिर के कपाट खोले जाते हैं।इससे पहले सिंगर को हरिद्वार के गंगा घाट पर सिंगर के गंगा आरती के समय बाबा के भक्ति से भरे गीत गाते हुए देखा गया था। सिंगर फिलहाल धार्मिक यात्रा पर है और अपने पड़ाव की जर्नी को फैंस के साथ शेयर करते रहते हैं। बात अगर उनके नए एलबम सॉन्ग की करें तो भक्ति गीत में आदि शंकराचार्य के संन्यास से लेकर हिंदू शास्त्रार्थ, धर्म पुनर्जागरण और भारत के आध्यात्मिक क्षेत्रों की शक्ति को प्रभावी तरीके से शब्दों में पिरोकर लिखा गया है। भक्ति गीत सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है। - जबलपुर। जिला मुख्यालय से करीब 25 किमी दूर बरगी बांध में गुरुवार शाम आंधी-तूफान के बीच बड़ा हादसा हो गया। तेज मौसम के चलते यात्रियों से भरा एक क्रूज अचानक डूब गया। पर्यटन विभाग द्वारा संचालित क्रूज में 35-40 लोग सवार थे। घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए हैं। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है और गोताखोर लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। हादसे में अब तक पांच पर्यटकों के मौत हो चुकी है। रेस्क्यू टीम को पांचों के शव मिल चुके है। लगभग 15 लोगों को बचा लिया गया है। 15 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। रेस्क्यू जारी है।घटना गुरुवार की शाम लगभग छह बजे की है। बताया जाता है कि क्रूज पर्यटकों को लेकर लहरों के बीच जा रहा था। तभी अचानक तेज आंधी चली और क्रूज अनियंत्रित होकर बरगी बांध की लहरों में समा गया। क्रूज कैप्टन महेश पटेल भी लापता बताए जा रहे हैं। बचाव दल उनकी खोज में जुटा है।
- सुलतानपुर. सुलतानपुर जिले में बुधवार को तेज आंधी-तूफान और बारिश से जुड़ी घटनाओं में दो बच्चों सहित सात लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि कुड़वार थाना क्षेत्र के पूरे शिववंश दुबे निवासी 20 वर्षीय महेंद्र तिवारी की आंधी तूफान की वजह से गिरे बिजली के खंभे की चपेट में आने से मौत हो गई। उन्होंने बताया कि महेंद्र अपनी बहन की शादी के लिए 10 दिन पहले ही घर लौटा था और बुधवार शाम को उसे परिवार के साथ बहन कौशिक का तिलक लेकर अलीगंज बाजार जाना था। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र में आंधी तूफान जनित घटनाओं में दो लोगों की मौत हो गई।उन्होंने बताया कि कस्बा माफियात में सुरेश कुमार सोनकर की आठ वर्षीय बेटी महिमा की मौत आंधी तूफान के दौरान छप्पर पर ईंट गिरने से हुई। सूत्रों ने बताया कि बल्दीराय थाना क्षेत्र के ही सिंघनी गांव में 58 वर्षीय रामबरन के घर पर तेज आंधी के कारण पेड़ गिर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई वहीं गंभीर रूप से घायल उसकी पत्नी श्यामलली को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूत्रों के मुताबिक एक अन्य घटना में हलियापुर थाना क्षेत्र के पूरे निधई तिवारी मजरे डोभियारा में 35 वर्षीय रीता की मौत कच्ची दीवार और छप्पर गिरने से हो गयी। एक अन्य घटना में अखंडनगर थाना क्षेत्र के बरामदपुर गांव में आठ वर्षीय सुरेमन की मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में विकास (16) और किशन (11) गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज अम्बेडकरनगर में जारी है। सूत्रों के अनुसार बंधुआकला थाना के अलीगंज दाऊदपुर में घर के पास जामुन का पेड़ गिरने से उसके नीचे दबकर सुषमा गुप्ता (40) की मौत हो गई है। उधर, कूरेभार थाना क्षेत्र में पटना मनीपुर में आंधी पानी के दौरान गिरी कच्ची दीवार के मलबे में दबकर 70 वर्षीय केवला देवी की मौत हो गई है।--
- मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने प्राकृतिक आपदा से प्रभावित क्षेत्रों के लिए राहत उपायों पर संशोधित दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि बैंक अब उधारकर्ताओं के अनुरोध का इंतजार किए बिना ही उन्हें राहत दे सकेंगे। नए नियम एक जुलाई, 2026 से लागू हो जाएंगे। केंद्रीय बैंक ने अपने निर्देश में कहा है कि कर्जदाताओं को सभी पात्र उधारकर्ताओं को अपने स्तर पर ही राहत देने की अनुमति होगी। हालांकि ग्राहक चाहें तो प्राकृतिक आपदा घोषित होने के 135 दिनों के भीतर इससे बाहर निकल सकते हैं।नए दिशा-निर्देश वाणिज्यिक बैंकों, लघु वित्त बैंकों, सहकारी बैंकों, एनबीएफसी और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थानों पर लागू होंगे। आरबीआई के मुताबिक, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बैंक अस्थायी परिसरों से शाखाएं चला सकेंगे और सैटेलाइट ऑफिस, एक्सटेंशन काउंटर या मोबाइल बैंकिंग के जरिए सेवाएं बहाल कर सकेंगे। एटीएम सेवाओं को जल्द चालू करने और नकदी जरूरतों के लिए वैकल्पिक इंतजाम करने के भी निर्देश दिए गए हैं। बैंक अपने विवेक से एक वर्ष तक शुल्क और अन्य मदों में छूट या कटौती कर सकते हैं। राहत केवल उन खातों को मिलेगी जो 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में हैं और आपदा के समय 30 दिन से अधिक बकाया में नहीं थे। आरबीआई ने यह भी कहा, "अगर आपदा के बाद कोई खाता गैर-निष्पादित संपत्ति (एनपीए) हो जाता है, तो समाधान योजना लागू होने पर उसे फिर से 'स्टैंडर्ड' श्रेणी में अद्यतन किया जा सकेगा।" साथ ही, बैंकों को ऐसे खातों पर बकाया कर्ज का अतिरिक्त पांच प्रतिशत प्रावधान करना होगा, जो मौजूदा प्रावधानों के अतिरिक्त होगा। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि यह ढांचा आपदा से प्रभावित एवं किसी तरह के वित्तीय तनाव से मुक्त उधारकर्ताओं को राहत देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है और यह मौजूदा नियमों की तुलना में अधिक लचीला है।--
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वाराणसी . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) समेत विपक्षी दलों पर महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को रोकने के लिए हमला किया और कहा कि वह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि महिलाओं के आरक्षण के अधिकार को लागू कराने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। संसद में इस विधेयक के गिरने के बाद पहली बार अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के दो दिवसीय दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को 'जन-आक्रोश महिला सम्मेलन' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा, ''आज इस कार्यक्रम में आप सभी बहनों-बेटियों से एक महायज्ञ की शुरुआत के लिए आशीर्वाद लेने आया हूं।''
