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 केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री  ने 13 राज्यों में राष्ट्रीय सार्वजनिक औषधि वितरण अभियान का किया शुभारंभ

 नई दिल्ली। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को नई दिल्ली में लिम्फेटिक फाइलेरिया (एलएफ) बीमारी से प्रभावित 13 चिन्हित राज्यों के स्वास्थ्य मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए, बीमारी के उन्मूलन के लिए वार्षिक राष्ट्रीय सार्वजनिक औषधि वितरण (एमडीए) अभियान का शुभारंभ किया। इस अभियान में 13 राज्यों के 111 प्रभावित जिलों को शामिल किया जाएगा, जिसमें घर-घर जाकर फाइलेरिया की रोकथाम के लिए दवाइयां दी जाएंगी।

प्रतिभागियों को अभियान के संक्षिप्त विवरण, इसके उद्देश्यों, अभियान के दौरान की जा रही प्रमुख रणनीतिक गतिविधियों और एमडीए कार्यक्रम के साथ उच्च कवरेज तथा अनुपालन सुनिश्चित करने में भाग लेने वाले राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका के बारे में जानकारी दी गई।
जेपी नड्डा ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया
इस अवसर पर जेपी नड्डा ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे पीड़ित लोगों का शीघ्र निदान सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर अभियान की निगरानी करें। उन्होंने इसके लिए चिन्हित राज्य/जिला स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक नेतृत्व की व्यक्तिगत भागीदारी का भी आह्वान किया।उन्होंने कहा कि बेहतर स्व-देखभाल तक पहुंच के लिए आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) सुविधाओं में एमएमडीपी सेवाओं को पूरी तरह से शामिल करने के प्रयास चल रहे हैं और लगभग 50 प्रतिशत लिम्फोडेमा मामलों में सालाना रुग्णता प्रबंधन और विकलांगता रोकथाम (एमएमडीपी) किट प्राप्त होती हैं।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि एनएचएम के तहत, हाइड्रोसेलेक्टोमी सर्जरी का प्रावधान है और पीएमजेएवाई योजना में भी लाभार्थियों के लिए हाइड्रोसेलेक्टोमी का विकल्प है। उन्होंने बताया कि 2024 में लगभग 50 प्रतिशत हाइड्रोसेले सर्जरी चिन्हित राज्यों में की गई थी।
संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक परजीवी रोग है फाइलेरिया
लिम्फेटिक फाइलेरिया को आमतौर पर “हाथी पांव” के रूप में जाना जाता है जो संक्रमित मच्छरों से फैलने वाला एक परजीवी रोग है। यह लिम्फोएडेमा (अंगों की सूजन) और हाइड्रोसील (अंडकोष की सूजन) जैसी शारीरिक दिव्यांगताओं को जन्म दे सकता है और प्रभावित लोगों और परिवारों पर दीर्घकालिक बोझ डाल सकता है।एमडीए अभियान भारत की लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन रणनीति का मुख्य घटक है, जिसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (एनसीवीबीडीसी) चलाता है। यह कार्यक्रम घर-घर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा वितरण पर केंद्रित है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस बीमारी से पीड़ित हर व्यक्ति इस रोग को फैलने से रोकने के लिए निर्धारित दवा का सेवन करे।
13 राज्यों में चलाया जाएगा मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन अभियान
एमडीए अभियान में 13 राज्यों- आंध्र प्रदेश, असम, बिहार, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के 111 जिलों को शामिल किया जाएगा।
दवा उपचार में शामिल हैं-
मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) अभियान में एलएफ-पीड़ित क्षेत्रों में सभी पात्र लोगों को एंटी-फाइलेरिया दवाएं उपलब्ध कराना शामिल है, भले ही उनमें लक्षण दिखाई दें या नहीं। दवा उपचार में शामिल हैं:-
-डबल ड्रग रेजिमेन (डीए): डायइथाइलकार्बामेज़िन साइट्रेट (डीईसी) और एल्बेंडाज़ोल
-ट्रिपल ड्रग रेजिमेन (आईडीए): आइवरमेक्टिन, डायथाइलकार्बामेज़िन साइट्रेट (डीईसी), और एल्बेंडाज़ोल
एमडीए का लक्ष्य संक्रमित लोगों के रक्तप्रवाह में मौजूद सूक्ष्म फाइलेरिया परजीवियों को नष्ट करके एलएफ के प्रसार को कम करना है, जिससे मच्छरों द्वारा आगे संक्रमण को रोका जा सके। जबकि एमडीए दवा अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी है, इसे खाली पेट नहीं लिया जाना चाहिए।
निम्नलिखित समूह के लोगों को दवाओं का सेवन नहीं करना चाहिए-
– 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चे
– गर्भवती महिलाएं
– गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति
 
वहीं, अन्य सभी पात्र लोगों को उचित उपभोग सुनिश्चित करने तथा अपव्यय या दुरुपयोग से बचने के लिए प्रशिक्षित स्वास्थ्य कार्यकर्ता की उपस्थिति में दवा का सेवन करना चाहिए।

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