हल्दी-कुंकू में दिखी मराठी, गुजराती, पंजाबी, तमिल संस्कृति
- महाराष्ट्र मंडल के अवंती विहार केंद्र में छाया भवालकर ने सुनाई रखुमाई और संक्रांति की कथा
- रोचक गेम्स ने उत्सव को बनाया और भी खास, पुरस्कार जीतने के लिए मची होड़
रायपुर। महाराष्ट्र मंडल के अवंती विहार केंद्र की महिलाओं ने सुदेशना मेने के निवास पर केंद्र के हल्दी-कुंकू का आयोजन किया। कार्यक्रम की शुरुआत सुदेशना मेने ने संक्रांति के महत्व और भारत के अलग-अलग इलाकों में इसे मनाने की तौर-तरीकों के बारे में बताया। वहीं इस अवसर पर केंद्र की सदस्या भारती देवरणकर महाराष्ट्रीय वेशभूषा, गीता हाटे गुजराती, जयश्री ब्राह्मणकर पंजाबी और अंजू फुंडे तमिल वेशभूषा में क्षत्रीय संस्कृति का अभिनय कर सभी का दिल जीत लिया।
महाराष्ट्र मंडल की उपाध्यक्ष गीता श्याम दलाल ने बताया कि अवंती विहार केंद्र के हल्दी कुंकू कार्यक्रम में मराठी, गुजराती, पंजाबी और तमिल कल्चर एक साथ नजर आया। इस अवसर पर केंद्र की वरिष्ठ सदस्य छाया भवालकर ने भारूड़ के रूप में रखुमाई की संक्रांति कथा को रोचक अंदाज में प्रस्तुत किया। संक्रांति पर पतंगों का विशेष महत्व होता है, इसलिए रंग-बिरंगी पतंगों पर आधारित रोचक गेम खेले गए। इसमें छाया और गीता हाटे विजेता व आनंदी ब्राह्णणकर व श्वेता फटाले उप विजेता रहीं। नंदिनी कोल्हे को तीसरे स्थान पर संतोष करना पड़ा।
दूसरे खेल में संक्रांति से जुड़े शब्दों को पहचान कर जल्दी से जवाब देना था। इसमें गीता दलाल में प्रथम, आनंदी ब्राह्मणकर द्वितीय और अंजू फूंडे तृतीय रही। धन्यवाद ज्ञापित करते हुए जागृति भाकरे ने कहा कि इस तरह के आयोजन से घर की जिम्मेदारियों के बीच महिलाओं को खुशी के पल मिलते हैं और हमारी संस्कृति और परंपरा का निर्वहन होता है, जिसे हम भावी पीढ़ी को सौंप सकते हैं।
इस अवसर पर मंडल शुभदा गिजरे, रेखा खूटे, मीना इंगलीकर, निशान उमाले, राजश्री कोल्टे, वसुधाताई हिरदे, शिल्पा चौधरी, भारती कुर्वे, मनीषा दासे, योगिनी मुजुमदार, आकांक्षा मोहदीवाले, सुदेशना मेने, छाया महाजन और शुभदा चौधरी मौजूद रहीं।










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