उन्होंने भरोसा दिलाते हुए कहा कि ''काशी के सांसद, देश के प्रधानमंत्री के तौर पर मुझे देश हित में एक बड़े लक्ष्य की प्राप्ति के लिए आप सबका आशीर्वाद चाहिए। यह बड़ा लक्ष्य लोकसभा विधानसभा में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करना है।'' मोदी अपने सम्बोधन में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक के संसद में पारित नहीं होने के मुद्दे को लेकर विपक्ष पर खासे हमलावर रहे। प्रधानमंत्री ने कहा कि नारी शक्ति ही विकसित भारत का सबसे मजबूत स्तम्भ है और आज हर क्षेत्र और हर मोर्चे पर भारत की बेटियां इतना शानदार काम कर रही हैं तो स्वाभाविक है कि नीति निर्माण और राष्ट्र के भविष्य से जुड़े फैसलों में भी बहनों और बेटियों की भूमिका और बढ़नी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने नया संसद भवन बनने के बाद सबसे पहले संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का कानून पारित करने का ही काम किया था और इसे जल्द लागू करने के लिये पिछले दिनों में संसद में संविधान संशोधन का प्रस्ताव लाया गया था लेकिन 40 साल से इस मामले को लटकाये कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक जैसी पार्टियों ने महिलाओं को एक बार फिर 'धोखा' दिया। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा, ''असली बात यह है कि यह सारे परिवारवादी और तुष्टीकरण में डूबे दल नारी शक्ति से डरे हुए हैं। यह परिवारवादी दल देश की उन बेटियों को विधानसभा और संसद में नहीं आने देना चाहते हैं जो कॉलेज कैंपस से लेकर पंचायतों और स्थानीय निकायों तक हर जगह अपने दम पर नेतृत्व दे रही हैं। यह जानते हैं कि अगर धरातल पर काम करने वाली बेटियां ऊपर आ गईं तो इनका नियंत्रण खत्म हो जाएगा, इनकी सत्ता पर सवाल खड़े हो जाएंगे, इसलिए ही वे संसद में हुए विरोध में सबसे आगे रहे।'' उन्होंने पश्चिम बंगाल तथा चुनाव से गुजर रहे अन्य राज्यों में हुए बम्पर मतदान को लेकर दावा करते हुए कहा, ''देश की बहने और बेटियां महिला आरक्षण का विरोध करने वाले दलों की कुटिल मंशा को पहचान गयीं और असम, केरलम, पुडुचेरी, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में बहनों ने रिकार्ड मतदान किया है। महिला आरक्षण विरोधी दलों को अंदाजा नहीं है कि बहनों का एक वोट महिला विरोधी इन दलों को सजा देने के लिए हुआ है।''मोदी ने कहा कि कांग्रेस और सपा जैसे दलों की वजह से महिला आरक्षण से जुड़ा सरकार का प्रयास संसद में भले ही सफल नहीं हो पाया लेकिन वह सभी महिलाओं को फिर से भरोसा दिलाते हैं कि उनका आरक्षण का हक लागू करवाने में वह कोई कोर—कसर बाकी नहीं छोड़ेंगे।
महिलाओं को विशेष महत्व देते हुए उन्होंने कहा कि ''हमारी काशी माता श्रृंगार गौरी, माता अन्नपूर्णा, माता विशालाक्षी, माता संकटा और मां गंगा जैसी दिव्य शक्तियों की भूमि है, ऐसे में आप सभी बहन बेटियों के इस समागम ने इस अवसर को बहुत दिव्य बना दिया।' प्रधानमंत्री ने कभी महिलाओं से भोजपुरी तो कभी हिंदी में संवाद करते हुए मोदी ने कहा कि अतीत में बहनों-बेटियों को बहुत संघर्ष करना पड़ा है और काशी की बहनों ने भी कई तरह की मुश्किलें देखी हैं। मोदी ने पूर्वांचल में बोली जाने वाली भोजपुरी में किये जाने वाले संवादों को दोहराते हुए कहा ''लोग अतीत में महिलाओं से कहते ''तू का करबू'' ''तूहे का जरूरत ह'', ''ई काम तोहसे ना हो पाई।' प्रधानमंत्री ने कहा कि कई बार तो सवाल भी नहीं पूछे जाते थे, सीधे फरमान सुनाया जाता था।
मोदी ने कहा, ''जब 25 साल पहले गुजरात में मुख्यमंत्री बना था तो सबसे पहले मैंने ऐसी धारणाओं को तोड़ने का प्रयास किया था। उस दौरान बेटियों के लिए समर्पित दो बड़ी योजनाएं शुरू की गई थीं, एक थी शाला प्रवेश उत्सव, जो स्कूल में बच्चियों की दाखिले की मुहिम थी और दूसरी थी मुख्यमंत्री कन्या केलवणि निधि योजना, ताकि स्कूल की फीस देने में बच्चियों की मदद की जा सके। तब से आज तक हमारी सरकार की नीतियों में महिला कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।''प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर अपनी सरकार द्वारा महिलाओं की सुविधा के लिये शुरू की गयी विभिन्न परियोजनाओं का विस्तार से जिक्र किया और कहा कि वर्ष 2014 में केंद्र में उनकी सरकार बनने के बाद देश में 12 करोड़ से अधिक शौचालयों का निर्माण किया गया, 30 करोड़ से अधिक महिलाओं का बैंक खाता खुला और ढाई करोड़ से ज्यादा घरों में बिजली का कनेक्शन दिया गया।
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार का पूरा जोर बहनों की सुविधा और सुरक्षा पर रहा है क्योंकि यही दो चीजें हैं जो सशक्तीकरण की नींव को मजबूत करती हैं।मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जब समाजवादी पार्टी की सरकार थी तो बेटियों का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया था लेकिन अब भाजपा की सरकार में बेटियों के विरुद्ध गलत सोच रखने वाला अच्छी तरह से जानता है कि उसका अंजाम क्या होगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता ने भी बहनों और बेटियों को सुरक्षा का नया भरोसा दिया है क्योंकि इसके तहत महिलाओं के विरुद्ध गंभीर अपराधों में फैसले तेजी से आने लगे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब महिलाओं की आर्थिक शक्ति बढ़ती है तो घर में उनकी आवाज भी उतनी ही बुलंद हो जाती है इसलिए सुविधा और सुरक्षा का विश्वास देने के साथ-साथ सरकार ने बहनों की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने पर भी बल दिया है। उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में देश की करीब 10 करोड़ बहने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हैं जिन्हें लाखों रुपये की मदद मिल रही है। इस मौके पर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष व केन्द्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।
इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या तथा अन्य महिलाओं ने प्रधानमंत्री को विभिन्न कलाकृतियां भेंटकर उनका स्वागत किया। इस आयोजन की विशेषता रही कि इसकी पूरी कमान महिलाओं ने संभाली। यहां तक कि सुरक्षा व्यवस्था में महिला पुलिसकर्मी तैनात की गईं। -
वाराणसी . प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने दो दिवसीय दौरे के दूसरे दिन बुधवार सुबह वाराणसी में रोड शो किया, जिसे देखने के लिए सड़क पर भारी भीड़ उमड़ी। पार्टी नेताओं ने यह जानकारी दी। रोड शो बनारस लोकोमोटिव वर्क्स (बीएलडब्लू) से शुरू हुआ और लहरतारा, कचहरी, आंबेडकर चौराहा, चौकाघाट, तेलियाबाग, लहुराबीर और मैदागिन से होते हुए काशी विश्वनाथ धाम पर समाप्त हुआ, जहां प्रधानमंत्री पूजा-अर्चना करेंगे। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मीडिया प्रभारी अरविंद मिश्रा ने बताया कि लोग प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए उत्सुक दिखे और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी और स्थानीय निवासी पूरे मार्ग में कतारों में खड़े रहे। प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए श्रद्धालु और समर्थक ''हर हर महादेव'' और ''जय श्री राम'' के जयकारे लगाते नजर आए। प्रधानमंत्री ने भी हाथ जोड़कर और हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया। मिश्रा ने बताया कि पूरे मार्ग में स्वागत के लिए कई जगह निर्धारित की गई थी, जहां पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा तथा ढोल और शंख बजाकर प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पार्टी नेताओं का कहना है कि लगभग 14 किलोमीटर लंबा यह रोड शो शहर में अब तक के सबसे बड़े रोड शो में से एक है।
