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भारत का ऊर्जा क्षेत्र 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर देता है: प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को वैश्विक निवेशकों को भारत के बढ़ते ऊर्जा क्षेत्र का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि यह क्षेत्र 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर प्रदान करता है। मोदी ने साथ ही इस बात पर जोर दिया कि देश जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा 'शोधन' केंद्र बन जाएगा।
'भारत ऊर्जा सप्ताह' (आईईडब्ल्यू) 2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने निवेशकों से शोधन (रिफाइनिंग), एलएनजी 'वैल्यू चेन' अवसंरचना, सिटी गैस वितरण तथा तेल एवं गैस अन्वेषण जैसे क्षेत्रों में निवेश करने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश का लक्ष्य 2030 तक तेल एवं गैस क्षेत्र में 100 अरब अमेरिकी डॉलर का निवेश करना है। तेल शोधन क्षमता को 26 करोड़ टन प्रति वर्ष से बढ़ाकर 30 करोड़ टन प्रति वर्ष किया जाएगा। मोदी ने कहा, '' ऊर्जा क्षेत्र हमारी आकांक्षाओं का केंद्र है। इसमें 500 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश के अवसर मौजूद हैं। इसलिए, मेरी अपील है कि भारत में बनाओ, भारत में नवाचार करो, भारत के साथ विस्तार करो, भारत में निवेश करो। '' उन्होंने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र में भारत शीर्ष पांच निर्यातकों में से एक है।
प्रधानमंत्री ने कहा,  ऊर्जा क्षेत्र की बात करें तो ऊर्जा मूल्य श्रृंखला में निवेश के अपार अवसर मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, अन्वेषण क्षेत्र को ही देखें। भारत ने इसे काफी हद तक खोल दिया है।'' उन्होंने कहा, '' आप हमारे गहरे समुद्र में अन्वेषण प्रयासों, 'समुद्र मंथन' परियोजना से भी अवगत हैं।'' मोदी ने कहा, '' हम इस दशक के अंत तक अपने तेल एवं गैस क्षेत्र में निवेश को बढ़ाकर 100 अरब अमेरिकी डॉलर करने का प्रयास कर रहे हैं। हमारा लक्ष्य अन्वेषण के दायरे को 10 लाख वर्ग किलोमीटर तक विस्तारित करना भी है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यहां 170 से अधिक ब्लॉक आवंटित किए जा चुके हैं।'' उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार बेसिन भी देश की अगली हाइड्रोकार्बन उम्मीद के रूप में उभर रहा है। मोदी ने अन्वेषण क्षेत्र में किए गए कई सुधारों पर भी चर्चा की और बताया कि प्रतिबंधित क्षेत्रों में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा, '' आईईडब्ल्यू के पिछले संस्करण में जो भी सुझाव दिए गए थे उनके अनुरूप हमने अपने नियमों में बदलाव किए हैं। यदि आप अन्वेषण क्षेत्र में निवेश करते हैं, तो आपकी कंपनी की लाभप्रदता में निश्चित रूप से वृद्धि होगी।'' उन्होंने कहा कि भारत की एक और विशेषता ऊर्जा क्षेत्र में निवेश को अत्यधिक लाभदायक बनाती है। इसकी शोधन क्षमता बहुत अधिक है। शोधन क्षमता के मामले में भारत विश्व में दूसरे स्थान पर है। प्रधानमंत्री ने कहा, '' जल्द ही हम पहले स्थान पर होंगे। आज भारत की शोधन क्षमता लगभग 26 करोड़ टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) है। इसे बढ़ाकर 30 करोड़ टन प्रति वर्ष से अधिक करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। यह निवेशकों के लिए एक बड़ा लाभ है।'' उन्होंने बताया कि भारत में एलएनजी की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत ने अपनी कुल ऊर्जा मांग का 15 प्रतिशत एलएनजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा, '' इसलिए, हमें संपूर्ण एलएनजी मूल्य श्रृंखला पर काम करने की आवश्यकता है। भारत परिवहन पर भी बड़े पैमाने पर काम कर रहा है। हम एलएनजी परिवहन के लिए आवश्यक जहाजों का विनिर्माण यहीं भारत में कर रहे हैं।''
मोदी ने बताया कि हाल ही में भारत में जहाज निर्माण के लिए 70,000 करोड़ रुपये का एक कार्यक्रम शुरू किया गया है। उन्होंने साथ ही कहा कि भारत अब ऊर्जा सुरक्षा से आगे बढ़कर ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में काम कर रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत एक ऐसा ऊर्जा क्षेत्र परिवेश बना रहा है जो घरेलू मांग को पूरा कर सकता है और किफायती शोधन एवं परिवहन समाधानों के साथ, विश्व को निर्यात को भी अत्यधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा। 'भारत ऊर्जा सप्ताह' 2026 ऊर्जा सुरक्षा, स्थिरता एवं समावेशी वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए नीति-निर्माताओं, उद्योगपतियों और नवप्रवर्तकों को एकजुट करने वाला एक प्रमुख वैश्विक मंच है।

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