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 शासन में महिलाओं का अधिक प्रतिनिधित्व 'विकसित भारत' के लिए महत्वपूर्ण: केंद्रीय मंत्री

 नयी दिल्ली। केंद्रीय मंत्रियों ने मंगलवार को विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए महिला सशक्तीकरण की आवश्यकता पर बल दिया और कहा कि महिला प्रतिनिधियों को स्थानीय निकायों का नेतृत्व करने के लिए आत्मविश्वास और क्षमता निर्माण की पहलों की आवश्यकता है। केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने 'सशक्त पंचायत नेत्री अभियान' को संबोधित करते हुए शासन, आर्थिक विकास और सामाजिक विकास में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘लोकतंत्र की शुरुआत जमीनी स्तर पर पंचायतों से होती है। आप वहां से विजयी होकर उभरे हैं। चुनाव जितना छोटा होता है, उतना ही चुनौतीपूर्ण होता है।''
मंत्री ने कहा, ‘‘महिला प्रतिनिधियों में आत्मविश्वास और क्षमता निर्माण पहलों की आवश्यकता है। जब उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा, तो जिस तरह महिलाएं अपने परिवारों का सफलतापूर्वक प्रबंधन करती हैं, उसी तरह वे पंचायतों का भी प्रभावी ढंग से नेतृत्व कर सकेंगी।'' ‘सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान' एक रणनीतिक पहल है जिसका उद्देश्य पंचायती राज संस्थाओं की महिला निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए क्षमता निर्माण हस्तक्षेप को मजबूत करना है। यह उनकी नेतृत्व क्षमता को धार देने, उनकी निर्णय लेने की क्षमताओं को बढ़ाने और जमीनी स्तर पर शासन में उनकी भूमिका को मजबूत करने पर केंद्रित है। सिंह ने कहा कि महिला सशक्तीकरण के बिना 'विकसित भारत' और 'आत्मनिर्भर भारत' का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा, ‘‘बिहार जैसे कई राज्यों ने (पंचायती राज संस्थाओं में) महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया है। आज, बिहार में 54 प्रतिशत से अधिक महिलाएं प्रदान किए गए आरक्षण से परे सीट जीत रही हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘देश के 20 से अधिक राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण है। महिला सशक्तीकरण के बिना विकसित भारत असंभव है।'' उन्होंने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री के रूप में रेखा गुप्ता का चुनाव यह संदेश देता है कि महिलाएं राज्यों के साथ-साथ देश का नेतृत्व भी कर सकती हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महिला सशक्तीकरण का मतलब सिर्फ समानता नहीं है, बल्कि यह आर्थिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रगति में एक महत्वपूर्ण कारक है। महिला सशक्तीकरण को सिर्फ नारा नहीं बल्कि इस सरकार की विचारधारा बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘हम हर क्षेत्र में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। महिलाओं के नेतृत्व में विकास अब एक विकल्प नहीं बल्कि भारत के विकास के लिए एक आवश्यकता है।'' देवी ने एक व्यापक महिला विकास मॉडल के साथ ही हितधारकों से नीतियों को जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन से जोड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘हम आपसे महिलाओं की शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करने का आग्रह करते हैं। भारत की प्रगति के लिए महिला नीत विकास बहुत जरूरी है।'' केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री रक्षा निखिल खडसे ने राजनीति में अपने सफर को साझा किया, जिसकी शुरुआत 20 साल की उम्र में ग्राम पंचायत सदस्य के रूप में हुई थी। उन्होंने कहा, ‘‘अक्सर महिला प्रतिनिधियों को नाममात्र की भूमिकाओं तक सीमित रखा जाता है, जबकि उनके परिवार के सदस्य वास्तविक काम संभालते हैं। यह बंद होना चाहिए। आरक्षण ने हमें यह साबित करने का अवसर दिया है कि हम अपने गांवों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व कर सकती हैं।'' खडसे ने कहा, ‘‘मेरा दृढ़ विश्वास है कि इस देश की महिलाएं भारत को आगे ले जाएंगी।''
 केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री एस पी सिंह बघेल ने नेतृत्व की भूमिकाओं में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, ‘‘बिहार में, मुखिया पति है, उत्तर प्रदेश में प्रधान पति और मध्य प्रदेश में सरपंच पति हैं। परिवार के पुरुष सदस्य अक्सर महिलाओं के नेतृत्व को कमतर आंकते हैं।'' उन्होंने कहा, ‘‘निर्वाचित प्रतिनिधियों के रूप में अपनी भूमिका के पांच वर्षों में, महिलाओं को अपना आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका मिलता है, जिससे सार्वजनिक रूप से बोलने को लेकर उनका भय कम हो जाता है और वे सार्वजनिक कार्यों में सक्रिय रूप से भाग लेती हैं।''  
 

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