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वाशिंगटन/तेहरान । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद की निर्धारित की हुई समय-सीमा खत्म होने से करीब 90 मिनट पहले घोषणा की कि अमेरिका ने पाकिस्तान के प्रस्ताव पर ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्षविराम पर सहमति जताई है।ट्रंप ने मंगलवार शाम (अमेरिकी समयानुसार) ट्रुथ सोशल पर यह घोषणा की। दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता ईरानी सभ्यता को खत्म करने की ट्रंप की धमकी को लेकर उन्हें पद से हटाने की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ‘‘पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बातचीत कर अनुरोध किया कि मैं आज रात ईरान के खिलाफ होने वाली विनाशकारी कार्रवाई को रोक दूं लेकिन इस शर्त पर कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह, तुरंत और सुरक्षित तरीके से खोलने पर सहमत हो।’’ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं दो सप्ताह की अवधि के लिए ईरान पर बमबारी और हमले रोकने पर सहमत हूं।’’ उन्होंने कहा कि यह दोनों पक्षों का संघर्षविराम होगा।तेहरान में, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने कहा कि उसने दो सप्ताह के संघर्षविराम को स्वीकार कर लिया है और वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका से बातचीत करेगा।इस्लामाबाद में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार, 10 अप्रैल को इस्लामाबाद आने का निमंत्रण दिया, ताकि सभी विवादों के समाधान के लिए आगे बातचीत की जा सके।अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय ‘व्हाइट हाउस’ की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि आमने-सामने बातचीत को लेकर चर्चा जारी है, ‘‘लेकिन जब तक राष्ट्रपति या ‘व्हाइट हाउस’ आधिकारिक घोषणा नहीं करते, तब तक कुछ भी तय नहीं है।’’ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि अमेरिका को ईरान से 10 बिंदुओं वाला प्रस्ताव मिला है, जिसे वह बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार मानते हैं।उन्होंने कहा कि दो सप्ताह के संघर्षविराम का उपयोग एक बड़े समझौते पर बातचीत के लिए किया जाएगा, जिससे युद्ध को समाप्त किया जा सके।ट्रंप ने कहा, ‘‘ऐसा करने का कारण यह है कि हमने सभी सैन्य लक्ष्यों को पहले ही हासिल कर लिया है और ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति तथा पश्चिम एशिया में शांति को लेकर एक ठोस समझौते के काफी करीब हैं।’’उन्होंने कहा, ‘‘हमें ईरान से 10 बिंदुओं का प्रस्ताव मिला है और हम मानते हैं कि यह बातचीत के लिए एक व्यवहारिक आधार है।’’राष्ट्रपति ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच पहले के लगभग सभी विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है, लेकिन दो सप्ताह का समय समझौते को अंतिम रूप देने में मददगार साबित होगा।ट्रंप ने कहा, ‘‘अमेरिका की ओर से, राष्ट्रपति के रूप में और पश्चिम एशिया के देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए, यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि यह लंबे समय से चला आ रहा मुद्दा समाधान के करीब है।’’ट्रंप ने पोस्ट में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची का बयान भी साझा किया, जिसमें संघर्षविराम की पुष्टि की गई थी।ईरानी विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘अगर ईरान के खिलाफ हमले रोके जाते हैं, तो हमारी शक्तिशाली सशस्त्र सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान रोक देंगी।’’उन्होंने कहा कि अगले दो हफ्तों तक होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरना ईरानी सैन्य समन्वय के तहत संभव होगा।ईरान द्वारा फारसी में जारी 10 सूत्री संघर्षविराम योजना में उसके परमाणु कार्यक्रम के लिए “संवर्धन की स्वीकृति” का जिक्र किया गया है, लेकिन यह वाक्यांश अंग्रेजी संस्करण में नहीं था, जो ईरानी राजनयिकों ने पत्रकारों के साथ साझा किया।एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार, इस योजना के तहत ईरान और ओमान दोनों को जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क लेने की अनुमति होगी। अधिकारी ने कहा कि ईरान इस धन का उपयोग पुनर्निर्माण के लिए करेगा।संघर्षविराम के बदले ईरान की मांगों में क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, प्रतिबंधों को हटाना और उसकी परिसंपत्तियों पर लगी रोक हटाना है।‘व्हाइट हाउस’ के एक अधिकारी के अनुसार, इजराइल भी संघर्षविराम के लिए सहमत हो गया है।इस बीच, इजराइल और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में बुधवार तड़के मिसाइल अलर्ट जारी हुए।अधिकारियों ने बताया कि यूएई की राजधानी अबू धाबी में एक गैस प्रोसेसिंग संयंत्र में ईरान के हमले के बाद आग लग गई।इजराइल में किस जगह को निशाना बनाया गया, यह तत्काल स्पष्ट नहीं हो सका, जबकि युद्ध के दौरान मिसाइल और ड्रोन हमलों का सबसे ज्यादा असर वहीं देखा गया था।बुधवार सुबह सऊदी अरब, बहरीन और कुवैत में भी मिसाइल अलर्ट जारी हुए, जो कूटनीतिक प्रयासों के बीच बनी अव्यवस्था की स्थिति को दर्शाते हैं। -
वाशिंगटन। अमेरिका और ईरान के बढ़ते तनाव के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के ऐलान के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे दुनिया में शांति के लिए बड़ा दिन बताया है। उन्होंने कहा कि ईरान अब इस स्थिति से थक चुका है और वह भी शांति चाहता है, ऐसे में अब तेहरान पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों के ट्रैफिक को संभालने में मदद करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सैनिक वहां मौजूद रहेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सब कुछ सही तरीके से चलता रहे।‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में ट्रंप ने लिखा, “यह दुनिया की शांति के लिए बड़ा दिन है। क्योंकि वे अब काफी कुछ झेल चुके हैं। अमेरिका इस दौरान हर तरह की मदद करेगा। हम हर तरह की जरूरी सप्लाई पहुंचाएंगे और वहां मौजूद रहेंगे ताकि हालात सामान्य बने रहें। मुझे पूरा भरोसा है कि सब ठीक होगा। जैसे अमेरिका में हम ‘गोल्डन एज’ देख रहे हैं, वैसे ही यह मध्य पूर्व के लिए भी एक नया दौर साबित हो सकता है।”इससे पहले, ट्रंप ने ईरान के खिलाफ संभावित बड़े सैन्य हमले से पीछे हटते हुए दो हफ्ते का अस्थायी विराम घोषित किया था। यह फैसला उस शर्त पर लिया गया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह, सुरक्षित और तुरंत खोलेगा। इस घोषणा से पूरी दुनिया को बड़ी राहत मिली है।बताया जा रहा है कि यह निर्णय ट्रंप द्वारा तय किए गए रात 8 बजे (ईएसटी) के डेडलाइन से महज 90 मिनट पहले लिया गया। इसके पीछे पर्दे के पीछे की कूटनीति की अहम भूमिका रही। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के साथ बातचीत के बाद दोनों तरफ से सीजफायर की स्थिति बनी है।उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिका अपने सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है और अब ईरान के साथ दीर्घकालिक शांति समझौते की दिशा में तेजी से प्रगति हो रही है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान की ओर से 10 सूत्रीय प्रस्ताव मिला है, जो बातचीत के लिए एक मजबूत आधार है।ट्रंप ने कहा कि अधिकांश विवादित मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और यह दो हफ्तों का समय समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बेहद अहम होगा। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह सीजफायर पूरी तरह शर्तों पर आधारित है और ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर निर्भर करेगा।