बालाजी मंदिर में रजतछत्र के छांव तले भगवान राम का राज्याभिषेक
-टी सहदेव
भिलाई नगर। बालाजी मंदिर में सोमवार को रामनवमी महोत्सव के समापन पर प्रभु श्रीराम का वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच रजत छत्र की छाया में राज्याभिषेक किया गया। मंदिर के मंडप में राजसी ठाटबाट के साथ हुए प्रभु श्रीराम के राज्याभिषेक को भक्तगणों ने भावविभोर होकर देखा। सुबह दस बजे शुरू हुआ राज्याभिषेक लगभग चार घंटे चला। आंध्र साहित्य समिति के तत्वावधान में इस मंदिर में पूरे पांच दिन भक्तगणों के हुजूम के बीच धूमधाम से रामनवमी महोत्सव मनाया गया। समिति के अध्यक्ष पीवी राव और सचिव पीएस राव के नेतृत्व में धार्मिक सद्भाव से मनाए गए इस महोत्सव में सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए।
*पुलकित आंखों से देखा राज्याभिषेक*
सर्वप्रथम मंदिर के पुजारी गोपालाचारी के सान्निध्य में विधि-विधान से मंडप के बीचों-बीच राज सिंहासन को स्थापित कर मंत्रोच्चारित जल से उसका शुद्धीकरण किया गया। शुद्धीकरण के पश्चात पुजारी ने सिंहासन के ठीक सामने रजत निर्मित सुदर्शन चक्र तथा शठगोपम् को वैदिक मंत्रों का उच्चारण करते हुए प्रतिष्ठित किया। और उसके बाद चावल से भरी एक पीतल की थाली में चांदी से निर्मित प्रधान कलश पर श्रीफल और चांदी की अन्य थाली में तांबूल पत्तों पर प्रभु श्रीराम की पादुकाएं रखी गईं। पुजारी ने यजमान के रूप में बैठे बी अकमु नायडु दंपति से प्रभु की पादुकाओं का पवित्र जल से प्रक्षालन कराया, तत्पश्चात पूजा-अर्चना कराई। यजमान दंपति ने प्रभु श्रीराम की पादुकाओं को शिरोधार्य करके मंदिर की परिक्रमा भी की। सिंहासनारूढ़ होने से पहले भगवान श्रीराम और माता सीता के उत्सव विग्रहों को नूतन वस्त्रों तथा स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया गया। उसके बाद पूरे विधि विधान से राजतिलक लगाकर प्रभु श्रीराम और माता सीता का राज्याभिषेक किया गया। सिंहासन पर विराजमान होने के बाद जब प्रभु श्रीराम और माता सीता ने दर्शन दिए, तो इस अलौकिक दृष्य को वहां पर उपस्थित सभी श्रद्धालुगण पुलकित आंखों से देखते रह गए। सिंहासन स्थल पर ही लक्ष्मण और हनुमान के विग्रहों को भी पूरी साज-सज्जा के साथ रखा गया था।
*राज्याभिषेक के वृत्तांत का रसपान*
इस दौरान सुब्रमण्यम शर्मा ने राज्याभिषेक के वृत्तांत को कथा के माध्यम से सुनाया, जिसका भक्तगणों ने रोमांचित होकर रसपान किया। राज्याभिषेक के उपरांत पुजारी ने तीर्थप्रसाद देने के बाद भक्तों के शीर्ष पर शठगोपम् रखकर आशीर्वाद दिया। यहां उल्लेख करना आवश्यक है कि शठगोपम् भगवान की मुख्य मूर्ति का प्रतीक होता है। प्रभु के दर्शन के लिए आए सभी भक्तों को मंंदिर में स्थापित मुख्य मूर्ति के चरण स्पर्श की अनुमति नहीं होती, इसलिए पुजारी शठगोपम् को भक्तों के सिर पर रखते हैं। पांच दिनों तक चले महोत्सव में उपाध्यक्ष के सुब्बाराव, कोषाध्यक्ष टीवीएन शंकर, उप कोषाध्यक्ष एनएस राव, संयुक्त सचिव के लक्ष्मीनारायण व एस रवि तथा एक्जीक्यूटिव कमेटी के सभी सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।










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