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नयी दिल्ली. पश्चिम बंगाल में इस चुनाव के लिये मतदान समाप्त होने से पहले ही, भाजपा ने उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित सात राज्यों में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी सूत्रों ने बताया कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में इन सात राज्यों में पहले से ही "जमीनी स्तर का काम" शुरू कर दिया है। एक सूत्र ने बताया, "भारतीय राजनीति में एक मशहूर कहावत है: 'भाजपा कभी सोती नहीं'। पिछले तीन-चार दिनों की राजनीतिक गतिविधियां इसका जीता-जागता सबूत हैं। जहां विपक्षी दल पश्चिम बंगाल में मतदान के अंतिम चरण में व्यस्त हैं, वहीं भाजपा ने अन्य राज्यों में अपनी स्थिति मजबूत करना शुरू कर दिया है।" सूत्र ने कहा, "जहां अधिकांश क्षेत्रीय और राष्ट्रीय पार्टियां चुनाव नजदीक आने पर ही अपनी नीतियां और रणनीतियां बनाती हैं, वहीं भाजपा साल भर चौबीसों घंटे सक्रिय रहती है। पार्टी 'इंतजार करो और देखो' की नीति में विश्वास नहीं रखती। हमारे लिए, एक चुनाव का समापन अगले चुनाव की तैयारियों की शुरुआत का प्रतीक है।" पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को हुआ था, वहीं राज्य 29 अप्रैल को दूसरे और अंतिम चरण के मतदान के लिए तैयार है। तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान हुआ था। केरल, असम और पुडुचेरी में 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था। सभी पांच विधानसभा चुनावों के परिणाम चार मई को मतों की गिनती के साथ घोषित किए जाएंगे। नवीन ने चुनाव वाले इन पांचों राज्यों का कई बार दौरा किया, वहां रहकर तैयारियों की समीक्षा की और पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं के साथ कई "रणनीतिक बैठकें" कीं, साथ ही चुनाव प्रचार में भी भाग लिया। सूत्रों ने बताया कि इन व्यस्त कार्यक्रमों के बीच, भाजपा अध्यक्ष ने विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश का दौरा भी किया और वहां अपने प्रवास के दौरान, उन्होंने इन राज्यों में पार्टी की चुनावी रणनीति की योजना बनाने के लिए प्रमुख पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें भी कीं। उन्होंने आगे बताया कि नवीन अगले सप्ताह उत्तराखंड का दौरा करने वाले हैं।
गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। भाजपा को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव जीतने का पूरा भरोसा है, साथ ही वह अपने सहयोगियों के साथ असम और पुडुचेरी में भी सत्ता में वापसी करेगी। पार्टी को यह भी उम्मीद है कि इस बार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन तमिलनाडु में द्रमुक को सत्ता से बेदखल कर देगा और केरल विधानसभा चुनाव में अपनी पकड़ मजबूत कर पाएगी। पार्टी के एक सूत्र ने कहा, "हमें इन विधानसभा चुनावों में अपनी सफलता का पूरा भरोसा है। लेकिन पार्टी केवल तात्कालिक परिणामों पर ही ध्यान नहीं दे रही है। वह अपने संगठनात्मक विकास पर भी ध्यान दे रही है, जिसमें उन राज्यों में अपनी पकड़ मजबूत करना शामिल है जहां वह मजबूत है और अन्य राज्यों में भी अपना प्रभाव बढ़ाना शामिल है।" सूत्र ने कहा, "यह 'दीर्घकालिक दृष्टि' और 'कार्यकर्ता-आधारित राजनीति' ही है जो भाजपा को चुनावी तंत्र के मामले में अजेय बनाती है।"
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नयी दिल्ली. चुनाव पश्चात जारी कई सर्वेक्षणों (एग्जिट पोल) में पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को बढ़त मिलने और असम में उसके जीत की हैट्रिक लगाने तथा केरल में यूडीएफ की जीत की संभावना जताई गई है, जबकि एक सर्वे ने तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके के बड़ा उलटफेर करने का अनुमान लगाया है। प्रमुख चुनाव सर्वेक्षण एजेंसी 'एक्सिस माय इंडिया' का अनुमान है कि तमिलगा वेट्री कषगम(टीवीके) अपने पहले ही चुनाव में 98 से 120 सीटों के साथ सरकार बनाने के करीब पहुंच सकती है। यदि असल नतीजों में यही रहता है तो यह विजय का चुनावी राजनीति में करिश्माई पदार्पण होगा। यह पार्टी फरवरी, 2024 में अस्तित्व में आई है।
पश्चिम बंगाल में बुधवार को दूसरे एवं अंतिम चरण में मतदान संपन्न हुआ। इससे पहले बीते 23 अप्रैल को राज्य की 152 सीटों पर मतदान हुआ था। प्रदेश में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। केरल, असम और पुडुचेरी में नौ अप्रैल तथा तमिलनाडु में 23 अप्रैल को मतदान संपन्न हुआ था।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बुधवार शाम आए कई चुनाव सर्वेक्षण एजेंसियों के सर्वे में भाजपा को निर्णायक बढ़त या बहुमत मिलने की संभावना जताई गई। हालांकि कुछ सर्वेक्षणों ने तृणमूल कांग्रेस की सरकार बरकरार रहने का अनुमान जताया है। 'पीपुल्स प्लस' के सर्वे में कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस 177 से 187 सीटें हासिल करके अपनी सत्ता बरकार रख सकती है। भाजपा को 95 से 110 सीटें मिलने का अनुमान है। कांग्रेस को एक से तीन सीट मिलने की संभावना जताई गई है। 'जनमत पोल्स' के एग्जिट पोल के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को 195 से 205 सीटें मिल सकती हैं तो भाजपा को 80 से 90 सीटों से ही संतोष करना पड़ सकता है। 'पोल डायरी' के सर्वे का अनुमान है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 142 से 171 सीटों के साथ पहली बार सत्ता में आ सकती है। इस सर्वेक्षण के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस को 99 से 127 से ही संतोष करना पड़ सकता है। 'मैट्रिज' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा 146 से 161 सीटों के साथ सरकार बना सकती है और टीएमसी को 125 से 140 सीटें मिल सकती है तथा वह सत्ता से बाहर हो सकती है। 'पी-मार्क' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल में भाजपा को 150 से 175 सीटें मिल सकती हैं तो टीएमसी को 118-138 सीटें मिलने का अनुमान है। असम को लेकर सभी सर्वेक्षणों में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत की संभावना जताई गई है।
'एक्सिस माय इंडिया' के सर्वेक्षण के अनुसार, राजग 88 से 100 सीटें जीत सकता है तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन को 24 से 36 सीटें मिल सकती हैं। 'मैट्रिज' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि असम में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 85 से 95 सीटें के साथ प्रचंड बहुमत मिल सकता है, जबकि कांग्रेस नीत गठबंधन 25 से 32 सीटों पर ही सिमट सकता है। 'जनमत पोल्स' के अनुसार, असम में भाजपा नीत गठबंधन को 87 से 98 सीटें हासिल हो सकती हैं तथा कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन 29 से 30 सीटों पर ही सिमट सकता है। 'जेवीसी' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि असम में भाजपा की अगुवाई वाले गठबंधन को 88 से 101 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिल सकता है, वहीं कांग्रेस नीत गठबंधन को सिर्फ 23 से 33 सीटें मिलने का अनुमान है। असम में विधानसभा की कुल 126 सीटें हैं।
