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 भारत और ईयू पहली ‘रणनीतिक विदेश नीति वार्ता' आयोजित करने पर सहमत हुए

 नयी दिल्ली।   भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) ने मंगलवार को भू-राजनीतिक तनाव और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की आक्रामकता सहित कई महत्वपूर्ण चुनौतियों से मिलकर निपटने के लिए जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय ‘रणनीतिक विदेश नीति वार्ता' आयोजित करने पर सहमति जताई। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और 27 देशों के समूह की उनकी समकक्ष काजा कालास के बीच फोन पर बातचीत के दौरान रणनीतिक वार्ता शुरू करने का निर्णय लिया गया। यूरोपीय संघ के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति की राजनयिक कालास ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति वार्ता आयोजित करने पर सहमति बनी है।

पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति आयोजित करने का यह फैसला नई दिल्ली में भारत और ईयू के बीच शिखर-स्तरीय वार्ता आयोजित करने से कुछ महीने पहले लिया गया है। आगामी शिखर-स्तरीय वार्ता में सुरक्षा, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग और मजबूत करने को लेकर बेहतर परिणाम की उम्मीद है। इस मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि उम्मीद है कि दोनों पक्षों के विदेश मंत्रियों के स्तर पर होने वाली बातचीत संयुक्त रणनीति विकसित करने और चीन सहित विभिन्न भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना करने में गहन सहयोग स्थापित करने के वास्ते एक मंच प्रदान करेगी। कालास ने कहा, ‘‘ भारत के (विदेश मंत्री) जयशंकर से बात करना बहुत अच्छा रहा। वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां आपस में जुड़ी हुई हैं। हम सुरक्षा, व्यापार, डिजिटल और ‘ग्रीन ट्रांजिशन' पर प्रगति करने के लिए मिलकर काम करेंगे।'' उन्होंने कहा, ‘‘हम जल्द ही पहली मंत्रिस्तरीय रणनीतिक विदेश नीति वार्ता आयोजित करने पर सहमत हुए हैं।'' जयशंकर ने अपनी ओर से कहा, ‘‘यूरोप, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के घटनाक्रम पर चर्चा की। जल्द ही बैठक की उम्मीद है।'' जयशंकर और कालास के बीच हुई बातचीत पर भारत में यूरोपीय संघ के राजदूत हर्वे डेल्फिन ने कहा कि दोनों पक्ष आपसी हितों के सुरक्षा मुद्दों एवं विदेश नीति की एक विस्तृत शृंखला पर भारत-ईयू सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। पिछले साल फरवरी में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की शुरुआत के बाद रणनीतिक वार्ता शुरू करने के निर्णय को एक प्रमुख कदम के रूप में देखा जा रहा है। इसके बाद, दोनों पक्षों ने टीटीसी के तहत तीन कार्य समूह स्थापित किए।
 पहला कार्य समूह रणनीतिक प्रौद्योगिकियों, डिजिटल शासन और डिजिटल संपर्क से संबंधित है। दूसरा कार्य समूह हरित और स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों से और तीसरा कार्य समूह व्यापार, निवेश और लचीली मूल्य शृंखलाओं से जुड़ा है। यह परिषद कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम कंप्यूटिंग, सेमी कंडक्टर और साइबर सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान कर रही है। भारत के साथ टीटीसी यूरोपीय संघ की दूसरी ऐसी प्रौद्योगिकी साझेदारी थी। इससे पहले पहली साझेदारी जून 2021 में अमेरिका के साथ हुई थी। भारत और यूरोपीय संघ हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक स्वतंत्र, खुली, समावेशी और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए गहन सहयोग बनाने पर भी विचार कर रहे हैं। 

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