टाइगर जिंदा है: चंपई सोरेन के भाजपा में शामिल होने पर शिवराज ने कहा
रांची। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को रांची में एक पार्टी समारोह में झारंखड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन का भाजपा में स्वागत किया। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि टाइगर जिंदा है।
चंपई को 'कोल्हान का टाइगर' के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने झारखंड आंदोलन के दौरान झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन के साथ सक्रिय रूप से योगदान दिया था। झामुमो के पूर्व नेता ने शुक्रवार को भाजपा का दामन थाम लिया। दो दिन पहले उन्होंने झामुमो से इस्तीफा दिया था। जिसमें उन्होंने पार्टी की मौजूदा कार्यशैली पर असंतोष जताया था।
चौहान ने कहा, चंपई सोरेन ने झारखंड के निर्माण के लिए बहुत कठिन लड़ाई लड़ी थी और उनके प्रयासों की वजह से पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राज्य का निर्माण किया। उन्होंने कहा कि चंपई ने झामुमो को एक माली की तरह संभाला। लेकिन उन्हें सौतेले व्यवहार का सामना करना पड़ा। केंद्रीय मंत्री ने कहा, जब चंपई झारखंड के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बिचौलियों के खिलाफ कड़े फैसले लिए। इससे झामुमो नाराज हो गाया और उन्होंने उनका अपमान करना शुरू कर दिया। चंपई झारखंड को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भाजपा और चंपई ने यह संकल्प लिया है कि झारखंड और इसके लोगों का अपमान नहीं होने देंगे।
वहीं, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने कहा कि चंपई सोरने को उनके ही राज्य की सरकार ने छह महीने तक निगरानी में रखा। सरमा ने कहा कि झामु-गठबंधन को दो महीने में एक कड़ा जवाब मिलेगा। झारखंड विधानसभा चुनावों के लिए भाजपा के सह-प्रभारी सरमा ने कहा, चंपई सोरने को झारखंड पुलिस ने छह महीने तक निगरानी में रखा। मैंने कभी किसी मुख्यमंत्री के बारे में ऐसा नहीं सुना। मैं चेतावनी देता हूं (मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन), हम दो महीने एक कड़ी प्रतिक्रिया देंगे। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट हेमंत सोरेन सरकार ने चंपई सोरेन जैसे बड़े नेता को भी नहीं बख्शा, जो झामुमो प्रमुख शिभू सोरेन के करीबी सहयोग थे। सरमा ने कहा, 1937 में जब मुस्लिम लीग असम में शासन कर रही थी और सर सैयद सादुल्ला मुख्यमंत्री थे, उन्होने हर शुक्रवार को जुम्मा की नमाज के लिए दो घंटे का ब्रेक तय किया था। आज हमारे विधायकों ने फैसला लिया है कि हमें विधानसभा में काम करने के लिए आना है। इसलिए हम दो घंटे का ब्रेक नहीं चाहते। हमारे विधानसभा नियम समिति में अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य भी हैं, इसलिए यह फैसला सबने मिलकर लिया है। यह मेरा व्यक्तिगत फैसला नहीं है, यह विधानसभा का निर्णय है।










Leave A Comment