केरल को लेकर लगभग सभी सर्वेक्षण एजेंसियों ने सत्ता से वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) की सत्ता से विदाई और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) की जीत की संभावना जताई है। 'एक्सिस माय इंडिया' के एग्जिट पोल में कहा गया है कि यूडीएफ को 78 से 90 सीटें मिल सकती हैं, वहीं एलडीएफ को 49 से 62 सीटें मिलने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' ने केरल में यूडीएफ को 75 से 85 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना जताई है। उसका अनुमान है कि माकपा के नेतृत्व वाले एलडीएफ को 55 से 65 सीटें ही मिलेंगी और वह सत्ता से बाहर हो जाएगा। 'वोट वाइब' के सर्वे में कहा गया है कि यूडीएफ को 70 से 80 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि एलडीएफ को 58 से 68 सीटें मिल सकती हैं। 'पीपुल्स इनसाइट' के सर्वेक्षण के अनुसार, यूडीएफ को 66 से 76 सीटें हासिल हो सकती हैं तथा एलडीएफ को 58 से 68 सीटें हासिल होने का अनुमान है। उसने भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन को 10 से 14 सीटें मिलने का अनुमान जताया है। केरल में विधानसभ की 140 सीटें हैं।
तमिलनाडु में अधिकतर सर्वेक्षणों ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन की जीत का अनुमान जताया है, हालांकि 'एक्सिस माय इंडिया' ने टीवीके की पहले ही चुनाव में बहुमत के करीब पहुंचने का अनुमान लगाया है। उसका आकलन है कि विजय की पार्टी को 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 से 120 सीटें मिल सकती हैं। टीवीके का गठन फरवरी, 2024 में हुआ था।
'एक्सिस माय इंडिया' के सर्वेक्षण में द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को 92 से 110 सीटें मिलने तथा अन्नाद्रमुक की अगुवाई वाले राजग को सिर्फ 22 से 32 सीटें हासिल होने का अनुमान है। 'पीपुल्स प्लस' ने द्रमुक के नेतृत्व वाले गठबंधन को 125 से 145 सीटें मिलने का अनुमान लगाया है। उसका अनुमान है कि राजग को 65 से 80 तथा अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम(टीवीके) को 18 से 24 सीटें मिलेंगी। 'मैट्रिज' के सर्वेक्षण में कहा गया है कि द्रमुक के नेतृत्व वाला गठबंधन 122 से 132 सीटों के साथ सत्ता बरकरार रख सकता है तथा अन्नाद्रमुक के नेतृत्व वाले राजग को 87 से 100 सीटें मिलने का अनुमान है। टीवीके को 10 से 12 हासिल हो सकती हैं। पुडुचेरी को लेकर ज्यादातर सर्वेक्षण का अनुमान है कि ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस (एआईएनआरसी) की अगुवाई वाले राजग गठबंधन को बहुमत मिल सकता है। 'एक्सिस मॉय इंडिया' के एग्जिट पोल के अनुसार, पुडुचेरी में राजग को 16 से 20 सीटें मिल सकती हैं, वहीं कांग्रेस और द्रमुक के गठबंधन को छह से आठ सीटें मिलने का अनुमान है। टीवीके को दो से चार सीटें मिलने की संभावना जताई गई है। पीपुल्स प्लस के अनुसार, राजग को 16-18 सीटें मिल सकती हैं और कांग्रेस और द्रमुक को 10-12 सीटें मिल सकती हैं। 'कामख्या एनालिटिक्स' ने पुडुचेरी में राजग को 17 से 24 सीटों के पूर्ण बहुमत हासिल करने का अनुमान जताया है। उसका आकलन है कि कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन चार से सात सीटों पर ही सिमट सकता है। पुडुचेरी में विधानसभा की 30 सीटें हैं। -
नयी दिल्ली/ देश भर में जारी लू की स्थिति के बीच श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि उसने श्रमिकों को सूरज के सीधे संपर्क से बचाने के लिए देशव्यापी परामर्श जारी किया है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और प्रशासकों को भेजे गए एक पत्र में मंत्रालय ने इसके लिए बहु-क्षेत्रीय और बहु-आयामी नजरिये की जरूरत पर जोर दिया है। इसमें विशेष रूप से बाहरी और श्रम-प्रधान क्षेत्रों में कार्यरत लोगों की सुरक्षा के लिए एक समन्वित योजना की बात कही गई है। बयान के अनुसार मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से देश भर में बढ़ते तापमान और लू की स्थिति के प्रतिकूल प्रभावों से श्रमिकों और मजदूरों को बचाने के लिए तत्काल उपाय करने का आग्रह किया है। इन उपायों में विभिन्न क्षेत्रों में कर्मचारियों के लिए काम के घंटों का पुनर्निर्धारण, पीने का पर्याप्त पानी सुनिश्चित करना और विश्राम क्षेत्रों तथा कार्यस्थलों को ठंडा रखने का प्रावधान शामिल है। राज्यों से कहा गया है कि गर्मी से संबंधित बीमारियों को रोकने के लिए वे नियोक्ताओं को आपातकालीन आइस पैक, नियमित स्वास्थ्य जांच और अन्य वस्तुओं की व्यवस्था करने का निर्देश दें। कारखाना और खदान प्रबंधनों को भी श्रमिकों को अधिक लचीलापन देने की सलाह दी गई है, जिसमें अत्यधिक गर्मी के दौरान काम की गति को धीमा करना, विश्राम क्षेत्र बनाना और पर्याप्त हवा तथा शीतलन की व्यवस्था करना शामिल है। निर्माण श्रमिकों, ईंट भट्ठा श्रमिकों, दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक मजदूरों पर विशेष ध्यान देने की सिफारिश की गई है।
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नयी दिल्ली. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को बिश्केक में अपने चीनी समकक्ष एडमिरल डोंग जून से मुलाकात की और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर शांति और स्थिरता बनाए रखने तथा व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के संबंध में चर्चा की। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन के इतर यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब भारत और चीन अपने तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की दिशा में प्रयासरत हैं। सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा, ''बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून से बातचीत कर खुशी हुई।'' इस बारे में अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है कि सिंह और डोंग के बीच किन मुद्दों पर चर्चा हुई। पता चला है कि सिंह और डोंग ने एलएसी पर समग्र स्थिति के संबंध में चर्चा की, जिसमें सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के महत्व के साथ-साथ क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दों पर भी जोर दिया गया। फिलहाल यह पता नहीं चल पाया है कि वार्ता में पश्चिम एशिया संकट पर चर्चा हुई या नहीं। यह बैठक भारत और चीन के संबंधों को सुधारने के प्रयासों के बीच हुई है। पिछले कुछ महीनों में, दोनों पक्षों ने अपने संबंधों को फिर से सुधारने के लिए कई उपाय शुरू किए हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो गया था। राजनयिक और सैन्य स्तर पर कई दौर की वार्ताओं के बाद, दोनों पक्षों ने पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा के साथ गतिरोध वाले कई बिंदुओं से अपने-अपने सैनिकों को वापस बुला लिया। रक्षा मंत्री ने रूस के अपने समकक्ष आंद्रेई बेलोसोव से भी मुलाकात की।
