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आत्महत्या रोकने के लिए आईआईटी-गुवाहाटी संकाय सदस्यों के साथ सुबह की सैर एवं अन्य कदम उठाएगा

 नयी दिल्ली. नये विद्यार्थियों के वास्ते गुवाहाटी के भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) ने पहले सप्ताह में परिसर में परिसंवाद सत्र, संकाय सदस्यों के साथ सुबह की सैर, अनिवार्य परामर्श सत्र और व्यापक चिकित्सा जांच तथा तनाव से मुक्ति के लिए कार्यशालाओं के आयोजन की योजना बनायी है ताकि विद्यार्थियों का मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके और आत्महत्या को रोका जा सके। संस्थान में पिछले सेमेस्टर में लगातार कुछ विद्यार्थियों के आत्महत्या कर लेने बाद हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद ये कदम उठाये गये हैं। आईआईटी-गुवाहाटी के निदेशक देवेंद्र जलिहाल के अनुसार, संस्थान ने विद्यार्थियों की आत्महत्या की रोकथाम के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। उन्होंने बताया, ‘‘हमने समग्र कल्याण केंद्र के रूप में एक समर्पित मानसिक स्वास्थ्य और परामर्श प्रणाली शुरू की है। इस केंद्र का एक हिस्सा साथी परामर्श क्लब है, जिसमें छात्र स्वयंसेवक पेशेवर परामर्शदाताओं की मदद से अन्य विद्यार्थियों को उनके मानसिक और समग्र कल्याण में सहायता करते हैं।'' जलिहाल ने कहा, ‘‘हम सेवानिवृत्त सैन्यकर्मियों को छात्रावास के विशेष प्रबंधक के रूप में नियुक्त करने पर विचार कर रहे हैं, जो नियमित रूप से विद्यार्थियों से बातचीत करेंगे, ताकि उन्हें सहज महसूस हो और फिर ये प्रबंधक अपना अनुभव परामर्शदाताओं के साथ साझा करें। यह सब गोपनीय तरीके से किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी भयभीत न हों या उनकी निजता का उल्लंघन न हो।'' उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को चिंता और तनाव से निपटने में मदद के लिए आहार विशेषज्ञों की भी नियुक्ति की जा रही है। विद्यार्थियों में आत्महत्या की बढ़ती प्रवृत्ति को देखते हुए, कई आईआईटी उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के लिए अलग-अलग उपाय कर रहे हैं। सितंबर में उत्तर प्रदेश के तीसरे वर्ष के कंप्यूटर विज्ञान के छात्र की कथित आत्महत्या के बाद आईआईटी-गुवाहाटी के विद्यार्थियों ने जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया था तथा इस घटना के संबंध में न्याय और सभी के लिए उचित मानसिक स्वास्थ्य सहायता की मांग की थी। यह 2024 में इस प्रकार की चौथी घटना (आत्महत्या) थी।

 
आईआईटी-गुवाहाटी में छात्र मामलों के डीन पेरुमल अलगरसामी परिसर में मानसिक कल्याण पहल की अगुवाई कर रहे हैं। अलगरसामी ने  कहा, ‘‘हमने निर्णय लिया है कि पहले सप्ताह में जब नए विद्यार्थी परिसर में आएंगे तो उनके लिए कक्षाएं नहीं होंगी, बल्कि एक अनुकूलन कार्यक्रम होगा, ताकि वे खुद को असहज महसूस न करें। विद्यार्थियों को संकाय सदस्यों के साथ सुबह की सैर के लिए आमंत्रित किया जाएगा, ताकि कक्षा में प्रवेश करने से पहले वे एक-दूसरे के साथ तालमेल बना सकें।'' उन्होंने कहा कि ‘पीयर मेंटरशिप कार्यक्रम' के तहत मेंटर नियुक्त जायेंगे जो नये विद्यार्थियों को प्रासंगिक जानकारी प्रदान करने, संदेहों को दूर करने और विभिन्न चुनौतियों में सहायता करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे तथा जब नए विद्यार्थी खुद को खोया हुआ महसूस करेंगे तो उनके लिए मार्गदर्शक के रूप में काम करेंगे। अलगरसामी ने बताया कि जैसे ही नए विद्यार्थी परिसर में पहुंचेंगे, एक गर्मजोशीपूर्ण और समावेशी माहौल स्थापित करने तथा आपसी संपर्क को सुगम बनाने के लिए एक अंतर्संवाद सत्र आयोजित किया जायेगा। विद्यार्थियों को सेमेस्टर परीक्षाओं के दबाव से निपटने में मदद करने के लिए, साथी परामर्श क्लब ने हाल में एक तनाव निवारण कार्यशाला का आयोजन किया, जिसका उद्देश्य तनाव से निपटने और उसे प्रबंधित करने तथा उद्यमिता और कैरियर विकल्पों की खोज करने के बारे में ज्ञान साझा करना था।

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