वहीं, सईद अब्बास अरागची ने भी संकेत दिए हैं कि अगर ईरान पर हमले बंद होते हैं, तो उसकी सेनाएं भी अपनी कार्रवाई रोक देंगी। उन्होंने कहा कि दो हफ्तों तक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित आवाजाही की अनुमति दी जाएगी, लेकिन इसके लिए ईरानी सशस्त्र बलों के साथ समन्वय जरूरी होगा। गौरतलब है कि इससे पहले हालात काफी तनावपूर्ण हो गए थे। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो पूरी सभ्यता खत्म हो सकती है। ऐसे में यह सीजफायर वैश्विक स्तर पर राहत की खबर बनकर सामने आया है। - वाशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा ने अमेरिकी राजनीतिक हलकों में तीखी और बंटी हुई प्रतिक्रियाएं पैदा कर दी हैं। कुछ सांसद कूटनीति का समर्थन कर रहे हैं, तो कुछ ने इसे लेकर सचेत रहने के लिए कहा है।घोषणा के अनुसार, वाशिंगटन और तेहरान ने 10-सूत्रीय प्रस्ताव पर काम करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की अनुमति देने पर सहमति जताई है। रिपब्लिकन लॉमेकर मॉर्गन ग्रिफ़िथ ने इस कदम का स्वागत किया और बातचीत के लिए मजबूर करने का श्रेय सैन्य दबाव को दिया। उन्होंने कहा, “ईरान के साथ संघर्ष-विराम समझौता करने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप की सराहना की जानी चाहिए। अमेरिकी सशस्त्र बलों के बेहतरीन प्रयासों की बदौलत, ईरान पंगु हो गया है और उसे बातचीत की मेज पर आने के लिए मजबूर होना पड़ा है।”ग्रिफ़िथ ने अमेरिका के एक प्रमुख उद्देश्य को रेखांकित करते हुए कहा: “मैं ऐसी बातचीत का समर्थन करता हूं जिसका परिणाम यह हो कि ईरान के पास कभी भी परमाणु क्षमताएं न हों। साथ ही, मैं उन अमेरिकियों के लिए प्रार्थना कर रहा हूं जिन्होंने अपने देश के लिए अपनी जान दे दी, और उनके परिवारों के लिए भी। उनकी सेवा की सराहना की जानी चाहिए।”पेन्सिलवेनिया के लॉमेकर ब्रायन फिट्ज़पैट्रिक ने इस संघर्ष-विराम को एक सतर्क लेकिन आवश्यक कदम बताया। उन्होंने कहा, “कूटनीति हमेशा हमारा उद्देश्य होनी चाहिए। यह अस्थायी संघर्ष-विराम समझौता उस दिशा में एक रचनात्मक कदम है, और हम घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रखना जारी रखेंगे। कोई भी ऐसा कदम जो अमेरिकी नागरिकों की जान बचाता हो और गंभीर शांति वार्ता के लिए जगह बनाता हो, वह सही रास्ता है। हालांकि सावधानी बरतना अभी भी जरूरी है।”उन्होंने ईरान को लेकर अपनी पुरानी चिंताओं को दोहराते हुए कहा: “इस शासन से पैदा होने वाले खतरे को लेकर कोई अस्पष्टता नहीं हो सकती। इसे कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।” उन्होंने निगरानी पर भी ज़ोर दिया और कहा कि कांग्रेस को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि “जैसे-जैसे स्थिति आगे बढ़े, कांग्रेस द्वारा कड़ी निगरानी रखी जाए।”सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कूटनीति के प्रति सतर्क समर्थन का संकेत दिया, लेकिन जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष निकालने के खिलाफ चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, “जैसा कि मैंने पहले भी कहा है, अगर कूटनीति से ईरान के आतंकवादी शासन के संबंध में सही परिणाम निकलता है, तो मैं उसे ही प्राथमिकता दूंगा। कूटनीतिक समाधान खोजने की कोशिश में शामिल सभी लोगों की कड़ी मेहनत की मैं सराहना करता हूं। हालांकि अभी मैं इस बात को लेकर बेहद सतर्क हूं कि क्या सच है और क्या मनगढ़ंत। हर पहलू को अच्छी तरह से परख लेना चाहिए।”इंडियाना के लॉमेकर फ्रैंक मृवान ने प्रशासन पर बिना किसी स्पष्ट औचित्य के काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “ईरान में राष्ट्रपति के एकतरफ़ा कदम गलत हैं, और उनकी खतरनाक बयानबाजी एक बुरी स्थिति को और भी बदतर बना रही है। हालांकि मैं प्रशासन द्वारा युद्ध विराम की घोषणा को स्वीकार करता हूं, लेकिन सच तो यह है कि कोई ऐसा खतरा नहीं मंडरा रहा था। युद्ध में हमारे कोई स्पष्ट उद्देश्य नहीं थे। इसका कोई अंत नज़र नहीं आ रहा था और हमारे सैनिक अभी भी खतरे में बने हुए हैं।” मर्वान ने आगे कहा कि अमेरिकी लोग पहले से ही “गैस पंप और किराने की दुकानों पर इसके नतीजे भुगत रहे हैं।”ऐसे ही कैलिफ़ोर्निया के कांग्रेसी केविन काइली ने अमेरिका के आचरण और कांग्रेस के अधिकार को लेकर व्यापक चिंताएं जताईं। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “अमेरिका सभ्यताओं को नष्ट नहीं करता। और न ही हम किसी तरह की बातचीत की रणनीति के तौर पर ऐसा करने की धमकी देते हैं। चल रहे सैन्य अभियानों के संबंध में निगरानी करना कांग्रेस की ज़िम्मेदारी है।”वहीं, सीनेटर लिसा मुर्कोव्स्की ने राष्ट्रपति की बयानबाजी की आलोचना करते हुए चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “इस तरह की बयानबाजी उन आदर्शों का अपमान है जिन्हें हमारा देश लगभग 250 वर्षों से दुनिया भर में बनाए रखने और बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। यह “विदेशों और देश के भीतर, दोनों जगहों पर अमेरिकियों को सीधे तौर पर खतरे में डालता है।”एरिज़ोना के सीनेटर रूबेन गैलेगो ने भी इसी चिंता को दोहराया। उन्होंने कहा, “ट्रंप का ‘पूरी सभ्यता’ को खत्म करने की धमकी देना उन सभी मूल्यों का अपमान है जिनके लिए हम खड़े हैं और यह पूरी तरह से गैर-कानूनी है।” बता दें कि यह युद्ध विराम खाड़ी क्षेत्र में बढ़े हुए तनाव के बीच आया है, जहां होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल शिपमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग बना हुआ है। वहां किसी भी तरह की रुकावट का वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर तत्काल असर पड़ता है, जिसमें भारत भी शामिल है, जो इस क्षेत्र से कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है।
- कीव. यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा है कि उनके देश ने रूस को आगामी सप्ताहांत में ईस्टर अवकाश के दौरान एक-दूसरे के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने का प्रस्ताव दिया है। जेलेंस्की ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिका के माध्यम से दिया गया, जो रूस और यूक्रेन के प्रतिनिधिमंडलों के बीच बातचीत में मध्यस्थता कर रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति ने सोमवार देर रात एक सार्वजनिक संबोधन में कहा, ''अगर रूस हमारे ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमले रोकने के लिए तैयार है, तो हम भी उसी तरह कदम उठाने के लिए तैयार रहेंगे।'' उन्होंने कहा, ''अमेरिका के माध्यम से भेजा गया यह प्रस्ताव पहले ही रूसी पक्ष के समक्ष प्रस्तुत किया जा चुका है।'' रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले साल ईस्टर के दौरान एकतरफा रूप से 30 घंटे के युद्धविराम की घोषणा की थी, लेकिन दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर इसका उल्लंघन करने का आरोप लगाया। इस बीच, यूक्रेन के अधिकारियों ने कहा कि दक्षिणी शहर खेरसोन में एक आवासीय इमारत पर हुए हमले में तीन लोग मारे गए और तीन अन्य घायल हो गए। वहीं, पूर्वी शहर सिनेलनिकोव के पास एक ड्रोन हमले में 11 वर्षीय लड़के की मौत हो गई।
