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नड्डा ने चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम में नवीनतम प्रौद्योगिकी को शामिल किए जाने का समर्थन किया

नयी दिल्ली.  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने संशोधित चिकित्सा शिक्षा पाठ्यक्रम में नवीनतम प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ‘टेलीमेडिसिन' (आमतौर पर टेलीफोन या इंटरनेट के जरिए चिकित्सा संबंधी परामर्श देने की सुविधा) को शामिल किए जाने का समर्थन किया है। नड्डा ने बजट के बाद बुधवार को स्वास्थ्य मंत्राालय द्वारा आयोजित वेबिनार श्रृंखला में एक ऐसा पाठ्यक्रम बनाए जाने की बात की जो अधिक जीवंत, सार्थक और वर्तमान चुनौतियों के अनुकूल हो तथा मौजूदा बुनियादी ढांचे और चिकित्सा संकाय का इष्टतम उपयोग कर सके। उन्होंने मेडिकल छात्रों में सहानुभूति, नैतिकता और संचार कौशल को बढ़ावा देने के लिए ‘सॉफ्ट स्किल्स' को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘‘सबसे बड़ा निवेश लोगों में किया जाने वाला निवेश है।'' नड्डा ने रेखांकित किया कि सरकार ऐसे ‘‘समग्र दृष्टिकोण'' के साथ काम कर रही है जो न केवल उपचार संबंधी पहलू पर बल्कि रोगी की देखभाल के लिए निवारक, पीड़ा को कम करने और पुनर्वास संबंधी दृष्टिकोण पर भी ध्यान केंद्रित करता है। उन्होंने कहा, ‘‘हम लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के मकसद से आयुष और अन्य चिकित्सा प्रणालियों को भी शामिल करने का प्रयास कर रहे हैं।'' नड्डा ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘चूंकि कैंसर का उपचार एक लंबी प्रक्रिया है, जिसमें कीमोथैरेपी का लंबा चक्र शामिल है, इसलिए सरकार कीमोथैरेपी सत्रों के बाद मरीजों की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए बड़े अस्पतालों के बजाय ‘डे केयर कैंसर केंद्रों' पर ध्यान केंद्रित कर रही है।'' उन्होंने कहा कि सरकार अगले तीन वर्ष में सभी जिला अस्पतालों में ‘डे केयर कैंसर' केंद्र स्थापित करेगी और इनमें से 200 केंद्र इसी वर्ष स्थापित किए जाएंगे। नड्डा ने चिकित्सा स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करने के महत्व को रेखांकित करते हुए मेडिकल कॉलेजों में नयी सीट सृजन की बजट घोषणाओं को दोहराया और 1.75 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से लोगों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की उपलब्धता और पहुंच सुनिश्चित करने के सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। मंत्री ने कहा कि मेडिकल कॉलेज की संख्या 2014 में 387 से बढ़कर अब 780 हो गई है और इस दौरान स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए सीट की संख्या में 130 प्रतिशत और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों के लिए सीट की संख्या में 135 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

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