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इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल पर 67 रुपये प्रति घंटे की दर पर जीपीयू उपलब्ध होंगेः वैष्णव

नयी दिल्ली. इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को कहा कि इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल पर जीपीयू (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट) 67 रुपये प्रति घंटे की दर से उपलब्ध होंगे। वैष्णव ने देश में कृत्रिम मेधा (एआई) के लिए अनुकूल हालात बनाने के लिए शुरू किए गए इंडियाएआई मिशन की पहली वर्षगांठ पर इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल और डेटासेट मंच एआईकोष सहित कई पहल की शुरुआत की। इनका उद्देश्य एआई तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना और नवाचार को आगे बढ़ाना है। इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल छात्रों, स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और सरकारी विभागों को 18,000 से अधिक जीपीयू, क्लाउड स्टोरेज और अन्य एआई सेवाओं तक पहुंच प्रदान करेगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘आज हमारे पास 14,000 जीपीयू के लिए एक समान कंप्यूटिंग सुविधा है, जो हमारे लक्ष्य से कहीं अधिक है। हमने 10,000 जीपीयू का लक्ष्य रखा था। हमारे पास पहले से ही 14,000 जीपीयू मौजूद हैं और अभी 4,000 अन्य निर्माणाधीन हैं। आगामी तिमाहियों में और भी बहुत कुछ आएगा।'' उन्होंने बताया कि इन जीपीयू का उपयोग करने की लागत ऐतिहासिक रूप से बेहद कम महज 67 रुपये प्रति घंटे है। इससे स्टार्टअप, एप्लिकेशन डेवलपर, शोधकर्ताओं और छात्रों को बहुत फ़ायदा होगा। वैष्णव ने कहा कि इंडियाएआई कंप्यूट पोर्टल का उपयोग भारत के अपने आधारभूत मॉडल को विकसित करने के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के अपने आधारभूत मॉडल के लिए तैयारी अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और इसके लिए कुल 67 आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन्होंने भारत के किफायती चंद्र अभियान का हवाला देते हुए कहा कि आधारभूत एआई मॉडल के लिए भी यही तरीका अपनाया जाएगा और भारत इसे अन्य देशों की तुलना में बहुत कम लागत पर बनाएगा। वैष्णव ने इस अवसर पर एआईकोष की भी शुरुआत की जो एक ‘ऑल-इन-वन' डेटासेट मंच है जो संभावित विचारों को उद्योग समाधानों में बदलने में मदद करने के लिए संसाधन, उपकरण और विशेषज्ञ सलाह प्रदान करता है। ये डेटासेट मॉडल बिल्डर और डेवलपर के लिए उपलब्ध होंगे, ताकि वे भारत-विशिष्ट एआई मॉडल के साथ काम कर सकें और उन्हें पेश कर सकें। इस मौके पर इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी सचिव एस कृष्णन ने कहा कि कंप्यूट पोर्टल की पेशकश से देशभर में एआई को लागू करने और लागू करने के तरीके में सुधार होगा। कृष्णन ने कहा, ‘‘एआई कंप्यूट पोर्टल भारत एआई मिशन का सबसे बड़ा घटक है। इस मिशन का लगभग 45 प्रतिशत कोष उस विशेष क्षेत्र के लिए निर्धारित है।'' इसके अलावा मंत्रालय ने एआई और सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारियों के लिए एक योग्यता ढांचा और इंडिया एआई स्टार्टअप्स ग्लोबल एक्सेलेरेशन कार्यक्रम शुरू किया। मंत्रालय ने इंडिया एआई फेलोशिप कार्यक्रम के तहत छात्रों को पुरस्कृत भी किया और 30 चयनित एआई अनुप्रयोगों को मान्यता दी। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पिछले साल मार्च में 10,371.92 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ इंडिया एआई मिशन को मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से एआई नवाचार को उत्प्रेरित करने वाला एक व्यापक पारिस्थितिकी ढांचा खड़ा करना है।

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