सिंह ने कहा, ''बिश्केक में एससीओ के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलोसोव के साथ बातचीत अच्छी रही।'' पता चला है कि सिंह और बेलोसोव ने रूस द्वारा भारत को एस-400 वायु रक्षा मिसाइलों की आपूर्ति सहित विभिन्न रक्षा खरीद परियोजनाओं पर चर्चा की। अक्टूबर 2018 में भारत ने रूस के साथ पांच अरब अमेरिकी डॉलर का समझौता किया था, जिसके तहत पांच मिसाइल प्रणाली इकाइयों की खरीद की जानी थी, और इनमें से तीन इकाइयां पहले ही भारत को सौंप दी गई हैं। चौथी इकाई के अगले कुछ दिनों में मिलने की उम्मीद है, जबकि पांचवीं इकाई नवंबर में भेजे जाने की संभावना है। पिछले महीने, भारत ने रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली की नयी खेप के तहत पांच और प्रणालियों की खरीद को मंजूरी दे दी, जिससे इनकी कुल संख्या 10 हो जाएगी। सिंह ने एससीओ बैठक के इतर बेलारूस के अपने समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन से भी मुलाकात की।
सिंह ने 'एक्स' पर कहा, ''बिश्केक में एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन से मिलकर मुझे बहुत खुशी हुई। हमारी बातचीत दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रही।'' सिंह एससीओ के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों के सम्मेलन में भाग लेने के लिए सोमवार को किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे थे। -
लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी समेत कई प्रमुख नेताओं के साथ काशी स्थित बाबा विश्वनाथ धाम में विधिवत दर्शन-पूजन किया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने 'एक्स' पर पोस्ट करके कहा, "अविनाशी काशी में बाबा श्री काशी विश्वनाथ जी के गर्भगृह में विधिवत दर्शन-पूजन कर महादेव का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त किया। देवाधिदेव महादेव के चरणों में राष्ट्र की निरंतर प्रगति, जनकल्याण और प्रत्येक नागरिक की सुख-समृद्धि की मंगल कामना की। हर हर महादेव।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने आधिकारिक 'एक्स' हैंडल से लिखा, "भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन एवं प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ आज शिवनगरी काशी में बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन का सौभाग्य प्राप्त हुआ। भगवान भोलेनाथ सभी भक्तों व प्रदेशवासियों का कल्याण करें, यही प्रार्थना है।" भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने 'एक्स' पर अपने पोस्ट में कहा, "अविनाशी नगरी काशी स्थित श्री विश्वनाथ धाम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के साथ बाबा विश्वनाथ के ज्योतिर्लिंग का पूजन-अर्चन किया।" चौधरी ने कहा, "इस दौरान मा. उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं भाजपा पदाधिकारी उपस्थित रहे।" उन्होंने कहा कि बाबा से यही प्रार्थना है कि वे चराचर जगत का कल्याण करें और राष्ट्र की उन्नति का मार्ग प्रशस्त करें, हर-हर महादेव। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आज मंगलवार 28 अप्रैल से उत्तर प्रदेश के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री इस अवसर पर मंगलवार को अपने संसदीय क्षेत्र में एक सभा को भी संबोधित करेंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत उप्र के सभी प्रमुख नेता काशी पहुंचे हैं।
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नयी दिल्ली. केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर समर्पित उष्ण लहर प्रबंधन इकाइयों को चालू करने और गर्मी के दौरान सामान्य से अधिक लू चलने की आशंका को देखते हुए एम्बुलेंस सेवाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करने को कहा है। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को लिखे पत्र में, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने एकीकृत स्वास्थ्य सूचना मंच (आईएचआईपी) पोर्टल पर उष्ण लहर के मामलों की प्रारंभिक चेतावनी के समय पर प्रसार और वास्तविक समय की रिपोर्टिंग की आवश्यकता को दोहराया। यह पत्र 23 अप्रैल को लिखा गया था। इसमें भारत मौसम विज्ञान विभाग द्वारा अप्रैल से जून 2026 तक के गर्म मौसम के लिए जारी किए गए अद्यतन मौसमी पूर्वानुमान और अप्रैल 2026 के लिए मासिक पूर्वानुमान का उल्लेख किया गया है। श्रीवास्तव ने पत्र में कहा, "यह दोहराया जाता है कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को सभी स्वास्थ्य सुविधा केंद्रों पर समर्पित लू प्रबंधन इकाइयों का संचालन सुनिश्चित करना होगा; एम्बुलेंस सेवाओं की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करनी होगी; समय पर कार्रवाई के लिए प्रारंभिक चेतावनियों का प्रसार करना होगा; और इस मंत्रालय के आईएचआईपी पोर्टल पर लू के मामलों की वास्तविक समय में रिपोर्टिंग करनी होगी।" स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सक्रिय योजना और समन्वित कार्रवाई से आने वाले महीनों में अत्यधिक गर्मी के स्वास्थ्य प्रभावों को कम करने में मदद मिलेगी।
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गोंडा (उप्र) . उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर सड़क किनारे लगे पीपल के पेड़ की भारी डाल टूटकर गिरने से मोटरसाइकिल सवार दो युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, हादसा पिपरी गांव के पास दोपहर करीब एक बजे हुआ। उस समय मोटरसाइकिल से गुजर रहे दो युवक अचानक गिरी डाल की चपेट में आ गए। तरबगंज थाना क्षेत्र के धौरहरा घाट निवासी कांशीराम यादव ने बताया कि उनके बड़े बेटे दुर्गेश यादव की 28 अप्रैल को शादी तय थी। उसी का निमंत्रण कार्ड बांटने के लिए छोटा बेटा रिंकू यादव (20) अपने ममेरे भाई अमित यादव (19) के साथ बाइक से दुर्जनपुर घाट जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पिपरी गांव के पास सड़क किनारे पीपल की मोटी डाल अचानक टूटकर सड़क पर आ गिरी। उसी दौरान वहां से गुजर रहे मोटरसाइकिल सवार दोनों युवक उसकी चपेट में आ गए और मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद सड़क पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात बाधित हो गया।
सूचना पर नवाबगंज और वजीरगंज थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। पेड़ की डाल कटवाकर शवों को बाहर निकाला गया और यातायात बहाल कराया गया। थानाध्यक्ष अभय सिंह ने बताया कि शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है। परिजनों के अनुसार, मृतक रिंकू तीन भाइयों में सबसे छोटा था, जबकि अमित अपने परिवार का इकलौता बेटा था। हादसे के बाद दोनों परिवारों में शोक की लहर दौड़ गई। जिस घर में शादी की तैयारियां चल रही थीं, वहां मातम पसर गया। स्थानीय लोगों ने घटना पर गहरा दुख जताया है। -
