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 धमधा वालों ने 1933 में महात्मा गांधी को दी थी 101 रूपए की पोटली

 - गांधी जयंती पर संस्कृति विभाग में लगी प्रदर्शनी के ऐतिहासिक दस्तावेजों में हुआ खुलासा
 - धमधा आजादी के पहले से है महात्मा गांधी पुस्तकालय और उसका भवन
 धमधा । ऐतिहासिक नगर धमधा के लोगों के नाम आजादी की लड़ाई में भले ही दर्ज नहीं हो सका हो, लेकिन धमधा के लोगों का महात्मा गांधी के प्रति असीम प्रेम था। इसकी एक झलक 1933 में अंग्रेज अधिकारी व्दारा लिखे गए गोपनीय पत्र में देखने के मिलती है, जिसमें लिखा गया है कि महात्मा गांधी जब दुर्ग के दौरे पर आए थे, तब धमधा के लोगों ने उन्हें एक पोटली दी थी, जिसमें 101 रूपए का दान था।
 इसकी जानकारी छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग व्दारा लगाई गई छायाचित्र प्रदर्शनी- राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जीवन यात्रा में मिलती है। गांधी जयंती के अवसर पर 4 अक्टूबर तक रायपुर के महंत घासीदास संग्रहालय की कला विथिका में आयोजित प्रदर्शनी में एक ऐतिहासिक पत्र भी रखा गया है, जिसमें गांधी जी का दुर्ग जिले की यात्रा के बारे में लिखा गया है। यह पत्र 17 नवंबर 1933 को जबलपुर कैंप के एक अंग्रेज अधिकारी ने मुख्य सचिव के गोपनीय पत्र के संदर्भ में लिखा है। इस पत्र में उल्लेख है कि गांधी जी 22 नवंबर 1933को दोपहर 2.30 बजे कोलकाता मेल से दुर्ग पहुंचे। उनके साथ रविशंकर शुक्ल और शिवदास डागा रायपुर से तथा आरके झा व घनश्याम सिंह गुप्ता दुर्ग से थे। उनके स्वागत में 50 स्वयंसेवक उपस्थित थे। गांधी जी ने आर्य समाज कन्या शाला का दौरा किया, जहां अर्जुंदा के महार समाज की महिलाओं ने चरखा कातने का प्रदर्शन किया। वे हरिजन बस्तियों में भी गए, रास्ते में सफाईकर्मियों ने उन्हें माला पहनाई और फल दिया। महात्मा गांधी घनश्याम सिंह गुप्ता के घर से 4.10 बे निकले और मोती तालाब में एक सभा हुई, जिसमें 15 हजार लोग शामिल हुए। इसमें गांधी जी को तीन पोटली दी गई, जिसमें एक धमधा की पोटली थी, जिसमें 101 रूपए थे। दो और पोटली थी, जो बार एसोसिएशन (200 रुपए) और संग्रहित राशि (320 रुपए) थी। पत्र ने यहा भी लिखा है कि गांधी जी कुछ देर कुम्हारी में भी रूके थे।
 प्रदर्शनी देखने गए धर्मधाम गौरवगाथा समिति के सदस्यों ने ऐतिहासिक पत्र में धमधा के नाम के उल्लेख होने पर गर्व का अनुभव किया। समिति के संयोजक श्री वीरेंद्र देवांगन, ईश्वरी निर्मल, अशोक देवांगन ने बताया कि धमधानगर की शैक्षणिक यात्रा सुरता किताब में भी इस बात का उल्लेख है, जिसमें बताया गया है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उदय प्रसाद उदय ने ही हरिजन उद्धार और राष्ट्रीय आंदोलन के लिये गांधी जी को 101/- की पोटली सौंपी थी, जिसके बाद गांधी जी ने श्री उदय को पत्र लिखा था। 
 आजादी के पहले ही यहां प्रभाव युवक संघ संचालित था, जो शैक्षिक, सांस्कृतिक क्षेत्र में जागरूकता अभियान चला रहा था। इस संस्था आजादी के पहले ही पुस्तकालय का संचालन किया जा रहा था, जिसके लिए 1948 में एक भवन निर्माण कराया गया और इसका नाम महात्मा गांधी पुरस्तकालय रखा गया। इसका उद्घाटन सेवाग्राम के पंडित आचार्य राधाकृष्णन ने की थी। श्री वीरेंद्र देवांगन ने कहा कि धर्मधाम गौरवगाथा समिति अपने पुरातत्व, ऐतिहासिकता और तालाबों के संरक्षण की दिशा में कार्य कर रही है। धमधा के शोध में यह पत्र काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने इसके लिए संस्कृति विभाग का विशेष आभार जताया है, जिनके माध्यम से धमधा के इतिहास की जानकारी मिली है।

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