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भारतीय समुदाय को उनकी जड़ों के करीब लाने के लिए भारतीय मिशन नई पहल करे : संसदीय समिति


नयी दिल्ली.  संसद की एक समिति ने सरकार से विदेशों में रहने वाले प्रत्येक भारतीय को पंजीकृत करने के लिए मौजूदा बाधाओं का अध्ययन कर नई पहल करने को कहा है ताकि भारतीय समुदाय को उनकी जड़ों के करीब लाया जा सके। लोकसभा में सोमवार को पेश भारतीय जनता पार्टी सांसद पी पी चौधरी की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति की ‘‘ भारतीय समुदाय का कल्याण : नीतियां/योजनाएं विषय पर सरकार द्वारा की गई कार्रवाई रिपोर्ट में कहा गया है कि, प्रवासी कामगारों और छात्रों सहित भारतीय समुदाय का एक बड़ा हिस्सा विदेश में भारतीय मिशनों/पोस्ट में स्वयं को पंजीकृत नहीं कराता है। इसके अनुसार, समिति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि उन्हें इस तरह के पंजीकरण के लिए प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रयास किये जाएं और मूल्यांकन के आधार पर नई पहल की जाए ताकि हमारे दूतावासों को भारतीय समुदाय के लिए ‘‘घर से दूर एक घर'' बनाया जा सके। समिति इस तथ्य से सहमत है कि चूंकि पंजीकरण स्वैच्छिक है, इसलिए 100 प्रतिशत भारतीय समुदाय को मिशनों के साथ पंजीकृत नहीं किया जा सकता है और संकट के समय उन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त तंत्र बनाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, फिर भी समिति का विचार है कि पूर्ण डाटाबेस के लिए विदेशों में भारतीय मिशन/ पोस्ट उस देश में प्रत्येक भारतीय तक पहुंचने में अधिक सक्रियता से कार्य करे। समिति ने इस बात को दोहराया कि विदेशों में प्रत्येक भारतीय को पंजीकृत करने के लिए मौजूदा बाधाओं का अध्ययन कर नई पहल की जाए ताकि भारतीय समुदाय को उनकी जड़ों के करीब लाया जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, यूक्रेन और चीन में मेडिकल और अन्य पाठ्यक्रमों का अध्ययन करने वाले हजारों भारतीय छात्रों की दुर्दशा के बारे में चिंतित समिति ने विदेश मंत्रालय को इन देशों से लौटने वाले मेडिकल छात्रों को एक बार छूट के आधार पर भारतीय निजी चिकित्सा संस्थानों में दाखिला लेने की अनुमति देने का प्रस्ताव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सामने रखने की इच्छा व्यक्त की थी। समिति ने यह इच्छा व्यक्त की थी कि विदेश मंत्रालय भारतीय छात्रों की चीन से वापसी की सुविधा के लिए मिशन के साथ समन्वित प्रयास करे। समिति ने यह नोट किया कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने एक योजना तैयार की थी जिसके तहत ऐसे भारतीय छात्र, जिनका असाधारण परिस्थितियों के कारण वास्तविक प्रशिक्षण नहीं हो पाया था और जिनको 30 जून 2022 को या उससे पहले विदेश में संबंधित संस्थानों द्वारा डिग्री के पूरा होने का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया था....उन्हें विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (एफएमजीई) में उपस्थित होने और एफएमजीई अर्हता प्राप्त करने एवं भारत में पंजीकरण के पात्र होने के लिए दो वर्ष की अवधि का अनिवार्य रोटेटिंग मेडिकल इंटर्नशिप (सीआरएमआई) करना आवश्यक है। इसमें कहा गया है कि समिति आशा करती है कि राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग द्वारा तैयार किया गया यह विकल्प उन मेडिकल छात्रों को राहत प्रदान करेगा जो यूक्रेन, चीन में आपातकालीन स्थितियों के कारण स्वदेश लौट आए थे।

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