जयपुर. राजस्थान के डीग जिले में सोमवार रात पत्नी को बचाने के लिए एक कुएं में कूदे पति और देवर की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस उपाधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने बताया कि रविन्द्र और उसकी पत्नी महिंद्रा के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई, गुस्से में महिंद्रा घर से बाहर निकली और घर के बाहर बने सूखे कुएं में कूद गई। पुलिस ने बताया कि उसकी जान बचाने के लिए पति रविन्द्र और देवर रोहित भी कुएं में कूद गए।
सूचना मिलने पर ग्रामीण मौके पर पहुंचे और रस्सियों की मदद से तीनों को बाहर निकालकर नज़दीकी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने दोनों भाइयों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि महिला का इलाज हो रहा है। उन्होंने बताया कि कुएं के अंदर जहरीली गैस थी और प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि दोनों की मौत जहरीली गैस के धुएं से हुई। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। -
नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को दोनों देशों की साझेदारी में एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता किसानों, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई, स्टार्टअप और छात्रों सहित अन्य वर्गों को काफी फायदा पहुंचाएगा। मोदी ने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड की 20 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता कृषि, विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी में द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करेगी। इससे दोनों देशों के लिए अधिक समृद्ध और गतिशील भविष्य का रास्ता खुलेगा। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ''आज भारत-न्यूजीलैंड साझेदारी में एक ऐतिहासिक क्षण है! मुझे खुशी है कि आज हस्ताक्षर किये गये भारत-न्यूजीलैंड एफटीए हमारी विकासात्मक साझेदारी को अभूतपूर्व गति देगा। यह उस मजबूत भरोसे, साझा मूल्यों और महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जो हमारे दोनों देशों को जोड़ते हैं।'' उन्होंने कहा, ''यह समझौता हमारे किसानों, युवाओं, महिलाओं, एमएसएमई, कारीगरों, स्टार्टअप, छात्रों और नवाचार करने वालों को बहुत फायदा पहुंचाएगा। यह विकास के नए रास्ते खोलेगा, अवसर पैदा करेगा और विभिन्न क्षेत्रों में हमारे तालमेल को मजबूत करेगा।'' इससे पहले, मोदी ने कहा कि एफटीए छात्रों और कुशल पेशेवरों के लिए अवसरों का विस्तार करने के साथ ही कृषि उत्पादकता और निवेश प्रतिबद्धताओं को भी बढ़ावा देगा। उन्होंने वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के हवाले से कहा कि भारत-न्यूजीलैंड एफटीए के तहत भारतीय निर्यात पर शुल्क हट जाएगा, जिससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा मिलेगा और एमएसएमई मजबूत होंगे, जबकि यह भी सुनिश्चित किया गया है कि कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्र पूरी तरह से सुरक्षित रहें। भारत और न्यूजीलैंड ने सोमवार को द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते पर वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने हस्ताक्षर किए।
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नयी दिल्ली. अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) दिल्ली के वरिष्ठ एंडोक्राइनोलॉजिस्ट और डीन (अकादमिक) डॉ. निखिल टंडन संस्थान के अंतरिम निदेशक के रूप में कार्यभार संभालेंगे। एम्स दिल्ली की ओर से सोमवार को जारी एक कार्यालय ज्ञापन में यह जानकारी दी गई है। ज्ञापन के मुताबिक, अंतरिम निदेशक के रूप में डॉ. टंडन की नियुक्ति डॉ. एम. श्रीनिवास के नीति आयोग में पूर्णकालिक सदस्य के रूप में शामिल होने के मद्देनजर की गई है। यह व्यवस्था एम्स नियम, 2019 के नियम 9(4) के तहत की गई है। ज्ञापन में कहा गया है, "एम्स दिल्ली के अध्यक्ष को यह आदेश देते हुए खुशी हो रही है कि एंडोक्राइनोलॉजी एवं मेटाबॉलिज्म विभाग के प्रमुख और संस्थान के डीन (अकादमिक) प्रोफेसर डॉ. निखिल टंडन अपने आधिकारिक कर्तव्यों के अलावा एम्स दिल्ली के निदेशक के कार्यों को भी संभालेंगे।" इसमें कहा गया है कि यह कार्य व्यवस्था तत्काल प्रभाव से लागू होगी और छह महीने की अवधि तक या इस पद पर नियमित कर्मचारी की नियुक्ति होने तक (जो भी पहले हो) प्रभावी रहेगी। ज्ञापन के अनुसार, डॉ. टंडन इस भूमिका के लिए किसी भी अतिरिक्त पारिश्रमिक या मानदेय के हकदार नहीं होंगे। प्रसिद्ध एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एवं शोधकर्ता डॉ. टंडन हृदय और चयापचय संबंधी रोगों तथा मधुमेह के उपचार में विशेषज्ञता रखते हैं। वह कई राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय जन स्वास्थ्य और अनुसंधान पहलों से जुड़े रहे हैं। डॉ. टंडन ने विभिन्न विशेषज्ञ समूहों में सेवाएं दी हैं। वह मधुमेह, मोटापा और दीर्घकालिक रोग प्रबंधन पर शोध में योगदान के लिए जाने जाते हैं। डॉ. एम. श्रीनिवास को 2022 में एम्स दिल्ली का निदेशक नियुक्त किया गया था। उन्हें हाल में नीति आयोग का पूर्णकालिक सदस्य नामित किया गया है।
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नागपुर. महाराष्ट्र के अकोला में देश में सबसे अधिक 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि नागपुर समेत विदर्भ के अन्य हिस्से भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मौसम विभाग के अधिकारियों ने सोमवार यह जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक राज्य के विदर्भ क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मंगलवार तक लू की स्थिति बनी रहने का पूर्वानुमान है। उन्होंने कहा कि अधिकतम तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है तथा कुछ दूरस्थ स्थानों पर यह 47 डिग्री सेल्सियस भी हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के नागपुर स्थित क्षेत्रीय मौसम केंद्र (आरएमसी) के अनुसार, रविवार को अकोला में 46.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक है। दूसरे स्थान पर अमरावती रहा जहां तापमान 46.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आंकड़ों के अनुसार, इसके अलावा वर्धा में 46.4 डिग्री सेल्सियस, यवतमाल में 46 डिग्री सेल्सियस, नागपुर में 45.4 डिग्री सेल्सियस और चंद्रपुर में 45 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। आरएमसी के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीण कुमार ने 'पीटीआई-भाषा' को बताया कि अकोला, अमरावती, वर्धा, यवतमाल, चंद्रपुर तथा नागपुर जैसे जिलों में भीषण गर्मी पड़ रही है, जबकि कई अन्य जिलों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया। आईएमडी ने अकोला, अमरावती और वर्धा के लिए 'ऑरेंज अलर्ट' और नागपुर, चंद्रपुर तथा यवतमाल के लिए 'येलो अलर्ट' जारी किया है। विभाग के मुताबिक, मंगलवार के बाद लू से राहत मिलने की उम्मीद है और पारा दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक कम हो सकता है। साथ ही आने वाले दिनों में बारिश और तेज हवाएं चलने का पूर्वानुमान है।
