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 'कोचिंग कक्षाएं ज्ञान का मंदिर नहीं हैं', इग्नू के दीक्षांत समारोह में बोले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़

  नई दिल्ली।उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को छात्रों को आगाह किया कि कोचिंग कक्षाएं वास्तविक बौद्धिक प्रदर्शन के बजाय 'जड़ता' की प्रतीक हैं और उन्हें याद दिलाया कि नवाचार अलग तरीके से सोचने से संभव होता है। उपराष्ट्रपति ने यह भी कहा कि छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाएं के जरिये सरकारी पद पाने से इतर अन्य अवसरों की तलाश करने के बारे में अवश्य सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि आजकल ये अवसर आसानी से उपलब्ध हैं।
राष्ट्रीय राजधानी में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए धनखड़ ने युवाओं को सलाह दी कि वे संदेह और असुरक्षा की भावनाओं को दूर करें तथा इसके बजाय महान विचारों को सहेजने के लिए अपने मस्तिष्क का इस्तेमाल करें। उपराष्ट्रपति ने छात्रों को नकारात्मकता को दूर करने और बिना किसी डर के अच्छे विचारों को क्रियान्वित करने के महत्व पर जोर दिया। धनखड़ ने छात्रों से कहा कि अक्सर नवाचार अलग तरह से सोचने और कोचिंग कक्षाओं की 'जड़ता' को चुनौती देने से आता है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि कोचिंग कक्षाएं वास्तविक बौद्धिक प्रदर्शन या ज्ञान के मंदिरों के बजाय 'जड़ता' की प्रतीक हैं। उन्होंने छात्रों को यह भी बताया कि कैसे सिविल सेवा क्षेत्र के लोग अपना स्टार्ट-अप स्थापित कर रहे हैं तथा कृषि एवं विपणन जैसे नये क्षेत्र तलाश रहे हैं। 

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