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 फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ व्यवसाय ने बदली बबली की जिंदगी

-बिहान से मिली उड़ान, साय सरकार की योजनाओं से मजबूत हुआ आत्मविश्वास
- प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के महिला स्व-सहायता समूहों को आत्मनिर्भर बनाने के विजन की दिख रही जमीनी तस्वीर
 रायपुर / कभी परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए सीमित साधनों पर निर्भर रहने वाली ग्राम पंचायत चुकतीपानी की श्रीमती बबली यादव आज अपने हुनर, मेहनत और आत्मविश्वास से अपनी अलग पहचान बना रही हैं। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़कर उन्होंने एक नहीं, बल्कि कई आजीविका गतिविधियों को अपनाया। फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसे अलग-अलग कामों से उन्होंने अपनी आय का मजबूत आधार तैयार किया है। आज उनकी कहानी गांव की उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है, जो अपने पैरों पर खड़ा होकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने का सपना देखती हैं।श्रीमती बबली यादव जागृति महिला स्व सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने कंप्यूटर खरीदा और अपने घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी कार्य शुरू किया। शुरुआत भले ही छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और निरंतर प्रयास ने इस काम को उनकी नियमित आय का जरिया बना दिया।
बबली की मेहनत का लाभ केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं रहा। गांव में ही फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़े काम की सुविधा मिलने लगी। पहले जिन छोटे-छोटे कामों के लिए ग्रामीणों को बाहर जाना पड़ता था, वे अब स्थानीय स्तर पर ही पूरे होने लगे। इस तरह उनका स्वरोजगार ग्रामीणों के लिए सुविधा और उनके परिवार के लिए आय का माध्यम बन गया।
श्रीमती बबली यादव ने अपनी आय को एक ही साधन तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने मशरूम उत्पादन की शुरुआत की। कम जगह में शुरू किए गए इस कृषि आधारित व्यवसाय से उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। मशरूम उत्पादन ने उन्हें यह विश्वास दिया कि स्थानीय संसाधनों और उपलब्ध अवसरों का सही उपयोग कर गांव में रहते हुए भी आय के नए रास्ते बनाए जा सकते हैं।इसके साथ ही वे पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ी हैं। इस गतिविधि के जरिए वे स्वयं आय अर्जित करने के साथ ग्रामीण महिलाओं को भी रोजगार और आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। इस तरह फोटो कॉपी से लेकर मशरूम और महुआ तक, बबली ने अपनी आजीविका को कई आय स्रोतों से जोड़ा है।
श्रीमती बबली यादव बताती हैं कि फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी गतिविधियों से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक हो जाती है। इस अतिरिक्त आय से परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिली है। पहले जहां परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए आय के सीमित साधन थे, वहीं अब उनके पास अपनी मेहनत से कमाई का नियमित माध्यम है।
उनके लिए यह बदलाव केवल आमदनी बढ़ने तक सीमित नहीं है। आर्थिक आत्मनिर्भरता ने उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ाया है। आज वे अपने परिवार की जरूरतों में सहयोग देने के साथ अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार और समूह आधारित गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।
छत्तीसगढ़ में राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन-बिहान के माध्यम से महिला स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में इन प्रयासों को आगे बढ़ाया जा रहा है। बबली यादव की कहानी इसी व्यवस्था का स्थानीय उदाहरण है, जहां समूह से जुड़ाव, ऋण की सुविधा और आजीविका के अवसर ने एक ग्रामीण महिला को अपने पैरों पर खड़े होने का रास्ता दिया।
श्रीमती बबली यादव की सफलता उस व्यापक सोच से भी जुड़ती है, जिसमें ग्रामीण महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि आर्थिक गतिविधियों की सक्रिय भागीदार बनाने पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को विकसित भारत की मजबूत कड़ी बताते हुए ‘लखपति दीदी’ के माध्यम से महिलाओं की आय और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर जोर दिया है।
केंद्र सरकार के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को वित्तीय, तकनीकी और बाजार से जुड़ी सहायता के माध्यम से आजीविका मजबूत करने पर जोर दिया जाता है। मिशन में ग्रामीण महिलाओं को सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से संगठित कर ऋण और अन्य संसाधनों तक पहुंच उपलब्ध कराने की व्यवस्था है।यही सोच गांव की महिलाओं के जीवन में धीरे-धीरे बदलाव ला रही है। बबली यादव ने समूह से मिली ताकत को अपने स्थानीय ज्ञान और मेहनत से जोड़ा और अलग-अलग गतिविधियों को अपनी आजीविका का आधार बनाया।
श्रीमती बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। इन योजनाओं से मिले सहयोग ने उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों को मजबूत आधार दिया है। एक ओर जहां आवास ने परिवार को सुरक्षित आश्रय का संबल दिया, वहीं दूसरी ओर नियमित आर्थिक सहायता ने घरेलू जरूरतों को पूरा करने में सहयोग किया।
बबली कहती हैं कि शासन की योजनाओं और बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। उनके अनुसार, यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन, समूह का साथ और आर्थिक गतिविधि शुरू करने का अवसर मिले तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बन सकती हैं।
बबली यादव की कहानी बताती है कि आत्मनिर्भरता के लिए हमेशा बड़े कारोबार से शुरुआत करना जरूरी नहीं है। एक कंप्यूटर और फोटो कॉपी मशीन से शुरू हुआ काम, उसके बाद मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से जुड़ी गतिविधियां, इन छोटे-छोटे प्रयासों ने मिलकर उनकी आय को मजबूत किया।
आज बबली के लिए उनके घर का छोटा-सा व्यवसाय केवल कमाई का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास की पहचान बन चुका है। उनके हाथों में अब सिर्फ काम नहीं, बल्कि अपने परिवार और गांव की दूसरी महिलाओं के लिए नई संभावनाओं की उम्मीद भी है।
बबली यादव की सफलता इस बात की मिसाल है कि जब महिला को समूह का साथ, वित्तीय अवसर, प्रशिक्षण और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिलता है, तो वह अपनी परिस्थितियों को बदलने की क्षमता रखती है। चुकतीपानी की बबली अब केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं कर रहीं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह संदेश दे रही हैं कि मेहनत, अवसर और आत्मविश्वास के साथ आत्मनिर्भरता की राह गांव से भी शुरू की जा सकती है।

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