- यरूशलम. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि उनका देश ''ईरान में शासन को पूरी ताकत से कुचल रहा है'' और यह भी कहा कि तेहरान के खिलाफ इजराइली हमला वहां के लोगों के खिलाफ नहीं है। नेतन्याहू ने कहा, ''मैं आपको लगातार बताता रहता हूं कि हम ईरान में आतंकवादी शासन को कुचल रहे हैं। लेकिन हम यह और भी अधिक जोरदार तरीके से कर रहे हैं।'' उन्होंने कहा, ''कल हमारे पायलटों ने ईरानी वायुसेना के अड्डे पर परिवहन विमानों और दर्जनों हेलीकॉप्टरों को नष्ट कर दिया। आज उन्होंने रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली रेल पटरियों और पुलों पर हमला किया। वे इनका इस्तेमाल हथियारों के लिए कच्चे माल, हथियारों और उन लोगों को ले जाने के लिए करते हैं जो हम पर, अमेरिका पर और इस क्षेत्र के देशों पर हमला करते हैं। ये वही लोग हैं जो ईरानी जनता पर भी अत्याचार करते हैं।'' नेतन्याहू ने कहा, ''ये कार्रवाइयां, जिन्हें मैंने रक्षा मंत्री के साथ मिलकर मंजूरी दी है, ईरानी जनता पर हमला करने के इरादे से नहीं की गई हैं।''
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ह्यूस्टन. नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की ओर उड़ान के दौरान पृथ्वी से सबसे दूर तक जाने वाले मानव बनने का सोमवार को रिकॉर्ड बना दिया। यह मिशन चांद के दूरस्थ पक्ष के अद्भुत दृश्य पेश करता है, जिन्हें कभी भी पहले नहीं देखा गया। छह घंटे की यह उड़ान अपोलो युग के बाद चंद्रमा पर जाने के नासा मिशन का मुख्य आकर्षण है। उड़ान में तीन अमेरिकी और एक कनाडाई अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। यह मात्र दो वर्षों में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास पदचिह्न छोड़ने की दिशा में एक कदम है। आर्टेमिस-2 के कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और हैनसेन चंद्रमा के पास से घूमकर सीधे पृथ्वी पर लौटेंगे। वे अपोलो-13 के 1970 के दूरी रिकॉर्ड को तोड़ते हुए पृथ्वी से सबसे दूर जाने वाले मानव बन गए हैं। उड़ान के अंत में 10 अप्रैल को पृथ्वी के वायुमंडल में वापसी के दौरान वे सबसे तेज गति से लौटने वाले इंसान भी बन सकते हैं।
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तेल अवीव. सहायता समूहों ने चेतावनी दी है कि पश्चिम एशिया में युद्ध ने दुनिया भर में लाखों जरूरतमंद लोगों तक भोजन और दवा पहुंचाने के उनके प्रयासों को पूरी तरह से बाधित कर दिया है, और यदि हिंसा जारी रहती है तो पीड़ा और भी बढ़ जाएगी। इस संघर्ष ने न केवल महत्वपूर्ण नौवहन मार्गों को अवरुद्ध कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, बल्कि इसने सहायता समूहों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को भी बाधित कर दिया है, जिससे उन्हें अधिक महंगे और समय लेने वाले मार्गों का उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे प्रमुख जल मार्ग लगभग पूरी तरह से बंद हो गए हैं और दुबई, दोहा और अबू धाबी जैसे रणनीतिक केंद्रों से आने वाले जल मार्ग भी प्रभावित हुए हैं। ईंधन और बीमा दरों में वृद्धि के कारण परिवहन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है, जिसका अर्थ है कि उतने ही खर्च पर कम आपूर्ति होगी। विश्व खाद्य कार्यक्रम का कहना है कि उसके पास हजारों मीट्रिक टन भोजन सामग्री परिवहन मार्ग में फंसी है। इंटरनेशनल रेस्क्यू कमेटी के पास युद्धग्रस्त सूडान के लिए 1,30,000 अमेरिकी डॉलर मूल्य की दवाएं दुबई में फंसी हुई हैं और सोमालिया में गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के लिए खाद्य सामग्री की लगभग 670 पेटियां भारत में फंसी हुई हैं। विदेशी सहायता में अमेरिका द्वारा की गई भारी कटौती पहले ही कई सहायता समूहों को पंगु कर चुका है।
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वाशिंगटन. तमिलनाडु में जन्मीं रिनी संपत वाशिंगटन डीसी के मेयर पद के चुनाव में हिस्सा लेने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन गई हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी की 31 वर्षीय सरकारी अनुबंधक का चुनाव अभियान 'बुनियादी चीजों को ठीक करो' के विषय और 'एक नए डीसी' के वादे पर आधारित है। संपत ने अपनी चुनावी वेबसाइट पर कहा, ''मैं कोई नेता नहीं हूं। मेरा किसी विशेष हित समूह से कोई संबंध नहीं है। अब समय आ गया है कि कोई बाहर का व्यक्ति हमारे शहर की बुनियादी सेवाओं को सुधारने पर पूरी तरह से ध्यान केंद्रित करे।'' तमिलनाडु के थेनी में जन्मीं संपत सात साल की उम्र में अमेरिका आ गईं और एक दशक से अधिक समय से वाशिंगटन डीसी में रह रही हैं। उन्होंने कहा, ''यह स्पष्ट है कि हमारे पास जीत की एक वास्तविक राह है। महज चार हफ्तों में मैं वाशिंगटन डीसी के इतिहास में मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने वाली पहली दक्षिण एशियाई उम्मीदवार बन चुकी हूं। यही वह उपलब्धि है जो एक सीमित संसाधनों वाला, जन-समर्थित अभियान हासिल कर सकता है। कल्पना कीजिए कि अगर हमारे पास पूरे शहर के हर मतदाता तक पहुंचने के लिए संसाधन हों, तो हम क्या कर सकते हैं।'' वॉशिंगटन डीसी में डेमोक्रेट्स का दबदबा है और 1975 में चुनाव शुरू होने के बाद से शहर में कभी रिपब्लिकन पार्टी से कोई मेयर नहीं रहा है। इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त आयुक्तों का एक बोर्ड वाशिंगटन डीसी के प्रशासन का जिम्मा संभालता था। डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया का प्रशासन जनता द्वारा चुने गए मेयर और 13 सदस्यीय जिला परिषद द्वारा किया जाता है। संपत ने कहा, ''डीसी के मेयर के रूप में मेरी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारा शहर अपने निवासियों के प्रति अपनी बुनियादी प्रतिबद्धताओं को पूरा करे। सड़कों के गड्ढे भरें। पोटोमैक नदी में विनाशकारी अपशिष्ट जल रिसाव को रोकें। कीमतें कम करें। पुलिस हेल्पलाइन नंबर पर प्रतीक्षा समय में सुधार करें।'' प्राइमरी चुनाव 16 जून को निर्धारित हैं, जबकि आम चुनाव तीन नवंबर को होंगे। मेयर पद की दौड़ में जेनीस लुईस जॉर्ज, केनियन मैकडफी, गैरी गुडवेदर, रॉबर्ट एल ग्रॉस और रोंडा हैमिल्टन शामिल हैं।
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पेशावर. बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता राज कपूर की हवेली का एक हिस्सा पेशावर में कथित तौर पर हाल ही में हुई भारी बारिश और उसके बाद शुक्रवार रात आए भूकंप के कारण ढह गया। अधिकारियों एवं स्थानीय निवासियों ने इसकी जानकारी दी। खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित सदी पुरानी कपूर हवेली को पाकिस्तान सरकार ने वर्ष 2016 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया था। खैबर पख्तूनख्वा हेरिटेज काउंसिल के सचिव शकील वहीदुल्लाह ने बताया कि भूकंप के झटकों के बाद हवेली की दीवार का एक हिस्सा ढह गया, जिससे शेष ढांचे की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि इस घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
वहीदुल्लाह ने पुरातत्व विभाग और प्रांतीय सरकार से ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए तत्काल कदम उठाने की अपील की और चेतावनी दी कि लापरवाही जारी रही तो क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर को अपूरणीय क्षति हो सकती है। कपूर हवेली पेशावर शहर के प्रसिद्ध किस्सा ख्वानी बाजार के मध्य स्थित है। यह पाकिस्तान के प्रमुख स्मारकों में से एक है, लेकिन संरक्षण की मांगों के बावजूद लंबे समय से जर्जर हालत में है। यह हवेली अभिनेता पृथ्वीराज कपूर का पैतृक घर है, जो कपूर परिवार के फिल्म उद्योग में प्रवेश करने वाले पहले सदस्य थे। इस मकान का निर्माण उनके पिता दीवान बशेश्वरनाथ कपूर ने 1918 से 1922 के बीच कराया था। अभिनेता राज कपूर और त्रिलोक कपूर का जन्म भी इसी हवेली में हुआ था। अपने समय में यह हवेली उत्कृष्ट वास्तुकला का उदाहरण मानी जाती थी, जिसमें लगभग 40 कमरे थे। भवन के अग्रभाग को जटिल पुष्प आकृतियों और झरोखों से सजाया गया था। हालांकि अब यह इमारत बेहद जर्जर अवस्था में है, फिर भी वर्षों से परित्यक्त रहने के बावजूद इसकी सुंदरता अब भी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। इसी हवेली में राज कपूर के दो छोटे भाई-बहनों का भी जन्म हुआ था, जिनका 1931 में निधन हो गया था। राज कपूर के भाई शम्मी कपूर और शशि कपूर का जन्म भारत में हुआ था।
