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2025 में देश में 166 बाघों की मौत, मध्यप्रदेश में सर्वाधिक 55 बाघों ने गंवाई जान

 भोपाल.  देश में वर्ष 2025 के दौरान विभिन्न कारणों से कुल 166 बाघों की मौत हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 40 अधिक है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के ताजा आंकड़ों में यह जानकारी सामने आई। आंकड़ों के अनुसार, देश का ‘टाइगर स्टेट' कहा जाने वाला मध्यप्रदेश बाघों की मौत के मामलों में शीर्ष पर रहा, जहां वर्ष 2025 में 55 बाघ मृत पाए गए। इसके बाद महाराष्ट्र में 38, केरल में 13 और असम में 12 बाघों की मौत दर्ज की गई।
इन 166 मृत बाघों में 31 शावक शामिल हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाघों के बीच क्षेत्रीय संघर्ष मौत का प्रमुख कारण रहा है, जिसका मुख्य कारण जंगलों में स्थान की कमी है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में देश में 126 बाघों की मौत हुई थी जबकि 2025 में यह संख्या बढ़कर 166 हो गई। महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी वन मंडल में वर्ष 2025 में बाघ की पहली मौत दो जनवरी को दर्ज की गई, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। इसके तीन दिन बाद मध्यप्रदेश के पेंच बाघ अभयारण्य में एक मादा बाघ की मौत हुई। हालिया मामला 28 दिसंबर को मध्यप्रदेश के सागर के उत्तर क्षेत्र से सामने आया, जहां एक वयस्क नर बाघ मृत पाया गया। बाघों पर लंबे समय से शोध कर रहे वन्यजीव विशेषज्ञ जयराम शुक्ला ने कहा कि देश में बाघों की आबादी संतृप्ति स्तर पर पहुंच रही है। उन्होंने कहा, “बाघों के लिए क्षेत्र तय करने की जगह सीमित होती जा रही है। इसी वजह से वे आपस में संघर्ष कर रहे हैं और इसकी कीमत जान देकर चुका रहे हैं।” मध्यप्रदेश के संदर्भ में शुक्ला ने बताया कि वर्ष 2014 के बाद से राज्य में बाघों की संख्या में लगभग 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया, “यह वृद्धि अभूतपूर्व है। सवाल यह है कि इतने बाघों के लिए क्षेत्र कहां है? मध्यप्रदेश में आबादी तेजी से बढ़ने के कारण संघर्ष और मौतें भी बढ़ी हैं।” अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस 2023 पर जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश में बाघों की संख्या 2018 में 2,967 थी, जो 2022 में बढ़कर 3,682 हो गई। इसमें सालाना करीब छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
अधिकारियों के अनुसार, दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत बाघ आबादी भारत में पाई जाती है।
 इस संबंध में मध्यप्रदेश के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) सुभारंजन सेन ने बताया कि राज्य में बाघों की संख्या सबसे अधिक होने के कारण यहां मौतों की संख्या भी अपेक्षाकृत ज्यादा है। उन्होंने बताया, “हम मरने वाले हर बाघ की निगरानी करते हैं और प्रत्येक मामले की गहन जांच की जाती है। शिकार से जुड़े मामलों में दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाती।” सेन ने बताया कि विभाग के पास मजबूत ‘फील्ड पेट्रोलिंग सिस्टम' है और एनटीसीए द्वारा निर्धारित सभी मानक संचालन प्रक्रियाओं का पालन किया जाता है। उन्होंने बताया, “हर बाघ की मौत को तब तक शिकार का मामला माना जाता है, जब तक इसके विपरीत ठोस साक्ष्य न मिल जाएं।” अधिकारी ने बताया कि राज्य में प्रभावी ‘स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स' (एसटीएसएफ) भी कार्यरत है, जो इंटरपोल रेड कॉर्नर नोटिस से जुड़े मामलों सहित संगठित वन्यजीव अपराध के खिलाफ सफलतापूर्वक काम कर रही है। सेन के अनुसार, मध्यप्रदेश में वर्ष 2014 में बाघों की संख्या 308 थी, जो 2018 में बढ़कर 526 और 2022 में 785 हो गई। उन्होंने बताया कि हर चार वर्ष में होने वाली देशव्यापी बाघ गणना इस वर्ष शुरू हो चुकी है और मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या में वृद्धि होने की संभावना है। सेन ने बताया कि अब तक शिकार के 10 मामलों में 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया है और कानूनी कार्रवाई जारी है।

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