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नॉर्थ–साउथ ब्लॉक से सेवा तीर्थ और कर्तव्य भवनों तक: शासन का नया अध्याय

 नई दिल्ली।  केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का क्षण है। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा और गढ़ा है।

 मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के उद्देश्य से किया था। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी इन भवनों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए जारी रहा और स्वतंत्रता के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा।
 उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठकों के महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं। इन सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह रहे हैं, जिनके निर्णयों ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। दशकों से यहां संविधान के आदर्शों, जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
 अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की त्रासदी, युद्ध और आपातकाल जैसी चुनौतियों के साथ शांतिकाल की नीतियों पर चिंतन भी देखा है। इस परिसर ने टाइपराइटर से डिजिटल गवर्नेंस तक तकनीक की लंबी यात्रा को महसूस किया है। यहां लिए गए फैसलों ने देश को स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया।
 उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में यह परिसर कई ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। यहीं से डीबीटी, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को गति मिली। इसी स्थान से आर्टिकल-370 से संबंधित निर्णय, तीन तलाक कानून, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे अहम फैसले लिए गए, जिन्होंने भारत की दृढ़ सुरक्षा नीति का संदेश दिया।
 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भविष्य की दिशा में बढ़ते भारत को एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण-अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी, जो कर्मयोगियों की उत्पादकता बढ़ाए और सेवाभाव को सशक्त करे। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद सरकार ने इन भवनों को खाली कर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण किया है। यह कदम गुलामी के अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर प्रतीकात्मक प्रगति है।
 मंत्रिमंडल ने यह भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने शनिवार को नॉर्थ ब्लॉक और साउथ ब्लॉक से ‘सेवा तीर्थ’ व ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि साउथ ब्लॉक में अंतिम बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। उन्होंने कहा कि यह केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि इतिहास और भविष्य के संगम का क्षण है। इस परिसर ने गुलामी से आजादी और स्वतंत्र भारत की अनेक ऐतिहासिक घटनाओं को देखा और गढ़ा है। मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए अश्विनी वैष्णव ने कहा कि नरेंद्र मोदी की ओर से नया प्रधानमंत्री कार्यालय, जिसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया है, राष्ट्र को समर्पित किया गया है। उन्होंने कहा कि साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण अंग्रेजों ने भारत को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े रखने के उद्देश्य से किया था। 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद भी इन भवनों का उपयोग प्रशासनिक कार्यों के लिए जारी रहा और स्वतंत्रता के बाद से प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक से संचालित होता रहा।
 उन्होंने कहा कि इस परिसर ने देश के 16 प्रधानमंत्रियों के नेतृत्व में हुई कैबिनेट बैठकों के महत्वपूर्ण फैसले देखे हैं। इन सीढ़ियों पर जवाहरलाल नेहरू से लेकर नरेंद्र मोदी तक के पदचिन्ह रहे हैं, जिनके निर्णयों ने देश को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया। दशकों से यहां संविधान के आदर्शों, जनादेश और राष्ट्र की आकांक्षाओं से प्रेरित होकर अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
 अश्विनी वैष्णव ने कहा कि साउथ ब्लॉक के इन कमरों ने विभाजन की त्रासदी, युद्ध और आपातकाल जैसी चुनौतियों के साथ शांतिकाल की नीतियों पर चिंतन भी देखा है। इस परिसर ने टाइपराइटर से डिजिटल गवर्नेंस तक तकनीक की लंबी यात्रा को महसूस किया है। यहां लिए गए फैसलों ने देश को स्वतंत्रता के बाद की अनिश्चितता से निकालकर स्थिरता की राह पर आगे बढ़ाया।
 उन्होंने कहा कि बीते एक दशक में यह परिसर कई ऐतिहासिक निर्णयों का केंद्र रहा। यहीं से डीबीटी, स्वच्छ भारत अभियान, डिजिटल इंडिया और जीएसटी जैसे व्यापक सुधारों को गति मिली। इसी स्थान से आर्टिकल-370 से संबंधित निर्णय, तीन तलाक कानून, सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक जैसे अहम फैसले लिए गए, जिन्होंने भारत की दृढ़ सुरक्षा नीति का संदेश दिया।
 केंद्रीय मंत्री ने कहा कि विकसित भविष्य की दिशा में बढ़ते भारत को एक आधुनिक, तकनीकी और पर्यावरण-अनुकूल कार्यालय की आवश्यकता थी, जो कर्मयोगियों की उत्पादकता बढ़ाए और सेवाभाव को सशक्त करे। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के उद्घाटन के लगभग 95 वर्ष बाद सरकार ने इन भवनों को खाली कर ‘सेवा तीर्थ’ और ‘कर्तव्य भवनों’ में स्थानांतरण किया है। यह कदम गुलामी के अतीत से विकसित भारत के भविष्य की ओर प्रतीकात्मक प्रगति है। मंत्रिमंडल ने यह भी संकल्प लिया कि नॉर्थ और साउथ ब्लॉक को ‘युगे युगीन भारत राष्ट्रीय संग्रहालय’ का हिस्सा बनाया जाएगा। यह संग्रहालय भारत की हजारों वर्ष पुरानी सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा।

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