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संविधान की 75 वर्ष की यात्रा असाधारण, देश तीसरी आर्थिक शक्ति बनने की ओर अग्रसर : प्रधानमंत्री

नयी दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को भारतीय संविधान की 75 साल की यात्रा को ‘असाधारण' करार देते हुए शनिवार को कहा कि देश विश्व की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बहुत मजबूत कदम रख रहा है। संविधान के 75 वर्ष की गौरवशाली यात्रा पर लोकसभा में हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘‘75 वर्ष की ये उपलब्धि असाधारण है। जब देश आजाद हुआ और उस समय भारत के लिए जो-जो संभावनाएं व्यक्त की गई थीं उन संभावनाओं को निरस्त करते हुए, परास्त करते हुए भारत का संविधान हमें यहां तक ले आया है।'' मोदी ने कहा कि भारत बहुत जल्द विश्व की तीसरी बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की दिशा में बहुत मजबूत कदम रख रहा है और 140 करोड़ देशवासियों का संकल्प उसे स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक विकसित भारत बनाने का है। इस महान उपलब्धि के लिए संविधान निर्माताओं के साथ-साथ देश के कोटि-कोटि नागरिकों को ‘‘आदरपूर्वक नमन'' करते हुए मोदी ने कहा कि संविधान की ही देन है कि उन्हें लगातार तीन बार प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि इस यात्रा में कई उतार और चढ़ाव आए लेकिन देश की जनता हमेशा संविधान के साथ खड़ी रही लेकिन कांग्रेस के एक परिवार ने संविधान को भावना को चोट पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस और गांधी-नेहरू परिवार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि इस यात्रा में पचपन साल तक एक परिवार ने राज किया और इस परिवार की कुविचार, कुरीति और कुनीति की परंपरा निरंतर चल रही है। उन्होंने कहा, ‘‘हर स्तर पर इस परिवार ने संविधान को चुनौती दी है।''
 प्रधानमंत्री ने कहा कि आजादी के बाद 1952 तक अस्थायी व्यवस्था थी क्योंकि चुनाव नहीं हुए थे और अंतरिम व्यवस्था थी। उन्होंने कहा, ‘‘राज्यों में भी चुनाव नहीं हुए थे और जनता का कोई आदेश नहीं था और 1951 इन्होंने अध्यादेश के जरिए संविधान को बदला और अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला किया। यह संविधान निर्माताओं का भी अपमान था। जब संविधान सभा में उनकी कुछ न चली तो जैसे ही मौका मिला, उन्होंने अभिव्यक्ति की आजादी पर हथौड़ा मार दिया।'' विविधता में एकता को भारत की विशेषता बताते हुए मोदी ने कहा कि आज का यह अवसर देश की प्रगति भी विविधता का उत्सव मनाने का भी है। उन्होंने कहा कि लेकिन गुलामी की मानसिकता में पले-बढ़े लोगों ने और भारत का भला न देख पाने वाले लोगों ने इस विविधता में भी विरोधाभास ढूंढा। उन्होंने कहा, ‘‘वे इस उत्सव को मनाने के बजाय उस विविधता में ऐसे जहरीले बीज बोने के प्रयास करते रहे, ताकि देश की एकता पर चोट पहुंचे। अनुच्छेद 370 यही था। देश की एकता में दीवार बना पड़ा था, लेकिन देश की एकता हमारी प्राथमिकता थी, जो हमारी संविधान की भावना थी... इसीलिए अनुच्छेद 370 को हमने जमीन में गाड़ दिया।'' आपातकाल को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्षी दल के माथे से यह कलंक कभी नहीं मिट सकेगा। उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में जब भी लोकतंत्र की चर्चा होगी तो कांग्रेस के माथे से कभी यह कलंक मिट नहीं सकेगा क्योंकि लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया था। भारतीय संविधान निर्माताओं की तपस्या को मिट्टी में मिलाने की कोशिश की गई थी।'' प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का गणतांत्रिक अतीत विश्व के लिए प्रेरक रहा है और इसलिए देश को लोकतंत्र की जननी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि ‘‘जब हम संविधान लागू होने के 75 वर्ष का उत्सव मना रहे हैं तो अच्छा संयोग है कि राष्ट्रपति पद पर एक महिला आसीन हैं जो संविधान की भावना के अनुरूप भी है।

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