नहीं रहे मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन
पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्म विभूषण जाकिर हुसैन ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोमवार सुबह अंतिम सांस ली
नई दिल्ली/ मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन अब इस दुनिया में नहीं रहे। जाकिर का निधन 16 दिसंबर को हुआ है। उन्होंने 73 साल की उम्र में सैन फ्रांसिस्को में अंतिम सांस ली। जाकिर के निधन की पुष्टि उनके परिवार ने की है। जाकिर को पिछले दो हफ्ते पहले अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका निधन हो गया। जाकिर ने करीब 6 दशक के लंबे करियर में पद्म श्री,पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे कई अवॉर्ड अपने नाम किए।
भारत और विदेश में जाना-माना नाम हुसैन अपने पीछे 60 साल से ज्यादा का संगीत अनुभव छोड़ गए हैं। उन्होंने कुछ महानतम भारतीय और अंतरराष्ट्रीय संगीतकारों के साथ मंच पर तबला बजाया तथा भारतीय शास्त्रीय एवं विश्व संगीत का ‘फ्यूजन’ रचा, जिससे तबले को एक नई पहचान मिली।
महान तालवादक ने विभिन्न विधाओं और शैलियों में संगीत की रचना की। उनके प्रदर्शनों की सूची में ‘जैज’ और ‘कंसर्ट’ भी शामिल हैं। अपने पिता एवं प्रसिद्ध तबला वादक अल्ला रक्खा के संरक्षण में तबला सीखने और बजाने के बाद स्वाभाविक रूप से उनमें 'सर्व-समावेशी संगीत रचनात्मकता' का विकास हुआ। उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संगीत की शुरुआत कर दी थी। इस प्रतिभाशाली बालक ने सात साल की उम्र में अपना पहला संगीत कार्यक्रम प्रस्तुत किया और 12 साल की उम्र में ही संगीत कार्यक्रम करने लगे। मुंबई में जन्मे हुसैन अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद 1970 में अमेरिका चले गए। जब बात उनके संगीत की आती थी तो सीमाएं मायने नहीं रखती थीं।
फरवरी में, हुसैन 66वें वार्षिक ग्रैमी पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत एल्बम, सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन और सर्वश्रेष्ठ समकालीन वाद्य एल्बम के लिए तीन ग्रैमी पुरस्कार प्राप्त करने वाले भारत के पहले संगीतकार बने। हुसैन ने 2024 के ग्रैमी में ‘फ्यूजन म्युजिक ग्रुप’ ‘शक्ति’ के तहत 'दिस मोमेंट' के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत एल्बम का अपना पहला खिताब हासिल किया, जिसमें संस्थापक सदस्य ब्रिटिश गिटारवादक जॉन मैकलॉघलिन, साथ ही गायक शंकर महादेवन, वायलिन वादक गणेश राजगोपालन और तालवादक सेल्वागणेश विनायकराम शामिल हैं। बाद में उन्होंने बांसुरी वादक राकेश चौरसिया, अमेरिकी बैंजो वादक बेला फ्लेक और अमेरिकी बास वादक एडगर मेयर के साथ 'पश्तो' के लिए सर्वश्रेष्ठ वैश्विक संगीत प्रदर्शन और 'एज वी स्पीक' के लिए सर्वश्रेष्ठ समकालीन वाद्य एल्बम के लिए दो अन्य पुरस्कार जीते। पिछले वर्ष जनवरी में विश्व भ्रमण के तहत भारत आए ‘शक्ति’ के कलाकार एक बार फिर जुटे। इस कार्यक्रम को लेकर प्रशंसकों में काफी उत्साह देखा गया।
‘शक्ति’ के अलावा, हुसैन ने कई अभूतपूर्व कार्यक्रमों में भी योगदान दिया, जिनमें ‘मास्टर्स ऑफ पर्क्यूशन’, ‘प्लैनेट ड्रम’ ‘ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट विथ मिकी हार्ट’, ‘तबला बीट साइंस’ ‘संगम विथ चार्ल्स लॉयड’ और ‘एरिक हारलैंड’ और हाल में हर्बी हैनकॉक के साथ कार्यक्रम शामिल हैं।










Leave A Comment