इस इमारत में कपूर परिवार की शुरुआती पीढ़ियों का जीवन बीता, लेकिन विभाजन के बाद परिवार ने 1947 में इस इमारत को छोड़ दिया। कई अन्य परिवारों की तरह, राज कपूर भी विभाजन के बाद भारत आ गए।
उनके बेटे ऋषि कपूर और रणधीर कपूर ने 1990 के दशक में इस जगह का दौरा किया था। - इस्लामाबाद।: पाकिस्तान में तेल की कीमतों को लेकर शहबाज सरकार का बड़ा यू-टर्न देखने को मिला है. । सरकार ने अचानक पेट्रोल के दाम में 80 रुपये प्रति लीटर की कटौती का ऐलान कर दिया है. । अब पेट्रोल की कीमत घटकर 378 रुपये प्रति लीटर हो गई है।. यह फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात घोषित किया.। चौंकाने वाली बात यह है कि यह राहत उस बड़े झटके के ठीक एक दिन बाद आई है, जब सरकार ने पेट्रोल और डीजल के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी थी.। इससे पहले पेट्रोल की कीमत 458.40 रुपये और डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था।.पाकिस्तान में पेट्रोल का दाम अब कितना है?प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार देर रात देश को संबोधित करते हुए पेट्रोल की कीमत 458 रुपये से घटाकर 378 रुपये (125.84 भारतीय रुपया) प्रति लीटर करने का ऐलान किया. उन्होंने कहा कि यह राहत पेट्रोलियम लेवी घटाकर दी जा रही है और इसका पूरा बोझ सरकार उठाएगी. सरकार का कहना था कि अमेरिका-ईरान और इजराइल युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल के दाम बेकाबू हो गए हैं.। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने साफ कहा था कि दाम बढ़ाना मजबूरी थी. लेकिन इस फैसले के बाद जनता में गुस्सा देखने को मिला।. पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और लोग सड़कों पर उतर आए।. पहले से आर्थिक संकट झेल रही जनता के लिए यह झटका भारी पड़ गया.। जनता के दबाव के आगे सरकार को झुकना पड़ा.। अब न सिर्फ पेट्रोल सस्ता किया गया, बल्कि राहत पैकेज की झड़ी लगा दी गई.।--
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नई दिल्ली। अमेरिकी सेना ने ईरान में एक अहम हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी के साथ ईरान से समझौता करने की अपील की है। उन्होंने कहा ईरान को समझौता करना चाहिए वर्ना “आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।”
यह हमला बी1 पुल पर हुआ, जो तेहरान को पास के शहर करज से जोड़ता है। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन सेना के लिए सामान ले जाने का एक तय रास्ता था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया।वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि यह पुल अभी चालू नहीं था और सेना इसका इस्तेमाल नहीं कर रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, जिनमें नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद आम नागरिक भी शामिल थे।डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस हमले की सराहना की। उन्होंने लिखा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल गिरा दिया गया है, अब इसका कभी इस्तेमाल नहीं होगा। अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है!” उन्होंने ईरान को यह चेतावनी भी दी कि “इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, एक समझौता कर लो।”अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य व्यवस्था को कमजोर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद देश के भीतर मिसाइल और ड्रोन से जुड़े सामान की आवाजाही को रोकना था। ईरान के नेताओं ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा, “जब देश की रक्षा की बात आएगी, तो हम में से हर व्यक्ति सैनिक बन जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग तैयार हैं और डटे हुए हैं।तेहरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि “मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है।”इस हमले के साथ ही अन्य जगहों पर भी हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, एक हवाई हमले में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को निशाना बनाया गया, जो एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे “अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला” बताया। यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता नजर आ रहा है। इजरायल ने कहा कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी। राजनयिक स्तर पर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। रूस, चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया। -
नई दिल्ली। संयुक्त राज्य अमेरिका आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाएगा। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिमों और विदेशी आपूर्ति शृंखलाओं पर भारी निर्भरता को कारण बताया है। जारी घोषणा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि दवाइयां और उनसे जुड़े घटक “इतनी मात्रा में और ऐसी परिस्थितियों में अमेरिका में आयात किए जा रहे हैं कि वे संयुक्त राज्य की राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुँचा सकते हैं।”
यह घोषणा पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (एपीआई) को निशाना बनाती है। ये नागरिक स्वास्थ्य सेवाओं और सैन्य तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रशासन ने चेतावनी दी कि विदेशी उत्पादन पर निर्भरता भू-राजनीतिक या आर्थिक संकट के दौरान “जीवन रक्षक दवाओं” की उपलब्धता को बाधित कर सकती है।आदेश के तहत, अधिकांश आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत का मूल्य-आधारित (एड वैलोरेम) शुल्क लगाया जाएगा। जो कंपनियां उत्पादन को अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी, उन्हें 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा, जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। घोषणा में प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के लिए अलग-अलग शुल्क दरों का भी उल्लेख है। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्ज़रलैंड से आयात पर लगभग 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा, जबकि अनाथ दवाएँ, परमाणु दवाएँ और जीन थेरेपी जैसी कुछ विशेष श्रेणियाँ इस शुल्क से मुक्त रहेंगी।फिलहाल जेनेरिक दवाओं और बायोसिमिलर्स को इस शुल्क व्यवस्था से बाहर रखा गया है। घोषणा में कहा गया, “जेनेरिक दवाएँ और उनसे जुड़े घटक… इस समय शुल्क के अधीन नहीं होंगे।”अधिकारियों ने बताया कि यह नीति घरेलू दवा निर्माण को मजबूत करने और आपूर्ति शृंखलाओं को सुरक्षित करने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। व्हाइट हाउस में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर ने कहा कि ध्यान केवल शुल्क पर नहीं बल्कि उत्पादन के दीर्घकालिक पुनर्गठन पर भी है। उन्होंने कहा, “मुद्दा सिर्फ शुल्क दर का नहीं है बल्कि उन समझौतों का है जो हम देशों और कंपनियों के साथ कर रहे हैं ताकि आपूर्ति शृंखलाएँ सुरक्षित रहें और उत्पादन अमेरिका में हो।”उन्होंने यह भी जोड़ा कि कंपनियां पहले से ही इस नीति पर प्रतिक्रिया दे रही हैं। उन्होंने अमेरिका में हो रहे निवेश की ओर इशारा करते हुए कहा, “हम नए फार्मास्युटिकल संयंत्रों के निर्माण में ठोस प्रगति देख रहे हैं।” ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किए जाएंगे और कुछ कंपनियों को मौजूदा समझौतों के आधार पर समयसीमा में छूट दी जाएगी।इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर व्यापक प्रभाव पड़ने की संभावना है, खासकर उन देशों पर जो तैयार दवाओं और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ता हैं। भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों के सबसे बड़े उत्पादकों में शामिल हैं, जो अमेरिकी बाजार का बड़ा हिस्सा आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा कीमतों और आपूर्ति शृंखलाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।इस मामले में लागू किया गया ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 अमेरिकी राष्ट्रपति को उन आयातों पर प्रतिबंध लगाने की अनुमति देती है जिन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है। इस प्रावधान का पहले स्टील और एल्यूमिनियम पर शुल्क लगाने के लिए उपयोग किया गया था और अब इसे दवाओं तक बढ़ाना व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। -
वाशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि अमेरिकी बल ईरान में जल्द ही ''काम खत्म करेंगे क्योंकि मुख्य रणनीतिक उद्देश्य लगभग पूरे होने वाले हैं।'' ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ युद्ध में उनके लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और ये लक्ष्य हैं ईरान की मिसाइल उत्पादन क्षमता एवं नौसेना को नष्ट करना तथा यह सुनिश्चित करना कि उसके लिए काम करने वाले छद्म संगठन अब क्षेत्र को अस्थिर नहीं कर सकें और ईरान परमाणु हथियार नहीं बना सके। ट्रंप ने ईरान युद्ध की शुरुआत के बाद राष्ट्र के नाम अपने पहले संबोधन में कहा कि यह सैन्य कार्रवाई तेल समेत ईरान के किसी विशाल संसाधन को हासिल करने के लिए नहीं की गई है, बल्कि यह अमेरिका के सहयोगियों की मदद के लिए की गई है। उन्होंने कहा, ''हम पश्चिम एशिया से पूरी तरह अलग हैं लेकिन फिर भी हम मदद करने के लिए वहां हैं। उन्होंने कहा, ''हमें वहां रहने की जरूरत नहीं है। हमें उनके तेल की जरूरत नहीं है। उनके पास जो कुछ भी है, उसकी हमें जरूरत नहीं है लेकिन हम अपने सहयोगियों की मदद करने के लिए वहां हैं।'' ट्रंप ने अमेरिका के राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय 'व्हाइट हाउस' के क्रॉस हॉल में बुधवार रात कहा कि पिछले एक महीने में ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' की कार्रवाई से ईरान की ''मिसाइल और ड्रोन दागने की क्षमता में उल्लेखनीय कमी आई है और हथियार बनाने वाली उसकी फैक्टरी एवं रॉकेट प्रक्षेपक तहस-नहस किए जा रहे हैं।'' ट्रंप ने कहा कि ईरान की ''नौसेना खत्म हो चुकी है, उसकी वायु सेना तबाह हो चुकी है और उस देश के नेता ''अब मारे जा चुके हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ''इस वक्त हमारी कार्रवाई में बुरी तरह तबाह किया जा रहा है।'' ट्रंप ने इजराइल के साथ मिलकर करीब एक महीने पहले ईरान पर हमला करने के बाद 'प्राइम टाइम' पर पहली बार देश को संबोधित किया है। ट्रंप ने कहा, ''पिछले सप्ताह हमारे सशस्त्र बलों ने युद्धक्षेत्र में कई तेज, निर्णायक और जबरदस्त जीत हासिल की हैं।''
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न्यूयॉर्क. अमेरिका के नेब्रास्का राज्य की विधायिका ने दीपावली उत्सव को मान्यता देने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसे सिएटल स्थित भारतीय मिशन ने राज्य के हिंदू समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' कदम बताया है। यह प्रस्ताव राज्य सीनेटर जॉन फ्रेडरिकसन द्वारा प्रायोजित किया गया था और 31 मार्च को स्पीकर जॉन आर्च ने इस पर हस्ताक्षर किए। सिएटल स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास ने एक बयान में कहा कि इस प्रस्ताव को अपनाया जाना अमेरिका के मध्य पश्चिमी क्षेत्र में भारतीय प्रवासी समुदाय के लिए एक ''ऐतिहासिक'' घटना है और ''कॉर्नहस्कर स्टेट'' (नेब्रास्का का आधिकारिक उपनाम) में रहने वाले लगभग 9,000 हिंदुओं के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। महावाणिज्य दूतावास ने बताया कि फ्रेडरिकसन लंबे समय से हिंदू समुदाय के समर्थक रहे हैं और मंदिरों के कार्यक्रमों में नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं। उनके निर्वाचन क्षेत्र में 1993 में स्थापित 'हिंदू टेम्पल ऑफ ओमाहा' स्थित है। इस प्रस्ताव के तहत इस वर्ष 20 अक्टूबर को राज्यपाल जिम पिलेन द्वारा गवर्नर हाउस में भव्य दीपावली समारोह आयोजित करने की भी योजना है। भारतीय मिशन ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ''नेब्रास्का में दीपावली की ऐतिहासिक विधायी मान्यता। नेब्रास्का ने राज्य विधायी प्रस्ताव (एसएलआर)-424 को अंगीकार किया है, जो दीपावली के उत्सव और उसके महत्व को मान्यता देता है।'' महावाणिज्य दूतावास ने इस कानून को आगे बढ़ाने के लिए फ्रेडरिकसन का आभार जताया और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के सदस्यों को उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया। प्रस्ताव में कहा गया है कि ''दीपावली पर्व एकता का प्रतीक है, क्योंकि इसे भारत के अधिकतर लोग मनाते हैं, चाहे उनका कोई भी धर्म हो और दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोग इस उत्सव को मनाते हैं।'' इसमें यह भी कहा गया कि यह पर्व अच्छाई, प्रकाश और ज्ञान की बुराई और अंधकार पर विजय का ''स्थायी'' प्रतीक है।
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नई दिल्ली। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने जनता से खास अपील की है। चेतावनी भी दी कि मिडिल ईस्ट के वर्तमान हालात की वजह से तेल संकट गहराएगा और आने वाले महीने “आसान नहीं रहने वाले” हैं। उन्होंने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा, “आने वाले महीने आसान नहीं हो सकते। मैं इस बारे में साफ-साफ कहना चाहता हूं। कोई भी सरकार इस युद्ध से पैदा हो रहे दबाव को खत्म करने का वादा नहीं कर सकती।”
ऑस्ट्रेलियाई पीएम ने कहा कि वह देश से सीधे बात करना चाहते हैं कि सरकार “इस मुश्किल समय में ऑस्ट्रेलिया को बचाने के लिए” क्या कर रही है, और वे (जनता) देश की मदद के लिए क्या कर सकते हैं। उन्होंने आगे कहा, “पक्ष-विपक्ष सभी ऑस्ट्रेलिया को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ताकि अगर दुनिया भर में हालात और खराब होते हैं और लंबे समय में हमारी फ्यूल सप्लाई में बहुत ज्यादा रुकावट आती है, तो हम अगले कदम मिलकर तय कर सकें।”अल्बनीज ने जनता को बताया कि वर्तमान स्थिति को ध्यान में रख फ्यूल एक्साइज आधा कर दिया गया है और अगले तीन महीनों के लिए हेवी रोड यूजर चार्ज जीरो कर दिया गया है। पीएम ने भरोसा दिलाया, “हम फ्यूल की कीमत कम करने के लिए काम कर रहे हैं। साथ ही यहां अधिक ईंधन लाने और अपने मजबूत ट्रेडिंग रिश्तों का इस्तेमाल कर ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा पेट्रोल, डीजल और फर्टिलाइजर लाने के लिए काम कर रहे हैं।”3 मिनट 17 सेकंड के संबोधन में अल्बनीज ने आगे कहा, “मैं वादा कर सकता हूं कि हम ऑस्ट्रेलिया को इसके सबसे बुरे असर से बचाने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगे।” उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई लोगों से अपील की कि वे घबराकर फ्यूल न खरीदें और जहां तक हो सके, कार की जगह पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। उन्होंने कहा, “अगर आप सड़क पर निकल रहे हैं, तो जरूरत से ज्यादा फ्यूल न लें—बस वैसे ही भरवाएं जैसे आप आम तौर पर भरवाते हैं। अपने समुदाय, दूरदराज के इलाके में रहने वाले लोग और जरूरी इंडस्ट्रीज से वास्ता रखने वालों के बारे में सोचें।” -
