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  एम्स में 'फॉरेंसिक्स एवरीवेयर' थीम पर 22वां राष्ट्रीय फॉरेंसिक सम्मेलन संपन्न; आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस की भूमिका पर चर्चा

 रायपुर । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) रायपुर के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग ने भारतीय फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी कांग्रेस (ICFMT) का 22वां वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन (ICFMTCON 2025) का सफल आयोजन किया। "फॉरेंसिक्स एवरीवेयर” की व्यापक थीम पर आधारित यह दो दिवसीय सम्मेलन में देश भर से अग्रणी फॉरेंसिक विशेषज्ञ, शिक्षाविद और चिकित्सक एक मंच पर जुटे।
सम्मेलन का उद्घाटन एम्स रायपुर के कार्यकारी निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (सेवानिवृत्त) ने मुख्य अतिथि के रूप में किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने पोक्सो (POCSO) एक्ट के तहत चिकित्सकों के सामने आने वाली जटिलताओं और नैतिक दुविधाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बाल यौन शोषण मामलों के प्रबंधन में संवेदनशीलता और स्पष्टता बनाए रखने की अनिवार्यता पर जोर दिया।
इस अवसर पर प्रो. एली महापात्रा, डीन (एकेडमिक्स), एम्स रायपुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि प्रो. एस.के. वर्मा, अध्यक्ष, ICFMT ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। सम्मेलन का एक प्रमुख आकर्षण प्रो. जगदीश चंद्र प्रवचन रहा, जिसे प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो. (डॉ.) बी. डी. गुप्ता ने प्रस्तुत किया। उन्होंने “महिलाओं के लिए कानून: वरदान या अभिशाप” विषय पर गहराई से व्याख्यान दिया। डॉ. गुप्ता ने महिलाओं के अधिकारों से संबंधित बदलते कानूनी प्रावधानों और फॉरेंसिक अभ्यास पर उनके व्यापक प्रभावों का विश्लेषण किया।
एम्स रायपुर के लिए यह एक गर्व का क्षण था, जब फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष, डॉ. कृष्णदत्त चावले को भारतीय फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी कांग्रेस का फेलोशिप सम्मान प्रदान किया गया। यह सम्मान उनके उत्कृष्ट शैक्षणिक, शोध एवं नेतृत्व योगदान की मान्यता है।
दो दिवसीय वैज्ञानिक कार्यक्रम में अतिथि व्याख्यान, पेपर एवं पोस्टर प्रस्तुतियाँ तथा इंटरैक्टिव सत्र शामिल थे। प्रमुख वक्ताओं और उनके विषयों में शामिल थे :  प्रो. सचिदानंद मोहंती, कार्यकारी निदेशक, एम्स अवंतीपुरा, ने फॉरेंसिक विशेषज्ञों के लिए आवश्यक प्रशासनिक नेतृत्व कौशल पर प्रकाश डाला। प्रख्यात फार्माकोलॉजिस्ट प्रो. एस.पी. धनेरिया ने अल्कोहल के साथ ड्रग इंटरेक्शंस पर एक महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किया। डॉ. सूमीक चौधरी, फॉरेंसिक विशेषज्ञ एवं फिल्म निर्देशक, ने जनजागरूकता फैलाने में फिल्मी माध्यम की भूमिका पर विचार प्रस्तुत किए। प्रो. आकाशदीप अग्रवाल और डॉ. उत्सव पारेख की प्रस्तुतियों में फॉरेंसिक शिक्षा एवं अभ्यास में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया गया।सम्मेलन के सफल आयोजन ने न्याय, कानून प्रवर्तन और सार्वजनिक स्वास्थ्य के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में फॉरेंसिक मेडिसिन को मजबूत करने तथा विज्ञान और समाज के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देने में एम्स रायपुर की अग्रणी भूमिका को और सुदृढ़ किया है।

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