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नई दिल्ली। दशकों से, पुणे-सतारा राजमार्ग पर खंबटकी घाट का खंड धैर्य और साहस की परीक्षा के रूप में जाना जाता था। संकरी लेनें, तीखे ‘एस’ आकार के मोड़, लंबे ट्रैफिक जाम और लगातार दुर्घटनाएं यात्रा को तनावपूर्ण बनाती थीं, खासकर सप्ताहांत और छुट्टी के ट्रैफिक के दौरान। जो छोटी ड्राइव होनी चाहिए थी, वह अक्सर भीड़भाड़ वाली सुरंगों में थकाऊ इंतजार में बदल जाती थी।आज, यह कहानी बदल रही है।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा एनएच-4 (नया एनएच-48) पर शुरू किया गया नया खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब 6-लेन सुरंग परियोजना, महाराष्ट्र के सबसे चुनौतीपूर्ण राजमार्ग खंडों में से एक को आधुनिक, जन-केंद्रित अवसंरचना का प्रतीक बना रही है।परीक्षण संचालन और सुरक्षा मूल्यांकन के हिस्से के रूप में, ट्विन सुरंग का एक हिस्सा परीक्षण उद्देश्यों के लिए जनता के लिए खोल दिया गया है, जिससे यात्री खुद बेहतर अवसंरचना का अनुभव कर सकें।परियोजना की भौतिक प्रगति 86 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, और सुरंग 2026 की पहली छमाही में उद्घाटन के ट्रैक पर है।एक नियमित यात्री, जो घाट से नियमित रूप से यात्रा करता है, नई सुरंग में प्रवेश करते ही अंतर महसूस करता है।“यहां अधिक रिफ्लेक्टर हैं, बेहतर लाइटिंग, सीसीटीवी कैमरे, दिखाई देने वाली सुरक्षा गार्ड रेलिंग और उचित अग्निशामक बिंदु हैं। पुरानी सुरंग की तुलना में यह बहुत चौड़ी है और स्पष्ट रूप से सुरक्षा को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है।”सतारा से पुणे जा रहे एक अन्य नियमित यात्री पुराने रूट पर रोजमर्रा की संघर्ष को याद करता है।“पहले, पुरानी सुरंग में केवल दो लेनें थीं। इसके कारण ट्रैफिक जमा हो जाता था। अगर कोई कार या ट्रक खराब हो जाता, तो लंबा जाम लग जाता और दुर्घटना का गंभीर जोखिम होता। पुरानी सुरंग का रूट लगभग 15-20 मिनट लेता था। अब, इस नई सुरंग के कारण, यह केवल 5-10 मिनट में हो जाता है।”जो कभी गतिरोध था, वह अब राजमार्ग का सबसे तेज और सबसे सुगम खंड बन गया हैनजदीकी गांव की दो स्थानीय महिलाओं के लिए, जो खंडाला और सतारा के बीच रोजाना यात्रा करती हैं, इस सुरंग ने रोजमर्रा की जिंदगी बदल दी है।“यह नई सुरंग यात्रा करने में बहुत अच्छी और बहुत सुरक्षित लगती है। पुरानी सुरंग में यात्रा का समय लंबा था और दुर्घटना का जोखिम बहुत अधिक था। हम रोजाना यात्रा करते हैं, इसलिए अब हम बहुत समय बचा रहे हैं। सुरंग के अंदर लाइटिंग उत्कृष्ट है, जो इसे सुरक्षित महसूस कराती है। पहले अंधेरा बड़ी समस्या था, लेकिन अब नहीं।”यह सुरंग क्यों महत्वपूर्ण हैमौजूदा खंबटकी घाट खंड मुंबई-पुणे-बेंगलुरु कॉरिडोर की महत्वपूर्ण कड़ी है, जो पुणे, सतारा, कोल्हापुर और बेलगाम जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ता है, साथ ही पंचगनी, महाबलेश्वर, कास पठार जाने वाले हजारों पर्यटकों और सज्जनगढ़ आने वाले भक्तों की सेवा करता है।हालांकि, पुरानी अवसंरचना अपनी सीमा पर पहुंच चुकी थी:एक दिशा में 0.85 किमी दो-लेन सुरंगविपरीत दिशा में 8 किमी घाट सड़कतीखे मोड़, ऊबड़-खाबड़ इलाका और लगातार भीड़उच्च दुर्घटना जोखिम और भारी ईंधन तथा समय की हानिनई सुरंग इससे सबका एक साथ समाधान करती है।इंजीनियरिंग सुरक्षा, गति और पैमानेनई छह-लेन ट्विन सुरंग (प्रत्येक ट्यूब में तीन लेन) के निर्माण से पुणे और सतारा के बीच यात्रा क्रांतिकारी हो रही है:यात्रा समय कमदुर्घटना जोखिम काफी कमईंधन खपत और वाहन रखरखाव लागत कम होगीवाहनों की घिसावट कमस्थानीय यात्रियों, व्यापार और पर्यटन के लिए बेहतर कनेक्टिविटीघाटों से होकर सुरक्षित यात्रानई खंबटकी घाट ट्विन ट्यूब सुरंग यह साबित करती है कि जब अवसंरचना मानवीय अनुभव के इर्द-गिर्द डिजाइन की जाती है, तो यह वाहनों को मात्र ले जाने से अधिक करती है। यह डर मिटाती है, समय लौटाती है, जानें बचाती है और यात्रा पर विश्वास बहाल करती है। -
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़ बीजेपी का दामन थामने वाले राघव चड्ढा के लिए सियासी राह आसान नजर नहीं आ रही है। दिल्ली की राजनीति में आए इस बड़े भूचाल के महज 24 घंटे के भीतर राघव चड्ढा की लोकप्रियता के ग्राफ में भारी गिरावट देखी गई है। कभी युवाओं और ‘जेन-जी’ (Gen Z) के चहेते रहे चड्ढा को अब सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर विरोध का सामना करना पड़ रहा है। आंकड़ों की मानें तो बीजेपी में शामिल होने के उनके फैसले से नाराज करीब 14 लाख लोगों ने उन्हें इंस्टाग्राम पर अनफॉलो कर दिया है।
शुक्रवार तक राघव चड्ढा के इंस्टाग्राम पर 14.6 मिलियन फॉलोअर्स थे, लेकिन शनिवार को यह संख्या घटकर 13.2 मिलियन रह गई। यह गिरावट केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि उस युवा वर्ग की नाराजगी का संकेत है, जिसे राघव अपना सबसे बड़ा आधार मानते थे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पाला बदलकर अपनी ही उस छवि को नुकसान तो पहुंचाया है, जिसे उन्होंने बड़ी मेहनत से गढ़ा था।इंटरनेट की दुनिया में राघव चड्ढा के खिलाफ एक डिजिटल लहर चल पड़ी है। ‘अनफॉलो राघव चड्ढा’ (#unfollowRaghavChadha) का हैशटैग तेजी से ट्रेंड कर रहा है। NCP (SP) के प्रवक्ता अनीश गवांडे ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि इंटरनेट आपको रातों-रात हीरो बना सकता है, तो जीरो पर लाने में भी उसे वक्त नहीं लगता। युवाओं की इस नाराजगी की बड़ी वजह वह उम्मीदें हैं जो उन्होंने चड्ढा से लगा रखी थीं।राघव चड्ढा ने ने अपनी राजनीति की शुरुआत से ही ऐसे मुद्दे उठाए, जिनसे आज का युवा सीधे तौर पर जुड़ाव महसूस करता है। राज्यसभा में उन्होंने पितृत्व अवकाश (paternity leave), ट्रैफिक की दिक्कत, मोबाइल डेटा लिमिट और एयरपोर्ट पर महंगे खाने जैसे छोटे लेकिन रोजमर्रा के अहम मुद्दों को उठाया।इतना ही नहीं, गिग वर्कर्स और डिलीवरी पार्टनर्स की परेशानी को समझने के लिए वह खुद एक दिन के लिए Blinkit के डिलीवरी एजेंट भी बने। उनके इन कदमों का असर यह हुआ कि सरकार को 10 मिनट डिलीवरी जैसे नियमों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा। इन सब वजहों से उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी, जो पारंपरिक राजनीति से अलग, ज्यादा मॉडर्न और लोगों के बीच रहने वाला है।