मॉस्को. रूसी उप विदेश मंत्री ने मंगलवार को कहा कि रूस और भारत को ''नियमित, व्यवस्थित'' संपर्क बनाए रखना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इस साल अपनी सुविधा के हिसाब सरकारी यात्रा पर आएंगे। उप विदेश मंत्री एंद्री रुदेंको ने सरकारी समाचार एजेंसी 'तास' को दिए एक साक्षात्कार में यह बात कही।
रुदेंको ने कहा, ''रूस और भारत के लिए विभिन्न स्तर पर नियमित और व्यवस्थित संपर्क बनाए रखना बहुत जरूरी है।'' उन्होंने कहा, ''हमें उम्मीद है कि भारत के प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के निमंत्रण पर उपयुक्त समय पर रूस की सरकारी यात्रा करेंगे।'' रुदेंको ने यह भी कहा कि इस वर्ष रूस-भारत शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना मॉस्को की बारी है।इससे पहले, पुतिन ने नयी दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिसंबर 2025 में भारत की यात्रा की थी। -
ह्यूस्टन. भारतीय मूल की प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ मंगला कुप्पा को अमेरिका के श्रम मंत्रालय का मुख्य सूचना अधिकारी (सीआईओ) नियुक्त किया गया है। वह पिछले वर्ष अक्टूबर से कार्यवाहक के रूप में यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं और अब औपचारिक रूप से उनकी नियुक्ति कर दी गई है। कुप्पा मंत्रालय की मुख्य कृत्रिम मेधा (एआई) अधिकारी भी हैं। उनकी नियुक्ति इसी महीने की शुरुआत में की गई। वह एजेंसी में सूचना प्रौद्योगिकी रणनीति, डिजिटल रूपांतरण और एआई के उपयोग की निगरानी जारी रखेंगी। अपनी नियुक्ति की पुष्टि करते हुए कुप्पा ने पेशेवर मंच 'लिंक्डइन' पर लिखा कि वह '' सेवा जारी रखने व बदलाव लाने का अवसर मिलने के लिए आभारी'' हैं। प्रौद्योगिकी क्षेत्र की वरिष्ठ अधिकारी कुप्पा के पास 25 वर्ष से अधिक का अनुभव है। उन्होंने मंत्रालय के आधुनिकीकरण कार्यक्रम को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह 2010 में श्रम मंत्रालय से जुड़ी थीं और तब से वह मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी और 'बिजनेस एप्लीकेशन सर्विसेज' की निदेशक सहित कई वरिष्ठ पदों पर काम कर चुकी हैं। इससे पहले वह एक दशक से अधिक समय तक श्रम सांख्यिकी ब्यूरो के साथ काम कर चुकी हैं। कुप्पा ने एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की है। उनकी नियुक्ति अमेरिका की सरकार में प्रौद्योगिकी नेतृत्व के प्रमुख पदों पर भारतीय मूल के पेशेवरों की बढ़ती उपस्थिति को भी दर्शाती है।
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काठमांडू. नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' आंदोलन के दमन में कथित भूमिका के लिए काठमांडू के पूर्व मुख्य जिला अधिकारी (सीडीओ) छवि रिजाल को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल पुलिस के अनुसार, रिजाल उन उच्च अधिकारियों की सूची में शामिल हैं जिन्हें इस आंदोलन को दबाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। इस आंदोलन के दौरान 76 लोगों की मौत हुई थी। उन्हें काठमांडू के सुबिधानगर स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया। यह घटनाक्रम पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और तत्कालीन गृह मंत्री रमेश लेखक की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद सामने आया है। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक समेत अन्य के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की थी। इस बीच, ओली की हिरासत को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बावजूद नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को उन्हें अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। काठमांडू जिला अदालत ने रविवार को ओली और लेखक को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।
ये गिरफ्तारियां बालेंद्र शाह के नेतृत्व में बनी नयी सरकार द्वारा अपनी पहली कैबिनेट बैठक में जांच आयोग की रिपोर्ट लागू करने के फैसले के बाद हुई हैं। 'जेन जेड' वे युवा हैं जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ। युवाओं के नेतृत्व में हुए 'जेन जेड' आंदोलन में भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किए गए थे, जिसके कारण ओली को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा था। -
नई दिल्ली। अमेरिकी सरकार की तरह से बार-बार इस बात को दोहराया जा रहा है कि वह लक्ष्य पूरा करने में तय समय से आगे चल रहे हैं और जल्द ही खत्म कर देंगे। अब अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका को उम्मीद है कि वह ईरान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई का लक्ष्य महीनों में नहीं, बल्कि हफ्तों में पूरा कर लेगा।
इस बीच अमेरिकी विदेश सचिव ने लड़ाई खत्म करने के लिए वाशिंगटन की शर्तें बताईं और तेहरान को होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की कोशिश के खिलाफ चेतावनी दी।स्थानीय समयानुसार, सोमवार को अल जजीरा को दिए एक इंटरव्यू में रुबियो ने कहा कि सैन्य ऑपरेशन जारी रहने के बावजूद, “ईरान और अमेरिका के अंदर कुछ लोगों के बीच खासकर बिचौलियों के जरिए मैसेज और कुछ सीधी बातचीत चल रही थी।”उन्होंने जोर देकर कहा कि वॉशिंगटन की मुख्य मांगें वैसी ही हैं, “ईरानी सरकार के पास कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं हो सकते और उन्हें आतंकवाद को स्पॉन्सर करना बंद करना होगा और उन्हें ऐसे हथियार बनाना बंद करना होगा जो उनके पड़ोसियों के लिए खतरा बन सकते हैं।”रुबियो ने कहा कि अमेरिकी सेना अपने बताए गए मकसद को पाने में बहुत आगे या तय समय से आगे है, जिसमें ईरान की एयर फोर्स और नेवी को खत्म करना और “उनके पास मौजूद मिसाइल लॉन्चर की संख्या में काफी कमी शामिल है। उन्होंने कहा, “हम ये मकसद, हफ्तों में हासिल कर लेंगे, महीनों में नहीं।” उन्होंने साफ किया कि होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल करने की ईरान की कोई भी कोशिश मंजूर नहीं होगी। दुनिया का कोई भी देश इसे स्वीकार नहीं कर सकता है।रुबियो ने चेतावनी दी कि ऐसा कदम दूसरे देशों के लिए अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर दावा करने का एक उदाहरण बनेगा। रुबियो ने आगे कहा, “अमेरिका यह शर्त नहीं मानेगा। वे जो मांग रहे हैं, वह एक गैर-कानूनी शर्त है। ऐसा बिल्कुल नहीं होने वाला है।” उन्होंने कहा कि स्ट्रेट किसी न किसी तरह से खुला रहेगा, या तो ईरान के अंतरराष्ट्रीय कानून मानने से या देशों के एक साथ आकर कार्रवाई करने से।रुबियो ने ईरान पर पूरे इलाके में आवासीय और आर्थिक इंफ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने दूतावास, डिप्लोमैटिक फैसिलिटी, एयरपोर्ट, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला किया है।”ईरान को 10 सालों में सबसे कमजोर बताते हुए, उन्होंने कहा कि भविष्य में बड़े खतरों को रोकने के लिए अभी उसकी सैन्य क्षमताओं को कम करना जरूरी है। डिप्लोमेसी को लेकर रुबियो ने कहा कि तेहरान को न्यूक्लियर हथियार रखने की किसी भी इच्छा को खत्म करने की दिशा में ठोस कदम उठाने और मिसाइल और ड्रोन प्रोग्राम छोड़ने की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, “अगर ईरान ऐसा करता है, तो देश का भविष्य अच्छा हो सकता है। दशकों से उस देश की सरकार ने इस रास्ते को नहीं अपनाया है।”इस दौरान रुबियो ने ऑपरेशन के दौरान एयरस्पेस और बेस एक्सेस न देने का जिक्र करते हुए कुछ नाटो सहयोगियों से भी निराशा जताई और कहा, “अगर नाटो का मकसद सिर्फ यूरोप की रक्षा करना है, लेकिन फिर जब हमें जरूरत हो तो हमें बुनियादी अधिकार देने से मना करना, तो यह बहुत अच्छा इंतजाम नहीं है। इन संबंधों को फिर से देखना होगा।”