तेजस ने स्वदेशी रूप से विकसित डिजिटल कंप्यूटर प्रणाली के साथ सफलतापूर्वक उड़ान भरी
नयी दिल्ली। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि स्वदेशी रूप से विकसित ‘डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर' को हल्के लड़ाकू विमान तेजस में एकीकृत किया गया है जो एक "महत्वपूर्ण घटनाक्रम" है। स्वदेश निर्मित तेजस एकल इंजन वाला बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है जो उच्च खतरे वाले हवाई क्षेत्र में काम करने में सक्षम है। इसे हवाई रक्षा, समुद्री टोही और हमले की भूमिका निभाने के उद्देश्य से डिज़ाइन किया गया है। रक्षा मंत्रालय ने कहा, "तेजस एमके1ए कार्यक्रम की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में ‘डिजिटल फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल कंप्यूटर' (डीएफसीसी) को प्रोटोटाइप एलएसपी7 में एकीकृत किया गया और 19 फरवरी को सफलतापूर्वक उड़ान संचालन किया गया।" ‘तेजस-एमके1ए' संस्करण के लिए डीएफसीसी को वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (एडीई), बेंगलुरु द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उड़ान नियंत्रण के सभी महत्वपूर्ण मानक और प्रदर्शन संतोषजनक पाए गए। इसने कहा कि पहली उड़ान का संचालन राष्ट्रीय उड़ान परीक्षण केंद्र से संबद्ध विंग कमांडर सिद्धार्थ सिंह केएमजे (सेवानिवृत्त) ने किया। भारतीय वायुसेना पहले ही ‘तेजस एलसीए एमके1' का संचालन शुरू उकर चुकी है।
विमान के उन्नत संस्करण ‘तेजस एमके1ए' में उन्नत मिशन कंप्यूटर और उच्च-प्रदर्शन डिजिटल उड़ान नियंत्रण कंप्यूटर (डीएफसीसी एमके1ए) सहित कई आधुनिक प्रणालियां हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तेजस एमके1ए के लिए इस महत्वपूर्ण प्रणाली के विकास एवं सफल उड़ान परीक्षण में शामिल रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ), वायुसेना, एडीए और उद्यमों की की सराहना की। सिंह ने इसे 'आत्मनिर्भरता' की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
तेजस विमान भारतीय वायुसेना का मुख्य आधार बनने के लिए तैयार है जिसमें शुरुआती संस्करण के लगभग 40 तेजस पहले ही शामिल किए जा चुके हैं।

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