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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द

भोपाल. मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर हो रहे चुनाव में मंगलवार को उस समय नाटकीय मोड़ आ गया, जब शपथपत्र में जानकारी छुपाने के आरोप में कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द कर दिया गया। मध्यप्रदेश विधानसभा के एक अधिकारी ने ' एक न्यूज़ एजेंसी' को बताया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवार महेश केवट ने निर्वाचन अधिकारी (रिटर्निंग अधिकारी) के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी कि नटराजन ने जानबूझकर अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मुकदमे का शपथ पत्र में कोई उल्लेख नहीं किया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद निर्वाचन अधिकारी ने नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया। निर्वाचन अधिकारी का यह फैसला ऐसे दिन आया जब 'क्रॉस वोटिंग' से बचने और अपने खेमे को एकजुट रखने के मकसद से कांग्रेस ने अपने 35 विधायकों का पहला जत्था एक विशेष विमान से पार्टी शासित कर्नाटक के लिए रवाना कर दिया था जबकि दूसरे जत्थे को मंगलवार शाम को बेंगलुरु जाना था। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की तीन सीट के लिए 18 जून को चुनाव होना है। सोमवार को नामांकन की आखिरी तारीख थी जबकि आज नामांकन पत्रों की जांच की गई। भाजपा प्रत्याशी महेश केवट के अधिवक्ता संकेत गुप्ता ने विधानसभा में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेलंगाना की एक अदालत में नटराजन के खिलाफ एक आपराधिक मामला लंबित है और शपथपत्र में इसका उल्लेख नहीं है। उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथपत्र में सभी आपराधिक मामलों का उल्लेख किया जाना जरूरी है लेकिन नटराजन ने जानबूझकर इसे छुपाया। गुप्ता ने कहा कि निर्वाचन अधिकारी ने इसी आधार पर नटराजन का नामांकन निरस्त कर दिया है।राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे न्याय की जीत बताया और कहा कि भाजपा ने संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। गुप्ता ने बताया कि नटराजन ने इस आपराधिक मामले में अदालत में अपना जवाब भी दाखिल किया है लेकिन शपथ पत्र में इसका उल्लेख नहीं किया। उन्होंने कहा, ''इस जानकारी को जानबूझकर छुपाया गया है। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देशों के मुताबिक शपथ पत्र में आपको यह जानकारी देनी होती है।" कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने नटराजन के नामांकन को निरस्त किए जाने पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि यह अब 'वोट चोरी' का मामला नहीं रहा, बल्कि 'सीट चोरी' का मामला बन गया है। राज्यसभा सदस्य तन्खा ने कहा कि उन्होंने स्वयं नामांकन पत्रों की जांच की है और उसमें ऐसी कोई भी जानकारी छिपाई नहीं गई थी, जिसे घोषित किया जाना आवश्यक हो। उन्होंने कहा, ''उनके (नटराजन) खिलाफ कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं थी। केवल दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 223 के तहत एक नोटिस था, जिसमें एक आवेदक ने दावा किया था कि उन्हें और अन्य लोगों को 10 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाना चाहिए। मीनाक्षी नटराजन ने उस नोटिस पर आपत्ति दर्ज करते हुए कहा था कि यह नोटिस उन्हें भेजा ही नहीं जा सकता, क्योंकि उनका उस मामले से कोई संबंध नहीं है।'' तन्खा ने कहा, ''न कोई अपराध दर्ज था, न कोई प्राथमिकी थी और न ही कोई विधिक प्रकरण लंबित था। ऐसे में वे आखिर कौन-सी बात एफआईआर या न्यायिक प्रकरण के रूप में घोषित किया गया, केवल किसी अदालत द्वारा नोटिस जारी कर देना अपने आप में कोई मामला या अपराध सिद्ध नहीं करता।'' कांग्रेस नेता ने दावा किया कि बिना किसी विधिक प्रकरण के एक ऐसी असामान्य स्थिति बना दी गई, जिसके आधार पर भोपाल के निर्वाचन अधिकारी ने एक राष्ट्रीय पार्टी के विजयी उम्मीदवार को पराजित कर दिया। उन्होंने कहा, ''यह अत्यंत दुखद है। यह लोकतंत्र की हत्या है।''
 तन्खा ने कहा कि मौजूदा परिस्थिति में चुनाव याचिका दायर की जा सकती है, लेकिन विशेष परिस्थितियों में पार्टी को सीधे उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाना चाहिए। उन्होंने ने कहा, ''इस पूरे मामले को बेनकाब करना चाहिए और जिम्मेदार लोगों को उजागर करना चाहिए। यदि लोकतंत्र में इस प्रकार नामांकन पत्रों को निरस्त करने का सिलसिला शुरू हो गया, तो इस देश में लोकतंत्र नहीं बचेगा। यह लोकतंत्र के अंत की शुरुआत होगी।'' राज्य में राज्यसभा की खाली हुई जिन तीन सीट पर चुनाव चुनाव हो रहे हैं, उनमें से दो पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जीत तय मानी जा रही है जबकि संख्या बल के लिहाज से तीसरी सीट पर कांग्रेस का पलड़ा भारी है। भाजपा ने राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ और राज्य इकाई के सचिव रजनीश अग्रवाल को मैदान में उतारा है और तीसरी सीट पर मध्यप्रदेश मछुआरा कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष महेश केवट पर दांव लगाया है। वर्तमान में मध्यप्रदेश की कुल 230 सदस्यीय विधानसभा में सदस्यों की संख्या 229 है। इनमें भाजपा के 164 और कांग्रेस के 64 विधायक हैं जबकि एक सीट भारत आदिवासी पार्टी के पास है। दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द हो चुकी है, जिस वजह से एक सीट रिक्त है। श्योपुर जिले के विजयपुर से विधायक मुकेश मल्होत्रा के मतदान पर उच्च न्यायालय की रोक है।
 राज्यसभा की तीन सीट पर मतदान होने की स्थिति में प्रत्येक उम्मीदवार को जीत के लिए 58 वोटों की जरूरत होगी।
 

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