सीडीएस जनरल चौहान ने देहरादून स्थित प्रतिष्ठान संस्थान आरआईएमसी का दौरा किया
नयी दिल्ली/ प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने बुधवार को राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) का दौरा किया और देश के सशस्त्र बलों के भावी नेतृत्व को आकार देने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका को दोहराया। युद्ध की आकार लेती प्रकृति पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कैडेट से भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए तकनीकी प्रगति, रणनीतिक सोच और अनुकूलनशीलता को अपनाने का आग्रह किया। देहरादून स्थित प्रतिष्ठित सैन्य संस्थान की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के चार साल बाद हुई थी और इसे तत्कालीन प्रिंस ऑफ वेल्स ने 13 मार्च, 1922 को भारत के अपने शाही दौरे के दौरान खोला था। मूल रूप से प्रिंस ऑफ वेल्स रॉयल इंडियन मिलिट्री कॉलेज के रूप में स्थापित संस्थान का नाम स्वतंत्रता के बाद बदलकर राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज कर दिया गया, जो आरआईएमसी नाम से अपनी पहचान रखता है। रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि जनरल चौहान की यात्रा के दौरान उनका पूरे सैन्य सम्मान के साथ स्वागत किया गया। आरआईएमसी के कमांडेंट, संकाय और कैडेट ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कैडेट और शिक्षकों से बातचीत की और संस्थान में सावधानीपूर्वक संरचित प्रशिक्षण, शैक्षणिक पाठ्यक्रम और नेतृत्व विकास कार्यक्रमों के बारे में जानकारी प्राप्त की। अपने संबोधन में जनरल चौहान ने प्रतिष्ठित सैन्य अधिकारियों को तैयार करने की आरआईएमसी की विरासत की सराहना की और अनुशासन, अखंडता और राष्ट्र की सेवा के मूल्यों पर जोर दिया। उन्होंने आधुनिक शिक्षा को सैन्य परंपराओं के साथ एकीकृत करने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता की सराहना की। सीडीएस ने सोमनाथ संसाधन केंद्र और संग्रहालय का भी दौरा किया, जो आरआईएमसी के समृद्ध इतिहास और राष्ट्र के लिए इसके पूर्व छात्रों के योगदान को प्रदर्शित करता है। जनरल चौहान ने विभिन्न सैन्य अभियानों में आरआईएमसी-प्रशिक्षित अधिकारियों की भूमिका को दर्शाते हुए प्रदर्शनों में गहरी दिलचस्पी दिखाई। विकास और जुझारूपन के प्रति प्रतिबद्धता के प्रतीक के रूप में, सीडीएस ने परिसर में एक पेड़ लगाया।










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