रुबियो ने कहा कि अमेरिका के मकसद में ईरान में शासन बदलना शामिल नहीं था। हालांकि अमेरिकी विदेश मंत्री ने इस बात को माना कि अगर ईरान के नेतृत्व में बदलाव होता है तो वाशिंगटन इसका विरोध नहीं करेगा। उन्होंने कहा, “इस ऑपरेशन का मकसद यह नहीं था।” - काठमांडू/नेपाल में पिछले साल सितंबर में हुए 'जेन जेड' विरोध-प्रदर्शनों की जांच करने वाले उच्चस्तरीय आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने के नवगठित सरकार के फैसले के एक दिन बाद शनिवार को देश के पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली को गिरफ्तार कर लिया गया। नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 'बालेन' की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई नवगठित मंत्रिमंडल की बैठक में आयोग की रिपोर्ट को तुरंत लागू करने का फैसला किया गया था। पुलिस ने बताया कि नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी (सीपीएन-यूएमएल) के अध्यक्ष ओली को शनिवार तड़के काठमांडू से 12 किलोमीटर पूर्व भक्तपुर जिले के गुंडू इलाके से गिरफ्तार किया गया। उसने बताया कि पूर्व गृह मंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के नेता रमेश लेखक को भी भक्तपुर जिले की सूर्यविनायक नगरपालिका के कटुंजे स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया है। ओली और लेखक को पिछले साल आठ और नौ सितंबर को हुए 'जेन जेड' आंदोलन को दबाने में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। इस आंदोलन में कई युवाओं सहित 76 लोग मारे गए थे। 'जेन जेड' आंदोलन से जुड़े घटनाक्रम की जांच के लिए गठित आयोग ने ओली और लेखक सहित अन्य लोगों के खिलाफ आपराधिक मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है। बालेंद्र शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नवगठित सरकार ने शुक्रवार को अपनी पहली मंत्रिमंडल बैठक में जांच आयोग की सिफारिशों को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने ओली की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, ''कानून से ऊपर कोई नहीं है।'' उन्होंने कहा, ''हमने पूर्व प्रधानमंत्री के पी ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को हिरासत में ले लिया है। ऐसा किसी से बदला लेने के लिए नहीं किया गया बल्कि यह न्याय की शुरुआत है।'' उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि अब देश को एक नयी दिशा मिलेगी।''पुलिस ने कहा कि ओली और लेखक को भद्रकाली स्थित काठमांडू जिला पुलिस सर्किल में हिरासत में रखा गया है। जांच आयोग ने इस अपराध के लिए तीन से 10 साल तक की जेल की सजा की सिफारिश की है।काठमांडू जिला पुलिस सर्किल के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने 'पीटीआई-भाषा' से कहा कि शनिवार को अवकाश होने के कारण उन्हें रविवार को काठमांडू जिला अदालत में पेश किया जाएगा। इसके बाद मामले में जांच की प्रक्रिया शुरू होगी। ओली को हिरासत में लिए जाने के तुरंत बाद चिकित्सकीय जांच के लिए त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल ले जाया गया। एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह जांच की कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है।इस बीच, सीपीएन-यूएमएल ने स्थिति पर चर्चा के लिए ललितपुर स्थित पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में सचिवालय की आपात बैठक बुलाई है।
- काठमांडू/ नेपाल के नवनिर्वाचित प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत के साथ रिश्तों को नई गति देने की इच्छा जाहिर करते हुए शनिवार को कहा कि वह भारत संग "घनिष्ठता के साथ काम करने को उत्सुक" हैं और शपथ ग्रहण के बाद शुभकामनाएं देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार भी व्यक्त किया। शुक्रवार को शपथ ग्रहण के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने शाह को बधाई देते हुए कहा था कि वह नेपाल के प्रधानमंत्री के साथ मिलकर भारत-नेपाल संबंधों को और मजबूत करने के लिए काम करने के उत्सुक हैं। मोदी के संदेश के जवाब में नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा, "प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी, आपके स्नेहपूर्ण शब्दों और शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद। मैं हमारे दोनों देशों के बीच बहुआयामी संबंधों को आगे बढ़ाने और हमारी जनता की साझा समृद्धि के लिए आपके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।" क्षेत्रीय रणनीतिक दृष्टि से नेपाल, भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण देश माना जाता है, और दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सहयोग को इस परिप्रेक्ष्य में खास अहमियत दी जाती है। नेपाल सामान और सेवाओं के परिवहन के लिए बड़े पैमाने पर भारत पर निर्भर है। चारों तरफ से जमीन से घिरे होने के कारण समुद्र तक उसकी पहुंच भारत के रास्ते ही संभव है, और वह अपनी अधिकांश जरूरतों का आयात भी भारत से या भारत के माध्यम से ही करता है।
- जानिए नेपाल के प्रधानमंत्री की परी जैसी पत्नी के बारे मेंनेपाल. नेपाल के नए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रैपर से मेयर और फिर पीएम बनने का सपना पूरा कर लिया है। बालेन शाह ने शपथ ग्रहण भी किया। बालेन शाह एक फेमस रैपर हैं। इसलिए, शपथ ग्रहण के मौके पर जय महाकाली गाना भी गाया। बालेन की राजनीतिक जिंदगी फिल्मी कहानी की तरह है। इसके अलावा इनकी लव स्टोरी भी कमाल की है। आइए, बालेन शाह की गर्लफ्रेंड से पत्नी बनी सबीना काफले के बारे में जानते हैं।बालेन शाह की पत्नी की नाम सबीना काफले है। सबीना क्रिएटिव महिला हैं। एक महिला लेखिका भी हैं। वो कविता और कहानियां लिखती हैं। यही, बात बालेन को सबीना के करीब लेकर आई थी। इन दोनों के मिलने की कहानी भी एकदम फिल्मी कहानी की तरह है। सबीना पब्लिक हेल्थ प्रोफेशनल हैं।बताया जाता है कि साल 2017 में बालेन शाह और सबीना की मुलाकात सबसे पहले एक कविता के लिए ऑनलाइन हुई थी। उसी दौरान बालेन दिल बैठे थे। फिर दोनों के बीच मेल-मुलाकात बढ़ते गए। इस तरह से दोनों लाइफ में आगे बढ़ने का फैसला लिया।इस तरह से दोनों के बीच प्यार बढ़ता गया। बात साल 2018 की है यानी आज से करीब 7 साल पहले दोनों ने शादी करने का फैसला लिया। दोनों ने बेहद साधारण तरीके से शादी कर ली थी।बालेन शाह का परिवारबालेन शाह के पिता नेपाल सरकार में आयुर्वेदिक चिकित्सक थे। उनका नाम राम नारायण शाह था। बता दें, पिछले साल 2025 में बालेन के पिता की मृत्यु हो गई। इनकी माता का नाम ध्रुवादेवी शाह है। बालेन शाह की एक बेटी भी है। बता दें, 2023 में बालेन और सबीना माता-पिता बने।बालेन शाह - रैपर, बिजनेस से प्रधानमंत्री तक का सफरबालेन शाह नेपाल में बतौर रैपर फेमस हैं। बतौर रैपर वो कंस्ट्रक्शन के बिजनेस को भी चलाते रहे। इसके बाद वो 2022 में काठमांडू मेयर का चुनाव जीतकर राजनीति में अपनी एंट्री मारी। इसके साथ ही वो एक बागी के तौर पर आगे बढ़ते रहे। कहा जाता है कि नेपाल में जेन-जी आंदोलन के पीछे भी इनका हाथ था और फिर नेपाल की जनता है इनको चुनकर नेपाल की गद्दी पर बैठा दिया।