राघव चड्ढा की घटती लोकप्रियता के पीछे एक बड़ी वजह उनका अपना पुराना सोशल मीडिया रिकॉर्ड साफ करना भी माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज और कई अन्य लोगों का दावा है कि राघव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ किए गए अपने पुराने सभी पोस्ट्स डिलीट कर दिए हैं।उनके प्रोफाइल पर पीएम मोदी से जुड़ी सिर्फ दो पोस्ट्स ही दिखाई दे रही हैं, और खास बात यह है कि ये दोनों ही उनकी तारीफ में लिखी गई हैं। सोशल मीडिया पर लोग इसे लेकर उन्हें काफी ट्रोल कर रहे हैं और उनके इस कदम को मौकापरस्त राजनीति का हिस्सा बता रहे हैं।इतना ही नहीं, जब हाल ही में राघव चड्ढा को राज्यसभा में ‘आप’ के उप-नेता पद से हाथ धोना पड़ा था, तब लोगों ने उनके साथ काफी सहानुभूति दिखाई थी। उसी समय ‘रिहान’ नाम के एक सोशल मीडिया यूजर ने उन्हें सलाह दी थी कि वे अपनी खुद की एक ‘जेन-जी पार्टी’ (Gen Z party) बना लें। उस यूजर ने आगाह भी किया था कि अगर वे किसी दूसरी पार्टी में गए, तो उन्हें लोगों की नफरत का सामना करना पड़ सकता है।तब राघव ने इस सुझाव को एक ‘दिलचस्प विचार’ बताया था, जिससे उनके समर्थकों को लगा कि वे शायद कोई नई और अलग राह चुनेंगे। लेकिन उनका अचानक बीजेपी में चले जाना प्रशंसकों को बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्हें अनफॉलो करने वालों में मशहूर पर्वतारोही रोहताश खिलेरी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। अब देखना यह है कि आंकड़ों की अच्छी समझ रखने वाले राघव चड्ढा क्या फिर से युवाओं का वही पुराना भरोसा हासिल कर पाएंगे। - विशाखापत्तनम । उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और दिग्गज भारतीय क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर सहित कई अन्य प्रख्यात हस्तियों के 27 अप्रैल को यहां आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लेने की उम्मीद है। मद्रास विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत ब्रिटिश औपनिवेशिक काल के दौरान 1926 में स्थापित आंध्र विश्वविद्यालय का उद्देश्य राज्य के संपूर्ण भाषाई क्षेत्र की सेवा करना था, जो एक आवासीय शिक्षण-सह-संबद्ध बहु-विषयक विश्वविद्यालय के रूप में कार्य करता है। सौ साल पुराने इस विश्वविद्यालय से कई जानी-मानी हस्तियों ने पढ़ाई की है, जिनमें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर डी सुब्बा राव, पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू, ओडिशा के राज्यपाल के. हरि. बाबू, जीएमआर समूह के संस्थापक जी. मल्लिकार्जुन राव, सीवाईआईईएनटी संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष बीवीआर मोहन रेड्डी, प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) के प्रधान संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय जोशी और कई अन्य शामिल हैं। जोशी ने विश्वविद्यालय से समुद्री भूविज्ञान में एमएससी की पढ़ाई की।चार सौ 25 एकड़ के विशाल परिसर में स्थित, यह विश्वविद्यालय एक ओर कैलाश पहाड़ी और दूसरी ओर सुंदर बंगाल की खाड़ी के बीच बसा है, जो इसकी सुंदरता को और भी मनोरम बनाता है प्रसिद्ध सांख्यिकीविद् सी.आर. राव विश्वविद्यालय के संस्थापक कुलपति थे। उनके बाद सर्वपल्ली राधाकृष्णन कुलपति बने, जो भारत के दूसरे राष्ट्रपति बने। शताब्दी समारोह के कार्यक्रम के अनुसार, तेंदुलकर के सोमवार अपराह्न लगभग 2:30 बजे विशाखापत्तनम हवाई अड्डे पर पहुंचने और विश्वविद्यालय के लिए रवाना होने की उम्मीद है, जबकि उपराष्ट्रपति के शाम लगभग 4 बजे पहुंचने की उम्मीद है। उपराष्ट्रपति के लिए सलामी गारद (गार्ड ऑफ ऑनर) और अन्य औपचारिकताओं के बाद, आंध्र विश्वविद्यालय राधाकृष्णन को सम्मानित करेगा। बाद में, एक विशेष सिक्का, डाक टिकट, कॉफी टेबल बुक और विरासत पुस्तक जारी की जाएगी। उसके बाद डिजिटल उद्घाटन और डिजिटल तरीके से शिलान्यास समारोह होंगे। वहीं, विश्वविद्यालय फ्लोरिडा विश्वविद्यालय, ऑक्समिक लैब्स इंक और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के साथ समझौते करेगा। इसके बाद तेंदुलकर, मुख्यमंत्री नायडू, राधाकृष्णन, राज्यपाल एस अब्दुल नज़ीर, आईटी मंत्री नारा लोकेश, तेलुगु फिल्म निर्देशक त्रिविक्रम श्रीनिवास और अन्य लोगों का संबोधन होगा। संबोधनों के बाद, 10 विशिष्ट पूर्व छात्रों को उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे, जिनमें वेंकैया नायडू, पूर्व गृह सचिव के पद्मनाभैया, आईआईटी दिल्ली के पूर्व निदेशक वी एस राजू, श्रीनिवास और अन्य शामिल हैं। बाद में, तेंदुलकर को सम्मानित किया जाएगा और अन्य कार्यक्रमों के साथ शताब्दी समारोह का समापन होगा।
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नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में चुनाव के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को राशन वितरण (पीडीएस) घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। कोलकाता, बर्धवान और उत्तर 24 परगना के हाबरा में सप्लायरों और निर्यातकों से जुड़े 9 ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कोलकाता जोनल ऑफिस की टीम ने शनिवार को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम-2002 (पीएमएलए) के तहत यह कार्रवाई की। जिन ठिकानों पर छापेमारी हुई है, वह राशन वितरण घोटाले के मामले में आरोपी निरंजन चंद्र साहा और अन्य लोगों से जुड़े हैं। हाबरा में एक कारोबारी के ठिकानों पर छापा मारा।इस मामले में ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से दर्ज एफआईआर के आधार पर अपनी जांच शुरू की। यह एफआईआर 23 अक्तूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। एफआईआर घोझाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर दर्ज की गई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि कल्याणकारी योजनाओं के लिए तय सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है।जांच में पता चला कि आरोपियों ने कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों के लिए तय पीडीएस गेहूं की हेराफेरी करने के लिए एक सुनियोजित तरीका अपनाया था। यह गेहूं, सप्लायरों, लाइसेंसधारक वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अनाधिकृत माध्यमों से कम कीमतों पर खरीदा गया था। गेहूं की बड़ी मात्रा को सप्लाई चेन से अवैध रूप से हटाकर कई जगहों पर जमा किया गया था। इसकी असली पहचान छिपाने के लिए, आरोपियों ने उन मूल बोरियों को हटा दिया या उलट दिया, जिन पर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य सरकार के निशान बने थे और फिर उनमें दोबारा गेहूं भर दिया।इस तरह आरोपियों ने गेहूं की पहचान बताने वाले निशानों को छिपा दिया और पीडीएस गेहूं को एक वैध स्टॉक के तौर पर दिखाकर खुले बाजार में बेच दिया। इसके परिणामस्वरूप, आरोपियों ने अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया और ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ बनाई।शनिवार को






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