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पीएमएसबीवाई के तहत अब तक 55.2 करोड़ जन-धन खाते खोले गए : वित्त मंत्रालय

 नई दिल्ली।  वित्त मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत 7 मार्च 2025 तक कुल 55.02 करोड़ जन-धन खाते खोले जा चुके हैं, जिनमें से 36.63 करोड़ खाते ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में हैं। वहीं, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत 7 मार्च 2025 तक कुल 50.30 करोड़ नामांकन हैं। इसके अलावा अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, स्टैंड अप इंडिया योजना और अन्य वित्तीय समावेशन योजनाओं में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया, केंद्र सरकार ने अगस्त, 2014 में प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के नाम से राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन (एनएमएफआई) की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य बैंकिंग सुविधा से वंचित हर वयस्क को बैंकिंग सुविधाएं प्रदान करना, असुरक्षित को सुरक्षित करना, अवित्तपोषित को वित्तपोषित करना और वंचित व कम सुविधा वाले क्षेत्रों में सेवा प्रदान करना है।
उन्होंने पीएमजेडीवाई के अलावा अन्य वित्तीय समावेशन योजनाओं के बारे में बताया। विशेष रूप से हाशिए पर रह रहे और कम सुविधा वाले लोगों को सस्ती वित्तीय सेवाएं प्रदान करने के लिए निम्नलिखित योजनाएं भी शुरू की गई हैं, जो इस प्रकार हैं।प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई)-यह योजना एक-वर्षीय व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा योजना है, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जा सकता है। इसमें दुर्घटना के कारण मृत्यु या स्थायी पूर्ण विकलांगता के लिए 2 लाख रुपये और स्थायी आंशिक विकलांगता के लिए 1 लाख रुपये का कवरेज 20 रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम पर दिया जाता है। यह योजना 18 से 70 वर्ष की आयु के उन लोगों के लिए है, जिनके पास बैंक खाता है और जो इस योजना में शामिल होने के लिए अपनी सहमति देते हैं। अब तक पीएमएसबीवाई के अंतर्गत कुल नामांकन 50.30 करोड़ हैं।
प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई)– यह योजना एक-वर्षीय जीवन बीमा योजना है, जिसे हर साल नवीनीकृत किया जा सकता है। इसमें किसी भी कारण से मृत्यु होने पर 436 रुपये प्रति वर्ष के प्रीमियम पर दो लाख रुपये का कवरेज दिया जाता है। यह योजना 18 से 50 वर्ष की आयु के उन लोगों के लिए है, जिनके पास बैंक खाता है और जो इस योजना में शामिल होने के लिए अपनी सहमति देते हैं। अब तक पीएमजेजेबीवाई के अंतर्गत कुल नामांकन 23.21 करोड़ हैं।
अटल पेंशन योजना– इस योजना का उद्देश्य 18 से 40 वर्ष की आयु के पात्र ग्राहकों को मासिक पेंशन प्रदान करना है, जो किसी भी संगठित पेंशन योजना के अंतर्गत नहीं आते हैं। इस योजना के अंतर्गत, ग्राहकों को योगदान के आधार पर 60 वर्ष की आयु में 1000 रुपये, 2000 रुपये, 3000 रुपये, 4000 रुपये और 5000 रुपये प्रति माह की निर्धारित न्यूनतम पेंशन मिलेगी। इस योजना के अंतर्गत अबतक कुल नामांकन 7.49 करोड़ हैं।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई)-यह योजना विनिर्माण, व्यापार, सेवाओं, कृषि से संबंधित गतिविधियों जैसी आय निर्माण गतिविधियों के लिए सूक्ष्म/ लघु व्यवसाय इकाइयों को 20 लाख रुपये तक के संस्थागत वित्त तक पहुंच प्रदान करती है। योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 28.02.2025 तक 33.19 लाख करोड़ रुपये की राशि के 52.07 करोड़ लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
स्टैंड अप इंडिया योजना (एसयूपीआई)-इस योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति के लोगों और महिलाओं के बीच उद्यमशीलता को प्रोत्साहन देना है। यह योजना व्यापार, विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में ग्रीनफील्ड उद्यम स्थापित करने के लिए अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की प्रत्येक शाखा से एक अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति उधारकर्ता और एक महिला उधारकर्ता को 10 लाख रुपये से 1 करोड़ रुपये के बीच बैंक ऋण की सुविधा प्रदान करती है। 7 मार्च 2025 तक, योजना की शुरुआत से लेकर अब तक 60,504 करोड़ रुपये की राशि के 2.67 लाख लोन स्वीकृत किए जा चुके हैं।
पीएम विश्वकर्मा योजना-यह योजना 17 सितम्बर, 2023 को शुरू की गई थी। इस योजना का संचालन लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) तथा कौशल विकास एवं उद्यम मंत्रालय और वित्तीय सेवाएं विभाग की ओर से संयुक्त रूप से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कौशल प्रशिक्षण, संपार्श्विक-मुक्त ऋण, आधुनिक उपकरण, बाजार संपर्क सहायता और डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहन तक पहुंच के जरिए 18 चिह्नित व्यवसायों में लगे पारंपरिक कलाकारों और शिल्पकारों को संपूर्ण सहयोग देना है।
प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि(पीएमस्वानिधि): इस योजना का संचालन आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (एमओएचयूए) की ओर से किया जा रहा है। इसे 1 जून, 2020 को कोविड-19 लॉकडाउन से प्रभावित स्ट्रीट वेंडर्स को राहत प्रदान करने के मुख्य उद्देश्य से लॉन्च किया गया था। इस योजना का उद्देश्य न केवल स्ट्रीट वेंडर्स को लोन देकर उन्हें सशक्त बनाना है, बल्कि उनके समग्र आर्थिक विकास के लिए भी काम करना है।
वहीं दूसरी ओर समय-समय पर विभिन्न वित्तीय समावेशन योजनाओं के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इन योजनाओं के तहत अधिक लोगों को नामांकित करने के लिए ग्राम स्तर पर शिविर आयोजित किए जाते हैं।

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