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वॉशिंगटन. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर जल्द ही अमेरिकी मुद्रा (डॉलर) पर दिखाई देंगे और यह 1861 में डॉलर की शुरुआत के बाद से पहली बार होगा जब किसी मौजूदा राष्ट्रपति के हस्ताक्षर मुद्रा पर अंकित किए जाएंगे। अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने यह निर्णय ऐसे वक्त लिया है जब अमेरिका इस वर्ष देश की स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ का जश्न मना रहा है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अधिकारी ब्रैंडन बीच ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा ''अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप के हस्ताक्षर वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के हस्ताक्षर के साथ जल्द ही अमेरिकी मुद्रा पर दिखाई देंगे। ऐसा इतिहास में पहली बार होगा और यह राष्ट्रपति के नेतृत्व एवं हमारे महान राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण का प्रतीक है।'' इस महीने की शुरुआत में, एक संघीय कला आयोग ने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ पर ट्रंप की छवि वाले 24 कैरेट सोने के स्मारक सिक्के के अंतिम डिजाइन को मंजूरी दी थी। बेसेंट ने एक बयान में कहा, ''राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व में, हम अभूतपूर्व आर्थिक विकास, डॉलर के स्थायी प्रभुत्व और राजकोषीय मजबूती एवं स्थिरता की राह पर हैं।" उन्होंने कहा, "हमारे महान देश और राष्ट्रपति डोनाल्ड जे ट्रंप की ऐतिहासिक उपलब्धियों को मान्यता देने का इससे अधिक प्रभावशाली तरीका कोई नहीं हो सकता कि अमेरिकी डॉलर पर उनका नाम अंकित हो और यह पूरी तरह उचित है कि यह ऐतिहासिक मुद्रा स्वतंत्रता के 250वें वर्ष के अवसर पर जारी की जाए।'' ब्रैंडन बीच ने कहा कि अमेरिका के 'गोल्डन एज' आर्थिक पुनरुत्थान के वास्तुकार के रूप में राष्ट्रपति ट्रंप की छवि निर्विवाद है और अमेरिकी मुद्रा पर उनके हस्ताक्षर छापना न केवल उचित है, बल्कि पूरी तरह से न्यायसंगत भी है।
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दुबई (यूएई). इजराइल ने शुक्रवार को ईरान पर नये सिरे से हमले शुरू किए जबकि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि युद्ध खत्म करने के लिए सार्थक बातचीत जारी है। ट्रंप ने होर्मुज जलडमरुमध्य खोलने के लिए ईरान को दी गई समय-सीमा आगे बढ़ा दी, हालांकि ईरान के झुकने के कोई संकेत नहीं मिले हैं। इजराइल की सेना ने कहा कि शुक्रवार को तेहरान में हमले करते हुए बैलिस्टिक मिसाइल और अन्य हथियार बनाने के ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना ने कहा कि इसके अलावा पश्चिमी ईरान में मिसाइल लॉन्चर और भंडारण स्थलों पर भी हमले किए गए।
इजराइल में भी हवाई हमले के सायरन बजे और सेना ने कहा कि वह ईरान की मिसाइलों को रोकने की कोशिश कर रही है। वहीं, ईरान ने खाड़ी देशों पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे, जिसकी वजह से बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में अलर्ट जारी किया गया। कुवैत ने कहा कि शुवेख बंदरगाह को हमले में "भौतिक नुकसान" हुआ है, लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ।
शेयर बाजारों में गिरावट और पश्चिम एशिया के बाहर युद्ध का आर्थिक प्रभाव फैलने के बाद ट्रंप पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वह होर्मुज जलडमरुमध्य से ईरान का नियंत्रण खत्म करवाएं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसके जरिए आमतौर पर दुनियाभर में 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। अमेरिका ने युद्धविराम के लिए ईरान के सामने 15 बिंदुओं का प्रस्ताव पेश करने का दावा किया है, जिनमें इस जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण खत्म करना भी शामिल है। साथ ही, अमेरिका ने क्षेत्र में हजारों अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश भी दिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस अहम समुद्री मार्ग पर सैन्य कार्रवाई भी कर सकता है। ट्रंप ने पहले चेतावनी दी थी कि अगर 48 घंटे में जलमार्ग नहीं खोला गया तो ईरान के ऊर्जा संयंत्रों को नष्ट कर दिया जायेगा। बाद में उन्होंने इस समय-सीमा को बढ़ाकर पांच दिन कर दिया था। बृहस्पतिवार को उन्होंने इसे छह अप्रैल तक बढ़ा दिया और कहा कि सार्थक बातचीत हो रही है। हालांकि, ईरान का कहना है कि वह किसी भी तरह की बातचीत में शामिल नहीं है।
इस बीच, युद्ध शुरू होने के बाद वॉल स्ट्रीट में सबसे खराब गिरावट देखी गई, और एशियाई बाजारों में भी गिरावट आई। तनाव कम होने की संभावनाओं पर संदेह बढ़ने के कारण तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं। 'ब्रेंट क्रूड' की कीमत 107 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई, जो 28 फरवरी को ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमले के बाद से 45 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी दर्शाती है। ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने कहा कि अमेरिका ने युद्धविराम की संभावना के लिए ईरान को 15 बिंदुओं की एक सूची सौंपी है। इस सूची में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर प्रतिबंध और होर्मुज जलडमरुमध्य को फिर से खोलने जैसी शर्तें शामिल हैं। ईरान ने अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है और अपनी ओर से पांच बिंदुओं का प्रस्ताव रखा है, जिसमें युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई और होर्मुज जलडमरुमध्य पर उसकी संप्रभुता को मान्यता देने की मांग शामिल है। कई देशों के राजनयिक अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच सीधी वार्ता कराने की कोशिश कर रहे हैं। यह वार्ता संभवतः पाकिस्तान में आयोजित की जा सकती है। - काठमांडू। 'जेन जेड' आंदोलन के आदर्श 35 वर्षीय बालेंद्र शाह 'बालेन' ने शुक्रवार को लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेकर इतिहास रच दिया। रैपर, इंजीनियर और फिर नेता बने बालेंद्र शाह नेपाल की राजनीति में पीढ़ीगत बदलाव का प्रतीक बन गए हैं। बालेन मधेस क्षेत्र से देश के 47वें प्रधानमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति भी हैं। बालेन ने नेपाल के झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में के.पी. शर्मा ओली को लगभग 50,000 मतों के भारी अंतर से हराया था। ओली चार बार देश के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। बालेन ने 2022 में काठमांडू के महापौर पद के लिए हुए चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। पिछले साल सितंबर में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ राष्ट्रव्यापी हिंसक प्रदर्शनों के बाद ओली नीत गठबंधन सरकार गिर गई थी। इसके बाद 'जेन जेड' के युवाओं ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए 35 वर्षीय इंजीनियर बालेन को लोकप्रिय उम्मीदवार माना था। लेकिन बालेन ने उस समय अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया और कहा कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। 'जेन जेड' 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई पीढ़ी है।जनवरी में, बालेन रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली नवगठित राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) में शामिल हो गए और जल्द ही उन्हें पार्टी की ओर से प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। काठमांडू के महापौर के रूप में, बालेन को व्यापक सुधारों और महानगर के सौंदर्यीकरण का श्रेय दिया जाता है। देश की राजधानी काठमांडू में जन्मे बालेन आयुर्वेद चिकित्सक राम नारायण शाह और गृहिणी ध्रुवदेवी शाह के सबसे छोटे पुत्र हैं। उन्हें बचपन से ही संगीत और कविता में रुचि थी तथा शिक्षा के दौरान उन्होंने रैप संगीत की ओर रुख किया। काठमांडू से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी करने के बाद, बालेन ने कर्नाटक के विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय से इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। बालेन ने 2018 में सबीना काफले से शादी की और इस दंपति की एक बेटी है। बालेन के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर 10 लाख से अधिक 'सब्सक्राइबर' हैं।

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